कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 10 — तरुण के स्वप्न प्रश्न उत्तर और सार

तरुण के स्वप्न प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 10 का सार, शब्दार्थ, मिलान, भाषा-अभ्यास और गतिविधियों के नमूना उत्तर पढ़ें। नेताजी के उद्बोधन का ऐतिहासिक संदर्भ भी समझें।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार अध्याय: 10 लेखक: सुभाषचंद्र बोस विधा: उद्बोधन स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 10 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 140–151, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

लेखक से परिचय – सुभाषचंद्र बोस

सुभाषचंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता थे, जिन्हें ‘नेताजी’ कहा जाता है। उनका जन्म कटक में हुआ था। उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया। द इंडियन स्ट्रगल उनकी चर्चित पुस्तक है। पाठ में प्रकाशन विभाग द्वारा उनके उपलब्ध कार्यों, पत्रों, टिप्पणियों और भाषणों के संग्रह का उल्लेख है; इसे हर लिखित रचना के सुरक्षित होने का दावा न समझें।

पाठ का सार

यह 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिए गए सुभाषचंद्र बोस के उद्बोधन का अंश है। देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न को अपना उत्तरदायित्व मानते हुए नेताजी बताते हैं कि आदर्श का लक्ष्य जीवन और कार्य को दिशा देता है। वे सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा स्वाधीन राष्ट्र चाहते हैं।

ऐसे समाज में जातिभेद और आर्थिक विषमता न हो, स्त्री-पुरुष समान अधिकार पाएं, हर व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति का समान अवसर मिले और श्रम व कर्म का सम्मान हो। राष्ट्र अपने लोगों की जरूरतों को पूरा करे और विश्व के सामने अच्छा उदाहरण बने। नेताजी अपने इस स्वप्न को युवाओं को सौंपकर उसे साकार करने के लिए कर्म करने का आह्वान करते हैं।

संदर्भ समझें:
  • ‘स्वप्न’ यहाँ नींद में देखा दृश्य नहीं, आदर्श समाज का लक्ष्य है। ‘उत्तराधिकारी’ उस लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाले हैं।
  • ‘विजातीय प्रभाव से मुक्त’ को औपनिवेशिक पराधीनता और अपनी निर्णय-स्वतंत्रता के संदर्भ में पढ़ें; इसका अर्थ दूसरे देशों के लोगों से घृणा करना नहीं है।
  • ‘आलसी और अकर्मण्य’ का उल्लेख सक्रिय प्रयास की प्रेरणा है। बीमारी, दिव्यांगता या अवसरों के अभाव को आलस्य कहना अनुचित है।
  • त्याग और प्राण-बलिदान की भाषा ऐतिहासिक स्वतंत्रता-संघर्ष के संदर्भ में है। आज विद्यार्थी इस संदेश को शिक्षा, सहयोग और शांतिपूर्ण नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ सकते हैं।
सुलभ पठन-कक्ष में दो छात्राएँ और दो छात्र मिलकर पढ़ते हुए; एक छात्र व्हीलचेयर पर है
समान शिक्षा और भागीदारी की आधुनिक अवधारणा का AI-निर्मित चित्र। यह नेताजी, 1929 के सम्मेलन या किसी वास्तविक विद्यालय का चित्र नहीं है।

शब्दार्थ

शब्दपाठ-संदर्भ में अर्थ
उद्बोधनप्रेरक संबोधन या भाषण
उत्सस्रोत; यहाँ शक्ति का स्रोत
निर्झरझरना; यहाँ आनंद का निरंतर प्रवाह
उत्तराधिकारीपूर्वज/नेता के उद्देश्य और जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने वाला
सर्वांगीणसभी पहलुओं से संबंधित
स्वाधीन / पराधीनस्वतंत्र / दूसरे के अधीन
संपन्न / विपन्नसाधन-समृद्ध / अभावग्रस्त
विषमताअसमानता
अकर्मण्य / कर्मठकाम करने का प्रयास न करने वाला / लगन से काम करने वाला
मर्यादायहाँ श्रम-कर्म की प्रतिष्ठा और सम्मान
विजातीयभिन्न समुदाय/जाति का; यहाँ विदेशी औपनिवेशिक प्रभाव का संदर्भ
गण्यगिना या माना जाने योग्य
आदर्शअनुकरण करने योग्य उत्तम रूप
अखंड / नित्यअटूट / सदा बना रहने वाला
प्रतिष्ठायहाँ सत्य की स्थापना
क्षुद्रछोटा; यहाँ अपने जीवन के लिए विनम्र अभिव्यक्ति
सार्थकउद्देश्यपूर्ण
तरुणयुवा
आह्वानकिसी कार्य के लिए प्रेरक पुकार

आगे दिए व्यक्तिगत, अनुमान और परियोजना-उत्तर नमूने हैं। जहाँ कई विकल्प उपयुक्त लगें, पाठ से तर्क देकर चर्चा करें।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

• सुभाषचंद्र बोस के लिए

• देश के तरुण वर्ग के लिए

• चित्तरंजन दास के लिए

• भारतवासियों के लिए

(1) ‘हम’ में वक्ता सुभाषचंद्र बोस स्वयं तथा देशबंधु के स्वप्न को आगे बढ़ाने वाला देश का तरुण वर्ग शामिल हैं। इसलिए विकल्प 1 और 2 उपयुक्त हैं। व्यापक अर्थ में इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने वाले भारतवासियों के लिए विकल्प 4 पर भी तर्क दिया जा सकता है। चित्तरंजन दास उस स्वप्न के प्रेरक हैं; यहाँ ‘हम’ में स्वर्गीय देशबंधु को शामिल करना उचित नहीं।

(2) स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?

• आर्थिक असमानता से

• स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से

• श्रम और कर्म की मर्यादा से

• जातिभेद से

(2) तीसरा विकल्प — श्रम और कर्म की मर्यादा से। काम का सम्मान और सक्रिय प्रयास आदर्श राष्ट्र बनाने में सहायक हैं; अन्य तीन विकल्प पाठ में दूर की जाने वाली असमानताओं को बताते हैं।

(3) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?

• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है

• हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है

• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है

• उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है

(3) तीसरा विकल्प — उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है। उत्तराधिकारी होना केवल स्मृति बनाए रखना नहीं, लक्ष्य को व्यवहार में आगे बढ़ाना है।

(4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—

• राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी

• तरुणों का साहस बढ़ेगा

• राष्ट्र स्वाधीन बनेगा

• राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा

(4) सबसे सीधा विकल्प — राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी (विकल्प 1)। समान शिक्षा और अवसर से अधिक लोग अपनी क्षमता विकसित कर काम में भाग ले सकेंगे। साहस बढ़ने या स्वाधीन राष्ट्र बनाने में मदद होने की बात भी तर्क से समझाई जा सकती है; केवल शिक्षा मिलना अपने-आप राजनीतिक स्वतंत्रता की गारंटी नहीं है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

समूह-चर्चा: हर विद्यार्थी अपने चुने विकल्प का कारण और पाठ का संबंधित विचार बताए। यदि दूसरा विकल्प भी उचित लगे तो उसका संबंध स्पष्ट करें। यह चर्चा तर्क समझने के लिए है।

मिलकर करें मिलान

मुद्रित स्तंभ 2 के क्रमांक के अनुसार मिलान: 1 → 2, 2 → 3, 3 → 1।

  1. दैनिक जीवन और सभी कार्य उसी आदर्श/लक्ष्य से प्रेरित हैं।
  2. अपने समाज की जरूरतों के अनुसार काम करने वाला राष्ट्र अभाव दूर करने का प्रयास करेगा।
  3. व्यक्ति सामाजिक दबाव और भेदभाव से मुक्त होकर गरिमा से जी सकेगा। यहाँ स्वतंत्रता का अर्थ दूसरों के अधिकारों या उचित कानूनों की उपेक्षा नहीं है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।

(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”

उत्तरइसका अर्थ है कि ऐसे आदर्श समाज में आर्थिक असमानता नहीं होनी चाहिए – अर्थात् कोई बहुत अमीर और कोई बहुत गरीब न रहे।धन-संपत्ति और संसाधनों का उचित एवं न्यायपूर्ण बँटवारा हो, जिससे हर व्यक्ति को जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ सहज ही प्राप्त हो सकें।

(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”

उत्तरयहाँ देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न की बात है। यह पंक्ति बताती है कि उनका स्वप्न ही उनकी शक्ति का स्रोत (उत्स) और निरंतर बहने वाले आनंद का झरना (निर्झर) था।अर्थात् एक ऊँचा एवं सच्चा लक्ष्य व्यक्ति को निरंतर ऊर्जा, उत्साह और आनंद प्रदान करता है तथा उसके जीवन को दिशा देता है।

(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”

उत्तरइसका तात्पर्य है कि आदर्श समाज में व्यक्ति हर प्रकार के बंधन से स्वतंत्र हो – सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानसिक।किसी पर जाति, गरीबी, अशिक्षा या किसी अन्य सामाजिक दबाव का अनुचित बंधन न हो, जिससे प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र होकर अपना विकास कर सके।

सोच-विचार के लिए

(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?

उत्तरनेताजी एक नए, सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न देखते थे।उस राष्ट्र में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद का स्थान न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।वह राष्ट्र विजातीय प्रभाव से मुक्त रहकर विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य हो।

(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?

उत्तरनेताजी ने आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने को ही अपने जीवन की सार्थकता माना।यह स्वप्न उनके लिए नित्य एवं अखंड सत्य था। इसी सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे हर प्रकार का त्याग और प्राण-बलिदान तक करने को तैयार थे; उनके अनुसार इस स्वप्न के लिए प्राण देना भी ‘मरण स्वर्ग समान’ है।

(ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तरनेताजी जानते थे कि किसी भी समाज और राष्ट्र की उन्नति परिश्रम एवं कर्म पर ही निर्भर करती है।आलसी और अकर्मण्य व्यक्ति राष्ट्र-निर्माण में योगदान नहीं देते, बल्कि उसके विकास में बाधक बनते हैं।इसलिए उन्होंने श्रम और कर्म की मर्यादा पर बल दिया तथा युवाओं को परिश्रमी एवं कर्मठ बनने की प्रेरणा देने के लिए ऐसा कहा।

(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?

उत्तरपरिश्रमी, कर्मठ और अनुशासित बनकर ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे।शिक्षा प्राप्त करके दूसरों को भी शिक्षित बनाने तथा जातिभेद, अंधविश्वास और सामाजिक असमानता को दूर करने का प्रयास करे।नारी-सम्मान एवं समान अधिकार का समर्थन करे, देश की एकता-अखंडता बनाए रखे और राष्ट्र-सेवा में बढ़-चढ़कर भाग ले।

अनुमान और कल्पना से

(क) किन दृष्टियों से मुक्ति?

संभावित व्याख्या: राजनीतिक पराधीनता; सामाजिक जातिभेद और दमनकारी रूढ़ियाँ; आर्थिक अभाव और असमान अवसर; तथा भय और दबाव से मुक्ति। पाठ के विचारों से जोड़कर लिखें।

(ख) नारी के समान अधिकार पर बल क्यों?

समाज में स्त्रियों की शिक्षा, निर्णय और सार्वजनिक भागीदारी पर अनेक बाधाएँ थीं। उनके समान अधिकार और अवसर के बिना सबकी उन्नति वाला समाज अधूरा रहता। यह पाठ-आधारित व्याख्या है, नेताजी के किसी अलग कथन का उद्धरण नहीं।

(ग) और किसे विशेष सहायता की जरूरत?

नमूना: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ भवन और सामग्री; आर्थिक रूप से वंचित बच्चों के लिए पढ़ाई में सहयोग; वृद्धजन के लिए सुविधाएँ और देखभाल। जरूरत के अनुसार सहयोग समान भागीदारी बढ़ाता है। अपने अनुभव जोड़ें।

(घ) केवल ‘भाइयो’ संबोधन क्यों?

संभावित अनुमान: यह तत्कालीन संबोधन-शैली का प्रभाव हो सकता है। दिए अंश में श्रोताओं की संख्या या स्त्री-पुरुष अनुपात का विवरण नहीं है, इसलिए सभा में केवल/अधिकतर पुरुष थे, यह निश्चित तथ्य नहीं लिख सकते। इसी भाषण में स्त्रियों के समान अधिकार का समर्थन भी है। आज मैं ‘युवा साथियो’ जैसा समावेशी संबोधन चुनूँगा।

(ङ) श्रोताओं की प्रतिक्रिया क्या रही होगी?

कल्पना का नमूना: युवाओं को लक्ष्य और जिम्मेदारी का एहसास हुआ होगा। वे उत्साहित हुए होंगे और सहयोग से आदर्श समाज बनाने का संकल्प लिया होगा। तालियाँ या जयघोष कल्पना में जोड़ सकते हैं; यह सम्मेलन की दर्ज प्रतिक्रिया नहीं है।

शीर्षक

(क) ‘तरुण के स्वप्न’ क्यों?

नेताजी अपने आदर्श समाज का स्वप्न युवाओं को सौंपते हैं। शीर्षक युवाओं के सामने रखे लक्ष्य और उसे पूरा करने की जिम्मेदारी को सामने लाता है।

(ख) दूसरा शीर्षक

नमूना: ‘युवाओं के नाम एक स्वप्न’ — क्योंकि भाषण में समाज-निर्माण का आदर्श तरुणों के सामने रखा गया है। अपना शीर्षक और कारण लिखें।

(ग) मेरी कक्षा के लिए उद्बोधन

शीर्षक: ‘समान अवसर, साझा जिम्मेदारी’

प्रिय साथियो, हमारी कक्षा तब बेहतर होगी जब हर विद्यार्थी पढ़ सके और अपनी बात रख सके। हम किसी का मजाक न उड़ाएँ, जरूरत पड़ने पर सहयोग करें और पुस्तकालय की सामग्री साझा करें। पानी बचाना, सफाई रखना और समय पर काम करना भी हमारी जिम्मेदारी है। चलिए, इस सप्ताह मिलकर ऐसा एक काम चुनें जिससे हमारी कक्षा सबके लिए सुलभ और सम्मानपूर्ण बने।

भाषा की बात

(क) पाठ के विशेषण और विशेष्य

दिया शब्दपाठ में प्रयुक्त विशेषता
सत्यअखंड (साथ ही ‘नित्य’)
समाजसर्वांगीण स्वाधीन संपन्न; आदर्श
राष्ट्रस्वाधीन; आदर्श
जीवनक्षुद्र
शक्तिअसीम
आनंदअपार

(ख) मेरी चुनी विशेषताएँ — नमूना

  • शाश्वत सत्य: लंबे समय तक महत्त्वपूर्ण आदर्श।
  • समतामूलक समाज: समान सम्मान और अवसर।
  • सहयोगी राष्ट्र: नागरिक और संस्थाएँ मिलकर काम करें।
  • उद्देश्यपूर्ण जीवन: अपने काम का उपयोग समझना।
  • रचनात्मक शक्ति: शक्ति का उपयोग सुधार में।
  • साझा आनंद: उपलब्धि में दूसरों को शामिल करना।

विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

(क) विपरीतार्थक जोड़े

स्वाधीन ↔ पराधीन पुस्तक का उदाहरण है। स्तंभ 2 के क्रमांक से बाकी मिलान: 1 → 3, 2 → 5, 3 → 6, 4 → 7, 5 → 2, 6 → 1, 7 → 4।

स्तंभ 1विपरीत शब्दनमूना वाक्य
स्वीकारअस्वीकारमैं उचित सुझाव स्वीकार और अपमानजनक प्रस्ताव अस्वीकार करता हूँ।
सार्थकनिरर्थकसमस्या पर चर्चा सार्थक है, बिना सोचे बहस करते रहना निरर्थक है।
विषमतासमानताअवसरों की विषमता घटाकर समानता बढ़ाना जरूरी है।
क्षुद्रविशाल / बृहत / विराट / महानक्षुद्र स्वार्थ छोड़कर विशाल दृष्टि अपनाएँ; विराट योजना भी छोटे प्रयासों से शुरू होती है। बृहत लक्ष्य के लिए महान विचार मदद करते हैं।
संपन्नविपन्नसंपन्न लोगों का सहयोग विपन्न परिवारों की पढ़ाई में मदद कर सकता है।
अकर्मण्यकर्मण्य / कर्मठक्षमता और अवसर होने पर अकर्मण्य बने रहने के बजाय कर्मण्य और कर्मठ बनने का प्रयास करें।
मरणजीवनजीवन और मरण प्रकृति के चक्र के अंग हैं।

गरीबी को केवल आलस्य का परिणाम न मानें; अवसर, संसाधन और सामाजिक परिस्थितियाँ भी महत्त्वपूर्ण हैं।

आपकी बात (पाठ से आगे)

(क) विद्यालय, राज्य और देश के लिए मेरे स्वप्न

नमूना: विद्यालय में सुलभ कक्षाएँ, उपयोगी पुस्तकालय और सम्मानपूर्ण व्यवहार हो। राज्य में अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और काम के अवसर बढ़ें। देश में भेदभाव घटे, नागरिक समान सम्मान पाएँ और विकास प्रकृति की रक्षा करते हुए हो। हर स्तर पर मैं पढ़ाई, सहयोग और जिम्मेदार व्यवहार से शुरुआत करूँगा।

(ख) स्वतंत्रता बनाए रखने में हमारा योगदान

संवैधानिक मूल्यों और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें; भेदभाव, अफवाह और हिंसा से बचें; सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें; ईमानदारी से अपना काम करें और सामाजिक समस्याओं पर शांतिपूर्ण बातचीत करें। मतदान की योग्य आयु पर चुनाव में सोच-समझकर भाग लें। विद्यार्थी अभी नागरिक विषयों को समझने और सेवा के छोटे कामों से शुरुआत कर सकते हैं।

मिलान कीजिए (स्वतंत्रता सेनानी)

पुस्तक के स्तंभ 2 के क्रमांक के अनुसार कुंजी: 1 → 6, 2 → 4, 3 → 5, 4 → 2, 5 → 1, 6 → 3।

तथ्य/संकेतसंबंधित सेनानी
8 अप्रैल 1929, सेंट्रल असेंबली; ‘शहीद-ए-आज़म’भगत सिंह (असेंबली की घटना में बटुकेश्वर दत्त भी उनके साथ थे)
स्वराज पार्टी के संस्थापकों में एक; नेताजी के राजनीतिक गुरुचित्तरंजन दास
13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल; 63वें दिन देहांतजतिन दास
जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवसमहात्मा गांधी
नर्मदा के तट पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटीसरदार वल्लभभाई पटेल
1921 की गिरफ्तारी में आजाद, स्वतंत्रता और कारावास वाला उत्तरचंद्रशेखर आजाद

(ख) मुख्य पाठ में नाम आया है चित्तरंजन दास (देशबंधु) का।

सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

पाठ से आगे — नमूना: स्वतंत्रता के बाद संविधान के माध्यम से समानता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक भागीदारी की व्यवस्था बनी। अस्पृश्यता के उन्मूलन, शिक्षा के अवसर बढ़ाने, स्वास्थ्य और काम के साधन विकसित करने तथा स्थानीय शासन में भागीदारी के प्रयास हुए। शिक्षा के अधिकार में 6–14 वर्ष के बच्चों की निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा शामिल है। सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से किसी पहल का उद्देश्य और प्रभाव समझाकर लिखें। इन प्रयासों का उल्लेख करने का अर्थ सभी असमानताएँ समाप्त हो जाना नहीं है। संविधान का अंग्रेज़ी पाठ — अनुच्छेद 14–17 और 21A।

स्त्री सशक्तीकरण

(क) अधिकार और सहायक व्यवस्थाएँ

नमूना: स्त्रियों और पुरुषों की कानून के सामने समानता तथा लिंग के आधार पर भेदभाव न करने के संवैधानिक प्रावधान हैं। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी के लिए अनुच्छेद 243D के तहत कम-से-कम एक-तिहाई आरक्षण है। जरूरत के अनुसार छात्रवृत्ति या अन्य योजनाओं के उदाहरण जोड़ते समय अपने राज्य की वास्तविक योजना और पात्रता जाँचें; हर सुविधा सभी बालिकाओं को स्वतः नहीं मिलती। समान अधिकार सभी का आधार हैं, जबकि कुछ विशेष व्यवस्थाएँ अवसरों की बाधाएँ घटाती हैं। पंचायतों में महिला प्रतिनिधित्व — भारत सरकार।

(ख) आजाद हिंद फौज की महिला टुकड़ी

इसका नाम रानी झाँसी रेजिमेंट था। इसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन, बाद में लक्ष्मी सहगल, ने किया। महिलाओं को सैन्य प्रशिक्षण मिला; स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी और संगठन इसकी प्रमुख भूमिका थी। प्रशिक्षित सैनिक होना और सभी का मोर्चे पर युद्ध करना एक ही बात नहीं; पूरी रेजिमेंट की लड़ाई में प्रत्यक्ष भागीदारी का दावा न करें। सिंगापुर राष्ट्रीय पुस्तकालय — रेजिमेंट का इतिहास।

नारे एवं अन्य गतिविधियाँ

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी

नमूना: मैं सुभाषचंद्र बोस के समान अधिकार और कर्म के विचार से प्रभावित हूँ। उन्होंने स्वतंत्रता को समाज की उन्नति से जोड़ा। भूमिका-अभिनय में मैं उनके विचार का अपने शब्दों में परिचय दूँगा; अपने लिखे संवाद को वास्तविक ऐतिहासिक उद्धरण नहीं कहूँगा। आप किसी दूसरे सेनानी और उनकी सत्यापित भूमिका को चुन सकते हैं।

नारे — किससे जुड़े हैं?

पुस्तक का नारासंबंध और संदर्भ
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैबाल गंगाधर तिलक
करो या मरोमहात्मा गांधी — भारत छोड़ो आंदोलन, 1942
मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगाचंद्रशेखर आजाद से संबद्ध प्रचलित कथन
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबादभगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों से संबद्ध प्रयोग। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की उत्पत्ति हसरत मोहानी से जोड़ी जाती है; लोकप्रिय प्रयोग और पहली रचना में अंतर है।
पूर्ण स्वराजजवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता वाला कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन, 1929; यह सामूहिक राजनीतिक लक्ष्य था, केवल एक व्यक्ति का निजी नारा नहीं।

स्रोत: संस्कृति मंत्रालय का हसरत मोहानी विवरण, प्रकाशन विभाग — पूर्ण स्वराज, भारत छोड़ो आंदोलन। पुरानी सरकारी कड़ियाँ यदि नए पोर्टल पर भेजें तो पुस्तकालय या संबंधित सरकारी संग्रह से विवरण देखें।

परियोजना कार्य — संग्रहिका की रूपरेखा

10 महिला और 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों का चयन करें। पुस्तक का निर्देश है कि किसी एक राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें; इसलिए कुल 20 चयन में राज्य दोहराने की जाँच करें। ऐतिहासिक प्रदेश और आज के राज्य अलग हो सकते हैं; जन्मस्थान या मुख्य कार्यक्षेत्र में से एक स्पष्ट आधार तय कर शिक्षक से मिलाएँ।

प्रत्येक प्रोफाइल मेंक्या लिखें/जाँचें
नाम और राज्य-संबंधआधार तथा भरोसेमंद संदर्भ
चित्रसत्यापित व्यक्ति का चित्र, संग्रह/स्वामित्व और स्रोत; AI चेहरा ऐतिहासिक चित्र के रूप में न लगाएँ
योगदानअपने शब्दों में 1–2 वाक्य; घटना/तिथि स्रोत से मिलाएँ
अंतिम जाँच10 + 10 व्यक्तियों की संख्या, 20 अलग राज्य-संबंध, सही नाम और चित्र

झरोखे से — गृह-उद्योग पर पत्र

पृष्ठ 149 में माँडले जेल से अनिलचंद्र विश्वास को लिखा पत्र गृह-उद्योग के संगठन पर है। नेताजी बेंत के काम, मिट्टी के खिलौने और सीप के बटन जैसे उदाहरण देते हैं। कौशल सिखाना, औजार और सामग्री जुटाना तथा वस्तु बेचने में सहयोग मुख्य विचार हैं। पत्र के तत्कालीन खर्च और उत्पादन-अनुमान को आज का व्यवसायिक बजट न मानें।

साझी समझ — चर्चा का नमूना

हमारे आसपास सिलाई, मिट्टी के बर्तन या बाँस-बेंत का काम करने वाले लोगों से अनुमति लेकर उनके काम के बारे में जान सकते हैं। सामग्री, प्रशिक्षण, काम का समय, सुरक्षा और बिक्री की कठिनाई पूछें। अपना वास्तविक स्थानीय उदाहरण लिखें; किसी की निजी आय या जानकारी बिना अनुमति सार्वजनिक न करें।

खोजबीन के लिए

आजाद हिंद फौज पर पुस्तकालय/प्रामाणिक संग्रह से छोटी प्रस्तुति बनाएँ: परिचय, नेताजी की भूमिका, रानी झाँसी रेजिमेंट और स्रोत-सूची। पृष्ठ 150 का फिल्म-संदर्भ सहायक सामग्री है; फिल्म के नाटकीय दृश्य को स्वतः इतिहास का प्रमाण न मानें।

पढ़ने के लिए — ‘भारति, जय, विजय करो!’

मुद्रित पृष्ठ 151 की पूरक कविता सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की है। इसमें खेत, समुद्र, वन, गंगा और हिमालय जैसे बिंबों के माध्यम से भारत की प्रकृति और गौरव का गेय चित्र है। यह आनंदपूर्वक पढ़ने के लिए दिया पाठ है, मुख्य उद्बोधन का नया प्रश्नपत्र नहीं।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘तरुण के स्वप्न’ उद्बोधन नेताजी ने कब और कहाँ दिया था?

उत्तरनेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यह उद्बोधन 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था। इसमें उन्होंने अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न को युवाओं के सामने प्रकट किया।

2. नेताजी के स्वप्न में नारी का क्या स्थान है?

उत्तरनेताजी के स्वप्न में नारी मुक्त होकर पुरुषों की भाँति समान अधिकार का उपभोग करती है और समाज एवं राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बनती है। उनके अनुसार नारी की समानता के बिना आदर्श समाज की कल्पना अधूरी है।

3. नेताजी ने अपने जीवन की सार्थकता किसमें देखी?

उत्तरनेताजी ने आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने में ही अपने जीवन की सार्थकता देखी। यह स्वप्न उनके लिए नित्य एवं अखंड सत्य था, जिसकी प्रतिष्ठा के लिए वे प्राण-बलिदान तक करने को तैयार थे।

4. ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ से नेताजी का क्या आशय है?

उत्तरनेताजी का आशय है कि अपने आदर्श स्वप्न और देश की स्वतंत्रता के लिए दिया गया प्राण-बलिदान व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि वह सबसे श्रेष्ठ और गौरवपूर्ण होता है। यह ऐतिहासिक उद्बोधन में बलिदान के प्रति सम्मान की अलंकारिक अभिव्यक्ति है।

5. नेताजी ने अपने उद्बोधन में कौन-कौन सी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया?

उत्तरनेताजी ने जातिभेद, आर्थिक विषमता, स्त्री-पुरुष असमानता और आलस्य (अकर्मण्यता) जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया। उन्होंने श्रम एवं कर्म की मर्यादा तथा सबको शिक्षा और समान अवसर देने की बात कही।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने उद्बोधन में किस प्रकार के आदर्श समाज और राष्ट्र की कल्पना की है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरनेताजी एक नए, सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र की कल्पना करते हैं। उनके आदर्श समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त है और उस पर किसी प्रकार का अनुचित सामाजिक दबाव नहीं है।इस समाज में जातिभेद का कोई स्थान नहीं है; नारी मुक्त होकर पुरुषों के समान अधिकार का उपभोग करती है और राष्ट्र-सेवा में समान भागीदार बनती है। यहाँ आर्थिक विषमता नहीं है और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर मिलता है।जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो, वहाँ आलसी के लिए स्थान नहीं रहता। ऐसा राष्ट्र विजातीय प्रभाव से मुक्त रहकर विश्व-मानव के समक्ष आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा। यही नेताजी का स्वप्न है।

2. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज की युवा पीढ़ी को क्या प्रेरणा देता है? अपने विचार लिखिए।

उत्तर‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज के युवाओं को एक ऊँचा एवं सार्थक लक्ष्य निर्धारित करने तथा उसे साकार करने के लिए परिश्रम करने की प्रेरणा देता है।यह पाठ सिखाता है कि उत्तराधिकारी होने का सच्चा अर्थ केवल स्वप्न संजोना नहीं, बल्कि कर्म करना है। युवाओं को आलस त्यागकर कर्मठ, अनुशासित और राष्ट्र-भक्त बनना चाहिए।पाठ जातिभेद और आर्थिक विषमता को मिटाने, नारी-सम्मान एवं समान अधिकार का समर्थन करने तथा सबको शिक्षा देने की प्रेरणा देता है। आज इसका संदेश जिम्मेदार काम, समानता और शांतिपूर्ण सेवा से जोड़ सकते हैं। इस प्रकार यह पाठ युवाओं में राष्ट्र-निर्माण की भावना जगाता है और उन्हें आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

3. नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन और कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तरसुभाषचंद्र बोस का जन्म ओड़िशा के कटक नगर में हुआ था और उन्हें पूरा देश ‘नेताजी’ के नाम से जानता है। उनका एकमात्र उद्देश्य भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त कराना था।ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व संभाला और सैनिकों को ‘दिल्ली चलो’ तथा ‘जय हिंद’ का नारा दिया।‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ उनका प्रसिद्ध प्रेरक नारा है। उन्होंने एक स्वाधीन राष्ट्र और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। ‘द इंडियन स्ट्रगल’ उनकी चर्चित पुस्तक है। उनके उपलब्ध लेखन के संग्रह प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। उनका जीवन त्याग, साहस और देश-प्रेम का अनुपम उदाहरण है।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

अभ्यास के लिए 10 बहुविकल्पीय प्रश्न और उनके बाद 5 अभिकथन-कारण प्रश्न दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर दीजिए, फिर कुंजी से मिलान कीजिए।

1. ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) महात्मा गाँधी

(ख) सुभाषचंद्र बोस

(ग) चित्तरंजन दास

(घ) भगत सिंह

2. यह उद्बोधन नेताजी ने किस वर्ष दिया था?

(क) 1857

(ख) 1921

(ग) 1929

(घ) 1944

3. नेताजी के राजनीतिक गुरु कौन माने जाते हैं?

(क) सरदार पटेल

(ख) देशबंधु चित्तरंजन दास

(ग) जवाहरलाल नेहरू

(घ) बाल गंगाधर तिलक

4. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के ‘उत्तराधिकारी’ कौन हैं?

(क) केवल अंग्रेज

(ख) देश के तरुण/भारतवासी

(ग) केवल नेता

(घ) विदेशी मित्र

5. नेताजी के आदर्श समाज में किसका कोई स्थान नहीं है?

(क) श्रम का

(ख) कर्म का

(ग) जातिभेद का

(घ) शिक्षा का

6. नेताजी के अनुसार आलसी और अकर्मण्य के लिए कहाँ स्थान नहीं रहेगा?

(क) उनके स्वप्न के राष्ट्र में

(ख) विद्यालय में

(ग) सेना में

(घ) परिवार में

7. नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को किस रूप में दिया?

(क) आदेश के रूप में

(ख) चेतावनी के रूप में

(ग) उपहार के रूप में

(घ) प्रश्न के रूप में

8. नेताजी के अनुसार उनके स्वप्न के लिए प्राण देना कैसा है?

(क) व्यर्थ

(ख) मरण स्वर्ग समान

(ग) कष्टकारी

(घ) अनावश्यक

9. नेताजी की चर्चित पुस्तक का नाम क्या है?

(क) गीतांजलि

(ख) द इंडियन स्ट्रगल

(ग) हिंद स्वराज

(घ) डिस्कवरी ऑफ इंडिया

10. नेताजी का स्वप्न क्या है?

(क) केवल आर्थिक उन्नति

(ख) एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और स्वाधीन राष्ट्र

(ग) केवल सैन्य शक्ति

(घ) केवल व्यक्तिगत सुख

उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(ग), 3–(ख), 4–(ख), 5–(ग), 6–(क), 7–(ग), 8–(ख), 9–(ख), 10–(ख)

अभिकथन–कारण (Assertion–Reason)

निर्देश: (A) अभिकथन और (R) कारण दोनों दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए – (क) दोनों सही, R, A की सही व्याख्या; (ख) दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): नेताजी ने अपने आदर्श समाज में नारी को समान अधिकार देने की बात कही।

कारण (R): उनके अनुसार आधा समाज पिछड़ा रहकर राष्ट्र पूर्ण रूप से उन्नत नहीं हो सकता।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): नेताजी के आदर्श राष्ट्र में आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।

कारण (R): राष्ट्र की उन्नति श्रम और कर्म पर निर्भर करती है।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): नेताजी ने यह स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप दिया।

कारण (R): नेताजी मानते थे कि युवाओं के पास देने योग्य कुछ भी नहीं है।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है। वास्तव में नेताजी ने कहा कि उनके पास देने योग्य कुछ भी नहीं है, सिवाय इस स्वप्न के।

4. अभिकथन (A): नेताजी ने जातिभेद रहित समाज की कल्पना की।

कारण (R): जातिभेद समाज में असमानता और फूट उत्पन्न करता है।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): नेताजी के लिए उनका स्वप्न नित्य एवं अखंड सत्य था।

कारण (R): यह स्वप्न उन्हें असीम शक्ति और अपार आनंद देता था तथा उनके जीवन को सार्थक बनाता था।

उत्तर(क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-संबंधी सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-टिप्स

• उद्बोधन की मुख्य बातें याद रखें – सर्वांगीण स्वाधीन समाज, जातिभेद रहित, नारी को समान अधिकार, आर्थिक समानता और श्रम-कर्म की मर्यादा।

• तिथि एवं स्थान (29 दिसंबर 1929, मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन) और राजनीतिक गुरु (चित्तरंजन दास) जैसे तथ्य अवश्य याद रखें।

• ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ तथा ‘यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ’ जैसी प्रसिद्ध पंक्तियों को उद्धरण के रूप में लिखने का अभ्यास करें।

सामान्य त्रुटियाँ

• लेखक को कवि कहना – ध्यान रहे यह उद्बोधन (गद्य) है, कविता नहीं।

• उद्बोधन का वर्ष 1929 के स्थान पर 1944 (खून वाले नारे का वर्ष) लिख देना।

• ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ का नाम भूल जाना या उसका नेतृत्व किसी और को बता देना (नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 8 हिंदी मल्हार अध्याय 10 ‘तरुण के स्वप्न’ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?

इसके लेखक नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं। यह उनके भाषण का एक अंश है, अतः यह उद्बोधन (गद्य) विधा की रचना है। यह उद्बोधन उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिया था।

नेताजी ने अपने स्वप्न में कैसे समाज और राष्ट्र की कल्पना की है?

उन्होंने एक सर्वांगीण स्वाधीन और संपन्न समाज तथा स्वाधीन राष्ट्र की कल्पना की है, जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और सबको शिक्षा एवं उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।

पाठ को ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक क्यों दिया गया है?

क्योंकि इस उद्बोधन में नेताजी देश के तरुणों (युवाओं) को संबोधित करते हुए अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न की बात करते हैं तथा यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं। पूरा भाषण युवाओं और एक उज्ज्वल स्वप्न पर केंद्रित है, इसलिए यह शीर्षक सार्थक है।

‘तरुण के स्वप्न’ पाठ आज के विद्यार्थियों को क्या प्रेरणा देता है?

यह पाठ युवाओं को ऊँचा लक्ष्य रखने, परिश्रमी एवं कर्मठ बनने, जातिभेद और असमानता को मिटाने, नारी-सम्मान करने तथा राष्ट्र-निर्माण में बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि स्वप्न का सच्चा उत्तराधिकारी वही है जो उसे साकार करने के लिए कर्म करता है।

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