NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kritika 2) अध्याय 2: साना-साना हाथ जोड़ि… (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका (भाग 2) के अध्याय 2 ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ (लेखिका – मधु कांकरिया) का पूर्ण समाधान देता है – पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण सहित।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: कृतिका (भाग 2) अध्याय: 2 लेखिका: मधु कांकरिया विधा: यात्रा-वृत्तांत (संस्मरण) सत्र: 2026–27

लेखिका परिचय – मधु कांकरिया

मधु कांकरिया का जन्म सन् 1957 में कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर तथा कंप्यूटर अनुप्रयोग में डिप्लोमा किया। आरंभ से ही उनका झुकाव समाज की समस्याओं, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ की ओर रहा। उनकी रचनाओं में स्त्री-जीवन, दलित-शोषित वर्ग की पीड़ा, श्रम की गरिमा और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव प्रकट होता है। खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आखिरी उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं तथा बीतते हुए, सूखते चिनार उनके चर्चित कहानी-संग्रह हैं। उन्होंने अनेक देशों की यात्राएँ कीं और अपने यात्रा-अनुभवों को संवेदनशील गद्य में ढाला। ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ उनके सिक्किम-यात्रा-वृत्तांत का अंश है, जिसमें प्रकृति-सौंदर्य के साथ-साथ वहाँ के श्रमशील जीवन की झलक मिलती है।

पाठ का सार

‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ लेखिका मधु कांकरिया का सिक्किम-यात्रा पर आधारित एक रोचक एवं संवेदनशील यात्रा-वृत्तांत है। लेखिका रात के समय जगमगाते गंगटोक (असली नाम – गंतोक) शहर को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठती हैं और उसे ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ कहती हैं। एक नेपाली युवती से सीखी प्रार्थना – “साना-साना हाथ जोड़ि…” (छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो) – उनके मन को छू जाती है।

यूमथांग की ओर जाते हुए ड्राइवर-कम-गाइड जितेन नार्गे उन्हें रास्ते की हर वस्तु – बौद्ध पताकाओं, धर्मचक्र (प्रेयर व्हील), कवी-लोंग स्टॉक की कथा, दलाई लामा की मान्यता आदि – के बारे में बताता चलता है। तीस्ता नदी का अप्रतिम सौंदर्य, झर-झर गिरते जलप्रपात (सेवन सिस्टर्स वाटर फॉल), रंग-बिरंगे फूल और हिमालय का पल-पल बदलता विराट रूप लेखिका को रोमांचित कर देता है। प्रकृति के इस अलौकिक सौंदर्य में डूबकर वे ईश्वर के निकट अनुभव करती हैं।

किंतु इसी सौंदर्य के बीच लेखिका को पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ दिखाई देती हैं, जिनकी पीठ पर बँधे बच्चे भी होते हैं। सड़कें बनाने में अनेक लोगों की जानें चली जाती हैं। श्रम, भूख और जीवन-संघर्ष का यह यथार्थ उन्हें भीतर तक झकझोर देता है। पहाड़ी बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय जाते हैं और शाम को माँओं के साथ मवेशी चराते, पानी भरते और लकड़ियाँ ढोते हैं।

आगे लायुंग में रात बिताकर वे ‘कटाओ’ (भारत का स्विट्ज़रलैंड) पहुँचती हैं, जहाँ घुटनों तक बर्फ देखकर लेखिका का मन वृंदावन-सा हो उठता है। उनकी सहेली माणि बताती है कि ये हिमशिखर पूरे एशिया के जलस्तंभ हैं, जो सर्दियों में बर्फ के रूप में जल संग्रह करते और गर्मियों में पिघलकर नदियाँ बन सूखे कंठों की प्यास बुझाते हैं। सीमा पर तैनात फौजी कठिन परिस्थितियों में हमारी रक्षा करते हैं। अंत में लेखिका को अनुभव होता है कि जीवन का आनंद इसी चलायमान सौंदर्य में है और मनुष्य की यह अनवरत खोज ही सौंदर्य है।

मूल भाव

यह यात्रा-वृत्तांत केवल प्रकृति-सौंदर्य का चित्रण नहीं है, बल्कि सौंदर्य और श्रम का मार्मिक समन्वय है। एक ओर हिमालय, तीस्ता नदी, झरने और फूलों का स्वर्गिक सौंदर्य है, तो दूसरी ओर पत्थर तोड़ती पहाड़िनें, सीमा पर तैनात फौजी और कठिन जीवन जीते पहाड़ी लोग हैं। लेखिका संदेश देती हैं कि प्रकृति का सच्चा सौंदर्य उसकी सजीवता एवं निरंतर प्रवाह में है, और मनुष्य को प्रकृति की लय-ताल से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। साथ ही, समाज को सबसे अधिक देने वाला आम श्रमिक ही वास्तव में ‘कम लेकर अधिक लौटाने वाला’ है।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
सम्मोहनमोह लेना, वशीभूत कर लेना, आकर्षण
अतींद्रियताइंद्रियों से परे की अनुभूति
उजासप्रकाश, उजाला
मेहनतकशपरिश्रम करने वाला, श्रमिक
संधि-स्थलमिलन-बिंदु, जोड़ का स्थान
रकम-रकम केतरह-तरह के
रफ्ता-रफ्ताधीरे-धीरे
शिद्दततीव्रता, प्रबलता, अधिकता
परिदृश्यआँखों के सामने फैला दृश्य
पराकाष्ठाचरम सीमा, अंतिम कोटि
अभिशप्तशापित, अभियुक्त
तामसिकतातमोगुण से युक्त भाव, कुटिलता
सरहदसीमा
चैरवेति-चैरवेतिचलते रहो, चलते रहो
वजूदअस्तित्व
जन्नतस्वर्ग
सयानीसमझदार, चतुर
बोधिसत्वज्ञान-प्राप्ति की ओर अग्रसर, बुद्धत्व का बीज
अद्वितीयजिसके समान दूसरा न हो, अनुपम
दुर्लभजो कठिनाई से प्राप्त हो, विरल
हलाहलविष, ज़हर
वंचनाठगी, छल; अभाव
थाहगहराई का अंत, अंदाजा

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

नीचे NCERT कृतिका (भाग 2) पाठ ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ के ‘प्रश्न-अभ्यास’ के सभी प्रश्न पुस्तक के अनुसार ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं; उत्तर परीक्षा-उपयोगी एवं मौलिक हैं।

1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?

उत्तररात के समय सारे तारे आकाश से बिखरकर मानो नीचे टिमटिमा रहे थे और गंतोक शहर रोशनियों से जगमगा रहा था। ढलान पर सितारों के गुच्छे रोशनी की एक झालर-सी बना रहे थे।यह रहस्यमयी, सितारों से भरी रात लेखिका के मन में ऐसा सम्मोहन जगा रही थी कि उन जादू भरे क्षणों में उन्हें अपना सब कुछ स्थगित और अर्थहीन-सा लगने लगा।उनके भीतर-बाहर केवल शून्य था और अतींद्रियता में डूबी रोशनी की वही जादुई झालर थी – इसी कारण गंतोक उन्हें पूरी तरह सम्मोहित कर रहा था।

2. गंतोक को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया?

उत्तरगंतोक इतिहास और वर्तमान के संधि-स्थल पर खड़ा एक ऐसा शहर है, जहाँ के लोग कठोर परिश्रम से अपना जीवन सँवारते हैं।वहाँ के निवासी दिन-रात मेहनत करके इस पहाड़ी शहर को सुंदर बनाए रखते हैं – उनकी सुबह, शाम और रात सब कुछ श्रम से दीप्त है।परिश्रम से अपने जीवन और परिवेश पर राज करने के कारण ही उन्हें ‘बादशाह’ और इस शहर को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ कहा गया है।

3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?

उत्तरश्वेत पताकाएँ – ये शांति और अहिंसा की प्रतीक होती हैं। जब किसी बौद्ध की मृत्यु हो जाती है, तब उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। इन्हें उतारा नहीं जाता; ये धीरे-धीरे स्वयं नष्ट हो जाती हैं।रंगीन पताकाएँ – ये किसी नए एवं शुभ कार्य की शुरुआत के अवसर पर लगाई जाती हैं।इस प्रकार श्वेत पताकाएँ मृत्यु एवं शोक के तथा रंगीन पताकाएँ शुभारंभ एवं उल्लास के अवसरों की ओर संकेत करती हैं।

4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।

उत्तरप्रकृति एवं भूगोल: यूमथांग गंतोक से 149 किलोमीटर दूर है और रास्ते में हिमालय की गहरी घाटियाँ तथा फूलों से लदी वादियाँ मिलती हैं। पंद्रह दिनों में पूरी घाटी फूलों से भर जाती है।धार्मिक मान्यताएँ: यहाँ बुद्ध की बड़ी मान्यता है। धर्मचक्र (प्रेयर व्हील) घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसा विश्वास है। बौद्ध पताकाओं तथा दलाई लामा से जुड़ी जानकारियाँ भी उसने दीं।ऐतिहासिक स्थल: ‘कवी-लोंग स्टॉक’ पर ‘गाइड’ फिल्म की शूटिंग हुई थी और यहीं लेपचा एवं भुटिया जातियों के बीच शांति-वार्ता का स्मारक है।जनजीवन: यहाँ का जीवन कठोर है; नीचे तराई में एक ही स्कूल है, जहाँ दूर-दूर से बच्चे पैदल चलकर पढ़ने जाते हैं और शाम को मवेशी चराने, पानी भरने तथा लकड़ियाँ ढोने जैसे कामों में हाथ बँटाते हैं।

5. लोंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी?

उत्तरलोंग स्टॉक में एक कुटिया के भीतर घूमता धर्मचक्र देखकर नार्गे ने बताया कि इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।लेखिका ने अनुभव किया कि चाहे मैदान हो या पहाड़, तमाम वैज्ञानिक प्रगतियों के बावजूद इस देश की आत्मा एक जैसी है।सर्वत्र लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, अंधविश्वास तथा पाप-पुण्य की धारणाएँ एक-सी हैं – इसीलिए धर्मचक्र को देखकर उन्हें पूरे भारत की आत्मा एक-सी दिखाई दी।

6. जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?

उत्तरजितेन नार्गे एक कुशल गाइड था जो लेखिका को रास्ते की हर वस्तु की रोचक जानकारी देता रहा। उसके आधार पर एक कुशल गाइड के गुण इस प्रकार हैं –(क) उसे क्षेत्र के इतिहास, भूगोल, धर्म, संस्कृति एवं जनजीवन का पूरा ज्ञान होना चाहिए।(ख) उसका स्वभाव हँसमुख, मिलनसार एवं विनम्र होना चाहिए, जिससे यात्री सहज अनुभव करें।(ग) उसे पर्यटकों की रुचि के अनुसार जानकारी रोचक ढंग से सुनाने की कला आनी चाहिए।(घ) उसे अपने स्थान, भाषा एवं संस्कृति पर गर्व तथा यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान होना चाहिए।

7. इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरयात्रा में लेखिका को हिमालय का पल-पल बदलता विराट रूप दिखाई देता है।आरंभ में वह छोटी-छोटी पहाड़ियों के रूप में दिखता है, फिर अपने विराट एवं वैभवशाली रूप में सामने आता है।ऊँचाई बढ़ने पर रास्ते वीरान, सँकरे और जलेबी की तरह घुमावदार हो जाते हैं; हिमालय विशालकाय हो उठता है और घाटियाँ पाताल-सी गहरी प्रतीत होती हैं।कहीं वह बादलों की मोटी चादर ओढ़े दिखता है, कहीं झरनों, फूलों एवं वादियों से सजा रहता है, तो कटाओ में वह बर्फ से ढका चाँदी-सा चमकता हिमशिखर बन जाता है – अंततः वह लेखिका के लिए कविता ही नहीं, दर्शन बन जाता है।

8. प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

उत्तरप्रकृति के अनंत एवं विराट स्वरूप को देखकर लेखिका रोमांचित, पुलकित एवं भाव-विभोर हो उठती हैं।उन्हें ऐसा लगता है मानो वे स्वयं भी देश और काल की सीमाओं से परे बहती धारा बन गई हों; उनके भीतर की सारी तामसिकताएँ एवं दुष्ट वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह जाती हैं।उन्हें जीवन की शक्ति का अहसास होता है और मन काव्यमय हो उठता है; वे ईश्वर के निकट, आत्मा की सारी खिड़कियाँ खुली हुई-सी अनुभव करती हैं।

9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए?

उत्तरसौंदर्य में डूबी लेखिका को श्रम एवं संघर्ष के यथार्थ दृश्यों ने झकझोर दिया।(क) पत्थरों पर बैठकर हथौड़े से पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ, जिनकी पीठ पर डोको (टोकरी) में उनके बच्चे भी बँधे थे।(ख) सड़क बनाने के खतरनाक कार्य में मारे गए लोग एवं चेतावनी-बोर्ड।(ग) सिर पर लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोती पहाड़ी स्त्रियाँ तथा कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते छोटे बच्चे।इन दृश्यों ने सौंदर्य के बीच छिपी भूख, श्रम एवं जीवन-संघर्ष की कठोर सच्चाई से लेखिका को भीतर तक हिला दिया।

10. सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।

उत्तर(क) गाइड एवं ड्राइवर (जैसे जितेन नार्गे), जो खतरनाक रास्तों पर सावधानी से वाहन चलाकर एवं रोचक जानकारियाँ देकर यात्रा को सुगम बनाते हैं।(ख) सड़क बनाने वाले मजदूर एवं पहाड़िनें, जो अपनी जान जोखिम में डालकर दुर्गम रास्तों को आवागमन योग्य बनाते हैं।(ग) सीमा पर तैनात फौजी, जो कड़ाके की ठंड में पहरा देकर पर्यटकों एवं देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।(घ) स्थानीय निवासी, जो प्रकृति की रक्षा करते एवं अपनी संस्कृति से यात्रियों को परिचित कराते हैं। इन सबके योगदान से ही सैलानी प्रकृति की अलौकिक छटा का आनंद ले पाते हैं।

11. “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?

उत्तरपत्थर तोड़ती श्रम-सुंदरियों को देखकर लेखिका को लगता है कि ये समाज से बहुत कम लेकर बदले में बहुत अधिक लौटा देती हैं – यही जीवन का संतुलन है।देश की आर्थिक प्रगति का वास्तविक आधार किसान, मजदूर एवं श्रमिक वर्ग ही है। ये अल्प पारिश्रमिक पर कठोर परिश्रम करके सड़कें, भवन, फसलें एवं वस्तुएँ तैयार करते हैं।इनके श्रम के बिना न उद्योग चल सकते हैं, न नगर बस सकते हैं और न ही विकास संभव है। अतः आम जनता ही देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ है, यद्यपि उसे उसके श्रम का उचित प्रतिफल कम ही मिल पाता है।

12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए?

उत्तरखिलवाड़: आज की पीढ़ी वनों की अंधाधुंध कटाई कर रही है, पहाड़ों को तोड़कर एवं विस्फोटकों से उड़ाकर सड़कें बना रही है, नदियों-झरनों को प्रदूषित कर रही है तथा अत्यधिक वाहनों एवं उद्योगों से वायु-प्रदूषण बढ़ा रही है – जिससे प्रकृति की लय, ताल एवं गति बिगड़ रही है।मेरी भूमिका: मैं अधिकाधिक पेड़ लगाऊँगा एवं उनकी रक्षा करूँगा; जल, बिजली एवं संसाधनों का अपव्यय रोकूँगा; प्लास्टिक एवं कचरे से पर्यावरण को गंदा नहीं करूँगा।साथ ही मैं अपने मित्रों एवं समाज को प्रकृति-संरक्षण के प्रति जागरूक करूँगा और स्वच्छता एवं वृक्षारोपण के अभियानों में सक्रिय भाग लूँगा।

13. प्रदूषण के कारण स्नोफॉल में कमी का जिक्र किया गया है? प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए हैं, लिखें।

उत्तरपाठ में बताया गया है कि प्रदूषण के कारण स्नोफॉल (हिमपात) लगातार कम होता जा रहा है। प्रदूषण के अन्य दुष्परिणाम इस प्रकार हैं –(क) ग्लोबल वार्मिंग: तापमान बढ़ने से ग्लेशियर एवं हिमशिखर पिघल रहे हैं, जिससे समुद्र-स्तर बढ़ रहा है।(ख) ऋतु-चक्र में असंतुलन: असमय वर्षा, सूखा एवं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं।(ग) स्वास्थ्य पर प्रभाव: वायु एवं जल-प्रदूषण से साँस, त्वचा एवं अन्य रोग बढ़ रहे हैं।(घ) जैव-विविधता को क्षति: अनेक पेड़-पौधे एवं जीव-जंतु विलुप्त हो रहे हैं तथा जल-स्रोत सूखते जा रहे हैं।

14. ‘कटाओ’ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए?

उत्तरमैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। कटाओ अभी तक पर्यटन-स्थल (टूरिस्ट स्पॉट) नहीं बना था, इसलिए वहाँ एक भी दुकान नहीं थी।दुकानों के अभाव में वहाँ भीड़-भाड़, शोर, गंदगी एवं प्लास्टिक-कचरा नहीं पहुँचा, जिससे कटाओ अपने प्राकृतिक, स्वच्छ एवं अछूते रूप में सुरक्षित रहा।यदि वहाँ दुकानें होतीं तो व्यावसायीकरण, प्रदूषण एवं शोषण से उसका नैसर्गिक सौंदर्य नष्ट हो जाता। इसी कारण दुकानों का न होना कटाओ के लिए सचमुच एक वरदान है।

15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है?

उत्तरलेखिका की सहेली माणि के अनुसार ये हिमशिखर पूरे एशिया के जलस्तंभ हैं और प्रकृति ने इनके माध्यम से जल-संचय की अद्भुत व्यवस्था की है।सर्दियों में ये पर्वत बर्फ के रूप में जल का संग्रह कर लेते हैं।गर्मियों में जब पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचती है, तब ये ही बर्फ-शिलाएँ पिघल-पिघलकर जलधारा (नदियों) के रूप में बहती हैं और हमारे सूखे कंठों को तरावट पहुँचाती हैं। इस प्रकार प्रकृति ने नायाब ढंग से जल-संचय की व्यवस्था की है।

16. देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?

उत्तरकठिनाइयाँ: सीमा पर तैनात फौजी हड्डियाँ कँपा देने वाली कड़ाके की ठंड (माइनस 15 डिग्री से भी कम तापमान) में पहरा देते हैं, जहाँ पेट्रोल को छोड़कर सब कुछ जम जाता है।वे ऊँचे, बर्फीले, सँकरे एवं खतरनाक स्थानों पर परिवार से दूर रहकर, अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात देश की रक्षा करते हैं ताकि हम चैन की नींद सो सकें।हमारा उत्तरदायित्व: हमें उनके त्याग एवं बलिदान का सम्मान करना चाहिए, उनके प्रति कृतज्ञता एवं गर्व का भाव रखना चाहिए।हमें एक अनुशासित, ईमानदार एवं जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखनी चाहिए और राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ प्रार्थना का क्या अर्थ है और लेखिका ने इसे किससे सीखा?

उत्तरइसका अर्थ है – “छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।” लेखिका ने यह प्रार्थना एक नेपाली युवती से सीखी थी।

2. लेखिका को रास्ते में सफेद बौद्ध पताकाएँ कहाँ और क्यों दिखाई दीं?

उत्तरपहाड़ी रास्तों पर एक कतार में लगी सफेद पताकाएँ दिखाई दीं। किसी बौद्ध की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर पवित्र स्थान पर 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं।

3. कटाओ को किसका ‘स्विट्ज़रलैंड’ कहा गया है और क्यों?

उत्तरकटाओ को ‘भारत का स्विट्ज़रलैंड’ कहा गया है, क्योंकि वह बर्फ से ढके ऊँचे पर्वतों, हरियाली एवं अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त है। माणि के अनुसार तो वह स्विट्ज़रलैंड से भी अधिक सुंदर है।

4. तीस्ता नदी का सौंदर्य लेखिका को कहाँ चरम पर दिखाई दिया?

उत्तरतीस्ता नदी सिलीगुड़ी से ही लेखिका के साथ थी, किंतु यहाँ पहाड़ों के बीच चिकने गुलाबी पत्थरों पर चाँदी-सी कौंध मारती बहती तीस्ता का सौंदर्य पराकाष्ठा पर था – ऐसी खूबसूरत नदी उन्होंने पहली बार देखी थी।

5. पहाड़ी बच्चों का जीवन कितना कठोर है? पाठ के आधार पर लिखिए।

उत्तरपहाड़ी बच्चे हर दिन तीन-साढ़े तीन किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़ाई पार करके दूर-दराज के एकमात्र स्कूल जाते हैं। केवल पढ़ते ही नहीं, बल्कि शाम को अपनी माँओं के साथ मवेशी चराते, पानी भरते एवं जंगल से लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

6. इस यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति-सौंदर्य के साथ-साथ श्रम एवं जीवन-संघर्ष का भी चित्रण हुआ है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तरलेखिका एक ओर हिमालय, तीस्ता नदी, झरनों, फूलों एवं बर्फ से ढके शिखरों के स्वर्गिक सौंदर्य का मनोहारी चित्रण करती हैं, जिसमें डूबकर वे ईश्वर के निकट अनुभव करती हैं।दूसरी ओर इसी सौंदर्य के बीच पत्थर तोड़ती पहाड़िनें, पीठ पर बँधे उनके बच्चे, सड़क बनाने में मरने वाले मजदूर तथा सीमा पर तैनात फौजी जीवन-संघर्ष के कठोर यथार्थ को उजागर करते हैं।इस प्रकार सौंदर्य एवं श्रम का यह समन्वय बताता है कि प्रकृति का यह वैभव श्रमिकों के पसीने एवं बलिदान से ही हम तक पहुँचता है। लेखिका सौंदर्य को निहारते हुए भी श्रम की गरिमा को नहीं भूलतीं – यही इस वृत्तांत की विशेषता है।

7. ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ पाठ हमें प्रकृति-संरक्षण की क्या प्रेरणा देता है?

उत्तरयह पाठ बताता है कि पेड़, पौधे, पशु एवं मनुष्य – सब अपनी-अपनी लय, ताल एवं गति में चलते हैं और इनमें अखंडित संपूर्णता है।लेखिका दुख व्यक्त करती हैं कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की इस लय से खिलवाड़ करके अक्षम्य अपराध किया है – प्रदूषण के कारण हिमपात तक घट रहा है।पाठ प्रेरणा देता है कि हम प्रकृति का अनावश्यक दोहन न करें, वनों एवं जल-स्रोतों की रक्षा करें, प्रदूषण रोकें तथा हिमशिखरों जैसे जल-स्तंभों को सुरक्षित रखें, क्योंकि इन्हीं पर हमारा जीवन निर्भर है।

8. लेखिका के अनुसार जीवन का वास्तविक आनंद किसमें है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरलेखिका को सतत प्रवाहमान झरनों, बहती तीस्ता नदी, मँडराते बादलों एवं हवा में झूमते फूलों को देखकर अनुभव होता है कि सब कुछ अपनी-अपनी लय एवं प्रवाह में निरंतर गतिशील है – चैरवेति-चैरवेति।पहली बार उन्हें अहसास होता है कि जीवन का आनंद इसी चलायमान (निरंतर बदलते) सौंदर्य में है, ठहराव में नहीं।अंत में वे यह भी अनुभव करती हैं कि मंजिल से कहीं अधिक रोमांचक मंजिल तक का सफर होता है, और मनुष्य की नए-नए स्थानों की यह अनवरत खोज ही वास्तव में सौंदर्य एवं जीवन का आनंद है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. ‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ पाठ की लेखिका कौन हैं?

(क) महादेवी वर्मा

(ख) मधु कांकरिया

(ग) मन्नू भंडारी

(घ) मृदुला गर्ग

उत्तर(ख) मधु कांकरिया।

2. यह पाठ किस विधा की रचना है?

(क) कहानी

(ख) निबंध

(ग) यात्रा-वृत्तांत

(घ) रेखाचित्र

उत्तर(ग) यात्रा-वृत्तांत।

3. लेखिका ने किस राज्य की यात्रा का वर्णन किया है?

(क) हिमाचल प्रदेश

(ख) उत्तराखंड

(ग) सिक्किम

(घ) जम्मू-कश्मीर

उत्तर(ग) सिक्किम।

4. गंतोक को लेखिका ने किसका शहर कहा है?

(क) फूलों का शहर

(ख) मेहनतकश बादशाहों का शहर

(ग) झीलों का शहर

(घ) मंदिरों का शहर

उत्तर(ख) मेहनतकश बादशाहों का शहर।

5. लेखिका का ड्राइवर-कम-गाइड कौन था?

(क) माणि

(ख) जितेन नार्गे

(ग) शेखर दत्ता

(घ) भैरों

उत्तर(ख) जितेन नार्गे।

6. किसी बौद्ध की मृत्यु पर कितनी श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं?

(क) इक्यावन

(ख) एक सौ आठ

(ग) इक्कीस

(घ) एक हजार

उत्तर(ख) एक सौ आठ (108)।

7. कौन-सी नदी सिलीगुड़ी से ही लेखिका के साथ थी?

(क) गंगा

(ख) ब्रह्मपुत्र

(ग) तीस्ता

(घ) कोसी

उत्तर(ग) तीस्ता।

8. ‘भारत का स्विट्ज़रलैंड’ किसे कहा गया है?

(क) यूमथांग

(ख) लायुंग

(ग) कटाओ

(घ) गंतोक

उत्तर(ग) कटाओ।

9. माणि के अनुसार हिमशिखर किसके जलस्तंभ हैं?

(क) केवल भारत के

(ख) पूरे एशिया के

(ग) केवल सिक्किम के

(घ) पूरे विश्व के

उत्तर(ख) पूरे एशिया के।

10. सीमा पर तैनात फौजियों के समय वहाँ तापमान कितना था?

(क) माइनस 5 डिग्री

(ख) माइनस 15 डिग्री

(ग) शून्य डिग्री

(घ) माइनस 25 डिग्री

उत्तर(ख) माइनस 15 डिग्री सेल्सियस।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण प्रश्न

निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लेखिका को रास्ते में पत्थर तोड़ती पहाड़ी स्त्रियाँ देखकर मन उदास हो गया।

कारण (R): प्राकृतिक सौंदर्य के बीच श्रम, भूख एवं जीवन-संघर्ष का कठोर यथार्थ उन्हें झकझोर गया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कटाओ में एक भी दुकान न होना उसके लिए वरदान माना गया है।

कारण (R): दुकानें न होने के कारण वह व्यावसायीकरण एवं प्रदूषण से बचकर अपने प्राकृतिक रूप में सुरक्षित रहा।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): प्रदूषण के कारण क्षेत्र में स्नोफॉल (हिमपात) लगातार कम होता जा रहा है।

कारण (R): हिमशिखर सर्दियों में बर्फ के रूप में जल संग्रह करते हैं।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता।

4. अभिकथन (A): धर्मचक्र देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी दिखाई दी।

कारण (R): मैदान हो या पहाड़, सर्वत्र लोगों की आस्थाएँ, विश्वास एवं पाप-पुण्य की धारणाएँ एक जैसी हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): लेखिका के अनुसार मंजिल से कहीं अधिक रोमांचक मंजिल तक का सफर होता है।

कारण (R): कटाओ के हिमशिखर देखने के बाद यूमथांग उन्हें थोड़ा फीका लगा।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(क), 3-(ख), 4-(क), 5-(क)।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • शहर का असली नाम गंतोक है (गंगटोक नहीं) – उत्तर में इसका उल्लेख करें।
  • लेखिका का नाम मधु कांकरिया तथा विधा यात्रा-वृत्तांत अवश्य याद रखें।
  • श्वेत पताकाएँ = मृत्यु/शोक, रंगीन पताकाएँ = शुभारंभ – यह अंतर स्पष्ट रूप से लिखें।
  • कटाओ = भारत का स्विट्ज़रलैंड; हिमशिखर = पूरे एशिया के जलस्तंभ – ये तथ्य उत्तर में जोड़ें।
  • दीर्घ उत्तरों में ‘सौंदर्य के साथ श्रम’ एवं ‘प्रकृति-संरक्षण’ के मूल भाव को अवश्य शामिल करें।

सामान्य गलतियाँ

  • गाइड का नाम भूलकर ‘शेखर दत्ता’ लिख देना – गाइड जितेन नार्गे है; शेखर दत्ता ने यूमथांग को पर्यटन-स्थल बनाने का विचार दिया था।
  • तीस्ता नदी को गलती से गंगा या ब्रह्मपुत्र लिख देना।
  • 108 पताकाओं की संख्या भूल जाना या इन्हें उतार दिए जाने की बात लिखना (ये स्वयं नष्ट होती हैं)।
  • केवल प्रकृति-सौंदर्य लिखकर श्रम एवं संघर्ष के पक्ष की उपेक्षा कर देना।
  • देवनागरी में मात्राओं की अशुद्धियाँ छोड़ देना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ पाठ के लेखक/लेखिका कौन हैं?

इस यात्रा-वृत्तांत की लेखिका मधु कांकरिया हैं, जिन्होंने इसमें अपनी सिक्किम-यात्रा का संवेदनशील वर्णन किया है।

‘साना-साना हाथ जोड़ि…’ का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है – ‘छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।’ यह प्रार्थना लेखिका ने एक नेपाली युवती से सीखी थी।

इस पाठ से क्या संदेश मिलता है?

पाठ बताता है कि प्रकृति का सच्चा सौंदर्य उसकी सजीवता एवं प्रवाह में है; हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और श्रमिक वर्ग एवं सीमा पर तैनात फौजियों के योगदान का सम्मान करना चाहिए।

प्रश्न NCERT कृतिका (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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