NCERT Solutions for Class 10 Hindi (क्षितिज 2) अध्याय 11: नौबतखाने में इबादत – प्रश्न-अभ्यास, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज (भाग 2) के अध्याय 11 ‘नौबतखाने में इबादत’ (लेखक – यतींद्र मिश्र) का पूरा समाधान देता है। यह पाठ प्रसिद्ध शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया रोचक व्यक्ति-चित्र (रेखाचित्र) है। यहाँ पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: क्षितिज (भाग 2) अध्याय: 11 पाठ: नौबतखाने में इबादत लेखक: यतींद्र मिश्र विधा: व्यक्ति-चित्र (रेखाचित्र) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र

यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। वे स्वतंत्र लेखन के साथ-साथ एक अर्धवार्षिक साहित्यिक पत्रिका का संपादन भी करते हैं। सन् 1999 में उन्होंने साहित्य तथा कलाओं के संवर्धन और अनुशीलन के लिए ‘विमला देवी फाउंडेशन’ नामक सांस्कृतिक न्यास की स्थापना की। उनके तीन काव्य-संग्रह – यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ और ड्योढ़ी पर आलाप – प्रकाशित हुए हैं। शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर उन्होंने ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक भी लिखी। संगीत, ललित कलाओं तथा समाज-संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उनकी गहरी रुचि है। उन्हें भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान, ऋतुराज सम्मान आदि अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

पाठ का सार

‘नौबतखाने में इबादत’ प्रसिद्ध शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया एक रोचक व्यक्ति-चित्र है। पाठ का आरंभ सन् 1916 से 1922 के आसपास की काशी से होता है, जहाँ पंचगंगा घाट स्थित बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर नौबतखाने से मंगलध्वनि निकलती थी। बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम अमीरुद्दीन था। उनका जन्म बिहार के डुमराँव में एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ और बाद में वे ननिहाल काशी आ गए। डुमराँव का महत्त्व इसलिए भी है कि शहनाई बजाने वाली ‘रीड’ वहीं सोन नदी के किनारे उगने वाले नरकट से बनती है।

बालक अमीरुद्दीन को संगीत की प्रेरणा रसूलनबाई और बतूलनबाई नामक गायिका बहनों को सुनकर मिली। बड़े होकर वे अपने मामा अलीबख्श खाँ से शहनाई की तालीम लेने लगे। लेखक बताते हैं कि शहनाई ‘सुषिर-वाद्यों’ में गिनी जाती है और इसे ‘शाहेनय’ अर्थात् सुषिर वाद्यों में ‘शाह’ की उपाधि मिली है। बिस्मिल्ला खाँ का मानना था कि संगीत एक आराधना है, इबादत है; इसके लिए रियाज़, धैर्य और तन्मयता आवश्यक है।

खाँ साहब काशी, गंगा, बाबा विश्वनाथ और बालाजी मंदिर से अत्यंत प्रेम करते थे तथा मुहर्रम के दिनों में अज़ादारी (शोक) मनाते और शहनाई पर नौहा बजाते थे। वे मिली-जुली गंगा-जमुनी संस्कृति के प्रतीक थे – एक सच्चे इंसान और सच्चे सुर-साधक। वे ईश्वर से सदा सच्चे सुर की भीख माँगते रहे। नब्बे वर्ष की आयु में 21 अगस्त 2006 को उनका निधन हुआ। उनकी सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने पूरे अस्सी बरस संगीत को संपूर्णता से सीखने की जिजीविषा अपने भीतर जीवित रखी। पाठ काशी की सांस्कृतिक परंपरा, सांप्रदायिक सद्भाव और एक कलाकार की निष्ठा का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है।

मूलभाव

इस पाठ का मूलभाव यह है कि सच्ची कला और संगीत किसी धर्म या मज़हब की सीमा में बँधे नहीं होते – वे साधना, इबादत और मानवता के प्रतीक हैं। उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जीवन हमें सिखाता है कि निरंतर रियाज़, धैर्य, नम्रता और निष्ठा से ही कला की ऊँचाई पाई जाती है। एक मुसलमान होकर भी काशी, गंगा और बाबा विश्वनाथ के प्रति उनकी अपार श्रद्धा भारत की गंगा-जमुनी (मिली-जुली) संस्कृति का सुंदर उदाहरण है।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
नौबतखानाप्रवेश-द्वार के ऊपर मंगलध्वनि बजाने का स्थान
इबादतउपासना, पूजा, आराधना
ड्योढ़ीदेहली, चौखट, मुख्य प्रवेश-द्वार
रियाज़अभ्यास
मार्फ़तद्वारा, माध्यम से
सुषिर-वाद्यफूँककर बजाए जाने वाले वाद्य
रीडनरकट (एक प्रकार की घास) से बनी पोली नली जिससे शहनाई फूँकी जाती है
नियामतईश्वर की देन, सुख, धन-दौलत
सज़दामाथा टेकना
तासीरगुण, प्रभाव, असर
श्रुतिशब्दध्वनि, सूक्ष्म स्वरांश
ऊहापोहउलझन, अनिश्चितता
तिलिस्मजादू
गमकखुशबू, सुगंध
अज़ादारीमातम करना, दुःख मनाना
बदस्तूरकायदे से, तरीके से, ज्यों का त्यों
नैसर्गिकस्वाभाविक, प्राकृतिक
दादशाबाशी, प्रशंसा
तालीमशिक्षा
अदबकायदा, शिष्टाचार, साहित्य
अलहमदुलिल्लाहतमाम तारीफ़ ईश्वर के लिए
जिजीविषाजीने की इच्छा
शिरकतशामिल होना
समताल का एक अंग; वह स्थान जहाँ लय की समाप्ति और ताल का आरंभ होता है

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?

उत्तरशहनाई की दुनिया में डुमराँव को मुख्यतः दो कारणों से याद किया जाता है –(क) शहनाई बजाने के लिए जिस ‘रीड’ का प्रयोग होता है, वह नरकट नामक घास से बनती है, जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। इसी रीड के कारण शहनाई जैसा सुरीला वाद्य बज पाता है।(ख) प्रसिद्ध शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान भी डुमराँव ही है। इस प्रकार शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण हैं।

2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

उत्तरशहनाई एक मांगलिक वाद्य है, जो विवाह, उत्सव तथा शुभ अवसरों पर मंगलध्वनि के रूप में बजाया जाता है। दक्षिण भारत के ‘नागस्वरम्’ की तरह यह प्रभाती की मंगलध्वनि का संपूरक है।बिस्मिल्ला खाँ ने अपने अस्सी वर्षों के रियाज़ और साधना से शहनाई को डेढ़ सप्तक के साज़ से दो सप्तक का साज़ बनाकर साज़ों की कतार में सरताज बना दिया। उन्होंने शहनाई को संसार भर में प्रतिष्ठा दिलाई।उनकी शहनाई से निकलने वाली जादुई आवाज़ ने मंगलध्वनि को नया गौरव दिया, इसीलिए उन्हें शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया है।

3. सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?

उत्तरसुषिर-वाद्य उन वाद्ययंत्रों को कहते हैं जो फूँककर बजाए जाते हैं तथा जिनमें नाड़ी (नरकट या रीड) होती है, जैसे – बाँसुरी, शहनाई, नागस्वरम् और बीन।शहनाई की ध्वनि अत्यंत मधुर, सुरीली और मंगलमयी होती है तथा यह शुभ अवसरों पर बजाई जाती है। अपनी कोमल, गूँजती और भावपूर्ण ध्वनि के कारण यह सभी सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।इसी श्रेष्ठता के कारण शहनाई को ‘शाहेनय’ अर्थात् ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ (राजा) की उपाधि दी गई होगी।

4. आशय स्पष्ट कीजिए—

(क) ‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’

उत्तरयह कथन उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की सच्ची साधना और कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है। जब एक शिष्या ने उनकी फटी लुंगी पहनने पर टोका, तो उन्होंने कहा कि वे ईश्वर से केवल यही दुआ माँगते हैं कि वह उन्हें ‘फटा सुर’ न दे।आशय यह है कि उनके लिए फटी लुंगी जैसी बाहरी (सांसारिक) वस्तुएँ महत्त्वहीन हैं – वह तो कभी भी सिल जाएगी; किंतु बेसुरापन (फटा सुर) कभी सुधारा नहीं जा सकता। उनके लिए सच्चा सुर ही सबसे बड़ी पूँजी है, बाहरी दिखावा नहीं।

(ख) ‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’

उत्तरयह बिस्मिल्ला खाँ की ईश्वर से की गई प्रार्थना है, जो उनकी विनम्रता और संगीत के प्रति निष्ठा को प्रकट करती है। वे ईश्वर से ऐसा सच्चा सुर माँगते हैं जिसमें इतनी शक्ति (तासीर) हो कि सुनने वालों की आँखों से सच्चे मोती जैसे स्वाभाविक (अनगढ़) आँसू अपने-आप बहने लगें।आशय यह है कि वे ऐसा प्रभावशाली, हृदयस्पर्शी सुर चाहते थे जो श्रोता को भावविभोर कर दे। यह उनकी कला को पूर्णता तक पहुँचाने की अदम्य लगन और भक्तिभाव का परिचायक है।

5. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?

उत्तरकाशी में लुप्त होती सांस्कृतिक परंपराएँ बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करती थीं –(क) पक्का महाल से मलाई-बरफ़ और देशी घी की कचौड़ी-जलेबी बेचने वाले चले गए।(ख) संगति करने वाले संगतियों के प्रति गायकों के मन में अब आदर नहीं रहा।(ग) घंटों रियाज़ करने की परंपरा समाप्त होती जा रही थी।(घ) कजरी, चैती तथा अदब की पुरानी संगीतमय परंपराएँ और गंगा-जमुनी संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही थीं।एक सच्चे कलाकार और सामाजिक व्यक्ति होने के नाते इन सबकी कमी उन्हें बहुत खलती थी।

6. पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि—

(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ मुसलमान होते हुए भी काशी, गंगा, बाबा विश्वनाथ और बालाजी मंदिर के प्रति अपार श्रद्धा रखते थे। काशी से बाहर रहने पर भी वे विश्वनाथ एवं बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते और उसी ओर शहनाई का प्याला घुमा देते थे।वे संकटमोचन मंदिर में होने वाले हनुमान जयंती के संगीत-आयोजन में अवश्य भाग लेते थे और मुहर्रम में नौहा बजाकर शोक भी मनाते थे। इन प्रसंगों से सिद्ध होता है कि वे हिंदू-मुस्लिम मिली-जुली (गंगा-जमुनी) संस्कृति के सच्चे प्रतीक थे।

(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ अत्यंत सरल, विनम्र और निरभिमानी थे। भारतरत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान पाकर भी उन्होंने अहंकार नहीं किया; उन्होंने कहा कि भारतरत्न उन्हें शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं।वे फटी लुंगी पहनने में संकोच नहीं करते थे और सच्चे सुर को ही सबसे बड़ी संपत्ति मानते थे। अपने शिष्यों, परंपरा तथा काशी की संस्कृति से उनका गहरा लगाव था। उनका यह सहज, मानवीय और निश्छल व्यवहार सिद्ध करता है कि वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।

7. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ की संगीत-साधना को अनेक घटनाओं और व्यक्तियों ने समृद्ध किया –(क) रसूलनबाई और बतूलनबाई – इन गायिका बहनों को सुनकर ही बचपन में उनके मन में संगीत के प्रति आसक्ति जगी।(ख) मामा अलीबख्श खाँ – इन्हीं से उन्होंने शहनाई की विधिवत तालीम ली; नाना से भी उन्हें संगीत की प्रेरणा मिली।(ग) काशी का सांस्कृतिक परिवेश – बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी, संकटमोचन मंदिर का संगीत-आयोजन, गंगा और बाबा विश्वनाथ की श्रद्धा ने उनकी साधना को गहराई दी।(घ) एक फकीर का आशीर्वाद – जिसने उनसे कहा था – “बजा, बजा।”(ङ) कुलसुम हलवाइन की संगीतमय कचौड़ी तथा फ़िल्मों एवं अभिनेत्री सुलोचना के प्रति लगाव ने भी उनके सौंदर्य-बोध को पोषित किया।

रचना और अभिव्यक्ति

8. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने मुझे प्रभावित किया –(क) सादगी और विनम्रता – भारतरत्न जैसा सम्मान पाकर भी वे अभिमान से दूर, सरल जीवन जीते रहे।(ख) कला के प्रति निष्ठा – अस्सी वर्षों तक निरंतर रियाज़ और सच्चे सुर की साधना उनके समर्पण को दर्शाती है।(ग) धार्मिक सहिष्णुता – मुसलमान होकर भी काशी, गंगा और विश्वनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा मिली-जुली संस्कृति का आदर्श है।(घ) मानवीयता और आस्तिकता – वे संगीत को इबादत मानते थे और ईश्वर से सदा सच्चे सुर की भीख माँगते रहे। उनकी ये विशेषताएँ अत्यंत प्रेरक हैं।

9. मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरमुहर्रम बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व था। मुहर्रम के पूरे दस दिन वे तथा उनके खानदान का कोई व्यक्ति न शहनाई बजाता था, न किसी संगीत-कार्यक्रम में शिरकत करता था; यह हजरत इमाम हुसैन एवं उनके परिजनों की शहादत के शोक (अज़ादारी) का समय होता था।आठवीं तारीख का दिन उनके लिए विशेष महत्त्व रखता था। इस दिन वे खड़े होकर दालमंडी में फातमान के करीब लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तक पैदल रोते हुए नौहा बजाते जाते थे। इस दिन कोई राग-रागिनी नहीं बजती थी। इस प्रकार मुहर्रम के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव था।

10. बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तरहाँ, बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य (एकनिष्ठ) उपासक थे। इसके पक्ष में अनेक तर्क हैं –(क) उन्होंने अस्सी वर्षों तक निरंतर रियाज़ किया और 80 वर्ष की आयु में भी उनकी साधना जारी रही।(ख) वे संगीत को इबादत मानते थे और ईश्वर से बार-बार सच्चे सुर की प्रार्थना करते थे – “मेरे मालिक एक सुर बख्श दे।”(ग) उनके लिए कला और सुर ही सबसे बड़ी संपत्ति थे; फटी लुंगी जैसी बाहरी वस्तुएँ उनके लिए महत्त्वहीन थीं।(घ) भारतरत्न उन्हें शहनाई-वादन पर मिला, और इसी कला को उन्होंने अपने जीवन का परम लक्ष्य बनाया। इन तर्कों से सिद्ध है कि वे कला के अनन्य उपासक थे।

भाषा-अध्ययन

11. निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए—

उत्तर (क) यह ज़रूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।
आश्रित उपवाक्य – “कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं”। भेद – संज्ञा उपवाक्य।
(ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
आश्रित उपवाक्य – “जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है”। भेद – विशेषण उपवाक्य।
(ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
आश्रित उपवाक्य – “जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है”। भेद – विशेषण उपवाक्य।
(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।
आश्रित उपवाक्य – “(कि) कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा”। भेद – संज्ञा उपवाक्य।
(ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
आश्रित उपवाक्य – “जिसकी गमक उसी में समाई है”। भेद – विशेषण उपवाक्य।
(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर ज़िंदा रखा।
आश्रित उपवाक्य – “कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर ज़िंदा रखा”। भेद – संज्ञा उपवाक्य।

12. निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में बदलिए—

उत्तर (क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।
मिश्र वाक्य – जो बालसुलभ हँसी है, उसमें कई यादें बंद हैं।
(ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
मिश्र वाक्य – काशी में संगीत आयोजन की जो परंपरा है, वह प्राचीन एवं अद्भुत है।
(ग) धत्! पगली इ भारतरत्न हमको शहनइया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।
मिश्र वाक्य – धत् पगली! जो भारतरत्न है वह हमको शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं।
(घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।
मिश्र वाक्य – काशी का जो नायाब हीरा है, वह हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम अमीरुद्दीन था और उनका जन्म बिहार के डुमराँव नामक स्थान पर एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ था।

2. शहनाई बजाने के लिए ‘रीड’ का क्या महत्त्व है?

उत्तररीड अंदर से पोली नली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है। यह नरकट (एक प्रकार की घास) से बनाई जाती है। रीड के बिना शहनाई बजाई ही नहीं जा सकती, इसलिए उसका विशेष महत्त्व है।

3. बचपन में अमीरुद्दीन फ़िल्म देखने के लिए पैसे कैसे जुटाते थे?

उत्तरअमीरुद्दीन दो-दो पैसे मामा, मौसी और नानी से लेकर थर्ड क्लास के टिकट के लिए छह पैसे जुटाते थे, फिर घंटों लाइन में लगकर टिकट हासिल करते थे। बालाजी मंदिर पर शहनाई बजाने से मिलने वाली अठन्नी से भी वे सुलोचना की फ़िल्में देखते थे।

4. खाँ साहब को भारतरत्न मिलने पर उनकी शिष्या ने क्या टोका और उन्होंने क्या उत्तर दिया?

उत्तरशिष्या ने डरते-डरते टोका कि अब इतनी प्रतिष्ठा और भारतरत्न मिलने के बाद वे फटी लुंगी न पहना करें, क्योंकि अच्छा नहीं लगता। इस पर खाँ साहब लाड़ से बोले कि भारतरत्न उन्हें शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं; ईश्वर से उनकी यही दुआ है कि वह ‘फटा सुर’ न बख्शे – लुंगी तो आज फटी है, कल सी जाएगी।

5. बिस्मिल्ला खाँ का देहांत कब और किस आयु में हुआ?

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ का देहांत 21 अगस्त 2006 को नब्बे वर्ष की भरी-पूरी आयु में हुआ। उनकी सबसे बड़ी देन यह रही कि उन्होंने पूरे अस्सी बरस संगीत को संपूर्णता से सीखने की जिजीविषा अपने भीतर ज़िंदा रखी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

6. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन के आधार पर सिद्ध कीजिए कि संगीत किसी धर्म या मज़हब का मोहताज नहीं होता।

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ का संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि संगीत और कला किसी धर्म या मज़हब की सीमा में नहीं बँधते। वे धर्म से मुसलमान थे, परंतु काशी, गंगा, बाबा विश्वनाथ और बालाजी मंदिर के प्रति उनकी श्रद्धा अपार थी।वे संकटमोचन मंदिर के संगीत-आयोजन और हनुमान जयंती में भाग लेते थे तथा मुहर्रम में नौहा बजाकर शोक भी मनाते थे। उनके लिए शहनाई इबादत थी और सुर ही उनका धर्म। इस प्रकार उनका जीवन हिंदू-मुस्लिम एकता एवं गंगा-जमुनी संस्कृति का सजीव उदाहरण है, जो सिद्ध करता है कि सच्चा संगीत समस्त मानवता को जोड़ता है, किसी मज़हब का मोहताज नहीं होता।

7. ‘काशी संस्कृति की पाठशाला है’ – पाठ के आधार पर काशी की सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तरपाठ में काशी को संस्कृति की पाठशाला तथा ‘आनंदकानन’ कहा गया है। यहाँ संगीत, साहित्य, कला और अदब की प्राचीन परंपरा है। संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती पर पाँच दिनों तक शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन-वादन का उत्कृष्ट आयोजन होता है।काशी में पंडित कंठे महाराज, विद्याधरी, बड़े रामदास जी, मौजुद्दीन खाँ जैसे रसिक और बिस्मिल्ला खाँ जैसे कलाकार हुए। यहाँ की अपनी बोली, अपने उत्सव, अपना ग़म और अपनी विशिष्ट तहज़ीब है। यहाँ कजरी, चैती, ठुमरी जैसी संगीत-विधाएँ तथा हिंदू-मुस्लिम मिली-जुली संस्कृति पनपी। काशी में मरण भी मंगल माना गया है। इस प्रकार काशी भारतीय संस्कृति की अनूठी पाठशाला है।

8. बिस्मिल्ला खाँ की दृष्टि में संगीत क्या है? उनकी संगीत-साधना के प्रति निष्ठा का वर्णन कीजिए।

उत्तरबिस्मिल्ला खाँ की दृष्टि में संगीत मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आराधना और इबादत है। उनका मानना था कि संगीत का अपना विधि-विधान और शास्त्र है; इस शास्त्र से परिचय आवश्यक है और परिचय ही नहीं, उसका अभ्यास (रियाज़) भी अनिवार्य है।अभ्यास के लिए गुरु-शिष्य परंपरा, पूर्ण तन्मयता, धैर्य और मंथन ज़रूरी हैं। यही लगन और धैर्य बिस्मिल्ला खाँ में आजीवन रहा, तभी अस्सी वर्षों तक उनकी साधना चलती रही। वे ईश्वर से बार-बार सच्चे सुर की प्रार्थना करते रहे और सुर को ही सबसे बड़ी नियामत मानते रहे। उनकी यह अटूट निष्ठा ही उन्हें संगीत का अमर नायक बनाती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) यतींद्र मिश्र

(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी

(ग) यशपाल

(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी

उत्तर(क) यतींद्र मिश्र।

2. बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था?

(क) शम्सुद्दीन

(ख) अमीरुद्दीन

(ग) सादिक हुसैन

(घ) अलीबख्श

उत्तर(ख) अमीरुद्दीन।

3. बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?

(क) काशी

(ख) लखनऊ

(ग) डुमराँव (बिहार)

(घ) अयोध्या

उत्तर(ग) डुमराँव (बिहार)।

4. शहनाई किस श्रेणी का वाद्य है?

(क) तत-वितत

(ख) घनवाद्य

(ग) अवनद्ध

(घ) सुषिर वाद्य

उत्तर(घ) सुषिर वाद्य।

5. शहनाई को कौन-सी उपाधि दी गई है?

(क) शाहेनय

(ख) नागस्वरम्

(ग) सरताज

(घ) मृदंग

उत्तर(क) शाहेनय (सुषिर वाद्यों में शाह)।

6. बालक अमीरुद्दीन को संगीत की प्रेरणा किनसे मिली?

(क) कुलसुम हलवाइन से

(ख) रसूलनबाई और बतूलनबाई से

(ग) सुलोचना से

(घ) सादिक हुसैन से

उत्तर(ख) रसूलनबाई और बतूलनबाई से।

7. रीड किससे बनाई जाती है?

(क) बाँस से

(ख) धातु से

(ग) नरकट (घास) से

(घ) लकड़ी से

उत्तर(ग) नरकट (घास) से।

8. बिस्मिल्ला खाँ किस पर्व से गहराई से जुड़े थे?

(क) ईद

(ख) मुहर्रम

(ग) होली

(घ) दीवाली

उत्तर(ख) मुहर्रम।

9. खाँ साहब को कौन-सा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला था?

(क) पद्मश्री

(ख) पद्मभूषण

(ग) भारतरत्न

(घ) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

उत्तर(ग) भारतरत्न।

10. बिस्मिल्ला खाँ का देहांत किस वर्ष हुआ?

(क) सन् 2000

(ख) सन् 2004

(ग) सन् 2006

(घ) सन् 2008

उत्तर(ग) सन् 2006 (21 अगस्त 2006)।
उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(ख), 3-(ग), 4-(घ), 5-(क), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ख), 9-(ग), 10-(ग)।

अभिकथन-कारण

नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): शहनाई की दुनिया में डुमराँव को याद किया जाता है।

कारण (R): शहनाई की रीड बनाने वाला नरकट डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाया जाता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

कारण (R): मुसलमान होते हुए भी उन्हें काशी, गंगा और बाबा विश्वनाथ से अपार श्रद्धा थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ को भारतरत्न से कोई लगाव नहीं था।

कारण (R): उन्होंने कहा था कि भारतरत्न उन्हें शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है। खाँ साहब भारतरत्न का सम्मान करते थे; उनका कथन उनकी सादगी एवं कला-निष्ठा को दर्शाता है, न कि सम्मान के प्रति उदासीनता को।

4. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ संगीत को इबादत मानते थे।

कारण (R): वे ईश्वर से सदा सच्चे सुर की प्रार्थना करते रहे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): मुहर्रम के दिनों में खाँ साहब शहनाई पर राग-रागिनी बजाते थे।

कारण (R): मुहर्रम इमाम हुसैन की शहादत के शोक का समय होता है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है। मुहर्रम के दिनों में कोई राग नहीं बजता था; वे केवल नौहा बजाकर शोक मनाते थे।
उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(क), 3-(घ), 4-(क), 5-(घ)।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • पाठ की विधा याद रखें – यह ‘व्यक्ति-चित्र / रेखाचित्र’ है, कहानी नहीं।
  • महत्त्वपूर्ण तथ्य रटें – बचपन का नाम (अमीरुद्दीन), जन्म-स्थान (डुमराँव), निधन (21 अगस्त 2006, 90 वर्ष), भारतरत्न।
  • ‘आशय स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्न में पहले कथन का संदर्भ, फिर उसका भाव लिखें।
  • शहनाई = सुषिर वाद्य, उपाधि = शाहेनय – ये तथ्य परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
  • मिली-जुली (गंगा-जमुनी) संस्कृति और काशी की विशेषताओं को उदाहरण सहित लिखें।

सामान्य गलतियाँ

  • बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान काशी लिख देना – वास्तव में जन्म डुमराँव में हुआ, काशी ननिहाल था।
  • ‘सुषिर’ को तत या घनवाद्य समझ लेना।
  • लेखक का नाम गलत लिखना – पाठ के लेखक यतींद्र मिश्र हैं।
  • निधन-वर्ष में भूल – सही उत्तर सन् 2006 है।
  • वाक्य-भेद में संज्ञा और विशेषण उपवाक्य के बीच भ्रम होना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक यतींद्र मिश्र हैं। यह उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया व्यक्ति-चित्र (रेखाचित्र) है।

बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम और जन्म-स्थान क्या था?

उनका बचपन का नाम अमीरुद्दीन था तथा उनका जन्म बिहार के डुमराँव में हुआ था; बाद में वे ननिहाल काशी आ गए।

इस पाठ का मूल संदेश क्या है?

संगीत और कला किसी धर्म या मज़हब के मोहताज नहीं होते; निष्ठा, रियाज़ और सादगी से ही कला की ऊँचाई मिलती है। यह पाठ गंगा-जमुनी (मिली-जुली) संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत करता है।

प्रश्न NCERT क्षितिज (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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