कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 2 ‘क्या लिखूँ?’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 2 ‘क्या लिखूँ?’ (लेखक – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी) का पूरा समाधान देता है।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 2 लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी विधा: निबंध (आत्मपरक) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार एवं हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है; निबंध-लेखन के लिए वे विशेष रूप से स्मरणीय हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने (निबंध संग्रह), अश्रुदल, शतदल (काव्य), झलमला, त्रिवेणी (कहानी संग्रह) तथा अनेक आलोचना-ग्रंथ। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। अपने लेखन में उन्होंने अध्यात्म, समाज-सुधार और लोकजीवन को प्रमुखता दी तथा भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सुंदर सामंजस्य दिखाया। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘क्या लिखूँ?’ एक आत्मपरक निबंध है जिसमें लेखक ने निबंध की रचना-प्रक्रिया को रोचक एवं सरल ढंग से समझाया है। लेखक को नमिता और अमिता नाम की दो छात्राओं के लिए दो विषयों – ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’ – पर आदर्श निबंध लिखने थे, ताकि वे निबंध-रचना का रहस्य समझ सकें।

अंग्रेजी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं और विषय गौण हो जाता है – जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है; असली वस्तु तो हैट (भाव) है, खूँटी (विषय) नहीं। किंतु लेखक कहते हैं कि उन्होंने ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं किया; उन्हें तो सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तभी निबंध बनता है।

लेखक निबंधशास्त्र के आचार्यों के मत देखते हैं – निबंध छोटा हो, उसके दो अंग (सामग्री और शैली) हों, पहले रूपरेखा बने, भाषा में प्रवाह हो आदि। पर उन्हें यह सब कठिन लगता है। अंततः वे मानटेन की स्वच्छंद, अनुभव-आधारित पद्धति को अपनाते हैं, जिसमें लेखक अपने सच्चे भावों को सीधे अभिव्यक्त करता है। अमीर खुसरो की एक कहानी (जिसमें उन्होंने एक ही पद्य में चारों स्त्रियों की इच्छाओं – खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल – को समाहित कर दिया) से प्रेरित होकर लेखक दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट देते हैं।

निबंध के अंत में लेखक समझाते हैं कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ इसलिए होते हैं क्योंकि दूरी यथार्थ की कठोरता को छिपा देती है। तरुणों को भविष्य उज्ज्वल लगता है और वृद्धों को अतीत सुखद; दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं – इसी कारण हर युग में समाज-सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। न दोषों का अंत है, न सुधारों का – इसी से जीवन प्रगतिशील है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
स्फूर्तिफुरती, उत्तेजना, मन में प्रकट होना
आवेगबिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की अंतःप्रेरणा, झोंक
यथार्थतासत्य, उचित, वास्तविकता
उत्थितउठा हुआ, उत्पन्न, ऊँचा
रहस्यगुप्त भेद, गोपनीय विषय, मर्म
विज्ञजानकार, समझदार, विद्वान
सम्मतिसहमति, राय, मत
अनुसंधानअन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल
विश्वकोशवह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो
दुर्बोधताजो शीघ्र समझ में न आए, कठिन, गूढ़
गांभीर्यगंभीरता, गहराई, जटिलता
गुत्थीउलझन, कठिनाई, गाँठ
अज्ञज्ञानरहित, नासमझ
पद्धतिप्रथा, परिपाटी, प्रणाली, मार्ग
पाश्चात्यपश्चिम का, पश्चिमी
आख्यायिकासिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षाप्रद कथा
उदात्तऊँचा, महान, श्रेष्ठ, उदार
अभिव्यक्तिव्यक्त या प्रकट होना, प्रकाशन
अनुसरणपीछे चलना, अनुकरण, अनुकूल आचरण
समावेशशामिल होना, मिलना, एकत्र होना
संध्यासाँझ, दिन और रात के मेल का समय
अंकितलिखित, चिह्नित, चित्रित
कोलाहलबहुत लोगों के एक साथ बोलने का शोर, हंगामा
विषादउदासी, अवसाद
कलरवमधुर ध्वनि, कोमल स्वर

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?

(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना

(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना

(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना

(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना

उत्तर(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।हैट (भाव) असली वस्तु है और खूँटी (विषय) केवल आधार – अर्थात् निबंध में विषय गौण है और लेखक के मनोभाव ही प्रधान हैं।

2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?

(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना

(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना

(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना

(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना

उत्तर(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।मानटेन ने जो देखा, सुना और अनुभव किया उसी को सच्चे भावों के साथ लिखा; इसी स्वच्छंद, अनुभव-आधारित पद्धति को लेखक भी अपनाने का निर्णय लेते हैं।

3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?

(क) तर्क और भावना

(ख) ज्ञान और शिक्षा

(ग) परिश्रम और उपलब्धि

(घ) अभिलाषा और अनुभव

उत्तर(घ) अभिलाषा और अनुभव।तरुणों की दृष्टि भविष्य की अभिलाषा पर टिकी है और वृद्धों की दृष्टि अतीत के अनुभव पर – इसी कारण एक को भविष्य और दूसरे को अतीत सुहावना लगता है।

4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?

(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए

(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए

(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए

(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में

उत्तर(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।खुसरो ने एक ही पद्य में चारों स्त्रियों की भिन्न इच्छाएँ समाहित कर दीं; इसी से प्रेरित होकर लेखक दोनों विषयों को एक निबंध में समेटना चाहते हैं।

5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?

(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।

(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।

(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।

उत्तर(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।लेखक के अनुसार मनुष्य-जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो; न दोषों का अंत है, न सुधारों का।

मेरी समझ मेरे विचार

1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

उत्तरगार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें मन में उमंग और हृदय में स्फूर्ति उठती है तथा भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं; उस समय विषय की चिंता नहीं रहती।इसके विपरीत लेखक (बख्शी जी) कहते हैं कि उन्होंने ऐसी स्थिति का अनुभव ही नहीं किया; उन्हें तो सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तभी वे एक निबंध लिख पाते हैं।अर्थात् गार्डिनर के लिए लेखन सहज एवं स्वतःस्फूर्त है, जबकि लेखक के लिए यह परिश्रमसाध्य कार्य है।

2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तरतरुण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे भविष्य के सपनों और क्रांति को शीघ्र वर्तमान में लाना चाहते हैं; उन्हें परिवर्तन की जल्दी रहती है।वृद्ध वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे अतीत के गौरव को याद करते हैं और उसी को वर्तमान में देखना चाहते हैं; उन्हें परंपरा से लगाव होता है।इस प्रकार तरुण की असंतुष्टि भविष्य की चाह से तथा वृद्ध की असंतुष्टि अतीत के मोह से जुड़ी होती है, और इसी टकराव से वर्तमान सदैव सुधारों का काल बना रहता है।

3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

उत्तरनमिता चाहती है कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ पर निबंध लिखें और अमिता का आग्रह है कि वे ‘समाज-सुधार’ पर लिखें।कठिनाइयाँ – (क) दोनों विषयों पर पाँच-पाँच पेज लिखना कठिन था;(ख) समाज-सुधार पर बड़े विद्वानों में भी मतभेद होने से उसे संक्षेप में लिखना कठिन था;(ग) पहले से तैयारी या पुस्तकालय में अनुसंधान का समय नहीं था और न वहाँ कोई विश्वकोश या ग्रंथ उपलब्ध था;(घ) उन्हें केवल दो घंटों में दो आदर्श निबंध तैयार करने थे।अंततः उन्होंने अमीर खुसरो की पद्धति अपनाकर दोनों विषयों को एक ही निबंध में समाहित कर दिया।

4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

उत्तरआचार्यों की युक्तियाँ – (क) निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है;(ख) निबंध के दो प्रधान अंग हैं – सामग्री और शैली;(ग) पहले सामग्री एकत्र कर मनन करना चाहिए;(घ) लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए;(ङ) भाषा में प्रवाह हो, वाक्य छोटे पर परस्पर संबद्ध हों तथा अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियों का समावेश हो।मेरी तैयारी (संभावित): मैं पहले विषय पर सोचता हूँ, मुख्य बिंदु एकत्र करता हूँ, एक रूपरेखा (भूमिका, विस्तार, उपसंहार) बनाता हूँ और फिर क्रमवार सरल भाषा में निबंध लिखता हूँ।

5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

उत्तरजो कुछ हम देखते, सुनते और अनुभव करते हैं, वही निबंध की सच्ची एवं मौलिक सामग्री बनती है।इससे लेखन में सच्चाई, ताजगी और जीवंतता आती है तथा विचार स्वाभाविक एवं प्रभावशाली बनते हैं।अनुभव से लिखा गया निबंध लेखक के सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति होता है, जो पाठक के हृदय को सीधे छू लेता है। अतः देखना, सुनना और अनुभव करना अच्छे निबंध-लेखन का आधार है।

भाव-विस्तार

पाठ से चुने गए वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए।

1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”

भाव-विस्तारजिन युवाओं ने अभी जीवन के संघर्ष और कठिनाइयों का सामना नहीं किया, उन्हें संसार बहुत सुंदर और आकर्षक लगता है। दूरी के कारण उन्हें यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता, इसलिए उनके मन में संसार की मनमोहक कल्पना बनी रहती है।

2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”

भाव-विस्तारसमाज में समय-समय पर नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं, इसलिए हर युग में सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। जो कल सुधार थे, वे आज दोष बन जाते हैं और उनका फिर नया सुधार किया जाता है। यही निरंतर सुधार की प्रक्रिया जीवन को प्रगतिशील बनाए रखती है।

3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”

भाव-विस्तारसमय के साथ हर पीढ़ी बदलती है। आज के युवा, जो भविष्य के सपने देखते हैं, कल वृद्ध होकर अपने बीते हुए समय को गौरवपूर्ण मानेंगे और उसी की स्मृति में सुख पाएँगे। यह पीढ़ियों का स्वाभाविक क्रम है।

4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”

भाव-विस्तारछोटे निबंध में विचार सुगठित, स्पष्ट और प्रभावशाली रहते हैं तथा उसकी रचना-सुंदरता बनी रहती है। बड़े निबंध में अनावश्यक विस्तार से रोचकता और कसावट कम हो जाती है। अतः संक्षिप्त किंतु सारगर्भित निबंध अधिक अच्छा माना जाता है।

मेरा अनुभव / समाज-सुधार (गतिविधि-आधारित प्रश्न)

मेरा अनुभव: आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?

उत्तर (संभावित)मुझे अपने जीवन से जुड़े विषयों – जैसे ‘मेरा प्रिय त्योहार’ या ‘मेरी पाठशाला’ – पर लिखना सरल लगा, क्योंकि उनके बारे में मेरे पास अपने अनुभव और जानकारी थी।इसके विपरीत ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर विषय कठिन लगे, क्योंकि उनके लिए अधिक अध्ययन, सोच और तथ्यों की आवश्यकता होती है। (विद्यार्थी अपने अनुभव से लिखें।)

1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।

उत्तर (संकेत)बुद्धदेव – अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश; जाति-भेद का विरोध।महावीर स्वामी – अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांत; जैन धर्म का प्रसार।शंकराचार्य – अद्वैत वेदांत का प्रचार; चार मठों की स्थापना द्वारा सांस्कृतिक एकता।कबीर एवं नानक – जाति-पाँति और आडंबर का विरोध, मानव-एकता तथा भक्ति का संदेश।(विद्यार्थी पुस्तकालय/इंटरनेट से और जानकारी जोड़ें।)

2. हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, दिव्यांगजन आदि के लिए कार्य करती हैं। ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर (संकेत)यह जानकारी एकत्र करने वाला कार्य है। उदाहरण – स्त्री-शिक्षा हेतु कार्य करने वाली संस्थाएँ, पर्यावरण-संरक्षण के लिए सक्रिय संगठन तथा दिव्यांगजन की सहायता करने वाले संस्थान।विद्यार्थी अपने क्षेत्र के ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के नाम और उनके कार्यों का विवरण लिखें।

3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।

उत्तर (संभावित)मैं सबके लिए शिक्षा, विशेषकर बालिका-शिक्षा को बढ़ावा देना चाहूँगा।स्वच्छता, पर्यावरण-संरक्षण और जल-बचत के लिए जागरूकता फैलाऊँगा।जाति-भेद, छुआछूत और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का प्रयास करूँगा – इसके लिए शिक्षा, समझाइश और स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना सर्वोत्तम उपाय है।

व्याकरण की बात

समास

निबंध में आए कुछ सामासिक पदों का समास-विग्रह एवं भेद नीचे दिए गए हैं—

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष समास
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष समास
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष समास
रूपरेखारूप की रेखातत्पुरुष समास
विचार-समूहविचारों का समूहतत्पुरुष समास
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष समास
नगर-नगरप्रत्येक नगरअव्ययीभाव समास

उपसर्ग एवं प्रत्यय (वाक्य पूरा कीजिए)

उत्तरनिबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है। (कठिन + आई = कठिनाई – प्रत्यय)वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है। (अ + संतोष = असंतोष – उपसर्ग)वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है। (अ + स्पष्ट + ता = अस्पष्टता; दुर् + बोध + ता = दुर्बोधता)

नए शब्द बनाइए (उपसर्ग/प्रत्यय)

उत्तर (उदाहरण)मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुरसुधार → सुधारक, सुधारना, असुधारसुंदर → सुंदरता, सौंदर्य, असुंदरगति → गतिमान, अगति, प्रगतिसमाज → सामाजिक, समाजसेवी, असामाजिक

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध के लेखक कौन हैं?

उत्तरइस निबंध के लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।

2. लेखक को किन दो विषयों पर निबंध लिखने थे?

उत्तर‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ तथा ‘समाज-सुधार’ – इन दो विषयों पर।

3. आत्मपरक (आधुनिक) निबंध-पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?

उत्तरफ्रांसीसी निबंधकार मानटेन को इस पद्धति का जन्मदाता माना जाता है।

लघु उत्तरीय

4. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ – लेखक ने इसका क्या कारण बताया है?

उत्तरढोल के पास बैठे लोगों के कान उसकी कर्कश ध्वनि से दुखते हैं, पर दूर बैठे व्यक्ति को वही ध्वनि मधुर लगती है, क्योंकि उसकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती।दूरी के कारण यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता, इसलिए दूर की वस्तुएँ सुहावनी प्रतीत होती हैं।

5. अमीर खुसरो की पद्धति को अपनाने से लेखक की कठिनाई कैसे आधी रह गई?

उत्तरखुसरो ने एक ही पद्य में चार भिन्न विषयों (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) को समाहित कर दिया था।इसी पद्धति को अपनाकर लेखक ने अपने दोनों विषयों – ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ – को एक ही निबंध में समेट दिया, जिससे दो अलग निबंध लिखने की कठिनाई आधी रह गई।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरयह आत्मपरक निबंध है, जिसमें लेखक स्वयं पाठकों से संवाद करता हुआ प्रतीत होता है, जिससे यह जीवंत और आत्मीय बन जाता है।भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और रोचक है तथा वाक्य छोटे किंतु परस्पर संबद्ध हैं।लेखक ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों (गार्डिनर, मानटेन, अमीर खुसरो, बाणभट्ट आदि) का प्रभावी प्रयोग किया है।हास्य-व्यंग्य, उदाहरण और लोकोक्ति के सहज प्रयोग से निबंध सरस एवं प्रभावशाली बन गया है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. लेखक को किसके लिए आदर्श निबंध लिखने थे?

(क) नमिता और अमिता के लिए

(ख) अपने संपादक के लिए

(ग) गार्डिनर के लिए

(घ) किसी पत्रिका के लिए

उत्तर(क) नमिता और अमिता के लिए।

2. लेखक के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं?

(क) भूमिका और उपसंहार

(ख) सामग्री और शैली

(ग) शीर्षक और रूपरेखा

(घ) भाव और छंद

उत्तर(ख) सामग्री और शैली।

3. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ क्या है?

(क) मुहावरा

(ख) लोकोक्ति (कहावत)

(ग) अलंकार

(घ) समास

उत्तर(ख) लोकोक्ति (कहावत)।

4. लेखक ने अंततः किस निबंध-पद्धति को अपनाया?

(क) आचार्यों की परंपरागत पद्धति

(ख) रूपरेखा-आधारित पद्धति

(ग) मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति

(घ) गार्डिनर की मानसिक-स्थिति पद्धति

उत्तर(ग) मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।

कारण (R): दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और ध्वनि मधुर प्रतीत होती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): लेखक के अनुसार लिखने के लिए भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं, परिश्रम की आवश्यकता नहीं।

कारण (R): लेखक ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्हें सोचना और परिश्रम करना पड़ता है।

उत्तर(घ) A गलत है (यह विचार गार्डिनर का है, लेखक का नहीं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): समाज में सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

कारण (R): समय के साथ नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और पुराने सुधार भी दोष बन जाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘क्या लिखूँ?’ पाठ किस विधा की रचना है?

यह एक आत्मपरक निबंध है, जिसमें लेखक निबंध की रचना-प्रक्रिया को संवाद-शैली में समझाते हैं।

निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उदाहरण क्यों दिया गया है?

यह दर्शाने के लिए कि निबंध में असली वस्तु लेखक के भाव (हैट) हैं, विषय (खूँटी) केवल आधार है – अर्थात् भाव की प्रधानता है।

लेखक ने अंत में कौन-सी पद्धति अपनाई?

लेखक ने मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति अपनाई और अमीर खुसरो की तरह दोनों विषयों को एक ही निबंध में समाहित कर दिया।

लेखक के अनुसार दूर के ढोल सुहावने क्यों होते हैं?

क्योंकि दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता, इसलिए दूर की वस्तुएँ मधुर एवं सुंदर लगती हैं।

प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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