Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 8 Solutions — सः एव महान् चित्रकारः

सः एव महान् चित्रकारः पाठ में प्रकृति के रंगों के संस्कृत नाम सीखें। छह अभ्यासों के उत्तर, सही रंग-मिलान, नौ फूलों की पहचान, अमरकोश का परिचय और कक्षा की दस वस्तुओं का नमूना परियोजना-उत्तर पुस्तक के क्रम में दिया है।

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 8 (अष्टमः पाठः) पाठ: सः एव महान् चित्रकारः Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का अष्टम पाठ ‘सः एव महान् चित्रकारः’ एक रोचक गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध वर्णों (रंगों) का परिचय कराता है। पाठ का आरम्भ राष्ट्रपति-भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान के चित्र से होता है, जिसके बारे में पाठ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब (पाटलपुष्प) तथा पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प बताता है। ये पाठ में दिए विवरण हैं, वर्तमान उद्यान-गणना का दावा नहीं। आचार्य छात्रों श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आदित्य एवं मञ्जुल के साथ बातचीत करते हुए पत्तों, पक्षियों, पुष्पों एवं वस्त्रों के विविध रंगों – हरित, कृष्ण, रक्त, श्वेत, पीत, नील, केसर, पाटल एवं नीललोहित – पर चर्चा करते हैं। अन्त में आचार्य बताते हैं कि इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं और सम्पूर्ण प्रकृति बहुवर्णमयी है। पाठ का केन्द्रीय भाव यह है कि इस रंगीन एवं सुन्दर संसार का वर्ण-योजक चित्रकार स्वयं परमेश्वर है – “सः एव महान् चित्रकारः।”

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ संवाद-शैली (वार्तालाप) में लिखा गया है। इसमें एक आचार्य अपने छात्रों के साथ अमृत-उद्यान के चित्र को देखते हुए प्रकृति के रंगों का बोध कराते हैं। प्रत्येक छात्र अपने आस-पास की वस्तुओं – तोता, कौआ, कोयल, हंस, बगुला, खरगोश, गुड़हल, गुलाब आदि – के रंग बताता है। संवाद के माध्यम से सरल संस्कृत में रंग-वाचक शब्द (वर्णवाचक शब्द) सिखाए गए हैं। पाठ का उद्देश्य छात्रों में प्रकृति के प्रति प्रेम एवं सौन्दर्य-बोध जगाना तथा यह भाव भरना है कि इस विविधरंगी सृष्टि का रचयिता परमेश्वर ही सबसे बड़ा चित्रकार है।

मूल पाठ एवं अन्वय (संवादः)

(मूल संवाद NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक के साथ सरल हिन्दी भावार्थ।)

उद्यानस्य चित्रम् उपरि प्रदर्शितम् । एतत् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानम् अमृत-उद्यानम् अस्ति । अत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति । सामान्यतः पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति । रमणीयः निसर्गः विविधैः वर्णैः सर्वेषां चित्तम् आकर्षति । अस्मिन् पाठे तादृशानां वर्णानां परिचयं प्राप्नुमः । — पाठ-प्रवेशः
भावार्थऊपर एक उद्यान का चित्र दिखाया गया है। यह राष्ट्रपति-भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान है। यहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब (पाटलपुष्प) हैं तथा सामान्यतः पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प भी हैं। सुन्दर प्रकृति अपने विविध रंगों से सबके मन को आकर्षित करती है। इस पाठ में हम वैसे ही रंगों का परिचय प्राप्त करते हैं।
शिक्षकः – वयम् अत्र किं किं पश्यामः ?
श्रद्धा – सर्वत्र विविधानि पुष्पाणि, हरितानि पर्णानि, खगाः, जन्तवः च सन्ति इति पश्यामः ।
शिक्षकः – सत्यम् । एवमेव तेषां वर्णाः अपि विविधाः । यथा श्रद्धा वदति ‘हरितानि पर्णानि’ इति, अत्र पर्णस्य कः वर्णः ?
छात्राः – (सर्वे) हरितः ।
श्रद्धा – अत्र वृक्षस्य उपरि शुकः अस्ति । सः अपि हरितवर्णेन शोभते ।
शिक्षकः – श्रद्धे ! भवत्याः इष्टवर्णः हरितः इति चिन्तयामि । अत एव हरितवर्णम् एव पश्यति खलु ।
भावार्थशिक्षक पूछते हैं – हम यहाँ क्या-क्या देखते हैं? श्रद्धा कहती है – हम सर्वत्र विविध पुष्प, हरे पत्ते, पक्षी एवं जीव-जन्तु देखते हैं। शिक्षक कहते हैं – सही है, इनके रंग भी विविध हैं। श्रद्धा के अनुसार पत्ते का रंग हरा है, और सब छात्र भी ‘हरित’ कहते हैं। श्रद्धा बताती है कि पेड़ पर तोता भी है, जो हरे रंग से शोभायमान है। शिक्षक हँसते हुए कहते हैं – श्रद्धा! तुम्हारा प्रिय रंग हरा लगता है, इसीलिए तुम्हें हरा रंग ही दिखाई देता है।
मेधा – आचार्य ! अत्र काकः अपि अस्ति, यस्य वर्णः कृष्णः । एवं पिकस्य अपि वर्णः कृष्णः ।
शिक्षकः – आम् । उत्तमं निरीक्षणं भवत्याः । छात्राः ! पश्यन्तु, अत्र पुष्पाणि अपि सन्ति । मनीषे ! पश्यतु जपापुष्पम् । वदतु, अस्य वर्णः कः ?
मनीषा – रक्तवर्णः आचार्य ! शुकस्य चञ्चुः अपि रक्तवर्णा । पाटलपुष्पम् अपि रक्तवर्णेन युक्तम् ।
शिक्षकः – शोभनम् । चित्रवर्णाः शुकाः अपि अत्र सन्ति इति जानन्ति किम् ?
आदित्यः – आचार्य ! ते कीदृशाः भवन्ति ? वयं द्रष्टुम् इच्छामः ।
शिक्षकः – तादृशान् शुकान् वयं प्रायः जन्तुशालायां पश्यामः । तेषां पक्षाः नीलाः पीताः रक्ताः च भवन्ति ।
भावार्थमेधा कहती है – आचार्य! यहाँ कौआ भी है, जिसका रंग काला है; इसी प्रकार कोयल का रंग भी काला है। शिक्षक प्रशंसा करते हैं – तुम्हारा निरीक्षण उत्तम है। फिर वे मनीषा से गुड़हल (जपापुष्प) का रंग पूछते हैं। मनीषा कहती है – लाल! तोते की चोंच भी लाल है तथा गुलाब भी लाल रंग का है। शिक्षक रंग-बिरंगे तोतों की बात करते हैं। आदित्य उन्हें देखने की इच्छा प्रकट करता है। शिक्षक बताते हैं कि ऐसे रंगीन तोते हम प्रायः चिड़ियाघर में देखते हैं, जिनके पंख नीले, पीले एवं लाल होते हैं।
मञ्जुलः – आचार्य ! पाटलपुष्पाणि अपि विविधवर्णयुक्तानि भवन्ति । मम उद्याने पीतवर्णानि, श्वेतवर्णानि, नीललोहितवर्णानि, केसरवर्णानि च पाटलपुष्पाणि सन्ति ।
शिक्षकः – उत्तमम् । पश्यन्तु, हंसः श्वेतः । तथा अन्ये के श्वेतवर्णाः ?
मेधा – आचार्य ! बकः शशः च । तथा भवतः प्रावारकम् अपि श्वेतम् ।
शिक्षकः – आम् । सम्यक् । सर्वे स्वस्य अन्येषां च वस्त्राणां वर्णान् अवलोकयन्तु ।
मञ्जुलः – आचार्य ! इन्द्रधनुः तु बहुवर्णमयं खलु । तत्र सप्त वर्णाः भवन्ति ।
शिक्षकः – आम् । सर्वः अपि निसर्गः बहुवर्णमयः । तेन संसारः सुन्दरः । वर्णैः एव अस्माकं जीवनम् अपि मनोरमं भवति । तत्र ‘वर्णयोजकः चित्रकारः कः’ इति जानन्ति किम् ?
सर्वे – (उच्चैः) परमेश्वरः, परमेश्वरः ।
शिक्षकः – आम् । सः एव महान् चित्रकारः ।
भावार्थमञ्जुल कहता है – आचार्य! गुलाब भी अनेक रंगों के होते हैं; मेरे बगीचे में पीले, श्वेत, जामुनी (नीललोहित) एवं केसरिया रंग के गुलाब हैं। शिक्षक हंस को श्वेत बताकर अन्य श्वेत वस्तुएँ पूछते हैं। मेधा कहती है – बगुला एवं खरगोश, तथा आपका कोट (प्रावारक) भी श्वेत है। शिक्षक सबको अपने एवं दूसरों के वस्त्रों के रंग देखने को कहते हैं। मञ्जुल बताता है कि इन्द्रधनुष बहुरंगी है, उसमें सात रंग होते हैं। शिक्षक कहते हैं – सम्पूर्ण प्रकृति बहुवर्णमयी है, इसी से संसार सुन्दर है और रंगों से ही हमारा जीवन मनोरम बनता है। वे पूछते हैं – इन रंगों का योजक (चित्रकार) कौन है? सब छात्र ऊँचे स्वर में कहते हैं – परमेश्वर, परमेश्वर! शिक्षक कहते हैं – हाँ, वही महान् चित्रकार है।

सार (Hindi Summary)

‘सः एव महान् चित्रकारः’ पाठ एक सुन्दर गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध रंगों का परिचय कराता है। पाठ का आरम्भ राष्ट्रपति-भवन के अमृत-उद्यान के चित्र से होता है, जहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब तथा पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प हैं। आचार्य अपने छात्रों श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आदित्य एवं मञ्जुल से बातचीत करते हुए प्रकृति की वस्तुओं के रंग पूछते हैं।

संवाद में बताया जाता है कि पत्ते एवं तोता हरे रंग के हैं; कौआ एवं कोयल काले रंग के हैं; गुड़हल का पुष्प, तोते की चोंच एवं गुलाब लाल रंग के हैं। चिड़ियाघर में मिलने वाले रंगीन तोतों के पंख नीले, पीले एवं लाल होते हैं। गुलाब अनेक रंगों – पीले, श्वेत, जामुनी एवं केसरिया – के होते हैं। हंस, बगुला, खरगोश एवं आचार्य का कोट श्वेत रंग के हैं। मञ्जुल बताता है कि इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं।

अन्त में आचार्य यह भाव प्रकट करते हैं कि सम्पूर्ण प्रकृति बहुरंगी है और इन्हीं रंगों से संसार सुन्दर तथा हमारा जीवन मनोरम बनता है। जब वे पूछते हैं कि इन रंगों का चित्रकार कौन है, तो सभी छात्र एक स्वर में उत्तर देते हैं – ‘परमेश्वर’। इस प्रकार पाठ का मुख्य संदेश यह है कि इस विविधरंगी, सुन्दर सृष्टि का रचयिता एवं वर्ण-योजक स्वयं परमेश्वर ही है – वही सबसे बड़ा चित्रकार है। पाठ छात्रों में प्रकृति-प्रेम, सौन्दर्य-बोध तथा संस्कृत के रंग-वाचक शब्दों का ज्ञान विकसित करता है।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
निसर्गःप्रकृतिNature
हरितानिहरे रंग केGreen
पर्णानिपत्तेLeaves
जन्तवःप्राणी, जीव-जन्तुAnimals
खगाःपक्षीBirds
वर्णमयःरंगीन, रंगों से युक्तColourful
शुकःतोताParrot
इष्टवर्णःप्रिय रंगFavourite colour
काकःकौआCrow
पिकःकोयलCuckoo
जपापुष्पम्गुड़हलHibiscus
चञ्चुःचोंचBeak
रक्तःलालRed
नीलःनीलाBlue
पीतःपीलाYellow
पक्षाःपंखWings
जन्तुशालायाम्चिड़ियाघर मेंIn the zoo
पाटलपुष्पम्गुलाबRose
श्वेतम्श्वेत / सफ़ेदWhite
नीललोहितम्जामुनीPurple
केसरम्केसरियाSaffron
पाटलम्गुलाबीPink
हंसःहंसSwan
बकःबगुलाHeron
शशःखरगोशRabbit
प्रावारकम्कोटCoat
इन्द्रधनुःइन्द्रधनुषRainbow
चित्रकारःचित्रकारPainter

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

1. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —

(क) जपापुष्पस्य वर्णः कः ?

उत्तररक्तः (लाल) ।

(ख) शुकः केन वर्णेन शोभते ?

उत्तरहरितवर्णेन (हरे रंग से) ।

(ग) श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः ?

उत्तरहरितः (हरा) ।

(घ) कः महान् चित्रकारः ?

उत्तरपरमेश्वरः ।

(ङ) आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति ?

उत्तरशुकान् (चित्रवर्णान् शुकान् – रंगीन तोतों को) ।

2. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —

(क) आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः कः ?

उत्तरआचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः अस्ति ।

(ख) कुत्र विविधेषु वर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति ?

उत्तरमञ्जुलस्य उद्याने विविधेषु वर्णेषु (पीत-श्वेत-नीललोहित-केसरवर्णेषु) पाटलपुष्पाणि सन्ति ।

(ग) किं बहुवर्णमयम् इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः ?

उत्तरइन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् अस्ति इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः । तत्र सप्त वर्णाः भवन्ति ।

(घ) चित्रवर्णशुकाः कीदृशाः भवन्ति ?

उत्तरचित्रवर्णशुकाः बहुवर्णयुक्ताः भवन्ति । तेषां पक्षाः नीलाः पीताः रक्ताः च भवन्ति ।

(ङ) कस्य कस्य वर्णः कृष्णः ?

उत्तरकाकस्य पिकस्य च वर्णः कृष्णः (कौआ एवं कोयल का रंग काला) अस्ति ।

3. उचितवर्णेन सह शब्दं योजयन्तु —

पृष्ठ 93 के रंग-चिह्नों का शब्दों से मिलान करें। यहाँ वस्तुओं का नाम नहीं माँगा गया है। चित्र के दोनों स्तम्भों को ऊपर से नीचे गिनें। केसरवर्णः के लिए पुस्तक का सबसे नीचे दायाँ पीताभ रंग-चिह्न है।

पुस्तक का शब्दरंगरंग-चिह्न का स्थान
रक्तवर्णःलालबाईं ओर ऊपर से दूसरा
नीलवर्णःनीलादाईं ओर ऊपर से दूसरा
कृष्णवर्णःकालादाईं ओर सबसे ऊपर
हरितवर्णःहराबाईं ओर ऊपर से तीसरा
केसरवर्णःकेसरिया / पीताभदाईं ओर सबसे नीचे
श्वेतवर्णःसफ़ेददाईं ओर ऊपर से तीसरा — सफ़ेद, किनारा बना है
पाटलवर्णःगुलाबीबाईं ओर सबसे ऊपर
नीललोहितःजामुनीबाईं ओर सबसे नीचे

4. राष्ट्रध्वजस्य समुचितैः वर्णैः अधः प्रदत्तेषु वाक्येषु रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —

उत्तर (क) उपरि केसरः वर्णः अस्ति । (ख) मध्ये श्वेतः वर्णः अस्ति । (ग) अधः हरितः वर्णः अस्ति । (घ) ध्वजस्य केन्द्रे नीलः वर्णः अस्ति । (अशोकचक्रम्)

5. प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —

उत्तर (क) केशानां वर्णः कः ? → कृष्णः (काला) । (ख) आकाशस्य वर्णः कः ? → नीलः (नीला) । (ग) कदलीफलस्य वर्णः कः ? → पीतः (पीला) । (घ) तृणस्य वर्णः कः ? → हरितः (हरा) । (ङ) महिषस्य वर्णः कः ? → कृष्णः (काला) । (च) मयूरस्य वर्णः कः ? → नीलः (नीला – चित्रवर्णः अपि) ।

6. रेखाचित्रेषु निर्दिष्टान् वर्णान् पूरयन्तु —

पृष्ठ 94 के आठ रेखाचित्रों में दिए मुख्य रंग भरें। सफ़ेद भाग सफ़ेद ही रखें; फूलों के पत्ते हरे कर सकते हैं। चित्र के नीचे वर्णः के लिए लिखा विशेषण पुल्लिङ्ग में है, इसलिए पाटलपुष्पम् के नीचे भी पाटलः लिखा है।

स्थान — बाएँ से दाएँचित्रनिर्दिष्ट रंग
ऊपर 1शुकःहरितः — हरा
ऊपर 2पाटलपुष्पम्पाटलः — गुलाबी
ऊपर 3युतकम्नीलः — नीला
ऊपर 4जपापुष्पम्रक्तः — लाल
नीचे 1नारङ्गफलम्केसरः — केसरिया
नीचे 2गौःश्वेतः — सफ़ेद
नीचे 3कदलीफलम्पीतः — पीला
नीचे 4काकःकृष्णः — काला

अभ्यास 5 में सामान्य पाठानुसार रंग लिखे हैं। पके केले का छिलका पीला और मोर का गला प्रायः नीला होता है; पूरे मोर में अनेक रंग हैं। बालों, आकाश और जीवों का रंग हर स्थिति में एक ही नहीं रहता।

वर्ण-परिचयः (व्याकरण-तालिका)

इस पाठ में आए प्रमुख वर्णवाचक (रंग-वाचक) शब्द एवं संवाद के पात्रों का परिचय सारणी रूप में नीचे दिया गया है – इन्हें याद रखना परीक्षा में सहायक है।

1. वर्णवाचक शब्दाः (रंग-वाचक शब्द)

संस्कृत वर्णःहिन्दीEnglish
हरितःहराGreen
कृष्णःकालाBlack
रक्तःलालRed
नीलःनीलाBlue
पीतःपीलाYellow
श्वेतःश्वेत / सफ़ेदWhite
केसरःकेसरियाSaffron
पाटलःगुलाबीPink
नीललोहितःजामुनीPurple

2. संवादस्य पात्राणि एवं तेषां कथनम्

पात्रम्संवादे योगदानम् (किस रंग/वस्तु की बात)
शिक्षकः (आचार्यः)संवाद का संचालन; अन्त में ‘परमेश्वरः एव महान् चित्रकारः’ का बोध
श्रद्धाहरित पर्ण एवं हरित शुक; उसका इष्टवर्ण हरित
मेधाकृष्ण काक एवं पिक; श्वेत बक, शश एवं प्रावारक
मनीषारक्त जपापुष्प, रक्त चञ्चु एवं रक्त पाटलपुष्प
आदित्यःचित्रवर्ण शुकान् द्रष्टुम् इच्छति
मञ्जुलःबहुवर्ण पाटलपुष्प; इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् (सप्त वर्णाः)

ध्यान दें – वर्णवाचक शब्द विशेषण होते हैं, अतः ये विशेष्य (संज्ञा) के लिङ्ग, वचन एवं विभक्ति के अनुसार बदलते हैं; यथा – हरितः शुकः, हरितानि पर्णानि, श्वेता गौः ।

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः (पद्यम्)

पाठ के अन्त में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत यह पद्य दिया गया है, जो इस भाव को प्रकट करता है कि सभी वर्णों का रचयिता भगवान् परमेश्वर ही है। (कवि – कल्लडि-कृष्णन् कुट्टी)

सायङ्काले त्वम्बरकोणे विलिखति प्रकृतिर्वर्णचयम् ।
रक्तं पीतं श्वेतं चित्रं नीलं शबलितदृग्विभवम् ॥
वर्णविचित्रं गगनं दृष्ट्वा बालास्सर्वे तुष्यन्ति ।
द्रष्टुं सर्वं तस्य समीपं विहगाः विविधाः गच्छन्ति ॥
प्रतिनिमिषं स हि वर्णविशेषः नव्यं रूपं प्राप्नोति ।
गन्धर्वाणां मन्दिरमित्यपि सर्वे मर्त्याः कथयन्ति ॥
प्रतिदिनमेवं गगने सायं रचिता वर्णाः केनैते ।
तुभ्यं सर्वकलाकाराणां नायक! भगवन् नमो नमः ॥
— कल्लडि-कृष्णन् कुट्टी
भावार्थसायंकाल आकाश के कोने में प्रकृति अनेक रंगों का समूह (लाल, पीला, श्वेत, विचित्र, नीला – आँखों को मोहने वाला वैभव) लिख देती है। इस रंग-बिरंगे आकाश को देखकर सभी बालक प्रसन्न होते हैं तथा उसे देखने के लिए विविध पक्षी उसके समीप जाते हैं। प्रत्येक क्षण यह वर्ण-विशेष नया रूप धारण करता है, इसी से लोग इसे गन्धर्वों का मन्दिर कहते हैं। प्रतिदिन सायंकाल आकाश में ये रंग किसने रचे? हे समस्त कलाकारों के नायक भगवन्! आपको बार-बार नमस्कार है।

अमरकोश में रंगों के शब्द — पृष्ठ 96

पुस्तक का यह विस्तार प्राचीन कोश में रंग-संबंधी पर्यायों का परिचय देता है। सभी शब्द आज के किसी एक रंग-नमूने के ठीक बराबर नहीं हैं; अर्थ प्रसंग से समझें।

समूहपुस्तक के उदाहरण
सफ़ेद / उजलाशुक्लः, शुभ्रः, श्वेतः, धवलः
गहरा / कालाकृष्णः, असितः, श्यामः, कालः
पीलापीतः, हरिद्राभः
हराहरितः, हरित्
लाललोहितः, रोहितः, रक्तः, शोणः
सफ़ेदी मिला लाल / गुलाबीपाटलः
मिश्रित / चितकबराचित्रम्, शबलः, कर्बुरः

गौरः पुस्तक के उजले और पीताभ दोनों प्रसंगों में आता है। नीलः भी प्राचीन शब्दसमूह में गहरे वर्ण के साथ है; आधुनिक नीलः = नीला सीखते समय इस प्रसंग-भेद को पहचानें।

प्राकृतिक रंगों में ऊपर लाल गुड़हल और लाल-गुलाबी गुलाब, नीचे गुलाबी कमल और नीली अपराजिता
ऊपर बाएँ जपाकुसुमम्, ऊपर दाएँ पाटलम्, नीचे बाएँ कमलम्, नीचे दाएँ अपराजिता। AI से बनाया मौलिक अध्ययन-चित्र; यह NCERT चित्र की प्रति या असली फोटो नहीं है।

परियोजनाकार्यम् — दो कार्य

1. पुस्तक पृष्ठ 97 के नौ फूलों के नाम और दिखे रंग

क्रम ऊपर की पंक्ति से, बाएँ से दाएँ है। नाम पुस्तक के अनुसार और रंग उन्हीं चित्रों के हैं; फूल की सभी किस्मों का रंग एक जैसा होना आवश्यक नहीं है। यहाँ चम्पकः का चित्र सफ़ेद है। कर्णोरः पुस्तक में छपा नाम है।

संस्कृत नामपहचानचित्र में वर्णः
पाटलम्गुलाबरक्तः / गाढ़ा पाटलः
गन्धपुष्पम्गेंदापीतः
सूर्यकान्तिःसूरजमुखीपीतः — पंखुड़ियाँ; केन्द्र गहरा
कमलम्कमलपाटलः
चम्पकःपुस्तक में नामित सफ़ेद पुष्पश्वेतः — बीच में पीताभ
कर्णोरःपुस्तक में नामित पीला पुष्पपीतः
अपराजिताअपराजितानीलः / नीललोहितः
जपाकुसुमम्गुड़हलरक्तः
मल्लिकाचमेलीश्वेतः

2. कक्षा की दस वस्तुएँ — नमूना उत्तर

अपनी कक्षा में वस्तु और उसका वास्तविक रंग देखकर लिखें। नीचे अलग-अलग लिङ्गों में रंग के विशेषण का मेल दिखाने वाले नमूने हैं; पुस्तकं हरितम् का अर्थ यहाँ हरी जिल्द वाली पुस्तक है।

  1. श्यामपट्टः कृष्णः अस्ति।
  2. खटिका श्वेता अस्ति।
  3. लेखनी नीला अस्ति।
  4. पुस्तकं हरितम् अस्ति।
  5. द्वारं श्वेतम् अस्ति।
  6. गवाक्षः श्वेतः अस्ति।
  7. घटी कृष्णा अस्ति।
  8. आसनं नीलम् अस्ति।
  9. स्यूतः कृष्णः अस्ति।
  10. मापिका श्वेता अस्ति।

पाटलम् पुष्प का नाम होने पर गुलाब है; पाटलः रंग का नाम होने पर गुलाबी है। हरितः शुकः, हरिता लेखनी, हरितम् पुस्तकम् — विशेषण संज्ञा के लिङ्ग के अनुसार बदलेगा।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

1. पाठ के आरम्भ में किस उद्यान के चित्र की बात की गई है?

उत्तरपाठ के आरम्भ में राष्ट्रपति-भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान के चित्र की बात की गई है। वहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब तथा पाँच हजार से अधिक ऋतु-पुष्प हैं, जो विविध रंगों से सबके मन को आकर्षित करते हैं।

2. श्रद्धा का प्रिय रंग कौन-सा है और आचार्य ने यह कैसे अनुमान लगाया?

उत्तरश्रद्धा का प्रिय रंग हरित (हरा) है। आचार्य ने यह अनुमान इसलिए लगाया क्योंकि श्रद्धा बार-बार हरी वस्तुएँ – हरे पत्ते एवं हरा तोता – ही बता रही थी; अतः आचार्य ने कहा कि उसे हरा रंग ही दिखाई देता है।

3. चिड़ियाघर के रंगीन तोतों के पंख कैसे होते हैं?

उत्तरचिड़ियाघर में मिलने वाले चित्रवर्ण (रंगीन) तोतों के पंख नीले, पीले एवं लाल रंग के होते हैं। ये साधारण हरे तोतों से भिन्न तथा बहुत सुन्दर एवं आकर्षक होते हैं।

4. इन्द्रधनुष के विषय में मञ्जुल ने क्या बताया?

उत्तरमञ्जुल ने बताया कि इन्द्रधनुष बहुवर्णमय (बहुरंगी) होता है। उसमें सात रंग होते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि सम्पूर्ण प्रकृति अनेक रंगों से युक्त एवं सुन्दर है।

5. इस पाठ के अनुसार सबसे बड़ा चित्रकार कौन है और क्यों?

उत्तरइस पाठ के अनुसार सबसे बड़ा चित्रकार परमेश्वर है, क्योंकि उसी ने इस सम्पूर्ण सृष्टि में पत्तों, पुष्पों, पक्षियों एवं आकाश के इतने विविध एवं सुन्दर रंग भरे हैं। इन्हीं रंगों से संसार सुन्दर एवं जीवन मनोरम बनता है।

अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

6. ‘सः एव महान् चित्रकारः’ पाठ का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ का केन्द्रीय भाव यह है कि इस विविधरंगी एवं सुन्दर सृष्टि का रचयिता तथा वर्ण-योजक स्वयं परमेश्वर है। पाठ गुरु-शिष्य संवाद के रूप में है, जिसमें आचार्य छात्रों के साथ प्रकृति की वस्तुओं के रंगों पर चर्चा करते हैं – पत्ते एवं तोता हरे, कौआ एवं कोयल काले, गुड़हल एवं गुलाब लाल, हंस एवं खरगोश श्वेत आदि।अन्त में आचार्य बताते हैं कि सम्पूर्ण प्रकृति बहुरंगी है, इन्हीं रंगों से संसार सुन्दर एवं हमारा जीवन मनोरम बनता है। जब वे रंगों के चित्रकार के विषय में पूछते हैं, तो सभी छात्र एक स्वर में ‘परमेश्वर’ कहते हैं। इस प्रकार पाठ हमें प्रकृति-प्रेम, सौन्दर्य-बोध तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा का संदेश देता है।

7. इस संवाद-पाठ के पात्रों एवं उनके द्वारा बताए गए रंगों का वर्णन कीजिए।

उत्तरइस पाठ में आचार्य (शिक्षक) तथा पाँच छात्र – श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आदित्य एवं मञ्जुल – पात्र हैं। आचार्य संवाद का संचालन करते हुए प्रत्येक छात्र से वस्तुओं के रंग पूछते हैं। श्रद्धा हरे पत्तों एवं हरे तोते की बात करती है; उसका प्रिय रंग भी हरा है।मेधा काले कौए एवं कोयल तथा श्वेत बगुले, खरगोश एवं आचार्य के कोट की बात करती है। मनीषा लाल गुड़हल, लाल चोंच एवं लाल गुलाब बताती है। आदित्य रंगीन तोतों को देखना चाहता है। मञ्जुल अनेक रंगों के गुलाब तथा सात रंगों वाले इन्द्रधनुष का उल्लेख करता है। इस प्रकार सभी पात्र मिलकर प्रकृति के विविध रंगों का परिचय कराते हैं और अन्त में सब परमेश्वर को ही महान् चित्रकार स्वीकार करते हैं।

8. योग्यताविस्तरः में दिए गए पद्य का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तरयोग्यताविस्तरः में दिया गया पद्य (कवि – कल्लडि-कृष्णन् कुट्टी) सायंकालीन आकाश के सौन्दर्य का वर्णन करता है। कवि कहते हैं कि सायंकाल प्रकृति आकाश के कोने में लाल, पीले, श्वेत, नीले एवं विचित्र रंगों का समूह लिख देती है, जो आँखों को मोह लेता है।इस रंग-बिरंगे आकाश को देखकर सभी बालक प्रसन्न होते हैं और विविध पक्षी उसकी ओर जाते हैं। प्रत्येक क्षण आकाश के रंग नया रूप धारण करते हैं, इसीलिए इसे गन्धर्वों का मन्दिर कहा जाता है। अन्त में कवि प्रश्न करते हैं कि ये रंग किसने रचे, और उत्तर रूप में समस्त कलाकारों के नायक भगवान् को बार-बार नमस्कार करते हैं। पद्य का भाव यही है कि सभी रंगों का रचयिता परमेश्वर ही है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. पाठ के आरम्भ में किस उद्यान के चित्र की बात है?

(क) वृन्दावन-उद्यानम्

(ख) अमृत-उद्यानम् (राष्ट्रपतिभवनस्य)

(ग) नगर-उद्यानम्

(घ) पुष्प-वाटिका

उत्तर(ख) अमृत-उद्यानम् (राष्ट्रपतिभवनस्य)।

2. जपापुष्पस्य (गुड़हल का) वर्णः कः ?

(क) हरितः

(ख) पीतः

(ग) रक्तः

(घ) श्वेतः

उत्तर(ग) रक्तः।

3. काकस्य एवं पिकस्य वर्णः कः ?

(क) नीलः

(ख) कृष्णः

(ग) रक्तः

(घ) पीतः

उत्तर(ख) कृष्णः।

4. श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः ?

(क) रक्तः

(ख) श्वेतः

(ग) हरितः

(घ) पीतः

उत्तर(ग) हरितः।

5. चित्रवर्णशुकानां पक्षाः कीदृशाः भवन्ति ?

(क) केवलं हरिताः

(ख) नीलाः पीताः रक्ताः च

(ग) केवलं कृष्णाः

(घ) केवलं श्वेताः

उत्तर(ख) नीलाः पीताः रक्ताः च।

6. इन्द्रधनुषि कति वर्णाः भवन्ति ?

(क) पञ्च

(ख) षट्

(ग) सप्त

(घ) अष्ट

उत्तर(ग) सप्त।

7. हंसः, बकः, शशः च केन वर्णेन शोभन्ते ?

(क) श्वेतवर्णेन

(ख) कृष्णवर्णेन

(ग) पीतवर्णेन

(घ) नीलवर्णेन

उत्तर(क) श्वेतवर्णेन।

8. ‘प्रावारकम्’ इत्यस्य अर्थः कः ?

(क) पुष्पम्

(ख) कोट (वस्त्रम्)

(ग) पक्षी

(घ) वृक्षः

उत्तर(ख) कोट (वस्त्रम्)।

9. आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति ?

(क) पुष्पाणि

(ख) काकान्

(ग) चित्रवर्णान् शुकान्

(घ) हंसान्

उत्तर(ग) चित्रवर्णान् शुकान्।

10. पाठानुसारं ‘महान् चित्रकारः’ कः ?

(क) आचार्यः

(ख) मञ्जुलः

(ग) परमेश्वरः

(घ) कविः

उत्तर(ग) परमेश्वरः।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(क), 8-(ख), 9-(ग), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): पाठानुसार परमेश्वर ही महान् चित्रकार है।

कारण (R): उसी ने सृष्टि में पत्तों, पुष्पों, पक्षियों एवं आकाश के विविध सुन्दर रंग रचे हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): शुकः (तोता) हरितवर्णेन शोभते।

कारण (R): काकस्य एवं पिकस्य वर्णः अपि हरितः अस्ति।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – काक एवं कोयल का वर्ण कृष्ण है, हरित नहीं।

3. अभिकथन (A): इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् अस्ति।

कारण (R): इन्द्रधनुषि सप्त वर्णाः भवन्ति।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः अस्ति।

कारण (R): हंसः, बकः एवं शशः अपि श्वेतवर्णाः भवन्ति।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता (दोनों श्वेत-वर्ण के पृथक् उदाहरण हैं)।

5. अभिकथन (A): विविध रंगों से ही संसार सुन्दर एवं जीवन मनोरम बनता है।

कारण (R): सम्पूर्ण निसर्ग बहुवर्णमय है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • सभी वर्णवाचक शब्द (हरितः, कृष्णः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, केसरः, पाटलः, नीललोहितः) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी अर्थ सहित याद रखें।
  • किस वस्तु/पक्षी का कौन-सा रंग है – यह तालिका रूप में याद करें (तोता-हरित, कौआ-कृष्ण, गुड़हल-रक्त, हंस-श्वेत)।
  • राष्ट्रध्वज के रंग संस्कृत में याद रखें – उपरि केसरः, मध्ये श्वेतः, अधः हरितः, केन्द्रे नीलः (चक्रम्)।
  • ‘एकपदेन’ प्रश्नों में केवल एक शब्द तथा ‘पूर्णवाक्येन’ प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें।
  • वर्णवाचक शब्द विशेषण हैं – ये विशेष्य के वचन/लिङ्ग के अनुसार बदलते हैं (हरितः शुकः, हरितानि पर्णानि)।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • कौआ/कोयल को हरा या तोते को काला बता देना – काक/पिक कृष्ण, शुक हरित होता है।
  • ‘पाटलपुष्पम्’ का अर्थ ‘कमल’ लिख देना – पाठानुसार इसका अर्थ ‘गुलाब’ है।
  • इन्द्रधनुष में रंगों की संख्या गलत लिखना – उसमें सात (सप्त) रंग होते हैं।
  • वर्ण-शब्द के लिङ्ग/वचन का मिलान न करना (श्वेता गौः, श्वेतम् प्रावारकम्)।
  • राष्ट्रध्वज के रंगों का क्रम उलट देना – ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत, नीचे हरा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 पाठ 8 ‘सः एव महान् चित्रकारः’ किस विषय पर है?

यह पाठ एक गुरु-शिष्य संवाद है, जो प्रकृति के विविध वर्णों (रंगों) का परिचय कराता है। इसका मुख्य भाव यह है कि इस रंग-बिरंगी सुन्दर सृष्टि का चित्रकार स्वयं परमेश्वर है।

पाठ के अनुसार महान् चित्रकार कौन है?

पाठ के अनुसार महान् चित्रकार परमेश्वर है, क्योंकि उसी ने पत्तों, पुष्पों, पक्षियों एवं आकाश में इतने विविध एवं सुन्दर रंग भरे हैं।

इस पाठ में किन-किन रंगों के नाम संस्कृत में आए हैं?

इस पाठ में हरितः (हरा), कृष्णः (काला), रक्तः (लाल), नीलः (नीला), पीतः (पीला), श्वेतः (श्वेत), केसरः (केसरिया), पाटलः (गुलाबी) एवं नीललोहितः (जामुनी) रंगों के नाम आए हैं।

पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 8, पृष्ठ 89–97; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। उत्तर और व्याख्याएँ ClearStudy के स्वतंत्र अध्ययन-सहायक हैं। खुली परियोजना के उत्तर नमूने हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।

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