NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sanchayan 2) अध्याय 1: हरिहर काका – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक सञ्चयन (भाग 2) के अध्याय 1 ‘हरिहर काका’ (लेखक – मिथिलेश्वर) का सम्पूर्ण समाधान देता है – पाठ का सार, कठिन शब्दार्थ, बोध-प्रश्नों के विस्तृत उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: सञ्चयन (भाग 2) अध्याय: 1 लेखक: मिथिलेश्वर विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – मिथिलेश्वर

हिंदी कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन के सशक्त चितेरे के रूप में प्रतिष्ठित कथाकार मिथिलेश्वर का जन्म सन् 1950 में बिहार के भोजपुर जिले के बैसाडीह गाँव में हुआ। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और शोध की उपाधि प्राप्त की तथा प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ग्रामीण समाज की दरिद्रता, शोषण, अंधविश्वास और मानवीय संबंधों के टूटन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनकी प्रमुख कृतियों में बाबूजी, हरिहर काका, भोर होने से पहले, झुकी नहीं, यह अंत नहीं तथा आत्मकथात्मक रचना पानी बीच मीन पियासी उल्लेखनीय हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उनकी भाषा सहज, बोलचाल के निकट तथा आँचलिक रंग से युक्त है, जो पात्रों की पीड़ा को सीधे पाठक के मन तक पहुँचा देती है।

पाठ का सार

‘हरिहर काका’ कहानी आरा (बिहार) से कुछ दूरी पर बसे एक गाँव की है, जिसे कथावाचक ‘मैं’ शैली में सुनाता है। हरिहर काका कथावाचक के पड़ोसी हैं और बचपन से उससे गहरे जुड़े हुए हैं। काका चार भाई हैं; अपनी संतान न होने के कारण उन्होंने दो विवाह किए, पर दोनों पत्नियाँ निःसंतान ही चल बसीं। काका के हिस्से में पंद्रह बीघे खेत हैं और वे भाइयों के संयुक्त परिवार में रहते हैं।

गाँव में ठाकुरबारी (ठाकुरजी का विशाल मंदिर) की बड़ी प्रतिष्ठा है; लोगों की अपार श्रद्धा के कारण इसके पास बीस बीघे ज़मीन और महंत-पुजारी का तंत्र है। आरंभ में काका के भाई और उनकी पत्नियाँ काका की खूब सेवा करते थे, परंतु धीरे-धीरे उपेक्षा करने लगे। बीमारी से उठे काका को एक दिन रूखा-सूखा भोजन परोसा गया, तो अपमान से तिलमिलाकर उन्होंने थाली आँगन में फेंक दी और भाइयों से कहा कि मुफ़्त में नहीं, उनके ही खेत की पैदावार पर सब मौज कर रहे हैं।

इसी कलह का लाभ उठाने के लिए ठाकुरबारी का लालची महंत सक्रिय हो उठा। उसने काका को बहला-फुसलाकर अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख देने को कहा ताकि स्वर्ग और यश दोनों मिलें। पर काका न ‘हाँ’ कहते, न ‘ना’। तब महंत ने साधुओं के साथ रात में काका का अपहरण कर ज़बरदस्ती अनेक कागज़ों पर उनके अँगूठे के निशान लेने चाहे। पुलिस आने पर साधु काका को बंद कमरे में छोड़कर भाग गए और हरिहर काका बंधे हुए बरामद हुए।

अब काका की दृष्टि खुल गई – महंत उन्हें घृणित और पापी लगने लगा। उधर भाई भी ज़मीन हड़पने के लिए वही षड्यंत्र दोहराने लगे। एक रात भाइयों ने भी हथियार के बल पर काका को बाँधकर, मुँह में कपड़ा ठूँसकर ज़बरदस्ती अँगूठे के निशान लिए। काका समझ गए कि महंत हो या सगे भाई – सबकी आसक्ति उनकी जायदाद में है, उनसे नहीं। अंततः पुलिस सुरक्षा में रहते हुए भी काका मौन और एकाकी हो गए; उनके खर्च पर पुलिस के जवान मौज करते हैं और काका जीवन के शेष दिन गूँगेपन के शिकार होकर काट रहे हैं। यह कहानी संयुक्त परिवार के विघटन, स्वार्थपरता तथा धर्म के नाम पर चलने वाले ढोंग का मार्मिक चित्र खींचती है।

मूलभाव / संदेश

यह कहानी दिखाती है कि आज रिश्तों की डोर भावना से नहीं, बल्कि स्वार्थ और संपत्ति से बँधी है। संतानहीन एवं अनपढ़ हरिहर काका के माध्यम से लेखक ने तीन सच्चाइयाँ उजागर की हैं – (1) संयुक्त परिवारों में बुज़ुर्गों की उपेक्षा और स्वार्थ-केंद्रित होते सगे संबंध, (2) धर्म तथा ठाकुरबारी के नाम पर महंतों-पुजारियों का पाखंड और लालच, और (3) जायदाद के लोभ में मनुष्य का अमानवीय हो जाना। अंत में काका का मौन इस व्यवस्था पर सबसे तीखा व्यंग्य है।

कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
यंत्रणायातना, क्लेश, कष्ट
आसक्तिलगाव, मोह
सयानाबड़ा होना, समझदार
मँझधारनदी या भवसागर का बीच भाग
विलीनलुप्त हो जाना, मिल जाना
विकल्पदूसरा उपाय या रास्ता
ठाकुरबारीदेवस्थान, ठाकुरजी का मंदिर
संचालनचलाना, व्यवस्था करना
नियुक्तिकिसी पद पर लगाया जाना
दँवनी / दँवाईअनाज (गेहूँ-धान) निकालने की प्रक्रिया
अगमउपयोग से पहले देवता के लिए निकाला गया अनाज का अंश
घनिष्ठगहरा, अंतरंग
प्रवचनउपदेश, धार्मिक भाषण
मशगूलव्यस्त, तल्लीन
मोहभंगमोह का टूट जाना, भ्रम मिटना
हुमाध / हवन-सामग्रीहवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री
तत्क्षणउसी क्षण, तुरंत
बय / वसीयतसंपत्ति किसी के नाम लिख देने का दस्तावेज़
अप्रत्याशितआकस्मिक, जिसकी आशा न हो
निष्कर्षपरिणाम, अंतिम राय
परदाफ़ाशभेद खोलना, सच्चाई उजागर करना
आच्छादितढका हुआ, आवृत
अकारथबेकार, व्यर्थ
छल-बल-कलधोखे, बल और बुद्धि (युक्ति) से

बोध-प्रश्न (पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर)

नीचे दिए गए प्रश्न NCERT सञ्चयन (भाग 2) पुस्तक के ‘बोध-प्रश्न’ से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

1. कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?

उत्तरकथावाचक और हरिहर काका के बीच पड़ोस तथा गहरी आत्मीयता एवं मित्रता का संबंध है।इसके प्रमुख कारण ये हैं – (क) हरिहर काका कथावाचक के पड़ोस में रहते हैं। (ख) काका ने उसके बचपन में उसे बहुत दुलार किया, कंधे पर बैठाकर घुमाया और पिता से भी अधिक प्रेम दिया।(ग) सयाना होने पर कथावाचक की पहली और सबसे गहरी दोस्ती हरिहर काका के साथ ही हुई; काका उससे कुछ नहीं छिपाते थे और खुलकर बातें करते थे।इसी आत्मीयता के कारण कथावाचक काका के दुख से गहराई तक जुड़ा हुआ है।

2. हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?

उत्तरक्योंकि दोनों का असली उद्देश्य काका की पंद्रह बीघे ज़मीन हड़पना था, काका के प्रति प्रेम नहीं।पहले महंत ने मीठी-मीठी बातों से और फिर अपहरण करके ज़बरदस्ती कागज़ों पर अँगूठे के निशान लेने चाहे।ठीक उसी तरह काका के सगे भाइयों ने भी हथियार के बल पर उन्हें बाँधकर, मुँह में कपड़ा ठूँसकर ज़बरदस्ती अँगूठे के निशान लिए।दोनों ने स्वार्थ के लिए छल, बल और अमानवीयता का सहारा लिया; इसलिए काका को महंत और अपने भाई दोनों एक ही श्रेणी के – लोभी और धोखेबाज़ – लगने लगे।

3. ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?

उत्तरइससे गाँव वालों की धार्मिक आस्था के साथ-साथ अंधविश्वासी और भाग्यवादी मनोवृत्ति का पता चलता है।गाँव वाले मानते हैं कि अच्छी फसल, मुकदमे में जीत, लड़की की शादी और नौकरी – सब कुछ ठाकुरजी की कृपा से ही होता है, इसलिए मनौती पूरी होने पर वे रुपये, ज़ेवर, अनाज और ज़मीन तक चढ़ा देते हैं।वे अपने परिश्रम और कर्म पर भरोसा करने के बजाय हर सफलता-असफलता को दैवी कृपा से जोड़ते हैं।इसी अंधश्रद्धा का लाभ उठाकर ठाकुरबारी का महंत लोगों को ठगता और अपना स्वार्थ साधता है।

4. अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं—कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरहरिहर काका भले ही अक्षर-ज्ञान से अनपढ़ हों, पर अनुभव और विवेक से वे दुनियादारी की गहरी समझ रखते हैं।उन्होंने ताड़ लिया कि भाई और महंत दोनों का प्रेम दिखावटी है और उनकी असली नज़र ज़मीन पर है।उन्होंने रमेसर की विधवा का उदाहरण याद रखा, जिसने जायदाद लिख देने पर शेष जीवन दुर्गति में बिताया; इससे सबक लेकर काका ने तय किया कि जीते-जी ज़मीन किसी को नहीं लिखेंगे।महंत की चिकनी-चुपड़ी बातों के भीतर का स्वार्थ और ‘दूध की मक्खी’ बन जाने का खतरा वे भाँप गए। उनका यह दृढ़ निश्चय और सही आकलन सिद्ध करता है कि वे व्यावहारिक रूप से अत्यंत समझदार थे।

5. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बरताव किया?

उत्तरहरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले ठाकुरबारी के महंत, पुजारी तथा उनके साधु-संत एवं समर्थक थे।आधी रात को भाला, गंड़ासा और बंदूक से लैस होकर वे काका के दालान पर धावा बोलकर उन्हें कंधे पर लादकर उठा ले गए।ठाकुरबारी ले जाकर उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया तथा सादे और लिखे कागज़ों पर ज़बरदस्ती उनके अँगूठे के निशान लिए गए।काका के हाथ-पाँव बाँध दिए गए और मुँह में कपड़ा ठूँस दिया गया। इस प्रकार धर्म का चोला पहनकर भी उन्होंने काका के साथ अत्यंत क्रूर, अमानवीय और दुराचारी बरताव किया।

6. हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?

उत्तरहरिहर काका के मामले में गाँव वाले स्पष्ट रूप से दो वर्गों में बँट गए थे।एक वर्ग चाहता था कि काका अपनी ज़मीन ठाकुरबारी (ठाकुरजी) के नाम लिख दें, जिससे ठाकुरबारी और बड़ी हो जाए। ये लोग धार्मिक संस्कार वाले तथा ठाकुरबारी से जुड़े हुए थे; कुछ साधुओं के साथ प्रसाद पाने वाले पेटू और चटोर भी इसी वर्ग के समर्थक थे।दूसरा वर्ग मानता था कि भाई का परिवार अपना ही होता है, इसलिए जायदाद भाइयों को ही मिलनी चाहिए। ये प्रगतिशील विचारों वाले लोग और वैसे किसान थे जिनके यहाँ काका जैसे बुज़ुर्ग पल रहे थे।इस प्रकार राय का आधार लोगों का अपना धार्मिक रुझान, ठाकुरबारी से जुड़ाव अथवा व्यावहारिक/पारिवारिक सोच थी।

7. कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, “अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।”

उत्तरयह कथन हरिहर काका के बदले हुए मनोबल की ओर संकेत करता है। पहले अज्ञान की स्थिति में काका भयभीत रहते थे, पर अनुभव से सच्चाई जान लेने के बाद वे निर्भय हो गए।जब भाइयों ने हथियार दिखाकर अँगूठे का निशान देने को कहा, तब काका डरे नहीं, बल्कि गरजते हुए बोले – “मार दो, मैं मर जाऊँगा, पर जीते-जी एक धूर ज़मीन भी नहीं लिखूँगा।”उन्हें ज्ञान हो चुका था कि ज़मीन लिख देने पर रमेसर की विधवा की तरह उनका शेष जीवन घुट-घुटकर बीतेगा, इसलिए घुटन भरे जीवन की अपेक्षा मृत्यु को वरण करना उन्हें श्रेयस्कर लगा।इसी सत्य-ज्ञान के कारण लेखक ने कहा कि ज्ञान होने पर मनुष्य मृत्यु से नहीं डरता, अपितु आवश्यकता पड़ने पर उसे स्वीकार करने को तैयार हो जाता है।

8. समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर (विचारात्मक)रिश्ते मानव-समाज की नींव हैं; इन्हीं के सहारे मनुष्य सुख-दुख बाँटता है और संकट में सहारा पाता है। सच्चे रिश्ते प्रेम, विश्वास, त्याग और सहयोग पर टिके होते हैं।परंतु हरिहर काका की कहानी दिखाती है कि जब रिश्ते स्वार्थ और संपत्ति के लोभ पर आधारित हो जाते हैं, तब सगे भाई भी पराये और क्रूर बन जाते हैं।मेरे विचार से रिश्तों की असली अहमियत भावना, अपनापन और निःस्वार्थ सेवा में है, न कि धन-संपत्ति में। बुज़ुर्गों का सम्मान और देखभाल हर रिश्ते का कर्तव्य है। स्वार्थ से रहित रिश्ते ही समाज को सुदृढ़ और मानवीय बनाते हैं। (विद्यार्थी अपने तर्क जोड़ सकते हैं।)

9. यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?

उत्तर (संभावित)यदि मेरे आसपास हरिहर काका जैसा कोई असहाय एवं एकाकी बुज़ुर्ग होगा, तो सबसे पहले मैं उसे अपनेपन और स्नेह का भरोसा दिलाऊँगा ताकि उसका अकेलापन और भय दूर हो।मैं उसके भोजन, दवा और दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान रखूँगा तथा समय-समय पर उससे बातें करके उसका मन बहलाऊँगा।यदि कोई उसके साथ ज़बरदस्ती या अन्याय कर रहा हो, तो मैं बड़ों, समाज और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस-कानून की सहायता से उसके अधिकारों की रक्षा करूँगा।साथ ही उसे यह विश्वास दिलाऊँगा कि वह अकेला नहीं है और समाज उसके साथ है। (विद्यार्थी अपने अनुभव जोड़ें।)

10. हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर (विचारात्मक)यदि हरिहर काका के गाँव में मीडिया (समाचार-पत्र, टी.वी., सोशल मीडिया आदि) की पहुँच होती, तो उनके साथ हुए अन्याय और अपहरण की खबर पूरे देश तक पहुँच जाती।मीडिया के दबाव से प्रशासन और पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाते; महंत, पुजारी और लोभी भाइयों के पाखंड एवं अपराध का परदाफ़ाश हो जाता और उन्हें कानूनी दंड मिलता।जनमत के समर्थन से काका को न्याय और सुरक्षा मिलती तथा उनकी जायदाद की रक्षा होती। संभव है, उनकी ज़मीन का उपयोग किसी विद्यालय जैसे जनहित-कार्य में होता।इस प्रकार मीडिया की पहुँच होने पर हरिहर काका मौन एवं असहाय न रहकर निर्भय और सुरक्षित जीवन जी पाते। (विद्यार्थी अपने विचार जोड़ें।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय (5)

1. हरिहर काका को संतान न होने पर भी उन्होंने तीसरा विवाह क्यों नहीं किया?

उत्तरदो विवाहों के बाद भी संतान न होने और दोनों पत्नियों के निधन के पश्चात लोगों ने तीसरे विवाह की सलाह दी, परंतु अपनी ढलती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण हरिहर काका ने तीसरा विवाह करने से इनकार कर दिया और भाइयों के परिवार के साथ रहने लगे।

2. हरिहर काका के भाइयों ने आरंभ में उनकी सेवा क्यों की और बाद में उपेक्षा क्यों करने लगे?

उत्तरआरंभ में भाइयों ने अपनी पत्नियों को काका की अच्छी सेवा करने की सीख दी थी, क्योंकि वे काका को संतुष्ट रखना चाहते थे। पर कुछ ही दिनों में स्वार्थ हावी हो गया और सभी अपने-अपने कामों में मशगूल होकर काका की खोज-खबर लेना भूल गए, जिससे उनकी उपेक्षा होने लगी।

3. थाली फेंकने की घटना से कहानी में क्या मोड़ आता है?

उत्तरबीमारी से उठे काका को रूखा-सूखा भोजन परोसे जाने पर उन्होंने क्रोध में थाली आँगन में फेंक दी और कहा कि यह उनके ही खेत की कमाई है। इसी कलह और मोहभंग से कहानी में टकराव आरंभ होता है, जिसका लाभ उठाकर महंत और भाई काका की ज़मीन हथियाने की चालें चलने लगते हैं।

4. ठाकुरबारी की स्थापना से जुड़ी प्रचलित कहानी क्या है?

उत्तरकहा जाता है कि वर्षों पहले, जब गाँव पूरी तरह बसा भी नहीं था, कहीं से एक संत आकर वहाँ झोंपड़ी बनाकर रहने लगे और सुबह-शाम ठाकुरजी की पूजा करते थे। बाद में लोगों ने चंदा करके छोटा-सा मंदिर बनवा दिया। ज्यों-ज्यों गाँव बसता गया और लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई, ठाकुरबारी का विस्तार होता गया।

5. कहानी के अंत में हरिहर काका मौन क्यों हो गए?

उत्तरमहंत और सगे भाइयों दोनों के द्वारा छल और अत्याचार झेलने के बाद काका समझ गए कि सब उनकी जायदाद के लोभी हैं, उनसे किसी को प्रेम नहीं। इसी कटु अनुभव, विश्वासघात की पीड़ा और गहरे अकेलेपन के कारण उनका मन से सबसे भरोसा उठ गया और वे ‘गूँगेपन’ के शिकार होकर मौन रहकर शेष जीवन काटने लगे।

दीर्घ उत्तरीय (3)

6. ‘हरिहर काका’ कहानी के माध्यम से लेखक संयुक्त परिवार और रिश्तों की किस वास्तविकता को उजागर करता है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तरलेखक यह वास्तविकता उजागर करता है कि आज संयुक्त परिवार में रिश्ते भावना के बजाय स्वार्थ और संपत्ति पर टिक गए हैं।आरंभ में भाई काका की सेवा करते हैं, पर जैसे ही स्वार्थ सधना बंद होता है, वे उपेक्षा करने लगते हैं – बीमार काका को पानी देने वाला तक कोई नहीं रहता और रूखा-सूखा भोजन परोसा जाता है।जायदाद के लोभ में वही सगे भाई हथियार के बल पर काका को बाँधकर अँगूठे के निशान लेते हैं। काका स्वयं अनुभव करते हैं कि भाइयों का आदर-सम्मान उनके प्रति प्रेम नहीं, बल्कि जायदाद के कारण है।इस प्रकार लेखक दिखाता है कि स्वार्थ संयुक्त परिवार को विघटित कर देता है और ‘खून के रिश्ते’ भी संपत्ति के सामने खोखले सिद्ध होते हैं।

7. इस कहानी में लेखक ने धर्म एवं ठाकुरबारी के नाम पर चलने वाले पाखंड पर किस प्रकार करारा व्यंग्य किया है?

उत्तरलेखक ने महंत और उसके साधुओं के माध्यम से धर्म के नाम पर फैले ढोंग और लालच पर तीखा व्यंग्य किया है।ठाकुरबारी के साधु कोई काम नहीं करते, दोनों जून हलवा-पूड़ी खाकर आराम से पड़े रहते हैं और केवल बातें बनाना जानते हैं।महंत स्वर्ग और यश का लालच देकर काका की ज़मीन हथियाना चाहता है; न मानने पर हथियारबंद होकर अपहरण करता और ज़बरदस्ती अँगूठे के निशान लेता है – जो साधु नहीं, ‘डाकू और हत्यारे’ का आचरण है।वह ठाकुरबारी को अपने घृणित इरादों को छिपाने का ऐसा माध्यम बनाता है जिस पर लोग अविश्वास न करें। इस प्रकार लेखक स्पष्ट करता है कि धर्म की आड़ में बैठे ये लोग आस्था का शोषण कर अपना पेट पालते हैं।

8. हरिहर काका के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर(क) सरल एवं भोले किसान: आरंभ में काका सीधे-सादे, भोले और विश्वासी ग्रामीण किसान हैं।(ख) स्नेही एवं आत्मीय: कथावाचक को पिता से भी अधिक प्रेम देने वाले संवेदनशील व्यक्ति हैं।(ग) स्वाभिमानी: अपमानजनक भोजन परोसे जाने पर थाली फेंककर वे अपना स्वाभिमान प्रकट करते हैं।(घ) विवेकी एवं दृढ़निश्चयी: अनपढ़ होते हुए भी वे महंत और भाइयों के स्वार्थ को पहचान लेते हैं और जीते-जी ज़मीन न लिखने पर अडिग रहते हैं।(ङ) निर्भीक: अंत में मृत्यु से न डरकर अन्याय के सामने झुकने से इनकार कर देते हैं। इस प्रकार वे भोलेपन से चतुर एवं ज्ञानी व्यक्तित्व में बदल जाते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. ‘हरिहर काका’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) मिथिलेश्वर

(ग) यशपाल

(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी

2. हरिहर काका के हिस्से में कितने बीघे खेत थे?

(क) दस बीघे

(ख) बीस बीघे

(ग) पंद्रह बीघे

(घ) साठ बीघे

3. कुल मिलाकर हरिहर काका कितने भाई थे?

(क) दो

(ख) तीन

(ग) चार

(घ) पाँच

4. हरिहर काका का गाँव किस कस्बाई शहर से लगभग चालीस किलोमीटर दूर था?

(क) पटना

(ख) आरा

(ग) गया

(घ) छपरा

5. ठाकुरबारी के नाम पर कितने बीघे खेत थे?

(क) पंद्रह बीघे

(ख) बीस बीघे

(ग) पचास बीघे

(घ) साठ बीघे

6. हरिहर काका ने जीवन में कितने विवाह किए थे?

(क) एक

(ख) दो

(ग) तीन

(घ) एक भी नहीं

7. महंत हरिहर काका से क्या करवाना चाहता था?

(क) मंदिर में पूजा

(ख) ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिखवाना

(ग) तीसरा विवाह

(घ) गाँव से पलायन

8. भोजन में अपमान होने पर हरिहर काका ने क्या किया?

(क) चुपचाप खा लिया

(ख) भूखे सो गए

(ग) थाली आँगन में फेंक दी

(घ) घर छोड़कर चले गए

9. हरिहर काका को अंततः किसकी सुरक्षा में रखा गया?

(क) महंत की

(ख) भाइयों की

(ग) पुलिस के जवानों की

(घ) गाँव के नेता की

10. कहानी के अंत में हरिहर काका की मनःस्थिति कैसी हो जाती है?

(क) प्रसन्न एवं संतुष्ट

(ख) मौन एवं एकाकी

(ग) क्रोधी एवं हिंसक

(घ) धार्मिक एवं भक्तिमय

उत्तर-कुंजी: 1→(ख), 2→(ग), 3→(ग), 4→(ख), 5→(ख), 6→(ख), 7→(ख), 8→(ग), 9→(ग), 10→(ख)।

अभिकथन-कारण प्रश्न

निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): हरिहर काका के भाई आरंभ में उनकी खूब सेवा करते थे।

कारण (R): वे काका को संतुष्ट रखकर उनकी जायदाद अपने पास बनाए रखना चाहते थे।

2. अभिकथन (A): हरिहर काका ने महंत को अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दी।

कारण (R): काका धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और स्वर्ग पाना चाहते थे।

3. अभिकथन (A): अनपढ़ होने पर भी हरिहर काका ने जीते-जी ज़मीन न लिखने का निश्चय किया।

कारण (R): उन्होंने रमेसर की विधवा की दुर्गति देखकर उससे सबक लिया था।

4. अभिकथन (A): काका को महंत और सगे भाई एक ही श्रेणी के लगने लगे।

कारण (R): दोनों ही उनकी ज़मीन हड़पने के लिए छल और बल का प्रयोग कर रहे थे।

5. अभिकथन (A): ठाकुरबारी का महंत सच्चा संत और निःस्वार्थ साधु था।

कारण (R): वह दिन-रात केवल ईश्वर-भक्ति और जनसेवा में लीन रहता था।

उत्तर-कुंजी: 1→(क); 2→(घ) – A गलत है, काका ने ज़मीन नहीं लिखी; 3→(क); 4→(क); 5→(घ) – A और R दोनों गलत हैं, महंत लोभी एवं पाखंडी था।

परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • लेखक का नाम मिथिलेश्वर और विधा कहानी अवश्य याद रखें; उत्तर में लेखक के नाम का सही उल्लेख अंक दिलाता है।
  • तथ्य रट लें – चार भाई, पंद्रह बीघे (काका का हिस्सा), बीस बीघे (ठाकुरबारी), दो विवाह, आरा से चालीस किमी दूर गाँव।
  • मूल विषय – संयुक्त परिवार का विघटन, रिश्तों में स्वार्थ तथा धर्म के नाम पर पाखंड – को उत्तरों में अवश्य जोड़ें।
  • दीर्घ उत्तरों में कहानी से उदाहरण (थाली फेंकना, अपहरण, अँगूठे के निशान लेना) देकर बात पुष्ट करें।

सामान्य गलतियाँ

  • लेखक को प्रेमचंद लिख देना – यह पाठ मिथिलेश्वर का है, प्रेमचंद का नहीं।
  • यह समझ लेना कि काका ने अंत में ज़मीन ठाकुरबारी या भाइयों को लिख दी – काका ने जीते-जी किसी को ज़मीन नहीं लिखी।
  • केवल भाइयों या केवल महंत को दोषी ठहराना – कहानी में दोनों ही लोभी एवं अन्यायी हैं।
  • ‘ठाकुरबारी’ को साधारण घर समझ लेना – यह ठाकुरजी का विशाल मंदिर/देवस्थान है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘हरिहर काका’ पाठ के लेखक कौन हैं?

कक्षा 10 हिंदी (सञ्चयन भाग 2) के अध्याय 1 ‘हरिहर काका’ के लेखक प्रसिद्ध कथाकार मिथिलेश्वर हैं।

‘हरिहर काका’ कहानी का मूल संदेश क्या है?

यह कहानी बताती है कि आज रिश्ते भावना के बजाय स्वार्थ और संपत्ति पर टिके हैं; यह संयुक्त परिवार के विघटन तथा धर्म के नाम पर चलने वाले पाखंड एवं लालच को उजागर करती है।

हरिहर काका अंत में मौन क्यों हो गए?

महंत और सगे भाइयों दोनों के छल, अपहरण और अत्याचार से काका समझ गए कि सब केवल उनकी जायदाद के लोभी हैं; इसी विश्वासघात और गहरे अकेलेपन से दुखी होकर वे मौन रहकर शेष जीवन बिताने लगे।

प्रश्न NCERT सञ्चयन (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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