दो बैलों की कथा प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
दो बैलों की कथा के इन प्रश्न-उत्तर में प्रेमचंद की कहानी का सार, हीरा-मोती की मित्रता, अभ्यासों के तर्क, भाषा-अध्ययन और रचनात्मक कार्यों के नमूने दिए गए हैं। प्रश्नों का क्रम अपनी गंगा पुस्तक से मिलाकर पढ़ें।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 3–29। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- लेखक परिचय – प्रेमचंद
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरी कल्पना मेरे अनुमान
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- कहानी की पड़ताल — पृष्ठ 18–19
- कहानी का सौंदर्य — पृष्ठ 19–20
- कहानी की रचना — पृष्ठ 20
- कहानी का समय और समाज (मिलान)
- पशुओं के लिए कानून
- हमारी धरोहर और संस्कृति
- अलग-अलग और साथ-साथ
- मार्ग खोजेंगे कैसे?
- रचनात्मक कार्य (संकेत सहित)
- मेरे शब्द — पृष्ठ 25
- भाषा गढ़ते मुहावरे
- समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 26–27
- भाषा संगम — पृष्ठ 27
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लेखक परिचय – प्रेमचंद
प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और लेखन को पूरी तरह समर्पित हो गए। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं तथा सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता आंदोलन उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं। उनकी भाषा सरल, जीवंत एवं मुहावरेदार है। सन् 1936 में उनका निधन हुआ। ‘दो बैलों की कथा’ में उन्होंने किसानों के जीवन और पशुओं के साथ उनके भावनात्मक संबंध को मार्मिक ढंग से दिखाया है और यह बताया है कि स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती – उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।
पाठ का सार
झूरी के बैल हीरा और मोती मेहनती और घनिष्ठ मित्र हैं। वे काम का अधिक भार स्वयं उठाने की कोशिश करते हैं और एक-दूसरे के भाव समझते हैं। झूरी उन्हें ससुराल भेजता है। वे समझते हैं कि उन्हें बेच दिया गया है, इसलिए नया घर स्वीकार नहीं करते और रात को रस्सियाँ तोड़कर लौट आते हैं। झूरी उनका स्वागत करता है, पर उसकी पत्नी नाराज़ होती है।
गया उन्हें दोबारा ले जाता है। वहाँ सूखा भूसा, मार और कठोर व्यवहार मिलता है। भैरो की छोटी लड़की उन्हें रोटियाँ देती है। उसकी माँ मर चुकी है और सौतेली माँ उसे मारती है; इसी साझा पीड़ा से उसे बैलों के प्रति अपनापन होता है। वह उनके गराँव खोल देती है। लड़की पर दोष आने की चिंता से बैल तुरंत नहीं भागते; उसके शोर मचाने पर वे निकल जाते हैं।
रास्ता भूलकर दोनों मटर खाते हैं। बाद में एक साँड़ के आक्रमण का मिलकर सामना करते हैं। फिर दूसरे मटर के खेत में मोती पकड़ा जाता है। हीरा निकल चुका होता है, लेकिन मित्र की सहायता के लिए लौटकर स्वयं भी पकड़ा जाता है। दोनों काँजीहौस पहुँचते हैं, जहाँ चारा नहीं मिलता। हीरा दीवार तोड़ना शुरू करता है; चौकीदार उसे मारकर बाँध देता है। मोती दीवार गिराता है और अन्य पशु निकल जाते हैं। हीरा की रस्सी न टूटने पर मोती भी उसके पास रुकता है।
एक सप्ताह तक बिना चारे के दुर्बल हुए दोनों बैलों को नीलाम कर दिया जाता है; दिन में एक बार पानी दिया जाता था। दढ़ियल खरीदार के साथ जाते हुए वे परिचित रास्ता पहचानकर झूरी के थान पर लौट आते हैं। मोती खरीदार को खदेड़ देता है। झूरी उन्हें प्यार और चारा देता है; अंत में उसकी पत्नी भी उनके माथे चूमती है। कहानी मित्रता, करुणा, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का संदेश देती है।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| निरापद | आपत्ति से रहित, निर्विघ्न, सुरक्षित |
| सहिष्णुता | सहनशीलता, क्षमा |
| विषाद | उदासी, अवसाद, मन उचट जाना |
| पराकाष्ठा | अंतिम सीमा, चरम कोटि |
| कदाचित् | कभी, शायद |
| चौकस | चौकन्ना, सावधान |
| डील | शरीर की ऊँचाई-चौड़ाई, कद, देह |
| विग्रह | अलगाव, फूट, झगड़ा |
| विनोद | परिहास, मनोरंजन, क्रीड़ा |
| आत्मीयता | अपनापन, मैत्री |
| नाँद | मिट्टी का बड़ा-चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी दिया जाता है |
| पगहा / पगहिया | ढोर (पशु) बाँधने की रस्सी |
| कनखियों से | तिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा |
| गराँव | फंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है |
| प्रतिवाद | विरोध, खंडन |
| ताकीद | किसी कार्य के लिए बार-बार चेताने की क्रिया |
| टिटकारना | ‘टिक-टिक’ शब्द करके बैल आदि को चलने के लिए प्रेरित करना |
| तेवर | क्रोधभरी दृष्टि, कोप प्रकट करने वाली तिरछी नजर |
| बरकत | वृद्धि, बढ़ती, सौभाग्य, लाभ |
| बेतहाशा | बहुत तेजी से, बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे |
| व्याकुल | घबराया हुआ, व्यग्र, भीत |
| रगेदना | भगाना, खदेड़ना, दौड़ाना |
| तजुरबा | अनुभव |
| मल्लयुद्ध | कुश्ती, बाहुयुद्ध |
| ग्रास | कौर, निवाला, आहार |
| मेंड़ | खेत की सीमा पर बनाया मिट्टी का घेरा |
| खुर | पशु के पैर का नख (खुरी) |
| काँजीहौस | वह बाड़ा जिसमें दूसरे का खेत खाने वाले या अनाथ पशु बंद किए जाते और दंड लेकर छोड़े या नीलाम किए जाते हैं |
| तृप्ति | भोजन आदि की प्राप्ति से उत्पन्न संतोष |
| उजड्डपन | अशिष्टता, उद्दंडता |
| बूता | सामर्थ्य, बल, शक्ति |
| चेत | होश, संज्ञा, सावधानी |
| उन्मत्त | मतवाला, मस्त |
| नीलाम | बोली बोलकर सबसे अधिक दाम देने वाले को माल बेचना |
| अख़्तियार | अधिकार, वश, ग्रहण |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
मेरी समझ मेरे विचार
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्त्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
ऊपर प्रश्न 4 और 5 विचार-आधारित हैं। स्वतंत्रता को अधिक महत्त्व देने वाला उत्तर भी कहानी के प्रमाणों के साथ उचित हो सकता है। पीड़ित को दोष देने के बजाय अन्याय रोकने की जिम्मेदारी पर विचार करें।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है…” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
2. “हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
कहानी की पड़ताल — पृष्ठ 18–19
चुनी हुई कहानी के लिए नमूना रूपरेखा; किसी दूसरी कहानी का चयन भी कर सकते हैं।
| बिंदु | दो बैलों की कथा के आधार पर नमूना |
|---|---|
| शीर्षक और लेखक | दो बैलों की कथा — प्रेमचंद |
| विषय | पशुओं की संवेदना, मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता |
| क्रिया/कार्य | ससुराल भेजना, घर लौटना, फिर भागना, साँड़ का सामना, काँजीहौस में संघर्ष और घर वापसी |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | औपनिवेशिक काल का ग्रामीण कृषि-समाज; अन्याय का प्रतिरोध और साथ निभाना |
| चरित्र/पात्र | हीरा, मोती, झूरी, उसकी पत्नी, गया, छोटी लड़की, चौकीदार और दढ़ियल खरीदार |
| परिणाम | दोनों अपने घर पहुँचते हैं; अपनापन फिर मिलता है। |
कहानी का सौंदर्य — पृष्ठ 19–20
पुस्तक के पहले उदाहरणों के अतिरिक्त ये उदाहरण दिए जा सकते हैं। उद्धरण छोटे रखकर उनका प्रभाव समझिए।
| विशेषता | दूसरा उदाहरण और प्रभाव |
|---|---|
| चित्रात्मक भाषा | “दोनों की पूँछें खड़ी हो गईं।” — लड़की के आने पर उत्साह का दृश्य बनता है। |
| संवादात्मकता | “तुम मुझे इतना स्वार्थी समझते हो, हीरा?” — मोती की मित्रता संवाद से उभरती है। |
| विरोधाभास | जिस काँजीहौस में पशु रखे जाते हैं, वहीं उन्हें चारा न मिलना संरक्षण और व्यवहार के बीच विरोध दिखाता है। |
| व्यंग्य | “सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा।” — गधे की सहनशीलता को मूर्खता कहने वाले समाज पर कटाक्ष है। |
| संघर्ष | हीरा का दीवार पर चोट करना और चौकीदार द्वारा उसे बाँधना — मुक्ति की इच्छा तथा दमन का टकराव। |
| अतिशयोक्ति | “साँड़ पूरा हाथी है।” — साँड़ की विशालता बढ़ाकर कही गई है; वह सचमुच हाथी नहीं है। |
| संदेह/उलझन | मोटे गराँव खोलने से पहले यह सोचना कि भागने पर छोटी लड़की पर संदेह होगा। |
कहानी की रचना — पृष्ठ 20
आरंभ में गधे और बैल के व्यवहार पर टिप्पणी से व्यंग्यात्मक शैली का संकेत मिलता है। झूरी, हीरा और मोती का परिचय मुख्य पात्र बताता है। हल, गाड़ी, नाँद और खेती का उल्लेख ग्रामीण परिवेश बनाता है। अफ्रीका में भारतीयों की दुर्दशा जैसे संदर्भ औपनिवेशिक समय की ओर संकेत करते हैं। बैलों का आपसी स्नेह तथा ससुराल भेजे जाने की घटना आगे के अलगाव और संघर्ष की भूमिका बनाते हैं। सरल बोलचाल, मुहावरे और मूक संवाद कहानी को जीवंत बनाते हैं।
कहानी का समय और समाज (मिलान)
कहानी में से चुने गए वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए।
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
मिलान संकेत: 1 → जेल/फाँसी पर भी संघर्ष न छोड़ना; 2 → प्राण देना स्वीकार पर सेवा अस्वीकार; 3 → प्राण-सम्मान की महत्ता न होना; 4 → विद्रोह का गहराना; 5 → बलिदान से प्रेरणा; 6 → शक्तिशाली शत्रु का साहसपूर्वक सामना।
पशुओं के लिए कानून
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।
यह साहित्यिक चर्चा और कल्पित पत्र है। ऊपर माँगी गई सुविधाएँ पशु-कल्याण संबंधी प्रस्ताव हैं; इन्हें किसी वर्तमान अधिनियम की हूबहू धाराएँ न मानें।
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता” (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए। (ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
अलग-अलग और साथ-साथ
1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत– धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं… बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।” आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
भारतीय सांकेतिक भाषा एक व्यवस्थित प्राकृतिक भाषा है; यह केवल सामान्य हाथ-पैर के इशारों का नाम नहीं। पुस्तक में सुझाए संस्थान के शैक्षिक संसाधनों से इसे सीखें।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए? कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
रचनात्मक कार्य (संकेत सहित)
नीचे मूल रचनात्मक गतिविधियों के नमूने हैं। कल्पित विवरणों को वास्तविक समाचार या निजी अनुभव न समझें।
1. हीरा की दैनंदिनी — पृष्ठ 23–24
आज का दिन बहुत कठिन रहा। हमें काँजीहौस में बंद कर दिया गया। सुबह से एक तिनका भी नहीं मिला। भूख से पेट जल रहा है और अपने घर की याद आ रही है। मोती भी थका हुआ है। यहाँ दूसरे पशुओं को देखकर और दुख होता है। मैं हार नहीं मानूँगा। कल कोई उपाय सोचूँगा जिससे हम सबको इस कष्ट से छुटकारा मिले। आशा है कि फिर झूरी का स्नेह मिलेगा।
2. आज के समाचार — कल्पित लेखन
दो बैलों के प्रयास से काँजीहौस के पशुओं को मिला निकलने का रास्ता
स्थानीय संवाददाता। बीती रात गाँव के काँजीहौस की कच्ची दीवार गिरने से कई पशु बाहर निकल गए। हीरा और मोती नामक बैलों ने दीवार तोड़ने का प्रयास किया। हीरा को बाँध दिए जाने के बाद मोती ने काम पूरा किया। घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें निकल गईं; गधों को भी मोती ने बाहर किया।
हीरा की रस्सी न टूटने के कारण दोनों बैल वहीं रह गए। सुबह कर्मचारियों में खलबली मच गई। इस घटना ने पशुओं के भोजन और देखभाल की व्यवस्था पर प्रश्न उठाए।
पुस्तक का संकेत बैलों के भागने का समाचार लिखने को कहता है, लेकिन मूल कथा में दोनों उस रात नहीं भागते। ऊपर का नमूना मूल घटना के अनुरूप है। यदि उन्हें भागता दिखाएँ, तो उसे स्पष्ट रूप से वैकल्पिक कल्पित घटना कहें।
3. कहानी का नया अंत — वैकल्पिक कल्पना
हीरा और मोती भटकते हुए एक बूढ़े किसान के खेत में पहुँचे। उसने उनके घाव देखे और उन्हें चारा-पानी दिया। दोनों वहीं रहने लगे, पर झूरी को नहीं भूले। उधर झूरी ने आसपास के गाँवों में खोज जारी रखी। एक मेले में किसान से उनका समाचार मिला। झूरी ने उन्हें पहचान लिया; किसान ने बताया कि वे स्वस्थ हैं। इस कल्पित अंत में बैल पुराने थान पर नहीं लौटते, लेकिन झूरी समय-समय पर उनसे मिलने आता है और उनकी देखभाल में सहायता करता है।
4. चित्रकथा — पृष्ठ 24–25
- बंद करना: दोनों बैल बाड़े में हैं। हीरा: “यहाँ किसी को चारा क्यों नहीं मिला?”
- योजना: हीरा: “दीवार कच्ची है; रास्ता निकालने की कोशिश करें।”
- दीवार टूटना: मोती: “दूसरे साथियों को बाहर जाने दो।”
- मुक्ति का दृश्य: बाहर निकलते पशु: “अब हमें निकलने का रास्ता मिल गया!”
चित्र 4 में बैल को बाहर दौड़ता दिखाया गया है, जबकि मूल गद्य में हीरा बँधा रहता है और मोती उसका साथ नहीं छोड़ता। चित्र पर आधारित वैकल्पिक कल्पना में बैल कह सकता है, “अब हम आजाद हैं।” मूल कथा के अनुरूप लिखने पर यह संवाद बाहर निकलते अन्य पशुओं को दें और दोनों बैलों के वहीं रहने की बात जोड़ें।
मेरे शब्द — पृष्ठ 25
पहले अपना अनुमान लिखिए; फिर शब्दकोश से तुलना कीजिए। ये पाँच उदाहरण हैं, आपके नए शब्द अलग हो सकते हैं।
| शब्द | प्रसंग से अनुमान | जाँचा हुआ अर्थ |
|---|---|---|
| आत्मीयता | अपना लगना | अपनापन |
| ताकीद | सख्ती से कहना | किसी काम के लिए चेताना या निर्देश देना |
| तजुरबा | पहले की जानकारी | अनुभव |
| बूता | कर सकने की ताकत | सामर्थ्य |
| नीलाम | बोली लगाकर बेचना | अधिकतम बोली देने वाले को बिक्री |
भाषा गढ़ते मुहावरे
नीचे दिए वाक्यों में मुहावरे को पहचानिए, उसका अर्थ लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| दाँतों पसीना आना | बहुत परिश्रम/कठिनाई का सामना करना | कठिन प्रश्न हल करने में राकेश के दाँतों पसीना आ गया। |
| दिल काँप उठना | बहुत भयभीत हो जाना | शेर की दहाड़ सुनकर सबके दिल काँप उठे। |
| जल उठना | ईर्ष्या या क्रोध से भर जाना | दूसरों की तरक्की देखकर वह जल उठा। |
| दिल में ऐंठकर रह जाना | विवश होकर मन मसोसकर रह जाना | अपमान सहकर वह दिल में ऐंठकर रह गया। |
| खबर लेना | दंड देना, सबक सिखाना | शरारत करने पर पिताजी ने उसकी खबर ली। |
| जी तोड़कर काम करना | पूरी मेहनत करना | किसानों ने फसल बचाने के लिए जी तोड़कर काम किया। |
| गम खा जाना | सहन कर जाना, चुप रह जाना | बड़ों की डाँट वह गम खा गया। |
| ईंट का जवाब पत्थर से देना | कड़ा प्रत्युत्तर देना | शत्रु को ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए। |
| नौ-दो ग्यारह होना | भाग जाना, चंपत हो जाना | पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया। |
समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 26–27
1(क). गीत — मौलिक नमूना
साथ चले दो साथी प्यारे,
दुख में बने परस्पर सहारे।
भूख और बंधन से लड़ते,
कभी न मित्र का हाथ छोड़ते।
सीख यही हम सब अपनाएँ,
जीवों को भी प्यार दिखाएँ।
1(ख). अभिनंदन-पत्र
प्रिय हीरा और मोती,
बाल-सभा तुम्हारी मित्रता, साहस और संवेदनशीलता का अभिनंदन करती है। संकट में साथ निभाकर और अन्य पशुओं के लिए मार्ग खोलकर तुमने सहयोग का महत्त्व समझाया। हम संकल्प लेते हैं कि जीवों के प्रति दयालु रहेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।
सप्रेम — बाल-सभा
तिथि और स्थान: विद्यार्थी भरें।
2. बाल-सभा में भाषण — पशुओं के अधिकार
आदरणीय शिक्षक और प्रिय साथियो! हीरा-मोती की कथा हमें याद दिलाती है कि पशु भी भूख, दर्द और स्नेह अनुभव करते हैं। उनके श्रम का लाभ उठाकर भोजन और आराम से वंचित रखना अन्याय है। हमें पर्याप्त चारा-पानी, सुरक्षित आश्रय, उचित विश्राम और बीमारी में उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए। बच्चों को पशुओं को पत्थर मारने या डराने के बजाय करुणा सीखनी चाहिए। घायल पशु दिखे तो सुरक्षित दूरी रखते हुए किसी जिम्मेदार बड़े या पशु-चिकित्सा सेवा की सहायता लें। हम आज से जीवों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार का संकल्प लें। धन्यवाद!
3. पाँच भागों के संभावित शीर्षक
- दो मित्र और अपने घर का स्नेह
- गया का घर और बालिका की करुणा
- साँड़ से सामना और मित्रता की परीक्षा
- काँजीहौस की दीवार और मुक्ति का प्रयास
- नीलामी के बाद घर वापसी
मेरी पहेली — आठ मौलिक नमूने
| पहेली | उत्तर |
|---|---|
| रत्न मेरा नाम, धीरज मेरा काम; संकट में मित्र को दूँ सही सलाह। | हीरा |
| दो बैलों को गले लगाऊँ, अपने थान पर प्यार लुटाऊँ। | झूरी |
| नाम मेरा चमकीला दाना, मित्र को छोड़ न मैंने जाना। | मोती |
| झूरी का साला कहलाऊँ, बैलों को अपने घर ले जाऊँ। | गया |
| खेत जोतूँ और गाड़ी खींचूँ, सींग और खुर मेरी पहचान। | बैल |
| हरी फली में गोल दाने, खेत में बैलों ने चाहा खाने। | मटर |
| रेशों से बनती लंबी डोरी, बाँधूँ गठरी छोटी-मोटी। | रस्सी |
| आटे से बनती गोल-गोल, लड़की लाई प्रेम अनमोल। | रोटी |
भाषा संगम — पृष्ठ 27
पुस्तक के नमूनों में हिंदी में बैल, संस्कृत में वृषभः और गुजराती में બળદ दिए जाते हैं। अपनी मातृभाषा का शब्द किसी दक्ष वक्ता या शब्दकोश से जाँचकर लिखिए।
वाक्य-अनुवाद का नमूना (अंग्रेज़ी): Sometimes one also comes across a stubborn bullock. यह अंग्रेज़ी नमूना है; आपकी मातृभाषा अलग हो तो उसी में लिखें। भाषा बदलने पर शब्द और व्याकरण बदलते हैं, भाव वही रहता है।
अतिरिक्त प्रश्न
अगला अभ्यास ClearStudy की अतिरिक्त अभ्यास-सामग्री है; यह पुस्तक के मूल प्रश्नों से अलग है।
अति लघु उत्तरीय
1. झूरी के बैलों के क्या नाम थे और वे किस नस्ल के थे?
2. बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?
3. कहानी के लेखक कौन हैं?
लघु उत्तरीय
4. हीरा और मोती ने साँड़ को किस प्रकार हराया?
5. काँजीहौस में मोती ने स्वतंत्र होते हुए भी हीरा को क्यों नहीं छोड़ा?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘दो बैलों की कथा’ किस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी हुई है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. हीरा और मोती किसके बैल थे?
(क) गया
(ख) झूरी
(ग) भैरों
(घ) दढ़ियल
2. बैलों को अंत में किसने नीलाम में खरीदा?
(क) झूरी ने
(ख) गया ने
(ग) एक दढ़ियल (कसाई) ने
(घ) मुंशी ने
3. इनमें से कौन-सा गुण मुख्यतः हीरा में था?
(क) उग्रता
(ख) सहनशीलता एवं धैर्य
(ग) कायरता
(घ) स्वार्थ
4. ‘काँजीहौस’ क्या है?
(क) पशुओं को बाँधने का बाड़ा जहाँ छुड़ौती/दंड लेकर छोड़ा या नीलाम किया जाता है
(ख) बैलों का अस्पताल
(ग) किसान का घर
(घ) अनाज का गोदाम
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बैल पहली रात ही गया के घर से भागकर झूरी के पास लौट आए।
कारण (R): उन्हें नया घर पराया लगता था और अपने घर से आत्मीयता थी।
2. अभिकथन (A): मोती ने काँजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त कराया।
कारण (R): मोती स्वार्थी था और केवल अपनी जान बचाना चाहता था।
3. अभिकथन (A): हीरा ने गिरे हुए साँड़ पर दोबारा वार करने से मना किया।
कारण (R): गिरे हुए या असहाय शत्रु पर वार करना उनके धर्म (मर्यादा) के विरुद्ध था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘दो बैलों की कथा’ के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं, जिन्हें ‘कथा सम्राट’ भी कहा जाता है।
हीरा और मोती किसके प्रतीक हैं?
स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में हीरा और मोती स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत भारतीय जनता के प्रतीक हैं, जो बार-बार बंधन में पड़कर भी हार नहीं मानते।
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
स्वतंत्रता संघर्ष से ही मिलती है; सच्ची मित्रता, स्वाभिमान, करुणा, नारी-सम्मान और अन्याय का विरोध जैसे मूल्य इस कहानी की प्रमुख शिक्षाएँ हैं।
बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?
गया के घर में भैरो की छोटी लड़की, जिसकी माँ मर चुकी थी, चुपके से बैलों को रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उसने उनकी रस्सी भी खोल दी थी।
