NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 9: लखनवी अंदाज़ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 9 ‘लखनवी अंदाज़’ (लेखक – यशपाल) का पूरा एवं सटीक समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, पाठ का सार, शब्द-संपदा, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण सहित।
लेखक परिचय – यशपाल
यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फ़िरोज़पुर छावनी में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा काँगड़ा में ग्रहण करने के बाद लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया, जहाँ उनका परिचय भगत सिंह और सुखदेव से हुआ। स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़ाव के कारण वे जेल भी गए। सन् 1976 में उनका निधन हुआ। यशपाल यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार माने जाते हैं; उनकी रचनाओं में आम आदमी के सरोकार, सामाजिक विषमता, राजनैतिक पाखंड और रूढ़ियों के विरुद्ध मुखर स्वर मिलता है। ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजरे की उड़ान, फूलो का कुर्ता उनके प्रसिद्ध कहानी-संग्रह हैं तथा झूठा सच भारत-विभाजन की त्रासदी का मार्मिक दस्तावेज़ है। दिव्या, अमिता, देशद्रोही, पार्टी कामरेड उनके अन्य प्रमुख उपन्यास हैं। भाषा की स्वाभाविकता और सजीवता उनकी रचनागत विशेषता है।
पाठ का सार
‘लखनवी अंदाज़’ यशपाल द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक रचना है। लेखक ने यह रचना यह सिद्ध करने के लिए लिखी थी कि बिना कथ्य (विचार, घटना और पात्र) के भी कहानी लिखी जा सकती है। साथ ही यह उस पतनशील सामंती वर्ग पर तीखा कटाक्ष है, जो वास्तविकता से बेख़बर रहकर एक बनावटी और दिखावटी जीवन-शैली का आदी हो चुका है।
लेखक एक नई कहानी के विषय में सोचने तथा खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के उद्देश्य से सेकंड क्लास का टिकट लेकर मुफ़स्सिल की पैसेंजर ट्रेन के एक छोटे, खाली-से दिखने वाले डिब्बे में चढ़ जाते हैं। वहाँ उन्हें लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन सुविधा से पालथी मारे बैठे मिलते हैं। उनके सामने दो ताज़े-चिकने खीरे तौलिये पर रखे थे। लेखक के अचानक चढ़ने से नवाब साहब के एकांत चिंतन में विघ्न पड़ता है और उनके चेहरे पर असंतोष झलकता है।
कुछ देर बाद नवाब साहब लेखक को खीरे का ‘शौक फ़रमाने’ का निमंत्रण देते हैं, परंतु लेखक यह भाँपकर कि वे केवल शराफ़त का गुमान बनाए रखना चाहते हैं, विनम्रता से मना कर देते हैं। इसके बाद नवाब साहब बड़ी सावधानी और नफ़ासत से खीरों को धोते हैं, छीलते हैं, फाँकों को करीने से सजाते हैं तथा उन पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च बुरकते हैं। फिर वे एक-एक फाँक उठाकर केवल सूँघते हैं, मुँह में पानी भर जाने पर घूँट उतारते हैं और फाँक को बिना खाए ही खिड़की के बाहर फेंकते जाते हैं। सारी फाँकें फेंकने के बाद वे गर्व से लेखक की ओर देखते हैं, मानो कह रहे हों कि यही खानदानी रईसों का तरीका है।
अंत में नवाब साहब डकार लेकर कहते हैं कि खीरा लज़ीज़ तो होता है, पर मेदे पर बोझ डाल देता है। तभी लेखक के ज्ञान-चक्षु खुल जाते हैं और वे पहचान जाते हैं कि ये नई कहानी के लेखक हैं। उन्हें समझ आता है कि जैसे खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना मात्र से डकार आ सकती है, वैसे ही बिना विचार, घटना और पात्रों के, केवल लेखक की इच्छा-मात्र से ‘नई कहानी’ क्यों नहीं बन सकती। इस प्रकार लेखक ने आडंबर और बनावटीपन पर सूक्ष्म व्यंग्य किया है।
पाठ का मूल भाव
इस रचना का मूल भाव दो स्तरों पर चलता है –
(1) सामाजिक व्यंग्य: नवाब साहब के माध्यम से लेखक उस पतनशील सामंती (नवाबी) संस्कृति पर कटाक्ष करते हैं, जिसके पास वास्तविक वैभव तो नहीं रहा, पर दिखावे और झूठी शान का अभिमान अब भी बना हुआ है। खीरा खाने की लालसा होते हुए भी केवल ‘रईसी’ दिखाने के लिए उसे सूँघकर फेंक देना इसी बनावटीपन का प्रतीक है।
(2) साहित्यिक व्यंग्य: लेखक उस समय की कुछ ‘नई कहानियों’ पर भी व्यंग्य करते हैं जो कथ्य (विचार, घटना, पात्र) से रहित होती थीं – जैसे खीरे की कल्पना मात्र से डकार आना, वैसे ही कथ्य के बिना केवल इच्छा से ‘कहानी’ गढ़ लेना।
शब्द-संपदा (कठिन शब्द-अर्थ)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मुफ़स्सिल | केंद्रस्थ नगर के इर्द-गिर्द के स्थान |
| सफ़ेदपोश | भद्र व्यक्ति, सभ्य दिखने वाला |
| किफ़ायत | मितव्ययता, समझदारी से (कम खर्च में) उपयोग करना |
| आदाब-अर्ज़ | अभिवादन का एक ढंग |
| गुमान | भ्रम, घमंड |
| एहतियात | सावधानी |
| बुरकना | (नमक-मिर्च आदि) छिड़कना |
| स्फुरण | फड़कना, हिलना |
| प्लावित | पानी से भर जाना |
| पनियाती | रसीली, पानी से भरी हुई |
| मेदा | आमाशय, पाचन-ग्रंथि |
| तसलीम | सम्मान में (नमन/अभिवादन) |
| सिर ख़म करना | सिर झुकाना |
| तहज़ीब | शिष्टता, सभ्यता |
| नफ़ासत | स्वच्छता, सुघड़पन |
| नज़ाकत | कोमलता, नज़ुकपन |
| नफ़ीस | बढ़िया, उम्दा |
| एब्सट्रैक्ट | सूक्ष्म, अमूर्त (जिसका भौतिक अस्तित्व न हो) |
| सकील | आसानी से न पचने वाला, भारी |
| रसास्वादन | रस का आस्वाद लेना, स्वाद का आनंद |
| लज़ीज़ | स्वादिष्ट |
| कनखियों से | तिरछी नज़र से, चुपके से |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
नीचे NCERT क्षितिज पुस्तक के ‘प्रश्न-अभ्यास’ के प्रश्न ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं और प्रत्येक का परीक्षा-उपयोगी उत्तर दिया गया है।
1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?
2. नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?
3. बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
रचना और अभिव्यक्ति
5. (क) नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
5. (ख) किन-किन चीज़ों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?
6. खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा। किसी एक के बारे में लिखिए।
7. क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।
भाषा-अध्ययन
8. निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए—
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 30–40 शब्द)
1. लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया, जबकि उन्हें दूर नहीं जाना था?
2. नवाब साहब के सामने क्या रखा था और वे किस मुद्रा में बैठे थे?
3. लेखक ने नवाब साहब का खीरा खाने का निमंत्रण क्यों ठुकरा दिया?
4. नवाब साहब के अनुसार खीरा कैसा होता है?
5. खीरे की कल्पना मात्र से डकार आने पर लेखक के मन में कौन-सा विचार आया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 100–120 शब्द)
6. ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के माध्यम से लेखक ने पतनशील सामंती वर्ग पर किस प्रकार व्यंग्य किया है? स्पष्ट कीजिए।
7. इस पाठ का साहित्यिक व्यंग्य क्या है? ‘नई कहानी’ पर यशपाल के व्यंग्य को समझाइए।
8. नवाब साहब और लेखक के स्वभाव की तुलना कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) यशपाल
(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी
2. यशपाल का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) लखनऊ
(ख) लाहौर
(ग) फ़िरोज़पुर छावनी (पंजाब)
(घ) वाराणसी
3. लेखक ने किस श्रेणी (क्लास) का टिकट लिया था?
(क) फर्स्ट क्लास
(ख) सेकंड क्लास
(ग) थर्ड क्लास
(घ) जनरल
4. नवाब साहब के सामने क्या रखा हुआ था?
(क) दो आम
(ख) दो ताज़े खीरे
(ग) मिठाई का डिब्बा
(घ) फलों की टोकरी
5. नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर क्या बुरका?
(क) केवल चीनी
(ख) जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च
(ग) चाट मसाला और नींबू
(घ) काली मिर्च
6. नवाब साहब ने खीरे की फाँकों का अंततः क्या किया?
(क) मज़े से खा लिया
(ख) लेखक को दे दिया
(ग) केवल सूँघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया
(घ) तौलिये में बाँध लिया
7. नवाब साहब के अनुसार खीरा मेदे पर क्या प्रभाव डालता है?
(क) पाचन में सहायता करता है
(ख) हल्का और सुपाच्य है
(ग) सकील है, मेदे पर बोझ डाल देता है
(घ) कोई प्रभाव नहीं डालता
8. यशपाल यह सिद्ध करने के लिए रचना लिखना चाहते थे कि—
(क) कहानी केवल कथ्य से ही बनती है
(ख) बिना कथ्य के भी कहानी लिखी जा सकती है
(ग) कहानी में पात्र अनिवार्य हैं
(घ) कहानी केवल कल्पना से नहीं बनती
9. ‘लखनवी अंदाज़’ मुख्यतः किस वर्ग पर व्यंग्य है?
(क) किसान वर्ग
(ख) मध्यम वर्ग
(ग) पतनशील सामंती/नवाबी वर्ग
(घ) मज़दूर वर्ग
10. ‘मुफ़स्सिल’ शब्द का अर्थ है—
(क) रेलवे स्टेशन
(ख) केंद्रस्थ नगर के इर्द-गिर्द के स्थान
(ग) बड़ा शहर
(घ) गाँव का बाज़ार
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): नवाब साहब ने खीरा खाए बिना ही खिड़की के बाहर फेंक दिया।
कारण (R): वे लेखक के सामने अपनी खानदानी रईसी और झूठी शान बनाए रखना चाहते थे।
2. अभिकथन (A): लेखक ने नवाब साहब का खीरा खाने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
कारण (R): लेखक भूख से व्याकुल थे और खीरा खाना चाहते थे।
3. अभिकथन (A): ‘लखनवी अंदाज़’ एक व्यंग्यात्मक रचना है।
कारण (R): इसमें पतनशील सामंती वर्ग के दिखावे और बनावटीपन पर कटाक्ष किया गया है।
4. अभिकथन (A): यशपाल यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार माने जाते हैं।
कारण (R): उनकी रचनाओं में आम आदमी के सरोकार, सामाजिक विषमता और राजनैतिक पाखंड का चित्रण मिलता है।
5. अभिकथन (A): खीरे की कल्पना मात्र से नवाब साहब को डकार आ गई।
कारण (R): खीरा वास्तव में खाने से ही पेट भरता है, कल्पना से नहीं।
परीक्षा-युक्तियाँ व सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- लेखक का नाम यशपाल और जन्म-स्थान फ़िरोज़पुर छावनी (पंजाब), जन्म 1903, निधन 1976 अवश्य याद रखें।
- पाठ का दोहरा व्यंग्य – (1) पतनशील सामंती/नवाबी वर्ग पर तथा (2) कथ्यहीन ‘नई कहानी’ पर – दोनों उत्तरों में स्पष्ट करें।
- खीरा खाने की पूरी प्रक्रिया (धोना → छीलना → नमक-मिर्च बुरकना → सूँघना → फेंकना) क्रम से लिखें – यह अक्सर पूछा जाता है।
- उत्तर में ‘दिखावा’, ‘बनावटीपन’, ‘झूठी शान’, ‘आडंबर’ जैसे मूल बिंदु अवश्य आएँ।
- शब्दार्थ (मुफ़स्सिल, सकील, नफ़ासत, मेदा आदि) रटें – ये MCQ और अर्थ-स्पष्टीकरण में काम आते हैं।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को प्रेमचंद या किसी अन्य का लिखना – पाठ के लेखक यशपाल हैं।
- यह सोच लेना कि नवाब साहब ने खीरा सचमुच खाया – उन्होंने केवल सूँघकर फेंक दिया।
- केवल सामाजिक व्यंग्य लिखकर साहित्यिक व्यंग्य (नई कहानी वाला) छोड़ देना।
- यह मान लेना कि लेखक ने खीरा खाने का निमंत्रण स्वीकार किया – उन्होंने मना कर दिया था।
- उर्दू-शब्दों की अशुद्ध वर्तनी (नफ़ासत, नज़ाकत, मेदा, सकील) लिखना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस व्यंग्यात्मक रचना के लेखक यशपाल हैं, जो यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार माने जाते हैं।
नवाब साहब ने खीरा खाने के बजाय क्यों फेंक दिया?
वे लेखक (सफ़ेदपोश) के सामने अपनी खानदानी रईसी और झूठी शान बनाए रखना चाहते थे, इसलिए खीरा खाने की इच्छा होते हुए भी उसे केवल सूँघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया।
इस पाठ का मूल व्यंग्य क्या है?
पाठ में दोहरा व्यंग्य है – एक ओर दिखावटी, पतनशील सामंती (नवाबी) वर्ग पर, और दूसरी ओर कथ्य (विचार, घटना, पात्र) से रहित ‘नई कहानी’ पर।
प्रश्न NCERT क्षितिज पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
