कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 8 सः एव महान् चित्रकारः हल (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) पाठ 8 ‘सः एव महान् चित्रकारः’ का सम्पूर्ण समाधान प्रस्तुत करता है – प्रकृति के विविध वर्णों (रंगों) पर आधारित गुरु-शिष्य के इस रोचक संवाद-पाठ का मूल पाठ, अन्वय एवं भावार्थ, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, तथा अभ्यास (वयम् अभ्यासं कुर्मः) के प्रत्येक प्रश्न के मौलिक, परीक्षोपयोगी उत्तर, साथ ही अतिरिक्त प्रश्न, 10 MCQ, 5 अभिकथन-कारण एवं FAQ।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ एवं अन्वय (संवादः)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- वर्ण-परिचयः (व्याकरण-तालिका)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का अष्टम पाठ ‘सः एव महान् चित्रकारः’ एक रोचक गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध वर्णों (रंगों) का परिचय कराता है। पाठ का आरम्भ राष्ट्रपति-भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान के चित्र से होता है, जहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब (पाटलपुष्प) तथा पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प हैं। आचार्य छात्रों श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आदित्य एवं मञ्जुल के साथ बातचीत करते हुए पत्तों, पक्षियों, पुष्पों एवं वस्त्रों के विविध रंगों – हरित, कृष्ण, रक्त, श्वेत, पीत, नील, केसर, पाटल एवं नीललोहित – पर चर्चा करते हैं। अन्त में आचार्य बताते हैं कि इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं और सम्पूर्ण प्रकृति बहुवर्णमयी है। पाठ का केन्द्रीय भाव यह है कि इस रंगीन एवं सुन्दर संसार का वर्ण-योजक चित्रकार स्वयं परमेश्वर है – “सः एव महान् चित्रकारः।”
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ संवाद-शैली (वार्तालाप) में लिखा गया है। इसमें एक आचार्य अपने छात्रों के साथ अमृत-उद्यान के चित्र को देखते हुए प्रकृति के रंगों का बोध कराते हैं। प्रत्येक छात्र अपने आस-पास की वस्तुओं – तोता, कौआ, कोयल, हंस, बगुला, खरगोश, गुड़हल, गुलाब आदि – के रंग बताता है। संवाद के माध्यम से सरल संस्कृत में रंग-वाचक शब्द (वर्णवाचक शब्द) सिखाए गए हैं। पाठ का उद्देश्य छात्रों में प्रकृति के प्रति प्रेम एवं सौन्दर्य-बोध जगाना तथा यह भाव भरना है कि इस विविधरंगी सृष्टि का रचयिता परमेश्वर ही सबसे बड़ा चित्रकार है।
मूल पाठ एवं अन्वय (संवादः)
(मूल संवाद NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक के साथ सरल हिन्दी भावार्थ।)
श्रद्धा – सर्वत्र विविधानि पुष्पाणि, हरितानि पर्णानि, खगाः, जन्तवः च सन्ति इति पश्यामः ।
शिक्षकः – सत्यम् । एवमेव तेषां वर्णाः अपि विविधाः । यथा श्रद्धा वदति ‘हरितानि पर्णानि’ इति, अत्र पर्णस्य कः वर्णः ?
छात्राः – (सर्वे) हरितः ।
श्रद्धा – अत्र वृक्षस्य उपरि शुकः अस्ति । सः अपि हरितवर्णेन शोभते ।
शिक्षकः – श्रद्धे ! भवत्याः इष्टवर्णः हरितः इति चिन्तयामि । अत एव हरितवर्णम् एव पश्यति खलु ।
शिक्षकः – आम् । उत्तमं निरीक्षणं भवत्याः । छात्राः ! पश्यन्तु, अत्र पुष्पाणि अपि सन्ति । मनीषे ! पश्यतु जपापुष्पम् । वदतु, अस्य वर्णः कः ?
मनीषा – रक्तवर्णः आचार्य ! शुकस्य चञ्चुः अपि रक्तवर्णा । पाटलपुष्पम् अपि रक्तवर्णेन युक्तम् ।
शिक्षकः – शोभनम् । चित्रवर्णाः शुकाः अपि अत्र सन्ति इति जानन्ति किम् ?
आदित्यः – आचार्य ! ते कीदृशाः भवन्ति ? वयं द्रष्टुम् इच्छामः ।
शिक्षकः – तादृशान् शुकान् वयं प्रायः जन्तुशालायां पश्यामः । तेषां पक्षाः नीलाः पीताः रक्ताः च भवन्ति ।
शिक्षकः – उत्तमम् । पश्यन्तु, हंसः श्वेतः । तथा अन्ये के श्वेतवर्णाः ?
मेधा – आचार्य ! बकः शशः च । तथा भवतः प्रावारकम् अपि श्वेतम् ।
शिक्षकः – आम् । सम्यक् । सर्वे स्वस्य अन्येषां च वस्त्राणां वर्णान् अवलोकयन्तु ।
मञ्जुलः – आचार्य ! इन्द्रधनुः तु बहुवर्णमयं खलु । तत्र सप्त वर्णाः भवन्ति ।
शिक्षकः – आम् । सर्वः अपि निसर्गः बहुवर्णमयः । तेन संसारः सुन्दरः । वर्णैः एव अस्माकं जीवनम् अपि मनोरमं भवति । तत्र ‘वर्णयोजकः चित्रकारः कः’ इति जानन्ति किम् ?
सर्वे – (उच्चैः) परमेश्वरः, परमेश्वरः ।
शिक्षकः – आम् । सः एव महान् चित्रकारः ।
सार (Hindi Summary)
‘सः एव महान् चित्रकारः’ पाठ एक सुन्दर गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध रंगों का परिचय कराता है। पाठ का आरम्भ राष्ट्रपति-भवन के अमृत-उद्यान के चित्र से होता है, जहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब तथा पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प हैं। आचार्य अपने छात्रों श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आदित्य एवं मञ्जुल से बातचीत करते हुए प्रकृति की वस्तुओं के रंग पूछते हैं।
संवाद में बताया जाता है कि पत्ते एवं तोता हरे रंग के हैं; कौआ एवं कोयल काले रंग के हैं; गुड़हल का पुष्प, तोते की चोंच एवं गुलाब लाल रंग के हैं। चिड़ियाघर में मिलने वाले रंगीन तोतों के पंख नीले, पीले एवं लाल होते हैं। गुलाब अनेक रंगों – पीले, श्वेत, जामुनी एवं केसरिया – के होते हैं। हंस, बगुला, खरगोश एवं आचार्य का कोट श्वेत रंग के हैं। मञ्जुल बताता है कि इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं।
अन्त में आचार्य यह भाव प्रकट करते हैं कि सम्पूर्ण प्रकृति बहुरंगी है और इन्हीं रंगों से संसार सुन्दर तथा हमारा जीवन मनोरम बनता है। जब वे पूछते हैं कि इन रंगों का चित्रकार कौन है, तो सभी छात्र एक स्वर में उत्तर देते हैं – ‘परमेश्वर’। इस प्रकार पाठ का मुख्य संदेश यह है कि इस विविधरंगी, सुन्दर सृष्टि का रचयिता एवं वर्ण-योजक स्वयं परमेश्वर ही है – वही सबसे बड़ा चित्रकार है। पाठ छात्रों में प्रकृति-प्रेम, सौन्दर्य-बोध तथा संस्कृत के रंग-वाचक शब्दों का ज्ञान विकसित करता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसर्गः | प्रकृति | Nature |
| हरितानि | हरे रंग के | Green |
| पर्णानि | पत्ते | Leaves |
| जन्तवः | प्राणी, जीव-जन्तु | Animals |
| खगाः | पक्षी | Birds |
| वर्णमयः | रंगीन, रंगों से युक्त | Colourful |
| शुकः | तोता | Parrot |
| इष्टवर्णः | प्रिय रंग | Favourite colour |
| काकः | कौआ | Crow |
| पिकः | कोयल | Cuckoo |
| जपापुष्पम् | गुड़हल | Hibiscus |
| चञ्चुः | चोंच | Beak |
| रक्तः | लाल | Red |
| नीलः | नीला | Blue |
| पीतः | पीला | Yellow |
| पक्षाः | पंख | Wings |
| जन्तुशालायाम् | चिड़ियाघर में | In the zoo |
| पाटलपुष्पम् | गुलाब | Rose |
| श्वेतम् | श्वेत / सफ़ेद | White |
| नीललोहितम् | जामुनी | Purple |
| केसरम् | केसरिया | Saffron |
| पाटलम् | गुलाबी | Pink |
| हंसः | हंस | Swan |
| बकः | बगुला | Heron |
| शशः | खरगोश | Rabbit |
| प्रावारकम् | कोट | Coat |
| इन्द्रधनुः | इन्द्रधनुष | Rainbow |
| चित्रकारः | चित्रकार | Painter |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
1. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) जपापुष्पस्य वर्णः कः ?
(ख) शुकः केन वर्णेन शोभते ?
(ग) श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः ?
(घ) कः महान् चित्रकारः ?
(ङ) आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति ?
2. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —
(क) आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः कः ?
(ख) कुत्र विविधेषु वर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति ?
(ग) किं बहुवर्णमयम् इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः ?
(घ) चित्रवर्णशुकाः कीदृशाः भवन्ति ?
(ङ) कस्य कस्य वर्णः कृष्णः ?
3. उचितवर्णेन सह शब्दं योजयन्तु —
(पाठ के आधार पर वस्तु को उसके उचित रंग के साथ मिलाइए। NCERT पुस्तक में दिए वर्ण-शब्द: रक्तवर्णः, नीलवर्णः, कृष्णवर्णः, हरितवर्णः, केसरवर्णः, श्वेतवर्णः, पाटलवर्णः, नीललोहितः ।)
| शब्दः (वस्तु) | उचितः वर्णः – उत्तर |
|---|---|
| (क) जपापुष्पम् | रक्तवर्णः (लाल) |
| (ख) पर्णम् / शुकः | हरितवर्णः (हरा) |
| (ग) काकः / पिकः | कृष्णवर्णः (काला) |
| (घ) आकाशम् / शुकस्य पक्षः | नीलवर्णः (नीला) |
| (ङ) हंसः / बकः / प्रावारकम् | श्वेतवर्णः (श्वेत) |
| (च) केसरवर्णं पाटलपुष्पम् | केसरवर्णः (केसरिया) |
| (छ) पाटलम् (गुलाबी पुष्पम्) | पाटलवर्णः (गुलाबी) |
| (ज) नीललोहितं पाटलपुष्पम् | नीललोहितः (जामुनी) |
4. राष्ट्रध्वजस्य समुचितैः वर्णैः अधः प्रदत्तेषु वाक्येषु रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
5. प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
6. रेखाचित्रेषु निर्दिष्टान् वर्णान् पूरयन्तु —
वर्ण-परिचयः (व्याकरण-तालिका)
इस पाठ में आए प्रमुख वर्णवाचक (रंग-वाचक) शब्द एवं संवाद के पात्रों का परिचय सारणी रूप में नीचे दिया गया है – इन्हें याद रखना परीक्षा में सहायक है।
1. वर्णवाचक शब्दाः (रंग-वाचक शब्द)
| संस्कृत वर्णः | हिन्दी | English |
|---|---|---|
| हरितः | हरा | Green |
| कृष्णः | काला | Black |
| रक्तः | लाल | Red |
| नीलः | नीला | Blue |
| पीतः | पीला | Yellow |
| श्वेतः | श्वेत / सफ़ेद | White |
| केसरः | केसरिया | Saffron |
| पाटलः | गुलाबी | Pink |
| नीललोहितः | जामुनी | Purple |
2. संवादस्य पात्राणि एवं तेषां कथनम्
| पात्रम् | संवादे योगदानम् (किस रंग/वस्तु की बात) |
|---|---|
| शिक्षकः (आचार्यः) | संवाद का संचालन; अन्त में ‘परमेश्वरः एव महान् चित्रकारः’ का बोध |
| श्रद्धा | हरित पर्ण एवं हरित शुक; उसका इष्टवर्ण हरित |
| मेधा | कृष्ण काक एवं पिक; श्वेत बक, शश एवं प्रावारक |
| मनीषा | रक्त जपापुष्प, रक्त चञ्चु एवं रक्त पाटलपुष्प |
| आदित्यः | चित्रवर्ण शुकान् द्रष्टुम् इच्छति |
| मञ्जुलः | बहुवर्ण पाटलपुष्प; इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् (सप्त वर्णाः) |
ध्यान दें – वर्णवाचक शब्द विशेषण होते हैं, अतः ये विशेष्य (संज्ञा) के लिङ्ग, वचन एवं विभक्ति के अनुसार बदलते हैं; यथा – हरितः शुकः, हरितानि पर्णानि, श्वेता गौः ।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (पद्यम्)
पाठ के अन्त में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत यह पद्य दिया गया है, जो इस भाव को प्रकट करता है कि सभी वर्णों का रचयिता भगवान् परमेश्वर ही है। (कवि – कल्लडि-कृष्णन् कुट्टी)
रक्तं पीतं श्वेतं चित्रं नीलं शबलितदृग्विभवम् ॥
वर्णविचित्रं गगनं दृष्ट्वा बालास्सर्वे तुष्यन्ति ।
द्रष्टुं सर्वं तस्य समीपं विहगाः विविधाः गच्छन्ति ॥
प्रतिनिमिषं स हि वर्णविशेषः नव्यं रूपं प्राप्नोति ।
गन्धर्वाणां मन्दिरमित्यपि सर्वे मर्त्याः कथयन्ति ॥
प्रतिदिनमेवं गगने सायं रचिता वर्णाः केनैते ।
तुभ्यं सर्वकलाकाराणां नायक! भगवन् नमो नमः ॥
— कल्लडि-कृष्णन् कुट्टी
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. उपरितनानां चित्राणां नामानि वर्णाः च के इति अभिजानन्तु लिखन्तु च ।
2. कक्षायां विद्यमानानां 10 वस्तूनां नामानि वर्णान् च अभिजानन्तु लिखन्तु च ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. पाठ के आरम्भ में किस उद्यान के चित्र की बात की गई है?
2. श्रद्धा का प्रिय रंग कौन-सा है और आचार्य ने यह कैसे अनुमान लगाया?
3. चिड़ियाघर के रंगीन तोतों के पंख कैसे होते हैं?
4. इन्द्रधनुष के विषय में मञ्जुल ने क्या बताया?
5. इस पाठ के अनुसार सबसे बड़ा चित्रकार कौन है और क्यों?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘सः एव महान् चित्रकारः’ पाठ का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस संवाद-पाठ के पात्रों एवं उनके द्वारा बताए गए रंगों का वर्णन कीजिए।
8. योग्यताविस्तरः में दिए गए पद्य का भाव स्पष्ट कीजिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. पाठ के आरम्भ में किस उद्यान के चित्र की बात है?
(क) वृन्दावन-उद्यानम्
(ख) अमृत-उद्यानम् (राष्ट्रपतिभवनस्य)
(ग) नगर-उद्यानम्
(घ) पुष्प-वाटिका
2. जपापुष्पस्य (गुड़हल का) वर्णः कः ?
(क) हरितः
(ख) पीतः
(ग) रक्तः
(घ) श्वेतः
3. काकस्य एवं पिकस्य वर्णः कः ?
(क) नीलः
(ख) कृष्णः
(ग) रक्तः
(घ) पीतः
4. श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः ?
(क) रक्तः
(ख) श्वेतः
(ग) हरितः
(घ) पीतः
5. चित्रवर्णशुकानां पक्षाः कीदृशाः भवन्ति ?
(क) केवलं हरिताः
(ख) नीलाः पीताः रक्ताः च
(ग) केवलं कृष्णाः
(घ) केवलं श्वेताः
6. इन्द्रधनुषि कति वर्णाः भवन्ति ?
(क) पञ्च
(ख) षट्
(ग) सप्त
(घ) अष्ट
7. हंसः, बकः, शशः च केन वर्णेन शोभन्ते ?
(क) श्वेतवर्णेन
(ख) कृष्णवर्णेन
(ग) पीतवर्णेन
(घ) नीलवर्णेन
8. ‘प्रावारकम्’ इत्यस्य अर्थः कः ?
(क) पुष्पम्
(ख) कोट (वस्त्रम्)
(ग) पक्षी
(घ) वृक्षः
9. आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति ?
(क) पुष्पाणि
(ख) काकान्
(ग) चित्रवर्णान् शुकान्
(घ) हंसान्
10. पाठानुसारं ‘महान् चित्रकारः’ कः ?
(क) आचार्यः
(ख) मञ्जुलः
(ग) परमेश्वरः
(घ) कविः
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पाठानुसार परमेश्वर ही महान् चित्रकार है।
कारण (R): उसी ने सृष्टि में पत्तों, पुष्पों, पक्षियों एवं आकाश के विविध सुन्दर रंग रचे हैं।
2. अभिकथन (A): शुकः (तोता) हरितवर्णेन शोभते।
कारण (R): काकस्य एवं पिकस्य वर्णः अपि हरितः अस्ति।
3. अभिकथन (A): इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् अस्ति।
कारण (R): इन्द्रधनुषि सप्त वर्णाः भवन्ति।
4. अभिकथन (A): आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः अस्ति।
कारण (R): हंसः, बकः एवं शशः अपि श्वेतवर्णाः भवन्ति।
5. अभिकथन (A): विविध रंगों से ही संसार सुन्दर एवं जीवन मनोरम बनता है।
कारण (R): सम्पूर्ण निसर्ग बहुवर्णमय है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- सभी वर्णवाचक शब्द (हरितः, कृष्णः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, केसरः, पाटलः, नीललोहितः) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी अर्थ सहित याद रखें।
- किस वस्तु/पक्षी का कौन-सा रंग है – यह तालिका रूप में याद करें (तोता-हरित, कौआ-कृष्ण, गुड़हल-रक्त, हंस-श्वेत)।
- राष्ट्रध्वज के रंग संस्कृत में याद रखें – उपरि केसरः, मध्ये श्वेतः, अधः हरितः, केन्द्रे नीलः (चक्रम्)।
- ‘एकपदेन’ प्रश्नों में केवल एक शब्द तथा ‘पूर्णवाक्येन’ प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें।
- वर्णवाचक शब्द विशेषण हैं – ये विशेष्य के वचन/लिङ्ग के अनुसार बदलते हैं (हरितः शुकः, हरितानि पर्णानि)।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- कौआ/कोयल को हरा या तोते को काला बता देना – काक/पिक कृष्ण, शुक हरित होता है।
- ‘पाटलपुष्पम्’ का अर्थ ‘कमल’ लिख देना – पाठानुसार इसका अर्थ ‘गुलाब’ है।
- इन्द्रधनुष में रंगों की संख्या गलत लिखना – उसमें सात (सप्त) रंग होते हैं।
- वर्ण-शब्द के लिङ्ग/वचन का मिलान न करना (श्वेता गौः, श्वेतम् प्रावारकम्)।
- राष्ट्रध्वज के रंगों का क्रम उलट देना – ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत, नीचे हरा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 पाठ 8 ‘सः एव महान् चित्रकारः’ किस विषय पर है?
यह पाठ एक गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध वर्णों (रंगों) का परिचय कराता है। इसका मुख्य भाव यह है कि इस रंग-बिरंगी सुन्दर सृष्टि का चित्रकार स्वयं परमेश्वर है।
पाठ के अनुसार महान् चित्रकार कौन है?
पाठ के अनुसार महान् चित्रकार परमेश्वर है, क्योंकि उसी ने पत्तों, पुष्पों, पक्षियों एवं आकाश में इतने विविध एवं सुन्दर रंग भरे हैं।
इस पाठ में किन-किन रंगों के नाम संस्कृत में आए हैं?
इस पाठ में हरितः (हरा), कृष्णः (काला), रक्तः (लाल), नीलः (नीला), पीतः (पीला), श्वेतः (श्वेत), केसरः (केसरिया), पाटलः (गुलाबी) एवं नीललोहितः (जामुनी) रंगों के नाम आए हैं।
मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
