NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 2 ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ (कवि – गोस्वामी तुलसीदास) का पूरा समाधान देता है। यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है, जिसमें सीता-स्वयंवर में शिव-धनुष भंग के बाद परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण की व्यंग्योक्तियों का सरस चित्रण है।
गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ माना जाता है (कुछ विद्वान सोरों, जिला–एटा को उनका जन्मस्थान मानते हैं)। बचपन में ही माता-पिता से उनका बिछोह हो गया और जीवन संघर्षपूर्ण रहा। कहा जाता है कि गुरुकृपा से उन्हें रामभक्ति का मार्ग मिला। वे मानव-मूल्यों के उपासक तथा रामभक्ति परंपरा के अतुलनीय कवि थे। उनका अमर ग्रंथ रामचरितमानस अवधी भाषा में रचित है, जिसमें राम मानवीय मर्यादाओं और आदर्शों के प्रतीक हैं। कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली तथा विनयपत्रिका उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं। अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार था। उनकी रचनाओं में चौपाई, दोहा, सोरठा, सवैया और कवित्त जैसे अनेक छंदों तथा प्रबंध एवं मुक्तक दोनों काव्य-रूपों का उत्कृष्ट प्रयोग मिलता है। सन् 1623 में काशी में उनका देहावसान हुआ।
पाठ का सार
प्रस्तुत अंश तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। सीता-स्वयंवर के अवसर पर श्रीराम द्वारा शिव-धनुष तोड़े जाने का समाचार पाकर मुनि परशुराम क्रोध में भरकर सभा में आ पहुँचते हैं। शिव-धनुष को खंडित देखकर वे आपे से बाहर हो जाते हैं और ललकारते हैं कि जिसने यह धनुष तोड़ा है, वह उनका सहस्रबाहु जैसा शत्रु है; या तो वह समाज से अलग हो जाए, अन्यथा सभी राजा मारे जाएँगे।
श्रीराम विनम्रता से उत्तर देते हैं कि यह धनुष किसी सेवक ने ही तोड़ा होगा। इस पर लक्ष्मण मुस्कुराते हुए परशुराम का अपमान करते हुए कहते हैं कि उन्होंने तो बचपन में खेल-खेल में ऐसे अनेक धनुष तोड़े, फिर इसी पुराने धनुष पर इतनी ममता क्यों? परशुराम क्रोध में अपने फरसे की ओर इशारा करते हुए स्वयं को बाल-ब्रह्मचारी, अत्यंत क्रोधी और क्षत्रियकुल का संहारक बताते हैं। वे बार-बार अपना भयानक फरसा दिखाकर डराते हैं।
लक्ष्मण निडरता से व्यंग्य करते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया (कमजोर) नहीं है जो तर्जनी देखकर ही मर जाए; उन्होंने फरसा और धनुष देखकर ही अभिमानपूर्वक कुछ कहा था। साथ ही वे मुनि का जनेऊ देखकर उन्हें ब्राह्मण मानते हुए क्रोध रोक लेते हैं, क्योंकि देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर उनके कुल में वार नहीं किया जाता। लक्ष्मण की वीर-रस से पगी व्यंग्योक्तियाँ और व्यंजना-शैली की सरस अभिव्यक्ति इस प्रसंग की प्रमुख विशेषता है। राम के विनय और विश्वामित्र के समझाने पर अंततः परशुराम का क्रोध शांत होता है। इस प्रकार यह संवाद राम की मर्यादा, लक्ष्मण के तेज तथा परशुराम के क्रोध एवं अंततः उनके शांत होने का मार्मिक एवं रोचक चित्रण प्रस्तुत करता है।
मूलभाव / प्रसंग
यह संवाद तीन पात्रों – राम, लक्ष्मण और परशुराम – के स्वभाव को उभारता है। राम शांत, विनम्र और मर्यादापुरुषोत्तम हैं; वे मधुर वचनों से परशुराम के क्रोध को शांत करना चाहते हैं। लक्ष्मण तेजस्वी, निडर और व्यंग्यप्रिय हैं; वे वीर-रस से भरी व्यंग्योक्तियों द्वारा परशुराम के क्रोध-भरे वचनों का उत्तर देते हैं। परशुराम अत्यंत क्रोधी, आत्म-प्रशंसक तथा अपने फरसे एवं शक्ति पर गर्व करने वाले हैं। इस प्रसंग का मूल भाव यह है कि साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो श्रेष्ठ है, तथा सच्चा वीर अपनी वीरता का बखान नहीं करता।
कठिन शब्द-अर्थ
शब्द
अर्थ
भंजनिहारा
भंग करने वाला, तोड़ने वाला
रिसाइ
क्रोध करना, नाराज़ होना
रिपु
शत्रु
बिलगाउ
अलग हो जाना
अवमाने
अपमान करना
लरिकाईं
बचपन में, लड़कपन में
परसु / फरसा
कुल्हाड़ी की तरह का एक शस्त्र (परशुराम का प्रमुख शस्त्र)
कोही
क्रोधी
महिदेव
ब्राह्मण
बिलोकु
देखकर, देखो
अभर्क / अरभक
बच्चा, शिशु
महाभट
महान योद्धा
मही
धरती, पृथ्वी
कुठारु
कुल्हाड़ा
कुम्हड़बतिया
बहुत कमजोर, निर्बल व्यक्ति; कुम्हड़े (काशीफल) का बहुत छोटा फल
तर्जनी
अँगूठे के पास की उँगली
कुलिस
कठोर, वज्र के समान
सरोष
क्रोध सहित
भृगुकुलकेतु
भृगुवंश की पताका (परशुराम)
सहसबाहु
सहस्रबाहु; एक हजार भुजाओं वाला राजा कार्तवीर्य
सेवकाई
सेवा, सेवक का कार्य
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उत्तरपरशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने को साधारण घटना बताते हुए ये तर्क दिए–(क) उनके लिए सभी पुराने धनुष एक समान हैं; इस धनुष के टूट जाने में न कोई हानि है, न लाभ।(ख) श्रीराम ने इसे नया समझकर देखा भर था, छूते ही यह टूट गया; इसमें राम का कोई दोष नहीं।(ग) उन्होंने तो बचपन में खेल-खेल में ऐसे अनेक धनुष तोड़े, तब किसी ने क्रोध नहीं किया; फिर इसी पुराने धनुष पर इतनी ममता क्यों?इन तर्कों से लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध को व्यंग्य द्वारा हल्का सिद्ध करना चाहा।
2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तरराम का स्वभाव– राम शांत, विनम्र, मर्यादाशील और धैर्यवान हैं। वे परशुराम के क्रोध पर भी नम्रता बनाए रखते हैं और मधुर वचनों से उन्हें शांत करना चाहते हैं। वे स्वयं को सेवक कहकर परशुराम का सम्मान करते हैं।लक्ष्मण का स्वभाव– लक्ष्मण तेजस्वी, निडर, स्पष्टवक्ता और व्यंग्यप्रिय हैं। वे परशुराम के क्रोध से तनिक भी नहीं डरते और वीर-रस से भरी व्यंग्योक्तियों द्वारा उनका उत्तर देते हैं। वे अन्याय और झूठी डींग को सहन नहीं करते।इस प्रकार राम का शांत-मर्यादित स्वभाव और लक्ष्मण का उग्र-निर्भीक स्वभाव एक-दूसरे के विपरीत दिखाई देते हैं।
3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।
उत्तर (संवाद शैली)परशुराम– रे नृपबालक! तू काल के वश में होकर मुझसे ऐसी बातें कर रहा है। यह कोई साधारण धनुष नहीं, यह तो त्रिपुरारि (शिव) का धनुष था, जिसे सारा संसार जानता है।लक्ष्मण– (मुस्कुराते हुए) हे देव! हमारे लिए तो सभी धनुष एक समान हैं। इस पुराने धनुष के टूटने में क्या हानि, क्या लाभ? राम ने तो इसे नया समझकर देखा भर था, छूते ही यह टूट गया।परशुराम– रे दुष्ट! तू मेरे स्वभाव को नहीं जानता। मैं बाल-ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हूँ, क्षत्रियकुल का संहारक हूँ। यह फरसा देख!लक्ष्मण– (कोमल वाणी में) अहो मुनीश्वर! आप तो अपने को बड़ा योद्धा समझते हैं। बार-बार मुझे कुल्हाड़ी दिखाकर मानो फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं जो तर्जनी देखते ही मर जाए।
4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए–बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही॥भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा॥मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर। गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥
उत्तरइस पद्यांश के आधार पर परशुराम ने अपने विषय में सभा में निम्नलिखित बातें कहीं–(क) वे बाल-ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हैं।(ख) वे संसार भर में प्रसिद्ध क्षत्रियकुल के संहारक (द्रोही) हैं।(ग) उन्होंने अपनी भुजाओं के बल से पृथ्वी को अनेक बार क्षत्रियों से रहित कर दिया और वह भूमि ब्राह्मणों को दान में दे दी।(घ) उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाओं को काटने वाला है; अतः राजकुमार (लक्ष्मण) इस भयानक फरसे को देख लें।(ङ) वे लक्ष्मण को चेतावनी देते हैं कि अपने माता-पिता को शोक में न डाले; उनका फरसा गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला अत्यंत भयंकर शस्त्र है।
5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?
उत्तरलक्ष्मण ने वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताईं–(क) वीर योद्धा अपनी वीरता का बखान या डींग स्वयं नहीं हाँकता, बल्कि युद्धभूमि में अपने पराक्रम से उसे सिद्ध करता है।(ख) वह कायरों की भाँति केवल अपनी ताकत दिखाकर डराने-धमकाने का काम नहीं करता।(ग) सच्चा शूरवीर देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय जैसे निर्बलों पर वार नहीं करता।(घ) वह गिरे हुए अथवा असहाय शत्रु पर भी प्रहार नहीं करता।इन कथनों से लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि शक्ति का असली प्रमाण कर्म है, केवल वचन नहीं।
6. साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तरयह कथन पूर्णतः सत्य है। साहस और शक्ति मनुष्य के आवश्यक गुण हैं, किंतु यदि इनके साथ विनम्रता न हो तो ये अहंकार और क्रूरता का रूप ले लेते हैं।इस प्रसंग में परशुराम साहसी और शक्तिशाली हैं, पर विनम्रता के अभाव में वे क्रोध एवं घमंड से भरे दिखाई देते हैं। इसके विपरीत श्रीराम शक्तिशाली होते हुए भी विनम्र और मर्यादित हैं, इसी कारण वे आदरणीय बनते हैं।विनम्रता शक्ति को संयमित करती है और व्यक्ति को सबका प्रिय बनाती है। अतः साहस और शक्ति के साथ विनम्रता का होना ही श्रेष्ठ एवं वांछनीय है।
7. भाव स्पष्ट कीजिए–(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥ पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥ देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥
उत्तर(क) लक्ष्मण हँसकर कोमल (किंतु व्यंग्यपूर्ण) वाणी में कहते हैं– अहो! आप तो अपने को बड़ा अभिमानी योद्धा मानते हैं। आप बार-बार मुझे अपनी कुल्हाड़ी दिखाकर डराना चाहते हैं, मानो फूँक मारकर ही पहाड़ उड़ा देना चाहते हों। तात्पर्य यह है कि लक्ष्मण परशुराम की धमकियों को व्यर्थ एवं असंभव बताकर उनका उपहास करते हैं।(ख) लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया (कमजोर फूल जैसा निर्बल व्यक्ति) नहीं है जो केवल तर्जनी (उँगली) के इशारे से ही डरकर मर जाए। उन्होंने तो परशुराम का फरसा, धनुष और बाण देखकर ही कुछ अभिमानपूर्वक कहा था। आशय यह है कि लक्ष्मण निडर हैं और परशुराम के शस्त्रों एवं धमकियों से तनिक भी भयभीत नहीं होते।
8. पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर1. तुलसीदास ने इस प्रसंग की रचना सरल, प्रवाहपूर्ण एवं मधुर अवधी भाषा में की है।2. दोहा और चौपाई छंदों का सुंदर एवं संतुलित प्रयोग हुआ है।3. भाषा में लाक्षणिकता और व्यंजना शक्ति की प्रधानता है।4. लक्ष्मण के कथनों में वीर-रस से पगी व्यंग्योक्तियों की अनूठी छटा है।5. प्रसंग में वीर रस के साथ हास्य रस का मनोहर संयोग हुआ है।6. अनुप्रास, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा एवं पुनरुक्ति जैसे अलंकारों का सहज प्रयोग है।7. मुहावरों और लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा सजीव एवं प्रभावशाली बनी है।8. संवादात्मक शैली के कारण प्रसंग नाटकीय एवं रोचक बन पड़ा है।9. पात्रों के मनोभावों के अनुरूप शब्द-चयन हुआ है।10. भाषा में ओज, माधुर्य और प्रसाद गुण का सुंदर समन्वय है।
9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
उत्तरइस प्रसंग में लक्ष्मण की व्यंग्योक्तियाँ हास्य और वीर-रस का अनूठा सौंदर्य उत्पन्न करती हैं। कुछ उदाहरण–(क) “बहु धनुही तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न अस रिस कीन्हि गोसाईं॥” – लक्ष्मण व्यंग्य करते हैं कि बचपन में तो ऐसे अनेक धनुष तोड़े, तब क्रोध क्यों नहीं किया?(ख) “इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥” – यहाँ कोई कमजोर नहीं जो केवल उँगली के इशारे से डरकर मर जाए।(ग) “पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥” – बार-बार कुल्हाड़ी दिखाकर मानो फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं।इन व्यंग्योक्तियों के द्वारा लक्ष्मण परशुराम की झूठी डींग और क्रोध का सरस उपहास करते हैं, जिससे प्रसंग अत्यंत रोचक बन जाता है।
10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए–(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही।(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
उत्तर(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही– इसमें ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है, अतः यहाँ अनुप्रास अलंकार है।(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा– यहाँ वचन की तुलना करोड़ों वज्रों से ‘सम’ वाचक शब्द द्वारा की गई है, अतः उपमा अलंकार है; साथ ही ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार भी है।
रचना और अभिव्यक्ति
11. “सामाजिक जीवन में क्रोध की ज़रूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।” आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी-कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।
उत्तरमैं आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इस कथन से सहमत हूँ कि क्रोध सदैव नकारात्मक नहीं होता।पक्ष में– अन्याय, अत्याचार, शोषण और अनैतिकता के विरुद्ध उठने वाला क्रोध सकारात्मक एवं आवश्यक होता है। यदि अन्याय पर क्रोध न आए तो मनुष्य उसका प्रतिकार ही नहीं कर पाएगा। समाज-सुधार और स्वतंत्रता-संग्राम के पीछे भी अन्याय के विरुद्ध यही प्रबल भावना रही है।सावधानी– किंतु क्रोध तभी सकारात्मक होता है जब वह उचित कारण, संयम और विवेक के साथ हो। अनियंत्रित एवं अकारण क्रोध, जैसे परशुराम का प्रारंभिक क्रोध, हानिकारक होता है।अतः क्रोध विवेकपूर्ण और न्यायसंगत हो तो उपयोगी, अन्यथा विनाशकारी सिद्ध होता है।
12. अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर (संभावित)मेरे मित्र रोहन का स्वभाव अत्यंत सरल, मिलनसार और सहयोगी है।वह सदा सच बोलता है, कठिनाई में मित्रों की सहायता करता है और कभी अहंकार नहीं करता।वह परिश्रमी, अनुशासित तथा धैर्यवान है और छोटों के साथ स्नेह एवं बड़ों के साथ आदर से पेश आता है। इन्हीं गुणों के कारण वह सबका प्रिय है। (विद्यार्थी अपने मित्र के अनुसार लिखें।)
13. ‘दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए’–इस शीर्षक को ध्यान में रखते हुए एक कहानी लिखिए।
उत्तर (नमूना कहानी)एक जंगल में एक घमंडी शेर रहता था जो छोटे जीवों को तुच्छ समझता था। एक दिन वह शिकारी के जाल में फँस गया और छटपटाने लगा।तभी एक छोटा-सा चूहा वहाँ आया और बोला– ‘मैं आपकी सहायता करूँगा।’ शेर ने उपहास किया, पर चूहे ने अपने तीखे दाँतों से जाल काट डाला और शेर को मुक्त कर दिया।शेर लज्जित हुआ और उसने समझा कि किसी की क्षमता को उसके आकार से नहीं आँकना चाहिए। शिक्षा– दूसरों की क्षमताओं को कभी कम नहीं समझना चाहिए।
14. उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।
उत्तर (संभावित)एक बार मैंने देखा कि कुछ बड़े लड़के एक छोटे बच्चे की पुस्तकें छीनकर उसे परेशान कर रहे थे।मुझसे यह अन्याय सहन नहीं हुआ। मैंने आगे बढ़कर उनका विरोध किया, बच्चे की पुस्तकें वापस दिलाईं और अपने शिक्षक को इसकी सूचना दी।इस घटना से मुझे आत्म-संतोष मिला और यह सीख मिली कि अन्याय के विरुद्ध चुप नहीं रहना चाहिए। (विद्यार्थी अपना अनुभव लिखें।)
15. अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?
उत्तरअवधी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में बोली जाती है।इसके अंतर्गत लखनऊ, अयोध्या (फैजाबाद), सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, अमेठी, बहराइच, गोंडा एवं आसपास के जिले आते हैं।इसके अतिरिक्त बिहार के कुछ सीमावर्ती भागों तथा नेपाल की तराई के कुछ क्षेत्रों में भी अवधी का प्रचलन है।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. यह प्रसंग किस ग्रंथ के किस कांड से लिया गया है?
उत्तरयह प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है।
2. परशुराम क्रोधित होकर सभा में क्यों आए?
उत्तरसीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष तोड़ दिए जाने का समाचार पाकर परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर सभा में आए, क्योंकि वह धनुष उनके आराध्य शिव का था।
3. श्रीराम ने धनुष तोड़ने वाले के विषय में परशुराम से क्या कहा?
उत्तरश्रीराम ने विनम्रता से कहा कि शिव-धनुष को तोड़ने वाला उनका कोई सेवक ही होगा; उन्होंने स्वयं को सेवक कहकर परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास किया।
4. लक्ष्मण ने अपने कुल की किस मर्यादा का उल्लेख किया?
उत्तरलक्ष्मण ने कहा कि देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय – इन पर उनके कुल में वार नहीं किया जाता; परशुराम का जनेऊ देखकर उन्होंने इसी कारण अपना क्रोध रोक लिया।
5. परशुराम और सहस्रबाहु के बीच बैर का क्या कारण था?
उत्तरराजा कार्तवीर्य सहस्रबाहु ने परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि की कामधेनु गाय का बलपूर्वक अपहरण कर लिया था; क्रोधित होकर परशुराम ने सहस्रबाहु का वध कर दिया, जिससे दोनों कुलों में बैर उत्पन्न हुआ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. इस प्रसंग के आधार पर परशुराम के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर(क) क्रोधी स्वभाव– परशुराम अत्यंत क्रोधी हैं; धनुष भंग का समाचार सुनते ही वे आपे से बाहर हो जाते हैं।(ख) शक्तिशाली एवं वीर– वे क्षत्रियकुल के संहारक और अपने फरसे के बल पर पृथ्वी को अनेक बार क्षत्रिय-रहित करने वाले बताए गए हैं।(ग) आत्म-प्रशंसक– वे बार-बार अपनी वीरता एवं शस्त्र का बखान करते हैं।(घ) ब्राह्मण-तेज– वे बाल-ब्रह्मचारी और तेजस्वी ऋषि हैं, किंतु उनमें संयम का अभाव है।(ङ) अंततः विवेकशील– राम के विनय और विश्वामित्र के समझाने पर अंत में उनका क्रोध शांत हो जाता है, जिससे उनकी विवेकशीलता प्रकट होती है।
7. लक्ष्मण के व्यंग्य-वचनों ने परशुराम के क्रोध को और बढ़ा दिया– उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तरलक्ष्मण के निडर एवं व्यंग्यपूर्ण वचन परशुराम के क्रोध को निरंतर भड़काते रहे।जब लक्ष्मण ने धनुष-भंग को साधारण घटना बताते हुए कहा कि बचपन में ऐसे अनेक धनुष तोड़े, तब परशुराम और क्रोधित हो उठे।“इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं” तथा “चहत उड़ावन फूँकि पहारू” जैसे व्यंग्यों से लक्ष्मण ने परशुराम की धमकियों का उपहास किया, जिससे उनका क्रोध बढ़ता गया।इन व्यंग्यों ने जहाँ प्रसंग में हास्य एवं वीर-रस उत्पन्न किया, वहीं परशुराम के क्रोध को भी चरम तक पहुँचा दिया।
8. इस प्रसंग से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तरइस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि साहस और शक्ति के साथ विनम्रता का होना श्रेष्ठ है।सच्चा वीर अपनी वीरता का बखान नहीं करता, बल्कि कर्म से उसे सिद्ध करता है; केवल डींग हाँकना और दूसरों को डराना कायरता है।अनियंत्रित क्रोध हानिकारक है, अतः क्रोध पर संयम और विवेक रखना आवश्यक है। साथ ही, निर्बल पर वार न करना और गिरे हुए शत्रु को क्षमा करना श्रेष्ठ मानवीय मूल्य हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के रचयिता कौन हैं?
(क) सूरदास
(ख) गोस्वामी तुलसीदास
(ग) कबीरदास
(घ) मीराबाई
2. यह प्रसंग रामचरितमानस के किस कांड से लिया गया है?
(क) अयोध्याकांड
(ख) अरण्यकांड
(ग) बालकांड
(घ) किष्किंधाकांड
3. परशुराम के क्रोध का तत्कालीन कारण क्या था?
(क) सीता का अपमान
(ख) शिव-धनुष का टूट जाना
(ग) राजाओं का अहंकार
(घ) विश्वामित्र का वचन
4. श्रीराम ने धनुष तोड़ने वाले को क्या बताया?
(क) अपना भाई
(ख) अपना शत्रु
(ग) अपना कोई सेवक
(घ) कोई राजा
5. परशुराम का प्रमुख शस्त्र क्या था?
(क) धनुष-बाण
(ख) तलवार
(ग) फरसा (परसु)
(घ) गदा
6. ‘कुम्हड़बतिया’ शब्द का अर्थ है–
(क) महान योद्धा
(ख) बहुत कमजोर/निर्बल व्यक्ति
(ग) क्रोधी व्यक्ति
(घ) ब्राह्मण
7. लक्ष्मण ने अपने कुल में किन पर वार न करने की बात कही?
(क) राजा और सैनिक
(ख) देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय
(ग) स्त्री और बालक
(घ) मुनि और तपस्वी
8. परशुराम ने स्वयं को किस वंश का बताया?
(क) रघुवंश
(ख) यदुवंश
(ग) भृगुवंश (भृगुकुल)
(घ) सूर्यवंश
9. ‘कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा’ में प्रमुख अलंकार है–
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) यमक
(घ) श्लेष
10. इस प्रसंग में लक्ष्मण के संवादों में मुख्यतः कौन-सा रस है?
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए— (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): परशुराम शिव-धनुष टूटने पर अत्यंत क्रोधित हो गए।
कारण (R): यह धनुष उनके आराध्य शिव का था और इसे तोड़ना उन्हें अपना अपमान लगा।
2. अभिकथन (A): लक्ष्मण परशुराम के फरसे को देखकर डर गए और क्षमा माँगने लगे।
कारण (R): लक्ष्मण स्वभाव से अत्यंत भीरु और कायर थे।
3. अभिकथन (A): श्रीराम ने परशुराम से विनम्रता एवं मधुर वचनों में बात की।
कारण (R): राम शांत, मर्यादाशील और विनयशील स्वभाव के हैं।
4. अभिकथन (A): लक्ष्मण ने परशुराम के सामने वीर योद्धा की विशेषताएँ बताईं।
कारण (R): सच्चा वीर अपनी वीरता का बखान नहीं करता, बल्कि कर्म से सिद्ध करता है।
5. अभिकथन (A): अंत में परशुराम का क्रोध शांत हो गया।
कारण (R): परशुराम को युद्ध में लक्ष्मण से पराजय का भय था।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1→(क); 2→(घ) [A गलत – लक्ष्मण डरे नहीं, निडर थे; R भी गलत]; अतः सर्वाधिक उपयुक्त– A गलत, R गलत। 3→(क); 4→(क); 5→(ग) [A सही, R गलत – क्रोध राम के विनय व विश्वामित्र के समझाने से शांत हुआ, भय से नहीं]।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
पद्यांश-आधारित प्रश्नों में पहले भाव लिखें, फिर उससे जुड़े अलंकार/रस/भाषा-सौंदर्य का उल्लेख करें।
राम, लक्ष्मण और परशुराम के स्वभाव की तुलनात्मक विशेषताएँ बिंदुवार याद रखें – अक्सर पूछी जाती हैं।
कठिन शब्दों (कुम्हड़बतिया, कुठारु, भृगुकुलकेतु, कुलिस) के अर्थ रटें; ये MCQ में आते हैं।
अलंकार पहचानने के प्रश्नों के लिए अनुप्रास और उपमा के लक्षण स्पष्ट रखें।
सामान्य गलतियाँ
लक्ष्मण को ‘डरपोक’ लिख देना – वे निडर एवं तेजस्वी हैं, यह ध्यान रखें।
परशुराम का क्रोध ‘भय’ से शांत हुआ लिख देना – वस्तुतः वह राम के विनय व विश्वामित्र के समझाने से शांत हुआ।
देवनागरी की अशुद्ध वर्तनी (कुठारु/कुठार, परसु/फरसा) से बचें।
प्रश्न में दिए गए पद्यांश को छोड़कर अपनी मनगढ़ंत पंक्तियाँ न लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के कवि कौन हैं?
इस प्रसंग के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं और यह उनके महाकाव्य रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है।
परशुराम सभा में क्रोधित होकर क्यों आए थे?
सीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष तोड़ दिए जाने का समाचार पाकर परशुराम क्रोधित होकर सभा में आए, क्योंकि वह धनुष उनके आराध्य शिव का था।
इस प्रसंग की प्रमुख विशेषता क्या है?
इस प्रसंग की प्रमुख विशेषता लक्ष्मण की वीर-रस से पगी व्यंग्योक्तियाँ और व्यंजना-शैली की सरस अभिव्यक्ति है, जो हास्य एवं वीर रस का अनूठा संयोग प्रस्तुत करती है।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।