कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 12 ‘घर की याद’ – प्रश्न-उत्तर, भावार्थ एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (काव्य खंड) के अध्याय 12 ‘घर की याद’ (कवि – भवानीप्रसाद मिश्र) का पूरा समाधान देता है – कविता का भावार्थ, शब्दार्थ तथा सभी अभ्यास-प्रश्नों के उत्तर।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (काव्य खंड) अध्याय: 12 कवि: भवानीप्रसाद मिश्र विधा: कविता (विरह/स्मृति) सत्र: 2026–27

कवि परिचय – भवानीप्रसाद मिश्र

भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था। साहित्य के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी रखने वाले कवियों में वे प्रमुख हैं। उनकी मुख्य रचनाएँ हैं – गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधी-पंचशती, त्रिकाल संध्या आदि। बुनी हुई रस्सी (कविता संग्रह) पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में कार्य किया, हैदराबाद से प्रकाशित पत्रिका कल्पना का संपादन किया तथा आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से भी संबद्ध रहे। संपूर्ण गांधी वाङ्मय का संपादन भी उन्होंने किया। सन् 1985 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘घर की याद’ कविता भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण जेल में रहते हुए लिखी थी। परिवार की स्मृति ही इस कविता की केंद्रीय संवेदना है। बरसात के मौसम में, लगातार बरसते पानी के बीच, जेल में बंद कवि को अपने घर-परिवार की याद तीव्रता से सताती है और उसकी स्मृति में एक-एक कर परिजन सजीव होते चले जाते हैं।

कवि अपने चार भाइयों और चार बहनों को याद करता है, जो उसके लिए भुजाओं और प्यार के समान हैं। फिर अनपढ़ किंतु स्नेहमयी माँ की याद आती है, जिसकी गोद में सिर रखते ही सारे दुख दूर हो जाते हैं। पिता ‘भोले बहादुर’ हैं – उनकी भुजाएँ वज्र-सी दृढ़ हैं, पर हृदय मक्खन-सा कोमल; बुढ़ापे में भी वे युवाओं जैसे सक्रिय, उत्साही एवं निडर हैं, किंतु अपने पाँचवें (जेल में बंद कवि) पुत्र को याद कर भावुक होकर रो पड़ते हैं।

कवि कल्पना करता है कि माँ ने कैसे उसे धीरज बँधाया होगा और कहा होगा कि वह कमजोर न पड़े, देशहित के मार्ग से पीछे न हटे – अन्यथा माँ की कोख लज्जित होगी और अन्य बच्चे भी रो पड़ेंगे। यह माँ की भावनात्मक दृढ़ता एवं त्याग को दर्शाता है।

अंत में कवि सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर परिवार के पास भेजता है। वह बादल से आग्रह करता है कि वह घरवालों को उसके जेल के कष्टों के विषय में कुछ न बताए, बल्कि यही संदेश दे कि वह मस्त है, स्वस्थ है, काम (कातने) में व्यस्त है और दुख को डटकर सहता है – ताकि परिवार चिंतित न हो। इस प्रकार यह कविता परिवार-प्रेम, विरह-वेदना तथा देश के लिए किए गए त्याग की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

भावार्थ

कविता के आरंभ में कवि वर्षा-ऋतु का सजीव चित्र खींचता है – रात-भर मूसलाधार पानी गिर रहा है, पत्ते हिल रहे हैं, हवा सर-सर बह रही है और कवि के प्राण थर-थर काँप रहे हैं। यह बाहरी वर्षा कवि के मन की उदासी, बेचैनी और घर की याद की तीव्रता का प्रतीक बन जाती है। जेल में बंद कवि को घर दूर होते हुए भी आँखों के सामने तैरता-सा प्रतीत होता है।

स्मृति में परिवार के सदस्य एक-एक कर उभरते हैं – चार भाई, चार बहनें, अनपढ़ पर स्नेहमयी माँ (जिसकी गोद में सिर रखते ही दुख मिट जाता है) और ‘भोले बहादुर’ पिता, जिनकी भुजाएँ वज्र-सी और हृदय मक्खन-सा कोमल है। पिता बुढ़ापे में भी निडर एवं सक्रिय हैं, पर पाँचवें पुत्र (कवि) को याद कर भावुक हो उठते हैं। माँ कल्पना में बेटे को धीरज देती है और देशहित के मार्ग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।

कविता के अंतिम भाग में कवि सावन के सजीले, पवित्र बादल को संबोधित कर उसे संदेशवाहक बनाता है। वह कहता है कि बादल परिवार के सामने उसके दुख प्रकट न करे; उन्हें यही बताए कि वह स्वस्थ, प्रसन्न एवं व्यस्त है, दुख को डटकर सहता है और किसी को उसकी पीड़ा का संदेह न हो। इस मार्मिक प्रार्थना में कवि का अपने परिवार के प्रति गहरा प्रेम और देश के लिए कष्ट सहने का साहस – दोनों एक साथ प्रकट होते हैं।

(कवि भवानीप्रसाद मिश्र की मूल कविता अभी कॉपीराइट के अंतर्गत है, इसलिए यहाँ पूरी कविता पुनः नहीं छापी गई है; मूल पाठ अपनी NCERT ‘गंगा’ पुस्तक में पढ़ें। नीचे प्रश्नों में पुस्तक की कुछ पंक्तियाँ संदर्भ हेतु ही उद्धृत हैं।)

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
घनेरा / घनागाढ़ा, गहरा, सघन
तिरनातैरना, उतराना
परितापअत्यधिक दुख, शोक, संताप
चतुर्दिक्चारों ओर
वज्रबहुत कठोर/दृढ़
नवनीतताजा मक्खन
उरहृदय, मन
झंझातेज हवा, आँधी-पानी
लरजनाकाँपना, हिलना-डुलना
मूठमुट्ठी; (मुगदर की) दस्ता
अभागाभाग्यहीन
धीरधैर्यवान, दृढ़, गंभीर
झारीटोटीदार बर्तन
बेलाएक सुगंधित फूल (मोगरा)
फलाना / फलाँअमुक, कोई
निहायतबहुत ज्यादा, अत्यधिक
लुनाईसुंदरता, सलोनापन
क्षितिजजहाँ धरती-आकाश मिलते दिखते हैं
तृषातीव्र इच्छा, प्यास
अश्रुआँसू
क्लेशदुख, पीड़ा
बड़बरगद, वट वृक्ष
उमगउल्लास, जोश
विरसनीरस, अप्रिय
कातनाचरखे/तकली पर धागा निकालना
अस्तडूबा हुआ, समाप्त

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?

(क) विदेश से मित्र के लिए

(ख) युद्धभूमि से जनता के लिए

(ग) जेल से परिवार के लिए

(घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए

उत्तर(ग) जेल से परिवार के लिए।यह कविता 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कवि के जेल में रहते हुए, अपने परिवार की याद में लिखी गई थी।

2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?

(क) उत्साह और आवेग

(ख) भय और क्रोध

(ग) साहस और उमंग

(घ) चिंता और बेचैनी

उत्तर(घ) चिंता और बेचैनी।लगातार बरसता पानी कवि के मन की उदासी, घर की याद तथा भीतरी बेचैनी का प्रतीक है।

3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?

(क) कमजोर और निष्क्रिय

(ख) स्नेहमयी और दृढ़

(ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय

(घ) सरल और उदासीन

उत्तर(ख) स्नेहमयी और दृढ़।माँ अनपढ़ होकर भी अत्यंत स्नेहमयी है और साथ ही बेटे को कमजोर न पड़ने तथा देशहित से पीछे न हटने की दृढ़ सीख देती है।

4. “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?

(क) कर्मठ और सृजनशील

(ख) साहसी और पराक्रमी

(ग) दृढ़ और संवेदनशील

(घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय

उत्तर(ग) दृढ़ और संवेदनशील।वज्र-सी मजबूत भुजाएँ पिता की दृढ़ता तथा मक्खन-सा कोमल हृदय उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

5. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?

(क) पिता की कठोरता

(ख) पिता की भावुकता

(ग) वर्षा की तीव्रता

(घ) पिता की निर्बलता

उत्तर(ख) पिता की भावुकता।पिता ऊपर से दृढ़ हैं, पर भीतर इतने कोमल कि जरा-सी बात (पत्ते का टूटना) पर ही उनके आँसुओं की धारा फूट पड़ती है।

6. “बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?

(क) घर का समृद्ध होना

(ख) घर की सजावट

(ग) घर में दुख का वातावरण

(घ) घर की शांति

उत्तर(ग) घर में दुख का वातावरण।‘परिताप’ का अर्थ है अत्यधिक दुख/संताप; कवि के जेल में होने से घर में दुख एवं उदासी का वातावरण है।

7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?

(क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।

(ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।

(ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है।

(घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।

उत्तर(ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।कवि नहीं चाहता कि परिवार उसके जेल के कष्टों से दुखी हो, इसलिए वह स्वयं को ‘मस्त’ बताकर अपना दुख छिपाता है।

8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?

(क) घर की शांति और सुरक्षा

(ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध

(ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया

(घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा

उत्तर(घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा।जेल में बंद कवि की घर-परिवार की याद और विरह-जनित अकेलेपन की पीड़ा ही कविता का केंद्रीय भाव है।

मेरी समझ मेरे विचार

1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।

उत्तरपिता ‘भोले बहादुर’ हैं – उनकी भुजाएँ वज्र-सी दृढ़ हैं, पर हृदय मक्खन-सा कोमल (दृढ़ एवं संवेदनशील)।बुढ़ापे में भी वे युवाओं जैसे सक्रिय, उत्साही एवं निडर हैं – मौत और शेर के आगे भी नहीं हिचकते; गीता-पाठ करते और मुगदर हिलाते (व्यायाम करते) हैं – अर्थात् धार्मिक एवं स्वस्थ।साथ ही वे पुत्र-प्रेम में इतने भावुक हैं कि पाँचवें पुत्र (कवि) को याद कर रो पड़ते हैं। इस प्रकार वे साहसी, कर्मठ, धार्मिक, स्नेही और भावुक – बहुआयामी व्यक्तित्व के हैं।

2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?

उत्तरकवि जेल के कष्ट सहते हुए भी हिम्मत नहीं हारता; वह कहता है कि वह मस्त है, काम (कातने) में व्यस्त है, कूदता-खेलता है और दुख को डटकर ठेलता (दूर हटाता) है।देश की स्वतंत्रता के लिए जेल का कष्ट सहना ही उसका त्याग है।परिवार को चिंता से बचाने के लिए वह अपना दुख छिपाता है – यही उसका धैर्य, साहस और त्याग है।

3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?

उत्तरलगातार बरसता पानी कवि के मन की उदासी, बेचैनी और घर की याद की तीव्रता का प्रतीक है।वर्षा के साथ-साथ उसकी स्मृतियाँ और विरह-वेदना भी बढ़ती जाती हैं; प्रकृति का यह दृश्य उसके भीतर के भावों (आँसू, पीड़ा) से जुड़ जाता है।वह सावन के बादल को संदेशवाहक भी बनाता है। इस प्रकार बाहरी वर्षा और कवि के आंतरिक भाव एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं।

4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।

उत्तरपंक्तियाँ: “पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता, इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे।”भाव: माँ स्नेहमयी होते हुए भी अत्यंत दृढ़ है। वह बेटे को कमजोर एवं भावुक न होने तथा देशहित के मार्ग से पीछे न हटने की प्रेरणा देती है।वह कहती है कि यदि बेटा डगमगाया तो माँ की कोख लज्जित होगी और अन्य बच्चे भी रो पड़ेंगे – यह माँ की भावनात्मक मजबूती एवं त्याग को दर्शाता है।

5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?

उत्तर (संभावित)मुझे माँ और पिता वाले अंश सबसे अधिक भावनात्मक लगते हैं – विशेषकर वह भाग जहाँ माँ धीरज देती है और पिता पुत्र को याद कर रो पड़ते हैं।ये अंश माता-पिता के प्रेम, त्याग और भावुकता को इतने मार्मिक ढंग से व्यक्त करते हैं कि पाठक का हृदय भी द्रवित हो उठता है। (विद्यार्थी अपना मत कारण सहित दें।)

कविता का सौंदर्य

कविता की कुछ विशेषताएँ एवं उनके संकेत-उदाहरण।

विशेषतासंकेत/उदाहरण
ध्वन्यात्मकता / नाद-सौंदर्य“झरा-झर”, “हरा-हर”, “सर-सर”, “थर-थर” (ध्वनि-आधारित शब्द)
स्मृति और दृश्य बिंबवर्षा-ऋतु तथा घर-परिवार के सजीव चित्र (माँ, पिता, भाई-बहन)
लोकभाषा की सहजता“छिन”, “फलानी”, “चुआ”, “तरला” जैसे क्षेत्रीय शब्द
पंक्तियों का दोहराव“हाय, पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है” का बार-बार आना
आलंकारिक प्रयोग“वज्र-भुज नवनीत-सा उर”, “मन कि बड़ का झाड़ जैसे” (उपमा/रूपक)
संबोधनात्मकता“हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” (बादल को संबोधन)

व्याकरण की बात

क्षेत्रीय/स्थानीय शब्द (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग)

शब्दअर्थनया वाक्य
छिनक्षण, पलएक छिन भी समय व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए।
फलानी / फलानाअमुक, कोई (विशेष)फलाने दिन हम पहली बार मिले थे।
तरलातरल, चंचल, मचलता हुआनदी का जल सहज तरला बहता जा रहा था।
बड़ (का झाड़)बरगद, वट वृक्षगाँव के बीच एक विशाल बड़ का पेड़ है।

शब्दों की व्याकरणिक पहचान

उत्तर(ख) बुढ़ापा – संज्ञा; व्यापा – क्रिया; जिनको – सर्वनाम।(ग) खुले – विशेषण; वह – सर्वनाम; बदन – संज्ञा; फिरता – क्रिया।(घ) एक – विशेषण (संख्यावाचक); फूट जाए – क्रिया; पत्ता – संज्ञा।(ङ) सजीले – विशेषण; मेरे – सर्वनाम (अधिकारवाचक); सावन – संज्ञा।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘घर की याद’ कविता के रचयिता कौन हैं?

उत्तरइस कविता के रचयिता भवानीप्रसाद मिश्र हैं।

2. कवि ने इस कविता में किसे संदेशवाहक बनाया है?

उत्तरकवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक (दूत) बनाया है।

3. कविता किस आंदोलन के दौरान लिखी गई थी?

उत्तरयह कविता सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान (जेल में रहते हुए) लिखी गई थी।

लघु उत्तरीय

4. कवि बादल से क्या-क्या न कहने का आग्रह करता है और क्यों?

उत्तरकवि बादल से आग्रह करता है कि वह परिवार से यह न कहे कि कवि रोता है, धीरज खोता है, अकेला/मौन है या लोगों से भागता है।वह चाहता है कि बादल केवल यही संदेश दे कि कवि स्वस्थ, प्रसन्न एवं व्यस्त है, ताकि उसके जेल के कष्टों को जानकर परिवार दुखी न हो।

5. कविता में ‘पाँचवाँ’ कौन है और उसके लिए क्या कहा गया है?

उत्तरकविता में ‘पाँचवाँ’ स्वयं कवि है, जो जेल में बंद है।पिता उसे ‘सोने पर सुहागा’ मानते थे, पर अब वही पुत्र जेल में बँधा होने के कारण ‘अभागा’ अनुभव करता है; उसकी याद में माता-पिता दुखी एवं भावुक हो उठते हैं।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘घर की याद’ कविता की प्रमुख विशेषताएँ एवं संदेश लिखिए।

उत्तरविषय: जेल में बंद कवि की घर-परिवार की मार्मिक स्मृति और विरह-वेदना।भाव: परिवार-प्रेम के साथ-साथ देश के लिए कष्ट सहने का साहस एवं त्याग।शिल्प: ध्वन्यात्मक शब्द, दृश्य बिंब, लोकभाषा की सहजता, दोहराव तथा बादल को संबोधन – जो कविता को जीवंत एवं प्रभावी बनाते हैं।संदेश: कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस एवं त्याग बनाए रखना तथा अपनों को चिंता से बचाना – यही सच्चे देशभक्त एवं संवेदनशील व्यक्ति का परिचय है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. कविता की केंद्रीय संवेदना क्या है?

(क) प्रकृति-सौंदर्य

(ख) परिवार की स्मृति

(ग) युद्ध का वर्णन

(घ) हास्य-व्यंग्य

उत्तर(ख) परिवार की स्मृति।

2. पिता के हृदय की तुलना किससे की गई है?

(क) वज्र से

(ख) पत्थर से

(ग) नवनीत (मक्खन) से

(घ) लोहे से

उत्तर(ग) नवनीत (मक्खन) से – कोमल हृदय का प्रतीक।

3. कविता में किस ऋतु का वर्णन है?

(क) ग्रीष्म

(ख) वर्षा (सावन)

(ग) शिशिर

(घ) वसंत

उत्तर(ख) वर्षा (सावन)।

4. ‘परिताप’ शब्द का अर्थ है—

(क) अत्यधिक दुख/संताप

(ख) प्रसन्नता

(ग) समृद्धि

(घ) शांति

उत्तर(क) अत्यधिक दुख/संताप।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): कवि बादल से अपने कष्ट परिवार को न बताने का आग्रह करता है।

कारण (R): वह नहीं चाहता कि उसके दुख जानकर परिवार चिंतित या दुखी हो।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता में पिता को पूर्णतः कठोर एवं भावनाहीन दिखाया गया है।

कारण (R): उनका हृदय मक्खन-सा कोमल है और वे पुत्र को याद कर रो पड़ते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (पिता दृढ़ होते हुए भी अत्यंत भावुक हैं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): वर्षा का वर्णन कवि के मन की उदासी एवं विरह को गहराता है।

कारण (R): बाहरी वर्षा कवि के भीतरी भावों से जुड़कर घर की याद को तीव्र बना देती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘घर की याद’ कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि भवानीप्रसाद मिश्र हैं, जिन्होंने इसे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल में लिखा।

कविता की केंद्रीय संवेदना क्या है?

जेल में बंद कवि की घर-परिवार की याद, विरह-वेदना तथा अपनों को चिंता से बचाने की भावना।

कवि ने संदेशवाहक किसे बनाया है?

कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाकर अपने परिवार के पास संदेश भेजा है।

पिता का व्यक्तित्व कैसा है?

पिता दृढ़ (वज्र-सी भुजाएँ) और संवेदनशील (मक्खन-सा कोमल हृदय) हैं; बुढ़ापे में भी सक्रिय एवं निडर, पर पुत्र-प्रेम में भावुक।

प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं। (कवि की मूल कविता कॉपीराइट के अंतर्गत होने के कारण यहाँ पूरी कविता पुनः प्रकाशित नहीं की गई।)

Scroll to Top