कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 13 – पेड़ की बात (गद्य) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 13 ‘पेड़ की बात’ (लेखक – प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु; अनुवादक – शंकर सेन) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, लेखक परिचय, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, लेख की रचना, अनुमान या कल्पना से, प्रवाह चार्ट, अंकुरण, शब्दों के रूप, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- लेखक परिचय – जगदीशचंद्र बसु
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- लेख की रचना
- अनुमान या कल्पना से
- प्रवाह चार्ट
- अंकुरण
- शब्दों के रूप
- पाठ से आगे (मेरे प्रिय, आज की पहेली, खोजबीन)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-टिप्स एवं सामान्य गलतियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक परिचय – जगदीशचंद्र बसु
प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता। पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं से प्रेम करते हुए उनकी शिक्षा आरंभ हुई। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान-कथा लेखन में रुचि रखने वाले एक बहुविद् व्यक्ति थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का एक निश्चित जीवनचक्र एवं एक प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। इस प्रकार वे यह स्थापित करने वाले विश्व के पहले व्यक्ति थे कि पौधे किसी भी अन्य जीव-रूप के समान होते हैं। विज्ञान जैसे विषय को भी चित्रात्मक साहित्यिक स्वरूप प्रदान करने वाले बसु ने सर्वप्रथम रेडियो तरंगों के द्वारा संचार स्थापित कर एक बड़ी वैज्ञानिक खोज की थी। ‘पेड़ की बात’ का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।
पाठ का सार
‘पेड़ की बात’ एक रोचक वैज्ञानिक लेख है जिसमें लेखक जगदीशचंद्र बसु ने एक बीज से पेड़ बनने तथा पेड़ के अंत तक की पूरी कहानी सरल एवं सजीव भाषा में बताई है। बहुत दिनों तक बीज मिट्टी के नीचे पड़ा रहता है। सर्दियों के बाद वसंत और फिर वर्षा आती है। दो-एक दिन पानी बरसने पर बीज का ढक्कन दरक जाता है और कोमल पत्तियों के बीच से अंकुर बाहर निकलता है। अंकुर का एक भाग मिट्टी में नीचे की ओर गड़ जाता है, जिसे ‘जड़’ कहते हैं, और दूसरा भाग ऊपर की ओर बढ़ता है, जिसे ‘तना’ कहते हैं। पेड़-पौधे को चाहे जैसे भी रखो, जड़ सदा नीचे और तना ऊपर की ओर ही जाएगा – गमले को औंधा लटकाने पर भी पौधा घूमकर अपनी जड़ नीचे और पत्तियाँ ऊपर कर लेता है।
लेखक बताते हैं कि जैसे हम भोजन करते हैं, वैसे ही पेड़-पौधे भी भोजन करते हैं। उनके दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से आहार ग्रहण करते हैं। जड़ों के द्वारा वे मिट्टी से रस-पान करते हैं; पानी मिलने पर मिट्टी के अनेक द्रव्य गल जाते हैं जिन्हें पौधे सोख लेते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर पता चलता है कि पेड़ में हज़ारों नल होते हैं जिनसे रस का संचार होता है, और पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं जो हवा से आहार ग्रहण करते हैं। पेड़ हमारी छोड़ी हुई विषैली ‘अंगारक’ (कार्बन डाइऑक्साइड) वायु लेकर, सूर्य के प्रकाश की सहायता से हवा को शुद्ध कर देते हैं। इसीलिए लेखक कहते हैं कि प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है – सूर्य-किरण पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है और यही ऊर्जा भोजन के रूप में जीव-जंतुओं तक पहुँचती है।
अंत में लेखक पेड़ के संतान-प्रेम का मार्मिक चित्र खींचते हैं। मरने से पहले हर पेड़ बीज रूपी संतान छोड़ जाने के लिए व्यग्र रहता है। वह सुंदर फूल खिलाता है, उनमें शहद और सुगंध भरता है ताकि मधुमक्खी, तितली और पतंगे आएँ। मधुमक्खियाँ एक फूल का पराग दूसरे फूल पर ले जाती हैं, जिससे बीज पकता है। अपने शरीर का सारा रस पिलाकर पेड़ बीजों का पोषण करता है और स्वयं सूखकर, डालियाँ टूटकर एक दिन जड़ सहित भूमि पर गिर पड़ता है। इस प्रकार संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है। लेखक यह संदेश देते हैं कि माँ की ममता ही वह पारस-मणि है जिसके स्पर्श से साधारण मिट्टी भी सुंदर फूल बन जाती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अंकुर | बीज से फूटने वाला नन्हा कोंपल/नया कल्ला |
| आहिस्ता-आहिस्ता | धीरे-धीरे |
| सुकोमल | अत्यंत कोमल, मुलायम |
| दरक गया | फट गया, चटक गया |
| तना | पेड़ का ऊपर की ओर बढ़ने वाला मुख्य भाग |
| औंधा | उल्टा |
| द्रव्य | तरल पदार्थ |
| सूक्ष्मदर्शी | बहुत बारीक चीज़ें देखने वाला यंत्र |
| विषाक्त | विष मिला हुआ, जहरीला |
| अंगारक | कार्बन डाइऑक्साइड (साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु) |
| संवर्द्धन | बढ़ावा, विकास, वृद्धि |
| पल्लवित | हरा-भरा, पत्तियों से भरा हुआ |
| आबद्ध | बँधा हुआ, समाया हुआ |
| सचेष्ट | प्रयत्नशील, चेष्टा करने वाला |
| व्यग्र | व्याकुल, बेचैन |
| आच्छादित | ढका हुआ |
| स्नेहसिक्त | स्नेह/प्रेम से भीगी हुई |
| पराग-कण | फूल के भीतर की धूल जैसी रचना (पुष्परज) |
| क्षीण | कमज़ोर, घटा हुआ |
| न्योछावर | समर्पित कर देना, त्याग देना |
| अपरूप उपादान | भद्दे/साधारण कच्चे पदार्थ |
| अकस्मात | अचानक |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो” पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?
• उसे उल्टा लटकाया गया है।
• उसे किसी ने सजा दी है।
• बच्चे को गमला रखना नहीं आया।
• प्रकाश ऊपर से आ रहा है।
(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?
• हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।
• हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।
• हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
• धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।”
(ख) “मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।”
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।
| वाक्यांश | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. बीज का ढक्कन दरक गया | बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या वे फट गए। |
| 2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं | साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु – कार्बन डाइऑक्साइड। |
| 3. पत्ते सूर्य-ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं | सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। |
| 4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है | जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधार-शक्ति या महत्वपूर्ण है। |
| 5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो | अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट। |
| 6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं | मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं। |
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?
(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
लेख की रचना
इस लेख में एक के बाद एक विचार को लेखक ने सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया है। गमले को औंधा लटकाना या मूली काटकर बोना जैसे उदाहरण देकर बात कहना इस लेख का एक तरीका है। अपने तथ्य को वास्तविकता या व्यावहारिकता से जोड़ना भी इस लेख की विशेषता है।
(क) जैसे लेखक ने ‘पेड़ की बात’ कही है वैसे ही अपने आस-पास की चीज़ें देखिए और किसी एक चीज़ पर लेख लिखिए, जैसे—गेहूँ की बात।
(ख) उसे कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) “इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।” वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?
(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?
प्रवाह चार्ट
बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए—
अंकुरण
मिट्टी के किसी भी पात्र में मिट्टी भरकर उसमें राजमा या चने के 4–5 बीज बो दीजिए। हल्का-सा पानी छिड़क दीजिए। 3–4 दिन तक थोड़ा-थोड़ा पानी डालिए। अब इसमें आए परिवर्तन लेखन पुस्तिका में लिखिए। (संकेत— एक दिन में पौधे की लंबाई कितनी बढ़ती है, कितने पत्ते निकले, प्रकाश की तरफ़ पौधे मुड़े या नहीं आदि।)
शब्दों के रूप
पुस्तक में ‘मिट्टी’ की विशेषता बताने वाले शब्द दिए गए हैं – चिकनी, उपजाऊ, नम, रेतीली, भुरभुरी, काली। अब आप ‘पेड़’, ‘सर्दी’, ‘सूरज’ जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए—
| शब्द | विशेषता बताने वाले शब्द |
|---|---|
| मिट्टी (उदाहरण) | चिकनी, उपजाऊ, नम, रेतीली, भुरभुरी, काली |
| पेड़ | हरा-भरा, घना, ऊँचा, छायादार, फलदार, विशाल |
| सर्दी | कड़ाके की, ठंडी, हड्डी कँपा देने वाली, सुहावनी, कोहरे भरी |
| सूरज | चमकीला, तेज़, गरम, सुनहरा, उगता हुआ, ढलता हुआ |
पाठ से आगे
मेरे प्रिय
नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए— फूल, पक्षी, वृक्ष, पुस्तक, खेल।
| फूल | पक्षी | वृक्ष | पुस्तक | खेल |
|---|---|---|---|---|
| गुलाब | मोर | आम | पंचतंत्र | कबड्डी |
| गेंदा | तोता | पीपल | अकबर-बीरबल | खो-खो |
| कमल | कोयल | नीम | चाचा चौधरी | क्रिकेट |
आज की पहेली
इस शब्द-सीढ़ी में पाठ में आए शब्द हैं। उन्हें पूरा कीजिए और पाठ में रेखांकित कीजिए।
खोजबीन के लिए
इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जगदीशचंद्र बसु के बारे में और जान-समझ सकते हैं।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. अंकुर के कौन-से दो भाग बनते हैं और उन्हें क्या कहते हैं?
2. पेड़-पौधे जड़ों के द्वारा भोजन कैसे ग्रहण करते हैं?
3. पेड़-पौधे हवा को किस प्रकार शुद्ध करते हैं?
4. लेखक ने प्रकाश को जीवन का मूलमंत्र क्यों कहा है?
5. गमले को औंधा लटकाने पर पौधे में क्या परिवर्तन देखा गया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘पेड़ की बात’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस पाठ से हमें पेड़-पौधों के बारे में कौन-कौन से वैज्ञानिक तथ्य पता चलते हैं?
8. लेखक ने पेड़ की तुलना ममतामयी माँ से क्यों की है? समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘पेड़ की बात’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) रवींद्रनाथ टैगोर
(ख) जगदीशचंद्र बसु
(ग) शंकर सेन
(घ) सी. वी. रमन
2. अंकुर का जो भाग ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे क्या कहते हैं?
(क) जड़
(ख) तना
(ग) पत्ता
(घ) फूल
3. साँस छोड़ने पर निकलने वाली विषैली वायु को पाठ में क्या कहा गया है?
(क) प्राणवायु
(ख) अंगारक
(ग) नाइट्रोजन
(घ) भाप
4. पेड़-पौधे जड़ों के द्वारा मिट्टी से क्या ग्रहण करते हैं?
(क) केवल हवा
(ख) कठोर पदार्थ
(ग) तरल द्रव्य/रस
(घ) प्रकाश
5. लेखक के अनुसार जीवन का मूलमंत्र क्या है?
(क) जल
(ख) प्रकाश
(ग) मिट्टी
(घ) वायु
6. सूक्ष्म पदार्थों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए किस यंत्र का प्रयोग होता है?
(क) दूरबीन
(ख) तराज़ू
(ग) सूक्ष्मदर्शी
(घ) घड़ी
7. एक फूल का पराग दूसरे फूल पर कौन ले जाता है?
(क) चींटी
(ख) मधुमक्खी
(ग) मछली
(घ) चूहा
8. गमले को औंधा (उल्टा) लटकाने पर कुछ दिनों बाद जड़ किस ओर हो गई?
(क) ऊपर की ओर
(ख) नीचे की ओर
(ग) दाईं ओर
(घ) ज्यों-की-त्यों रही
9. बेल-लताएँ पेड़ों से लिपटकर ऊपर की ओर क्यों बढ़ती हैं?
(क) छाया पाने के लिए
(ख) प्रकाश पाने के लिए
(ग) पानी पाने के लिए
(घ) सुरक्षा पाने के लिए
10. लेखक के अनुसार मिट्टी और अंगार को सुंदर फूल में बदल देने वाली ‘मणि’ क्या है?
(क) सूर्य का प्रकाश
(ख) पारस पत्थर
(ग) माँ की ममता
(घ) वर्षा का जल
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र हैं।
कारण (R): वे विषैली अंगारक वायु को ग्रहण करके हवा को शुद्ध कर देते हैं।
2. अभिकथन (A): पेड़ को किसी भी दिशा में रखो, जड़ नीचे और तना ऊपर ही जाता है।
कारण (R): गमले को औंधा लटकाने पर भी पौधा घूमकर अपनी जड़ नीचे और पत्तियाँ ऊपर कर लेता है।
3. अभिकथन (A): पेड़-पौधे कठोर चीज़ें चबाकर भोजन करते हैं।
कारण (R): पेड़-पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते हैं।
4. अभिकथन (A): प्रकाश पेड़-पौधों के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कारण (R): सूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है और प्रकाश न मिलने पर बच नहीं पाता।
5. अभिकथन (A): पेड़ अपनी संतान (बीज) के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है।
कारण (R): पेड़ अपने शरीर का सारा रस बीजों को पिलाकर स्वयं सूखकर गिर पड़ता है।
परीक्षा-टिप्स एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-टिप्स
- पाठ के क्रम को याद रखिए: बीज → जड़ व तना → भोजन (जड़ व पत्ते) → हवा का शुद्धिकरण → फूल-परागण-बीज → पेड़ का त्याग।
- ‘अंगारक’ = कार्बन डाइऑक्साइड – यह तथ्य परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
- जड़ का काम (रस लेना) और पत्तों का काम (हवा व प्रकाश से भोजन) अलग-अलग याद रखिए।
- लेखक जगदीशचंद्र बसु एवं अनुवादक शंकर सेन के नाम कभी न मिलाइए।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को ‘शंकर सेन’ लिख देना – शंकर सेन केवल अनुवादक हैं, मूल लेखक जगदीशचंद्र बसु हैं।
- यह समझ लेना कि पौधे कठोर भोजन खाते हैं – वे केवल तरल द्रव्य व वायु से आहार लेते हैं।
- ‘जड़’ और ‘तना’ की दिशा उलट देना।
- परागण किससे होता है, यह भूल जाना – मुख्यतः मधुमक्खी (व तितली) से।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पेड़ की बात’ पाठ के लेखक एवं अनुवादक कौन हैं?
‘पेड़ की बात’ के मूल लेखक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) हैं और इसका बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।
अंकुर के दो भागों के क्या नाम हैं?
अंकुर का जो भाग नीचे मिट्टी में जाता है उसे ‘जड़’ और जो ऊपर की ओर बढ़ता है उसे ‘तना’ कहते हैं।
पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?
पेड़-पौधे हमारी छोड़ी हुई विषैली ‘अंगारक’ (कार्बन डाइऑक्साइड) वायु को ग्रहण कर, सूर्य के प्रकाश की सहायता से हवा को पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं – इसी से वे हमारे मित्र हैं।
लेखक ने प्रकाश को जीवन का मूलमंत्र क्यों कहा है?
क्योंकि सूर्य-किरण पाकर ही पेड़ हरा-भरा होता है और भोजन बनाता है; यही ऊर्जा अन्न के रूप में जीव-जंतुओं तक पहुँचती है। प्रकाश के बिना न पेड़ जी सकते हैं, न जीव।
पाठ एवं गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
