Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 9 Solutions (NCERT 2026–27) – अतिथिदेवो भव
This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 9 ‘अतिथिदेवो भव’ (नवमः पाठः) – a delightful prose lesson about a girl Radhika and a family of cats who become her special guests. You get the मूल पाठ with अन्वय, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः) reproduced verbatim, along with grammar notes, extra questions, 10 MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ एवं अन्वय (अर्थ)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- अव्ययपदानि (व्याकरण-तालिका)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का नवाँ पाठ ‘अतिथिदेवो भव’ भारतीय संस्कृति के एक महान आदर्श – अतिथि-सत्कार – पर आधारित एक सरल कथात्मक (गद्य) पाठ है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं तथा अतिथि-सेवा पञ्चमहायज्ञों में सम्मिलित है। पाठ में राधिका नामक बालिका के घर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक) अतिथि के रूप में आते हैं। राधिका उनकी सेवा करती है, उन्हें दूध पिलाती है और उनके नाम भी रख देती है – तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम। पितामही राधिका को बताती हैं कि अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। पाठ का केन्द्रीय भाव है – सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ भारतीय संस्कृति के मूल्य ‘अतिथिदेवो भव’ (तैत्तिरीय उपनिषद् का प्रसिद्ध वचन) को एक रोचक बाल-कथा के माध्यम से समझाता है। कथा की नायिका राधिका है, जिसके घर की छत पर एक बिल्ली अपने चार बच्चों के साथ आ बसती है। राधिका इन नन्हे मेहमानों की दिन-रात चिन्ता करती है, उन्हें दूध देती है और बड़े स्नेह से उनके साथ व्यवहार करती है। पितामही उसे अतिथि-सेवा का महत्त्व समझाती हैं। इस सरल कथा के साथ पाठ में स्थान-वाचक अव्ययपदों (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, एकत्र आदि) का अभ्यास भी कराया गया है।
मूल पाठ एवं अन्वय (अर्थ)
(NCERT दीपकम् पुस्तक के मूल गद्यांश ज्यों-के-त्यों; साथ में सरल हिन्दी अर्थ।)
सार (Hindi Summary)
‘अतिथिदेवो भव’ पाठ भारतीय संस्कृति के एक श्रेष्ठ आदर्श – अतिथि-सत्कार – को एक प्यारी बाल-कथा के द्वारा प्रस्तुत करता है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि भारतीय संस्कृति में अतिथियों का बहुत महत्त्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – अतिथि को देवता मानो। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं और अतिथि-सेवा पाँच महायज्ञों में से एक है।
कथा में राधिका नामक एक बालिका है, जिसके घर की छत पर इन दिनों कुछ नये एवं विशिष्ट अतिथि आए हैं। वे अतिथि हैं – एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक)। राधिका दिन-रात उनकी चिन्ता करती है और उसका मन छत पर ही लगा रहता है। उसने इन चारों बच्चों के नाम भी रख दिए हैं – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरा) और भीम (कुछ मोटा)। राधिका बिल्ली को दूध पिलाती है और बिल्ली धन्यवाद-भाव से उसे देखती है। राधिका को देखकर शावक डरते नहीं। पितामही राधिका के इन प्यारे कामों को देखकर हँसती हैं।
पितामही राधिका को समझाती हैं कि अतिथि कब आएँ यह हम नहीं जानते, परन्तु जब भी वे आएँ, तब उनकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। ‘अतिथिदेवो भव’ अर्थात् अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। राधिका दिन भर इस वाक्य को मन्त्र की तरह दोहराती है और प्यार से बिल्ली के बच्चों से भी कहती है कि वे भी ‘अतिथिदेवो भव’ कहें। इस प्रकार यह पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार की सुन्दर शिक्षा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कूर्दमाना | कूदती हुई | Jumping (female) |
| नूतनाः | नये | New |
| मिलित्वा | मिलकर | Together |
| अहोरात्रम् | दिन-रात | Day and night |
| छद्याः उपरि | छत के ऊपर | On the roof |
| शावकाः | बिल्ली के बच्चे | Kittens |
| मन्दं मन्दम् | धीरे-धीरे | Slowly |
| पृष्ठतः | पीछे-पीछे | From the back |
| कार्यकलापान् | गतिविधियों को | Activities |
| दृष्ट्वा | देखकर | Having seen |
| एतादृशी | इस तरह की | Like this / such |
| स्थापयन्ती | रखती हुई / डालती हुई | Putting / placing |
| किमर्थम् | क्यों / किसलिए | Why / for what |
| आदिनम् | दिन भर | Whole day |
| वारं वारम् | बार-बार | Again and again |
| मार्जारी | बिल्ली | Cat (female) |
| क्षीरम् | दूध | Milk |
| चित्रवर्णः | चितकबरे रंग का | Of varied colour |
| वात्सल्येन | स्नेह से | With affection |
| पितामही | दादी | Grandmother (paternal) |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) राधिका कथं चलति स्म ?
(ख) गृहे कति अतिथयः सन्ति ?
(ग) कां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति ?
(घ) मार्जार्याः कति शावकाः ?
(ङ) राधिका मार्जार्यै किं ददाति ?
(च) चित्रवर्णः कः अस्ति ?
२. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —
(क) मार्जारीशावकानां नामानि कानि ?
(ख) राधिका मार्जारीशावकान् किं पाठयति ?
(ग) विशिष्टाः अतिथयः के ?
(घ) पितामही राधिकां किं वदति ?
(ङ) मार्जारी कदा राधिकायाः पृष्ठतः आगच्छति ?
(च) मार्जार्याः शावकाः कीदृशाः सन्ति ?
३. अधोलिखितानां वाक्यानां प्रश्न-सूचक-वाक्यानि लिखन्तु —
यथा – लेखनी अत्र अस्ति । → लेखनी कुत्र अस्ति ?
| वाक्यम् | प्रश्न-सूचक-वाक्यम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) वृक्षः तत्र अस्ति । | वृक्षः कुत्र अस्ति ? |
| (ख) देवालयः अन्यत्र अस्ति । | देवालयः कुत्र अस्ति ? |
| (ग) वायुः सर्वत्र अस्ति । | वायुः कुत्र अस्ति ? |
| (घ) बालकाः एकत्र तिष्ठन्ति । | बालकाः कुत्र तिष्ठन्ति ? |
| (ङ) माता अत्र अस्ति । | माता कुत्र अस्ति ? |
४. उत्पीठिकायां किम् अस्ति ? किं नास्ति ? इति चित्रं दृष्ट्वा लिखन्तु —
(शब्दाः – पुस्तकम्, घटी, लेखनी, चषकः, कूपी, स्यूतः, सङ्गणकम्, वृक्षः, फलम्, कन्दुकः। यथा – उत्पीठिकायां पुस्तकम् अस्ति । उत्पीठिकायां घटी नास्ति ।)
५. रेखाचित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु —
यथा – मार्जारः कुत्र अस्ति ? मार्जारः अत्र अस्ति । / सेवकः कुत्र अस्ति ? सेवकः तत्र अस्ति ।
६. भोजनशालायां किं किम् अस्ति ? इति पञ्चभिः वाक्यैः लिखन्तु —
यथा – भोजनशालायां पाचकः अस्ति । (सूचकपदानि – पाचकः, पात्रम्, तण्डुलाः, शाकानि, अग्निः, जलम्)
७. अधोलिखितेभ्यः वाक्येभ्यः अव्ययपदानि चित्वा लिखन्तु —
| वाक्यम् | अव्ययपदम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) अमितः गृहात् बहिः गच्छति । | बहिः |
| (ख) एकः वानरः वृक्षस्य उपरि तिष्ठति । | उपरि |
| (ग) सः फलानि अधः क्षिपति । | अधः |
| (घ) तत्र एकः बिडालः अस्ति । | तत्र |
| (ङ) बिडालः गृहस्य अन्तः प्रविशति । | अन्तः |
८. उदाहरणानुसारं कः कुत्र अस्ति ? कुत्र नास्ति ? इति लिखन्तु ।
यथा – सिंहः वने अस्ति । कार्यालये नास्ति । / छात्रः आकाशे नास्ति । छात्रः विद्यालये अस्ति ।
अव्ययपदानि (व्याकरण-तालिका)
इस पाठ में ‘अव्ययपद’ का परिचय कराया गया है। अव्ययलक्षण है –
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥
अर्थात् जो शब्द तीनों लिङ्गों, सभी विभक्तियों एवं सभी वचनों में समान (अपरिवर्तनीय) रहता है, वह अव्यय कहलाता है। अव्ययपदों में लिङ्ग-भेद, विभक्ति-भेद एवं वचन-भेद नहीं होता; ये सर्वदा एकरूप रहते हैं।
स्थानवाचक एवं प्रमुख अव्ययपद
| अव्ययपदम् | हिन्दी अर्थ | English |
|---|---|---|
| अत्र | यहाँ | Here |
| तत्र | वहाँ | There |
| कुत्र | कहाँ | Where |
| सर्वत्र | सब जगह | Everywhere |
| अन्यत्र | अन्य जगह | Elsewhere |
| एकत्र | एक जगह | At one place |
| उपरि | ऊपर | Above / on |
| अधः | नीचे | Below |
| अन्तः | भीतर | Inside |
| बहिः | बाहर | Outside |
| पुरतः | आगे | In front |
| पृष्ठतः | पीछे | Behind |
उदाहरण – ‘अत्र’ अव्यय एकवचन (अत्र बालकः अस्ति), बहुवचन (अत्र बालकाः सन्ति), पुल्लिङ्ग एवं स्त्रीलिङ्ग सभी में समान रहता है – इसमें वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
पाठ में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत एक मनोरंजक गीत दिया गया है, जिसे सभी मिलकर पढ़ें एवं गाएँ –
अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम् ॥
मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ॥
इस गीत में भी ‘कुत्र, अत्र, तत्र, अन्यत्र’ आदि अव्ययपदों का प्रयोग हुआ है।
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
१. पाठे मार्जारशावकानां नामानि पश्यन्तु । तेषां नामकरणे राधिकायाः किं चिन्तनम् आसीत् ? तदनुसारं स्वनामधेये किम् उद्देश्यं स्यात् इति विमर्शं कुर्वन्तु ।
२. विद्यालयपरिसरे किम् अस्ति, किं नास्ति इति लिखन्तु कक्षायां च श्रावयन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘अतिथिदेवो भव’ का क्या अर्थ है और यह कहाँ से लिया गया है?
2. राधिका के घर कौन-से विशिष्ट अतिथि आए थे?
3. राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा किस प्रकार करती है?
4. पितामही ने राधिका को क्या शिक्षा दी?
5. अव्यय किसे कहते हैं? तीन उदाहरण दीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘अतिथिदेवो भव’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. राधिका के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
8. अव्यय की पहचान कैसे होती है? पाठ के स्थानवाचक अव्ययों के उदाहरण देकर समझाइए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘अतिथिदेवो भव’ किसका वचन है?
(क) रामायणस्य
(ख) उपनिषदः
(ग) महाभारतस्य
(घ) पुराणस्य
2. राधिका के घर के विशिष्ट अतिथि कौन थे?
(क) नये पड़ोसी
(ख) बिल्ली और उसके चार बच्चे
(ग) कुत्ता और उसके बच्चे
(घ) पक्षी
3. राधिका मार्जारी (बिल्ली) को क्या देती है?
(क) फलम्
(ख) जलम्
(ग) क्षीरम् (दूध)
(घ) ओदनम्
4. मार्जारी के कितने शावक हैं?
(क) द्वौ
(ख) त्रयः
(ग) चत्वारः
(घ) पञ्च
5. निम्नलिखित में से शावक का नाम कौन-सा नहीं है?
(क) तन्वी
(ख) मृद्वी
(ग) शबलः
(घ) राधिका
6. राधिका के कार्यकलापों को देखकर कौन हँसती है?
(क) माता
(ख) पितामही (दादी)
(ग) सखी
(घ) मार्जारी
7. ‘चित्रवर्णः’ (चितकबरे रंग का) शावक कौन है?
(क) तन्वी
(ख) मृद्वी
(ग) शबलः
(घ) भीमः
8. ‘अहोरात्रम्’ शब्द का अर्थ है—
(क) सवेरे
(ख) दिन-रात
(ग) दोपहर
(घ) शाम
9. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द अव्यय है?
(क) बालकः
(ख) सर्वत्र
(ग) मार्जारी
(घ) क्षीरम्
10. अतिथि-सेवा किसमें सम्मिलित है?
(क) षड्दर्शनेषु
(ख) पञ्चमहायज्ञेषु
(ग) चतुर्वेदेषु
(घ) षड्ऋतुषु
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): यह पाठ अतिथि-सत्कार का संदेश देता है।
कारण (R): ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जो अतिथि को देव मानकर सेवा करने की प्रेरणा देता है।
2. अभिकथन (A): राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा करती है।
कारण (R): बिल्ली एवं उसके बच्चे राधिका के घर विशिष्ट अतिथि के रूप में आए हैं।
3. अभिकथन (A): ‘सर्वत्र’ शब्द में वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।
कारण (R): ‘सर्वत्र’ एक संज्ञा-शब्द है, अतः इसके रूप विभक्ति के अनुसार बदलते हैं।
4. अभिकथन (A): शावक राधिका को देखकर डरते नहीं हैं।
कारण (R): राधिका उनके साथ स्नेहपूर्वक व्यवहार करती है तथा उन्हें दूध पिलाती है।
5. अभिकथन (A): राधिका ने शावकों के नाम तन्वी, मृद्वी, शबल एवं भीम रखे।
कारण (R): उसने उनके रूप एवं स्वभाव-गुण के अनुसार ये नाम सोचे।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- चारों शावकों के नाम एवं उनकी विशेषताएँ (तन्वी – सुन्दर, मृद्वी – कोमल, शबल – चितकबरा, भीम – मोटा) क्रम से याद रखें।
- शब्दार्थ (कूर्दमाना, अहोरात्रम्, शावकाः, पृष्ठतः, क्षीरम् आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- सभी स्थानवाचक अव्यय (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, उपरि, अधः, अन्तः, बहिः) याद करें – इनसे प्रश्न प्रायः आते हैं।
- ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें; ‘एकपदेन’ में केवल एक शब्द।
- प्रश्न-निर्माण में स्थानवाचक पद के लिए सही प्रश्नवाचक ‘कुत्र’ का प्रयोग करें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- अव्यय को संज्ञा मानकर उसके विभक्ति-रूप बनाना – अव्यय का रूप कभी नहीं बदलता।
- ‘मार्जारी’ (स्त्रीलिङ्ग) के स्थान पर ‘मार्जारः’ लिख देना।
- ‘अस्ति’ (एकवचन) एवं ‘सन्ति’ (बहुवचन) का प्रयोग गड़बड़ा देना – पञ्च अतिथयः सन्ति।
- शावकों के नाम का लिङ्ग न मिलाना – तन्वी, मृद्वी (स्त्रीलिङ्ग); शबलः, भीमः (पुल्लिङ्ग)।
- ‘अतिथिदेवो भव’ को गलती से महाभारत/रामायण का वचन बताना – यह उपनिषद् का वचन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 9 ‘अतिथिदेवो भव’ किस विषय पर है?
यह पाठ भारतीय संस्कृति के आदर्श ‘अतिथि-सत्कार’ पर आधारित है। इसमें राधिका नामक बालिका अपने घर आई बिल्ली और उसके चार बच्चों की प्रेमपूर्वक सेवा करती है। पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया एवं अतिथि-सत्कार की शिक्षा देता है।
‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ क्या है?
‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। अर्थात् अतिथि की देव के समान आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए।
राधिका ने बिल्ली के चार बच्चों के क्या नाम रखे?
राधिका ने उनके रूप एवं स्वभाव के अनुसार नाम रखे – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरे रंग का) और भीम (कुछ मोटा)।
मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
