कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 9 – मैया मैं नहिं माखन खायो (पद) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 9 ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ (रचनाकार – महाकवि सूरदास) का पूरा समाधान देता है – पद का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
कवि परिचय – सूरदास
यह पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। सूरदास ने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं और इतनी सुंदर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन मिलता है। ये कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के कारण वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी कल्पना-शक्ति एवं काव्य-रचना की कुशलता अद्भुत थी। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी।
पद (मूल पाठ)
इस पद में नटखट बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
— सूरदास
भावार्थ
पहली पंक्ति (टेक): बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं – “माँ, मैंने माखन (मक्खन) नहीं खाया।” यही बात पूरे पद की टेक है, जिसे वे बार-बार दोहराकर अपनी बात सिद्ध करना चाहते हैं।
पहला पद: श्रीकृष्ण कहते हैं – सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था। चारों पहर मैं बंसीवट (वट वृक्ष) के पास भटकता रहा और साँझ ढलने पर ही घर लौटा हूँ। फिर मक्खन चुराने का समय मुझे मिला ही कब?
दूसरा पद: मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें (भुजाएँ) भी छोटी हैं; फिर इतनी ऊँचाई पर लटके छींके तक मैं किस प्रकार पहुँच सकता हूँ? असल में ये सब ग्वाल-बाल (साथी बच्चे) मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरदस्ती मेरे मुँह पर मक्खन लगा (पोत) दिया है।
तीसरा पद: माँ, तुम तो मन की बड़ी भोली हो, इसलिए इन साथियों की बातों पर विश्वास कर लिया। लगता है तुम्हारे मन में कोई भेद उत्पन्न हो गया है, जो तुम मुझे पराया (किसी और का जना हुआ) समझने लगी हो।
चौथा पद: रूठकर श्रीकृष्ण कहते हैं – लो, अपनी यह लाठी और कंबल वापस ले लो; तुमने मुझे बहुत नाच नचाया (बहुत परेशान किया)। सूरदास कहते हैं कि बालक की यह भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने श्रीकृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।
सार
‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ महाकवि सूरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध वात्सल्यपूर्ण पद है, जिसमें श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का सजीव चित्रण हुआ है। पद का आरंभ बालक कृष्ण की इसी टेक से होता है कि “माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया।” माखन चुराकर खाने पर पकड़े जाने पर श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क प्रस्तुत करते हैं, ताकि स्वयं को निर्दोष सिद्ध कर सकें।
वे कहते हैं कि सवेरे ही माँ ने उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था; चारों पहर वे बंसीवट के पास भटकते रहे और साँझ होने पर ही घर लौटे – फिर मक्खन खाने का अवसर उन्हें मिला कहाँ? दूसरा तर्क वे यह देते हैं कि वे तो छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए इतने ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते। तीसरा तर्क यह कि उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।
अंत में कृष्ण भोलेपन से माँ से कहते हैं कि वे मन की बड़ी भोली हैं जो दूसरों की बातों पर विश्वास कर बैठीं; शायद उनके मन में कोई भेद आ गया है जो वे उन्हें पराया समझने लगी हैं। रूठकर वे अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने को कहते हैं और शिकायत करते हैं कि माँ ने उन्हें बहुत नाच नचाया। बालक के इन भोले एवं रूठे हुए तर्कों को सुनकर माता यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें प्यार से हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। इस पद में बाल-सुलभ चतुराई, माँ का अपार वात्सल्य तथा ब्रजभाषा की मधुरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मैया | माँ, माता |
| नहिं | नहीं |
| माखन | मक्खन |
| भोर भयो | सवेरा हुआ |
| गैयन | गायों (के) |
| पाछे | पीछे |
| मधुबन | मथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन |
| मोहि | मुझे |
| पठायो | भेज दिया |
| चार पहर | चारों पहर; पूरा दिन (तीन घंटे का एक पहर) |
| बंसीवट | एक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण बंशी बजाकर गायों को बुलाते थे |
| भटक्यो | इधर-उधर भटका/घूमा |
| साँझ परे | संध्या होने पर |
| बहियन | बाँहें, भुजाएँ |
| छोटो | छोटा |
| छीको / छींका | रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई पर लटकाकर खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती हैं |
| केहि बिधि | किस प्रकार, किस तरह |
| ग्वाल-बाल | ग्वालों के बच्चे, कृष्ण के संगी-साथी |
| बैर | शत्रुता, दुश्मनी |
| बरबस | जबरदस्ती, हठपूर्वक |
| लपटायो | लगा/पोत दिया |
| भोरी | भोली, सीधी |
| पतियायो | विश्वास किया, सच मान लिया |
| जिय | मन, जी, हृदय |
| भेद | अंतर, गाँठ, भिन्नता का भाव |
| उपजि है | उत्पन्न हुआ है |
| परायो जायो | पराया (किसी और का) जना हुआ |
| लकुटि कमरिया | लाठी और छोटा कंबल (कमली) |
| बिहँसि | हँसकर, मुसकाकर |
| जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माता |
| उर कंठ लगायो | हृदय एवं गले से लगा लिया |
पाठ से — मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
• मुझे तुम पराया समझती हो।
• मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
• मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
• मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
• गाय चरा रहे थे।
• माखन खा रहे थे।
• मधुबन में भटक रहे थे।
• मित्रों के संग खेल रहे थे।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुने गए शब्दों का उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलान कीजिए।
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 2. पहर | समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)। |
| 3. लकुटि कमरिया | लाठी और छोटा कंबल/कमली (कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे)। |
| 4. बंसीवट | एक वट वृक्ष (कृष्ण इसी पर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को बुलाते थे)। |
| 5. मधुबन | मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 6. छीको | गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई से लटकाया जाता है ताकि खाने-पीने की चीज़ों को कुत्ते-बिल्ली न पा सकें। |
| 7. माता | जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 8. ग्वाल-बाल | गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी-साथी। |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”
(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर लिखिए।
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
कविता की रचना
“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों ‘पठायो’ और ‘आयो’ की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है।
(क) इस पाठ को फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पद की विशेषताओं की सूची बनाइए (जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है)।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
शब्दों के रूप
(क) अपने रूप में लिखिए
पद में ‘पाछे’ (पीछे) जैसे कई शब्द अलग रूप में लिखे गए हैं। नीचे दिए शब्दों को आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, वैसे लिखिए।
| पद का शब्द | आपके बोलने/लिखने का रूप |
|---|---|
| परे | पड़े |
| छोटो | छोटा |
| बिधि | विधि / तरह |
| भोरी | भोली |
| कछु | कुछ |
| लै | लेकर / ले |
| नहिं | नहीं |
(ख) स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 में दिए अर्थों से मिलान कीजिए
| स्तंभ 1 (शब्द) | स्तंभ 2 (अर्थ) |
|---|---|
| 1. उपजि | उपजना, उत्पन्न होना |
| 2. जानि | जानकर, समझकर |
| 3. जायो | जन्मा |
| 4. जिय | मन, जी |
| 5. पठायो | भेज दिया |
| 6. पतियायो | विश्वास किया, सच माना |
| 7. बहियन | बाँह, हाथ, भुजा |
| 8. बिधि | प्रकार, भाँति, रीति |
| 9. बिहँसि | मुसकाई, हँसी |
| 10. भटक्यो | इधर-उधर घूमा या भटका |
| 11. लपटायो | मला, लगाया, पोता |
वर्ण-परिवर्तन
“तू माता मन की अति भोरी” – ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। इस पद में जिन शब्दों में ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है, उन्हें चुनकर लिखिए।
पंक्ति से पंक्ति
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
| 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात
“मैया मैं नहिं माखन खायो” – यहाँ श्रीकृष्ण सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ कि आपको सिद्ध करना पड़ा कि यह काम आपने नहीं किया? कब? किसके सामने? आपने कौन-से तर्क दिए?
घर की वस्तुएँ — छींका
“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” – ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसका भारत में सैकड़ों वर्षों से उपयोग होता आ रहा है। ऐसी ही कुछ अन्य घरेलू वस्तुओं के नाम लिखिए।
दूध से घी बनाने की प्रक्रिया
श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, दही से मक्खन और मक्खन से घी बनाया जाता है। दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।
समय का माप
(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ की तरह समय बताने के और कौन-कौन से शब्द हैं? सूची बनाइए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे घर से निकले होंगे?
(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय (लगभग 12 बजे)। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
हम सब विशेष हैं
महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी कल्पना-शक्ति एवं काव्य-रचना की कुशलता विशेष थी। हम सभी में कुछ न कुछ विशेष होता है। अपनी, परिजन की, शिक्षक की एवं मित्र की विशेष क्षमताएँ लिखिए।
(ख) सबकी सहायता करने की क्षमता हम सबके पास होती है। बताइए, इस क्षमता से आप अपने सहपाठियों की सहायता कैसे करेंगे?
खोजबीन के लिए
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अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं और वे किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
2. श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के कौन-कौन से तर्क दिए?
3. ‘छींका’ क्या होता है और इसका क्या उपयोग था?
4. पद के अंत में माता यशोदा की क्या प्रतिक्रिया रही?
5. इस पद में किस भाव (रस) की प्रधानता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस पद के आधार पर श्रीकृष्ण के बाल-स्वभाव की विशेषताएँ बताइए।
8. इस पद में माँ के वात्सल्य का चित्रण किस प्रकार हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) कबीरदास
(घ) रहीम
2. इस पद में बालक कौन है?
(क) श्रीराम
(ख) श्रीकृष्ण
(ग) बलराम
(घ) नंदलाल का मित्र
3. ‘मधुबन’ क्या है?
(क) एक नदी
(ख) एक पर्वत
(ग) यमुना किनारे का एक वन
(घ) एक गाँव
4. ‘छीको’ (छींका) का प्रयोग किसलिए होता था?
(क) कपड़े सुखाने के लिए
(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए
(ग) गाय बाँधने के लिए
(घ) झूला झूलने के लिए
5. श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने पहर गाय चराते थे?
(क) एक पहर
(ख) दो पहर
(ग) चार पहर
(घ) आठ पहर
6. एक पहर लगभग कितने घंटे का होता है?
(क) एक घंटा
(ख) दो घंटे
(ग) तीन घंटे
(घ) छह घंटे
7. कृष्ण के अनुसार उनके मुँह पर मक्खन किसने लगाया?
(क) माँ यशोदा ने
(ख) स्वयं उन्होंने
(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती
(घ) नंद बाबा ने
8. ‘भोरी’ शब्द का अर्थ है—
(क) भोली, सीधी
(ख) चालाक
(ग) क्रोधी
(घ) दुखी
9. पद के अंत में माता यशोदा ने क्या किया?
(क) कृष्ण को डाँटा
(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया
(ग) कृष्ण को दंड दिया
(घ) घर से बाहर भेज दिया
10. पद की अंतिम पंक्ति में कवि का नाम (छाप) क्या आया है?
(क) कृष्णदास
(ख) सूरदास
(ग) नंददास
(घ) रसखान
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छींके तक नहीं पहुँच सकते।
कारण (R): वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं।
2. अभिकथन (A): माता यशोदा ने कृष्ण को कठोर दंड दिया।
कारण (R): बालक कृष्ण की भोली बातें सुनकर माँ हँस पड़ीं और उन्हें गले से लगा लिया।
3. अभिकथन (A): यह पद वात्सल्य भाव से परिपूर्ण है।
कारण (R): इसमें बालक कृष्ण की लीला एवं माँ के स्नेह का सजीव चित्रण है।
4. अभिकथन (A): पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम दिया है।
कारण (R): पद के अंत में ‘सूरदास’ शब्द कवि की छाप के रूप में आया है।
5. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण ने सच-सच मान लिया कि उन्होंने माखन खाया है।
कारण (R): ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कहकर वे बार-बार स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- पद के कठिन ब्रज शब्दों के अर्थ (जैसे – मोहि, पठायो, बहियन, बिधि, पतियायो) याद रखें; अर्थ पूछे जाने पर सीधे लिख सकें।
- पद की अंतिम पंक्ति में आई कवि की ‘छाप’ (सूरदास) एवं इसमें व्याप्त ‘वात्सल्य भाव’ अवश्य लिखें।
- ‘चार पहर’ जैसे समय-संबंधी प्रश्न में गणना (4 × 3 = 12 घंटे) दिखाकर उत्तर लिखें।
- भावार्थ लिखते समय श्रीकृष्ण के तीनों तर्कों (गाय चराना, छोटे हाथ, ग्वाल-बालों का बैर) को क्रम से लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘मधुबन’ को नगर या नदी समझ लेना – यह यमुना किनारे का वन है।
- पद के ब्रज शब्दों को बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों ही लिखें।
- ‘नहिं’, ‘मोहि’, ‘केहि’ जैसे शब्दों में मात्रा की गलती करना।
- माँ की प्रतिक्रिया को क्रोध बताना – माँ ने हँसकर प्रेम से गले लगाया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?
इस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं, जो ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के मनोहारी वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं।
इस पद का मुख्य भाव क्या है?
इस पद का मुख्य भाव वात्सल्य है – माखन चुराने पर पकड़े जाने पर बालक श्रीकृष्ण भोले तर्कों से स्वयं को निर्दोष सिद्ध करते हैं और माँ यशोदा उन्हें प्रेम से गले लगा लेती हैं।
श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उन्होंने कहा – वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, वे छोटे हैं इसलिए छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया।
‘चार पहर’ का अर्थ कितने घंटे है?
एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर का अर्थ लगभग 12 घंटे (पूरा दिन) है।
पद एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
