कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 10 – तरुण के स्वप्न (उद्बोधन) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 10 ‘तरुण के स्वप्न’ (लेखक – सुभाषचंद्र बोस) का पूरा समाधान देता है। यह नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस उद्बोधन का अंश है जो उन्होंने मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में 29 दिसंबर, 1929 को युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (गद्य) अध्याय: 10 लेखक: सुभाषचंद्र बोस विधा: उद्बोधन सत्र: 2026–27

लेखक से परिचय – सुभाषचंद्र बोस

उड़ीसा (अब ओड़िशा) राज्य के कटक नगर में जन्मे सुभाषचंद्र बोस को पूरा देश ‘नेताजी’ के नाम से जानता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनका उद्देश्य स्पष्ट था – भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त कराना। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उनकी दूरदर्शिता का पता तब चलता है जब उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व संभाला और सैनिकों को ‘दिल्ली चलो’ तथा ‘जय हिंद’ का नारा दिया। उन्होंने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ जैसा प्रेरक नारा भी दिया। सुभाषचंद्र बोस ने एक स्वाधीन राष्ट्र और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। द इंडियन स्ट्रगल उनकी चर्चित पुस्तक है। प्रकाशन विभाग, भारत सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का वाङ्मय (संपूर्ण लेखन) प्रकाशित किया है, जिसमें उनके सभी कार्यों, पत्रों, टिप्पणियों और भाषणों को सम्मिलित किया गया है।

पाठ का सार

‘तरुण के स्वप्न’ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस उद्बोधन का अंश है जो उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए प्रकट किया था। नेताजी कहते हैं कि स्वप्न तो अनेकों ने देखा है। उनके राजनीतिक गुरु स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास ने भी एक स्वप्न देखा था, जो उनकी शक्ति का उत्स और आनंद का निर्झर बना। आज वे उसी स्वप्न के उत्तराधिकारी हैं और इसी स्वप्न की प्रेरणा से उनका सारा जीवन एवं कर्म संचालित होता है।

नेताजी का स्वप्न एक नया सर्वांगीण स्वाधीन एवं संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र है। वे ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो और समाज के दबाव से उसका दम न घुटे। उस समाज में जातिभेद का कोई स्थान न हो; नारी मुक्त होकर पुरुषों की भाँति समान अधिकार का उपभोग करे तथा समाज एवं राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बने। उस समाज में आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति का समान अवसर मिले। जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी, वहाँ आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।

नेताजी आगे कहते हैं कि ऐसा राष्ट्र हर प्रकार के विजातीय प्रभाव से मुक्त रहेगा। जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, वह न केवल भारतवासियों के अभाव को मिटाएगा, बल्कि विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा। यही स्वप्न नेताजी के लिए नित्य एवं अखंड सत्य है। इस सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे हर प्रकार का त्याग, हर संकट और आवश्यकता पड़ने पर प्राण-बलिदान तक को स्वीकार करते हैं – उनके लिए ऐसा ‘मरण स्वर्ग समान’ है।

अंत में नेताजी अपने तरुण भाइयों को यह स्वप्न उपहारस्वरूप सौंपते हैं। वे कहते हैं कि उनके पास देने योग्य और कुछ भी नहीं है, सिर्फ यही स्वप्न है जो असीम शक्ति और अपार आनंद देता है तथा उनके क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है। इस प्रकार यह उद्बोधन युवाओं को आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित करता है तथा त्याग, समानता, नारी-मुक्ति और राष्ट्र-सेवा का संदेश देता है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
उद्बोधनजगाने या प्रेरित करने वाला संबोधन; प्रेरक भाषण
उत्ससोता, स्रोत, जलमय स्थान
निर्झरझरना, प्रपात
उत्तराधिकारीकिसी के बाद उसकी संपत्ति या उद्देश्य पाने का हकदार, वारिस
आदर्शनमूना, असल, अनुकरणीय रूप
सर्वांगीणसब अंगों में व्याप्त होने वाला, पूर्ण
स्वाधीनस्वतंत्र, जो अपने ही अधीन हो, आजाद
संपन्नसमृद्ध, धनवान, पूर्ण
जातिभेदजाति के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव
विषमताअसमानता, ऊँच-नीच
मर्यादासीमा, परंपरा से निर्धारित सीमा, प्रतिष्ठा
अकर्मण्यकर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा
विजातीयभिन्न जाति या वर्ग का, पराया
सर्वोपरिसबसे ऊपर या बढ़कर
गण्यगिनने योग्य, मान्य, लिहाज करने योग्य
अखंडजिसका सिलसिला न टूटे, अविकल, संपूर्ण, अटूट
नित्यसदा रहने वाला, शाश्वत, प्रतिदिन
प्रतिष्ठास्थापना, सम्मान, मान-मर्यादा
क्षुद्रछोटा, तुच्छ, साधारण
सार्थकअर्थयुक्त, उद्देश्यपूर्ण, उपयोगी
तरुणयुवा, नवयुवक
आह्वानपुकार, बुलावा, प्रेरणा देना
प्रेरणाकिसी कार्य में प्रकृत करने या उकसाने की क्रिया

नीचे ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ की प्रत्येक अभ्यास गतिविधि के शीर्षक ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं; प्रश्न पुस्तक के अनुसार हैं और उत्तर मौलिक एवं विशेषज्ञ-जाँचे हुए हैं।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

• सुभाषचंद्र बोस के लिए

• देश के तरुण वर्ग के लिए

• चित्तरंजन दास के लिए

• भारतवासियों के लिए

उत्तर‘देश के तरुण वर्ग के लिए’ तथा ‘भारतवासियों के लिए’।नेताजी अपना भाषण युवाओं और समस्त भारतवासियों को संबोधित करते हुए दे रहे हैं और स्वयं को भी इसमें सम्मिलित मानते हैं। चित्तरंजन दास के स्वप्न को आगे बढ़ाने वाले ‘हम’ का अर्थ नेताजी सहित देश के तरुण एवं सभी भारतवासी हैं।

(2) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?

• आर्थिक असमानता से

• स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से

• श्रम और कर्म की मर्यादा से

• जातिभेद से

उत्तर‘श्रम और कर्म की मर्यादा से’।नेताजी के अनुसार जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी तथा आलसी एवं अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा, वही राष्ट्र सच्चे अर्थों में स्वाधीन बनेगा। आर्थिक असमानता, स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकार और जातिभेद तो ऐसे समाज में होते ही नहीं।

(3) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?

• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है

• हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है

• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है

• उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है

उत्तर‘उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है’।उत्तराधिकारी होने का सच्चा अर्थ केवल स्वप्न को संजोना या उस पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उसे साकार करने के लिए परिश्रम और कर्म करना है। नेताजी युवाओं से यही अपेक्षा करते हैं।

(4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—

• राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी

• तरुणों का साहस बढ़ेगा

• राष्ट्र स्वाधीन बनेगा

• राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा

उत्तर‘राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी’ तथा ‘राष्ट्र स्वाधीन बनेगा’।समान शिक्षा और अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार कर्म कर सकेगा, जिससे राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी और राष्ट्र वास्तविक रूप से सशक्त एवं स्वाधीन बनेगा।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (संकेत)यह समूह-चर्चा की गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी पाठ की पंक्तियों के आधार पर अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।मित्रों के तर्क ध्यान से सुनें; जहाँ एक से अधिक उत्तर संभव हों, वहाँ सभी उपयुक्त विकल्पों को स्वीकार करें और एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करें।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 में पाठ में से चुनी गई पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनसे संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (पाठ की पंक्ति)स्तंभ 2 (भाव-विचार)
1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।”हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।”समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो।
सही मिलान: 1 → हमारी दिनचर्या इसी स्वप्न पर केंद्रित है; 2 → अपने समाज के अनुसार बनी योजना से अभाव नहीं रहेगा; 3 → व्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता हो, कोई सामाजिक दबाव न हो।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।

(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”

उत्तरइसका अर्थ है कि ऐसे आदर्श समाज में आर्थिक असमानता नहीं होनी चाहिए – अर्थात् कोई बहुत अमीर और कोई बहुत गरीब न रहे।धन-संपत्ति और संसाधनों का उचित एवं न्यायपूर्ण बँटवारा हो, जिससे हर व्यक्ति को जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ सहज ही प्राप्त हो सकें।

(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”

उत्तरयहाँ देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न की बात है। यह पंक्ति बताती है कि उनका स्वप्न ही उनकी शक्ति का स्रोत (उत्स) और निरंतर बहने वाले आनंद का झरना (निर्झर) था।अर्थात् एक ऊँचा एवं सच्चा लक्ष्य व्यक्ति को निरंतर ऊर्जा, उत्साह और आनंद प्रदान करता है तथा उसके जीवन को दिशा देता है।

(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”

उत्तरइसका तात्पर्य है कि आदर्श समाज में व्यक्ति हर प्रकार के बंधन से स्वतंत्र हो – सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानसिक।किसी पर जाति, गरीबी, अशिक्षा या किसी अन्य सामाजिक दबाव का अनुचित बंधन न हो, जिससे प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र होकर अपना विकास कर सके।

सोच-विचार के लिए

(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?

उत्तरनेताजी एक नए, सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न देखते थे।उस राष्ट्र में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद का स्थान न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।वह राष्ट्र विजातीय प्रभाव से मुक्त रहकर विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य हो।

(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?

उत्तरनेताजी ने आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने को ही अपने जीवन की सार्थकता माना।यह स्वप्न उनके लिए नित्य एवं अखंड सत्य था। इसी सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे हर प्रकार का त्याग और प्राण-बलिदान तक करने को तैयार थे; उनके अनुसार इस स्वप्न के लिए प्राण देना भी ‘मरण स्वर्ग समान’ है।

(ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तरनेताजी जानते थे कि किसी भी समाज और राष्ट्र की उन्नति परिश्रम एवं कर्म पर ही निर्भर करती है।आलसी और अकर्मण्य व्यक्ति राष्ट्र-निर्माण में योगदान नहीं देते, बल्कि उसके विकास में बाधक बनते हैं।इसलिए उन्होंने श्रम और कर्म की मर्यादा पर बल दिया तथा युवाओं को परिश्रमी एवं कर्मठ बनने की प्रेरणा देने के लिए ऐसा कहा।

(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?

उत्तरपरिश्रमी, कर्मठ और अनुशासित बनकर ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे।शिक्षा प्राप्त करके दूसरों को भी शिक्षित बनाने तथा जातिभेद, अंधविश्वास और सामाजिक असमानता को दूर करने का प्रयास करे।नारी-सम्मान एवं समान अधिकार का समर्थन करे, देश की एकता-अखंडता बनाए रखे और राष्ट्र-सेवा में बढ़-चढ़कर भाग ले।

अनुमान और कल्पना से

(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?

उत्तरसामाजिक दृष्टि से – जातिभेद, ऊँच-नीच और रूढ़ियों से मुक्ति।आर्थिक दृष्टि से – गरीबी और आर्थिक विषमता से मुक्ति।राजनीतिक दृष्टि से – पराधीनता और ब्रिटिश शासन से मुक्ति।मानसिक दृष्टि से – भय, अंधविश्वास और दासता की भावना से मुक्ति।

(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?

उत्तरउस समय समाज में नारियों को पुरुषों के समान अधिकार और अवसर प्राप्त नहीं थे; उन्हें शिक्षा, स्वतंत्रता और निर्णय के अधिकार से प्रायः वंचित रखा जाता था।नेताजी मानते थे कि आधा समाज (नारी) पिछड़ा रहकर राष्ट्र पूर्ण रूप से उन्नत नहीं हो सकता। इसलिए सच्चे आदर्श एवं संपन्न समाज की कल्पना के लिए उन्हें नारी के समान अधिकारों की बात कहनी पड़ी।

(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?

उत्तर (संभावित)दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) व्यक्ति, वृद्धजन और अनाथ बच्चे।समाज के पिछड़े, गरीब एवं वंचित वर्ग के लोग तथा वे लोग जिन्हें शिक्षा और रोजगार के समान अवसर नहीं मिल पाते।इन्हें विशेष सहायता और अधिकार देकर ही समाज में सच्ची समानता लाई जा सकती है। (विद्यार्थी अपने विचार जोड़ें।)

(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं— “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?

उत्तरउस समय (1929 में) सम्मेलनों और सार्वजनिक सभाओं में प्रायः पुरुष-युवाओं की ही उपस्थिति अधिक रहती थी और ‘भाइयो’ संबोधन तत्कालीन भाषा-व्यवहार का सामान्य रूप था।यद्यपि उनका संबोधन शब्द-रूप में ‘भाइयो’ तक सीमित रहा, किंतु भावना में वे सभी युवाओं को सम्मिलित मानते थे – क्योंकि उसी भाषण में वे नारी-मुक्ति और समान अधिकार की प्रबल वकालत करते हैं। (विद्यार्थी अपना मत भी जोड़ें।)

(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?

उत्तर (संभावित)यह आह्वान सुनकर युवाओं का हृदय देश-प्रेम और उत्साह से भर उठा होगा।उन्होंने तालियों एवं जयघोष से नेताजी का अभिनंदन किया होगा और इस स्वप्न को साकार करने का संकल्प लिया होगा।कई युवक स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से कूद पड़ने और राष्ट्र-सेवा में अपना जीवन समर्पित करने के लिए प्रेरित हुए होंगे।

शीर्षक

(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?

उत्तरइस भाषण में नेताजी देश के तरुणों (युवाओं) को संबोधित करते हुए अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न की बात करते हैं तथा यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं।चूँकि पूरा उद्बोधन युवाओं और उनके सामने रखे गए एक उज्ज्वल स्वप्न के इर्द-गिर्द घूमता है, इसलिए इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक देना पूर्णतः सार्थक एवं उपयुक्त है।

(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।

उत्तर (संभावित)मैं इसे ‘मेरा स्वप्न’ या ‘आदर्श राष्ट्र का सपना’ अथवा ‘युवाओं के नाम संदेश’ नाम देना चाहूँगा।कारण – पूरा भाषण नेताजी के एक आदर्श एवं स्वाधीन राष्ट्र के सपने और युवाओं को दिए गए प्रेरक संदेश पर आधारित है, इसलिए ये नाम पाठ के मूल भाव को व्यक्त करते हैं। (विद्यार्थी अपना नाम और कारण लिखें।)

(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?

उत्तर (संभावित)मैं अपने उद्बोधन में शिक्षा का महत्त्व, स्वच्छता, अनुशासन, समय का सदुपयोग, पर्यावरण-संरक्षण और आपसी सहयोग जैसे विषयों को सम्मिलित करूँगा।इसका शीर्षक रख सकता हूँ – ‘हमारा कल, हमारे हाथ’ अथवा ‘बेहतर कल की ओर’। (विद्यार्थी अपने विषय एवं शीर्षक लिखें।)

भाषा की बात

(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए— (सत्य, समाज, राष्ट्र, जीवन, शक्ति, आनंद)

उत्तर (पाठ के अनुसार)अखंड — सत्यस्वाधीन / संपन्न / आदर्श — समाजस्वाधीन / आदर्श — राष्ट्रक्षुद्र — जीवनअसीम — शक्तिअपार — आनंद

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।

उत्तर (संभावित)शाश्वत सत्य, समतामूलक समाज, समृद्ध राष्ट्र, सुखी जीवन, अदम्य शक्ति, असीम आनंद।मैं ये विशेषताएँ इसलिए चुनूँगा क्योंकि ये शब्द उन गुणों को और स्पष्ट तथा प्रभावशाली बना देते हैं और सकारात्मक भाव व्यक्त करते हैं। (विद्यार्थी अपने शब्द एवं कारण लिखें।)

विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

(क) रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए। नीचे सही मिलान दिया गया है।

क्रमस्तंभ 1विपरीतार्थक (स्तंभ 2)
1.स्वीकारअस्वीकार
2.सार्थकनिरर्थक
3.विषमतासमानता
4.क्षुद्रविशाल / वृहत / विराट / महान
5.संपन्नविपन्न
6.अकर्मण्यकर्मण्य / कर्मठ
7.मरणजीवन

(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे— “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”

उत्तर (नमूना वाक्य)1. हमें अच्छी बातों को स्वीकार और बुरी बातों को अस्वीकार करना चाहिए।2. परिश्रम से किया गया कार्य सार्थक होता है, आलस से किया गया प्रायः निरर्थक।3. समाज में अर्थ की विषमता नहीं, बल्कि समानता होनी चाहिए।4. नेताजी ने अपने क्षुद्र जीवन को भी एक महान स्वप्न से विशाल बना लिया।5. परिश्रमी राष्ट्र संपन्न होता है, आलसी राष्ट्र विपन्न रह जाता है।6. कर्मठ व्यक्ति सफल होते हैं, अकर्मण्य पीछे रह जाते हैं।7. देश के लिए मरण भी ऐसा जीवन है जो सदा अमर रहता है।

आपकी बात (पाठ से आगे)

(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।

उत्तर (संभावित)विद्यालय– मेरा स्वप्न है कि मेरा विद्यालय स्वच्छ, हरा-भरा और अनुशासित हो, जहाँ हर विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा और समान अवसर मिले।राज्य– मेरा राज्य शिक्षित, रोजगारयुक्त और अपराधमुक्त हो, जहाँ सभी को बुनियादी सुविधाएँ प्राप्त हों।देश– मेरा देश आत्मनिर्भर, समृद्ध, एकजुट और सशक्त बने, जहाँ जातिभेद न हो और हर नागरिक को सम्मान एवं समान अधिकार मिले। (विद्यार्थी अपने स्वप्न लिखें।)

(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।

उत्तरदेश के संविधान और कानूनों का पालन करें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहें।देश की एकता-अखंडता बनाए रखें और जातिवाद, सांप्रदायिकता एवं भेदभाव से दूर रहें।ईमानदारी से अपना कार्य करें, मतदान का सही प्रयोग करें, स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएँ और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करें।स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्मरण रखते हुए राष्ट्र-सेवा में योगदान दें।

मिलान कीजिए (स्वतंत्रता सेनानी)

(क) स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित तथ्य और स्तंभ 2 में उनके नाम दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (तथ्य)स्तंभ 2 (नाम)
1. 8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं।भगत सिंह
2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं।चित्तरंजन दास
3. जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण भूख हड़ताल की; अनशन के तिरसठवें दिन जेल में देहांत हो गया।जतिन दास
4. इनके जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है।महात्मा गाँधी
5. नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है।सरदार वल्लभभाई पटेल
6. 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश के पूछने पर कहा— “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।”चंद्रशेखर आजाद
सही मिलान: 1 → भगत सिंह; 2 → चित्तरंजन दास; 3 → जतिन दास; 4 → महात्मा गाँधी; 5 → सरदार वल्लभभाई पटेल; 6 → चंद्रशेखर आजाद।

(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।

उत्तरपाठ में आया स्वतंत्रता सेनानी का नाम चित्तरंजन दास (देशबंधु) है, जिन्हें नेताजी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और जिनके स्वप्न के उत्तराधिकारी होने की बात उन्होंने कही है।

सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं?

उत्तर (संभावित)सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार देने वाले संविधान का निर्माण और लागू होना।अस्पृश्यता (छुआछूत) का कानूनी रूप से उन्मूलन तथा कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था।सर्व शिक्षा अभियान एवं शिक्षा का अधिकार, पंचवर्षीय योजनाएँ, हरित क्रांति और औद्योगिक विकास।महिला सशक्तीकरण की योजनाएँ, मतदान का समान अधिकार और गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार से जुड़ी अनेक सरकारी योजनाएँ। (विद्यार्थी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से और उदाहरण जोड़ें।)

स्त्री सशक्तीकरण

(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?

उत्तरशिक्षा का समान अधिकार तथा बालिकाओं के लिए निःशुल्क शिक्षा एवं छात्रवृत्ति।मतदान का समान अधिकार और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण।समान कार्य के लिए समान वेतन, मातृत्व अवकाश तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा का अधिकार।घरेलू हिंसा एवं उत्पीड़न से रक्षा के कानून और अनेक कल्याणकारी योजनाएँ। (विद्यार्थी अपने अनुभव जोड़ें।)

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।

उत्तरउस स्त्री-टुकड़ी का नाम ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ था, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया।भूमिका– इस रेजिमेंट में महिला सैनिकों को सैन्य प्रशिक्षण दिया गया और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए पुरुषों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर भाग लिया। यह नारी-शक्ति और समान अधिकार का जीवंत उदाहरण था।

नारे एवं अन्य गतिविधियाँ

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।” – स्वाधीनता संग्राम के दौरान अनेक प्रेरक नारे दिए गए। नीचे दिए नारे किसके द्वारा दिए गए, यह मिलान इस प्रकार है—

नारास्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य तिलक)
करो या मरोमहात्मा गाँधी
मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगाचंद्रशेखर आजाद
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबादभगत सिंह (एवं उनके साथी)
पूर्ण स्वराजजवाहरलाल नेहरू / भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी: आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं, उसे कारण सहित लिखिए और रोल-प्ले करते हुए उनके विचार कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (व्यक्तिगत गतिविधि – विद्यार्थी अपने प्रिय सेनानी के बारे में लिखें।)

परियोजना कार्य: सभी राज्यों के 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र एकत्र कर एक संग्रहिका तैयार कीजिए और चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य लिखिए (किसी एक राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें)।

झरोखे से – गृह-उद्योग पर नेताजी का पत्र: इस पत्र में नेताजी ने गृह एवं कुटीर उद्योग (जैसे बेंत का काम, मिट्टी के खिलौने, सीप के बटन बनाना) पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। यह पत्र उन्होंने माँडले जेल से दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री श्री अनिलचंद्र विश्वास को लिखा था। साझी समझ: अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में साथियों के साथ चर्चा कीजिए।

खोजबीन के लिए: ‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (पुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से नेताजी पर आधारित फिल्म भी देखी जा सकती है।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘तरुण के स्वप्न’ उद्बोधन नेताजी ने कब और कहाँ दिया था?

उत्तरनेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यह उद्बोधन 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था। इसमें उन्होंने अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न को युवाओं के सामने प्रकट किया।

2. नेताजी के स्वप्न में नारी का क्या स्थान है?

उत्तरनेताजी के स्वप्न में नारी मुक्त होकर पुरुषों की भाँति समान अधिकार का उपभोग करती है और समाज एवं राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बनती है। उनके अनुसार नारी की समानता के बिना आदर्श समाज की कल्पना अधूरी है।

3. नेताजी ने अपने जीवन की सार्थकता किसमें देखी?

उत्तरनेताजी ने आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने में ही अपने जीवन की सार्थकता देखी। यह स्वप्न उनके लिए नित्य एवं अखंड सत्य था, जिसकी प्रतिष्ठा के लिए वे प्राण-बलिदान तक करने को तैयार थे।

4. ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ से नेताजी का क्या आशय है?

उत्तरनेताजी का आशय है कि अपने आदर्श स्वप्न और देश की स्वतंत्रता के लिए दिया गया प्राण-बलिदान व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि वह सबसे श्रेष्ठ और गौरवपूर्ण होता है। ऐसा मरण स्वर्ग के समान सुखद एवं अमर है।

5. नेताजी ने अपने उद्बोधन में कौन-कौन सी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया?

उत्तरनेताजी ने जातिभेद, आर्थिक विषमता, स्त्री-पुरुष असमानता और आलस्य (अकर्मण्यता) जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया। उन्होंने श्रम एवं कर्म की मर्यादा तथा सबको शिक्षा और समान अवसर देने की बात कही।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने उद्बोधन में किस प्रकार के आदर्श समाज और राष्ट्र की कल्पना की है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरनेताजी एक नए, सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र की कल्पना करते हैं। उनके आदर्श समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त है और उस पर किसी प्रकार का अनुचित सामाजिक दबाव नहीं है।इस समाज में जातिभेद का कोई स्थान नहीं है; नारी मुक्त होकर पुरुषों के समान अधिकार का उपभोग करती है और राष्ट्र-सेवा में समान भागीदार बनती है। यहाँ आर्थिक विषमता नहीं है और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर मिलता है।जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो, वहाँ आलसी के लिए स्थान नहीं रहता। ऐसा राष्ट्र विजातीय प्रभाव से मुक्त रहकर विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा। यही नेताजी का स्वप्न है।

2. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज की युवा पीढ़ी को क्या प्रेरणा देता है? अपने विचार लिखिए।

उत्तर‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज के युवाओं को एक ऊँचा एवं सार्थक लक्ष्य निर्धारित करने तथा उसे साकार करने के लिए परिश्रम करने की प्रेरणा देता है।यह पाठ सिखाता है कि उत्तराधिकारी होने का सच्चा अर्थ केवल स्वप्न संजोना नहीं, बल्कि कर्म करना है। युवाओं को आलस त्यागकर कर्मठ, अनुशासित और राष्ट्र-भक्त बनना चाहिए।पाठ जातिभेद और आर्थिक विषमता को मिटाने, नारी-सम्मान एवं समान अधिकार का समर्थन करने तथा सबको शिक्षा देने की प्रेरणा देता है। यह बताता है कि देश के लिए त्याग और बलिदान सबसे श्रेष्ठ हैं। इस प्रकार यह पाठ युवाओं में राष्ट्र-निर्माण की भावना जगाता है और उन्हें आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

3. नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन और कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तरसुभाषचंद्र बोस का जन्म ओड़िशा के कटक नगर में हुआ था और उन्हें पूरा देश ‘नेताजी’ के नाम से जानता है। उनका एकमात्र उद्देश्य भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त कराना था।ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व संभाला और सैनिकों को ‘दिल्ली चलो’ तथा ‘जय हिंद’ का नारा दिया।‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ उनका प्रसिद्ध प्रेरक नारा है। उन्होंने एक स्वाधीन राष्ट्र और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। ‘द इंडियन स्ट्रगल’ उनकी चर्चित पुस्तक है। उनका संपूर्ण लेखन (वाङ्मय) प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित किया गया है। उनका जीवन त्याग, साहस और देश-प्रेम का अनुपम उदाहरण है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

अभ्यास के लिए 10 बहुविकल्पीय प्रश्न और उनके बाद 5 अभिकथन-कारण प्रश्न दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर दीजिए, फिर कुंजी से मिलान कीजिए।

1. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) महात्मा गाँधी

(ख) सुभाषचंद्र बोस

(ग) चित्तरंजन दास

(घ) भगत सिंह

2. यह उद्बोधन नेताजी ने किस वर्ष दिया था?

(क) 1857

(ख) 1921

(ग) 1929

(घ) 1944

3. नेताजी के राजनीतिक गुरु कौन माने जाते हैं?

(क) सरदार पटेल

(ख) देशबंधु चित्तरंजन दास

(ग) जवाहरलाल नेहरू

(घ) बाल गंगाधर तिलक

4. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के ‘उत्तराधिकारी’ कौन हैं?

(क) केवल अंग्रेज

(ख) देश के तरुण/भारतवासी

(ग) केवल नेता

(घ) विदेशी मित्र

5. नेताजी के आदर्श समाज में किसका कोई स्थान नहीं है?

(क) श्रम का

(ख) कर्म का

(ग) जातिभेद का

(घ) शिक्षा का

6. नेताजी के अनुसार आलसी और अकर्मण्य के लिए कहाँ स्थान नहीं रहेगा?

(क) उनके स्वप्न के राष्ट्र में

(ख) विद्यालय में

(ग) सेना में

(घ) परिवार में

7. नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को किस रूप में दिया?

(क) आदेश के रूप में

(ख) चेतावनी के रूप में

(ग) उपहार के रूप में

(घ) प्रश्न के रूप में

8. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के लिए प्राण देना कैसा है?

(क) व्यर्थ

(ख) मरण स्वर्ग समान

(ग) कष्टकारी

(घ) अनावश्यक

9. नेताजी की चर्चित पुस्तक का नाम क्या है?

(क) गीतांजलि

(ख) द इंडियन स्ट्रगल

(ग) हिंद स्वराज

(घ) डिस्कवरी ऑफ इंडिया

10. नेताजी का स्वप्न क्या है?

(क) केवल आर्थिक उन्नति

(ख) एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और स्वाधीन राष्ट्र

(ग) केवल सैन्य शक्ति

(घ) केवल व्यक्तिगत सुख

उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(ग), 3–(ख), 4–(ख), 5–(ग), 6–(क), 7–(ग), 8–(ख), 9–(ख), 10–(ख)

अभिकथन–कारण (Assertion–Reason)

निर्देश: (A) अभिकथन और (R) कारण दोनों दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए – (क) दोनों सही, R, A की सही व्याख्या; (ख) दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): नेताजी ने अपने आदर्श समाज में नारी को समान अधिकार देने की बात कही।

कारण (R): उनके अनुसार आधा समाज पिछड़ा रहकर राष्ट्र पूर्ण रूप से उन्नत नहीं हो सकता।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): नेताजी के आदर्श राष्ट्र में आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।

कारण (R): राष्ट्र की उन्नति श्रम और कर्म पर निर्भर करती है।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप दिया।

कारण (R): नेताजी मानते थे कि युवाओं के पास देने योग्य कुछ भी नहीं है।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है। वास्तव में नेताजी ने कहा कि उनके पास देने योग्य कुछ भी नहीं है, सिवाय इस स्वप्न के।

4. अभिकथन (A): नेताजी ने जातिभेद रहित समाज की कल्पना की।

कारण (R): जातिभेद समाज में असमानता और फूट उत्पन्न करता है।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): नेताजी के लिए उनका स्वप्न नित्य एवं अखंड सत्य था।

कारण (R): यह स्वप्न उन्हें असीम शक्ति और अपार आनंद देता था तथा उनके जीवन को सार्थक बनाता था।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-संबंधी सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-टिप्स

• उद्बोधन की मुख्य बातें याद रखें – सर्वांगीण स्वाधीन समाज, जातिभेद रहित, नारी को समान अधिकार, आर्थिक समानता और श्रम-कर्म की मर्यादा।

• तिथि एवं स्थान (29 दिसंबर 1929, मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन) और राजनीतिक गुरु (चित्तरंजन दास) जैसे तथ्य अवश्य याद रखें।

• ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ तथा ‘यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ’ जैसी प्रसिद्ध पंक्तियों को उद्धरण के रूप में लिखने का अभ्यास करें।

सामान्य त्रुटियाँ

• लेखक को कवि कहना – ध्यान रहे यह उद्बोधन (गद्य) है, कविता नहीं।

• उद्बोधन का वर्ष 1929 के स्थान पर 1944 (खून वाले नारे का वर्ष) लिख देना।

• ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ का नाम भूल जाना या उसका नेतृत्व किसी और को बता देना (नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 10 ‘तरुण के स्वप्न’ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?

इसके लेखक नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं। यह उनके भाषण का एक अंश है, अतः यह उद्बोधन (गद्य) विधा की रचना है। यह उद्बोधन उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिया था।

नेताजी ने अपने स्वप्न में कैसे समाज और राष्ट्र की कल्पना की है?

उन्होंने एक सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा स्वाधीन राष्ट्र की कल्पना की है, जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और सबको शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।

पाठ को ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक क्यों दिया गया है?

क्योंकि इस उद्बोधन में नेताजी देश के तरुणों (युवाओं) को संबोधित करते हुए अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न की बात करते हैं तथा यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं। पूरा भाषण युवाओं और एक उज्ज्वल स्वप्न पर केंद्रित है, इसलिए यह शीर्षक सार्थक है।

‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज के विद्यार्थियों को क्या प्रेरणा देता है?

यह पाठ युवाओं को ऊँचा लक्ष्य रखने, परिश्रमी एवं कर्मठ बनने, जातिभेद और असमानता को मिटाने, नारी-सम्मान करने तथा राष्ट्र-निर्माण में बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि स्वप्न का सच्चा उत्तराधिकारी वही है जो उसे साकार करने के लिए कर्म करता है।

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