कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 2 ‘क्या लिखूँ?’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 2 ‘क्या लिखूँ?’ (लेखक – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी) का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार एवं हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है; निबंध-लेखन के लिए वे विशेष रूप से स्मरणीय हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने (निबंध संग्रह), अश्रुदल, शतदल (काव्य), झलमला, त्रिवेणी (कहानी संग्रह) तथा अनेक आलोचना-ग्रंथ। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। अपने लेखन में उन्होंने अध्यात्म, समाज-सुधार और लोकजीवन को प्रमुखता दी तथा भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सुंदर सामंजस्य दिखाया। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘क्या लिखूँ?’ एक आत्मपरक निबंध है जिसमें लेखक ने निबंध की रचना-प्रक्रिया को रोचक एवं सरल ढंग से समझाया है। लेखक को नमिता और अमिता नाम की दो छात्राओं के लिए दो विषयों – ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’ – पर आदर्श निबंध लिखने थे, ताकि वे निबंध-रचना का रहस्य समझ सकें।
अंग्रेजी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं और विषय गौण हो जाता है – जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है; असली वस्तु तो हैट (भाव) है, खूँटी (विषय) नहीं। किंतु लेखक कहते हैं कि उन्होंने ऐसी स्थिति का अनुभव नहीं किया; उन्हें तो सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तभी निबंध बनता है।
लेखक निबंधशास्त्र के आचार्यों के मत देखते हैं – निबंध छोटा हो, उसके दो अंग (सामग्री और शैली) हों, पहले रूपरेखा बने, भाषा में प्रवाह हो आदि। पर उन्हें यह सब कठिन लगता है। अंततः वे मानटेन की स्वच्छंद, अनुभव-आधारित पद्धति को अपनाते हैं, जिसमें लेखक अपने सच्चे भावों को सीधे अभिव्यक्त करता है। अमीर खुसरो की एक कहानी (जिसमें उन्होंने एक ही पद्य में चारों स्त्रियों की इच्छाओं – खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल – को समाहित कर दिया) से प्रेरित होकर लेखक दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट देते हैं।
निबंध के अंत में लेखक समझाते हैं कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ इसलिए होते हैं क्योंकि दूरी यथार्थ की कठोरता को छिपा देती है। तरुणों को भविष्य उज्ज्वल लगता है और वृद्धों को अतीत सुखद; दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं – इसी कारण हर युग में समाज-सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। न दोषों का अंत है, न सुधारों का – इसी से जीवन प्रगतिशील है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्फूर्ति | फुरती, उत्तेजना, मन में प्रकट होना |
| आवेग | बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की अंतःप्रेरणा, झोंक |
| यथार्थता | सत्य, उचित, वास्तविकता |
| उत्थित | उठा हुआ, उत्पन्न, ऊँचा |
| रहस्य | गुप्त भेद, गोपनीय विषय, मर्म |
| विज्ञ | जानकार, समझदार, विद्वान |
| सम्मति | सहमति, राय, मत |
| अनुसंधान | अन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल |
| विश्वकोश | वह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो |
| दुर्बोधता | जो शीघ्र समझ में न आए, कठिन, गूढ़ |
| गांभीर्य | गंभीरता, गहराई, जटिलता |
| गुत्थी | उलझन, कठिनाई, गाँठ |
| अज्ञ | ज्ञानरहित, नासमझ |
| पद्धति | प्रथा, परिपाटी, प्रणाली, मार्ग |
| पाश्चात्य | पश्चिम का, पश्चिमी |
| आख्यायिका | सिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षाप्रद कथा |
| उदात्त | ऊँचा, महान, श्रेष्ठ, उदार |
| अभिव्यक्ति | व्यक्त या प्रकट होना, प्रकाशन |
| अनुसरण | पीछे चलना, अनुकरण, अनुकूल आचरण |
| समावेश | शामिल होना, मिलना, एकत्र होना |
| संध्या | साँझ, दिन और रात के मेल का समय |
| अंकित | लिखित, चिह्नित, चित्रित |
| कोलाहल | बहुत लोगों के एक साथ बोलने का शोर, हंगामा |
| विषाद | उदासी, अवसाद |
| कलरव | मधुर ध्वनि, कोमल स्वर |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
भाव-विस्तार
पाठ से चुने गए वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए।
1. “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
2. “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
3. “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
4. “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
मेरा अनुभव / समाज-सुधार (गतिविधि-आधारित प्रश्न)
मेरा अनुभव: आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
2. हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, दिव्यांगजन आदि के लिए कार्य करती हैं। ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
व्याकरण की बात
समास
निबंध में आए कुछ सामासिक पदों का समास-विग्रह एवं भेद नीचे दिए गए हैं—
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| निबंध-रचना | निबंध की रचना | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| रूपरेखा | रूप की रेखा | तत्पुरुष समास |
| विचार-समूह | विचारों का समूह | तत्पुरुष समास |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
| नगर-नगर | प्रत्येक नगर | अव्ययीभाव समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय (वाक्य पूरा कीजिए)
नए शब्द बनाइए (उपसर्ग/प्रत्यय)
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध के लेखक कौन हैं?
2. लेखक को किन दो विषयों पर निबंध लिखने थे?
3. आत्मपरक (आधुनिक) निबंध-पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?
लघु उत्तरीय
4. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ – लेखक ने इसका क्या कारण बताया है?
5. अमीर खुसरो की पद्धति को अपनाने से लेखक की कठिनाई कैसे आधी रह गई?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. लेखक को किसके लिए आदर्श निबंध लिखने थे?
(क) नमिता और अमिता के लिए
(ख) अपने संपादक के लिए
(ग) गार्डिनर के लिए
(घ) किसी पत्रिका के लिए
2. लेखक के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से हैं?
(क) भूमिका और उपसंहार
(ख) सामग्री और शैली
(ग) शीर्षक और रूपरेखा
(घ) भाव और छंद
3. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ क्या है?
(क) मुहावरा
(ख) लोकोक्ति (कहावत)
(ग) अलंकार
(घ) समास
4. लेखक ने अंततः किस निबंध-पद्धति को अपनाया?
(क) आचार्यों की परंपरागत पद्धति
(ख) रूपरेखा-आधारित पद्धति
(ग) मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति
(घ) गार्डिनर की मानसिक-स्थिति पद्धति
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।
कारण (R): दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और ध्वनि मधुर प्रतीत होती है।
2. अभिकथन (A): लेखक के अनुसार लिखने के लिए भाव स्वयं उमड़ पड़ते हैं, परिश्रम की आवश्यकता नहीं।
कारण (R): लेखक ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्हें सोचना और परिश्रम करना पड़ता है।
3. अभिकथन (A): समाज में सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
कारण (R): समय के साथ नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और पुराने सुधार भी दोष बन जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘क्या लिखूँ?’ पाठ किस विधा की रचना है?
यह एक आत्मपरक निबंध है, जिसमें लेखक निबंध की रचना-प्रक्रिया को संवाद-शैली में समझाते हैं।
निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उदाहरण क्यों दिया गया है?
यह दर्शाने के लिए कि निबंध में असली वस्तु लेखक के भाव (हैट) हैं, विषय (खूँटी) केवल आधार है – अर्थात् भाव की प्रधानता है।
लेखक ने अंत में कौन-सी पद्धति अपनाई?
लेखक ने मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति अपनाई और अमीर खुसरो की तरह दोनों विषयों को एक ही निबंध में समाहित कर दिया।
लेखक के अनुसार दूर के ढोल सुहावने क्यों होते हैं?
क्योंकि दूरी के कारण ढोल की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता, इसलिए दूर की वस्तुएँ मधुर एवं सुंदर लगती हैं।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
