कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 11 — चेतक की वीरता प्रश्न उत्तर और भावार्थ
चेतक की वीरता प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 11 की कविता का सार, सात पदों का भावार्थ, शब्दार्थ, सही मिलान, तुकांत शब्द और सभी गतिविधियों के हल पढ़ें। कल्पनात्मक तथा समूह-कार्य के उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 11 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 122–127, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवि परिचय – श्यामनारायण पाण्डेय
श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) वीर रस के कवि थे। पाठ्यपुस्तक के अनुसार उनकी काव्यकृति हल्दीघाटी 1939 में प्रकाशित हुई। यह कविता उसी का अंश है। पुस्तक इस कृति के स्वतंत्रता-संग्राम के अंतिम वर्षों में एकता और उत्साह जगाने के प्रभाव का उल्लेख करती है।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त एवं वीर घोड़े ‘चेतक’ की अद्भुत फुर्ती, स्वामिभक्ति एवं वीरता का सजीव चित्रण करती है।
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा को पाला था॥
गिरता न कभी चेतक-तन पर
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर
या आसमान पर घोड़ा था॥
जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था॥
कौशल दिखलाया चालों में
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौड़ा करवालों में॥
है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं॥
बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।
विकराल वज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया॥
भाला गिर गया, गिरा निषंग,
हय-टापों से खन गया अंग।
वैरी-समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग॥
— श्यामनारायण पाण्डेय
कविता को कैसे पढ़ें: हवा से प्रतियोगिता, आकाश में दौड़ना और बादल बनकर टूट पड़ना चेतक की गति और साहस के काव्यात्मक वर्णन हैं। घोड़ा सचमुच उड़ता या बादल नहीं बनता। कविता की प्रशंसा और इतिहास की तथ्य-जाँच अलग कार्य हैं।
सार
‘चेतक की वीरता’ कविता वीर-रस के कवि श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है। इस कविता में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त एवं अत्यंत वीर घोड़े ‘चेतक’ की वीरता, फुर्ती एवं चपलता का सजीव वर्णन हुआ है। कवि कहते हैं कि चेतक रणभूमि के बीच इस प्रकार चौकड़ी भरता (छलाँगें लगाता) था कि वह सबसे निराला एवं अनोखा बन गया था। उसकी गति इतनी तेज थी कि हवा भी उसके सामने पीछे रह जाती थी।
चेतक राणा प्रताप के संकेत को इतनी जल्दी समझ लेता था कि कोड़ा कभी उसके शरीर पर पड़ता ही नहीं था। कवि उसे शत्रुओं के सिर के ऊपर से दौड़ता बताते हैं; कभी ऐसा लगता मानो आकाश में दौड़ रहा हो। लगाम के ज़रा-सा हिलते ही वह अपने सवार को लेकर हवा में उड़ जाता था और राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह मुड़ जाता था। उसने युद्ध की चालों में अद्भुत कौशल दिखाया – वह भयानक भालों, ढालों एवं तलवारों के बीच निडर होकर सरपट दौड़ता रहा।
चेतक की गति इतनी तीव्र थी कि वह क्षण-भर में यहाँ-वहाँ दिखाई देता और तुरंत ओझल हो जाता; ऐसी कोई जगह न थी जहाँ वह न पहुँचा हो। वह बढ़ती हुई नदी की लहर के समान आगे बढ़ता और विकराल वज्रमय बादल की भाँति शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था। उसके टापों की मार से शत्रुओं के भाले एवं तरकश (निषंग) गिर पड़ते और अंग छिल जाते थे। घोड़े का ऐसा अद्भुत रंग-ढंग देखकर शत्रु-सेना भी दंग रह जाती थी। इस प्रकार कविता चेतक की स्वामिभक्ति एवं वीरता के माध्यम से हमें साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं देश-प्रेम की प्रेरणा देती है।
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि युद्ध-भूमि (रण) के बीच चौकड़ी भर-भरकर (बड़ी-बड़ी छलाँगें लगाते हुए) दौड़ता हुआ चेतक एकदम निराला अर्थात् अनोखा बन गया था। राणा प्रताप के इस घोड़े की गति इतनी तेज थी कि उसके आगे हवा को भी पाला पड़ गया अर्थात् कवि उसकी तेजी को हवा से प्रतियोगिता के रूप में बताते हैं।
दूसरा पद: चेतक राणा के संकेत को इतनी शीघ्रता से समझ लेता था कि राणा प्रताप का कोड़ा कभी उसके शरीर पर पड़ता ही नहीं था। वह कभी शत्रुओं के सिर के ऊपर से दौड़ता हुआ निकल जाता, तो कभी ऐसा प्रतीत होता मानो वह आसमान में दौड़ रहा हो; यह अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है।
तीसरा पद: ज्यों ही हवा से ज़रा-सी लगाम (बाग) हिलती, चेतक अपने सवार को लेकर उड़ने जैसी तेजी से आगे बढ़ जाता था। राणा की आँख की पुतली घूमने (इधर-उधर देखने) से पहले ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता था – इतना समझदार एवं फुर्तीला था वह।
चौथा पद: चेतक ने युद्ध की चालों में अद्भुत कौशल (निपुणता) दिखाया। वह भयानक भालों के बीच से उड़ता-सा निकल गया, ढालों के बीच निडर होकर बढ़ता रहा और तलवारों (करवालों) के बीच भी सरपट दौड़ता रहा।
पाँचवाँ पद: चेतक की गति इतनी तीव्र थी कि एक पल वह यहाँ दिखाई देता तो दूसरे ही पल वहाँ नहीं रहता; अभी वहाँ था, अब यहाँ नहीं। रणभूमि में ऐसी कोई जगह न थी जहाँ वह न पहुँचा हो और शत्रुओं के किसी-न-किसी सिर पर वह सब ओर मौजूद था।
छठा पद: वह बढ़ती हुई नदी की लहर के समान आगे की ओर लहराता हुआ बढ़ता; कभी आगे जाता, कभी रुक जाता। फिर विकराल (भयंकर) वज्रमय बादल के समान वह शत्रु की सेना पर गरजकर टूट पड़ता था।
सातवाँ पद: चेतक के आक्रमण से शत्रुओं के भाले एवं तरकश (निषंग) गिर पड़ते तथा घोड़े के टापों की मार से उनके अंग छिल जाते। घोड़े का ऐसा अद्भुत रूप एवं वीरता देखकर पूरा शत्रु-समाज (वैरी-समाज) हक्का-बक्का रह जाता था।

शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रण | युद्ध, युद्ध-भूमि |
| चौकड़ी भरना | लंबी-लंबी छलाँगें लगाना |
| निराला | अनोखा, सबसे भिन्न |
| हवा को पाला पड़ना | हवा से भी तेज दौड़ना; हवा का पिछड़ जाना |
| कोड़ा | घोड़े को हाँकने का चाबुक |
| अरि / वैरी | शत्रु, दुश्मन |
| मस्तक | सिर, माथा |
| बाग | लगाम, घोड़े की रास |
| सवार | घोड़े पर बैठा व्यक्ति (यहाँ राणा प्रताप) |
| पुतली | आँख की पुतली |
| कौशल | निपुणता, चतुराई |
| भाला | नुकीला लंबा अस्त्र |
| निर्भीक | निडर, बिना डरे |
| ढाल | वार रोकने का रक्षा-उपकरण |
| सरपट | बहुत तेज (दौड़ना) |
| करवाल | तलवार |
| नद | बड़ी नदी |
| विकराल | भयंकर, डरावना |
| वज्र | बिजली, इंद्र का अस्त्र |
| घहर जाना | गरजकर टूट पड़ना |
| निषंग | तरकश, बाण रखने का खोल |
| हय | घोड़ा |
| दंग | हैरान, चकित |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?
• चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
• चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
• चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
• चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
(2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?
• चेतक
• महाराणा प्रताप
• कवि
• शत्रु
(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।
(क) “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
(ख) “भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।”
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। इनका सही भावार्थ स्तंभ 2 में दिया गया है। पंक्तियों को उनके सही भावार्थ से मिलाइए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|
| 1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। | हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो। |
| 2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। | शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। |
| 3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। | चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था। |
| 4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था। | वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात् वह उनका भाव समझ जाता था। |
| 5. विकराल वज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। | शत्रु की सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। |
पुस्तक के दाएँ स्तंभ की संख्या में मिलान: 1 → 2, 2 → 3, 3 → 4, 4 → 5, 5 → 1। यहाँ “उड़ना” और “बादल बनना” तेज गति तथा प्रबल आक्रमण के भाव हैं।
शीर्षक
यह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य-कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?
कविता की रचना
नीचे दी गई पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए – “चेतक बन गया निराला था।”, “पड़ गया हवा को पाला था।”, “राणा प्रताप का कोड़ा था।”, “या आसमान पर घोड़ा था।” ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।
अन्य ध्वनि-मिलान: “जाता–मुड़ जाता” में जाता की पुनरावृत्ति है; “यहाँ–वहाँ–जहाँ–कहाँ” भी ध्वनि में मिलते हैं। तुक से कविता के पढ़ने की लय बनती है।
शब्द के भीतर शब्द
पुस्तक में “आसमान” से आस, समान, मान, सम, आन, नस जैसे शब्द बनाने का उदाहरण है। इसमें अक्षरों को दूसरे क्रम में भी लिया गया है। केवल बेमतलब अक्षर-समूह न लिखें।
पाँच शब्दों के नमूने: करवाल → कर, वार; विकराल → काल, कल; मस्तक → मस्त, कम, मत; भयानक → भय, नाक; बादल → बाल, दाल, दल। शब्द का अर्थ बोलकर जाँचें। अपने पाँच अलग उदाहरण भी दे सकते हैं।
पाठ से आगे
आपकी बात
“जो तनिक हवा से बाग हिली / लेकर सवार उड़ जाता था।”
(क) ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ – कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।
(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए।
समानार्थी शब्द
कुछ शब्द समान अर्थ वाले होते हैं, जैसे – हय, अश्व और घोड़ा। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं। नीचे दिए गए शब्दों में से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हो—
| क्र. | शब्द-समूह | समानार्थी नहीं है (घेरा बनाएँ) |
|---|---|---|
| 1. | हवा, अनल, पवन, बयार | अनल (अर्थ – आग; शेष सभी का अर्थ ‘हवा’) |
| 2. | रण, तुरंग, युद्ध, समर | तुरंग (अर्थ – घोड़ा; शेष सभी का अर्थ ‘युद्ध’) |
| 3. | आसमान, आकाश, गगन, नभचर | नभचर (अर्थ – आकाश में उड़ने वाला/पक्षी; शेष का अर्थ ‘आकाश’) |
| 4. | नद, नाद, सरिता, तटिनी | नाद (अर्थ – ध्वनि/आवाज़; शेष का अर्थ ‘नदी’) |
| 5. | करवाल, तलवार, असि, ढाल | ढाल (अर्थ – रक्षा-उपकरण; शेष सभी का अर्थ ‘तलवार’) |
आज की पहेली — पुस्तक की उत्तर-सूची के अनुसार
मल्हार के परिशिष्ट, मुद्रित पृष्ठ 165, में ये पाँच उत्तर दिए हैं:
- जलज: जल में जन्मा कमल। ज–ल–ज आगे-पीछे समान है; दिन में खिलना और रात में बंद होना पहेली का संकेत है। “नयन” भी कुछ संकेतों से मेल खा सकता है, पर पुस्तक का निर्दिष्ट उत्तर जलज है।
- पतंग: बिना पंख के उड़ती है; लंबी डोर से नियंत्रित होती है।
- अँधेरा: रात और दीये के नीचे अँधेरे का संकेत।
- गुलाबजामुन: इसके नाम में गुलाब (फूल) और जामुन (फल) हैं; पूरा नाम मिठाई का है। फल-फूल-मिठाई का संकेत नाम के हिस्सों से खुलता है।
- मानचित्र: सड़क, जंगल, शहर और समुद्र चिह्नों से दिखते हैं; असली गाड़ी, पेड़, घर और पानी नहीं होते।
खोजबीन के लिए
1. महाराणा प्रताप — छोटा तथ्यात्मक परिचय: महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक थे। 1576 में हल्दीघाटी में उनका संघर्ष अकबर की सेना से हुआ, जिसका नेतृत्व आमेर के मान सिंह ने किया। उन्हें साहस और स्वाभिमान के लिए याद किया जाता है। स्रोत: राजस्थान पर्यटन का हल्दीघाटी परिचय। कविता का दृश्य काव्यकल्पना है; इसे युद्ध का पूरा ऐतिहासिक विवरण न मानें।
2. पशु-पक्षियों पर पाँच रचनाएँ — संकलन का नमूना: “अक्लमंद खरगोश”, “बंदर और मगरमच्छ”, “कबूतरों का जाल”, “प्यासा कौआ” तथा “कौआ और लोमड़ी” जैसी कथाएँ चुनी जा सकती हैं। पुस्तकालय की वास्तविक प्रति में शीर्षक, लेखक/संकलक, पुस्तक और पृष्ठ जाँचकर लिखें; कथाओं के कई नाम और संस्करण मिलते हैं। दीवार-पत्रिका पर अपना सार और चित्र लगाएँ।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘चेतक की वीरता’ कविता किस काव्य-कृति का अंश है और इसके कवि कौन हैं?
2. चेतक की गति को कवि ने किसके समान बताया है?
3. “राणा प्रताप का कोड़ा” चेतक पर कभी क्यों नहीं पड़ता था?
4. शत्रु-सेना चेतक को देखकर दंग क्यों रह जाती थी?
5. कविता में चेतक की किन-किन विशेषताओं का वर्णन हुआ है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘चेतक की वीरता’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. कविता के आधार पर हल्दीघाटी युद्ध में चेतक की भूमिका का वर्णन कीजिए।
8. यह कविता वीर-रस की कविता है – उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि कौन हैं?
(क) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ख) श्यामनारायण पाण्डेय
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
2. यह कविता किस काव्य-कृति का अंश है?
(क) झाँसी की रानी
(ख) हल्दीघाटी
(ग) साकेत
(घ) कामायनी
3. चेतक किसका घोड़ा था?
(क) अकबर का
(ख) महाराणा प्रताप का
(ग) पृथ्वीराज चौहान का
(घ) शिवाजी का
4. ‘करवाल’ शब्द का अर्थ है—
(क) भाला
(ख) तलवार
(ग) ढाल
(घ) कोड़ा
5. “लेकर सवार उड़ जाता था” में ‘सवार’ किसके लिए आया है?
(क) चेतक के लिए
(ख) कवि के लिए
(ग) महाराणा प्रताप के लिए
(घ) शत्रु के लिए
6. कवि ने चेतक की गति की तुलना किससे की है?
(क) पानी से
(ख) हवा से
(ग) आग से
(घ) पत्थर से
7. चेतक शत्रु-सेना पर किसके समान टूट पड़ता था?
(क) वज्रमय बादल के समान
(ख) पर्वत के समान
(ग) वृक्ष के समान
(घ) दीपक के समान
8. ‘निषंग’ शब्द का अर्थ है—
(क) भाला
(ख) तरकश (बाण रखने का खोल)
(ग) ढाल
(घ) घोड़ा
9. ‘हय’ शब्द का अर्थ है—
(क) हवा
(ख) घोड़ा
(ग) हाथी
(घ) हृदय
10. यह कविता किस रस की कविता है?
(क) श्रृंगार रस
(ख) हास्य रस
(ग) वीर रस
(घ) करुण रस
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): चेतक हवा से भी तेज दौड़ता था।
कारण (R): कवि कहते हैं “राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।”
2. अभिकथन (A): चेतक को हाँकने के लिए राणा को बार-बार कोड़ा मारना पड़ता था।
कारण (R): चेतक राणा के संकेत को तुरंत समझ लेता था, इसलिए कोड़ा उस पर कभी नहीं पड़ता था।
3. अभिकथन (A): चेतक युद्ध-भूमि में निडर होकर भालों एवं तलवारों के बीच दौड़ता रहा।
कारण (R): वह एक डरपोक एवं सुस्त घोड़ा था।
4. अभिकथन (A): शत्रु-सेना चेतक को देखकर दंग रह जाती थी।
कारण (R): चेतक की अद्भुत फुर्ती एवं वीरता शत्रुओं को हैरान कर देती थी।
5. अभिकथन (A): ‘चेतक की वीरता’ एक वीर-रस की कविता है।
कारण (R): यह कविता वीरता, साहस एवं युद्ध-कौशल का ओजपूर्ण वर्णन करती है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
• कविता की मुख्य पंक्तियाँ (“पड़ गया हवा को पाला था”, “विकराल वज्र-मय बादल-सा…घहर गया”) याद रखें – भावार्थ एवं उद्धरण-आधारित प्रश्नों में काम आती हैं।
• चेतक की विशेषताएँ – तीव्र गति, फुर्ती, स्वामिभक्ति, निडरता एवं युद्ध-कौशल – क्रम से लिखना सीखें।
• कठिन शब्दों (करवाल, निषंग, हय, अरि, घहरना) के अर्थ अवश्य याद करें।
• यह कविता ‘हल्दीघाटी’ का अंश है एवं वीर-रस की है – यह तथ्य पाठ को समझने में उपयोगी है।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
• ‘सवार’ को चेतक न समझें – सवार महाराणा प्रताप हैं, चेतक घोड़ा है।
• ‘करवाल’ को ‘ढाल’ न समझें – करवाल का अर्थ तलवार है।
• कवि का नाम ‘श्यामनारायण पाण्डेय’ सही वर्तनी में लिखें।
• इसे श्रृंगार या करुण रस की कविता न लिखें – यह वीर-रस की कविता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि कौन हैं?
‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि वीर-रस के प्रसिद्ध कवि श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) हैं। यह कविता उनकी काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का अंश है।
चेतक कौन था?
चेतक महाराणा प्रताप का अत्यंत वीर एवं स्वामिभक्त घोड़ा था, जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में अद्भुत फुर्ती एवं वीरता का परिचय दिया।
‘चेतक की वीरता’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता, तीव्र गति, फुर्ती एवं स्वामिभक्ति का गुणगान करना है, जो हमें साहस एवं कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
