क्या लिखूँ? प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
क्या लिखूँ? के इन प्रश्न उत्तर में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के आत्मपरक निबंध का सार, लेखन-प्रक्रिया, पाठ के अभ्यास, समास, उपसर्ग-प्रत्यय और रचनात्मक कार्यों के नमूने पढ़िए।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 30–44। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- लेखक परिचय – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- निबंध लिखने की कला — पृष्ठ 36–37
- भाव-विस्तार
- मेरा अनुभव / समाज-सुधार (गतिविधि-आधारित प्रश्न)
- रचनात्मक लेखन — पृष्ठ 38–39
- व्याकरण की बात
- भाव एक, शब्द अनेक — पृष्ठ 41
- अनमेलियाँ और वाद-विवाद — पृष्ठ 42
- भाषा संगम — पृष्ठ 42
- आगे पढ़ें — पृष्ठ 43
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लेखक परिचय – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, वर्तमान छत्तीसगढ़ में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार एवं हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है; निबंध-लेखन के लिए वे विशेष रूप से स्मरणीय हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने (निबंध संग्रह), अश्रुदल, शतदल (काव्य), झलमला, त्रिवेणी (कहानी संग्रह) तथा अनेक आलोचना-ग्रंथ। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। अपने लेखन में उन्होंने अध्यात्म, समाज-सुधार और लोकजीवन को प्रमुखता दी तथा भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सुंदर सामंजस्य दिखाया। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘क्या लिखूँ?’ एक आत्मपरक निबंध है जिसमें लेखक ने निबंध की रचना-प्रक्रिया को रोचक एवं सरल ढंग से समझाया है। लेखक को नमिता और अमिता नाम की दो छात्राओं के लिए दो विषयों – ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’ – पर आदर्श निबंध लिखने थे, ताकि वे निबंध-रचना का रहस्य समझ सकें।
अंग्रेजी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं और विषय गौण हो जाता है – जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है; असली वस्तु तो हैट (भाव) है, खूँटी (विषय) नहीं। किंतु लेखक कहते हैं कि उन्होंने ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं किया; उन्हें तो सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तभी निबंध बनता है।
लेखक निबंधशास्त्र के आचार्यों के मत देखते हैं – निबंध छोटा हो, उसके दो अंग (सामग्री और शैली) हों, पहले रूपरेखा बने, भाषा में प्रवाह हो आदि। पर उन्हें यह सब कठिन लगता है। अंततः वे मानटेन की स्वच्छंद, अनुभव-आधारित पद्धति को अपनाते हैं, जिसमें लेखक अपने सच्चे भावों को सीधे अभिव्यक्त करता है। अमीर खुसरो की एक कहानी (जिसमें उन्होंने एक ही पद्य में चारों स्त्रियों की इच्छाओं – खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल – को समाहित कर दिया) से प्रेरित होकर लेखक दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट देते हैं।
निबंध के अंत में लेखक समझाते हैं कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ इसलिए होते हैं क्योंकि दूरी यथार्थ की कठोरता को छिपा देती है। तरुणों को भविष्य उज्ज्वल लगता है और वृद्धों को अतीत सुखद; दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं – इसी कारण हर युग में समाज-सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। न दोषों का अंत है, न सुधारों का – इसी से जीवन प्रगतिशील है।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्फूर्ति | फुरती, उत्तेजना, मन में प्रकट होना |
| आवेग | बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की अंतःप्रेरणा, झोंक |
| यथार्थता | सत्य, उचित, वास्तविकता |
| उत्थित | उठा हुआ, उत्पन्न, ऊँचा |
| रहस्य | गुप्त भेद, गोपनीय विषय, मर्म |
| विज्ञ | जानकार, समझदार, विद्वान |
| सम्मति | सहमति, राय, मत |
| अनुसंधान | अन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल |
| विश्वकोश | वह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो |
| दुर्बोधता | जो शीघ्र समझ में न आए, कठिन, गूढ़ |
| गांभीर्य | गंभीरता, गहराई, जटिलता |
| गुत्थी | उलझन, कठिनाई, गाँठ |
| अज्ञ | ज्ञानरहित, नासमझ |
| पद्धति | प्रथा, परिपाटी, प्रणाली, मार्ग |
| पाश्चात्य | पश्चिम का, पश्चिमी |
| आख्यायिका | सिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षाप्रद कथा |
| उदात्त | ऊँचा, महान, श्रेष्ठ, उदार |
| अभिव्यक्ति | व्यक्त या प्रकट होना, प्रकाशन |
| अनुसरण | पीछे चलना, अनुकरण, अनुकूल आचरण |
| समावेश | शामिल होना, मिलना, एकत्र होना |
| संध्या | साँझ, दिन और रात के मेल का समय |
| अंकित | लिखित, चिह्नित, चित्रित |
| कोलाहल | बहुत लोगों के एक साथ बोलने का शोर, हंगामा |
| विषाद | उदासी, अवसाद |
| कलरव | मधुर ध्वनि, कोमल स्वर |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
निबंध लिखने की कला — पृष्ठ 36–37
निबंध में विषय से जुड़े अनुभव, विचार और भाव क्रम से प्रस्तुत किए जाते हैं। पुस्तक का आरेख प्रेरणा, विषय-चयन, सामग्री-संग्रह, रूपरेखा-निर्माण, शैली-निर्धारण तथा लेखन-समापन की ओर ध्यान दिलाता है।
आरेख के आधार पर निबंध — मौलिक नमूना
हमारे विद्यालय का छोटा पुस्तकालय
मुझे कहानियाँ पढ़ना अच्छा लगता है। हमारे विद्यालय के पुस्तकालय ने मेरी रुचि को नया अवसर दिया है। वहाँ कहानी, विज्ञान और जीवनियों की पुस्तकें हैं। हम सप्ताह में एक पुस्तक चुनते हैं और पढ़कर अपनी बात कक्षा में बताते हैं।
शुरू में मुझे पुस्तक चुनना कठिन लगता था। पुस्तकालय प्रभारी ने मेरी रुचि पूछकर छोटी कहानियों से आरंभ करने की सलाह दी। अब मैं पढ़ते समय नए शब्द लिखता हूँ और मित्रों से पात्रों पर चर्चा करता हूँ। इससे मेरी भाषा और सोच दोनों का अभ्यास होता है।
पुस्तकालय का लाभ सबको मिले, इसके लिए पुस्तकें समय पर लौटाना, उन्हें साफ रखना और शांति बनाए रखना जरूरी है। हम पुरानी उपयोगी पुस्तकें साझा कर इसका संग्रह बढ़ा सकते हैं। पुस्तकालय केवल पुस्तकों का कमरा नहीं, नई बातें सीखने का अवसर है।
दूसरे ढंग का आरेख और कारण
अनुभव/प्रश्न → विषय चुनना → तथ्य जाँचना → मुख्य बिंदु → पहला मसौदा → संशोधन → अंतिम लेख
यह वैकल्पिक ढंग मुझे अच्छा लगता है, क्योंकि पहले मसौदे के बाद छूटे विचार जोड़ने, दोहराव हटाने और भाषा स्पष्ट करने का अवसर मिलता है। पुस्तक का ढंग भी उपयोगी है; अपना तरीका कारण सहित चुन सकते हैं।
लेखक का आधे पृष्ठ लंबे वाक्यों और अस्पष्टता से विद्वत्ता दिखाने वाला कथन आत्मव्यंग्य है। विद्यार्थी स्पष्ट, प्रसंगानुकूल भाषा लिखें। छोटा निबंध भी तभी अच्छा होगा जब विषय पर्याप्त रूप से स्पष्ट हो।
भाव-विस्तार
पाठ से चुने गए वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए।
1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
मेरा अनुभव / समाज-सुधार (गतिविधि-आधारित प्रश्न)
मेरा अनुभव: आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
2. हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, दिव्यांगजन आदि के लिए कार्य करती हैं। ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
समाज-सुधार: छूटे नाम और शोध के संकेत
| व्यक्ति | संक्षिप्त परिचय |
|---|---|
| नागार्जुन | प्राचीन बौद्ध दार्शनिक; माध्यमक विचारधारा और शून्यता पर दार्शनिक चिंतन से जुड़े। यहाँ आधुनिक हिंदी कवि नागार्जुन की बात नहीं है। |
| राजा राममोहन राय | सती-प्रथा का विरोध और स्त्रियों की स्थिति तथा शिक्षा में सुधार के प्रयास। |
| स्वामी दयानंद सरस्वती | आर्य समाज के संस्थापक; शिक्षा और सामाजिक सुधार तथा विधवा-विवाह के समर्थन से जुड़े। |
| महात्मा गांधी | अस्पृश्यता दूर करने, ग्राम-स्वच्छता, श्रम और सामाजिक सहयोग पर बल। |
शोध-सहायता: NCERT इतिहास: स्त्रियाँ, जाति एवं सुधार (SATHEE); गांधी स्मृति: रचनात्मक कार्यक्रम। किसी व्यक्ति के विचार और प्रभाव लिखें; मनगढ़ंत घटनाएँ या उद्धरण न जोड़ें।
अपने क्षेत्र की संस्था का विवरण कैसे लिखें?
नाम, स्थान, काम का क्षेत्र, एक सत्यापित गतिविधि, लाभ पाने वाला समूह और जानकारी का स्रोत/तिथि लिखें। उदाहरण-प्रारूप: “[संस्था का वास्तविक नाम] हमारे क्षेत्र में [देखा या जाँचा गया काम] करती है। जानकारी मुझे [स्रोत] से [तिथि] को मिली।” यह खाली प्रारूप है, किया हुआ सर्वेक्षण नहीं।
4. नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन का संतुलन
नमूना मत: ईमानदारी और करुणा जैसे मूल्य व्यवहार का मार्गदर्शन करें; आत्मचिंतन से अपनी भूलें पहचानें; अध्ययन, श्रम और समय-प्रबंधन से जिम्मेदारियाँ पूरी करें। उदाहरण के लिए परीक्षा की तैयारी में नियमित अभ्यास करना, नकल से बचना और कठिनाई में मित्र की मदद करना तीनों का संतुलन है। शिक्षक के साथ अलग उदाहरणों पर चर्चा करें।
रचनात्मक लेखन — पृष्ठ 38–39
1. आम के आम, गुठलियों के दाम — जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास
दोहरा लाभ, छोटा प्रयास
हमने विद्यालय में शिक्षक के मार्गदर्शन में पत्तियों और फल-सब्जियों के छिलकों को अलग एकत्र करने की योजना बनाई। प्लास्टिक और काँच को इसमें नहीं मिलाएँगे। उपयुक्त पात्र में सूखी पत्तियों के साथ जैविक सामग्री रखकर शिक्षक के बताए ढंग से खाद तैयार करेंगे। तैयार खाद का उपयोग विद्यालय के पौधों में होगा।
इस प्रयास से कूड़ा कम होगा और पौधों के लिए खाद भी मिलेगी। यही दोहरा लाभ ‘आम के आम, गुठलियों के दाम’ का आशय है। साथ में हम मिलकर काम करना और संसाधनों का सम्मान करना सीखेंगे। यह प्रस्तावित गतिविधि का नमूना है; अपने वास्तविक प्रयोग का विवरण अलग लिखें।
2. दूर का अनुमान और निकट का अनुभव — दैनंदिनी का नमूना
तिथि: विद्यार्थी भरें।
आज विद्यालय की प्रदर्शनी में स्वयंसेवक बना। पहले मुझे लगता था कि प्रदर्शनी लगाना केवल सुंदर चित्र टाँगना है। पास से काम किया तो सामग्री जुटाने, जानकारी जाँचने और सबको समझाने में लगने वाला श्रम दिखाई दिया। आयोजन जितना आकर्षक था, उसके पीछे उतनी ही जिम्मेदारी भी थी। अब किसी काम के बारे में राय बनाने से पहले उसे समझने का प्रयास करूँगा।
व्याकरण की बात
समास
निबंध में आए कुछ सामासिक पदों का समास-विग्रह एवं भेद नीचे दिए गए हैं—
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| निबंध-रचना | निबंध की रचना | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| रूपरेखा | रूप की रेखा | तत्पुरुष समास |
| विचार-समूह | विचारों का समूह | तत्पुरुष समास |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
| नगर-नगर | प्रत्येक नगर | अव्ययीभाव समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय (वाक्य पूरा कीजिए)
नए शब्द बनाइए (उपसर्ग/प्रत्यय)
1. पाठ से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द
| शब्द | रचना | प्रकार |
|---|---|---|
| दुर्बोध | दुर् + बोध | उपसर्ग |
| अनादि | अन् + आदि | उपसर्ग |
| असंतोष | अ + संतोष | उपसर्ग |
| अस्पष्टता | अ + स्पष्ट + ता | उपसर्ग और प्रत्यय |
| कठिनाई | कठिन + आई | प्रत्यय |
| सुधारक | सुधार + क | प्रत्यय |
| मधुरता | मधुर + ता | प्रत्यय |
खाली स्थान क्रम से: कठिनाई, असंतोष, अस्पष्टता, अस्पष्टता, दुर्बोधता। शब्द-रचना में मूल शब्द के स्वर में परिवर्तन हो सकता है। ‘समाजसेवी’ जैसे सामासिक शब्द को बिना विचार किए प्रत्यय का उदाहरण न बनाएँ।
भाव एक, शब्द अनेक — पृष्ठ 41
| मिलते-जुलते शब्द | वाक्यों से अंतर |
|---|---|
| विचार–मनन | मैंने लेख का विचार बनाया। लिखने से पहले उस पर मनन किया। विचार सोच या मत है; मनन गहराई से सोचना। |
| सुहावने–मधुर–मनमोहक | सुहावने मौसम में टहलना अच्छा लगा। पक्षी का स्वर मधुर था। पहाड़ का दृश्य मनमोहक था। प्रयोग प्रसंग के अनुसार बदलता है। |
| उल्लास–आनंद–प्रमोद | बच्चे उल्लास से दौड़े। पुस्तक पढ़कर आनंद मिला। उत्सव में प्रमोद छा गया। तीनों प्रसन्नता से जुड़े हैं। |
अनमेलियाँ और वाद-विवाद — पृष्ठ 42
1. खुसरो की रचनाओं का संकलन
पाठ की अनमेली खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल को हास्यपूर्ण ढंग से जोड़ती है। शिक्षक की मदद से विश्वसनीय मुद्रित संकलन या पुस्तकालय से अन्य अनमेलियाँ, मुकरियाँ और पहेलियाँ चुनें। प्रत्येक के साथ पुस्तक, संपादक और पृष्ठ लिखें। अनमेली में असंगत प्रसंगों का मेल, मुकरी में कही बात से चुटीला मुकरना और पहेली में छिपे उत्तर का अनुमान प्रमुख होता है। कोई मौलिक रचना लिखें तो उसे खुसरो की रचना न बताएँ।
2. दो पीढ़ियों का अंतर — वाद-विवाद की तैयारी
पक्ष: नई तकनीक और बदलते अवसरों के कारण युवाओं के अनुभव अलग हैं; उन्हें बदलाव में भूमिका मिलनी चाहिए।
दूसरा पक्ष: वृद्धों के अनुभव में दीर्घकालीन परिणामों की समझ है; परंपरा की उपयोगी बातों को बचाना चाहिए।
साझा निष्कर्ष: उम्र के आधार पर रूढ़ धारणा बनाने के बजाय प्रमाण, संवाद और परस्पर सम्मान से निर्णय लें। हर वक्ता को समान समय, बिना बीच में टोके सुनना, व्यक्ति पर टिप्पणी से बचना और अंत में मुख्य तर्क समेटना नियम हो सकते हैं।
भाषा संगम — पृष्ठ 42
पुस्तक के उदाहरण: निबंध (हिंदी), निबंधः (संस्कृत), मजमून (उर्दू), व्यासमु (तेलुगु), कट्टुरै (तमिल)। अपनी भाषा का शब्द सही लिपि में किसी दक्ष वक्ता से जाँचें।
वाक्य-अनुवाद का अंग्रेज़ी नमूना: One should prepare an outline before writing an essay. अपनी मातृभाषा अलग हो तो उसी में अनुवाद लिखें।
आगे पढ़ें — पृष्ठ 43
अज्ञेय के ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ के दिए अंश में भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव का अंतर बताया गया है। बख्शी जी के लेख से तुलना करें: नमिता-अमिता का आग्रह बाहरी अवसर है; लेखक का अनुभव और चिंतन रचना को भीतर से आकार देता है। पुस्तक में सुझाए लेखकों के लिए नाम, भाषा, एक प्रमुख कृति और स्रोत की छोटी सूची बनाएँ। यह स्वतंत्र पठन-कार्य है।
अतिरिक्त प्रश्न
नीचे ClearStudy की अतिरिक्त अभ्यास-सामग्री है।
अति लघु उत्तरीय
1. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध के लेखक कौन हैं?
2. लेखक को किन दो विषयों पर निबंध लिखने थे?
3. आत्मपरक (आधुनिक) निबंध-पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?
लघु उत्तरीय
4. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ – लेखक ने इसका क्या कारण बताया है?
5. अमीर खुसरो की पद्धति को अपनाने से लेखक की कठिनाई कैसे आधी रह गई?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. लेखक को किसके लिए आदर्श निबंध लिखने थे?
(क) नमिता और अमिता के लिए
(ख) अपने संपादक के लिए
(ग) गार्डिनर के लिए
(घ) किसी पत्रिका के लिए
2. लेखक के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं?
(क) भूमिका और उपसंहार
(ख) सामग्री और शैली
(ग) शीर्षक और रूपरेखा
(घ) भाव और छंद
3. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ क्या है?
(क) मुहावरा
(ख) लोकोक्ति (कहावत)
(ग) अलंकार
(घ) समास
4. लेखक ने अंततः किस निबंध-पद्धति को अपनाया?
(क) आचार्यों की परंपरागत पद्धति
(ख) रूपरेखा-आधारित पद्धति
(ग) मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति
(घ) गार्डिनर की मानसिक-स्थिति पद्धति
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।
कारण (R): दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और ध्वनि मधुर प्रतीत होती है।
2. अभिकथन (A): लेखक के अनुसार लिखने के लिए भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं, परिश्रम की आवश्यकता नहीं।
कारण (R): लेखक ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्हें सोचना और परिश्रम करना पड़ता है।
3. अभिकथन (A): समाज में सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
कारण (R): समय के साथ नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और पुराने सुधार भी दोष बन जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘क्या लिखूँ?’ पाठ किस विधा की रचना है?
यह एक आत्मपरक निबंध है, जिसमें लेखक निबंध की रचना-प्रक्रिया को संवाद-शैली में समझाते हैं।
निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उदाहरण क्यों दिया गया है?
यह दर्शाने के लिए कि निबंध में असली वस्तु लेखक के भाव (हैट) हैं, विषय (खूँटी) केवल आधार है – अर्थात् भाव की प्रधानता है।
लेखक ने अंत में कौन-सी पद्धति अपनाई?
लेखक ने मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति अपनाई और अमीर खुसरो की तरह दोनों विषयों को एक ही निबंध में समाहित कर दिया।
लेखक के अनुसार दूर के ढोल सुहावने क्यों होते हैं?
क्योंकि दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता, इसलिए दूर की वस्तुएँ मधुर एवं सुंदर लगती हैं।
