Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 9 Solutions (NCERT 2026–27) – अतिथिदेवो भव

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Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 9 (नवमः पाठः) पाठ: अतिथिदेवो भव Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का नवाँ पाठ ‘अतिथिदेवो भव’ भारतीय संस्कृति के एक महान आदर्श – अतिथि-सत्कार – पर आधारित एक सरल कथात्मक (गद्य) पाठ है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं तथा अतिथि-सेवा पञ्चमहायज्ञों में सम्मिलित है। पाठ में राधिका नामक बालिका के घर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक) अतिथि के रूप में आते हैं। राधिका उनकी सेवा करती है, उन्हें दूध पिलाती है और उनके नाम भी रख देती है – तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम। पितामही राधिका को बताती हैं कि अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। पाठ का केन्द्रीय भाव है – सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ भारतीय संस्कृति के मूल्य ‘अतिथिदेवो भव’ (तैत्तिरीय उपनिषद् का प्रसिद्ध वचन) को एक रोचक बाल-कथा के माध्यम से समझाता है। कथा की नायिका राधिका है, जिसके घर की छत पर एक बिल्ली अपने चार बच्चों के साथ आ बसती है। राधिका इन नन्हे मेहमानों की दिन-रात चिन्ता करती है, उन्हें दूध देती है और बड़े स्नेह से उनके साथ व्यवहार करती है। पितामही उसे अतिथि-सेवा का महत्त्व समझाती हैं। इस सरल कथा के साथ पाठ में स्थान-वाचक अव्ययपदों (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, एकत्र आदि) का अभ्यास भी कराया गया है।

मूल पाठ एवं अन्वय (अर्थ)

(NCERT दीपकम् पुस्तक के मूल गद्यांश ज्यों-के-त्यों; साथ में सरल हिन्दी अर्थ।)

भारतीयसंस्कृतौ अतिथीनां नितरां महत्त्वम् अस्ति । ‘अतिथिदेवो भव’ इति उपनिषदः वचनम् अस्ति । अस्माकं देशे न केवलं मनुष्याः, अपि तु अन्ये प्राणिनः अपि अतिथिरूपेण प्रीतिपात्राणि भवन्ति । अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञेषु अन्तर्भवति । ‘अतिथिदेवो भव’ इति वचनेन अतिथिसेवायाः भावः सर्वेषु जागरितः भवति । तादृशः कश्चन प्रसङ्गः अत्र पाठे दर्शितः । — दीपकम्, नवमः पाठः – अतिथिदेवो भव
हिन्दी अर्थभारतीय संस्कृति में अतिथियों का अत्यधिक महत्त्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ (अतिथि देव हैं) उपनिषद् का वचन है। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रेम के पात्र होते हैं। अतिथि-सेवा पाँच महायज्ञों में सम्मिलित है। ‘अतिथिदेवो भव’ इस वचन से अतिथि-सेवा का भाव सभी में जाग्रत होता है। वैसा ही एक प्रसंग यहाँ पाठ में दिखाया गया है।
राधिका एषु दिनेषु कूर्दमाना एव चलति । यतः गृहे नूतनाः अतिथयः सन्ति । ते च विशिष्टाः सन्ति । माता, पुत्रौ, पुत्र्यौ च मिलित्वा ते तत्र पञ्च सन्ति । अहोरात्रं तस्याः चिन्ता एकत्र एव । गृहस्य छद्याः उपरि । तत्र एव तस्याः मनः अस्ति । कुतूहलम् अस्ति, के ते इति ? ते न अन्ये, काचित् मार्जारी तस्याः चत्वारः शावकाः च । आम्, ते एव विशिष्टाः अतिथयः । सा तु तेषां नामानि अपि चिन्तितवती – तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः च इति ।
हिन्दी अर्थराधिका इन दिनों कूदती हुई ही चलती है, क्योंकि घर में नये अतिथि हैं। और वे विशिष्ट (खास) हैं। माता, दो पुत्र और दो पुत्रियाँ – मिलकर वे वहाँ पाँच हैं। दिन-रात उसकी चिन्ता एक ही जगह रहती है – घर की छत के ऊपर। वहीं उसका मन लगा रहता है। उत्सुकता है – वे कौन हैं? वे और कोई नहीं, कोई बिल्ली और उसके चार बच्चे हैं। हाँ, वे ही विशिष्ट अतिथि हैं। उसने तो उनके नाम भी सोच लिए – तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम।
तन्वी आकृत्या सुन्दरी, मृद्वी स्पर्शेन अतीव कोमला । शबलः चित्रवर्णः तथा च भीमः किञ्चित् स्थूलः । मार्जारी कदा गच्छति, कदा आगच्छति एतत् सर्वम् अपि राधिका जानाति । सा मार्जार्यै क्षीरं ददाति । मार्जारी पिबति । अनन्तरं सा सधन्यवादं राधिकां पश्यति । किन्तु शावकानां समीपं राधिका गच्छति चेत् मन्दं मन्दं पृष्ठतः आगच्छति । राधिकां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति । पितामही राधिकायाः कार्यकलापान् दृष्ट्वा हसति ।
हिन्दी अर्थतन्वी रूप से सुन्दर है, मृद्वी छूने में बहुत कोमल है। शबल चितकबरे रंग का है तथा भीम कुछ मोटा है। बिल्ली कब जाती है, कब आती है – यह सब भी राधिका जानती है। वह बिल्ली को दूध देती है। बिल्ली पीती है। बाद में वह धन्यवादपूर्वक राधिका को देखती है। किन्तु यदि राधिका शावकों के पास जाती है, तो वे धीरे-धीरे पीछे (की ओर) आते हैं। राधिका को देखकर शावक डरते नहीं हैं। पितामही राधिका के कार्यकलापों को देखकर हँसती हैं।
सा राधिकां वदति – राधिके ! अतिथयः कदा आगच्छन्ति इति न जानीमः । किन्तु यदा ते अत्र आगच्छन्ति तदा तेषाम् एतादृशी सेवा करणीया । राधिका पितामह्याः कण्ठं परितः मालाम् इव हस्तौ स्थापयन्ती पृच्छति – अस्तु, करोमि । किन्तु किमर्थम् ? पितामही वदति – ‘अतिथिदेवो भव’ । अर्थात् अतिथिः अस्माकं देवः अस्ति इति चिन्तयतु । तस्य आदरेण सेवां करोतु ।
हिन्दी अर्थवह (पितामही) राधिका से कहती है – हे राधिका! अतिथि कब आते हैं, यह हम नहीं जानते। किन्तु जब वे यहाँ आते हैं, तब उनकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। राधिका पितामही के गले के चारों ओर माला के समान अपने दोनों हाथ रखती हुई पूछती है – अच्छा, करूँगी। किन्तु किसलिए? पितामही कहती है – ‘अतिथिदेवो भव’। अर्थात् ‘अतिथि हमारे देव हैं’ ऐसा सोचो। उसके (अतिथि के) आदर के साथ सेवा करो।
राधिका आदिनं मन्त्रम् इव वारं वारं वदति – ‘अतिथिदेवो भव’, ‘अतिथिदेवो भव’ । अनन्तरं सा तन्वीं मृद्वीं शबलं भीमं च वात्सल्येन वदति – जानन्ति किम् ‘अतिथिदेवो भव’ ? भवन्तः अपि वदन्तु – ‘अतिथिदेवो भव’ ।
हिन्दी अर्थराधिका दिन भर मन्त्र की तरह बार-बार कहती है – ‘अतिथिदेवो भव’, ‘अतिथिदेवो भव’। इसके बाद वह तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम से वात्सल्य (स्नेह) के साथ कहती है – क्या आप जानते हैं ‘अतिथिदेवो भव’? आप भी कहो – ‘अतिथिदेवो भव’।

सार (Hindi Summary)

‘अतिथिदेवो भव’ पाठ भारतीय संस्कृति के एक श्रेष्ठ आदर्श – अतिथि-सत्कार – को एक प्यारी बाल-कथा के द्वारा प्रस्तुत करता है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि भारतीय संस्कृति में अतिथियों का बहुत महत्त्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – अतिथि को देवता मानो। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं और अतिथि-सेवा पाँच महायज्ञों में से एक है।

कथा में राधिका नामक एक बालिका है, जिसके घर की छत पर इन दिनों कुछ नये एवं विशिष्ट अतिथि आए हैं। वे अतिथि हैं – एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक)। राधिका दिन-रात उनकी चिन्ता करती है और उसका मन छत पर ही लगा रहता है। उसने इन चारों बच्चों के नाम भी रख दिए हैं – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरा) और भीम (कुछ मोटा)। राधिका बिल्ली को दूध पिलाती है और बिल्ली धन्यवाद-भाव से उसे देखती है। राधिका को देखकर शावक डरते नहीं। पितामही राधिका के इन प्यारे कामों को देखकर हँसती हैं।

पितामही राधिका को समझाती हैं कि अतिथि कब आएँ यह हम नहीं जानते, परन्तु जब भी वे आएँ, तब उनकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। ‘अतिथिदेवो भव’ अर्थात् अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। राधिका दिन भर इस वाक्य को मन्त्र की तरह दोहराती है और प्यार से बिल्ली के बच्चों से भी कहती है कि वे भी ‘अतिथिदेवो भव’ कहें। इस प्रकार यह पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार की सुन्दर शिक्षा देता है।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
कूर्दमानाकूदती हुईJumping (female)
नूतनाःनयेNew
मिलित्वामिलकरTogether
अहोरात्रम्दिन-रातDay and night
छद्याः उपरिछत के ऊपरOn the roof
शावकाःबिल्ली के बच्चेKittens
मन्दं मन्दम्धीरे-धीरेSlowly
पृष्ठतःपीछे-पीछेFrom the back
कार्यकलापान्गतिविधियों कोActivities
दृष्ट्वादेखकरHaving seen
एतादृशीइस तरह कीLike this / such
स्थापयन्तीरखती हुई / डालती हुईPutting / placing
किमर्थम्क्यों / किसलिएWhy / for what
आदिनम्दिन भरWhole day
वारं वारम्बार-बारAgain and again
मार्जारीबिल्लीCat (female)
क्षीरम्दूधMilk
चित्रवर्णःचितकबरे रंग काOf varied colour
वात्सल्येनस्नेह सेWith affection
पितामहीदादीGrandmother (paternal)

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —

(क) राधिका कथं चलति स्म ?

उत्तरकूर्दमाना (कूदती हुई) ।

(ख) गृहे कति अतिथयः सन्ति ?

उत्तरपञ्च (पाँच) ।

(ग) कां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति ?

उत्तरराधिकाम्

(घ) मार्जार्याः कति शावकाः ?

उत्तरचत्वारः (चार) ।

(ङ) राधिका मार्जार्यै किं ददाति ?

उत्तरक्षीरम् (दूध) ।

(च) चित्रवर्णः कः अस्ति ?

उत्तरशबलः

२. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —

(क) मार्जारीशावकानां नामानि कानि ?

उत्तरमार्जारीशावकानां नामानि तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः च सन्ति ।

(ख) राधिका मार्जारीशावकान् किं पाठयति ?

उत्तरराधिका मार्जारीशावकान् ‘अतिथिदेवो भव’ इति पाठयति ।

(ग) विशिष्टाः अतिथयः के ?

उत्तरविशिष्टाः अतिथयः काचित् मार्जारी तस्याः चत्वारः शावकाः च सन्ति ।

(घ) पितामही राधिकां किं वदति ?

उत्तरपितामही राधिकां वदति – ‘अतिथिदेवो भव’, अर्थात् अतिथिः अस्माकं देवः अस्ति इति चिन्तयतु, तस्य आदरेण सेवां करोतु ।

(ङ) मार्जारी कदा राधिकायाः पृष्ठतः आगच्छति ?

उत्तरयदा राधिका शावकानां समीपं गच्छति, तदा (शावकाः) मन्दं मन्दं पृष्ठतः आगच्छन्ति ।

(च) मार्जार्याः शावकाः कीदृशाः सन्ति ?

उत्तरमार्जार्याः शावकाः विशिष्टाः सन्ति – तन्वी आकृत्या सुन्दरी, मृद्वी स्पर्शेन अतीव कोमला, शबलः चित्रवर्णः, भीमः च किञ्चित् स्थूलः ।

३. अधोलिखितानां वाक्यानां प्रश्न-सूचक-वाक्यानि लिखन्तु —

यथा – लेखनी अत्र अस्ति । → लेखनी कुत्र अस्ति ?

वाक्यम्प्रश्न-सूचक-वाक्यम् (उत्तर)
(क) वृक्षः तत्र अस्ति ।वृक्षः कुत्र अस्ति ?
(ख) देवालयः अन्यत्र अस्ति ।देवालयः कुत्र अस्ति ?
(ग) वायुः सर्वत्र अस्ति ।वायुः कुत्र अस्ति ?
(घ) बालकाः एकत्र तिष्ठन्ति ।बालकाः कुत्र तिष्ठन्ति ?
(ङ) माता अत्र अस्ति ।माता कुत्र अस्ति ?

४. उत्पीठिकायां किम् अस्ति ? किं नास्ति ? इति चित्रं दृष्ट्वा लिखन्तु —

(शब्दाः – पुस्तकम्, घटी, लेखनी, चषकः, कूपी, स्यूतः, सङ्गणकम्, वृक्षः, फलम्, कन्दुकः। यथा – उत्पीठिकायां पुस्तकम् अस्ति । उत्पीठिकायां घटी नास्ति ।)

उत्तर (नमूना) अस्ति (मेज़ पर जो है): उत्पीठिकायां पुस्तकम् अस्ति । उत्पीठिकायां लेखनी अस्ति । उत्पीठिकायां चषकः अस्ति । उत्पीठिकायां कूपी अस्ति । उत्पीठिकायां सङ्गणकम् अस्ति । नास्ति (मेज़ पर जो नहीं है): उत्पीठिकायां घटी नास्ति । उत्पीठिकायां स्यूतः नास्ति । उत्पीठिकायां वृक्षः नास्ति । उत्पीठिकायां फलम् नास्ति । उत्पीठिकायां कन्दुकः नास्ति । (चित्र के अनुसार विद्यार्थी ‘अस्ति’ एवं ‘नास्ति’ में शब्दों को समायोजित कर सकते हैं।)

५. रेखाचित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु —

यथा – मार्जारः कुत्र अस्ति ? मार्जारः अत्र अस्ति । / सेवकः कुत्र अस्ति ? सेवकः तत्र अस्ति ।

उत्तर (नमूना) अत्र (यहाँ): छात्रः कुत्र अस्ति ? छात्रः अत्र अस्ति । दीपकः कुत्र अस्ति ? दीपकः अत्र अस्ति । लेखनी कुत्र अस्ति ? लेखनी अत्र अस्ति । तत्र (वहाँ): सेवकः कुत्र अस्ति ? सेवकः तत्र अस्ति । विद्यालयः कुत्र अस्ति ? विद्यालयः तत्र अस्ति । हरिणः कुत्र अस्ति ? हरिणः तत्र अस्ति । सर्वत्र (सब जगह): परमेश्वरः कुत्र अस्ति ? परमेश्वरः सर्वत्र अस्ति । वायुः कुत्र अस्ति ? वायुः सर्वत्र अस्ति । ज्ञानम् कुत्र अस्ति ? ज्ञानम् सर्वत्र अस्ति । अन्यत्र (अन्य जगह): मयूरः कुत्र अस्ति ? मयूरः अन्यत्र अस्ति । बालकः कुत्र अस्ति ? बालकः अन्यत्र अस्ति । मित्रम् कुत्र अस्ति ? मित्रम् अन्यत्र अस्ति ।

६. भोजनशालायां किं किम् अस्ति ? इति पञ्चभिः वाक्यैः लिखन्तु —

यथा – भोजनशालायां पाचकः अस्ति । (सूचकपदानि – पाचकः, पात्रम्, तण्डुलाः, शाकानि, अग्निः, जलम्)

उत्तर (१) भोजनशालायां पाचकः अस्ति । (२) भोजनशालायां पात्रम् अस्ति । (३) भोजनशालायां तण्डुलाः सन्ति । (४) भोजनशालायां शाकानि सन्ति । (५) भोजनशालायां अग्निः जलम् च अस्ति ।

७. अधोलिखितेभ्यः वाक्येभ्यः अव्ययपदानि चित्वा लिखन्तु —

वाक्यम्अव्ययपदम् (उत्तर)
(क) अमितः गृहात् बहिः गच्छति ।बहिः
(ख) एकः वानरः वृक्षस्य उपरि तिष्ठति ।उपरि
(ग) सः फलानि अधः क्षिपति ।अधः
(घ) तत्र एकः बिडालः अस्ति ।तत्र
(ङ) बिडालः गृहस्य अन्तः प्रविशति ।अन्तः

८. उदाहरणानुसारं कः कुत्र अस्ति ? कुत्र नास्ति ? इति लिखन्तु ।

यथा – सिंहः वने अस्ति । कार्यालये नास्ति । / छात्रः आकाशे नास्ति । छात्रः विद्यालये अस्ति ।

उत्तर मत्स्यः समुद्रे अस्ति । वृक्षे नास्ति । मधुरता मोदके अस्ति । कषाये नास्ति । उष्णता सूर्ये अस्ति । चन्द्रे नास्ति । वानरः वृक्षे अस्ति । नद्याम् नास्ति । नौका जले अस्ति । पर्वते नास्ति । अज्ञानम् मूर्खे अस्ति । पण्डिते नास्ति । चन्द्रः पूर्णिमायाम् अस्ति । अमावस्यायाम् नास्ति । अवकाशः रविवासरे अस्ति । सोमवासरे नास्ति ।

अव्ययपदानि (व्याकरण-तालिका)

इस पाठ में ‘अव्ययपद’ का परिचय कराया गया है। अव्ययलक्षण है –

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु ।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥

अर्थात् जो शब्द तीनों लिङ्गों, सभी विभक्तियों एवं सभी वचनों में समान (अपरिवर्तनीय) रहता है, वह अव्यय कहलाता है। अव्ययपदों में लिङ्ग-भेद, विभक्ति-भेद एवं वचन-भेद नहीं होता; ये सर्वदा एकरूप रहते हैं।

स्थानवाचक एवं प्रमुख अव्ययपद

अव्ययपदम्हिन्दी अर्थEnglish
अत्रयहाँHere
तत्रवहाँThere
कुत्रकहाँWhere
सर्वत्रसब जगहEverywhere
अन्यत्रअन्य जगहElsewhere
एकत्रएक जगहAt one place
उपरिऊपरAbove / on
अधःनीचेBelow
अन्तःभीतरInside
बहिःबाहरOutside
पुरतःआगेIn front
पृष्ठतःपीछेBehind

उदाहरण – ‘अत्र’ अव्यय एकवचन (अत्र बालकः अस्ति), बहुवचन (अत्र बालकाः सन्ति), पुल्लिङ्ग एवं स्त्रीलिङ्ग सभी में समान रहता है – इसमें वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)

पाठ में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत एक मनोरंजक गीत दिया गया है, जिसे सभी मिलकर पढ़ें एवं गाएँ –

मार्जाल ! रे मार्जाल ! कुत्र गतोऽसि त्वम् ।
अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम् ॥
मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ॥

इस गीत में भी ‘कुत्र, अत्र, तत्र, अन्यत्र’ आदि अव्ययपदों का प्रयोग हुआ है।

परियोजनाकार्यम् (Project Work)

१. पाठे मार्जारशावकानां नामानि पश्यन्तु । तेषां नामकरणे राधिकायाः किं चिन्तनम् आसीत् ? तदनुसारं स्वनामधेये किम् उद्देश्यं स्यात् इति विमर्शं कुर्वन्तु ।

मार्गदर्शनम्राधिका ने शावकों के नाम उनके गुण/स्वभाव के अनुसार रखे – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरा रंग), भीम (कुछ मोटा)। इसी प्रकार अपने नाम के अर्थ एवं उसके पीछे के उद्देश्य पर अपने सहपाठियों के साथ विचार-विमर्श कीजिए।

२. विद्यालयपरिसरे किम् अस्ति, किं नास्ति इति लिखन्तु कक्षायां च श्रावयन्तु ।

मार्गदर्शनम्अपने विद्यालय-परिसर में जो वस्तुएँ/स्थान हैं और जो नहीं हैं, उन्हें ‘अस्ति’/‘नास्ति’ के प्रयोग से संस्कृत में लिखिए, जैसे – विद्यालयपरिसरे वृक्षाः सन्ति । विद्यालयपरिसरे क्रीडाङ्गणम् अस्ति । विद्यालयपरिसरे नदी नास्ति । फिर इन्हें कक्षा में पढ़कर सुनाइए।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘अतिथिदेवो भव’ का क्या अर्थ है और यह कहाँ से लिया गया है?

उत्तर‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। यह उपनिषद् का प्रसिद्ध वचन है, जो हमें अतिथि का आदरपूर्वक सत्कार एवं सेवा करने की प्रेरणा देता है।

2. राधिका के घर कौन-से विशिष्ट अतिथि आए थे?

उत्तरराधिका के घर की छत पर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक) विशिष्ट अतिथि के रूप में आए थे। राधिका ने उनके नाम रखे – तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम।

3. राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा किस प्रकार करती है?

उत्तरराधिका दिन-रात उनकी चिन्ता करती है। वह बिल्ली को दूध (क्षीर) पिलाती है। बिल्ली धन्यवाद-भाव से उसे देखती है और शावक राधिका को देखकर डरते नहीं हैं।

4. पितामही ने राधिका को क्या शिक्षा दी?

उत्तरपितामही ने राधिका को बताया कि अतिथि कब आएँ यह हम नहीं जानते, परन्तु जब वे आएँ तब उनकी आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए, क्योंकि ‘अतिथिदेवो भव’ – अतिथि हमारे देव हैं।

5. अव्यय किसे कहते हैं? तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तरजो शब्द तीनों लिङ्गों, सभी विभक्तियों एवं सभी वचनों में समान (अपरिवर्तनीय) रहता है, उसे अव्यय कहते हैं। उदाहरण – अत्र, तत्र, कुत्र (अन्य – सर्वत्र, अन्यत्र, उपरि)।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘अतिथिदेवो भव’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ का केन्द्रीय संदेश है – अतिथि-सत्कार एवं सब प्राणियों के प्रति प्रेम-दया। भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता के समान माना जाता है – ‘अतिथिदेवो भव’। यहाँ केवल मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं तथा अतिथि-सेवा पाँच महायज्ञों में से एक है।पाठ में राधिका नामक बालिका अपने घर आई बिल्ली और उसके चार बच्चों की प्रेमपूर्वक सेवा करती है, उन्हें दूध पिलाती है और उनके नाम रखती है। पितामही उसे समझाती हैं कि अतिथि की आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। इस प्रकार यह कथा हमें यह सुन्दर शिक्षा देती है कि प्रत्येक अतिथि – चाहे वह मनुष्य हो या कोई पशु-पक्षी – का स्नेह एवं आदर के साथ स्वागत-सत्कार करना चाहिए।

7. राधिका के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

उत्तरराधिका एक दयालु, स्नेही एवं संवेदनशील बालिका है। बिल्ली और उसके बच्चों के घर आने पर वह आनन्द से कूदती हुई चलती है और दिन-रात उनकी चिन्ता करती है। वह प्रेमपूर्वक बिल्ली को दूध पिलाती है और शावकों के साथ इतना अच्छा व्यवहार करती है कि वे उसे देखकर डरते नहीं।वह बहुत कल्पनाशील भी है – उसने चारों शावकों के गुणों के अनुसार उनके सुन्दर नाम (तन्वी, मृद्वी, शबल, भीम) रखे हैं। पितामही से अतिथि-सेवा का महत्त्व समझने के बाद वह ‘अतिथिदेवो भव’ को मन्त्र की तरह दोहराती है और शावकों से भी प्यार से वही वाक्य कहलाना चाहती है। इस प्रकार राधिका करुणा, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार के संस्कारों से युक्त एक आदर्श बालिका है।

8. अव्यय की पहचान कैसे होती है? पाठ के स्थानवाचक अव्ययों के उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तरअव्यय वे शब्द हैं जो लिङ्ग, विभक्ति एवं वचन बदलने पर भी अपना रूप नहीं बदलते – वे सदा एकरूप रहते हैं। अव्ययलक्षण है – ‘सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु, वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्।’इस पाठ में अनेक स्थानवाचक अव्यय आए हैं, जैसे – अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), कुत्र (कहाँ), सर्वत्र (सब जगह), अन्यत्र (अन्य जगह), एकत्र (एक जगह), उपरि (ऊपर), अधः (नीचे), अन्तः (भीतर), बहिः (बाहर), पुरतः (आगे) तथा पृष्ठतः (पीछे)। उदाहरण – ‘अत्र बालकः अस्ति’, ‘अत्र बालकाः सन्ति’ – दोनों में ‘अत्र’ समान ही रहता है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘अतिथिदेवो भव’ किसका वचन है?

(क) रामायणस्य

(ख) उपनिषदः

(ग) महाभारतस्य

(घ) पुराणस्य

उत्तर(ख) उपनिषदः।

2. राधिका के घर के विशिष्ट अतिथि कौन थे?

(क) नये पड़ोसी

(ख) बिल्ली और उसके चार बच्चे

(ग) कुत्ता और उसके बच्चे

(घ) पक्षी

उत्तर(ख) बिल्ली और उसके चार बच्चे।

3. राधिका मार्जारी (बिल्ली) को क्या देती है?

(क) फलम्

(ख) जलम्

(ग) क्षीरम् (दूध)

(घ) ओदनम्

उत्तर(ग) क्षीरम् (दूध)।

4. मार्जारी के कितने शावक हैं?

(क) द्वौ

(ख) त्रयः

(ग) चत्वारः

(घ) पञ्च

उत्तर(ग) चत्वारः (चार)।

5. निम्नलिखित में से शावक का नाम कौन-सा नहीं है?

(क) तन्वी

(ख) मृद्वी

(ग) शबलः

(घ) राधिका

उत्तर(घ) राधिका। (शावकों के नाम – तन्वी, मृद्वी, शबल, भीम)

6. राधिका के कार्यकलापों को देखकर कौन हँसती है?

(क) माता

(ख) पितामही (दादी)

(ग) सखी

(घ) मार्जारी

उत्तर(ख) पितामही (दादी)।

7. ‘चित्रवर्णः’ (चितकबरे रंग का) शावक कौन है?

(क) तन्वी

(ख) मृद्वी

(ग) शबलः

(घ) भीमः

उत्तर(ग) शबलः।

8. ‘अहोरात्रम्’ शब्द का अर्थ है—

(क) सवेरे

(ख) दिन-रात

(ग) दोपहर

(घ) शाम

उत्तर(ख) दिन-रात।

9. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द अव्यय है?

(क) बालकः

(ख) सर्वत्र

(ग) मार्जारी

(घ) क्षीरम्

उत्तर(ख) सर्वत्र।

10. अतिथि-सेवा किसमें सम्मिलित है?

(क) षड्दर्शनेषु

(ख) पञ्चमहायज्ञेषु

(ग) चतुर्वेदेषु

(घ) षड्ऋतुषु

उत्तर(ख) पञ्चमहायज्ञेषु।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ग), 5-(घ), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): यह पाठ अतिथि-सत्कार का संदेश देता है।

कारण (R): ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जो अतिथि को देव मानकर सेवा करने की प्रेरणा देता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा करती है।

कारण (R): बिल्ली एवं उसके बच्चे राधिका के घर विशिष्ट अतिथि के रूप में आए हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): ‘सर्वत्र’ शब्द में वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।

कारण (R): ‘सर्वत्र’ एक संज्ञा-शब्द है, अतः इसके रूप विभक्ति के अनुसार बदलते हैं।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – ‘सर्वत्र’ अव्यय है, संज्ञा नहीं; अव्यय का रूप कभी नहीं बदलता।

4. अभिकथन (A): शावक राधिका को देखकर डरते नहीं हैं।

कारण (R): राधिका उनके साथ स्नेहपूर्वक व्यवहार करती है तथा उन्हें दूध पिलाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): राधिका ने शावकों के नाम तन्वी, मृद्वी, शबल एवं भीम रखे।

कारण (R): उसने उनके रूप एवं स्वभाव-गुण के अनुसार ये नाम सोचे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • चारों शावकों के नाम एवं उनकी विशेषताएँ (तन्वी – सुन्दर, मृद्वी – कोमल, शबल – चितकबरा, भीम – मोटा) क्रम से याद रखें।
  • शब्दार्थ (कूर्दमाना, अहोरात्रम्, शावकाः, पृष्ठतः, क्षीरम् आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
  • सभी स्थानवाचक अव्यय (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, उपरि, अधः, अन्तः, बहिः) याद करें – इनसे प्रश्न प्रायः आते हैं।
  • ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें; ‘एकपदेन’ में केवल एक शब्द।
  • प्रश्न-निर्माण में स्थानवाचक पद के लिए सही प्रश्नवाचक ‘कुत्र’ का प्रयोग करें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • अव्यय को संज्ञा मानकर उसके विभक्ति-रूप बनाना – अव्यय का रूप कभी नहीं बदलता।
  • ‘मार्जारी’ (स्त्रीलिङ्ग) के स्थान पर ‘मार्जारः’ लिख देना।
  • ‘अस्ति’ (एकवचन) एवं ‘सन्ति’ (बहुवचन) का प्रयोग गड़बड़ा देना – पञ्च अतिथयः सन्ति
  • शावकों के नाम का लिङ्ग न मिलाना – तन्वी, मृद्वी (स्त्रीलिङ्ग); शबलः, भीमः (पुल्लिङ्ग)।
  • ‘अतिथिदेवो भव’ को गलती से महाभारत/रामायण का वचन बताना – यह उपनिषद् का वचन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 9 ‘अतिथिदेवो भव’ किस विषय पर है?

यह पाठ भारतीय संस्कृति के आदर्श ‘अतिथि-सत्कार’ पर आधारित है। इसमें राधिका नामक बालिका अपने घर आई बिल्ली और उसके चार बच्चों की प्रेमपूर्वक सेवा करती है। पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया एवं अतिथि-सत्कार की शिक्षा देता है।

‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ क्या है?

‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। अर्थात् अतिथि की देव के समान आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए।

राधिका ने बिल्ली के चार बच्चों के क्या नाम रखे?

राधिका ने उनके रूप एवं स्वभाव के अनुसार नाम रखे – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरे रंग का) और भीम (कुछ मोटा)।

मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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