कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 10 – तरुण के स्वप्न (उद्बोधन) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 10 ‘तरुण के स्वप्न’ (लेखक – सुभाषचंद्र बोस) का पूरा समाधान देता है। यह नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस उद्बोधन का अंश है जो उन्होंने मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में 29 दिसंबर, 1929 को युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था।
- लेखक से परिचय – सुभाषचंद्र बोस
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शीर्षक
- भाषा की बात
- विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
- आपकी बात (पाठ से आगे)
- मिलान कीजिए (स्वतंत्रता सेनानी)
- सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
- स्त्री सशक्तीकरण
- नारे एवं अन्य गतिविधियाँ
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक से परिचय – सुभाषचंद्र बोस
उड़ीसा (अब ओड़िशा) राज्य के कटक नगर में जन्मे सुभाषचंद्र बोस को पूरा देश ‘नेताजी’ के नाम से जानता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनका उद्देश्य स्पष्ट था – भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त कराना। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उनकी दूरदर्शिता का पता तब चलता है जब उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व संभाला और सैनिकों को ‘दिल्ली चलो’ तथा ‘जय हिंद’ का नारा दिया। उन्होंने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ जैसा प्रेरक नारा भी दिया। सुभाषचंद्र बोस ने एक स्वाधीन राष्ट्र और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। द इंडियन स्ट्रगल उनकी चर्चित पुस्तक है। प्रकाशन विभाग, भारत सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का वाङ्मय (संपूर्ण लेखन) प्रकाशित किया है, जिसमें उनके सभी कार्यों, पत्रों, टिप्पणियों और भाषणों को सम्मिलित किया गया है।
पाठ का सार
‘तरुण के स्वप्न’ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस उद्बोधन का अंश है जो उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए प्रकट किया था। नेताजी कहते हैं कि स्वप्न तो अनेकों ने देखा है। उनके राजनीतिक गुरु स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास ने भी एक स्वप्न देखा था, जो उनकी शक्ति का उत्स और आनंद का निर्झर बना। आज वे उसी स्वप्न के उत्तराधिकारी हैं और इसी स्वप्न की प्रेरणा से उनका सारा जीवन एवं कर्म संचालित होता है।
नेताजी का स्वप्न एक नया सर्वांगीण स्वाधीन एवं संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र है। वे ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो और समाज के दबाव से उसका दम न घुटे। उस समाज में जातिभेद का कोई स्थान न हो; नारी मुक्त होकर पुरुषों की भाँति समान अधिकार का उपभोग करे तथा समाज एवं राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बने। उस समाज में आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति का समान अवसर मिले। जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी, वहाँ आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।
नेताजी आगे कहते हैं कि ऐसा राष्ट्र हर प्रकार के विजातीय प्रभाव से मुक्त रहेगा। जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, वह न केवल भारतवासियों के अभाव को मिटाएगा, बल्कि विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा। यही स्वप्न नेताजी के लिए नित्य एवं अखंड सत्य है। इस सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे हर प्रकार का त्याग, हर संकट और आवश्यकता पड़ने पर प्राण-बलिदान तक को स्वीकार करते हैं – उनके लिए ऐसा ‘मरण स्वर्ग समान’ है।
अंत में नेताजी अपने तरुण भाइयों को यह स्वप्न उपहारस्वरूप सौंपते हैं। वे कहते हैं कि उनके पास देने योग्य और कुछ भी नहीं है, सिर्फ यही स्वप्न है जो असीम शक्ति और अपार आनंद देता है तथा उनके क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है। इस प्रकार यह उद्बोधन युवाओं को आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित करता है तथा त्याग, समानता, नारी-मुक्ति और राष्ट्र-सेवा का संदेश देता है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| उद्बोधन | जगाने या प्रेरित करने वाला संबोधन; प्रेरक भाषण |
| उत्स | सोता, स्रोत, जलमय स्थान |
| निर्झर | झरना, प्रपात |
| उत्तराधिकारी | किसी के बाद उसकी संपत्ति या उद्देश्य पाने का हकदार, वारिस |
| आदर्श | नमूना, असल, अनुकरणीय रूप |
| सर्वांगीण | सब अंगों में व्याप्त होने वाला, पूर्ण |
| स्वाधीन | स्वतंत्र, जो अपने ही अधीन हो, आजाद |
| संपन्न | समृद्ध, धनवान, पूर्ण |
| जातिभेद | जाति के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव |
| विषमता | असमानता, ऊँच-नीच |
| मर्यादा | सीमा, परंपरा से निर्धारित सीमा, प्रतिष्ठा |
| अकर्मण्य | कर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा |
| विजातीय | भिन्न जाति या वर्ग का, पराया |
| सर्वोपरि | सबसे ऊपर या बढ़कर |
| गण्य | गिनने योग्य, मान्य, लिहाज करने योग्य |
| अखंड | जिसका सिलसिला न टूटे, अविकल, संपूर्ण, अटूट |
| नित्य | सदा रहने वाला, शाश्वत, प्रतिदिन |
| प्रतिष्ठा | स्थापना, सम्मान, मान-मर्यादा |
| क्षुद्र | छोटा, तुच्छ, साधारण |
| सार्थक | अर्थयुक्त, उद्देश्यपूर्ण, उपयोगी |
| तरुण | युवा, नवयुवक |
| आह्वान | पुकार, बुलावा, प्रेरणा देना |
| प्रेरणा | किसी कार्य में प्रकृत करने या उकसाने की क्रिया |
नीचे ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ की प्रत्येक अभ्यास गतिविधि के शीर्षक ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं; प्रश्न पुस्तक के अनुसार हैं और उत्तर मौलिक एवं विशेषज्ञ-जाँचे हुए हैं।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
• सुभाषचंद्र बोस के लिए
• देश के तरुण वर्ग के लिए
• चित्तरंजन दास के लिए
• भारतवासियों के लिए
(2) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?
• आर्थिक असमानता से
• स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
• श्रम और कर्म की मर्यादा से
• जातिभेद से
(3) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
• हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
• उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है
(4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—
• राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
• तरुणों का साहस बढ़ेगा
• राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
• राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 में पाठ में से चुनी गई पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनसे संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (पाठ की पंक्ति) | स्तंभ 2 (भाव-विचार) |
|---|---|
| 1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।” | हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। |
| 2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” | जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा। |
| 3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।” | समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो। |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
सोच-विचार के लिए
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?
(ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
अनुमान और कल्पना से
(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं— “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
शीर्षक
(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
भाषा की बात
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए— (सत्य, समाज, राष्ट्र, जीवन, शक्ति, आनंद)
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
(क) रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए। नीचे सही मिलान दिया गया है।
| क्रम | स्तंभ 1 | विपरीतार्थक (स्तंभ 2) |
|---|---|---|
| 1. | स्वीकार | अस्वीकार |
| 2. | सार्थक | निरर्थक |
| 3. | विषमता | समानता |
| 4. | क्षुद्र | विशाल / वृहत / विराट / महान |
| 5. | संपन्न | विपन्न |
| 6. | अकर्मण्य | कर्मण्य / कर्मठ |
| 7. | मरण | जीवन |
(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे— “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”
आपकी बात (पाठ से आगे)
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
मिलान कीजिए (स्वतंत्रता सेनानी)
(क) स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित तथ्य और स्तंभ 2 में उनके नाम दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (तथ्य) | स्तंभ 2 (नाम) |
|---|---|
| 1. 8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं। | भगत सिंह |
| 2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। | चित्तरंजन दास |
| 3. जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण भूख हड़ताल की; अनशन के तिरसठवें दिन जेल में देहांत हो गया। | जतिन दास |
| 4. इनके जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है। | महात्मा गाँधी |
| 5. नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है। | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| 6. 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश के पूछने पर कहा— “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।” | चंद्रशेखर आजाद |
(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं?
स्त्री सशक्तीकरण
(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।
नारे एवं अन्य गतिविधियाँ
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।” – स्वाधीनता संग्राम के दौरान अनेक प्रेरक नारे दिए गए। नीचे दिए नारे किसके द्वारा दिए गए, यह मिलान इस प्रकार है—
| नारा | स्वतंत्रता सेनानी |
|---|---|
| स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। | बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य तिलक) |
| करो या मरो | महात्मा गाँधी |
| मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगा | चंद्रशेखर आजाद |
| इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद | भगत सिंह (एवं उनके साथी) |
| पूर्ण स्वराज | जवाहरलाल नेहरू / भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी: आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं, उसे कारण सहित लिखिए और रोल-प्ले करते हुए उनके विचार कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (व्यक्तिगत गतिविधि – विद्यार्थी अपने प्रिय सेनानी के बारे में लिखें।)
परियोजना कार्य: सभी राज्यों के 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र एकत्र कर एक संग्रहिका तैयार कीजिए और चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य लिखिए (किसी एक राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें)।
झरोखे से – गृह-उद्योग पर नेताजी का पत्र: इस पत्र में नेताजी ने गृह एवं कुटीर उद्योग (जैसे बेंत का काम, मिट्टी के खिलौने, सीप के बटन बनाना) पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। यह पत्र उन्होंने माँडले जेल से दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री श्री अनिलचंद्र विश्वास को लिखा था। साझी समझ: अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
खोजबीन के लिए: ‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (पुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से नेताजी पर आधारित फिल्म भी देखी जा सकती है।)
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘तरुण के स्वप्न’ उद्बोधन नेताजी ने कब और कहाँ दिया था?
2. नेताजी के स्वप्न में नारी का क्या स्थान है?
3. नेताजी ने अपने जीवन की सार्थकता किसमें देखी?
4. ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ से नेताजी का क्या आशय है?
5. नेताजी ने अपने उद्बोधन में कौन-कौन सी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने उद्बोधन में किस प्रकार के आदर्श समाज और राष्ट्र की कल्पना की है? विस्तार से लिखिए।
2. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज की युवा पीढ़ी को क्या प्रेरणा देता है? अपने विचार लिखिए।
3. नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन और कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
अभ्यास के लिए 10 बहुविकल्पीय प्रश्न और उनके बाद 5 अभिकथन-कारण प्रश्न दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर दीजिए, फिर कुंजी से मिलान कीजिए।
1. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) सुभाषचंद्र बोस
(ग) चित्तरंजन दास
(घ) भगत सिंह
2. यह उद्बोधन नेताजी ने किस वर्ष दिया था?
(क) 1857
(ख) 1921
(ग) 1929
(घ) 1944
3. नेताजी के राजनीतिक गुरु कौन माने जाते हैं?
(क) सरदार पटेल
(ख) देशबंधु चित्तरंजन दास
(ग) जवाहरलाल नेहरू
(घ) बाल गंगाधर तिलक
4. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के ‘उत्तराधिकारी’ कौन हैं?
(क) केवल अंग्रेज
(ख) देश के तरुण/भारतवासी
(ग) केवल नेता
(घ) विदेशी मित्र
5. नेताजी के आदर्श समाज में किसका कोई स्थान नहीं है?
(क) श्रम का
(ख) कर्म का
(ग) जातिभेद का
(घ) शिक्षा का
6. नेताजी के अनुसार आलसी और अकर्मण्य के लिए कहाँ स्थान नहीं रहेगा?
(क) उनके स्वप्न के राष्ट्र में
(ख) विद्यालय में
(ग) सेना में
(घ) परिवार में
7. नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को किस रूप में दिया?
(क) आदेश के रूप में
(ख) चेतावनी के रूप में
(ग) उपहार के रूप में
(घ) प्रश्न के रूप में
8. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के लिए प्राण देना कैसा है?
(क) व्यर्थ
(ख) मरण स्वर्ग समान
(ग) कष्टकारी
(घ) अनावश्यक
9. नेताजी की चर्चित पुस्तक का नाम क्या है?
(क) गीतांजलि
(ख) द इंडियन स्ट्रगल
(ग) हिंद स्वराज
(घ) डिस्कवरी ऑफ इंडिया
10. नेताजी का स्वप्न क्या है?
(क) केवल आर्थिक उन्नति
(ख) एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और स्वाधीन राष्ट्र
(ग) केवल सैन्य शक्ति
(घ) केवल व्यक्तिगत सुख
अभिकथन–कारण (Assertion–Reason)
निर्देश: (A) अभिकथन और (R) कारण दोनों दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए – (क) दोनों सही, R, A की सही व्याख्या; (ख) दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): नेताजी ने अपने आदर्श समाज में नारी को समान अधिकार देने की बात कही।
कारण (R): उनके अनुसार आधा समाज पिछड़ा रहकर राष्ट्र पूर्ण रूप से उन्नत नहीं हो सकता।
2. अभिकथन (A): नेताजी के आदर्श राष्ट्र में आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।
कारण (R): राष्ट्र की उन्नति श्रम और कर्म पर निर्भर करती है।
3. अभिकथन (A): नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप दिया।
कारण (R): नेताजी मानते थे कि युवाओं के पास देने योग्य कुछ भी नहीं है।
4. अभिकथन (A): नेताजी ने जातिभेद रहित समाज की कल्पना की।
कारण (R): जातिभेद समाज में असमानता और फूट उत्पन्न करता है।
5. अभिकथन (A): नेताजी के लिए उनका स्वप्न नित्य एवं अखंड सत्य था।
कारण (R): यह स्वप्न उन्हें असीम शक्ति और अपार आनंद देता था तथा उनके जीवन को सार्थक बनाता था।
परीक्षा-संबंधी सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-टिप्स
• उद्बोधन की मुख्य बातें याद रखें – सर्वांगीण स्वाधीन समाज, जातिभेद रहित, नारी को समान अधिकार, आर्थिक समानता और श्रम-कर्म की मर्यादा।
• तिथि एवं स्थान (29 दिसंबर 1929, मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन) और राजनीतिक गुरु (चित्तरंजन दास) जैसे तथ्य अवश्य याद रखें।
• ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ तथा ‘यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ’ जैसी प्रसिद्ध पंक्तियों को उद्धरण के रूप में लिखने का अभ्यास करें।
सामान्य त्रुटियाँ
• लेखक को कवि कहना – ध्यान रहे यह उद्बोधन (गद्य) है, कविता नहीं।
• उद्बोधन का वर्ष 1929 के स्थान पर 1944 (खून वाले नारे का वर्ष) लिख देना।
• ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ का नाम भूल जाना या उसका नेतृत्व किसी और को बता देना (नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 10 ‘तरुण के स्वप्न’ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?
इसके लेखक नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं। यह उनके भाषण का एक अंश है, अतः यह उद्बोधन (गद्य) विधा की रचना है। यह उद्बोधन उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिया था।
नेताजी ने अपने स्वप्न में कैसे समाज और राष्ट्र की कल्पना की है?
उन्होंने एक सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा स्वाधीन राष्ट्र की कल्पना की है, जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और सबको शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।
पाठ को ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक क्यों दिया गया है?
क्योंकि इस उद्बोधन में नेताजी देश के तरुणों (युवाओं) को संबोधित करते हुए अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न की बात करते हैं तथा यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं। पूरा भाषण युवाओं और एक उज्ज्वल स्वप्न पर केंद्रित है, इसलिए यह शीर्षक सार्थक है।
‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज के विद्यार्थियों को क्या प्रेरणा देता है?
यह पाठ युवाओं को ऊँचा लक्ष्य रखने, परिश्रमी एवं कर्मठ बनने, जातिभेद और असमानता को मिटाने, नारी-सम्मान करने तथा राष्ट्र-निर्माण में बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि स्वप्न का सच्चा उत्तराधिकारी वही है जो उसे साकार करने के लिए कर्म करता है।
