कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 13 – पेड़ की बात (गद्य) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 13 ‘पेड़ की बात’ (लेखक – प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु; अनुवादक – शंकर सेन) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, लेखक परिचय, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, लेख की रचना, अनुमान या कल्पना से, प्रवाह चार्ट, अंकुरण, शब्दों के रूप, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 13 लेखक: जगदीशचंद्र बसु अनुवादक: शंकर सेन विधा: गद्य (लेख) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – जगदीशचंद्र बसु

प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता। पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं से प्रेम करते हुए उनकी शिक्षा आरंभ हुई। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान-कथा लेखन में रुचि रखने वाले एक बहुविद् व्यक्ति थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का एक निश्चित जीवनचक्र एवं एक प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। इस प्रकार वे यह स्थापित करने वाले विश्व के पहले व्यक्ति थे कि पौधे किसी भी अन्य जीव-रूप के समान होते हैं। विज्ञान जैसे विषय को भी चित्रात्मक साहित्यिक स्वरूप प्रदान करने वाले बसु ने सर्वप्रथम रेडियो तरंगों के द्वारा संचार स्थापित कर एक बड़ी वैज्ञानिक खोज की थी। ‘पेड़ की बात’ का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।

पाठ का सार

‘पेड़ की बात’ एक रोचक वैज्ञानिक लेख है जिसमें लेखक जगदीशचंद्र बसु ने एक बीज से पेड़ बनने तथा पेड़ के अंत तक की पूरी कहानी सरल एवं सजीव भाषा में बताई है। बहुत दिनों तक बीज मिट्टी के नीचे पड़ा रहता है। सर्दियों के बाद वसंत और फिर वर्षा आती है। दो-एक दिन पानी बरसने पर बीज का ढक्कन दरक जाता है और कोमल पत्तियों के बीच से अंकुर बाहर निकलता है। अंकुर का एक भाग मिट्टी में नीचे की ओर गड़ जाता है, जिसे ‘जड़’ कहते हैं, और दूसरा भाग ऊपर की ओर बढ़ता है, जिसे ‘तना’ कहते हैं। पेड़-पौधे को चाहे जैसे भी रखो, जड़ सदा नीचे और तना ऊपर की ओर ही जाएगा – गमले को औंधा लटकाने पर भी पौधा घूमकर अपनी जड़ नीचे और पत्तियाँ ऊपर कर लेता है।

लेखक बताते हैं कि जैसे हम भोजन करते हैं, वैसे ही पेड़-पौधे भी भोजन करते हैं। उनके दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से आहार ग्रहण करते हैं। जड़ों के द्वारा वे मिट्टी से रस-पान करते हैं; पानी मिलने पर मिट्टी के अनेक द्रव्य गल जाते हैं जिन्हें पौधे सोख लेते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर पता चलता है कि पेड़ में हज़ारों नल होते हैं जिनसे रस का संचार होता है, और पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं जो हवा से आहार ग्रहण करते हैं। पेड़ हमारी छोड़ी हुई विषैली ‘अंगारक’ (कार्बन डाइऑक्साइड) वायु लेकर, सूर्य के प्रकाश की सहायता से हवा को शुद्ध कर देते हैं। इसीलिए लेखक कहते हैं कि प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है – सूर्य-किरण पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है और यही ऊर्जा भोजन के रूप में जीव-जंतुओं तक पहुँचती है।

अंत में लेखक पेड़ के संतान-प्रेम का मार्मिक चित्र खींचते हैं। मरने से पहले हर पेड़ बीज रूपी संतान छोड़ जाने के लिए व्यग्र रहता है। वह सुंदर फूल खिलाता है, उनमें शहद और सुगंध भरता है ताकि मधुमक्खी, तितली और पतंगे आएँ। मधुमक्खियाँ एक फूल का पराग दूसरे फूल पर ले जाती हैं, जिससे बीज पकता है। अपने शरीर का सारा रस पिलाकर पेड़ बीजों का पोषण करता है और स्वयं सूखकर, डालियाँ टूटकर एक दिन जड़ सहित भूमि पर गिर पड़ता है। इस प्रकार संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है। लेखक यह संदेश देते हैं कि माँ की ममता ही वह पारस-मणि है जिसके स्पर्श से साधारण मिट्टी भी सुंदर फूल बन जाती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
अंकुरबीज से फूटने वाला नन्हा कोंपल/नया कल्ला
आहिस्ता-आहिस्ताधीरे-धीरे
सुकोमलअत्यंत कोमल, मुलायम
दरक गयाफट गया, चटक गया
तनापेड़ का ऊपर की ओर बढ़ने वाला मुख्य भाग
औंधाउल्टा
द्रव्यतरल पदार्थ
सूक्ष्मदर्शीबहुत बारीक चीज़ें देखने वाला यंत्र
विषाक्तविष मिला हुआ, जहरीला
अंगारककार्बन डाइऑक्साइड (साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु)
संवर्द्धनबढ़ावा, विकास, वृद्धि
पल्लवितहरा-भरा, पत्तियों से भरा हुआ
आबद्धबँधा हुआ, समाया हुआ
सचेष्टप्रयत्नशील, चेष्टा करने वाला
व्यग्रव्याकुल, बेचैन
आच्छादितढका हुआ
स्नेहसिक्तस्नेह/प्रेम से भीगी हुई
पराग-कणफूल के भीतर की धूल जैसी रचना (पुष्परज)
क्षीणकमज़ोर, घटा हुआ
न्योछावरसमर्पित कर देना, त्याग देना
अपरूप उपादानभद्दे/साधारण कच्चे पदार्थ
अकस्मातअचानक

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो” पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?

• उसे उल्टा लटकाया गया है।

• उसे किसी ने सजा दी है।

• बच्चे को गमला रखना नहीं आया।

• प्रकाश ऊपर से आ रहा है।

उत्तर★ उसे उल्टा लटकाया गया है।गमले को औंधा लटकाने पर कुछ दिनों बाद पौधे की पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की ओर तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर हो गई। इससे लगता है मानो पौधे को यह भेद मालूम हो गया कि उसे उल्टा लटका दिया गया है।

(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?

• हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।

• हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।

• हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।

• धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।

उत्तर★ हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।जो विषैली ‘अंगारक’ वायु जीव-जंतुओं के लिए ज़हर है, उसी को पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से ग्रहण करके हवा को पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं। इस प्रकार वे जीव-जंतुओं के सच्चे मित्र हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय पाठ के संदर्भ को आधार बनाइए। पहले प्रश्न में पाठ स्पष्ट कहता है कि गमले को औंधा लटकाने पर पौधा घूमकर सीधा हो गया – इसी से सिद्ध होता है कि उसे ‘उल्टा लटकाए जाने’ का भेद मालूम हो गया।दूसरे प्रश्न में पाठ की यह पंक्ति आधार है कि पेड़ ज़हरीली वायु को शुद्ध कर देते हैं – यही उनकी मित्रता का सबसे बड़ा प्रमाण है। चर्चा में अपने साथियों के तर्क भी ध्यान से सुनिए।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।”

अर्थ/विचारपेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से अपना भोजन बनाते हैं, इसलिए सूर्य की ऊर्जा उनके कण-कण (रेशे-रेशे) में बँधी रहती है।जब हम लकड़ी या ईंधन जलाते हैं तो जो प्रकाश और गर्मी मिलती है, वह वास्तव में पेड़ में संचित सूर्य की वही ऊर्जा है जो अब बाहर निकल रही है। तात्पर्य यह कि सारी ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य ही है।

(ख) “मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।”

अर्थ/विचारवृक्ष और मधुमक्खी-तितली का संबंध बहुत पुराना (चिरकाल से) और गहरा (घनिष्ठ) है। फूल अपने रंग और सुगंध से इन्हें बुलाते हैं और ये झुंड बनाकर (दल-बल सहित) फूलों पर आती हैं।इससे दोनों को लाभ होता है – मधुमक्खी-तितली को मधु मिलता है और वृक्ष का परागण हो जाता है जिससे बीज पकता है। यह प्रकृति में परस्पर सहयोग का सुंदर उदाहरण है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।

वाक्यांशसही अर्थ या संदर्भ
1. बीज का ढक्कन दरक गयाबीज के दोनों दलों में दरार आ गई या वे फट गए।
2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैंसाँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु – कार्बन डाइऑक्साइड।
3. पत्ते सूर्य-ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैंसूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।
4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र हैजीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधार-शक्ति या महत्वपूर्ण है।
5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा होअपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट।
6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैंमटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।
सही मिलान1 → बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए।2 → साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु – कार्बन डाइऑक्साइड।3 → सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।4 → जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधार-शक्ति या महत्वपूर्ण है।5 → अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट।6 → मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?

उत्तरबीज के अंकुरित होने में मिट्टी, पानी (वर्षा), उपयुक्त ऋतु (वसंत के बाद वर्षा का आरंभ), उचित गर्मी (ताप) तथा सूर्य के प्रकाश का सहयोग मिलता है।मिट्टी के नीचे पड़े बीज पर जब दो-एक दिन पानी बरसता है तो उसका ढक्कन दरक जाता है और अंकुर बाहर निकलकर प्रकाश की ओर बढ़ने लगता है। इस प्रकार मिट्टी, जल, ताप और प्रकाश मिलकर बीज को अंकुरित होने में सहायता करते हैं।

(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तरपौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य और वायु से भोजन ग्रहण करते हैं। अपनी जड़ों के द्वारा वे मिट्टी से रस-पान करते हैं – पानी मिलने पर मिट्टी के अनेक पोषक द्रव्य गल जाते हैं जिन्हें जड़ें सोख लेती हैं और हज़ारों नलों के द्वारा यह रस पूरे पेड़ में फैल जाता है।इसके अलावा पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं जो हवा से आहार ग्रहण करते हैं। सूर्य के प्रकाश की सहायता से पत्ते ‘अंगारक’ वायु से अंगार बनाकर पेड़ का पोषण करते हैं। इस प्रकार पौधे जड़ (मिट्टी से रस) और पत्तों (हवा व प्रकाश से) दोनों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं।

लेख की रचना

इस लेख में एक के बाद एक विचार को लेखक ने सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया है। गमले को औंधा लटकाना या मूली काटकर बोना जैसे उदाहरण देकर बात कहना इस लेख का एक तरीका है। अपने तथ्य को वास्तविकता या व्यावहारिकता से जोड़ना भी इस लेख की विशेषता है।

(क) जैसे लेखक ने ‘पेड़ की बात’ कही है वैसे ही अपने आस-पास की चीज़ें देखिए और किसी एक चीज़ पर लेख लिखिए, जैसे—गेहूँ की बात।

उत्तर (नमूना – गेहूँ की बात)मैं एक छोटा-सा गेहूँ का दाना हूँ। किसान ने मुझे जोती हुई मिट्टी में बो दिया और हल्का पानी छिड़क दिया। कुछ ही दिनों में मेरी कोमल जड़ें नीचे और हरा अंकुर ऊपर निकल आया। सूरज की रोशनी और सिंचाई पाकर मैं लहलहाता पौधा बन गया।धीरे-धीरे मेरी बालियों में सुनहरे दाने भर गए। फिर किसान ने मुझे काटा, झाड़ा और आटा बनाया। उसी आटे की रोटी खाकर लोग शक्ति पाते हैं। इस तरह एक नन्हे दाने से लेकर थाली की रोटी तक मेरी पूरी यात्रा परिश्रम, प्रकृति और किसान के सहयोग की कहानी है।(आप ‘चावल की बात’, ‘आम की बात’ या ‘रुई की बात’ पर भी इसी तरह लिख सकते हैं।)

(ख) उसे कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर (गतिविधि)अपना लिखा हुआ लेख कक्षा में स्पष्ट एवं सहज स्वर में पढ़कर साथियों को सुनाइए। उनकी प्रतिक्रिया एवं सुझाव ध्यान से सुनिए और अपने लेखन को और बेहतर बनाइए। यह आत्मविश्वास तथा अभिव्यक्ति बढ़ाने वाली गतिविधि है।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) “इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।” वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?

उत्तरवृक्ष भले ही समाप्त हो जाता है, पर उसका जीवन व्यर्थ नहीं जाता। वह अपने पीछे बीज रूपी संतान छोड़ जाता है। ये बीज मिट्टी में गिरकर, उपयुक्त समय पर पानी और प्रकाश पाकर फिर से अंकुरित होते हैं और नए पेड़ बनते हैं।गिरे हुए वृक्ष का शरीर सड़-गलकर मिट्टी में मिल जाता है और मिट्टी को उपजाऊ बना देता है, जिससे नए पौधों को पोषण मिलता है। इस प्रकार एक पेड़ के समाप्त होने पर भी जीवन का चक्र अनवरत चलता रहता है।

(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?

उत्तरलेखक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति के बीच, उसका अवलोकन करते हुए बीता। पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम के कारण उनके मन में बचपन से ही जिज्ञासा रही होगी कि बीज से पेड़ कैसे बनता है, पौधे कैसे भोजन करते हैं और कैसे प्रकाश की ओर बढ़ते हैं।इसी जिज्ञासा एवं निरंतर निरीक्षण से उनकी वैज्ञानिक रुचि जागृत हुई होगी, और आगे चलकर उन्होंने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया कि पौधों में भी जीवन एवं संवेदना होती है।

प्रवाह चार्ट

बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए—

उत्तर (पूरा क्रम)बीजजड़अंकुरपौधातनापत्ताफूलफलबीजअर्थात बीज से जड़ और अंकुर फूटते हैं, अंकुर बढ़कर पौधा बनता है, पौधे में तना, पत्ते निकलते हैं, फिर फूल खिलते हैं, फूल से फल बनता है और फल के भीतर फिर से बीज तैयार हो जाता है – इस प्रकार जीवन-चक्र पूरा होता है।

अंकुरण

मिट्टी के किसी भी पात्र में मिट्टी भरकर उसमें राजमा या चने के 4–5 बीज बो दीजिए। हल्का-सा पानी छिड़क दीजिए। 3–4 दिन तक थोड़ा-थोड़ा पानी डालिए। अब इसमें आए परिवर्तन लेखन पुस्तिका में लिखिए। (संकेत— एक दिन में पौधे की लंबाई कितनी बढ़ती है, कितने पत्ते निकले, प्रकाश की तरफ़ पौधे मुड़े या नहीं आदि।)

उत्तर (नमूना अवलोकन)पहला दिन: बीज बोए और हल्का पानी डाला; कोई बदलाव नहीं दिखा।दूसरा–तीसरा दिन: बीज फूलकर मोटे हो गए और उनका ढक्कन दरकने लगा; नीचे की ओर छोटी सफेद जड़ निकली।चौथा–पाँचवाँ दिन: मिट्टी से हरा अंकुर बाहर आया, लगभग 2–3 सेंटीमीटर बढ़ा और उस पर 2 छोटी पत्तियाँ निकलीं।निष्कर्ष: पौधा प्रतिदिन कुछ-कुछ बढ़ता गया और उसकी पत्तियाँ खिड़की से आने वाले प्रकाश की ओर मुड़ गईं – इससे सिद्ध होता है कि पौधे प्रकाश की दिशा में बढ़ते हैं।

शब्दों के रूप

पुस्तक में ‘मिट्टी’ की विशेषता बताने वाले शब्द दिए गए हैं – चिकनी, उपजाऊ, नम, रेतीली, भुरभुरी, काली। अब आप ‘पेड़’, ‘सर्दी’, ‘सूरज’ जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए—

शब्दविशेषता बताने वाले शब्द
मिट्टी (उदाहरण)चिकनी, उपजाऊ, नम, रेतीली, भुरभुरी, काली
पेड़हरा-भरा, घना, ऊँचा, छायादार, फलदार, विशाल
सर्दीकड़ाके की, ठंडी, हड्डी कँपा देने वाली, सुहावनी, कोहरे भरी
सूरजचमकीला, तेज़, गरम, सुनहरा, उगता हुआ, ढलता हुआ

पाठ से आगे

मेरे प्रिय

नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए— फूल, पक्षी, वृक्ष, पुस्तक, खेल।

उत्तर (नमूना – अपनी पसंद के अनुसार बदल सकते हैं)
फूलपक्षीवृक्षपुस्तकखेल
गुलाबमोरआमपंचतंत्रकबड्डी
गेंदातोतापीपलअकबर-बीरबलखो-खो
कमलकोयलनीमचाचा चौधरीक्रिकेट

आज की पहेली

इस शब्द-सीढ़ी में पाठ में आए शब्द हैं। उन्हें पूरा कीजिए और पाठ में रेखांकित कीजिए।

उत्तरपाठ में आए ये शब्द शब्द-सीढ़ी में छिपे हैं— रात, तमाम, ममता, ताप, पल्लव, वसंत, तना, नाम, मज़बूत, तरल, लटक, कम।(ये सभी शब्द ‘पेड़ की बात’ पाठ में प्रयुक्त हुए हैं; इन्हें पाठ में ढूँढ़कर रेखांकित कीजिए।)

खोजबीन के लिए

इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जगदीशचंद्र बसु के बारे में और जान-समझ सकते हैं।

उत्तर (मार्गदर्शन)जगदीशचंद्र बसु एक विलक्षण एवं संवेदनशील वैज्ञानिक थे। शिक्षक की सहायता से विश्वसनीय वेबसाइटों पर खोजिए कि उन्होंने पौधों में जीवन एवं संवेदना सिद्ध करने के लिए ‘क्रेस्कोग्राफ’ नामक यंत्र बनाया था और रेडियो तरंगों से संचार पर भी अनुसंधान किया।अपनी खोज से रोचक तथ्य एकत्र करके एक छोटा-सा अनुच्छेद बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (इंटरनेट का प्रयोग बड़ों की देखरेख में ही करें।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. अंकुर के कौन-से दो भाग बनते हैं और उन्हें क्या कहते हैं?

उत्तरअंकुर का एक भाग मिट्टी के भीतर नीचे की ओर बढ़ता है, जिसे ‘जड़’ कहते हैं। दूसरा भाग मिट्टी भेदकर ऊपर की ओर बढ़ता है, जिसे ‘तना’ कहते हैं। ये दोनों भाग सभी पेड़-पौधों में पाए जाते हैं।

2. पेड़-पौधे जड़ों के द्वारा भोजन कैसे ग्रहण करते हैं?

उत्तरपेड़-पौधे जड़ों के द्वारा मिट्टी से रस-पान करते हैं। पानी मिलने पर मिट्टी के अनेक पोषक द्रव्य गल जाते हैं, जिन्हें जड़ें सोख लेती हैं और हज़ारों नलों के द्वारा यह रस पूरे पेड़ में पहुँचता है।

3. पेड़-पौधे हवा को किस प्रकार शुद्ध करते हैं?

उत्तरजीव-जंतु साँस छोड़ते समय विषैली ‘अंगारक’ (कार्बन डाइऑक्साइड) वायु छोड़ते हैं। पेड़ के पत्ते सूर्य के प्रकाश की सहायता से इसी विषैली वायु को ग्रहण कर लेते हैं और हवा को पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं।

4. लेखक ने प्रकाश को जीवन का मूलमंत्र क्यों कहा है?

उत्तरसूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित (हरा-भरा) होता है और भोजन बनाता है। यही ऊर्जा अन्न-सब्ज़ी के रूप में जीव-जंतुओं तक पहुँचती है। प्रकाश के बिना न पेड़ जी सकते हैं, न जीव – इसीलिए प्रकाश जीवन का मूलमंत्र है।

5. गमले को औंधा लटकाने पर पौधे में क्या परिवर्तन देखा गया?

उत्तरपहले पौधे का सिर नीचे और जड़ ऊपर लटकी रही। पर कुछ दिनों बाद पौधे की सब पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की ओर उठ आईं तथा जड़ घूमकर फिर नीचे की ओर हो गई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘पेड़ की बात’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘पेड़ की बात’ में लेखक जगदीशचंद्र बसु ने बीज से पेड़ बनने तथा पेड़ के जीवन की पूरी कहानी रोचक ढंग से बताई है। बीज मिट्टी में पड़ा रहता है; वर्षा होने पर उसका ढक्कन दरकता है और अंकुर निकलता है, जिसका एक भाग जड़ और दूसरा तना बनता है।पौधे जड़ से मिट्टी का रस और पत्तों से हवा एवं प्रकाश द्वारा भोजन ग्रहण करते हैं। वे विषैली वायु को शुद्ध कर हमारे मित्र बनते हैं। अंत में पेड़ फूल खिलाकर, मधुमक्खी-तितली की सहायता से बीज तैयार करता है और अपना सारा रस संतान को देकर स्वयं सूखकर गिर पड़ता है। इस प्रकार वह संतान के लिए जीवन न्योछावर कर देता है – मानो माँ की ममता ही फूल खिलाती हो।

7. इस पाठ से हमें पेड़-पौधों के बारे में कौन-कौन से वैज्ञानिक तथ्य पता चलते हैं?

उत्तरइस पाठ से अनेक रोचक वैज्ञानिक तथ्य पता चलते हैं। पहला, बीज से अंकुर निकलने पर जड़ सदा नीचे और तना ऊपर की ओर ही बढ़ता है, चाहे पौधे को किसी भी दिशा में रखो। दूसरा, पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे जड़ों से तरल द्रव्य और पत्तों से वायु द्वारा भोजन ग्रहण करते हैं।तीसरा, सूक्ष्मदर्शी से देखने पर पता चलता है कि पेड़ में हज़ारों नल और पत्तों में अनगिनत सूक्ष्म मुँह होते हैं। चौथा, पेड़ सूर्य के प्रकाश की सहायता से विषैली अंगारक वायु को ग्रहण कर हवा को शुद्ध करते हैं। पाँचवाँ, परागण मधुमक्खियों द्वारा होता है जिससे बीज पकता है। ये सब तथ्य सिद्ध करते हैं कि पौधों में भी एक सजीव जीवन-चक्र होता है।

8. लेखक ने पेड़ की तुलना ममतामयी माँ से क्यों की है? समझाइए।

उत्तरलेखक ने पेड़ की तुलना ममतामयी माँ से इसलिए की है क्योंकि जैसे एक माँ अपनी संतान के पालन-पोषण के लिए अपना सर्वस्व त्याग देती है, वैसे ही पेड़ अपनी संतान – बीज – के लिए सब कुछ न्योछावर कर देता है।पेड़ सुंदर फूल खिलाता है, उनमें शहद और सुगंध भरता है ताकि परागण हो और बीज पके। फिर वह अपने शरीर का सारा रस पिलाकर बीजों का पोषण करता है, और स्वयं सूखकर, डालियाँ टूटकर भूमि पर गिर पड़ता है। लेखक के अनुसार माँ की ममता ही वह पारस-मणि है जिसके स्पर्श से साधारण मिट्टी भी सुंदर फूल बन जाती है – इसी त्याग और स्नेह के कारण पेड़ माँ के समान है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘पेड़ की बात’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) रवींद्रनाथ टैगोर

(ख) जगदीशचंद्र बसु

(ग) शंकर सेन

(घ) सी. वी. रमन

उत्तर(ख) जगदीशचंद्र बसु। (इसका हिंदी अनुवाद शंकर सेन ने किया है।)

2. अंकुर का जो भाग ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे क्या कहते हैं?

(क) जड़

(ख) तना

(ग) पत्ता

(घ) फूल

उत्तर(ख) तना।

3. साँस छोड़ने पर निकलने वाली विषैली वायु को पाठ में क्या कहा गया है?

(क) प्राणवायु

(ख) अंगारक

(ग) नाइट्रोजन

(घ) भाप

उत्तर(ख) अंगारक (अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड)।

4. पेड़-पौधे जड़ों के द्वारा मिट्टी से क्या ग्रहण करते हैं?

(क) केवल हवा

(ख) कठोर पदार्थ

(ग) तरल द्रव्य/रस

(घ) प्रकाश

उत्तर(ग) तरल द्रव्य/रस।

5. लेखक के अनुसार जीवन का मूलमंत्र क्या है?

(क) जल

(ख) प्रकाश

(ग) मिट्टी

(घ) वायु

उत्तर(ख) प्रकाश।

6. सूक्ष्म पदार्थों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए किस यंत्र का प्रयोग होता है?

(क) दूरबीन

(ख) तराज़ू

(ग) सूक्ष्मदर्शी

(घ) घड़ी

उत्तर(ग) सूक्ष्मदर्शी।

7. एक फूल का पराग दूसरे फूल पर कौन ले जाता है?

(क) चींटी

(ख) मधुमक्खी

(ग) मछली

(घ) चूहा

उत्तर(ख) मधुमक्खी। (पराग-कण के बिना बीज नहीं पकता।)

8. गमले को औंधा (उल्टा) लटकाने पर कुछ दिनों बाद जड़ किस ओर हो गई?

(क) ऊपर की ओर

(ख) नीचे की ओर

(ग) दाईं ओर

(घ) ज्यों-की-त्यों रही

उत्तर(ख) नीचे की ओर। (जड़ हमेशा नीचे और तना ऊपर की ओर ही जाता है।)

9. बेल-लताएँ पेड़ों से लिपटकर ऊपर की ओर क्यों बढ़ती हैं?

(क) छाया पाने के लिए

(ख) प्रकाश पाने के लिए

(ग) पानी पाने के लिए

(घ) सुरक्षा पाने के लिए

उत्तर(ख) प्रकाश पाने के लिए। (प्रकाश के अभाव में वे मर जाएँगी।)

10. लेखक के अनुसार मिट्टी और अंगार को सुंदर फूल में बदल देने वाली ‘मणि’ क्या है?

(क) सूर्य का प्रकाश

(ख) पारस पत्थर

(ग) माँ की ममता

(घ) वर्षा का जल

उत्तर(ग) माँ की ममता।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र हैं।

कारण (R): वे विषैली अंगारक वायु को ग्रहण करके हवा को शुद्ध कर देते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पेड़ को किसी भी दिशा में रखो, जड़ नीचे और तना ऊपर ही जाता है।

कारण (R): गमले को औंधा लटकाने पर भी पौधा घूमकर अपनी जड़ नीचे और पत्तियाँ ऊपर कर लेता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): पेड़-पौधे कठोर चीज़ें चबाकर भोजन करते हैं।

कारण (R): पेड़-पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (पेड़ कठोर चीज़ें नहीं चबाते), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): प्रकाश पेड़-पौधों के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कारण (R): सूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है और प्रकाश न मिलने पर बच नहीं पाता।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): पेड़ अपनी संतान (बीज) के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है।

कारण (R): पेड़ अपने शरीर का सारा रस बीजों को पिलाकर स्वयं सूखकर गिर पड़ता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
उत्तर-कुंजी (अभिकथन-कारण): 1-(क), 2-(क), 3-(घ), 4-(क), 5-(क)

परीक्षा-टिप्स एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-टिप्स

  • पाठ के क्रम को याद रखिए: बीज → जड़ व तना → भोजन (जड़ व पत्ते) → हवा का शुद्धिकरण → फूल-परागण-बीज → पेड़ का त्याग।
  • ‘अंगारक’ = कार्बन डाइऑक्साइड – यह तथ्य परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
  • जड़ का काम (रस लेना) और पत्तों का काम (हवा व प्रकाश से भोजन) अलग-अलग याद रखिए।
  • लेखक जगदीशचंद्र बसु एवं अनुवादक शंकर सेन के नाम कभी न मिलाइए।

सामान्य गलतियाँ

  • लेखक को ‘शंकर सेन’ लिख देना – शंकर सेन केवल अनुवादक हैं, मूल लेखक जगदीशचंद्र बसु हैं।
  • यह समझ लेना कि पौधे कठोर भोजन खाते हैं – वे केवल तरल द्रव्य व वायु से आहार लेते हैं।
  • ‘जड़’ और ‘तना’ की दिशा उलट देना।
  • परागण किससे होता है, यह भूल जाना – मुख्यतः मधुमक्खी (व तितली) से।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘पेड़ की बात’ पाठ के लेखक एवं अनुवादक कौन हैं?

‘पेड़ की बात’ के मूल लेखक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) हैं और इसका बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।

अंकुर के दो भागों के क्या नाम हैं?

अंकुर का जो भाग नीचे मिट्टी में जाता है उसे ‘जड़’ और जो ऊपर की ओर बढ़ता है उसे ‘तना’ कहते हैं।

पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?

पेड़-पौधे हमारी छोड़ी हुई विषैली ‘अंगारक’ (कार्बन डाइऑक्साइड) वायु को ग्रहण कर, सूर्य के प्रकाश की सहायता से हवा को पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं – इसी से वे हमारे मित्र हैं।

लेखक ने प्रकाश को जीवन का मूलमंत्र क्यों कहा है?

क्योंकि सूर्य-किरण पाकर ही पेड़ हरा-भरा होता है और भोजन बनाता है; यही ऊर्जा अन्न के रूप में जीव-जंतुओं तक पहुँचती है। प्रकाश के बिना न पेड़ जी सकते हैं, न जीव।

पाठ एवं गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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