Class 8 Sanskrit Deepakam Chapter 11 Solutions (NCERT 2026–27) – सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
This page gives the complete solution for Class 8 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 11 ‘सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)’ – the concluding (second) part of the famous वीरवर story, with its प्रसंग, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, the two श्लोक with भावार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यास (अभ्यासात् जायते सिद्धिः) including प्रश्ननिर्माण, वाच्य-परिवर्तन, अन्वय, पदच्छेद, सन्धि एवं घटनाक्रम, along with extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- पाठगत श्लोकाः
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
- अत्र इदम् अवधेयम् (वाच्य-तालिकाः)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 8 का एकादश पाठ ‘सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)’ प्रसिद्ध वीरवर-कथा का दूसरा (समापन) भाग है, जो संस्कृत-कथासाहित्य के ‘हितोपदेश’/‘बेताल-कथा’ परम्परा पर आधारित है। यह भाग नाटकीय (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है। दशम पाठ (क-भागः) में वीरवर ने राजलक्ष्मी से राजा शूद्रक के दीर्घायु का उपाय जाना था। इस भाग में वीरवर अपने पुत्र शक्तिधर, पत्नी वेदरता एवं पुत्री वीरवती को सारी बात बताता है, और परिवार सहित देवी सर्वमङ्गला को सर्वस्व (पुत्र, स्वयं, पत्नी एवं पुत्री) समर्पित करने को सहर्ष तैयार हो जाता है। यह सब छिपकर देख रहा राजा शूद्रक भी अपना सर्वस्व त्याग करने को उद्यत हो जाता है। प्रसन्न देवी सबको पुनर्जीवित कर देती हैं। पाठ का केन्द्रीय भाव है – श्रेष्ठ कारण (सत्कार्य) के लिए त्याग ही श्रेष्ठ है – स्वामिभक्ति, कर्तव्य, परोपकार एवं निःस्वार्थ बलिदान।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ संस्कृत की प्रसिद्ध वीरवर-कथा पर आधारित नाट्य-रूपान्तर है। वीरवर राजा शूद्रक का स्वामिभक्त सेवक है। पूर्व-भाग (दशम पाठ) में उसे राजलक्ष्मी से ज्ञात होता है कि राजा का आयु केवल तीन दिन शेष है तथा यदि वीरवर अपना सर्वप्रिय वस्तु देवी सर्वमङ्गला को समर्पित करे, तो राजा सौ वर्ष जिएगा। इस भाग में वीरवर घर लौटकर अपने पुत्र, पत्नी एवं पुत्री को यह सारी बात बताता है। राजा शूद्रक गुप्त रूप से उनका पीछा करके सब कुछ सुनता एवं देखता है। यह पाठ हमें स्वामिभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं श्रेष्ठ उद्देश्य के लिए त्याग की प्रेरणा देता है।
पाठगत श्लोकाः
(पाठ में आए दो श्लोक, ज्यों-के-त्यों।)
सन्निमित्ते वरं त्यागो विनाशे नियते सति ॥ १ ॥
जायन्ते च म्रियन्ते च मादृशाः क्षुद्रजन्तवः ।
अनेन सदृशो लोके न भूतो न भविष्यति ॥ २ ॥ — दीपकम् (कक्षा 8), पाठ ११ – वीरवर-कथा
सार (Hindi Summary)
वीरवर राजा शूद्रक का अत्यन्त स्वामिभक्त सेवक था। पूर्व-भाग में उसे राजलक्ष्मी से ज्ञात हुआ कि राजा का जीवन केवल तीन दिन शेष है, परन्तु यदि वीरवर अपना सर्वप्रिय वस्तु देवी सर्वमङ्गला को समर्पित कर दे, तो राजा सौ वर्ष तक जीवित रहेगा। इस ख-भाग में वीरवर घर लौटकर सोई हुई पत्नी वेदरता, पुत्र शक्तिधर एवं पुत्री वीरवती को जगाकर सारी बात (राजलक्ष्मी-संवाद) सुनाता है। राजा शूद्रक भी गुप्त रूप से उनके पीछे-पीछे जाकर सारा वार्तालाप सुनता है।
पुत्र शक्तिधर यह सुनकर प्रसन्नता से कहता है कि पिता का सर्वप्रिय वस्तु तो वही (पुत्र) है, अतः स्वामी के जीवन की रक्षा के लिए उसका बलिदान परम प्रशंसनीय है – क्योंकि ‘श्रेष्ठ कारण के लिए धन एवं प्राण का त्याग ही श्रेष्ठ है’। पत्नी एवं पुत्री भी इस कुलोचित कार्य का समर्थन करती हैं। सब देवी सर्वमङ्गला के मन्दिर (आँगन) में जाते हैं। वीरवर देवी की पूजा करके पहले पुत्र को, फिर स्वयं को, और अन्त में पत्नी एवं पुत्री को देवी को समर्पित कर देता है। राजा शूद्रक यह सब अदृश्य रूप से देखता रहता है।
यह देखकर राजा सोचता है कि उसके समान तुच्छ प्राणी तो जन्म-मरण को प्राप्त होते रहते हैं, परन्तु वीरवर जैसा (त्यागी) व्यक्ति न पहले हुआ, न आगे होगा। ऐसे स्वामिभक्त के बिना राज्य एवं जीवन से उसे कोई प्रयोजन नहीं। अतः वह भी अपना सर्वस्व देवी को समर्पित करने उद्यत हो जाता है। प्रसन्न देवी सर्वमङ्गला प्रकट होकर राजा का हाथ पकड़कर उसे रोकती हैं और राजा की प्रार्थना पर वीरवर सहित उसके पुत्र, पत्नी एवं पुत्री को पुनर्जीवित कर देती हैं। सब सकुशल घर लौट आते हैं। अगले दिन राजा वीरवर से रात्रि का समाचार पूछता है; वीरवर विनम्रता से कहता है कि वह स्त्री उसके देखते ही अदृश्य हो गई, और कोई विशेष बात नहीं। राजा अत्यन्त प्रसन्न होकर वीरवर को समस्त कर्णाट-प्रदेश सौंप देता है। इस प्रकार पाठ यह संदेश देता है कि श्रेष्ठ उद्देश्य के लिए किया गया त्याग ही सर्वश्रेष्ठ है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवासम् | घर | House / dwelling |
| निद्रालसाम् | नींद के कारण अलसाई हुई को | To the one languishing due to sleep |
| दुहितरम् | पुत्री को | Daughter |
| अवर्णयत् | वर्णन किया | Described |
| सानन्दम् | प्रसन्नता के साथ | Happily |
| विनियोगः | नियुक्ति / प्रयोग | Utilisation |
| परमश्लाघ्यः | परम प्रशंसा के योग्य | Most appreciable |
| उत्सृजेत् | त्याग देना चाहिए | Should sacrifice / give up |
| सन्निमित्ते | अच्छा (श्रेष्ठ) कारण होने पर | Having a good cause |
| वरम् | श्रेयस्कर / श्रेष्ठ | Better / praiseworthy |
| आचरितव्यम् | आचरण करना चाहिए | Should be followed |
| निस्तारः | (ऋण से) मुक्ति, चुकाना | Repayment / release |
| आयतनम् | परिसर / आँगन | Courtyard / abode |
| गृह्यताम् | स्वीकार करो | (May it) be accepted |
| प्रयोजनम् | उद्देश्य / लक्ष्य | Purpose |
| उत्क्षिप्तः | ऊपर उठाया गया | Lifted upward |
| प्रत्यक्षीभूतया | प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित (देवी) के द्वारा | By the one who became manifest |
| राज्यभङ्गः | राज्य का नाश | Downfall of the empire |
| सत्त्वोत्कर्षेण | सत्त्वगुण की पराकाष्ठा से | By excellence of purity (courage) |
| वात्सल्येन | स्नेह / वात्सल्यभाव से | With affection |
| प्रासादम् | राजभवन / महल | Palace |
| भूपालः | राजा | King |
| क्षुद्रजन्तवः | तुच्छ प्राणी | Lowly creatures |
अभ्यासः (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
1. निम्नलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयानि स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
(रेखांकित/मोटे पद के आधार पर उपयुक्त प्रश्नवाचक पद लगाकर प्रश्न बनाइए।)
(क) वीरवरो पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत् ।
(ख) ततस्ते सर्वे सर्वमङ्गलाया आयतनं गताः ।
(ग) वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं पुत्रोत्सर्गेण अकरोत् ।
(घ) राजा स्वप्रासादं प्राविशत् ।
(ङ) महीपतिः वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् अयच्छत् ।
2. अधोलिखितान् प्रश्नान् उत्तरत —
(क) वीरवरः किम् अवर्णयत् ?
(ख) प्राज्ञः धनानि जीवितञ्च केभ्यः उत्सृजेत् ?
(ग) केन सदृशः लोके न भूतो न भविष्यति ?
(घ) का अदृश्या अभवत् ?
(ङ) सपरिवारः वीरवरः कुत्र गतवान् ?
3. अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत —
उदाहरणम् – धन्यः अहम् स्वामिजीवितरक्षार्थं विनियुक्तः । → शक्तिधराय
| वाक्यम् | रक्तवर्णीयपदं केभ्यः प्रयुक्तम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) भगवति ! न मे प्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा । | सर्वमङ्गलायै (देव्यै सर्वमङ्गलायै) |
| (ख) वत्स ! अनेन ते सत्त्वोत्कर्षेण भृत्यवात्सल्येन च परं प्रीतास्मि । | शूद्रकाय (राज्ञे) – देवी राज्ञं प्रति वदति |
| (ग) धन्याहं यस्या ईदृशो जनको भ्राता च । | वीरवत्यै (वीरवरस्य दुहित्रे) |
| (घ) तदेतत्परित्यक्ते न मम राज्येनापि किं प्रयोजनम् ! | शूद्रकाय (राज्ञे) |
| (ङ) अयम् अपि सपरिवारो जीवतु । | वीरवराय (राजपुत्राय वीरवराय) |
4. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत —
यथा – कृतो मया गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो स्वपुत्रोत्सर्गेण । → गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो मया स्वपुत्रोत्सर्गेण कृतः ।
5. उदाहरणानुगुणम् अधोलिखितानां पदानां पदच्छेदं कुरुत —
यथा – यद्येवमस्मत्कुलोचितम् = यदि-एवम्-अस्मत्-कुलोचितम् ; सत्त्वोत्कर्षेण = सत्त्व-उत्कर्षेण
6. (क) उदाहरणानुगुणं पाठगतानि पदानि अधिकृत्य सन्धियुक्तपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत —
यथा – स्व + आवासम् = स्वावासम्
(ख) निम्नलिखितपदानां सन्धिच्छेदं कुरुत —
7. अधोलिखितानि कथनानि कथायाः घटनानुसारं लिखत —
(कथन कथा-घटना के क्रम में लिखिए।)
अत्र इदम् अवधेयम् (वाच्य-तालिकाः)
पाठ में ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ के अन्तर्गत वाच्य (Voice) का परिचय दिया गया है। वाच्य तीन प्रकार के होते हैं – (1) कर्तृवाच्यम् (2) कर्मवाच्यम् (3) भाववाच्यम्।
1. कर्तृवाच्यम् (Active Voice)
कर्तृवाच्य में कर्तृपद की प्रथमा विभक्ति होती है तथा क्रियापद कर्तृपद के अनुसार (पुरुष-वचन में) होता है। यदि वाक्य में कर्मपद हो, तो उसकी द्वितीया विभक्ति होती है।
| एकवचन/उदाहरण | बहुवचन/उदाहरण |
|---|---|
| बालकः ग्रामं गच्छति । | बालकाः ग्रामं गच्छन्ति । |
| त्वं ग्रामं गच्छसि । | यूयं ग्रामं गच्छथ । |
| अहं ग्रामं गच्छामि । | वयं ग्रामं गच्छामः । |
2. कर्मवाच्यम् (Passive Voice)
कर्मवाच्य में कर्तृपद की तृतीया विभक्ति, कर्मपद की प्रथमा विभक्ति होती है तथा क्रियापद कर्मपद के अनुसार होता है। क्रिया का रूप “धातुः + य + आत्मनेपदम्” होता है। यथा – गम् + य + ते = गम्यते। एवं – पठ्यते, लिख्यते, खाद्यते।
| एकवचन/उदाहरण | बहुवचन/उदाहरण |
|---|---|
| बालकेन ग्रामः गम्यते । | बालकेन ग्रामाः गम्यन्ते । |
| त्वया ग्रामः गम्यते । | युष्माभिः ग्रामाः गम्यन्ते । |
| मया ग्रामः गम्यते । | अस्माभिः ग्रामाः गम्यन्ते । |
3. भाववाच्यम् (Impersonal Voice)
जब अकर्तृवाच्य वाक्य में कर्मपद का अभाव हो, तब भाववाच्य का प्रयोग होता है। तब कर्तृपद की तृतीया विभक्ति होती है तथा क्रियापद का केवल एक ही अपरिवर्तनीय रूप (प्रथमपुरुष एकवचन) रहता है, जो कर्ता बदलने पर भी नहीं बदलता।
| एकवचन/उदाहरण | बहुवचन/उदाहरण |
|---|---|
| बालकेन हस्यते । | बालकैः हस्यते । |
| त्वया हस्यते । | युष्माभिः हस्यते । |
| मया हस्यते । | अस्माभिः हस्यते । |
ध्यातव्य – कुछ धातुएँ सदैव अकर्मक होती हैं, यथा – हस्, क्रन्द्, स्था, स्ना, शी, भू इत्यादि। इनसे प्रायः भाववाच्य ही बनता है।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (श्लोक एवं सुभाषित)
योग्यताविस्तर में पाठगत दो श्लोकों का पदच्छेद, अन्वय एवं भावार्थ तथा कुछ सुभाषित दिए गए हैं।
सन्निमित्ते वरं त्यागो विनाशे नियते सति ॥ १ ॥
अनेन सदृशो लोके न भूतो न भविष्यति ॥ २ ॥
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
पाठस्य कथाधारेण सरलसंस्कृतेन एकं नाटकं रचयत तस्य मञ्चनं च कुरुत ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. यह पाठ किस प्रसिद्ध कथा का कौन-सा भाग है?
2. शक्तिधर ने पिता की बात सुनकर क्या कहा?
3. राजा शूद्रक ने सब कुछ देखकर क्या निश्चय किया?
4. देवी सर्वमङ्गला ने प्रसन्न होकर क्या किया?
5. अगले दिन राजा के पूछने पर वीरवर ने क्या उत्तर दिया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘सन्निमित्ते वरं त्यागः’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. वीरवर के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
8. इस पाठ से हमें कौन-कौन सी शिक्षाएँ मिलती हैं?
MCQ & अभिकथन-कारण
1. यह पाठ किस कथा का भाग है?
(क) पञ्चतन्त्र की कथा
(ख) वीरवर-कथा
(ग) नल-दमयन्ती कथा
(घ) शकुन्तला कथा
2. वीरवर किस राजा का सेवक था?
(क) विक्रमादित्यस्य
(ख) भोजस्य
(ग) शूद्रकस्य
(घ) हर्षस्य
3. वीरवर के पुत्र का नाम क्या था?
(क) वीरवती
(ख) शक्तिधरः
(ग) वेदरता
(घ) सर्वमङ्गला
4. ‘सन्निमित्ते’ पद का अर्थ है—
(क) धन के लिए
(ख) श्रेष्ठ (अच्छा) कारण होने पर
(ग) घर में
(घ) रात्रि में
5. श्लोक के अनुसार प्राज्ञ को धन एवं जीवन का त्याग किसके लिए करना चाहिए?
(क) स्वार्थाय
(ख) परार्थे
(ग) यशसे
(घ) क्रोधाय
6. किस देवी को सर्वस्व समर्पित किया गया?
(क) सरस्वत्यै
(ख) लक्ष्म्यै
(ग) सर्वमङ्गलायै
(घ) दुर्गायै
7. वीरवर का सर्वप्रिय वस्तु क्या था?
(क) धनम्
(ख) स्वपुत्रः (शक्तिधरः)
(ग) खड्गः
(घ) राज्यम्
8. प्रसन्न होकर देवी ने राजा का क्या पकड़ा?
(क) पादम्
(ख) करम् (हाथ)
(ग) खड्गम्
(घ) वस्त्रम्
9. प्रसन्न होकर राजा ने वीरवर को क्या दिया?
(क) सुवर्णम्
(ख) समग्रकर्णाटप्रदेशम्
(ग) खड्गम्
(घ) रथम्
10. इस पाठ की मुख्य प्रेरणा क्या है?
(क) धन-संचय
(ख) श्रेष्ठ उद्देश्य के लिए त्याग एवं स्वामिभक्ति
(ग) युद्ध
(घ) प्रतिशोध
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): वीरवर अपने पुत्र शक्तिधर को देवी को समर्पित करने को तैयार हो गया।
कारण (R): शक्तिधर ही वीरवर का सर्वप्रिय वस्तु था और स्वामी के जीवन की रक्षा के लिए उसका बलिदान आवश्यक था।
2. अभिकथन (A): राजा शूद्रक भी अपना सर्वस्व त्यागने को उद्यत हो गया।
कारण (R): राजा को धन का लोभ था और वह और अधिक धन पाना चाहता था।
3. अभिकथन (A): देवी सर्वमङ्गला ने सबको पुनर्जीवित कर दिया।
कारण (R): देवी वीरवर के सत्त्वोत्कर्ष एवं भृत्यवात्सल्य से परम प्रसन्न हुई थीं।
4. अभिकथन (A): अगले दिन वीरवर ने राजा को अपने महान् त्याग का बखान नहीं किया।
कारण (R): वीरवर अत्यन्त विनम्र एवं निःस्वार्थ सेवक था।
5. अभिकथन (A): ‘सम्’ उपसर्ग से रहित ‘हस्, क्रन्द्, स्था’ आदि धातुओं से प्रायः भाववाच्य बनता है।
कारण (R): ये धातुएँ अकर्मक होती हैं, अतः इनमें कर्म न होने से भाववाच्य का प्रयोग होता है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- दोनों श्लोक (धनानि जीवितञ्चैव… एवं जायन्ते च म्रियन्ते च…) पदच्छेद, अन्वय एवं भावार्थ सहित कण्ठस्थ करें।
- तीनों वाच्य (कर्तृ-कर्म-भाव) के लक्षण एवं उदाहरण तालिका सहित याद रखें – इन पर प्रश्न अवश्य आते हैं।
- शब्दार्थ (सन्निमित्ते, उत्सृजेत्, निस्तारः, आयतनम्, गृह्यताम्, सत्त्वोत्कर्षेण आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें।
- घटनाक्रम (प्रश्न 7) के लिए कथा को क्रम से समझें – घर लौटना → पुत्र की सहमति → समर्पण → राजा का त्याग → देवी द्वारा जीवनदान → अगले दिन वीरवर का उत्तर।
- पात्रों के नाम सही याद रखें – वीरवर, पुत्र शक्तिधर, पत्नी वेदरता, पुत्री वीरवती, राजा शूद्रक, देवी सर्वमङ्गला।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- कर्मवाच्य एवं भाववाच्य में भ्रम – कर्म होने पर कर्मवाच्य, कर्म न होने पर (अकर्मक धातु में) भाववाच्य होता है।
- कर्मवाच्य/भाववाच्य में कर्ता की तृतीया विभक्ति न लगाना (बालकेन, मया, त्वया)।
- सन्धि-विच्छेद की भूल – महीपतिस्तस्मै = महीपतिः + तस्मै ; नेदानीम् = न + इदानीम्।
- पात्रों के नाम में गड़बड़ी – शक्तिधर (पुत्र) को पुत्री समझ लेना।
- इसे श्लोक-प्रधान पाठ समझना – यह मुख्यतः नाटकीय (संवादात्मक) गद्य-कथा है, जिसमें केवल दो श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 8 का पाठ 11 ‘सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)’ किस पर आधारित है?
यह पाठ संस्कृत की प्रसिद्ध वीरवर-कथा का दूसरा (समापन) भाग है, जो नाटकीय (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है। इसमें वीरवर परिवार सहित स्वामी के जीवन की रक्षा हेतु देवी सर्वमङ्गला को सर्वस्व समर्पित कर देता है।
‘सन्निमित्ते वरं त्यागः’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – ‘श्रेष्ठ (अच्छे) कारण के लिए त्याग ही श्रेष्ठ है’। जब विनाश निश्चित ही है, तो बुद्धिमान् को धन एवं जीवन का त्याग परोपकार/सत्कार्य में कर देना ही श्रेयस्कर है।
इस पाठ के मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?
मुख्य पात्र हैं – स्वामिभक्त सेवक वीरवर, उसका पुत्र शक्तिधर, पत्नी वेदरता, पुत्री वीरवती, राजा शूद्रक तथा देवी सर्वमङ्गला। अन्त में देवी प्रसन्न होकर सबको पुनर्जीवित कर देती हैं और राजा वीरवर को समस्त कर्णाट-प्रदेश सौंप देता है।
कथा, श्लोक, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
