कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 9 — मैया मैं नहिं माखन खायो प्रश्न उत्तर और भावार्थ

मैया मैं नहिं माखन खायो प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 9 का पद, भावार्थ, ब्रजभाषा के शब्द, सभी मिलान और समय की गणनाएँ पढ़ें। छींका, घरेलू वस्तुओं, दूध से बने पदार्थों और सहपाठियों की सहायता की गतिविधियाँ भी समझें।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 9 रचनाकार: सूरदास विधा: पद (कविता) स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 9 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 94–104, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

कवि परिचय – सूरदास

सूरदास ब्रजभाषा के भक्तिकवि हैं। पुस्तक का परिचय उनका जीवन 15वीं–16वीं शताब्दी के बीच मानता है और ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं पर लिखे पदों का उल्लेख करता है। इस पद में बालक के तर्क और यशोदा की ममता से वात्सल्य भाव उभरता है। निश्चित जन्म-मृत्यु तिथियाँ इस परिचय में नहीं दी गई हैं।

पद (मूल पाठ)

इस पद में नटखट बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।

मैया मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥

मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥

तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥

ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

— सूरदास

भावार्थ

पहली पंक्ति (टेक): बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं – “माँ, मैंने माखन (मक्खन) नहीं खाया।” यही बात पूरे पद की टेक है, जिसे वे बार-बार दोहराकर अपनी बात सिद्ध करना चाहते हैं।

पहला पद: श्रीकृष्ण कहते हैं – सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था। चारों पहर मैं बंसीवट (वट वृक्ष) के पास भटकता रहा और साँझ ढलने पर ही घर लौटा हूँ। फिर मक्खन चुराने का समय मुझे मिला ही कब?

दूसरा पद: मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें (भुजाएँ) भी छोटी हैं; फिर इतनी ऊँचाई पर लटके छींके तक मैं किस प्रकार पहुँच सकता हूँ? असल में ये सब ग्वाल-बाल (साथी बच्चे) मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरदस्ती मेरे मुँह पर मक्खन लगा (पोत) दिया है।

तीसरा पद: माँ, तुम तो मन की बड़ी भोली हो, इसलिए इन साथियों की बातों पर विश्वास कर लिया। लगता है तुम्हारे मन में कोई भेद उत्पन्न हो गया है, जो तुम मुझे पराया (किसी और का जना हुआ) समझने लगी हो।

चौथा पद: रूठकर श्रीकृष्ण कहते हैं – लो, अपनी यह लाठी और कंबल वापस ले लो; तुमने मुझे बहुत नाच नचाया (बहुत परेशान किया)। सूरदास कहते हैं कि बालक की यह भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने श्रीकृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।

सार

‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ महाकवि सूरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध वात्सल्यपूर्ण पद है, जिसमें श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का सजीव चित्रण हुआ है। पद का आरंभ बालक कृष्ण की इसी टेक से होता है कि “माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया।” माखन खाने के आरोप पर श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क प्रस्तुत करते हैं, ताकि स्वयं को निर्दोष सिद्ध कर सकें।

वे कहते हैं कि सवेरे ही माँ ने उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था; चारों पहर वे बंसीवट के पास भटकते रहे और साँझ होने पर ही घर लौटे – फिर मक्खन खाने का अवसर उन्हें मिला कहाँ? दूसरा तर्क वे यह देते हैं कि वे तो छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए इतने ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते। तीसरा तर्क यह कि उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।

अंत में कृष्ण भोलेपन से माँ से कहते हैं कि वे मन की बड़ी भोली हैं जो दूसरों की बातों पर विश्वास कर बैठीं; शायद उनके मन में कोई भेद आ गया है जो वे उन्हें पराया समझने लगी हैं। रूठकर वे अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने को कहते हैं और शिकायत करते हैं कि माँ ने उन्हें बहुत नाच नचाया। बालक के इन भोले एवं रूठे हुए तर्कों को सुनकर माता यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें प्यार से हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। इस पद में बाल-सुलभ चतुराई, माँ का अपार वात्सल्य तथा ब्रजभाषा की मधुरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
मैयामाँ, माता
नहिंनहीं
माखनमक्खन
भोर भयोसवेरा हुआ
गैयनगायों (के)
पाछेपीछे
मधुबनमथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन
मोहिमुझे
पठायोभेज दिया
चार पहरचारों पहर; पूरा दिन (तीन घंटे का एक पहर)
बंसीवटएक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण बंशी बजाकर गायों को बुलाते थे
भटक्योइधर-उधर भटका/घूमा
साँझ परेसंध्या होने पर
बहियनबाँहें, भुजाएँ
छोटोछोटा
छीको / छींकारस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई पर लटकाकर खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती हैं
केहि बिधिकिस प्रकार, किस तरह
ग्वाल-बालग्वालों के बच्चे, कृष्ण के संगी-साथी
बैरशत्रुता, दुश्मनी
बरबसजबरदस्ती, हठपूर्वक
लपटायोलगा/पोत दिया
भोरीभोली, सीधी
पतियायोविश्वास किया, सच मान लिया
जियमन, जी, हृदय
भेदअंतर, गाँठ, भिन्नता का भाव
उपजि हैउत्पन्न हुआ है
परायो जायोपराया (किसी और का) जना हुआ
लकुटि कमरियालाठी और छोटा कंबल (कमली)
बिहँसिहँसकर, मुसकाकर
जसोदायशोदा, श्रीकृष्ण की माता
उर कंठ लगायोहृदय एवं गले से लगा लिया

पाठ से — मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?

• मुझे तुम पराया समझती हो।

• मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।

• मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।

• मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

उत्तर★ मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?यह माखन न खाने का सबसे सीधा तर्क है – श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, अतः ऊँचाई पर लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते, फिर वे मक्खन निकालकर खाते कैसे?

(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?

• गाय चरा रहे थे।

• माखन खा रहे थे।

• मधुबन में भटक रहे थे।

• मित्रों के संग खेल रहे थे।

उत्तर★ गाय चरा रहे थे। (साथ ही ★ मधुबन में भटक रहे थे।)प्रसंग और पुस्तक के आरंभिक चित्र में मटकी से माखन लेने का दृश्य है। कृष्ण बाद में गाय चराने और बंसीवट में भटकने की बात अपनी सफाई में कहते हैं। प्रश्न माँ के आने से पहले के प्रसंग का है; उनके दिए तर्क को वास्तविक घटना मानकर दो विकल्प न चुनें।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने पद के शब्दों एवं भाव को आधार बनाया। पहला उत्तर इसलिए चुना क्योंकि ‘मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो’ पंक्ति स्पष्ट कहती है कि छोटे हाथ छींके तक नहीं पहुँच सकते।दूसरा उत्तर इसलिए चुना क्योंकि ‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो’ पंक्ति बताती है कि कृष्ण सवेरे से ही गाय चराने वन में थे। चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुने गए शब्दों का उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलान कीजिए।

शब्दसही अर्थ या संदर्भ
1. जसोदायशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2. पहरसमय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)।
3. लकुटि कमरियालाठी और छोटा कंबल/कमली (कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे)।
4. बंसीवटएक वट वृक्ष (कृष्ण इसी पर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को बुलाते थे)।
5. मधुबनमथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6. छीकोगोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई से लटकाया जाता है ताकि खाने-पीने की चीज़ों को कुत्ते-बिल्ली न पा सकें।
7. माताजन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8. ग्वाल-बालगाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी-साथी।
सही मिलान1 → यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ2 → तीन घंटे का एक पहर (समय की इकाई)3 → लाठी और छोटा कंबल/कमली4 → एक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण वंशी बजाते थे5 → यमुना किनारे का एक वन6 → रस्सियों का बुना लटकता हुआ जाल (छींका)7 → जननी, माँ8 → ग्वालों के बच्चे, कृष्ण के साथी

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”

अर्थ/विचारइस पंक्ति में श्रीकृष्ण माँ से कहते हैं कि सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था।यहाँ कृष्ण यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे सुबह से ही घर से बाहर वन में गाय चरा रहे थे, इसलिए घर में रखे मक्खन को चुराकर खाने का अवसर उन्हें मिला ही नहीं।

(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”

अर्थ/विचारसूरदास कहते हैं कि बालक कृष्ण की भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।यह पंक्ति माँ के वात्सल्य (ममता) को दर्शाती है – माँ बालक की चतुराई पर क्रोधित होने के बजाय उसके भोलेपन पर मुग्ध होकर उसे गले से लगा लेती है।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर लिखिए।

(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?

उत्तरपद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में कई बातें बताई हैं – (1) वे सवेरे ही गायों के पीछे मधुबन चले गए थे और साँझ ढले घर लौटे; (2) वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँच सकते; (3) उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।इन सब तर्कों के द्वारा वे यह सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने मक्खन नहीं खाया और वे निर्दोष हैं।

(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?

उत्तरयशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए इसलिए गले से लगा लिया क्योंकि बालक कृष्ण के भोले-भाले तर्क एवं रूठने का अंदाज़ बहुत प्यारा एवं मनोहारी था।माँ समझ गईं कि कृष्ण ने ही माखन खाया है, फिर भी उसकी बाल-सुलभ चतुराई एवं मासूमियत पर उन्हें क्रोध के बजाय अपार स्नेह उमड़ आया। यही माँ का सच्चा वात्सल्य है, जो बच्चे की शरारतों में भी प्रेम ढूँढ़ लेता है।

कविता की रचना

“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों ‘पठायो’ और ‘आयो’ की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है।

(क) इस पाठ को फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पद की विशेषताओं की सूची बनाइए (जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है)।

उत्तर (पद की विशेषताएँ)1. पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का सुंदर तुक मिलता है (खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो)।2. पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम ‘सूरदास’ दिया है, जिसे कवि की ‘छाप’ कहते हैं।3. पूरा पद मधुर ब्रजभाषा में रचा गया है।4. इसमें श्रीकृष्ण की बाल-लीला एवं माँ के वात्सल्य का सजीव वर्णन है।5. टेक ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का केंद्रीय भाव बार-बार उभारती है।6. यह गेय (गाया जाने वाला) पद है, इसमें लय एवं संगीतात्मकता है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तरयह कक्षा में करने वाली गतिविधि है। प्रत्येक समूह अपनी बनाई सूची कक्षा में पढ़कर सुनाए; इस प्रकार सभी समूहों की खोजी हुई विशेषताएँ मिलकर पद की एक पूरी सूची तैयार हो जाएगी और सबकी समझ और गहरी होगी।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?

उत्तरश्रीकृष्ण अपनी माँ को तर्क इसलिए दे रहे होंगे क्योंकि वे माखन खाने के आरोप और संभावित डाँट से बचना चाहते होंगे। यह प्रश्न अनुमान का है; पद में पकड़े जाने की अलग घटना का वर्णन नहीं है।बालक होने के कारण वे स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने के लिए भोले-भाले बहाने एवं तर्क गढ़ रहे हैं, ताकि माँ उन पर विश्वास कर लें और उन्हें माफ़ कर दें।

(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?

उत्तर (कल्पना)जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया होगा, तब कृष्ण का रूठना तुरंत दूर हो गया होगा और वे भी मुसकरा दिए होंगे।माँ का प्यार पाकर वे खुश हो गए होंगे और शायद माँ की गोद में बैठकर फिर से अपनी मीठी बातें करने लगे होंगे। घर का वातावरण प्रेम एवं हँसी-खुशी से भर गया होगा।

शब्दों के रूप

(क) अपने रूप में लिखिए

पद में ‘पाछे’ (पीछे) जैसे कई शब्द अलग रूप में लिखे गए हैं। नीचे दिए शब्दों को आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, वैसे लिखिए।

पद का शब्दआपके बोलने/लिखने का रूप
परेपड़े; ‘साँझ परे’ में ‘साँझ होने पर’
छोटोछोटा
बिधिविधि / तरह
भोरीभोली
कछुकुछ
लैलेकर / ले
नहिंनहीं

(ख) स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 में दिए अर्थों से मिलान कीजिए

स्तंभ 1 (शब्द)स्तंभ 2 (अर्थ)
1. उपजिउपजना, उत्पन्न होना
2. जानिजानकर, समझकर
3. जायोजन्मा
4. जियमन, जी
5. पठायोभेज दिया
6. पतियायोविश्वास किया, सच माना
7. बहियनबाँह, हाथ, भुजा
8. बिधिप्रकार, भाँति, रीति
9. बिहँसिमुसकाई, हँसी
10. भटक्योइधर-उधर घूमा या भटका
11. लपटायोमला, लगाया, पोता
सही मिलान1-उपजना/उत्पन्न होना; 2-जानकर, समझकर; 3-जन्मा; 4-मन, जी; 5-भेज दिया; 6-विश्वास किया, सच माना; 7-बाँह, हाथ, भुजा; 8-प्रकार, भाँति, रीति; 9-मुसकाई, हँसी; 10-इधर-उधर घूमा/भटका; 11-मला, लगाया, पोता।

वर्ण-परिवर्तन

भोरी → भोली और लकुटि → लकुटी/लकड़ी उदाहरण हैं। लकड़ी से तुलना में ‘र’/‘ड़’ का परिवर्तन तथा रूपांतरण दिखता है। ‘बैर परे’ → ‘बैर पड़े’ में भी ‘र’/‘ड़’ का अंतर है; ‘साँझ परे’ का अर्थ ‘साँझ होने पर’ है। सभी संदर्भों में ‘परे’ को एक ही अर्थ से न बदलें।

पंक्ति से पंक्ति

स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भावार्थ)
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
सही मिलान1 → सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।2 → चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।3 → मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?4 → ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।5 → माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।6 → तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

आपकी बात — व्यक्तिगत नमूना

मेरी किताब गायब होने पर मित्र ने सोचा कि मैंने उसकी किताब उठा ली। मैंने अपनी किताब पर लिखा नाम दिखाया और मिलकर उसकी किताब खोजने में मदद की। बाद में वह दूसरी मेज़ पर मिली। अपने साथ हुई वास्तविक घटना, सामने मौजूद व्यक्ति और अपने तर्क लिखें; नमूने को अपनी घटना न बताएं।

घर की वस्तुएँ — छींका और चित्रों के नाम

छींका रस्सी का बुना हुआ लटकता जाल है, जिसमें पात्र रखकर खाने-पीने की चीज़ें ऊँचाई पर रखी जाती थीं। यह भोजन को ठंडा रखने वाला रेफ्रिजरेटर नहीं है।

रस्सी के बुने छींके में रखा और लकड़ी की बल्ली से लटका मिट्टी का पात्र
छींका: पात्र को ऊँचाई पर रखने वाला रस्सियों का बुना जाल। AI से बनाया मौलिक अवधारणात्मक चित्र; पुस्तक के चित्र की प्रतिलिपि नहीं।

पुस्तक के चित्रों में बाएँ से दाएँ, ऊपर से नीचे:

  1. घड़ा/मटका (चित्र में धातु का पात्र)
  2. कोयले से गरम होने वाली इस्त्री
  3. चौकी/पाटा
  4. सिलाई मशीन
  5. खाट/चारपाई
  6. बरनी/भंडारण का जार
  7. सूप—अनाज साफ करने के लिए
  8. सिल-बट्टा—पीसने के लिए
  9. हाथ की चक्की
  10. हाथ-पंखा
  11. रई/मथानी
  12. छलनी
  13. ढक्कन वाली बाँस की पिटारी
  14. ओखली-मूसल
  15. दही मथने का मटका और मथानी की व्यवस्था

स्थानीय नाम अलग हो सकते हैं; परिजन से पूछकर अपनी भाषा का नाम भी लिखें।

दूध से घी बनाने की प्रक्रिया

  1. स्वच्छ पात्र में दूध उबालें और उसे गुनगुना होने दें।
  2. थोड़ा जामन मिलाकर दही जमने दें। जमने का समय मौसम और तापमान से बदलता है।
  3. दही को मथें; मक्खन अलग करके निकालें। बचा तरल छाछ होता है।
  4. मक्खन को धीमी आँच पर गरम करने से पानी वाष्पित होता है और दूध के ठोस अंश अलग होते हैं। तैयार घी छानकर साफ पात्र में रखें।

यह पाठ के पारंपरिक तरीके की व्याख्या है। गरम दूध और चूल्हे का काम वयस्क करें; बच्चे देखे गए चरणों का वर्णन लिखें।

समय का माप

(क) पल, क्षण, घंटा, सुबह, दोपहर, शाम, रात, कल, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, ऋतु, वर्ष, दशक, शताब्दी, वेला और अवधि। कुछ निश्चित इकाइयाँ हैं, कुछ समय-संबंधी संकेत।

(ख) कृष्ण के कथन के अनुसार चार पहर: 4 × 3 = 12 घंटे। यह पुस्तक की समय-गणना है। (ग) शाम 6 बजे से 12 घंटे पीछे: सुबह 6 बजे। (घ) दोपहर 12 बजे तक दो पहर अर्थात छह घंटे मानें तो पहले पहर का आरंभ सुबह 6 बजे; पहला 6–9 और दूसरा 9–12। स्थानीय सूर्योदय हर दिन ठीक 6 बजे होने का दावा नहीं है।

हम सब विशेष हैं — छह सहायता-स्थितियाँ

(क) अपनी, किसी परिजन, शिक्षक और मित्र की वास्तविक क्षमताएँ लिखें। नमूने: मुझे चित्र बनाना आता है; मेरे परिजन संगीत जानते हैं; शिक्षक कठिन विषय समझाते हैं; मित्र योजनाबद्ध ढंग से काम करता है। किसी एक प्रकार की क्षमता को सब पर लागू न करें।

  1. पढ़ सकता है पर पाठ नहीं समझता: सरल उदाहरण दें, उसके प्रश्न सुनें और शिक्षक की मदद लें।
  2. पढ़ना पसंद करता है पर देख नहीं सकता: उसकी पसंद पूछकर पाठ पढ़कर सुनाएं या सुलभ ऑडियो/ब्रेल सामग्री दिलाने में मदद करें।
  3. जल्दी बोलता है और भाषण देना है: विराम लेकर बोलने का अभ्यास साथ करें।
  4. अटककर बोलता है: धैर्य से सुनें, वाक्य पूरा करने का अवसर दें और मज़ाक न करें।
  5. चलने में कठिनाई है और खेलना चाहता है: साथ मिलकर खेल के नियम और स्थान अनुकूल बनाएं; आवश्यक सहारा उसकी सहमति से दें।
  6. सुनने में कठिनाई है: उसकी पसंद के अनुसार सामने देखकर बात करें, लिखित निर्देश या संकेतों का उपयोग करें और शिक्षक से सुलभ व्यवस्था की मदद लें।

आज की पहेली — दूध से बने पदार्थ

पुस्तक के परिशिष्ट (पृष्ठ 165) की सूची: खोया, पनीर, मिठाई, छाछ, लस्सी, मक्खन, शरबत और आइसक्रीम।

चित्र और दिए आरंभिक अक्षरों से पूरक नाम: दही, मलाई और घी भी पहेली में पहचाने जाते हैं। “द” से दही लिखें; दूध इस प्रश्न में मूल सामग्री है, उससे बनी वस्तु नहीं। “म” से मक्खन और मलाई दोनों मिलते हैं।

शब्द लिखने के उदाहरण: खो–या, द–ही, म–क्ख–न, म–ला–ई, प–नी–र, छा–छ, मि–ठा–ई, श–र–ब–त, आ–इ–स–क्री–म। संयुक्त अक्षर और मात्रा संबंधित अक्षर के साथ रखें।

परिशिष्ट की सूची में सभी ग्यारह चित्र अलग-अलग नहीं गिनाए गए हैं; ऊपर तीन पूरक नाम चित्र और प्रारंभिक अक्षरों के आधार पर दिए हैं। यहाँ शरबत, मिठाई और आइसक्रीम के दूध वाले प्रकार का संदर्भ है; उनके हर प्रकार में दूध होना आवश्यक नहीं।

खोजबीन के लिए

पुस्तकालय में सूरदास के अन्य पद खोजें, जैसे ‘मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो’। रचना और स्रोत का नाम लिखें, ब्रजभाषा के शब्दों का अर्थ समझें और शिक्षक के साथ सुनाएं।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं और वे किसके लिए प्रसिद्ध हैं?

उत्तरइस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं। वे ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं एवं भक्ति का मनोहारी वर्णन करने के लिए प्रसिद्ध हैं। दृष्टिबाधित होते हुए भी उनकी कल्पना-शक्ति अद्भुत थी।

2. श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के कौन-कौन से तर्क दिए?

उत्तरश्रीकृष्ण ने कहा कि वे सवेरे से ही गाय चराने मधुबन गए थे; वे छोटे बालक हैं इसलिए ऊँचे छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँच सकते; तथा ग्वाल-बालों ने ही बैर के कारण जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।

3. ‘छींका’ क्या होता है और इसका क्या उपयोग था?

उत्तरछींका रस्सियों से बुना हुआ एक जाल होता है, जिसे छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता था। इसमें दूध, दही, मक्खन आदि खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती थीं, ताकि कुत्ते-बिल्ली उन तक न पहुँच सकें।

4. पद के अंत में माता यशोदा की क्या प्रतिक्रिया रही?

उत्तरपद के अंत में बालक कृष्ण के भोले एवं रूठे हुए तर्क सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को क्रोधित होने के बजाय प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया। यह उनके वात्सल्य को दर्शाता है।

5. इस पद में किस भाव (रस) की प्रधानता है?

उत्तरइस पद में वात्सल्य भाव (वात्सल्य रस) की प्रधानता है। इसमें बालक श्रीकृष्ण की भोली बाल-लीला तथा माँ यशोदा के अपार स्नेह एवं ममता का सजीव चित्रण हुआ है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पद में महाकवि सूरदास ने बालक श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का चित्रण किया है। माखन चुराकर खाते हुए पकड़े जाने पर कृष्ण माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क देकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।वे कहते हैं कि वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, छोटे होने के कारण ऊँचे छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और साथी ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया। वे माँ को भोली बताकर उलाहना भी देते हैं। बालक की इन प्यारी बातों पर माँ हँसकर उसे गले से लगा लेती है। इस प्रकार पद का मूल भाव बाल-सुलभ चतुराई एवं माँ का अपार वात्सल्य है।

7. इस पद के आधार पर श्रीकृष्ण के बाल-स्वभाव की विशेषताएँ बताइए।

उत्तरइस पद में श्रीकृष्ण का बाल-स्वभाव अत्यंत मनोहारी रूप में प्रकट हुआ है। वे नटखट एवं शरारती हैं, जो छींके से माखन चुराकर खाते हैं। पकड़े जाने पर वे चतुर भी हैं – एक के बाद एक भोले-भाले तर्क गढ़कर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।वे भावुक भी हैं – माँ द्वारा अविश्वास किए जाने पर रूठ जाते हैं और अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने की बात करते हैं। उनकी बातों में मासूमियत, हठ एवं प्रेम तीनों झलकते हैं। यही बाल-सुलभ भोलापन एवं चतुराई पाठक के हृदय को छू लेती है तथा माँ यशोदा को भी क्रोध के बजाय स्नेह से भर देती है।

8. इस पद में माँ के वात्सल्य का चित्रण किस प्रकार हुआ है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस पद में माँ यशोदा के वात्सल्य (ममता) का सुंदर चित्रण हुआ है। यद्यपि कृष्ण ने ही माखन चुराकर खाया है और झूठे तर्क दे रहे हैं, फिर भी माँ उन पर क्रोधित नहीं होतीं।पद के अंत में “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो” पंक्ति में माँ का प्रेम चरम पर पहुँच जाता है – बालक के भोले एवं रूठे तर्कों को सुनकर वे हँस पड़ती हैं और उसे प्रेमपूर्वक हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। यही सच्चा वात्सल्य है, जो बच्चे की शरारतों एवं भूलों में भी प्रेम ही खोज लेता है। माँ का यह निःस्वार्थ स्नेह पद को हृदयस्पर्शी बना देता है।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?

(क) तुलसीदास

(ख) सूरदास

(ग) कबीरदास

(घ) रहीम

उत्तर(ख) सूरदास।

2. इस पद में बालक कौन है?

(क) श्रीराम

(ख) श्रीकृष्ण

(ग) बलराम

(घ) नंदलाल का मित्र

उत्तर(ख) श्रीकृष्ण।

3. ‘मधुबन’ क्या है?

(क) एक नदी

(ख) एक पर्वत

(ग) यमुना किनारे का एक वन

(घ) एक गाँव

उत्तर(ग) यमुना किनारे का एक वन।

4. ‘छीको’ (छींका) का प्रयोग किसलिए होता था?

(क) कपड़े सुखाने के लिए

(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए

(ग) गाय बाँधने के लिए

(घ) झूला झूलने के लिए

उत्तर(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए।

5. श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने पहर गाय चराते थे?

(क) एक पहर

(ख) दो पहर

(ग) चार पहर

(घ) आठ पहर

उत्तर(ग) चार पहर।

6. एक पहर लगभग कितने घंटे का होता है?

(क) एक घंटा

(ख) दो घंटे

(ग) तीन घंटे

(घ) छह घंटे

उत्तर(ग) तीन घंटे।

7. कृष्ण के अनुसार उनके मुँह पर मक्खन किसने लगाया?

(क) माँ यशोदा ने

(ख) स्वयं उन्होंने

(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती

(घ) नंद बाबा ने

उत्तर(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती।

8. ‘भोरी’ शब्द का अर्थ है—

(क) भोली, सीधी

(ख) चालाक

(ग) क्रोधी

(घ) दुखी

उत्तर(क) भोली, सीधी।

9. पद के अंत में माता यशोदा ने क्या किया?

(क) कृष्ण को डाँटा

(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया

(ग) कृष्ण को दंड दिया

(घ) घर से बाहर भेज दिया

उत्तर(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया।

10. पद की अंतिम पंक्ति में कवि का नाम (छाप) क्या आया है?

(क) कृष्णदास

(ख) सूरदास

(ग) नंददास

(घ) रसखान

उत्तर(ख) सूरदास।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ग), 7-(ग), 8-(क), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छींके तक नहीं पहुँच सकते।

कारण (R): वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): माता यशोदा ने कृष्ण को कठोर दंड दिया।

कारण (R): बालक कृष्ण की भोली बातें सुनकर माँ हँस पड़ीं और उन्हें गले से लगा लिया।

उत्तर(घ) A गलत है (माँ ने दंड नहीं दिया, बल्कि प्रेम से गले लगाया), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): यह पद वात्सल्य भाव से परिपूर्ण है।

कारण (R): इसमें बालक कृष्ण की लीला एवं माँ के स्नेह का सजीव चित्रण है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम दिया है।

कारण (R): पद के अंत में ‘सूरदास’ शब्द कवि की छाप के रूप में आया है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण ने सच-सच मान लिया कि उन्होंने माखन खाया है।

कारण (R): ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कहकर वे बार-बार स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (कृष्ण माखन खाना स्वीकार नहीं करते, बल्कि नकारते हैं), जबकि R सही है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(घ), 3-(क), 4-(क), 5-(घ)

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • पद के कठिन ब्रज शब्दों के अर्थ (जैसे – मोहि, पठायो, बहियन, बिधि, पतियायो) याद रखें; अर्थ पूछे जाने पर सीधे लिख सकें।
  • पद की अंतिम पंक्ति में आई कवि की ‘छाप’ (सूरदास) एवं इसमें व्याप्त ‘वात्सल्य भाव’ अवश्य लिखें।
  • ‘चार पहर’ जैसे समय-संबंधी प्रश्न में गणना (4 × 3 = 12 घंटे) दिखाकर उत्तर लिखें।
  • भावार्थ लिखते समय श्रीकृष्ण के तीनों तर्कों (गाय चराना, छोटे हाथ, ग्वाल-बालों का बैर) को क्रम से लिखें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • ‘मधुबन’ को नगर या नदी समझ लेना – यह यमुना किनारे का वन है।
  • पद के ब्रज शब्दों को बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों ही लिखें।
  • ‘नहिं’, ‘मोहि’, ‘केहि’ जैसे शब्दों में मात्रा की गलती करना।
  • माँ की प्रतिक्रिया को क्रोध बताना – माँ ने हँसकर प्रेम से गले लगाया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?

इस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं, जो ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के मनोहारी वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं।

इस पद का मुख्य भाव क्या है?

इस पद का मुख्य भाव वात्सल्य है – माखन चुराने पर पकड़े जाने पर बालक श्रीकृष्ण भोले तर्कों से स्वयं को निर्दोष सिद्ध करते हैं और माँ यशोदा उन्हें प्रेम से गले लगा लेती हैं।

श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

उन्होंने कहा – वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, वे छोटे हैं इसलिए छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया।

‘चार पहर’ का अर्थ कितने घंटे है?

एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर का अर्थ लगभग 12 घंटे (पूरा दिन) है।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।

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