कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 1 ‘दो बैलों की कथा’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 1 ‘दो बैलों की कथा’ (लेखक – प्रेमचंद) का पूरा समाधान देता है।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 1 लेखक: प्रेमचंद विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – प्रेमचंद

प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और लेखन को पूरी तरह समर्पित हो गए। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं तथा सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता आंदोलन उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं। उनकी भाषा सरल, जीवंत एवं मुहावरेदार है। सन् 1936 में उनका निधन हुआ। ‘दो बैलों की कथा’ में उन्होंने किसानों के जीवन और पशुओं के साथ उनके भावनात्मक संबंध को मार्मिक ढंग से दिखाया है और यह बताया है कि स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती – उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।

पाठ का सार

झूरी नामक किसान के पास हीरा और मोती नाम के दो बैल थे, जो पछाईं नस्ल के सुंदर, परिश्रमी और एक-दूसरे के घनिष्ठ मित्र थे। वे मूक-भाषा में आपस में बातें करते थे। एक बार झूरी ने उन्हें अपने साले गया के यहाँ भेज दिया। बैलों ने समझा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है, इसलिए उन्हें यह अपमान-सा लगा। नए स्थान पर उन्होंने न चारा खाया, न काम किया और रात में रस्सियाँ तोड़कर झूरी के घर लौट आए। झूरी ने उन्हें प्रेम से गले लगाया, पर झूरी की पत्नी ने उन्हें ‘नमक-हराम’ कहकर केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया।

दूसरी बार गया उन्हें फिर ले गया और इस बार कठोरता से बाँधकर मारा-पीटा। बैलों ने हल में जुतने से इनकार कर दिया। गया के अत्याचार से तंग आकर मोती क्रोधित हो उठा, पर हीरा ने उसे संयम सिखाया। वहाँ भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाती थी, जिससे बैलों को उससे आत्मीयता हो गई। एक रात उसी लड़की ने उनकी रस्सी खोल दी और वे भाग निकले, पर रास्ता भूल गए।

रास्ते में एक साँड़ से उनका सामना हुआ। दोनों ने मिलकर युक्ति से साँड़ को घायल कर भगा दिया। भूख से व्याकुल होकर मोती मटर के खेत में घुस गया और दोनों पकड़े जाकर काँजीहौस में बंद कर दिए गए। वहाँ कई भूखे-दुर्बल पशु बंद थे। हीरा ने दीवार तोड़नी शुरू की; पकड़े जाने पर भी मोती ने दीवार तोड़कर सब पशुओं को मुक्त कराया, पर स्वयं रुककर हीरा का साथ निभाया।

अंत में दोनों को एक क्रूर दढ़ियल (कसाई) ने नीलाम में खरीद लिया। संयोग से रास्ता उनके अपने गाँव की ओर जाता था। अपना घर पहचानते ही दोनों दौड़कर झूरी के थान पर आ खड़े हुए। झूरी ने उन्हें अपना बताकर छुड़ा लिया और मोती ने दढ़ियल को सींग मारकर भगा दिया। अंत में मालकिन ने भी आकर दोनों के माथे चूम लिए। इस प्रकार यह कहानी पशुओं के माध्यम से स्वतंत्रता, स्वाभिमान, मित्रता और संघर्ष का मार्मिक संदेश देती है तथा परोक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
निरापदआपत्ति से रहित, निर्विघ्न, सुरक्षित
सहिष्णुतासहनशीलता, क्षमा
विषादउदासी, अवसाद, मन उचट जाना
पराकाष्ठाअंतिम सीमा, चरम कोटि
कदाचित्कभी, शायद
चौकसचौकन्ना, सावधान
डीलशरीर की ऊँचाई-चौड़ाई, कद, देह
विग्रहअलगाव, फूट, झगड़ा
विनोदपरिहास, मनोरंजन, क्रीड़ा
आत्मीयताअपनापन, मैत्री
नाँदमिट्टी का बड़ा-चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी दिया जाता है
पगहा / पगहियाढोर (पशु) बाँधने की रस्सी
कनखियों सेतिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा
गराँवफंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है
प्रतिवादविरोध, खंडन
ताकीदकिसी कार्य के लिए बार-बार चेताने की क्रिया
टिटकारना‘टिक-टिक’ शब्द करके बैल आदि को चलने के लिए प्रेरित करना
तेवरक्रोधभरी दृष्टि, कोप प्रकट करने वाली तिरछी नजर
बरकतवृद्धि, बढ़ती, सौभाग्य, लाभ
बेतहाशाबहुत तेजी से, बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे
व्याकुलघबराया हुआ, व्यग्र, भीत
रगेदनाभगाना, खदेड़ना, दौड़ाना
तजुरबाअनुभव
मल्लयुद्धकुश्ती, बाहुयुद्ध
ग्रासकौर, निवाला, आहार
मेंड़खेत की सीमा पर बनाया मिट्टी का घेरा
खुरपशु के पैर का नख (खुरी)
काँजीहौसवह बाड़ा जिसमें दूसरे का खेत खाने वाले या अनाथ पशु बंद किए जाते और दंड लेकर छोड़े या नीलाम किए जाते हैं
तृप्तिभोजन आदि की प्राप्ति से उत्पन्न संतोष
उजड्डपनअशिष्टता, उद्दंडता
बूतासामर्थ्य, बल, शक्ति
चेतहोश, संज्ञा, सावधानी
उन्मत्तमतवाला, मस्त
नीलामबोली बोलकर सबसे अधिक दाम देने वाले को माल बेचना
अख़्तियारअधिकार, वश, ग्रहण

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता

(ख) एकता और सहयोग

(ग) गर्व और दंभ

(घ) विद्रोह और क्रोध

उत्तर(ख) एकता और सहयोग।क्योंकि दोनों बैल काम में एक-दूसरे का बोझ बाँटते, संकट में साथ देते और मिलकर साँड़ व काँजीहौस की दीवार जैसी मुसीबतों का सामना करते हैं – यही एकता और सहयोग का परिचय है।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।बैलों ने समझा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है; अपने प्रिय घर से बिछुड़ने का दुख और अपमान की भावना के कारण उन्होंने नए स्थान को बेगाना मानकर स्वीकार नहीं किया।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए

(घ) अपनापन पाने के लिए

उत्तर(घ) अपनापन पाने के लिए।नया घर उन्हें पराया लगा। ‘जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था’ उसी अपनेपन की ओर लौटने के लिए उन्होंने रस्सियाँ तोड़ीं – अर्थात् अपनापन और स्वामिभक्ति ही मुख्य कारण थी।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान

(ख) अहिंसा

(ग) पराधीनता

(घ) अन्याय की रक्षा

उत्तर(क) स्वाभिमान।अकारण अत्याचार सहना मोती के स्वाभिमान को चोट पहुँचाता है; उसका क्रोध अन्याय के विरुद्ध स्वाभिमान की प्रतिक्रिया है।

5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

उत्तर(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।मूक-भाषा के द्वारा लेखक बैलों में मनुष्य जैसी सोच, भावनाएँ और विवेक दर्शाते हैं, जिससे वे केवल पशु न रहकर संवेदनशील पात्र बन जाते हैं।

6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

उत्तर(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।बार-बार बंधन में पड़कर भी हार न मानने वाले हीरा-मोती परतंत्रता के विरुद्ध संघर्षरत भारतीय जनता के प्रतीक हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तरबैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें बेचकर पराया कर दिया है, जिससे उन्हें गहरा दुख और अपमान महसूस हुआ।नया घर, नया गाँव और नए लोग उन्हें बेगाने लगते थे, इसलिए उनका मन वहाँ नहीं लगा।यह उनका मूक विरोध था – काम न करके वे अपने स्वामी झूरी के पास लौटने की इच्छा और अन्याय के प्रति असहमति प्रकट कर रहे थे।

2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्त्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

उत्तरमजबूत रस्सियाँ तोड़कर, अपरिचित रास्ता पार कर दोनों बैल अकेले ही अपने घर लौट आए – यह असाधारण साहस और सूझबूझ का काम था।इससे उनकी घर के प्रति आत्मीयता, स्वामिभक्ति और स्वतंत्रता की चाह प्रकट होती है।झूरी का मन स्नेह से भर गया, जबकि बैलों के मन में अपनेपन की संतुष्टि थी; गाँव के लोगों ने इसे वीरता मानकर उनका स्वागत किया।वास्तविक जीवन में भी पालतू पशु अपने घर की ओर लौट आते हैं, अतः यह घटना स्वाभाविक होते हुए भी प्रेरक एवं महत्त्वपूर्ण है।

3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तरजब अत्याचार असहनीय हो जाए, तब संघर्ष अनिवार्य हो जाता है। कहानी से उदाहरण –(क) गया के अत्याचार से तंग आकर बैलों ने हल में जुतने से इनकार कर दिया।(ख) मोती ने शक्तिशाली साँड़ से डटकर मुकाबला किया और हीरा के साथ मिलकर उसे भगा दिया।(ग) काँजीहौस की दीवार तोड़कर उन्होंने स्वयं को और अन्य पशुओं को मुक्त कराया।(घ) अंत में मोती ने दढ़ियल (कसाई) को सींग मारकर भगा दिया।इन सबसे सिद्ध होता है कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है।

4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तरदोनों भावनाएँ साथ-साथ थीं, किंतु ‘अपनापन’ अधिक प्रबल था।यद्यपि बैल स्वतंत्रता चाहते थे, फिर भी हर बार वे अपने घर झूरी के पास ही लौटना चाहते थे।पहली बार आजाद होते ही वे घर लौट आए और अंत में नीलाम के बाद भी अपने ही थान पर आकर रुके।इससे स्पष्ट है कि उनकी स्वतंत्रता की चाह के मूल में अपने घर और मालिक के प्रति अपनापन ही था।

5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तरहाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ।चुपचाप अत्याचार सहते रहना अत्याचारी का साहस और बढ़ाता है।हीरा-मोती जब तक चुप रहे, तब तक मार खाते रहे; पर जब उन्होंने काम करने से इनकार किया और संघर्ष किया, तभी उनकी स्थिति बदली।अतः अन्याय का विरोध करना ही उचित है – अन्याय को सहना भी एक प्रकार से उसका समर्थन करना है। (विद्यार्थी अपने तर्क भी जोड़ सकते हैं।)

6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर(क) दोनों मूक-भाषा में एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे और एक-दूसरे को चाटकर-सूँघकर प्रेम प्रकट करते थे।(ख) हल या गाड़ी में जुतते समय हर एक की यही कोशिश रहती कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ उसी की गर्दन पर रहे।(ग) काँजीहौस में स्वतंत्र होकर भी मोती ने हीरा को संकट में अकेला नहीं छोड़ा – “आज तुम विपत्ति में पड़ गए, तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?”इन घटनाओं से सिद्ध होता है कि दोनों अभिन्न मित्र थे।

7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तरमालकिन ने आरंभ में बैलों को ‘नमक-हराम’ और ‘कामचोर’ कहकर केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया – उसका व्यवहार कठोर और निर्दयी था।इसके विपरीत भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाती और अंत में रस्सी खोलकर भागने में मदद करती थी – उसका व्यवहार दयालु, स्नेहपूर्ण और सहानुभूति से भरा था।अंत में जब बैल लौट आए, तब मालकिन का हृदय भी बदल गया और उसने उनके माथे चूम लिए – इस प्रकार कठोरता अंततः स्नेह में बदल गई।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

उत्तर (संभावित)मैं भी उन्हें चुपके से भोजन और पानी देता ताकि वे भूख-प्यास से दुर्बल न हों।अवसर देखकर उनकी रस्सी खोल देता और सुरक्षित दिशा में भगाने में सहायता करता, जिससे किसी को संदेह न हो।साथ ही घर के बड़ों को पशुओं के प्रति दयालु बनने और उन्हें न मारने के लिए समझाने का प्रयास करता।

2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तरहाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ।कहानी में दीवार टूट जाने पर भी दोनों गधे डर के कारण नहीं भागे और वहीं खड़े रहे – “जो कहीं फिर पकड़ लिए जाएँ!”इसी प्रकार जीवन में भी कई बार अवसर सामने होने पर भी हम भय और झिझक के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाते – जैसे कक्षा में उत्तर आने पर भी हाथ न उठाना।आत्मविश्वास और साहस से ही अवसर का सही उपयोग संभव है। (विद्यार्थी अपने अनुभव जोड़ें।)

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है…” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तरहाँ, सच्ची मित्रता में थोड़ी-बहुत नोक-झोंक और हँसी-मजाक स्वाभाविक है, जो आत्मीयता का प्रतीक है।इससे मित्रता और गहरी एवं विश्वासपूर्ण होती है; कहानी में हीरा-मोती भी विनोद-भाव से सींग मिला लेते थे।मेरे अपने अनुभव में भी अच्छे मित्रों के बीच छोटी-मोटी छेड़छाड़ होती है, पर इससे प्रेम और बढ़ता है। (विद्यार्थी अपना उदाहरण दें।)

2. “हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तरदोनों के विचार अपनी-अपनी जगह उचित हैं। हीरा संयमी और क्षमाशील है – गिरे हुए शत्रु पर वार न करना उच्च नैतिक मूल्य है।मोती अधिक न्यायप्रिय और साहसी है – उसका मानना है कि अन्यायी को इतना सबक मिलना चाहिए कि वह दोबारा अन्याय न करे।मैं मुख्यतः हीरा के साथ हूँ, क्योंकि असहाय या पराजित पर दया करना मनुष्यता है; किंतु अन्याय रोकने के लिए मोती का साहस भी आवश्यक है। (अपना मत कारण सहित लिखें।)

3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर (संभावित)यह विद्यार्थी का व्यक्तिगत अनुभव है। उत्तर इस प्रकार लिखा जा सकता है –एक बार परीक्षा की तैयारी के समय मेरा मित्र बीमार पड़ गया था। मैंने उसके साथ बैठकर पढ़ाई की, अपने नोट्स दिए और कठिन विषय समझाए।मिलकर परिश्रम करने से दोनों की कठिनाई दूर हुई और हम दोनों सफल हुए – इससे मुझे मित्रता और सहयोग का महत्त्व समझ में आया।

कहानी का समय और समाज (मिलान)

कहानी में से चुने गए वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए।

कहानी में से वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
मिलान संकेत: 1 → जेल/फाँसी पर भी संघर्ष न छोड़ना; 2 → प्राण देना स्वीकार पर सेवा अस्वीकार; 3 → प्राण-सम्मान की महत्ता न होना; 4 → विद्रोह का गहराना; 5 → बलिदान से प्रेरणा; 6 → शक्तिशाली शत्रु का साहसपूर्वक सामना।

पशुओं के लिए कानून

1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

उत्तरन्याय की दृष्टि से – दूसरे के खेत में घुसकर फसल खाने वाले या अनाथ पशुओं को रोकने के लिए काँजीहौस की व्यवस्था उचित मानी जा सकती है।अन्याय की दृष्टि से – वहाँ पशुओं को भूखा-प्यासा रखकर दुर्बल कर दिया जाता था और दंड के नाम पर उनके साथ क्रूरता होती थी, जो अमानवीय है।इस प्रकार एक ही व्यवस्था में न्याय और अन्याय दोनों दिखाई देते हैं।

2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

उत्तर(क) पर्याप्त चारा, पानी और भोजन पाने का अधिकार।(ख) मार-पीट तथा किसी भी प्रकार की क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार।(ग) उचित आराम और स्वच्छ, सुरक्षित रहने के स्थान का अधिकार।(घ) बीमार होने पर इलाज और देखभाल का अधिकार।(ङ) बिना अत्याचार के, उनकी क्षमता के अनुसार ही काम लेने का नियम।

3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

उत्तर (नमूना पत्र)सेवा में,थानाध्यक्ष महोदय,(स्थानीय थाना), …….. ।विषय– हमारे साथ हुए अन्याय एवं क्रूरता की शिकायत।महोदय, हमारे नाम हीरा और मोती हैं। हम किसान झूरी के बैल हैं। हमें उसके साले गया के यहाँ भेजा गया, जहाँ हमें भरपेट भोजन नहीं दिया गया और बार-बार निर्दयता से मारा-पीटा गया।इसके बाद हमें काँजीहौस में बंद कर दिया गया, जहाँ कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा गया और अंत में हमें कसाई के हाथों नीलाम कर दिया गया।अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि पशुओं के प्रति हो रही ऐसी क्रूरता को रोकने के लिए उचित कार्यवाही करें और हमारे जैसे मूक पशुओं की रक्षा का प्रबंध करें।धन्यवाद।भवदीय–हीरा एवं मोती (झूरी के बैल)

हमारी धरोहर और संस्कृति

1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

उत्तर(क) वे स्त्री-जाति पर कभी सींग नहीं चलाते थे।(ख) गिरे हुए या असहाय शत्रु पर वार नहीं करते थे।(ग) किसी निर्बल पर अत्याचार नहीं करते थे।(घ) संकट में अपने मित्र को अकेला छोड़कर भागते नहीं थे।यह उनके उच्च नैतिक मूल्यों और ‘धर्म’ (कर्तव्य) के पालन को दर्शाता है।

2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

उत्तर(क) ‘गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना’ – पराजित एवं असहाय पर दया और क्षमाशीलता का मूल्य।(ख) ‘औरत जात पर सींग चलाना मना है’ – नारी के प्रति सम्मान और रक्षा की भावना।ये कथन भारतीय संस्कृति के करुणा, क्षमा, वीरता की मर्यादा और नारी-सम्मान जैसे मूल्यों की ओर संकेत करते हैं।

3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता” (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए। (ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

उत्तर(क) पारंपरिक उपकरण: हल, बैल, फावड़ा, खुरपी, दरांती (हँसिया), बैलगाड़ी, रहट (पानी खींचने का चक्र) आदि।आधुनिक उपकरण: ट्रैक्टर (जुताई), हार्वेस्टर/कंबाइन (कटाई), थ्रेशर (दँवाई), सीड-ड्रिल (बुवाई), पंप-सेट व ट्यूबवेल (सिंचाई) आदि।(ख) बैल का उपयोग: खेत जोतना, बैलगाड़ी से बोझ एवं फसल ढोना, रहट/कुएँ से पानी खींचकर सिंचाई करना, अनाज की मड़ाई (दँवाई) करना आदि।शहरों में भी सामान ढोने और कुछ पारंपरिक कार्यों में बैल सहायक होते हैं; इसीलिए वे भारतीय कृषि-संस्कृति का अभिन्न अंग माने जाते हैं।

अलग-अलग और साथ-साथ

1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत– धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)

उत्तरहीरा– धैर्यवान, सहनशील, शांत, क्षमाशील और विवेकी। वह सोच-समझकर निर्णय लेता है।मोती– साहसी, उग्र, स्वाभिमानी, न्यायप्रिय और कुछ गुस्सैल। वह अन्याय बर्दाश्त नहीं करता।दोनों ही परिश्रमी, स्वामिभक्त और एक-दूसरे के सच्चे मित्र हैं।

2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

उत्तरहीरा का धैर्य और संयम मोती के क्रोध को नियंत्रित कर लेता है, जिससे वे गलत समय पर मुसीबत में नहीं पड़ते।दूसरी ओर मोती का साहस और दृढ़ता हीरा की सहनशीलता को बल देती है, जिससे अन्याय का प्रतिकार संभव होता है।साँड़ से मुकाबले और काँजीहौस की दीवार तोड़ने में दोनों के गुण मिलकर ही सफलता दिलाते हैं – इस प्रकार उनकी भिन्नताएँ परस्पर पूरक हैं।

3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं… बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

उत्तर (संभावित)मैं चाहता हूँ कि मेरे सहपाठी मेरे साथ सम्मान, सहयोग और मित्रता से पेश आएँ, मेरी कठिनाई में मदद करें और मेरी बात धैर्य से सुनें।इसी प्रकार वे भी मुझसे यही अपेक्षा रखते हैं कि मैं उनका सम्मान करूँ, पढ़ाई-खेल में सहायता करूँ और किसी की कमजोरी का मजाक न उड़ाऊँ।भिन्नताओं को स्वीकार कर एक-दूसरे का साथ देना ही अच्छी मित्रता है। (विद्यार्थी अपने अनुभव से लिखें।)

4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।” आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

उत्तर (कल्पना)वे आँखों के संकेत, सिर और सींग हिलाने, पूँछ हिलाने तथा एक-दूसरे को चाटने-सूँघने के द्वारा अपने भाव प्रकट करते होंगे।विभिन्न आवाज़ों – हुँकारना, डकारना आदि – से भी वे संदेश देते होंगे।जैसे, प्रेम जताने के लिए एक-दूसरे को चाटना, सहमति में सिर हिलाना और क्रोध या चेतावनी में सींग तानना।

5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तरसिर हिलाकर ‘हाँ’ या ‘ना’ कहना।हाथ हिलाकर किसी को बुलाना या विदा करना।आँखों या भौंह के इशारे से संकेत देना।मुस्कुराकर स्वागत या अभिवादन करना; होंठों पर उँगली रखकर चुप रहने का संकेत देना।

मार्ग खोजेंगे कैसे?

1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

उत्तर (संभावित)हाँ, एक बार किसी नए स्थान पर मैं रास्ता भूल गया था।तब मैंने घबराने के बजाय किसी जान-पहचान वाले व्यक्ति, दुकानदार और पुलिसकर्मी से पूछा तथा मोबाइल के ऑनलाइन मानचित्र (GPS) की सहायता से अपने गंतव्य तक पहुँचा।

2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए? कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।

उत्तरघबराएँ नहीं; पहले एक सुरक्षित स्थान पर रुककर शांति से सोचें।ऑनलाइन मानचित्र (GPS) की सहायता लें।पुलिस, विद्यालय या किसी सरकारी भवन में जाकर सहायता माँगें।सड़क पर लगे सूचना-पट और दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते पढ़ें।किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से पूछें और अपने अभिभावक को तुरंत सूचित करें।

3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

उत्तरयह व्यावहारिक कार्य है। विद्यार्थी अपने विद्यालय में लगे निकासी-मानचित्र (Evacuation Map) को देखें।उसमें अपनी कक्षा से सबसे निकट निकासी-द्वार और सुरक्षित खुला स्थान (Assembly Point) पहचानें तथा उस मार्ग को अपनी कॉपी में रेखांकित करें।

भाषा गढ़ते मुहावरे

नीचे दिए वाक्यों में मुहावरे को पहचानिए, उसका अर्थ लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।

मुहावराअर्थनया वाक्य
दाँतों पसीना आनाबहुत परिश्रम/कठिनाई का सामना करनाकठिन प्रश्न हल करने में राकेश के दाँतों पसीना आ गया।
दिल काँप उठनाबहुत भयभीत हो जानाशेर की दहाड़ सुनकर सबके दिल काँप उठे।
जल उठनाईर्ष्या या क्रोध से भर जानादूसरों की तरक्की देखकर वह जल उठा।
दिल में ऐंठकर रह जानाविवश होकर मन मसोसकर रह जानाअपमान सहकर वह दिल में ऐंठकर रह गया।
खबर लेनादंड देना, सबक सिखानाशरारत करने पर पिताजी ने उसकी खबर ली।
गम खा जानासहन कर जाना, चुप रह जानाबड़ों की डाँट वह गम खा गया।
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकड़ा प्रत्युत्तर देनाशत्रु को ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए।
नौ-दो ग्यारह होनाभाग जाना, चंपत हो जानापुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।

रचनात्मक कार्य (संकेत सहित)

पुस्तक में कुछ रचनात्मक एवं समूह-गतिविधियाँ भी दी गई हैं, जो विद्यार्थी की अपनी कल्पना पर आधारित हैं। नीचे संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं—

1. हीरा-मोती की दैनंदिनी (डायरी): उस दिन की डायरी, जब उन्हें काँजीहौस ले जाया गया। आरंभ “आज का दिन…” से करें; भूख, गुस्सा और दर्द जैसी भावनाएँ लिखें; अंत में आशा या संकल्प लिखें (जैसे “विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा”)।

2. आज के समाचार: बैलों के काँजीहौस से भागने का समाचार लिखें। शीर्षक दें (जैसे ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ीं बेड़ियाँ’), घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ) तथा लोगों की प्रतिक्रिया लिखें।

3. कहानी का नया अंत: यदि बैल वापस न लौटते तो अंत कैसा होता – उनकी नई जगह और झूरी की स्थिति की कल्पना करते हुए लिखें।

4. चित्रकथा: दृश्यों के क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी – के अनुसार हर चित्र के लिए छोटा संवाद लिखें (जैसे “अब हम आजाद हैं।”)।

5. गीत/अभिनंदन-पत्र, भाषण (‘पशुओं के अधिकार’), पाँच भागों के शीर्षक एवं पहेलियाँ: ये समूह में अपनी कल्पना से तैयार करने वाली गतिविधियाँ हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. झूरी के बैलों के क्या नाम थे और वे किस नस्ल के थे?

उत्तरझूरी के बैलों के नाम हीरा और मोती थे और वे पछाईं नस्ल के थे।

2. बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?

उत्तरगया के घर में भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से बैलों को रोटियाँ खिलाती थी।

3. कहानी के लेखक कौन हैं?

उत्तरकहानी के लेखक प्रेमचंद हैं।

लघु उत्तरीय

4. हीरा और मोती ने साँड़ को किस प्रकार हराया?

उत्तरदोनों ने मिलकर युक्ति बनाई – एक आगे से और दूसरा पीछे से साँड़ पर हमला करता रहा।जब साँड़ एक की ओर मुड़ता, तब दूसरा उसके पेट में सींग मार देता।इस दोहरी मार से साँड़ घायल होकर भाग खड़ा हुआ और अंततः बेदम होकर गिर पड़ा।

5. काँजीहौस में मोती ने स्वतंत्र होते हुए भी हीरा को क्यों नहीं छोड़ा?

उत्तरमोती सच्चा मित्र था; वह हीरा को संकट में अकेला छोड़कर जाना स्वार्थ समझता था।उसने कहा कि इतने दिनों के साथ के बाद वह विपत्ति में मित्र को नहीं छोड़ सकता, इसलिए दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त कराने के बाद भी वह हीरा के पास लौट आया।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘दो बैलों की कथा’ किस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी हुई है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरयह कहानी उस समय लिखी गई जब भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन था और लेखक अपनी रचनाओं से लोगों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित कर रहे थे।हीरा और मोती बार-बार बंधन में पड़कर भी हार नहीं मानते और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहते हैं – यह परतंत्र भारतीय जनता के संघर्ष का प्रतीक है।“मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा” जैसे कथन अंग्रेजों की अधीनता अस्वीकार करने की भावना को दर्शाते हैं।इस प्रकार पशुओं की कथा के माध्यम से प्रेमचंद ने परोक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन का संदेश दिया है कि स्वतंत्रता संघर्ष से ही मिलती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. हीरा और मोती किसके बैल थे?

(क) गया

(ख) झूरी

(ग) भैरों

(घ) दढ़ियल

उत्तर(ख) झूरी।

2. बैलों को अंत में किसने नीलाम में खरीदा?

(क) झूरी ने

(ख) गया ने

(ग) एक दढ़ियल (कसाई) ने

(घ) मुंशी ने

उत्तर(ग) एक दढ़ियल (कसाई) ने।

3. इनमें से कौन-सा गुण मुख्यतः हीरा में था?

(क) उग्रता

(ख) सहनशीलता एवं धैर्य

(ग) कायरता

(घ) स्वार्थ

उत्तर(ख) सहनशीलता एवं धैर्य।

4. ‘काँजीहौस’ क्या है?

(क) पशुओं को बाँधने का बाड़ा जहाँ छुड़ौती/दंड लेकर छोड़ा या नीलाम किया जाता है

(ख) बैलों का अस्पताल

(ग) किसान का घर

(घ) अनाज का गोदाम

उत्तर(क) दूसरे का खेत खाने वाले या अनाथ पशुओं को बंद रखने का बाड़ा।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बैल पहली रात ही गया के घर से भागकर झूरी के पास लौट आए।

कारण (R): उन्हें नया घर पराया लगता था और अपने घर से आत्मीयता थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): मोती ने काँजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त कराया।

कारण (R): मोती स्वार्थी था और केवल अपनी जान बचाना चाहता था।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – मोती स्वार्थी नहीं, परोपकारी और साहसी था।

3. अभिकथन (A): हीरा ने गिरे हुए साँड़ पर दोबारा वार करने से मना किया।

कारण (R): गिरे हुए या असहाय शत्रु पर वार करना उनके धर्म (मर्यादा) के विरुद्ध था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘दो बैलों की कथा’ के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं, जिन्हें ‘कथा सम्राट’ भी कहा जाता है।

हीरा और मोती किसके प्रतीक हैं?

स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में हीरा और मोती स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत भारतीय जनता के प्रतीक हैं, जो बार-बार बंधन में पड़कर भी हार नहीं मानते।

इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?

स्वतंत्रता संघर्ष से ही मिलती है; सच्ची मित्रता, स्वाभिमान, करुणा, नारी-सम्मान और अन्याय का विरोध जैसे मूल्य इस कहानी की प्रमुख शिक्षाएँ हैं।

बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?

गया के घर में भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से बैलों को रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उसने उनकी रस्सी भी खोल दी थी।

प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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