NCERT Solutions for Class 10 Hindi (क्षितिज 2) अध्याय 11: नौबतखाने में इबादत – प्रश्न-अभ्यास, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज (भाग 2) के अध्याय 11 ‘नौबतखाने में इबादत’ (लेखक – यतींद्र मिश्र) का पूरा समाधान देता है। यह पाठ प्रसिद्ध शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया रोचक व्यक्ति-चित्र (रेखाचित्र) है। यहाँ पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।
लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र
यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। वे स्वतंत्र लेखन के साथ-साथ एक अर्धवार्षिक साहित्यिक पत्रिका का संपादन भी करते हैं। सन् 1999 में उन्होंने साहित्य तथा कलाओं के संवर्धन और अनुशीलन के लिए ‘विमला देवी फाउंडेशन’ नामक सांस्कृतिक न्यास की स्थापना की। उनके तीन काव्य-संग्रह – यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ और ड्योढ़ी पर आलाप – प्रकाशित हुए हैं। शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर उन्होंने ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक भी लिखी। संगीत, ललित कलाओं तथा समाज-संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उनकी गहरी रुचि है। उन्हें भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान, ऋतुराज सम्मान आदि अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
पाठ का सार
‘नौबतखाने में इबादत’ प्रसिद्ध शहनाई-वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया एक रोचक व्यक्ति-चित्र है। पाठ का आरंभ सन् 1916 से 1922 के आसपास की काशी से होता है, जहाँ पंचगंगा घाट स्थित बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर नौबतखाने से मंगलध्वनि निकलती थी। बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम अमीरुद्दीन था। उनका जन्म बिहार के डुमराँव में एक संगीत-प्रेमी परिवार में हुआ और बाद में वे ननिहाल काशी आ गए। डुमराँव का महत्त्व इसलिए भी है कि शहनाई बजाने वाली ‘रीड’ वहीं सोन नदी के किनारे उगने वाले नरकट से बनती है।
बालक अमीरुद्दीन को संगीत की प्रेरणा रसूलनबाई और बतूलनबाई नामक गायिका बहनों को सुनकर मिली। बड़े होकर वे अपने मामा अलीबख्श खाँ से शहनाई की तालीम लेने लगे। लेखक बताते हैं कि शहनाई ‘सुषिर-वाद्यों’ में गिनी जाती है और इसे ‘शाहेनय’ अर्थात् सुषिर वाद्यों में ‘शाह’ की उपाधि मिली है। बिस्मिल्ला खाँ का मानना था कि संगीत एक आराधना है, इबादत है; इसके लिए रियाज़, धैर्य और तन्मयता आवश्यक है।
खाँ साहब काशी, गंगा, बाबा विश्वनाथ और बालाजी मंदिर से अत्यंत प्रेम करते थे तथा मुहर्रम के दिनों में अज़ादारी (शोक) मनाते और शहनाई पर नौहा बजाते थे। वे मिली-जुली गंगा-जमुनी संस्कृति के प्रतीक थे – एक सच्चे इंसान और सच्चे सुर-साधक। वे ईश्वर से सदा सच्चे सुर की भीख माँगते रहे। नब्बे वर्ष की आयु में 21 अगस्त 2006 को उनका निधन हुआ। उनकी सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने पूरे अस्सी बरस संगीत को संपूर्णता से सीखने की जिजीविषा अपने भीतर जीवित रखी। पाठ काशी की सांस्कृतिक परंपरा, सांप्रदायिक सद्भाव और एक कलाकार की निष्ठा का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है।
मूलभाव
इस पाठ का मूलभाव यह है कि सच्ची कला और संगीत किसी धर्म या मज़हब की सीमा में बँधे नहीं होते – वे साधना, इबादत और मानवता के प्रतीक हैं। उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जीवन हमें सिखाता है कि निरंतर रियाज़, धैर्य, नम्रता और निष्ठा से ही कला की ऊँचाई पाई जाती है। एक मुसलमान होकर भी काशी, गंगा और बाबा विश्वनाथ के प्रति उनकी अपार श्रद्धा भारत की गंगा-जमुनी (मिली-जुली) संस्कृति का सुंदर उदाहरण है।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नौबतखाना | प्रवेश-द्वार के ऊपर मंगलध्वनि बजाने का स्थान |
| इबादत | उपासना, पूजा, आराधना |
| ड्योढ़ी | देहली, चौखट, मुख्य प्रवेश-द्वार |
| रियाज़ | अभ्यास |
| मार्फ़त | द्वारा, माध्यम से |
| सुषिर-वाद्य | फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य |
| रीड | नरकट (एक प्रकार की घास) से बनी पोली नली जिससे शहनाई फूँकी जाती है |
| नियामत | ईश्वर की देन, सुख, धन-दौलत |
| सज़दा | माथा टेकना |
| तासीर | गुण, प्रभाव, असर |
| श्रुति | शब्दध्वनि, सूक्ष्म स्वरांश |
| ऊहापोह | उलझन, अनिश्चितता |
| तिलिस्म | जादू |
| गमक | खुशबू, सुगंध |
| अज़ादारी | मातम करना, दुःख मनाना |
| बदस्तूर | कायदे से, तरीके से, ज्यों का त्यों |
| नैसर्गिक | स्वाभाविक, प्राकृतिक |
| दाद | शाबाशी, प्रशंसा |
| तालीम | शिक्षा |
| अदब | कायदा, शिष्टाचार, साहित्य |
| अलहमदुलिल्लाह | तमाम तारीफ़ ईश्वर के लिए |
| जिजीविषा | जीने की इच्छा |
| शिरकत | शामिल होना |
| सम | ताल का एक अंग; वह स्थान जहाँ लय की समाप्ति और ताल का आरंभ होता है |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
3. सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?
4. आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) ‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
(ख) ‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’
5. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
6. पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि—
(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।
7. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?
रचना और अभिव्यक्ति
8. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?
9. मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।
10. बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
भाषा-अध्ययन
11. निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए—
आश्रित उपवाक्य – “कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं”। भेद – संज्ञा उपवाक्य। (ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
आश्रित उपवाक्य – “जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है”। भेद – विशेषण उपवाक्य। (ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
आश्रित उपवाक्य – “जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है”। भेद – विशेषण उपवाक्य। (घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।
आश्रित उपवाक्य – “(कि) कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा”। भेद – संज्ञा उपवाक्य। (ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
आश्रित उपवाक्य – “जिसकी गमक उसी में समाई है”। भेद – विशेषण उपवाक्य। (च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर ज़िंदा रखा।
आश्रित उपवाक्य – “कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर ज़िंदा रखा”। भेद – संज्ञा उपवाक्य।
12. निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में बदलिए—
मिश्र वाक्य – जो बालसुलभ हँसी है, उसमें कई यादें बंद हैं। (ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
मिश्र वाक्य – काशी में संगीत आयोजन की जो परंपरा है, वह प्राचीन एवं अद्भुत है। (ग) धत्! पगली इ भारतरत्न हमको शहनइया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।
मिश्र वाक्य – धत् पगली! जो भारतरत्न है वह हमको शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं। (घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।
मिश्र वाक्य – काशी का जो नायाब हीरा है, वह हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ था?
2. शहनाई बजाने के लिए ‘रीड’ का क्या महत्त्व है?
3. बचपन में अमीरुद्दीन फ़िल्म देखने के लिए पैसे कैसे जुटाते थे?
4. खाँ साहब को भारतरत्न मिलने पर उनकी शिष्या ने क्या टोका और उन्होंने क्या उत्तर दिया?
5. बिस्मिल्ला खाँ का देहांत कब और किस आयु में हुआ?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन के आधार पर सिद्ध कीजिए कि संगीत किसी धर्म या मज़हब का मोहताज नहीं होता।
7. ‘काशी संस्कृति की पाठशाला है’ – पाठ के आधार पर काशी की सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
8. बिस्मिल्ला खाँ की दृष्टि में संगीत क्या है? उनकी संगीत-साधना के प्रति निष्ठा का वर्णन कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) यतींद्र मिश्र
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) यशपाल
(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी
2. बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था?
(क) शम्सुद्दीन
(ख) अमीरुद्दीन
(ग) सादिक हुसैन
(घ) अलीबख्श
3. बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) काशी
(ख) लखनऊ
(ग) डुमराँव (बिहार)
(घ) अयोध्या
4. शहनाई किस श्रेणी का वाद्य है?
(क) तत-वितत
(ख) घनवाद्य
(ग) अवनद्ध
(घ) सुषिर वाद्य
5. शहनाई को कौन-सी उपाधि दी गई है?
(क) शाहेनय
(ख) नागस्वरम्
(ग) सरताज
(घ) मृदंग
6. बालक अमीरुद्दीन को संगीत की प्रेरणा किनसे मिली?
(क) कुलसुम हलवाइन से
(ख) रसूलनबाई और बतूलनबाई से
(ग) सुलोचना से
(घ) सादिक हुसैन से
7. रीड किससे बनाई जाती है?
(क) बाँस से
(ख) धातु से
(ग) नरकट (घास) से
(घ) लकड़ी से
8. बिस्मिल्ला खाँ किस पर्व से गहराई से जुड़े थे?
(क) ईद
(ख) मुहर्रम
(ग) होली
(घ) दीवाली
9. खाँ साहब को कौन-सा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला था?
(क) पद्मश्री
(ख) पद्मभूषण
(ग) भारतरत्न
(घ) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
10. बिस्मिल्ला खाँ का देहांत किस वर्ष हुआ?
(क) सन् 2000
(ख) सन् 2004
(ग) सन् 2006
(घ) सन् 2008
अभिकथन-कारण
नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): शहनाई की दुनिया में डुमराँव को याद किया जाता है।
कारण (R): शहनाई की रीड बनाने वाला नरकट डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाया जाता है।
2. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
कारण (R): मुसलमान होते हुए भी उन्हें काशी, गंगा और बाबा विश्वनाथ से अपार श्रद्धा थी।
3. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ को भारतरत्न से कोई लगाव नहीं था।
कारण (R): उन्होंने कहा था कि भारतरत्न उन्हें शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं।
4. अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ संगीत को इबादत मानते थे।
कारण (R): वे ईश्वर से सदा सच्चे सुर की प्रार्थना करते रहे।
5. अभिकथन (A): मुहर्रम के दिनों में खाँ साहब शहनाई पर राग-रागिनी बजाते थे।
कारण (R): मुहर्रम इमाम हुसैन की शहादत के शोक का समय होता है।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- पाठ की विधा याद रखें – यह ‘व्यक्ति-चित्र / रेखाचित्र’ है, कहानी नहीं।
- महत्त्वपूर्ण तथ्य रटें – बचपन का नाम (अमीरुद्दीन), जन्म-स्थान (डुमराँव), निधन (21 अगस्त 2006, 90 वर्ष), भारतरत्न।
- ‘आशय स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्न में पहले कथन का संदर्भ, फिर उसका भाव लिखें।
- शहनाई = सुषिर वाद्य, उपाधि = शाहेनय – ये तथ्य परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
- मिली-जुली (गंगा-जमुनी) संस्कृति और काशी की विशेषताओं को उदाहरण सहित लिखें।
सामान्य गलतियाँ
- बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान काशी लिख देना – वास्तव में जन्म डुमराँव में हुआ, काशी ननिहाल था।
- ‘सुषिर’ को तत या घनवाद्य समझ लेना।
- लेखक का नाम गलत लिखना – पाठ के लेखक यतींद्र मिश्र हैं।
- निधन-वर्ष में भूल – सही उत्तर सन् 2006 है।
- वाक्य-भेद में संज्ञा और विशेषण उपवाक्य के बीच भ्रम होना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक यतींद्र मिश्र हैं। यह उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर लिखा गया व्यक्ति-चित्र (रेखाचित्र) है।
बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम और जन्म-स्थान क्या था?
उनका बचपन का नाम अमीरुद्दीन था तथा उनका जन्म बिहार के डुमराँव में हुआ था; बाद में वे ननिहाल काशी आ गए।
इस पाठ का मूल संदेश क्या है?
संगीत और कला किसी धर्म या मज़हब के मोहताज नहीं होते; निष्ठा, रियाज़ और सादगी से ही कला की ऊँचाई मिलती है। यह पाठ गंगा-जमुनी (मिली-जुली) संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत करता है।
प्रश्न NCERT क्षितिज (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
