Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 10 Solutions (NCERT 2026–27) – बुद्धिः सर्वार्थसाधिका

This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 10 ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ – a clever story showing how intelligence (बुद्धि) outweighs physical strength – with its मूल पाठ, अन्वय/भावार्थ, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः) along with the धातुरूप / लट्-लकार tables, extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 10 (दशमः पाठः) पाठ: बुद्धिः सर्वार्थसाधिका Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का दशम पाठ ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ (अर्थात् ‘बुद्धि ही सभी प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली है’) एक रोचक नीति-कथा है। कथा का केन्द्रीय भाव यह है कि शरीर-बल की अपेक्षा बुद्धि-बल अधिक महत्त्वपूर्ण है। एक वन के सरोवर में जल पीने आने वाले हाथियों के झुण्ड से वहाँ बिलों में रहने वाले खरगोश कुचलकर घायल एवं मृत हो जाते हैं। चिन्तित खरगोशों का राजा अपनी बुद्धि से एक उपाय सोचता है – वह गजराज को विश्वास दिलाता है कि सरोवर चन्द्रदेव का निवास-स्थान है और खरगोश उसकी प्रजा हैं। जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखकर भयभीत गजराज अपने झुण्ड सहित वहाँ से सदा के लिए चला जाता है। इस प्रकार बिना युद्ध किए, केवल बुद्धि के बल पर खरगोश अपनी रक्षा कर लेते हैं। यह पाठ हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन कार्य भी बुद्धि से सरल हो जाता है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ संस्कृत की प्रसिद्ध कथा-परम्परा (पञ्चतन्त्र-शैली की नीति-कथा) पर आधारित एक गद्य-पाठ है। इसका आरम्भ ही इस भाव से होता है कि संसार में उत्तम जीवन के लिए बुद्धिपूर्वक व्यवहार आवश्यक है; बुद्धिपूर्वक व्यवहार से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। विशेषतः स्पर्धा के समय यदि प्रतिपक्ष अत्यन्त प्रबल हो, तब भी बुद्धि-बल से उसे जीता जा सकता है। शरीर-बल की अपेक्षा बुद्धि-बल का महत्त्व अधिक क्यों है – यही बात यह कथा सिद्ध करती है। कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए यह सरल वर्तमानकालिक (लट्-लकार) क्रियापदों से युक्त सुबोध कथा है, जिसके द्वारा वे संस्कृत-वाक्य-रचना एवं धातुरूप सहज ही सीखते हैं।

मूल पाठ एवं अन्वय (भावार्थ)

(मूल गद्य-पाठ NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक अनुच्छेद का सरल हिन्दी अन्वय/भावार्थ।)

संसारे उत्तमजीवनाय बुद्धिपूर्वकः व्यवहारः आवश्यकः भवति । बुद्धिपूर्वकेण व्यवहारेण कठिनम् अपि कार्यं सहजं भवति । विशेषतः स्पर्धायाः समये यदि प्रतिपक्षः अतीव प्रबलः, तर्हि बुद्धिबलेन वयं तं जेतुं शक्नुमः । शरीरबलात् बुद्धिबलस्य महत्त्वं कथम् अधिकम् इति एषा कथा प्रतिपादयति । एतां कथां वयं पठामः ।
अन्वय / भावार्थसंसार में उत्तम जीवन के लिए बुद्धिपूर्वक किया गया व्यवहार आवश्यक होता है। बुद्धिपूर्वक व्यवहार से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। विशेषकर स्पर्धा (प्रतियोगिता) के समय यदि प्रतिपक्ष अत्यन्त बलवान हो, तब भी हम बुद्धि-बल से उसे जीत सकते हैं। शरीर-बल की अपेक्षा बुद्धि-बल का महत्त्व अधिक कैसे है – यह कथा इसी का प्रतिपादन करती है। आओ, हम इस कथा को पढ़ें।
एकस्मिन् वने एकः नित्यजलपूर्णः महान् सरोवरः अस्ति । कदाचिद् एकं पिपासाकुलं गजयूथं वनान्तरात् तत्र आगच्छति । तस्मिन् सरोवरे ते गजाः स्वेच्छया जलं पीत्वा, स्नात्वा, क्रीडित्वा च सूर्यास्तसमये निर्गच्छन्ति । तस्य च सरोवरस्य तीरे समन्तात् सुकोमलभूमौ बहूनि शशक-बिलानि सन्ति, येषु बहवः शशकाः निवसन्ति । गजानां परिभ्रमणेन तेषु बिलेषु निवसन्तः बहवः शशकाः क्षतविक्षताः भवन्ति, के चन पुनः मृताः अपि भवन्ति । अतः शशकाः भीताः चिन्तामग्नाः च भवन्ति । ते दुःखम् अनुभवन्ति । स्वरक्षार्थं च ते उपायं चिन्तयन्ति ।
अन्वय / भावार्थएक वन में सदा जल से भरा हुआ एक बड़ा सरोवर है। किसी समय एक प्यास से व्याकुल हाथियों का झुण्ड दूसरे वन से वहाँ आता है। उस सरोवर में वे हाथी इच्छानुसार जल पीकर, स्नान करके और खेलकर सूर्यास्त के समय निकल जाते हैं। उस सरोवर के किनारे चारों ओर कोमल भूमि में बहुत-से खरगोशों के बिल हैं, जिनमें बहुत-से खरगोश रहते हैं। हाथियों के घूमने-फिरने से उन बिलों में रहने वाले बहुत-से खरगोश घायल हो जाते हैं, कुछ तो मर भी जाते हैं। इसलिए खरगोश भयभीत और चिन्ता में डूबे रहते हैं। वे दुःख का अनुभव करते हैं और अपनी रक्षा के लिए उपाय सोचते हैं।
एकस्मिन् दिने सायङ्काले तेषां शशकानां सभा भवति । सर्वे शशकाः स्वमतं प्रकाशयन्ति । परं ते समाधानं न प्राप्नुवन्ति । अन्ते शशकराजः वदति– “अहमेव उपायं चिन्तयामि । अधुना वयं सर्वे स्वगृहं गच्छामः ।”
अन्वय / भावार्थएक दिन सायंकाल में उन खरगोशों की सभा होती है। सभी खरगोश अपना-अपना मत प्रकट करते हैं, परन्तु उन्हें कोई समाधान नहीं मिलता। अन्त में खरगोशों का राजा कहता है – “मैं ही उपाय सोचता हूँ। अभी हम सब अपने-अपने घर चलें।”
अन्यस्मिन् दिवसे रात्रौ सः शशकराजः यूथाधिपस्य गजराजस्य समीपं गच्छति । सः गजराजं कथयति– “हे गजराज ! एषः सरोवरः चन्द्रस्य वासस्थानम् अस्ति । वयं शशकाः तस्य प्रजाः स्मः, अत एव सः शशाङ्कः इति नाम्ना प्रसिद्धः । यदा शशकाः जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति ।”
अन्वय / भावार्थदूसरे दिन रात में वह खरगोशों का राजा झुण्ड के स्वामी गजराज के पास जाता है। वह गजराज से कहता है – “हे गजराज! यह सरोवर चन्द्रमा का निवास-स्थान है। हम खरगोश उसकी प्रजा हैं, इसीलिए वह ‘शशाङ्क’ (शशक को धारण करने वाला) नाम से प्रसिद्ध है। जब तक खरगोश जीवित रहते हैं, तभी तक चन्द्रमा प्रसन्न रहता है।”
गजराजः पृच्छति– “कथम् अहं विश्वासं करोमि ? किं सत्यमेव चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति ? यदि सरोवरः चन्द्रदेवस्य वासस्थानं तर्हि तत् प्रदर्शयतु ।” शशकः कथयति– “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः ।”
अन्वय / भावार्थगजराज पूछता है – “मैं कैसे विश्वास करूँ? क्या सचमुच चन्द्रमा सरोवर में रहता है? यदि सरोवर चन्द्रदेव का निवास-स्थान है, तो वह दिखाओ।” खरगोश कहता है – “हाँ, चन्द्रमा के दर्शन के लिए हम दोनों अभी ही सरोवर की ओर चलें।”
गजराजः शशकराजेन सह सरोवरस्य समीपं गच्छति । सः जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बं पश्यति, चकितः च भवति । सः भयेन चन्द्रं नमति । ततः सः गजयूथेन सह अन्यत्र गच्छति । सः गजयूथः पुनः कदापि तस्य सरोवरस्य समीपं न आगच्छति । शशकाः तत्र सुखेन तिष्ठन्ति । सत्यम् एव उक्तम् – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ ।
अन्वय / भावार्थगजराज खरगोशों के राजा के साथ सरोवर के पास जाता है। वह जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखता है और चकित हो जाता है। वह भय से चन्द्रमा को प्रणाम करता है। इसके बाद वह अपने हाथियों के झुण्ड के साथ अन्यत्र चला जाता है। वह हाथियों का झुण्ड फिर कभी उस सरोवर के पास नहीं आता। खरगोश वहाँ सुखपूर्वक रहते हैं। ठीक ही कहा गया है – ‘बुद्धि ही सभी प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली है’।

सार (Hindi Summary)

‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ एक प्रेरक नीति-कथा है जो यह सिखाती है कि शरीर-बल से बुद्धि-बल अधिक महत्त्वपूर्ण है। एक वन में सदा जल से भरा एक विशाल सरोवर था। दूर के वन से प्यासे हाथियों का झुण्ड वहाँ जल पीने आता था। सरोवर के किनारे कोमल भूमि में अनेक खरगोश बिलों में रहते थे। हाथियों के बार-बार आने-जाने से अनेक खरगोश कुचलकर घायल एवं मृत होने लगे। इससे सभी खरगोश भयभीत एवं चिन्तित हो गए।

अपनी रक्षा के लिए खरगोशों ने सभा की, परन्तु कोई समाधान नहीं मिला। तब खरगोशों के बुद्धिमान राजा ने स्वयं उपाय सोचने का बीड़ा उठाया। रात में वह गजराज के पास गया और चतुराई से कहा कि यह सरोवर चन्द्रदेव का निवास-स्थान है तथा खरगोश उसकी प्रजा हैं, इसीलिए चन्द्रमा का नाम ‘शशाङ्क’ है। गजराज ने प्रमाण माँगा, तो खरगोश-राज उसे सरोवर के पास ले गया।

जल में चन्द्रमा का हिलता हुआ प्रतिबिम्ब देखकर गजराज चकित हो गया और भय से चन्द्रमा को प्रणाम करके अपने झुण्ड सहित सदा के लिए वहाँ से चला गया। इस प्रकार बिना किसी युद्ध के, केवल बुद्धि के बल पर खरगोशों ने प्रबल हाथियों से अपनी रक्षा कर ली। कथा का सन्देश है – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’, अर्थात् बुद्धि ही सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली है; बुद्धि से कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
सरोवरःतालाब, जलाशयPond / Lake
गजःहाथीElephant
शशकःखरगोशRabbit
मृताःमरे हुएDead
भीताःडरे हुएScared / Afraid
प्रतिबिम्बम्प्रतिबिम्ब, परछाईंReflection
चिन्तामग्नःचिन्तित, चिन्ता में डूबाWorried
शशाङ्कःचन्द्रमाMoon
नाम्नानाम सेBy name
बुद्धिःबुद्धि, समझIntelligence / Wisdom
सर्वार्थसाधिकासभी प्रयोजनों को सिद्ध करने वालीThat which accomplishes all purposes
पिपासाकुलम्प्यास से व्याकुलTormented by thirst
गजयूथम्हाथियों का झुण्डHerd of elephants
बिलानिबिल (छेद)Burrows / Holes
क्षतविक्षताःघायल, क्षत-विक्षतWounded / Injured
स्वरक्षार्थम्अपनी रक्षा के लिएFor self-protection
उपायःउपाय, तरकीबPlan / Means
यूथाधिपःझुण्ड का स्वामी/मुखियाLeader of the herd
वासस्थानम्निवास-स्थानDwelling place
नमतिप्रणाम करता है(He) bows down
सुखेनसुखपूर्वकHappily / Comfortably

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

1. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —

(क) सरोवरस्य तीरे सुकोमलभूमौ बिलेषु के निवसन्ति ?

उत्तरशशकाः ।

(ख) केषां परिभ्रमणेन शशकाः क्षतविक्षताः मृताः च भवन्ति ?

उत्तरगजानाम् ।

(ग) शशकराजः कस्य समीपं गच्छति ?

उत्तरगजराजस्य ।

(घ) के स्वमतं प्रकाशयन्ति ?

उत्तरशशकाः ।

(ङ) कः चन्द्रं नमति ?

उत्तरगजराजः ।

(च) के सुखेन तिष्ठन्ति ?

उत्तरशशकाः ।

2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु —

(क) चन्द्रः कदा प्रसन्नः भवति ?

उत्तरयदा शशकाः जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति ।

(ख) सायङ्काले केषां सभा भवति ?

उत्तरसायङ्काले शशकानां सभा भवति ।

(ग) शशकाः किमर्थम् उपायं चिन्तयन्ति ?

उत्तरशशकाः स्वरक्षार्थम् उपायं चिन्तयन्ति ।

(घ) चन्द्रः केन नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति ?

उत्तरचन्द्रः ‘शशाङ्कः’ इति नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति ।

(ङ) “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः” इति कः कथयति ?

उत्तर“आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः” इति शशकराजः (शशकः) कथयति ।

3. पाठस्य आधारेण पिट्टकातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयन्तु —

पिट्टका (शब्द-मञ्जूषा): निवसन्ति, चिन्तयन्ति, भवति, कथयति, तिष्ठति

उत्तर (क) किं चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति ? (ख) सर्वे शशकाः उपायं चिन्तयन्ति (ग) सायंकाले शशकानां सभा भवति (घ) शशकाः सरोवरस्य तीरे निवसन्ति (ङ) सः गजराजं कथयति

4. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानां पदानां वचनं पुरुषं च लिखन्तु —

यथा – चिन्तयति → प्रथमपुरुषः, एकवचनम् ।

पदम्पुरुषःवचनम्
चिन्तयतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्
तिष्ठन्तिप्रथमपुरुषःबहुवचनम्
जीवन्तिप्रथमपुरुषःबहुवचनम्
नमतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्
कथयतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्
गच्छतिप्रथमपुरुषःएकवचनम्

5. उदाहरणानुसारं समुचितैः क्रियापदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —

यथा – गम् → गच्छति, गच्छतः, गच्छन्ति । (रिक्त रूप मोटे अक्षरों में उत्तर हैं।)

धातुःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
गम्गच्छतिगच्छतःगच्छन्ति
कथ्कथयतिकथयतःकथयन्ति
स्थातिष्ठतितिष्ठतःतिष्ठन्ति
कृकरोमिकुर्वःकुर्मः
जीव्जीवतिजीवतःजीवन्ति
चल्चलामिचलावःचलामः

ध्यातव्य – ‘कृ’ तथा ‘चल्’ धातु के दिए गए रूप उत्तमपुरुष (करोमि/कुर्वः/कुर्मः, चलामि/चलावः/चलामः) के हैं, अतः उनकी पंक्ति उत्तमपुरुष में पूरी की गई है।

6. चित्रस्य आधारेण पञ्च वाक्यानि लिखन्तु —

(पाठ के चित्र – सरोवर, हाथी, खरगोश एवं जल में चन्द्र-प्रतिबिम्ब – के आधार पर नमूना वाक्य।)

उत्तर (नमूना) (क) अयम् एकः महान् सरोवरः अस्ति । (ख) सरोवरे गजाः जलं पिबन्ति । (ग) सरोवरस्य तीरे शशकाः निवसन्ति । (घ) जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बम् अस्ति । (ङ) गजराजः चन्द्रं नमति ।

7. अधोलिखितानां पर्यायपदानां मेलनं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —

(स्तंभ ‘क’ के शब्दों का स्तंभ ‘ख’ के पर्यायवाची शब्दों से मिलान कीजिए।)

स्तंभ ‘क’ (शब्दः)स्तंभ ‘ख’ (पर्यायः)
(क) गजःजलाशयः
(ख) पदम्शशाङ्कः
(ग) चन्द्रःजनता
(घ) सरोवरःचरणः
(ङ) प्रजाहस्ती
सही मिलान (उत्तर) (क) गजः → हस्ती (हाथी) (ख) पदम् → चरणः (पैर) (ग) चन्द्रः → शशाङ्कः (चन्द्रमा) (घ) सरोवरः → जलाशयः (तालाब) (ङ) प्रजा → जनता (प्रजा/लोग)

अवधेयांशः (व्याकरण-तालिकाः)

1. क्रियापदस्य मूलं धातुः

प्रत्येक क्रियापद का मूल ‘धातु’ होता है। यथा – ‘पठति’ इस क्रियापद का मूल ‘पठ्’ धातु है। पाठ में आए कुछ क्रियापदों के धातु एवं उपसर्ग इस प्रकार हैं –

क्रियापदम्उपसर्गः + धातुः
निवसन्तिनि + वस्
भवन्तिभू (भव्)
गच्छतिगम् (गच्छ्)
प्रकाशयन्तिप्र + काश् (काशि)
नमतिनम्
तिष्ठन्तिस्था (तिष्ठ्)

2. लट्-लकारस्य (वर्तमानकालस्य) चिह्नानि

कार्यारम्भ से कार्यसमाप्ति तक का काल ‘वर्तमानकाल’ कहलाता है। वर्तमानकाल के लिए लट्-लकार होता है। लकार में तीन पुरुष (प्रथमः, मध्यमः, उत्तमः) एवं तीन वचन (एकवचनम्, द्विवचनम्, बहुवचनम्) होते हैं।

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःअतिअतःअन्ति
मध्यमपुरुषःअसिअथःअथ
उत्तमपुरुषःआमिआवःआमः

3. ‘पठ्’ धातोः लट्-लकारस्य रूपाणि

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपठतिपठतःपठन्ति
मध्यमपुरुषःपठसिपठथःपठथ
उत्तमपुरुषःपठामिपठावःपठामः

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)

विषयःविवरणम्
वर्तमानकालःकार्यारम्भात् कार्यपरिसमाप्तेः कालः वर्तमानकालः उच्यते ।
लकारःवर्तमानकालस्य कृते लट्लकारः भवति ।
पुरुषाः (3)प्रथमः, मध्यमः, उत्तमः
वचनानि (3)एकवचनम्, द्विवचनम्, बहुवचनम्
पाठस्य सन्देशःशरीरबलात् बुद्धिबलस्य महत्त्वम् अधिकम् – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ ।

परियोजनाकार्यम् (Project Work)

पाठे पठितानां धातुरूपाणां संग्रहणं कुर्वन्तु । तेषां पुरुषं वचनं च लिखन्तु ।

मार्गदर्शनम् (नमूना) पाठ में आए क्रियापदों को एकत्र करके उनका पुरुष एवं वचन लिखिए, जैसे – निवसन्ति → प्रथमपुरुषः, बहुवचनम् । गच्छति → प्रथमपुरुषः, एकवचनम् । चिन्तयन्ति → प्रथमपुरुषः, बहुवचनम् । कथयामि / चिन्तयामि → उत्तमपुरुषः, एकवचनम् । गच्छामः / पठामः → उत्तमपुरुषः, बहुवचनम् ।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. इस पाठ का केन्द्रीय सन्देश क्या है?

उत्तरइस पाठ का केन्द्रीय सन्देश है – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’, अर्थात् बुद्धि ही सभी प्रयोजनों को सिद्ध करती है। शरीर-बल की अपेक्षा बुद्धि-बल अधिक महत्त्वपूर्ण है; बुद्धि से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है।

2. खरगोश भयभीत एवं चिन्तित क्यों हो गए थे?

उत्तरसरोवर के किनारे बिलों में रहने वाले खरगोश हाथियों के बार-बार आने-जाने एवं घूमने-फिरने से कुचलकर घायल हो जाते थे, कुछ तो मर भी जाते थे। इसीलिए सभी खरगोश भयभीत एवं चिन्ता में डूबे रहते थे।

3. शशकराज ने गजराज को क्या कहकर समझाया?

उत्तरशशकराज ने गजराज से कहा कि यह सरोवर चन्द्रदेव का निवास-स्थान है तथा खरगोश उसकी प्रजा हैं, इसी कारण चन्द्रमा ‘शशाङ्क’ नाम से प्रसिद्ध है। जब तक खरगोश जीवित रहते हैं, तभी तक चन्द्रमा प्रसन्न रहता है।

4. गजराज सरोवर के पास जाकर क्यों चकित एवं भयभीत हुआ?

उत्तरगजराज ने सरोवर के जल में चन्द्रमा का हिलता हुआ प्रतिबिम्ब देखा। उसने उसे सचमुच चन्द्रदेव समझ लिया, इसलिए वह चकित एवं भयभीत हो गया और भय से चन्द्रमा को प्रणाम करने लगा।

5. कथा का अन्त किस प्रकार होता है?

उत्तरभयभीत गजराज अपने झुण्ड सहित सदा के लिए वहाँ से चला जाता है और फिर कभी उस सरोवर के पास नहीं आता। इस प्रकार खरगोश बुद्धि के बल पर अपनी रक्षा कर लेते हैं और वहाँ सुखपूर्वक रहने लगते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ कथा का सार अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरएक वन के विशाल सरोवर में दूर से प्यासे हाथियों का झुण्ड जल पीने आता था। सरोवर के किनारे बिलों में अनेक खरगोश रहते थे, जो हाथियों के आने-जाने से कुचलकर घायल एवं मृत होने लगे। भयभीत खरगोशों ने सभा की, परन्तु समाधान न मिला।तब बुद्धिमान शशकराज ने एक उपाय सोचा। रात में उसने गजराज को बताया कि सरोवर चन्द्रदेव का निवास है और खरगोश उसकी प्रजा हैं। जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखकर गजराज भयभीत हो गया और झुण्ड सहित वहाँ से सदा के लिए चला गया। इस प्रकार बिना युद्ध किए, केवल बुद्धि से खरगोशों ने अपनी रक्षा कर ली। यही कथा का सन्देश है – बुद्धि ही सभी कार्यों को सिद्ध करती है।

7. इस कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है? ‘बुद्धि-बल’ एवं ‘शरीर-बल’ की तुलना कीजिए।

उत्तरइस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी समस्या का समाधान केवल शक्ति से नहीं, बल्कि सूझ-बूझ एवं बुद्धि से होता है। हाथी शरीर-बल में अत्यन्त प्रबल थे, परन्तु छोटे एवं दुर्बल खरगोशों ने अपनी बुद्धि से उन्हें परास्त कर दिया।शरीर-बल सीमित होता है और सदा सफलता नहीं दिला सकता, जबकि बुद्धि-बल से बड़े से बड़ा एवं कठिन से कठिन कार्य भी सरलता से सिद्ध हो जाता है। विशेषकर जब प्रतिपक्ष अत्यन्त बलवान हो, तब बुद्धि ही सबसे बड़ा साधन बनती है। अतः हमें परिश्रम के साथ-साथ बुद्धिपूर्वक व्यवहार करना सीखना चाहिए – क्योंकि ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’।

8. वर्तमानकाल (लट्-लकार) में पुरुष एवं वचन के बारे में संक्षेप में बताइए।

उत्तरकार्य के आरम्भ से समाप्ति तक का काल वर्तमानकाल कहलाता है, जिसके लिए संस्कृत में लट्-लकार का प्रयोग होता है। लट्-लकार में तीन पुरुष होते हैं – प्रथमपुरुष (वह/वे), मध्यमपुरुष (तुम/आप) एवं उत्तमपुरुष (मैं/हम)। साथ ही तीन वचन होते हैं – एकवचन, द्विवचन एवं बहुवचन।यथा ‘पठ्’ धातु के प्रथमपुरुष के रूप – पठति, पठतः, पठन्ति; मध्यमपुरुष – पठसि, पठथः, पठथ; उत्तमपुरुष – पठामि, पठावः, पठामः। पाठ में ‘निवसन्ति, गच्छति, तिष्ठन्ति, चिन्तयामि’ आदि सभी क्रियापद इसी लट्-लकार के हैं।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ का शीर्षक क्या है?

(क) बुद्धिः सर्वार्थसाधिका

(ख) सङ्गच्छध्वम्

(ग) मित्रता

(घ) विद्या

उत्तर(क) बुद्धिः सर्वार्थसाधिका।

2. सरोवर के किनारे बिलों में कौन रहते थे?

(क) गजाः

(ख) शशकाः

(ग) मत्स्याः

(घ) सिंहाः

उत्तर(ख) शशकाः।

3. सरोवर में जल पीने कौन आते थे?

(क) शशकाः

(ख) पक्षिणः

(ग) गजाः (हाथी)

(घ) मृगाः

उत्तर(ग) गजाः (हाथी)।

4. उपाय किसने सोचा?

(क) गजराजः

(ख) शशकराजः

(ग) चन्द्रः

(घ) सिंहराजः

उत्तर(ख) शशकराजः।

5. ‘शशाङ्कः’ किसका नाम है?

(क) सूर्यस्य

(ख) गजस्य

(ग) चन्द्रस्य

(घ) सरोवरस्य

उत्तर(ग) चन्द्रस्य।

6. गजराज ने जल में किसका प्रतिबिम्ब देखा?

(क) सूर्यस्य

(ख) चन्द्रस्य

(ग) वृक्षस्य

(घ) शशकस्य

उत्तर(ख) चन्द्रस्य।

7. प्रतिबिम्ब देखकर गजराज ने क्या किया?

(क) चन्द्रं नमति (प्रणाम करता है)

(ख) जलं पिबति

(ग) शशकं ताडयति

(घ) सरोवरे स्नाति

उत्तर(क) चन्द्रं नमति (प्रणाम करता है)।

8. कथा के अनुसार किसका बल अधिक महत्त्वपूर्ण है?

(क) शरीरबलम्

(ख) धनबलम्

(ग) बुद्धिबलम्

(घ) सेनाबलम्

उत्तर(ग) बुद्धिबलम्।

9. अन्त में खरगोश कैसे रहने लगे?

(क) भयेन

(ख) दुःखेन

(ग) सुखेन

(घ) क्रोधेन

उत्तर(ग) सुखेन।

10. ‘गच्छति’ क्रियापद का मूल धातु क्या है?

(क) गम्

(ख) गण्

(ग) गा

(घ) ग्रह्

उत्तर(क) गम् (गच्छ्)।
उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(क), 8-(ग), 9-(ग), 10-(क)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): खरगोश हाथियों के आने से भयभीत एवं चिन्तित थे।

कारण (R): हाथियों के घूमने-फिरने से बिलों में रहने वाले अनेक खरगोश घायल एवं मृत हो जाते थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): खरगोशों ने बुद्धि के बल पर अपनी रक्षा की।

कारण (R): खरगोशों ने हाथियों से युद्ध करके उन्हें शरीर-बल से परास्त किया।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – खरगोशों ने युद्ध नहीं किया, बल्कि चतुराई (बुद्धि) से गजराज को भयभीत करके भगा दिया।

3. अभिकथन (A): गजराज भयभीत होकर झुण्ड सहित सरोवर से सदा के लिए चला गया।

कारण (R): उसने जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखा और उसे सचमुच चन्द्रदेव समझ लिया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): शशकराज ने चन्द्रमा को ‘शशाङ्क’ कहा।

कारण (R): शशकराज के अनुसार खरगोश चन्द्रमा की प्रजा हैं, इसी से वह ‘शशाङ्क’ नाम से प्रसिद्ध है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): यह पाठ सिखाता है कि बुद्धि से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है।

कारण (R): पाठ का सन्देश है – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’, अर्थात् बुद्धि ही सभी प्रयोजनों को सिद्ध करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • कथा का क्रम (हाथियों का आना → खरगोशों का भय → सभा → शशकराज का उपाय → गजराज का भागना) याद रखें – प्रायः इसी क्रम पर प्रश्न आते हैं।
  • शब्दार्थ (सरोवरः, शशकः, गजः, शशाङ्कः, प्रतिबिम्बम्, बुद्धिः आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
  • ‘एकपदेन उत्तरम्’ में केवल एक शब्द एवं ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ में पूरा वाक्य लिखें।
  • लट्-लकार के पुरुष एवं वचन तथा धातुरूप (गम्, स्था, कथ्, कृ) तालिका सहित याद करें।
  • पर्यायवाची शब्द (गजः-हस्ती, चन्द्रः-शशाङ्कः, सरोवरः-जलाशयः, प्रजा-जनता) अवश्य याद रखें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • ‘शशकः’ (खरगोश) एवं ‘शशाङ्कः’ (चन्द्रमा) में भ्रम न करें।
  • एकपदेन उत्तर में सही विभक्ति लगाना न भूलें (यथा – ‘केषाम्?’ का उत्तर ‘गजानाम्’)।
  • लट्-लकार के द्विवचन (-तः/-थः/-आवः) एवं बहुवचन (-अन्ति/-अथ/-आमः) रूपों को मिला देना।
  • मात्रा एवं संयुक्ताक्षर की अशुद्धि – प्रतिबिम्बम्, क्षतविक्षताः, चिन्तामग्नः शुद्ध लिखें।
  • कथा को युद्ध की कथा समझ लेना – यहाँ विजय बुद्धि से होती है, बल से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 पाठ 10 ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ का मुख्य भाव क्या है?

इस पाठ का मुख्य भाव है कि शरीर-बल की अपेक्षा बुद्धि-बल अधिक महत्त्वपूर्ण है। बुद्धि से कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है – ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’।

खरगोशों ने हाथियों से अपनी रक्षा कैसे की?

खरगोशों के राजा ने चतुराई से गजराज को विश्वास दिलाया कि सरोवर चन्द्रदेव का निवास है। जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखकर भयभीत गजराज झुण्ड सहित वहाँ से चला गया।

चन्द्रमा को ‘शशाङ्क’ क्यों कहा गया है?

शशकराज के अनुसार खरगोश (शशक) चन्द्रमा की प्रजा हैं, इसी कारण चन्द्रमा ‘शशाङ्क’ (शशक को धारण करने वाला) नाम से प्रसिद्ध है।

मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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