NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sanchayan 2) अध्याय 1: हरिहर काका – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक सञ्चयन (भाग 2) के अध्याय 1 ‘हरिहर काका’ (लेखक – मिथिलेश्वर) का सम्पूर्ण समाधान देता है – पाठ का सार, कठिन शब्दार्थ, बोध-प्रश्नों के विस्तृत उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – मिथिलेश्वर
हिंदी कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन के सशक्त चितेरे के रूप में प्रतिष्ठित कथाकार मिथिलेश्वर का जन्म सन् 1950 में बिहार के भोजपुर जिले के बैसाडीह गाँव में हुआ। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और शोध की उपाधि प्राप्त की तथा प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ग्रामीण समाज की दरिद्रता, शोषण, अंधविश्वास और मानवीय संबंधों के टूटन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनकी प्रमुख कृतियों में बाबूजी, हरिहर काका, भोर होने से पहले, झुकी नहीं, यह अंत नहीं तथा आत्मकथात्मक रचना पानी बीच मीन पियासी उल्लेखनीय हैं। उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उनकी भाषा सहज, बोलचाल के निकट तथा आँचलिक रंग से युक्त है, जो पात्रों की पीड़ा को सीधे पाठक के मन तक पहुँचा देती है।
पाठ का सार
‘हरिहर काका’ कहानी आरा (बिहार) से कुछ दूरी पर बसे एक गाँव की है, जिसे कथावाचक ‘मैं’ शैली में सुनाता है। हरिहर काका कथावाचक के पड़ोसी हैं और बचपन से उससे गहरे जुड़े हुए हैं। काका चार भाई हैं; अपनी संतान न होने के कारण उन्होंने दो विवाह किए, पर दोनों पत्नियाँ निःसंतान ही चल बसीं। काका के हिस्से में पंद्रह बीघे खेत हैं और वे भाइयों के संयुक्त परिवार में रहते हैं।
गाँव में ठाकुरबारी (ठाकुरजी का विशाल मंदिर) की बड़ी प्रतिष्ठा है; लोगों की अपार श्रद्धा के कारण इसके पास बीस बीघे ज़मीन और महंत-पुजारी का तंत्र है। आरंभ में काका के भाई और उनकी पत्नियाँ काका की खूब सेवा करते थे, परंतु धीरे-धीरे उपेक्षा करने लगे। बीमारी से उठे काका को एक दिन रूखा-सूखा भोजन परोसा गया, तो अपमान से तिलमिलाकर उन्होंने थाली आँगन में फेंक दी और भाइयों से कहा कि मुफ़्त में नहीं, उनके ही खेत की पैदावार पर सब मौज कर रहे हैं।
इसी कलह का लाभ उठाने के लिए ठाकुरबारी का लालची महंत सक्रिय हो उठा। उसने काका को बहला-फुसलाकर अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख देने को कहा ताकि स्वर्ग और यश दोनों मिलें। पर काका न ‘हाँ’ कहते, न ‘ना’। तब महंत ने साधुओं के साथ रात में काका का अपहरण कर ज़बरदस्ती अनेक कागज़ों पर उनके अँगूठे के निशान लेने चाहे। पुलिस आने पर साधु काका को बंद कमरे में छोड़कर भाग गए और हरिहर काका बंधे हुए बरामद हुए।
अब काका की दृष्टि खुल गई – महंत उन्हें घृणित और पापी लगने लगा। उधर भाई भी ज़मीन हड़पने के लिए वही षड्यंत्र दोहराने लगे। एक रात भाइयों ने भी हथियार के बल पर काका को बाँधकर, मुँह में कपड़ा ठूँसकर ज़बरदस्ती अँगूठे के निशान लिए। काका समझ गए कि महंत हो या सगे भाई – सबकी आसक्ति उनकी जायदाद में है, उनसे नहीं। अंततः पुलिस सुरक्षा में रहते हुए भी काका मौन और एकाकी हो गए; उनके खर्च पर पुलिस के जवान मौज करते हैं और काका जीवन के शेष दिन गूँगेपन के शिकार होकर काट रहे हैं। यह कहानी संयुक्त परिवार के विघटन, स्वार्थपरता तथा धर्म के नाम पर चलने वाले ढोंग का मार्मिक चित्र खींचती है।
मूलभाव / संदेश
यह कहानी दिखाती है कि आज रिश्तों की डोर भावना से नहीं, बल्कि स्वार्थ और संपत्ति से बँधी है। संतानहीन एवं अनपढ़ हरिहर काका के माध्यम से लेखक ने तीन सच्चाइयाँ उजागर की हैं – (1) संयुक्त परिवारों में बुज़ुर्गों की उपेक्षा और स्वार्थ-केंद्रित होते सगे संबंध, (2) धर्म तथा ठाकुरबारी के नाम पर महंतों-पुजारियों का पाखंड और लालच, और (3) जायदाद के लोभ में मनुष्य का अमानवीय हो जाना। अंत में काका का मौन इस व्यवस्था पर सबसे तीखा व्यंग्य है।
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| यंत्रणा | यातना, क्लेश, कष्ट |
| आसक्ति | लगाव, मोह |
| सयाना | बड़ा होना, समझदार |
| मँझधार | नदी या भवसागर का बीच भाग |
| विलीन | लुप्त हो जाना, मिल जाना |
| विकल्प | दूसरा उपाय या रास्ता |
| ठाकुरबारी | देवस्थान, ठाकुरजी का मंदिर |
| संचालन | चलाना, व्यवस्था करना |
| नियुक्ति | किसी पद पर लगाया जाना |
| दँवनी / दँवाई | अनाज (गेहूँ-धान) निकालने की प्रक्रिया |
| अगम | उपयोग से पहले देवता के लिए निकाला गया अनाज का अंश |
| घनिष्ठ | गहरा, अंतरंग |
| प्रवचन | उपदेश, धार्मिक भाषण |
| मशगूल | व्यस्त, तल्लीन |
| मोहभंग | मोह का टूट जाना, भ्रम मिटना |
| हुमाध / हवन-सामग्री | हवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री |
| तत्क्षण | उसी क्षण, तुरंत |
| बय / वसीयत | संपत्ति किसी के नाम लिख देने का दस्तावेज़ |
| अप्रत्याशित | आकस्मिक, जिसकी आशा न हो |
| निष्कर्ष | परिणाम, अंतिम राय |
| परदाफ़ाश | भेद खोलना, सच्चाई उजागर करना |
| आच्छादित | ढका हुआ, आवृत |
| अकारथ | बेकार, व्यर्थ |
| छल-बल-कल | धोखे, बल और बुद्धि (युक्ति) से |
बोध-प्रश्न (पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर)
नीचे दिए गए प्रश्न NCERT सञ्चयन (भाग 2) पुस्तक के ‘बोध-प्रश्न’ से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
1. कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
2. हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
3. ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
4. अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं—कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
5. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बरताव किया?
6. हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
7. कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, “अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।”
8. समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
9. यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?
10. हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (5)
1. हरिहर काका को संतान न होने पर भी उन्होंने तीसरा विवाह क्यों नहीं किया?
2. हरिहर काका के भाइयों ने आरंभ में उनकी सेवा क्यों की और बाद में उपेक्षा क्यों करने लगे?
3. थाली फेंकने की घटना से कहानी में क्या मोड़ आता है?
4. ठाकुरबारी की स्थापना से जुड़ी प्रचलित कहानी क्या है?
5. कहानी के अंत में हरिहर काका मौन क्यों हो गए?
दीर्घ उत्तरीय (3)
6. ‘हरिहर काका’ कहानी के माध्यम से लेखक संयुक्त परिवार और रिश्तों की किस वास्तविकता को उजागर करता है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
7. इस कहानी में लेखक ने धर्म एवं ठाकुरबारी के नाम पर चलने वाले पाखंड पर किस प्रकार करारा व्यंग्य किया है?
8. हरिहर काका के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘हरिहर काका’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) मिथिलेश्वर
(ग) यशपाल
(घ) रामवृक्ष बेनीपुरी
2. हरिहर काका के हिस्से में कितने बीघे खेत थे?
(क) दस बीघे
(ख) बीस बीघे
(ग) पंद्रह बीघे
(घ) साठ बीघे
3. कुल मिलाकर हरिहर काका कितने भाई थे?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
4. हरिहर काका का गाँव किस कस्बाई शहर से लगभग चालीस किलोमीटर दूर था?
(क) पटना
(ख) आरा
(ग) गया
(घ) छपरा
5. ठाकुरबारी के नाम पर कितने बीघे खेत थे?
(क) पंद्रह बीघे
(ख) बीस बीघे
(ग) पचास बीघे
(घ) साठ बीघे
6. हरिहर काका ने जीवन में कितने विवाह किए थे?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) एक भी नहीं
7. महंत हरिहर काका से क्या करवाना चाहता था?
(क) मंदिर में पूजा
(ख) ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिखवाना
(ग) तीसरा विवाह
(घ) गाँव से पलायन
8. भोजन में अपमान होने पर हरिहर काका ने क्या किया?
(क) चुपचाप खा लिया
(ख) भूखे सो गए
(ग) थाली आँगन में फेंक दी
(घ) घर छोड़कर चले गए
9. हरिहर काका को अंततः किसकी सुरक्षा में रखा गया?
(क) महंत की
(ख) भाइयों की
(ग) पुलिस के जवानों की
(घ) गाँव के नेता की
10. कहानी के अंत में हरिहर काका की मनःस्थिति कैसी हो जाती है?
(क) प्रसन्न एवं संतुष्ट
(ख) मौन एवं एकाकी
(ग) क्रोधी एवं हिंसक
(घ) धार्मिक एवं भक्तिमय
अभिकथन-कारण प्रश्न
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): हरिहर काका के भाई आरंभ में उनकी खूब सेवा करते थे।
कारण (R): वे काका को संतुष्ट रखकर उनकी जायदाद अपने पास बनाए रखना चाहते थे।
2. अभिकथन (A): हरिहर काका ने महंत को अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दी।
कारण (R): काका धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और स्वर्ग पाना चाहते थे।
3. अभिकथन (A): अनपढ़ होने पर भी हरिहर काका ने जीते-जी ज़मीन न लिखने का निश्चय किया।
कारण (R): उन्होंने रमेसर की विधवा की दुर्गति देखकर उससे सबक लिया था।
4. अभिकथन (A): काका को महंत और सगे भाई एक ही श्रेणी के लगने लगे।
कारण (R): दोनों ही उनकी ज़मीन हड़पने के लिए छल और बल का प्रयोग कर रहे थे।
5. अभिकथन (A): ठाकुरबारी का महंत सच्चा संत और निःस्वार्थ साधु था।
कारण (R): वह दिन-रात केवल ईश्वर-भक्ति और जनसेवा में लीन रहता था।
परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- लेखक का नाम मिथिलेश्वर और विधा कहानी अवश्य याद रखें; उत्तर में लेखक के नाम का सही उल्लेख अंक दिलाता है।
- तथ्य रट लें – चार भाई, पंद्रह बीघे (काका का हिस्सा), बीस बीघे (ठाकुरबारी), दो विवाह, आरा से चालीस किमी दूर गाँव।
- मूल विषय – संयुक्त परिवार का विघटन, रिश्तों में स्वार्थ तथा धर्म के नाम पर पाखंड – को उत्तरों में अवश्य जोड़ें।
- दीर्घ उत्तरों में कहानी से उदाहरण (थाली फेंकना, अपहरण, अँगूठे के निशान लेना) देकर बात पुष्ट करें।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को प्रेमचंद लिख देना – यह पाठ मिथिलेश्वर का है, प्रेमचंद का नहीं।
- यह समझ लेना कि काका ने अंत में ज़मीन ठाकुरबारी या भाइयों को लिख दी – काका ने जीते-जी किसी को ज़मीन नहीं लिखी।
- केवल भाइयों या केवल महंत को दोषी ठहराना – कहानी में दोनों ही लोभी एवं अन्यायी हैं।
- ‘ठाकुरबारी’ को साधारण घर समझ लेना – यह ठाकुरजी का विशाल मंदिर/देवस्थान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘हरिहर काका’ पाठ के लेखक कौन हैं?
कक्षा 10 हिंदी (सञ्चयन भाग 2) के अध्याय 1 ‘हरिहर काका’ के लेखक प्रसिद्ध कथाकार मिथिलेश्वर हैं।
‘हरिहर काका’ कहानी का मूल संदेश क्या है?
यह कहानी बताती है कि आज रिश्ते भावना के बजाय स्वार्थ और संपत्ति पर टिके हैं; यह संयुक्त परिवार के विघटन तथा धर्म के नाम पर चलने वाले पाखंड एवं लालच को उजागर करती है।
हरिहर काका अंत में मौन क्यों हो गए?
महंत और सगे भाइयों दोनों के छल, अपहरण और अत्याचार से काका समझ गए कि सब केवल उनकी जायदाद के लोभी हैं; इसी विश्वासघात और गहरे अकेलेपन से दुखी होकर वे मौन रहकर शेष जीवन बिताने लगे।
प्रश्न NCERT सञ्चयन (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
