संवादहीन प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
संवादहीन प्रश्न उत्तर में शेखर जोशी की कहानी के पात्र, ताई का अकेलापन, मिट्ठू से लगाव और स्वतंत्रता का द्वंद्व समझिए। साथ में मूल अभ्यास, भाषा-अध्ययन और खुले कार्यों के नमूने दिए गए हैं।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 45–61। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- लेखक परिचय – शेखर जोशी
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरे प्रश्न (उपयुक्त प्रश्न पहचानिए)
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- कहानी का सौंदर्य — पृष्ठ 54–55
- कहानी का अंत
- समाज और संस्कृति — पृष्ठ 56
- कल्पना, संवाद और रचनात्मक कार्य — पृष्ठ 56–57
- व्याकरण की बात
- समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 59–60
- भाषा संगम — पृष्ठ 60
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लेखक परिचय – शेखर जोशी
शेखर जोशी का जन्म सन् 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनका पहला कहानी संग्रह कोसी का घटवार सन् 1958 में प्रकाशित हुआ। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं – साथ के लोग, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर, डांगरी वाले, मेरा पहाड़ (कहानी संग्रह), एक पेड़ की याद (शब्दचित्र-संग्रह), स्मृति में रहें वे (संस्मरण), मेरा ओलियागाँव (आत्मवृत्त)। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी मध्यवर्गीय समाज के जीवन-मूल्यों तथा कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के संघर्षों को अपनी कहानियों में प्रमुखता से उभारा है। उन्हें ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ तथा ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। सन् 2022 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘संवादहीन’ एक ग्रामीण वृद्धा के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी है। कहानी के दो मुख्य पात्र हैं – ताई और मिट्ठू (तोता)। कभी ताई का बड़ा घर पूत-परिवार, बहू-बेटियों, नौकर-चाकर और गाय-ढोर से भरा-पूरा था, पर समय के साथ बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गईं और सारी संपत्ति धीरे-धीरे पराए हाथों में चली गई। अब उस सूने खंडहर जैसे घर में अकेली ताई रह गईं।
गनपत एक पहाड़ी तोता ले आया, जो ताई के अकेलेपन का सहारा बन गया। ताई की सारी ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ी – वे उसके लिए दाल-भात बनातीं, रोटी बचातीं और उसे राम-राम, सीताराम बोलना सिखातीं। मिट्ठू उनका संवाद-साथी बन गया; उससे बातें करके सूना घर फिर रौनक से भर उठा।
एक बार ताई कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जाने लगीं तो मिट्ठू को जगन मास्टर की पत्नी (मास्टराइन) के पास छोड़ गईं। जगन मास्टर आदर्शवादी और स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे; पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर वे बेचैन हो जाते। उन्होंने कमरा बंद करके मिट्ठू को रोज पिंजरे से बाहर निकालना शुरू किया, और एक दिन मिट्ठू रोशनदान से होकर उड़ गया। जगन मास्टर बहुत पछताए पर मिट्ठू न लौटा।
ताई के लौटने पर सदमे की आशंका से गाँववालों ने गनपत की सलाह पर मिट्ठू जैसा ही एक दूसरा (एवजी) तोता ला रखा। जगन मास्टर उसे भी राम-राम सिखाने का प्रयास करते रहे, पर वह कुछ न बोला। कुंभ-स्नान से लौटकर ताई सीधे जगन मास्टर के घर पहुँचीं, पर एवजी तोता उन्हें देखकर चुप ही रहा। ताई अपने मिट्ठू को पुकारती रह गईं, पर उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में खो चुका था। इस प्रकार कहानी पलायन, अकेलेपन तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ढोर | पालतू गोजातीय पशु, चौपाया, डंगर |
| तकाजा | आवश्यकता, अनुरोध, बार-बार माँगना |
| कुशाग्र | तीव्र बुद्धि, कुश की नोंक जैसा तीक्ष्ण |
| पौ फटना | प्रातःकाल का प्रकाश होना, तड़का होना |
| अचकचाना | भौचक्का होना, चौंक उठना |
| निहाल | प्रसन्न, हर तरह से तृप्त |
| सत्ता | अस्तित्व, अधिकार, प्रभुत्व |
| अतल | अथाह, तलहीन |
| प्रसंग | प्रकरण, संबंध, विषय का तारतम्य |
| रोबीला | प्रभावशाली, रौब वाला |
| तुनकमिजाज | छोटी बातों पर नाराज हो जाने वाला, चिड़चिड़ा |
| वियोग | विछोह, विरह, अभाव |
| साँकल | जंजीर, सिकड़ी, शृंखला |
| टोह | खोज, पता, देखभाल |
| देहरी | दरवाजे की चौखट की निचली लकड़ी |
| मिजाज | स्वभाव, तबीयत, प्रकृति, घमंड |
| प्रायश्चित | पाप का शोधन करने के लिए किया गया कर्म |
| कौतूहलवश | उत्सुकता या जिज्ञासावश |
| मशगूल | कार्यरत, किसी काम में लगा हुआ |
| अर्जन | कमाना, संग्रह करना |
| एवजी | बदले में काम करने वाला, स्थानापन्न |
| आग्नेय | अग्नि से उत्पन्न, अग्नि जैसा (क्रोधभरी दृष्टि) |
| जून | वक्त, वेला, दिन का एक भाग |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद
5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
मेरी समझ मेरे विचार
1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े-से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
मेरे प्रश्न (उपयुक्त प्रश्न पहचानिए)
नीचे दिए गए उत्तर के लिए कौन-सा प्रश्न उपयुक्त है, पहचानिए।
| उत्तर | उपयुक्त प्रश्न |
|---|---|
| ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। | प्रश्न क – ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? |
| ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। | प्रश्न ख – ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? |
| गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। | प्रश्न क – गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? |
| कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। | प्रश्न ख – शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? |
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
5. “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
कहानी का सौंदर्य — पृष्ठ 54–55
पुस्तक के दिए उदाहरणों के अतिरिक्त इन प्रसंगों को चुन सकते हैं।
| बिंदु | दूसरा उदाहरण और प्रभाव |
|---|---|
| चित्रात्मकता | ताई का खिड़की-दरवाजों की साँकलें बार-बार टटोलना उनकी चिंता का दृश्य बनाता है। |
| संवादात्मकता | “जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!” के उत्तर में मिट्ठू का “खुश रहो!” कहना अपनापन दिखाता है। |
| पुनरुक्ति | “मर जा! मर जा! मर जा!” — दोहराव से झुँझलाहट की तीव्रता उभरती है। |
| अतिशयोक्ति | मिट्ठू का आसमान सिर पर उठा लेने की कल्पना उसके शोर और उछल-कूद को बढ़ाकर कहती है। |
| लोकधर्मी भाषा | “दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं” — ग्रामीण बोलचाल से परिवेश बनता है। |
| प्रश्नोत्तर शैली | आरंभ में ताई जीवन-नैया पार होने का प्रश्न करती हैं और मिट्ठू राम-राम कहने का उत्तर देता है। |
कहानी का अंत
मूल अंत किस प्रकार का है?
इसे करुण या दुखांत प्रभाव वाला मुक्त अंत कहना उचित है। नया तोता ताई की पुकार का उत्तर नहीं देता, पर असली मिट्ठू का आगे क्या हुआ और ताई को सच पता चला या नहीं, यह स्पष्ट नहीं किया गया। अकेलेपन और टूटते संवाद का चित्र यथार्थवादी भी है। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे को पूरी तरह बाहर नहीं करतीं; प्रमाण के साथ अपना मत लिखें।
नया अंत — वैकल्पिक नमूना
मास्टराइन ने ताई को बैठाकर धीरे-धीरे घटना बताई। ताई दुखी हुईं, पर जगन मास्टर ने अपनी भूल स्वीकार की। पड़ोसियों ने तय किया कि वे नियमित रूप से उनसे मिलने आएँगे। ताई का दुख तुरंत समाप्त नहीं हुआ, किंतु अब उसे सुनने वाले लोग थे। यह नया कल्पित अंत है; मूल कहानी में ऐसा नहीं होता।
समाज और संस्कृति — पृष्ठ 56
1. मास्टराइन का अपना नाम क्यों नहीं दिया गया?
एक संभव व्याख्या यह है कि ग्रामीण समाज में स्त्रियों को अक्सर पति के नाम या रिश्ते से पहचाना जाता था। कहानी उसी बोलचाल को सामने लाती है। इससे उनके निजी परिचय के पीछे छूटने पर भी विचार होता है। लेखक ने कारण स्पष्ट नहीं बताया; इसे पाठक की व्याख्या मानें। व्यक्ति को उसके अपने नाम से सम्मान देना बेहतर है।
2(क). कुंभ-स्नान: उद्देश्य, पिछला और अगला आयोजन
कुंभ धार्मिक आस्था, स्नान, संत-समागम और सांस्कृतिक परंपरा का आयोजन है। श्रद्धालु इसे पवित्र स्नान मानते हैं। 14 अक्टूबर 2026 को जाँची जानकारी: पिछला प्रमुख कुंभ प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक हुआ। अगला कुंभ नाशिक–त्र्यंबकेश्वर से जुड़ा 2027 का आयोजन है; मुख्य स्नान-दिनों की अंतिम जानकारी संबंधित प्रशासन से जाँचें। वार्षिक माघ मेले को कुंभ का पर्याय न लिखें।
स्रोत: प्रयागराज जिला प्रशासन और नाशिक जिला प्रशासन की कुंभ 2027 सूचना। कहानी के समय को अपने-आप 2025 न मानें।
2(ख). ताई की यात्रा — कल्पित विवरण
मान लें ताई लखनऊ के हमारे मोहल्ले में रहती हैं। वे पड़ोसियों के समूह के साथ पहले से तय रेलगाड़ी से प्रयागराज गईं। टिकट, आवश्यक सामान और ठहरने की व्यवस्था समूह ने पहले कर ली। वे साथ भोजन करतीं और भीड़ में समूह से अलग नहीं होतीं। स्नान तथा दर्शन के बाद तय गाड़ी से लौटीं। प्रस्थान-स्थान और व्यवस्था इस नमूने की कल्पना हैं; पुस्तक इन्हें विस्तार से नहीं बताती।
2(ग). अपने मेले का पाँच इंद्रियों से वर्णन — नमूना
मेले में रंगीन झंडियाँ और सजी दुकानें दिखाई दीं। ढोल और दुकानदारों की पुकार सुनाई देती थी। फूलों तथा पकवानों की सुगंध थी। हाथ में पकड़े मिट्टी के खिलौने की सतह खुरदरी लगी। जलेबी का मीठा स्वाद याद रहा। लोगों में उत्साह और श्रद्धा थी। अपने स्थानीय उत्सव और वास्तविक अनुभव के अनुसार इसे बदलें।
कल्पना, संवाद और रचनात्मक कार्य — पृष्ठ 56–57
1. ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा?
संभव है रोजगार, बच्चों की शिक्षा या दूसरी सुविधाओं के लिए शहर गए हों। उन्हें घर, खेत और ताई से दूर होने की चिंता रही होगी। उन्होंने आय और भविष्य की योजना बनाकर स्वयं को तैयार किया होगा। ये अनुमान हैं—कहानी उनके वास्तविक कारण और मन की बातें स्पष्ट नहीं बताती। पलायन के कारण समझते हुए बुजुर्गों से संवाद बनाए रखना भी आवश्यक है।
2. असली मिट्ठू की वापसी — वैकल्पिक कहानी
एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। मिट्ठू आँगन की डाल पर बैठकर बोला, “राम-राम कहो!” ताई बाहर आईं। पास रखे पिंजरे में नया तोता चुप बैठा था। मिट्ठू ने गर्दन टेढ़ी करके कहा, “खुश रहो!” ताई हँसते-हँसते रो पड़ीं। पड़ोसियों ने सच्चाई बताई और क्षमा माँगी। ताई बोलीं, “अब मुझसे बातें करने भी आया करो।” उस शाम घर में फिर लोगों की आवाजें थीं। यह कल्पित आगे की कथा है, मूल पाठ का अंत नहीं।
3. किसी बड़े या बुजुर्ग से बातचीत
पूछें: आप मेरी उम्र में कौन-से खेल खेलते थे? स्कूल और घर का दिन कैसा था? मित्रों से कैसे मिलते थे? किस अनुभव से सीख मिली? उत्तर उनकी अनुमति से संक्षेप में लिखें। प्रारूप: बातचीत की तिथि, संबंध/परिचय, उनकी बताई दो घटनाएँ, मेरी सीख। उनके वास्तविक अनुभव लिखें; इस गतिविधि का किया हुआ साक्षात्कार गढ़कर न प्रस्तुत करें।
4. मिट्ठू की खोज का विज्ञापन — कल्पित नमूना
मिट्ठू का पता बताइए
जगन मास्टर के घर से एक हरा पहाड़ी तोता उड़ गया है। वह “राम-राम” और “सीताराम” की नकल करता है। दिखाई दे तो पक्षी को परेशान किए बिना किसी जिम्मेदार बड़े को सूचना दें।
संपर्क: जगन मास्टर, [गाँव का नाम]।
यह कक्षा की रचना है; वास्तविक पता या फोन नंबर सार्वजनिक न लिखें।
व्याकरण की बात
जीव-जंतु वाले मुहावरे
ध्वन्यात्मक शब्द
शब्द-युग्म (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग)
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | समय-असमय (विपरीतार्थक) | मिट्ठू वक्त-बेवक्त भोजन का तकाजा करता था। |
| नियम-सिद्धांत | नियम और आदर्श (समानार्थक) | जगन मास्टर ने अपने नियम-सिद्धांत बना रखे थे। |
| शादी-ब्याह | विवाह-संबंधी आयोजन (समानार्थक) | गाँव में शादी-ब्याह की धूम रहती है। |
| तीज-त्योहार | पर्व-उत्सव (समानार्थक) | तीज-त्योहार पर सब परिवार मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। |
खोजबीन शब्दों की (दिए गए अनुच्छेद से)
अर्थ के आधार पर वाक्य (पुस्तक से उदाहरण)
समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 59–60
1. कहानी के रंग — मूक अभिनय
दुख: खाली आसन देखकर चुप बैठना। स्नेह: साथी की बात ध्यान से सुनने और सहारा देने के हावभाव। आजादी: बंद हाथ खोलकर खुले आकाश की ओर देखना। दूसरे समूह भाव पहचानें और बताएँ कि किस संकेत से समझे।
2. पंखों की योजना
कल्पित नमूना: उड़ने का अवसर मिले तो मैं पहाड़, नदी और अपने दूर बसे मित्र का गाँव देखना चाहूँगा। वहाँ के जीवन के बारे में जानूँगा और घर लौटकर अनुभव साझा करूँगा। यह कल्पना का कार्य है; हर समूह अपनी यात्रा और कारण बताए।
3. घर की महिलाओं की भोजन-पसंद
सम्मान से उनकी पसंद पूछें: प्रिय भोजन क्या है? महीने में कितनी बार बनता है? उसे बनाने और परोसने का काम कौन करता है? एक तालिका में उत्तर लिखें और घर के सभी सदस्यों की पसंद तथा जिम्मेदारी बाँटने पर चर्चा करें। उनकी उपेक्षा को त्याग का अनिवार्य आदर्श न बनाएँ; सबकी आवश्यकताएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
मेरी पहेली — मौलिक नमूने
| पहेली | उत्तर |
|---|---|
| हरे पंख, टेढ़ी चोंच, सुनी हुई बोली दोहराऊँ। | तोता |
| सूने बड़े घर में रहती, मिट्ठू से मन की बात कहती। | ताई |
| पवित्र स्नान और संत-समागम का प्रसिद्ध आयोजन। | कुंभ |
| सलाखों का घर कहलाऊँ, पक्षी की उड़ान रोक लगाऊँ। | पिंजरा |
| घर का हिस्सा, दीवारों से घिरा, द्वार से आना-जाना। | कमरा |
| हिमालय से मैदान तक बहती, प्रयाग में यमुना से मिलती। | गंगा |
भाषा संगम — पृष्ठ 60
पुस्तक के नमूने: तोता (हिंदी), शुकः (संस्कृत), पोपट (मराठी), सुगा (नेपाली)। अपनी भाषा का सही शब्द दक्ष वक्ता से जाँचें।
अंग्रेज़ी अनुवाद का नमूना: He had brought a lovely hill parrot from somewhere. अपनी मातृभाषा में वाक्य लिखते समय “न जाने कहाँ से” का भाव बनाए रखें।
अतिरिक्त प्रश्न
यह ClearStudy का अतिरिक्त अभ्यास है, मूल पुस्तक का प्रश्न-संग्रह नहीं।
अति लघु उत्तरीय
1. ‘संवादहीन’ कहानी के लेखक कौन हैं?
2. ताई को मिट्ठू किसने लाकर दिया था?
3. ताई किस तीर्थ पर स्नान के लिए गई थीं?
लघु उत्तरीय
4. मिट्ठू ताई के लिए केवल एक तोता क्यों नहीं था?
5. जगन मास्टर मिट्ठू को पिंजरे से बाहर क्यों निकालते थे और इसका क्या परिणाम हुआ?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘संवादहीन’ कहानी आधुनिक जीवन की किन समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ताई और मिट्ठू किस घर में रहते थे?
(क) जगन मास्टर के घर
(ख) गाँव के बीच स्थित सूने बड़े घर में
(ग) गनपत के घर
(घ) शहर के एक मकान में
2. मिट्ठू कैसे उड़ गया?
(क) ताई ने उसे छोड़ दिया
(ख) पिंजरा टूट गया
(ग) जगन मास्टर के बाहर निकालने पर रोशनदान से होकर
(घ) किसी ने चुरा लिया
3. ‘एवजी मिट्ठू’ का क्या अर्थ है?
(क) असली मिट्ठू
(ख) मिट्ठू के बदले लाया गया दूसरा तोता
(ग) मिट्ठू का बच्चा
(घ) पिंजरे का नाम
4. कहानी में जगन मास्टर किस ग्रंथ का अध्ययन करते दिखाए गए हैं?
(क) रामायण
(ख) गीता-रहस्य
(ग) महाभारत
(घ) वेद
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ताई की सारी ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ी।
कारण (R): ताई अकेली थीं और मिट्ठू उनके अकेलेपन का एकमात्र सहारा बन गया था।
2. अभिकथन (A): जगन मास्टर ने जान-बूझकर मिट्ठू को उड़ा दिया।
कारण (R): वे बंद कमरे में मिट्ठू को पिंजरे से बाहर आने का अवसर देते थे।
3. अभिकथन (A): कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ ताई की अंतिम स्थिति के लिए सार्थक है।
कारण (R): मिट्ठू के खो जाने के बाद ताई का कोई संवाद-साथी नहीं रहता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘संवादहीन’ कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक शेखर जोशी हैं, जो ग्रामीण एवं मध्यवर्गीय जीवन के संवेदनशील चित्रण के लिए जाने जाते हैं।
कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?
कहानी के मुख्य पात्र ताई और मिट्ठू (तोता) हैं; जगन मास्टर और उनकी पत्नी (मास्टराइन) सहायक पात्र हैं।
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों रखा गया है?
क्योंकि मिट्ठू के उड़ जाने के बाद ताई का एकमात्र संवाद-साथी छिन जाता है और एवजी तोता मौन रहता है; इस तरह ताई का जीवन संवादहीन हो जाता है।
कहानी कौन-सी सामाजिक समस्याओं को उजागर करती है?
यह कहानी पलायन, बुजुर्गों का अकेलापन तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व जैसी समकालीन समस्याओं को उजागर करती है।
