कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 1 ‘दो बैलों की कथा’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 1 ‘दो बैलों की कथा’ (लेखक – प्रेमचंद) का पूरा समाधान देता है।
- लेखक परिचय – प्रेमचंद
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क (बहुविकल्पीय)
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरी कल्पना मेरे अनुमान
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- कहानी का समय और समाज (मिलान)
- पशुओं के लिए कानून
- हमारी धरोहर और संस्कृति
- अलग-अलग और साथ-साथ
- मार्ग खोजेंगे कैसे?
- भाषा गढ़ते मुहावरे
- रचनात्मक कार्य (संकेत सहित)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक परिचय – प्रेमचंद
प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और लेखन को पूरी तरह समर्पित हो गए। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं तथा सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता आंदोलन उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं। उनकी भाषा सरल, जीवंत एवं मुहावरेदार है। सन् 1936 में उनका निधन हुआ। ‘दो बैलों की कथा’ में उन्होंने किसानों के जीवन और पशुओं के साथ उनके भावनात्मक संबंध को मार्मिक ढंग से दिखाया है और यह बताया है कि स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती – उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।
पाठ का सार
झूरी नामक किसान के पास हीरा और मोती नाम के दो बैल थे, जो पछाईं नस्ल के सुंदर, परिश्रमी और एक-दूसरे के घनिष्ठ मित्र थे। वे मूक-भाषा में आपस में बातें करते थे। एक बार झूरी ने उन्हें अपने साले गया के यहाँ भेज दिया। बैलों ने समझा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है, इसलिए उन्हें यह अपमान-सा लगा। नए स्थान पर उन्होंने न चारा खाया, न काम किया और रात में रस्सियाँ तोड़कर झूरी के घर लौट आए। झूरी ने उन्हें प्रेम से गले लगाया, पर झूरी की पत्नी ने उन्हें ‘नमक-हराम’ कहकर केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया।
दूसरी बार गया उन्हें फिर ले गया और इस बार कठोरता से बाँधकर मारा-पीटा। बैलों ने हल में जुतने से इनकार कर दिया। गया के अत्याचार से तंग आकर मोती क्रोधित हो उठा, पर हीरा ने उसे संयम सिखाया। वहाँ भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाती थी, जिससे बैलों को उससे आत्मीयता हो गई। एक रात उसी लड़की ने उनकी रस्सी खोल दी और वे भाग निकले, पर रास्ता भूल गए।
रास्ते में एक साँड़ से उनका सामना हुआ। दोनों ने मिलकर युक्ति से साँड़ को घायल कर भगा दिया। भूख से व्याकुल होकर मोती मटर के खेत में घुस गया और दोनों पकड़े जाकर काँजीहौस में बंद कर दिए गए। वहाँ कई भूखे-दुर्बल पशु बंद थे। हीरा ने दीवार तोड़नी शुरू की; पकड़े जाने पर भी मोती ने दीवार तोड़कर सब पशुओं को मुक्त कराया, पर स्वयं रुककर हीरा का साथ निभाया।
अंत में दोनों को एक क्रूर दढ़ियल (कसाई) ने नीलाम में खरीद लिया। संयोग से रास्ता उनके अपने गाँव की ओर जाता था। अपना घर पहचानते ही दोनों दौड़कर झूरी के थान पर आ खड़े हुए। झूरी ने उन्हें अपना बताकर छुड़ा लिया और मोती ने दढ़ियल को सींग मारकर भगा दिया। अंत में मालकिन ने भी आकर दोनों के माथे चूम लिए। इस प्रकार यह कहानी पशुओं के माध्यम से स्वतंत्रता, स्वाभिमान, मित्रता और संघर्ष का मार्मिक संदेश देती है तथा परोक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| निरापद | आपत्ति से रहित, निर्विघ्न, सुरक्षित |
| सहिष्णुता | सहनशीलता, क्षमा |
| विषाद | उदासी, अवसाद, मन उचट जाना |
| पराकाष्ठा | अंतिम सीमा, चरम कोटि |
| कदाचित् | कभी, शायद |
| चौकस | चौकन्ना, सावधान |
| डील | शरीर की ऊँचाई-चौड़ाई, कद, देह |
| विग्रह | अलगाव, फूट, झगड़ा |
| विनोद | परिहास, मनोरंजन, क्रीड़ा |
| आत्मीयता | अपनापन, मैत्री |
| नाँद | मिट्टी का बड़ा-चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी दिया जाता है |
| पगहा / पगहिया | ढोर (पशु) बाँधने की रस्सी |
| कनखियों से | तिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा |
| गराँव | फंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है |
| प्रतिवाद | विरोध, खंडन |
| ताकीद | किसी कार्य के लिए बार-बार चेताने की क्रिया |
| टिटकारना | ‘टिक-टिक’ शब्द करके बैल आदि को चलने के लिए प्रेरित करना |
| तेवर | क्रोधभरी दृष्टि, कोप प्रकट करने वाली तिरछी नजर |
| बरकत | वृद्धि, बढ़ती, सौभाग्य, लाभ |
| बेतहाशा | बहुत तेजी से, बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे |
| व्याकुल | घबराया हुआ, व्यग्र, भीत |
| रगेदना | भगाना, खदेड़ना, दौड़ाना |
| तजुरबा | अनुभव |
| मल्लयुद्ध | कुश्ती, बाहुयुद्ध |
| ग्रास | कौर, निवाला, आहार |
| मेंड़ | खेत की सीमा पर बनाया मिट्टी का घेरा |
| खुर | पशु के पैर का नख (खुरी) |
| काँजीहौस | वह बाड़ा जिसमें दूसरे का खेत खाने वाले या अनाथ पशु बंद किए जाते और दंड लेकर छोड़े या नीलाम किए जाते हैं |
| तृप्ति | भोजन आदि की प्राप्ति से उत्पन्न संतोष |
| उजड्डपन | अशिष्टता, उद्दंडता |
| बूता | सामर्थ्य, बल, शक्ति |
| चेत | होश, संज्ञा, सावधानी |
| उन्मत्त | मतवाला, मस्त |
| नीलाम | बोली बोलकर सबसे अधिक दाम देने वाले को माल बेचना |
| अख़्तियार | अधिकार, वश, ग्रहण |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
मेरी समझ मेरे विचार
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्त्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है…” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
2. “हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
कहानी का समय और समाज (मिलान)
कहानी में से चुने गए वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए।
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
पशुओं के लिए कानून
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता” (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए। (ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
अलग-अलग और साथ-साथ
1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत– धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं… बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।” आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए? कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
भाषा गढ़ते मुहावरे
नीचे दिए वाक्यों में मुहावरे को पहचानिए, उसका अर्थ लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| दाँतों पसीना आना | बहुत परिश्रम/कठिनाई का सामना करना | कठिन प्रश्न हल करने में राकेश के दाँतों पसीना आ गया। |
| दिल काँप उठना | बहुत भयभीत हो जाना | शेर की दहाड़ सुनकर सबके दिल काँप उठे। |
| जल उठना | ईर्ष्या या क्रोध से भर जाना | दूसरों की तरक्की देखकर वह जल उठा। |
| दिल में ऐंठकर रह जाना | विवश होकर मन मसोसकर रह जाना | अपमान सहकर वह दिल में ऐंठकर रह गया। |
| खबर लेना | दंड देना, सबक सिखाना | शरारत करने पर पिताजी ने उसकी खबर ली। |
| गम खा जाना | सहन कर जाना, चुप रह जाना | बड़ों की डाँट वह गम खा गया। |
| ईंट का जवाब पत्थर से देना | कड़ा प्रत्युत्तर देना | शत्रु को ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए। |
| नौ-दो ग्यारह होना | भाग जाना, चंपत हो जाना | पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया। |
रचनात्मक कार्य (संकेत सहित)
पुस्तक में कुछ रचनात्मक एवं समूह-गतिविधियाँ भी दी गई हैं, जो विद्यार्थी की अपनी कल्पना पर आधारित हैं। नीचे संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं—
1. हीरा-मोती की दैनंदिनी (डायरी): उस दिन की डायरी, जब उन्हें काँजीहौस ले जाया गया। आरंभ “आज का दिन…” से करें; भूख, गुस्सा और दर्द जैसी भावनाएँ लिखें; अंत में आशा या संकल्प लिखें (जैसे “विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा”)।
2. आज के समाचार: बैलों के काँजीहौस से भागने का समाचार लिखें। शीर्षक दें (जैसे ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ीं बेड़ियाँ’), घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ) तथा लोगों की प्रतिक्रिया लिखें।
3. कहानी का नया अंत: यदि बैल वापस न लौटते तो अंत कैसा होता – उनकी नई जगह और झूरी की स्थिति की कल्पना करते हुए लिखें।
4. चित्रकथा: दृश्यों के क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी – के अनुसार हर चित्र के लिए छोटा संवाद लिखें (जैसे “अब हम आजाद हैं।”)।
5. गीत/अभिनंदन-पत्र, भाषण (‘पशुओं के अधिकार’), पाँच भागों के शीर्षक एवं पहेलियाँ: ये समूह में अपनी कल्पना से तैयार करने वाली गतिविधियाँ हैं।
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. झूरी के बैलों के क्या नाम थे और वे किस नस्ल के थे?
2. बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?
3. कहानी के लेखक कौन हैं?
लघु उत्तरीय
4. हीरा और मोती ने साँड़ को किस प्रकार हराया?
5. काँजीहौस में मोती ने स्वतंत्र होते हुए भी हीरा को क्यों नहीं छोड़ा?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘दो बैलों की कथा’ किस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी हुई है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. हीरा और मोती किसके बैल थे?
(क) गया
(ख) झूरी
(ग) भैरों
(घ) दढ़ियल
2. बैलों को अंत में किसने नीलाम में खरीदा?
(क) झूरी ने
(ख) गया ने
(ग) एक दढ़ियल (कसाई) ने
(घ) मुंशी ने
3. इनमें से कौन-सा गुण मुख्यतः हीरा में था?
(क) उग्रता
(ख) सहनशीलता एवं धैर्य
(ग) कायरता
(घ) स्वार्थ
4. ‘काँजीहौस’ क्या है?
(क) पशुओं को बाँधने का बाड़ा जहाँ छुड़ौती/दंड लेकर छोड़ा या नीलाम किया जाता है
(ख) बैलों का अस्पताल
(ग) किसान का घर
(घ) अनाज का गोदाम
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बैल पहली रात ही गया के घर से भागकर झूरी के पास लौट आए।
कारण (R): उन्हें नया घर पराया लगता था और अपने घर से आत्मीयता थी।
2. अभिकथन (A): मोती ने काँजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त कराया।
कारण (R): मोती स्वार्थी था और केवल अपनी जान बचाना चाहता था।
3. अभिकथन (A): हीरा ने गिरे हुए साँड़ पर दोबारा वार करने से मना किया।
कारण (R): गिरे हुए या असहाय शत्रु पर वार करना उनके धर्म (मर्यादा) के विरुद्ध था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘दो बैलों की कथा’ के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं, जिन्हें ‘कथा सम्राट’ भी कहा जाता है।
हीरा और मोती किसके प्रतीक हैं?
स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में हीरा और मोती स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत भारतीय जनता के प्रतीक हैं, जो बार-बार बंधन में पड़कर भी हार नहीं मानते।
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
स्वतंत्रता संघर्ष से ही मिलती है; सच्ची मित्रता, स्वाभिमान, करुणा, नारी-सम्मान और अन्याय का विरोध जैसे मूल्य इस कहानी की प्रमुख शिक्षाएँ हैं।
बैलों को रोटियाँ कौन खिलाती थी?
गया के घर में भैरों की छोटी अनाथ लड़की चुपके से बैलों को रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उसने उनकी रस्सी भी खोल दी थी।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
