कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 11 – चेतक की वीरता (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 11 ‘चेतक की वीरता’ (कवि – श्यामनारायण पाण्डेय) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, शीर्षक, कविता की रचना, समानार्थी शब्द, खोजबीन के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 11 कवि: श्यामनारायण पाण्डेय विधा: कविता (वीर रस) सत्र: 2026–27

कवि परिचय – श्यामनारायण पाण्डेय

श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) हिंदी के प्रसिद्ध वीर-रस कवि माने जाते हैं। उनकी कविताओं में ओज, उत्साह एवं देश-प्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी रहती है। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का प्रकाशन सन् 1939 में हुआ था। ‘चेतक की वीरता’ इसी ‘हल्दीघाटी’ काव्य का ही एक अंश है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में ‘हल्दीघाटी’ काव्य-कृति ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता एवं उत्साह का संचार कर दिया था। उनकी ओजपूर्ण कविताएँ आज भी मंचों पर बड़े गर्व से सुनाई जाती हैं।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त एवं वीर घोड़े ‘चेतक’ की अद्भुत फुर्ती, स्वामिभक्ति एवं वीरता का सजीव चित्रण करती है।

रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा को पाला था॥

गिरता न कभी चेतक-तन पर
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर
या आसमान पर घोड़ा था॥

जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था॥

कौशल दिखलाया चालों में
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौड़ा करवालों में॥

है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं॥

बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।
विकराल वज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया॥

भाला गिर गया, गिरा निषंग,
हय-टापों से खन गया अंग।
वैरी-समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग॥

— श्यामनारायण पाण्डेय

सार

‘चेतक की वीरता’ कविता वीर-रस के कवि श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है। इस कविता में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त एवं अत्यंत वीर घोड़े ‘चेतक’ की वीरता, फुर्ती एवं चपलता का सजीव वर्णन हुआ है। कवि कहते हैं कि चेतक रणभूमि के बीच इस प्रकार चौकड़ी भरता (छलाँगें लगाता) था कि वह सबसे निराला एवं अनोखा बन गया था। उसकी गति इतनी तेज थी कि हवा भी उसके सामने पीछे रह जाती थी।

चेतक राणा प्रताप के संकेत को इतनी जल्दी समझ लेता था कि कोड़ा कभी उसके शरीर पर पड़ता ही नहीं था। वह कभी शत्रुओं के सिर पर दौड़ता तो कभी ऐसा लगता मानो आकाश में दौड़ रहा हो। लगाम के ज़रा-सा हिलते ही वह अपने सवार को लेकर हवा में उड़ जाता था और राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह मुड़ जाता था। उसने युद्ध की चालों में अद्भुत कौशल दिखाया – वह भयानक भालों, ढालों एवं तलवारों के बीच निडर होकर सरपट दौड़ता रहा।

चेतक की गति इतनी तीव्र थी कि वह क्षण-भर में यहाँ-वहाँ दिखाई देता और तुरंत ओझल हो जाता; ऐसी कोई जगह न थी जहाँ वह न पहुँचा हो। वह बढ़ती हुई नदी की लहर के समान आगे बढ़ता और विकराल वज्रमय बादल की भाँति शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था। उसके टापों की मार से शत्रुओं के भाले एवं तरकश (निषंग) गिर पड़ते और अंग छिल जाते थे। घोड़े का ऐसा अद्भुत रंग-ढंग देखकर शत्रु-सेना भी दंग रह जाती थी। इस प्रकार कविता चेतक की स्वामिभक्ति एवं वीरता के माध्यम से हमें साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं देश-प्रेम की प्रेरणा देती है।

भावार्थ

पहला पद: कवि कहते हैं कि युद्ध-भूमि (रण) के बीच चौकड़ी भर-भरकर (बड़ी-बड़ी छलाँगें लगाते हुए) दौड़ता हुआ चेतक एकदम निराला अर्थात् अनोखा बन गया था। राणा प्रताप के इस घोड़े की गति इतनी तेज थी कि उसके आगे हवा को भी पाला पड़ गया अर्थात् हवा भी उसके सामने पिछड़ गई।

दूसरा पद: चेतक राणा के संकेत को इतनी शीघ्रता से समझ लेता था कि राणा प्रताप का कोड़ा कभी उसके शरीर पर पड़ता ही नहीं था। वह कभी शत्रुओं के सिर के ऊपर से दौड़ता हुआ निकल जाता, तो कभी ऐसा प्रतीत होता मानो वह आसमान में दौड़ रहा हो।

तीसरा पद: ज्यों ही हवा से ज़रा-सी लगाम (बाग) हिलती, चेतक अपने सवार को लेकर हवा में उड़ जाता था। राणा की आँख की पुतली घूमने (इधर-उधर देखने) से पहले ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता था – इतना समझदार एवं फुर्तीला था वह।

चौथा पद: चेतक ने युद्ध की चालों में अद्भुत कौशल (निपुणता) दिखाया। वह भयानक भालों के बीच से उड़ता-सा निकल गया, ढालों के बीच निडर होकर बढ़ता रहा और तलवारों (करवालों) के बीच भी सरपट दौड़ता रहा।

पाँचवाँ पद: चेतक की गति इतनी तीव्र थी कि एक पल वह यहाँ दिखाई देता तो दूसरे ही पल वहाँ नहीं रहता; अभी वहाँ था, अब यहाँ नहीं। रणभूमि में ऐसी कोई जगह न थी जहाँ वह न पहुँचा हो और शत्रुओं के किसी-न-किसी सिर पर वह सब ओर मौजूद था।

छठा पद: वह बढ़ती हुई नदी की लहर के समान आगे की ओर लहराता हुआ बढ़ता; कभी आगे जाता, कभी रुक जाता। फिर विकराल (भयंकर) वज्रमय बादल के समान वह शत्रु की सेना पर गरजकर टूट पड़ता था।

सातवाँ पद: चेतक के आक्रमण से शत्रुओं के भाले एवं तरकश (निषंग) गिर पड़ते तथा घोड़े के टापों की मार से उनके अंग छिल जाते। घोड़े का ऐसा अद्भुत रूप एवं वीरता देखकर पूरा शत्रु-समाज (वैरी-समाज) हक्का-बक्का रह जाता था।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
रणयुद्ध, युद्ध-भूमि
चौकड़ी भरनालंबी-लंबी छलाँगें लगाना
निरालाअनोखा, सबसे भिन्न
हवा को पाला पड़नाहवा से भी तेज दौड़ना; हवा का पिछड़ जाना
कोड़ाघोड़े को हाँकने का चाबुक
अरि / वैरीशत्रु, दुश्मन
मस्तकसिर, माथा
बागलगाम, घोड़े की रास
सवारघोड़े पर बैठा व्यक्ति (यहाँ राणा प्रताप)
पुतलीआँख की पुतली
कौशलनिपुणता, चतुराई
भालानुकीला लंबा अस्त्र
निर्भीकनिडर, बिना डरे
ढालवार रोकने का रक्षा-उपकरण
सरपटबहुत तेज (दौड़ना)
करवालतलवार
नदबड़ी नदी
विकरालभयंकर, डरावना
वज्रबिजली, इंद्र का अस्त्र
घहर जानागरजकर टूट पड़ना
निषंगतरकश, बाण रखने का खोल
हयघोड़ा
दंगहैरान, चकित

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?

• चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।

• चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।

• चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।

• चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।

उत्तर★ चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।कविता की पंक्ति “विकराल वज्र-मय बादल-सा / अरि की सेना पर घहर गया” इसी भाव को व्यक्त करती है – चेतक भयंकर वज्रमय बादल की भाँति गरजकर शत्रु-सेना पर टूट पड़ता था।

(2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?

• चेतक

• महाराणा प्रताप

• कवि

• शत्रु

उत्तर★ महाराणा प्रताप।चेतक घोड़ा है और उस पर सवार होकर युद्ध करने वाले महाराणा प्रताप हैं; अतः ‘सवार’ शब्द यहाँ महाराणा प्रताप के लिए आया है।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह मित्रों के साथ मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता की पंक्तियों एवं उनके भाव को आधार बनाया।पहले प्रश्न में ‘वज्र-मय बादल-सा…घहर गया’ पंक्ति सीधे संकेत करती है; दूसरे प्रश्न में चूँकि चेतक स्वयं घोड़ा है, उस पर सवार राणा प्रताप ही हो सकते हैं। अपने तर्क मित्रों को बताने एवं उनके तर्क सुनने से हमारी समझ और पक्की होती है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।

(क) “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में चेतक की निडरता एवं वीरता का वर्णन है। वह शत्रुओं की ढालों के बीच बिना किसी डर के घुस गया और तलवारों (करवालों) की मार के बीच भी बहुत तेज (सरपट) दौड़ता रहा।इससे पता चलता है कि चेतक एक सच्चे वीर एवं स्वामिभक्त योद्धा की तरह मृत्यु की परवाह किए बिना युद्ध में डटा रहा।

(ख) “भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में चेतक के आक्रमण की भयंकरता दिखाई गई है। उसके वेग एवं टापों की मार से शत्रुओं के हाथों से भाले छूटकर गिर पड़े, तरकश (निषंग) गिर गए और घोड़े के टापों से उनके अंग छिल गए।अर्थात् चेतक के पराक्रम के सामने शत्रु-सैनिक टिक ही नहीं पाते थे और घायल होकर पीछे हट जाते थे।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। इनका सही भावार्थ स्तंभ 2 में दिया गया है। पंक्तियों को उनके सही भावार्थ से मिलाइए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भावार्थ)
1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो।
2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो।
3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था।
4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात् वह उनका भाव समझ जाता था।
5. विकराल वज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया।शत्रु की सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता।
सही मिलान1 → हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो।2 → शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो।3 → चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था।4 → वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात् वह उनका भाव समझ जाता था।5 → शत्रु की सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता।

शीर्षक

यह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य-कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना)मैं इस कविता को ‘वीर चेतक’ अथवा ‘स्वामिभक्त चेतक’ शीर्षक देना चाहूँगा/चाहूँगी।कारण यह है कि पूरी कविता चेतक की वीरता के साथ-साथ उसकी अद्भुत स्वामिभक्ति (राणा के संकेत को तुरंत समझ लेना) एवं फुर्ती का वर्णन करती है। इसलिए ये शीर्षक कविता के मूल भाव को सही ढंग से व्यक्त करते हैं। (विद्यार्थी अपनी समझ के अनुसार अन्य उपयुक्त शीर्षक भी चुन सकते हैं, जैसे — ‘पवन-वेग चेतक’।)

कविता की रचना

नीचे दी गई पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए – “चेतक बन गया निराला था।”, “पड़ गया हवा को पाला था।”, “राणा प्रताप का कोड़ा था।”, “या आसमान पर घोड़ा था।” ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।

उत्तरकविता में आए कुछ प्रमुख तुकांत (मिलती-जुलती ध्वनि वाले) शब्द-युग्म इस प्रकार हैं—• निराला – पाला• कोड़ा – घोड़ा• चालों – भालों – ढालों – करवालों• लहर – ठहर – घहर• निषंग – अंग – दंग – रंगइन तुकांत शब्दों के कारण कविता में मधुर लय एवं गेयता उत्पन्न हो गई है।

शब्द के भीतर शब्द

“या आसमान पर घोड़ा था।” — ‘आसमान’ शब्द के भीतर ये शब्द छिपे हैं – आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि। अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए।

उत्तर (नमूना) निराला → नर, राला, ला, रा। करवाल → कर, रवा, वाल, वा। विकराल → कर, राल, विक, का। मस्तक → मस, तक, सत, मत। बादल → बाद, दल, दा, ल। (विद्यार्थी इसी प्रकार अन्य शब्द चुनकर भी उनके भीतर छिपे शब्द खोज सकते हैं।)

पाठ से आगे

आपकी बात

“जो तनिक हवा से बाग हिली / लेकर सवार उड़ जाता था।”
(क) ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ – कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।

उत्तरकविता को प्रभावशाली बनाने वाले ऐसे कई सजीव प्रयोग कविता में आए हैं, जैसे—• “पड़ गया हवा को पाला था” – चेतक की गति को हवा से भी तेज दिखाने के लिए।• “या आसमान पर घोड़ा था” – उसकी ऊँची एवं तीव्र छलाँगों के लिए।• “राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था” – उसकी अद्भुत फुर्ती के लिए।• “विकराल वज्र-मय बादल-सा…घहर गया” – उसके भयंकर आक्रमण के लिए। ये सभी प्रयोग कविता को सजीव एवं प्रभावशाली बना देते हैं।

(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह मिलकर चर्चा करने वाली गतिविधि है। युद्ध से अपार धन-जन की हानि होती है, अनेक लोग मारे जाते हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं तथा देश का विकास रुक जाता है।इसलिए हर समस्या को बातचीत, समझौते एवं शांति से सुलझाना चाहिए। हमें मिल-जुलकर रहना, एक-दूसरे का सम्मान करना तथा शांति बनाए रखना सीखना चाहिए, ताकि किसी को युद्ध की पीड़ा न झेलनी पड़े।

समानार्थी शब्द

कुछ शब्द समान अर्थ वाले होते हैं, जैसे – हय, अश्व और घोड़ा। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं। नीचे दिए गए शब्दों में से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी हो—

क्र.शब्द-समूहसमानार्थी नहीं है (घेरा बनाएँ)
1.हवा, अनल, पवन, बयारअनल (अर्थ – आग; शेष सभी का अर्थ ‘हवा’)
2.रण, तुरंग, युद्ध, समरतुरंग (अर्थ – घोड़ा; शेष सभी का अर्थ ‘युद्ध’)
3.आसमान, आकाश, गगन, नभचरनभचर (अर्थ – आकाश में उड़ने वाला/पक्षी; शेष का अर्थ ‘आकाश’)
4.नद, नाद, सरिता, तटिनीनाद (अर्थ – ध्वनि/आवाज़; शेष का अर्थ ‘नदी’)
5.करवाल, तलवार, असि, ढालढाल (अर्थ – रक्षा-उपकरण; शेष सभी का अर्थ ‘तलवार’)

खोजबीन के लिए

1. महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए।

उत्तरमहाराणा प्रताप (1540–1597) मेवाड़ (वर्तमान राजस्थान) के एक वीर एवं स्वाभिमानी राजपूत शासक थे। वे अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता एवं स्वाभिमान के लिए जीवन-भर संघर्ष करते रहे।सन् 1576 में हुए हल्दीघाटी के प्रसिद्ध युद्ध में उन्होंने मुगल बादशाह अकबर की विशाल सेना का डटकर सामना किया। उन्होंने अनेक कठिनाइयाँ सहीं, जंगलों में रहे, परंतु कभी अधीनता स्वीकार नहीं की। उनका वीर घोड़ा ‘चेतक’ भी इसी हल्दीघाटी युद्ध में स्वामिभक्ति का अनुपम उदाहरण बना। महाराणा प्रताप आज भी साहस, स्वाभिमान एवं देश-प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं।

2. इस कविता में चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार-पत्रिका पर लगाइए।

उत्तर (नमूना)यह संकलन-गतिविधि है। पशु-पक्षियों पर आधारित कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ इस प्रकार हैं—• ‘तितली’ – (विभिन्न कवि)• ‘चींटी’ / ‘गिलहरी’ पर आधारित बाल-कविताएँ• ‘चिड़िया’ पर लिखी कविताएँ• पंचतंत्र की पशु-पक्षियों वाली कहानियाँ• ‘मोर’ / ‘कोयल’ पर आधारित कविताएँ। (विद्यार्थी पुस्तकालय एवं इंटरनेट से ऐसी रचनाएँ खोजकर दीवार-पत्रिका पर सजा सकते हैं।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘चेतक की वीरता’ कविता किस काव्य-कृति का अंश है और इसके कवि कौन हैं?

उत्तर‘चेतक की वीरता’ कविता वीर-रस के प्रसिद्ध कवि श्यामनारायण पाण्डेय की काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है। ‘हल्दीघाटी’ का प्रकाशन सन् 1939 में हुआ था।

2. चेतक की गति को कवि ने किसके समान बताया है?

उत्तरकवि ने चेतक की गति को हवा से भी तेज बताया है – उसके आगे हवा को भी पाला पड़ जाता था। दौड़ते समय वह कभी आसमान पर दौड़ता-सा प्रतीत होता था।

3. “राणा प्रताप का कोड़ा” चेतक पर कभी क्यों नहीं पड़ता था?

उत्तरचेतक राणा प्रताप के संकेत एवं इच्छा को इतनी जल्दी समझ लेता था कि उसे चाबुक (कोड़े) से हाँकने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती थी; इसलिए कोड़ा कभी उसके शरीर पर नहीं पड़ता था।

4. शत्रु-सेना चेतक को देखकर दंग क्यों रह जाती थी?

उत्तरचेतक की अद्भुत फुर्ती, निडरता एवं वीरता देखकर शत्रु-सेना हैरान रह जाती थी। वह क्षण-भर में यहाँ-वहाँ दिखाई देता, वज्रमय बादल की तरह टूट पड़ता और उसके टापों से शत्रुओं के अस्त्र-शस्त्र गिर जाते थे।

5. कविता में चेतक की किन-किन विशेषताओं का वर्णन हुआ है?

उत्तरकविता में चेतक की तीव्र गति, अद्भुत फुर्ती, अपने स्वामी के प्रति गहरी स्वामिभक्ति, निडरता एवं युद्ध-कौशल जैसी विशेषताओं का सजीव वर्णन हुआ है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘चेतक की वीरता’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘चेतक की वीरता’ कविता का मूल भाव महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त एवं वीर घोड़े चेतक की वीरता, फुर्ती एवं स्वामिभक्ति का गुणगान करना है। कवि बताते हैं कि चेतक रणभूमि में हवा से भी तेज दौड़ता था और राणा के संकेत को इतनी जल्दी समझ लेता था कि उसे कभी चाबुक की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।वह भालों, ढालों एवं तलवारों के बीच निडर होकर सरपट दौड़ता और विकराल वज्रमय बादल की भाँति शत्रु-सेना पर टूट पड़ता था। उसकी वीरता देखकर शत्रु भी दंग रह जाते थे। इस प्रकार कविता चेतक के माध्यम से हमें साहस, स्वामिभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं देश-प्रेम की प्रेरणा देती है।

7. कविता के आधार पर हल्दीघाटी युद्ध में चेतक की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तरहल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने एक सच्चे योद्धा की भाँति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह राणा प्रताप को पीठ पर बैठाकर बिजली की गति से रणभूमि में दौड़ता रहा। उसकी फुर्ती ऐसी थी कि राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह मनचाही दिशा में मुड़ जाता था।वह भयानक भालों, ढालों एवं तलवारों के बीच निडर होकर बढ़ता रहा और बढ़ती नदी की लहर तथा वज्रमय बादल की तरह शत्रु-सेना पर टूट पड़ता था। उसके टापों की मार से शत्रुओं के भाले एवं तरकश गिर जाते थे। अपने स्वामी की रक्षा एवं शत्रुओं को परास्त करने में चेतक ने अद्भुत स्वामिभक्ति एवं वीरता का परिचय दिया।

8. यह कविता वीर-रस की कविता है – उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरवीर-रस की कविता वह होती है जो मन में उत्साह, साहस एवं वीरता का भाव जगाती है। ‘चेतक की वीरता’ ऐसी ही ओजपूर्ण कविता है, जो वीरता एवं पराक्रम का सजीव चित्रण करती है।“निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में” तथा “विकराल वज्र-मय बादल-सा / अरि की सेना पर घहर गया” जैसी पंक्तियाँ युद्ध, साहस एवं आक्रमण का भयानक दृश्य प्रस्तुत करती हैं। ओजपूर्ण भाषा, तीव्र गति का वर्णन एवं युद्ध-कौशल का चित्रण इसे एक श्रेष्ठ वीर-रस की कविता बनाते हैं, जो पाठक के मन में जोश एवं उत्साह भर देती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) श्यामनारायण पाण्डेय

(ग) सोहनलाल द्विवेदी

(घ) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर(ख) श्यामनारायण पाण्डेय।

2. यह कविता किस काव्य-कृति का अंश है?

(क) झाँसी की रानी

(ख) हल्दीघाटी

(ग) साकेत

(घ) कामायनी

उत्तर(ख) हल्दीघाटी।

3. चेतक किसका घोड़ा था?

(क) अकबर का

(ख) महाराणा प्रताप का

(ग) पृथ्वीराज चौहान का

(घ) शिवाजी का

उत्तर(ख) महाराणा प्रताप का।

4. ‘करवाल’ शब्द का अर्थ है—

(क) भाला

(ख) तलवार

(ग) ढाल

(घ) कोड़ा

उत्तर(ख) तलवार।

5. “लेकर सवार उड़ जाता था” में ‘सवार’ किसके लिए आया है?

(क) चेतक के लिए

(ख) कवि के लिए

(ग) महाराणा प्रताप के लिए

(घ) शत्रु के लिए

उत्तर(ग) महाराणा प्रताप के लिए।

6. कवि ने चेतक की गति की तुलना किससे की है?

(क) पानी से

(ख) हवा से

(ग) आग से

(घ) पत्थर से

उत्तर(ख) हवा से (“पड़ गया हवा को पाला था”)।

7. चेतक शत्रु-सेना पर किसके समान टूट पड़ता था?

(क) वज्रमय बादल के समान

(ख) पर्वत के समान

(ग) वृक्ष के समान

(घ) दीपक के समान

उत्तर(क) वज्रमय बादल के समान।

8. ‘निषंग’ शब्द का अर्थ है—

(क) भाला

(ख) तरकश (बाण रखने का खोल)

(ग) ढाल

(घ) घोड़ा

उत्तर(ख) तरकश (बाण रखने का खोल)।

9. ‘हय’ शब्द का अर्थ है—

(क) हवा

(ख) घोड़ा

(ग) हाथी

(घ) हृदय

उत्तर(ख) घोड़ा।

10. यह कविता किस रस की कविता है?

(क) श्रृंगार रस

(ख) हास्य रस

(ग) वीर रस

(घ) करुण रस

उत्तर(ग) वीर रस।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(क), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): चेतक हवा से भी तेज दौड़ता था।

कारण (R): कवि कहते हैं “राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।”

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): चेतक को हाँकने के लिए राणा को बार-बार कोड़ा मारना पड़ता था।

कारण (R): चेतक राणा के संकेत को तुरंत समझ लेता था, इसलिए कोड़ा उस पर कभी नहीं पड़ता था।

उत्तर(घ) A गलत है (चेतक पर कोड़ा कभी नहीं पड़ता था), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): चेतक युद्ध-भूमि में निडर होकर भालों एवं तलवारों के बीच दौड़ता रहा।

कारण (R): वह एक डरपोक एवं सुस्त घोड़ा था।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है (चेतक डरपोक नहीं, बल्कि निडर एवं फुर्तीला था)।

4. अभिकथन (A): शत्रु-सेना चेतक को देखकर दंग रह जाती थी।

कारण (R): चेतक की अद्भुत फुर्ती एवं वीरता शत्रुओं को हैरान कर देती थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘चेतक की वीरता’ एक वीर-रस की कविता है।

कारण (R): यह कविता वीरता, साहस एवं युद्ध-कौशल का ओजपूर्ण वर्णन करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

• कविता की मुख्य पंक्तियाँ (“पड़ गया हवा को पाला था”, “विकराल वज्र-मय बादल-सा…घहर गया”) याद रखें – भावार्थ एवं उद्धरण-आधारित प्रश्नों में काम आती हैं।
• चेतक की विशेषताएँ – तीव्र गति, फुर्ती, स्वामिभक्ति, निडरता एवं युद्ध-कौशल – क्रम से लिखना सीखें।
• कठिन शब्दों (करवाल, निषंग, हय, अरि, घहरना) के अर्थ अवश्य याद करें।
• यह कविता ‘हल्दीघाटी’ का अंश है एवं वीर-रस की है – यह तथ्य परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

• ‘सवार’ को चेतक न समझें – सवार महाराणा प्रताप हैं, चेतक घोड़ा है।
• ‘करवाल’ को ‘ढाल’ न समझें – करवाल का अर्थ तलवार है।
• कवि का नाम ‘श्यामनारायण पाण्डेय’ सही वर्तनी में लिखें।
• इसे श्रृंगार या करुण रस की कविता न लिखें – यह वीर-रस की कविता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि कौन हैं?

‘चेतक की वीरता’ कविता के कवि वीर-रस के प्रसिद्ध कवि श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) हैं। यह कविता उनकी काव्य-कृति ‘हल्दीघाटी’ का अंश है।

चेतक कौन था?

चेतक महाराणा प्रताप का अत्यंत वीर एवं स्वामिभक्त घोड़ा था, जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में अद्भुत फुर्ती एवं वीरता का परिचय दिया।

‘चेतक की वीरता’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता, तीव्र गति, फुर्ती एवं स्वामिभक्ति का गुणगान करना है, जो हमें साहस एवं कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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