Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 7 Solutions (NCERT 2026–27) – शूराः वयं धीराः वयम्
This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 7 ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ – the patriotic song (देशभक्ति-गीतम्) by श्रीधर भास्कर वर्णेकर – with its मूल पाठ (पद्य), अन्वय, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यास (वयम् अभ्यासं कुर्मः) along with the शब्दरूप / सर्वनाम tables, extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- कवि-परिचय / प्रसंग
- मूल पद्यम् (गीतम्) + अन्वय
- सार / भावार्थ (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
- अवधेयांशः & योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का सप्तम पाठ ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ एक ओजपूर्ण देशभक्ति-गीत है। इसकी रचना सुप्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत-कवि श्रीधर भास्कर वर्णेकर ने की है। गीत का आरम्भ एक संवाद से होता है, जिसमें विद्यार्थी आचार्य से चर्चा करते हैं कि ‘वयम्’ (हम) शब्द सभी भारतीयों के लिए प्रयुक्त हुआ है, क्योंकि हम सब भारतीय शूर एवं वीर हैं; तत्पश्चात् सभी मिलकर सस्वर गीत गाते हैं। गीत में पाँच पद्य हैं। इसका केन्द्रीय भाव है – हम भारतीय शूर, वीर, धीर, गुणवान्, बलवान् एवं विजयी हैं। हमारे हृदय में लोभ, कपट एवं भय नहीं है; हम तेजस्वी, नीतिमान् एवं निर्भय होकर देश-सेवा करते हैं तथा अन्त में परमात्मा से उज्ज्वल विजय एवं मंगल की प्रार्थना करते हैं। यह गीत बालकों में देशभक्ति, साहस, आत्मविश्वास एवं सेवा-भाव जगाता है।
कवि-परिचय / प्रसंग
इस गीत के रचनाकार श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं। वे सुप्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत-कवि थे। वर्णेकर महोदय का जन्म महाराष्ट्र राज्य के नागपुर नगर में हुआ था। उन्होंने अनेक काव्य, नाटक एवं गीत रचे। उनकी साहित्य-सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति-पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। प्रस्तुत गीत ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ एक देशभक्ति-गीत है, जिसमें प्रत्येक भारतीय को शूर, वीर एवं धीर बताते हुए राष्ट्र-सेवा तथा परमात्मा से विजय एवं मंगल की कामना की गई है। गीत को सस्वर, सम्मिलित स्वर में गाने पर इसका ओज एवं भाव और भी मुखर हो उठता है।
मूल पद्यम् (गीतम्) + अन्वय
(गीत के पाँचों पद्य ज्यों-के-त्यों, साथ में सरल अन्वय।)
गुणशालिनो बलशालिनो जयगामिनो नितराम् ॥ १ ॥
शूरा वयम् ॥ (ध्रुवपदम्)
जनसेवका अतिभावुकाः शुभचिन्तका नियतम् ॥ २ ॥
शूरा वयम् ॥
ऊर्जस्वला वर्चस्वला अतिनिश्चला विजये ॥ ३ ॥
शूरा वयम् ॥
यामो वयं समराङ्गणं विजयार्थिनो बालाः ॥ ४ ॥
शूरा वयम् ॥
जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं नो देहि परमात्मन् ॥ ५ ॥
शूरा वयम् ॥
सार / भावार्थ (Hindi Summary)
‘शूराः वयं धीराः वयम्’ एक ओजपूर्ण देशभक्ति-गीत है, जिसमें प्रत्येक भारतीय अपने स्वाभिमान, साहस एवं श्रेष्ठ गुणों का गौरवपूर्ण वर्णन करता है। पाठ के आरम्भ में विद्यार्थी एवं आचार्य के बीच संवाद होता है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि गीत में आया ‘वयम्’ (हम) शब्द सभी भारतीयों के लिए है, क्योंकि हम सब भारतीय शूर एवं वीर हैं। फिर सभी मिलकर सस्वर गीत गाते हैं।
पहले पद्य में कहा गया है कि हम भारतीय शूर, धीर एवं अत्यन्त वीर हैं तथा गुणवान्, बलवान् एवं सदा विजय की ओर बढ़ने वाले हैं। दूसरे पद्य में कवि बताते हैं कि हम सदा दृढ़ मन वाले, लोभ-रहित एवं साहसप्रिय हैं तथा निश्चित रूप से जन-सेवक, अतिभावुक एवं सबका शुभ चाहने वाले हैं। तीसरे पद्य में कहा गया है कि हमारे हृदय में धन की अधिक कामना, सुख की वासना अथवा कपट नहीं है; हम स्फूर्तिवान्, तेजस्वी एवं विजय के विषय में पूर्णतः अविचल हैं।
चौथे पद्य में सभी बालक स्वयं को भयरहित, नीतिमान् एवं दृढ़-शक्ति वाला बताते हुए कहते हैं कि हम विजय चाहने वाले होकर युद्ध-क्षेत्र (कर्तव्य-क्षेत्र) में जाते हैं। अन्तिम पाँचवें पद्य में परमात्मा से प्रार्थना की गई है – हे जगदीश! हे परमेश! हे सकलेश! हे भगवन्! हमें परम उज्ज्वल विजय एवं मंगल प्रदान कीजिए। इस प्रकार यह गीत बालकों में देशभक्ति, साहस, सेवा-भाव, नीति एवं आत्मविश्वास की प्रेरणा भरता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| शूराः | पराक्रमी, वीर | Brave / valiant |
| धीराः | धैर्यवान् | Patient / courageous |
| सुतराम् / नितराम् | अत्यधिक रूप से | Exceedingly / abundantly |
| गुणशालिनः | गुणवान् | Virtuous |
| बलशालिनः | बलवान् | Strong |
| जयगामिनः | विजय की ओर बढ़ने वाले | Moving towards victory |
| दृढमानसाः | दृढ़ मन वाले | Determined / firm-minded |
| गतलालसाः | लालच रहित | Without greed |
| प्रियसाहसाः | साहसी, साहसप्रिय | Brave / fond of courage |
| नियतम् | निश्चित रूप से | Certainly / definitely |
| जनसेवकाः | लोगों की सेवा करने वाले | Servants of the people |
| शुभचिन्तकाः | शुभ (भला) चाहने वाले | Well-wishers |
| वञ्चना | कपट, छल | Deceit / fraud |
| ऊर्जस्वलाः | स्फूर्तिवान्, फुर्तीले | Energetic |
| वर्चस्वलाः | तेजस्वी | Radiant / lustrous |
| अतिनिश्चलाः | अविचल, दृढ़ निर्णय वाले | Unwavering / steadfast |
| गतभीतयः | भयरहित | Fearless |
| धृतनीतयः | नीति का आचरण करने वाले | Righteous / following ethics |
| दृढशक्तयः | दृढ़-शक्ति वाले, शक्तिमान् | Powerful |
| निखिलाः | सम्पूर्ण, सभी | All / entire |
| समराङ्गणम् | युद्ध का मैदान | Battlefield |
| विजयार्थिनः | विजय चाहने वाले | Seekers of victory |
| यामः | (हम) जाते हैं | (We) go |
| सकलेश | सभी के ईश (स्वामी) | Lord of all |
| परमोज्ज्वलम् | परम उज्ज्वल | Extremely bright |
| नः | हमें | Us / to us |
| देहि | दीजिए | (You) give |
वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
1. एतत् सम्पूर्णं गीतं सस्वरं गायन्तु, लिखन्तु, कण्ठस्थं च कुर्वन्तु ।
2. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) शूराः के ?
(ख) वयं कीदृशमानसाः स्मः ?
(ग) वयं कीदृशचिन्तकाः स्मः ?
(घ) वयं कुत्र अतिनिश्चलाः स्मः ?
(ङ) वयं विजयार्थिनः कुत्र यामः ?
3. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु —
यथा – शूराः वयम् = शूरः अहम् । (बहुवचन → एकवचन तथा एकवचन → बहुवचन)
| दत्त-पदम् | वचनपरिवर्तनम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) शूराः वयम् | शूरः अहम् (यथा) |
| वीराः वयम् | वीरः अहम् |
| (ख) बलशालिनः | बलशाली |
| जयगामिनः | जयगामी |
| (ग) दृढमानसाः | दृढमानसः |
| प्रियसाहसाः | प्रियसाहसः |
| (घ) अतिभावुकाः | अतिभावुकः |
| शुभचिन्तकाः | शुभचिन्तकः |
| (ङ) धनकामना | धनकामनाः |
| वञ्चना | वञ्चनाः |
| (च) वर्चस्वलाः | वर्चस्वलः |
| अतिनिश्चलाः | अतिनिश्चलः |
4. स्तम्भौ मेलयन्तु उत्तरं च लिखन्तु —
(स्तम्भ ‘अ’ की पंक्ति को स्तम्भ ‘ब’ की उपयुक्त पंक्ति से मिलाकर गीत के अनुसार पूरी पंक्ति बनाइए।)
| स्तम्भः (अ) | स्तम्भः (ब) – सही मेल (उत्तराणि) |
|---|---|
| (क) गतभीतयो धृतनीतयो | दृढशक्तयो निखिलाः |
| (ख) यामो वयं समराङ्गणं | विजयार्थिनो बालाः |
| (ग) जगदीश हे ! परमेश हे ! | सकलेश हे भगवन् ! |
| (घ) जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं | नो देहि परमात्मन् ! |
| (ङ) जनसेवका अतिभावुकाः | शुभचिन्तका नियतम् |
| (च) ऊर्जस्वला वर्चस्वला | अतिनिश्चला विजये |
5. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु —
यथा – शूरः (एकवचनम्) → शूराः (बहुवचनम्) ।
| एकवचनम् | बहुवचनम् (उत्तर) |
|---|---|
| शूरः (यथा) | शूराः |
| (क) धीरः | धीराः |
| (ख) वीरः | वीराः |
| (ग) जनसेवकः | जनसेवकाः |
| (घ) धनकामना | धनकामनाः |
| (ङ) निखिलः | निखिलाः |
| (च) बालः | बालाः |
6. उदाहरणं दृष्ट्वा अधोलिखितानि पदानि परस्परं संयोज्य वाक्यानि रचयन्तु —
यथा – छात्रः पठति । (कर्ता एवं क्रिया का पुरुष-वचन मिलाकर वाक्य बनाइए।)
| कर्ता (अ) | उचिता क्रिया (ब) | वाक्यम् (उत्तर) |
|---|---|---|
| छात्रः (यथा) | पठति | छात्रः पठति । |
| (क) छात्रः | पठति | छात्रः पठति । |
| (ख) छात्रौ | पठतः | छात्रौ पठतः । |
| (ग) छात्राः | पठन्ति | छात्राः पठन्ति । |
| (घ) अहम् | पठामि | अहं पठामि । |
| (ङ) आवाम् | पठावः | आवां पठावः । |
| (च) वयम् | पठामः | वयं पठामः । |
| (छ) त्वम् | पठसि | त्वं पठसि । |
| (ज) युवाम् | पठथः | युवां पठथः । |
| (झ) यूयम् | पठथ | यूयं पठथ । |
7. कोष्ठकात् उचितं पदं स्वीकृत्य रिक्तस्थाने लिखन्तु —
यथा – तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् → सा । (एषा/अहम्/सा)
8. उदाहरणमनुसृत्य उचितेन पदेन रिक्तस्थानं पूरयन्तु —
यथा – नायिका नृत्यति । (नृत्) (कर्ता के अनुसार धातु का लट्-लकार रूप लगाइए।)
अवधेयांशः & योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
1. सर्वनाम-पदानि (प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि)
नामपद का मूलरूप ‘प्रातिपदिकम्’ कहलाता है (यथा – ‘रामः’ का मूल ‘राम’)। नीचे चार सर्वनाम-शब्दों के प्रथमा-विभक्ति के रूप दिए गए हैं।
तद् (वह / he, she, it)
| लिङ्गम् | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| पुंलिङ्गम् | सः | तौ | ते |
| स्त्रीलिङ्गम् | सा | ते | ताः |
| नपुंसकलिङ्गम् | तत् | ते | तानि |
एतद् (यह / this)
| लिङ्गम् | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| पुंलिङ्गम् | एषः | एतौ | एते |
| स्त्रीलिङ्गम् | एषा | एते | एताः |
| नपुंसकलिङ्गम् | एतत् | एते | एतानि |
अस्मद् (मैं / हम) तथा युष्मद् (तुम) – तीनों लिङ्गों में समान रूप
| शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| अस्मद् | अहम् | आवाम् | वयम् |
| युष्मद् | त्वम् | युवाम् | यूयम् |
2. शब्दरूपाणि (योग्यताविस्तरः – प्रथमा-विभक्तिः)
पाठ में प्रयुक्त कुछ शब्दों के एकवचन, द्विवचन एवं बहुवचन रूप ध्यानपूर्वक पढ़ें, समझें एवं स्मरण करें।
| शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| भारतीय | भारतीयः | भारतीयौ | भारतीयाः |
| धीर | धीरः | धीरौ | धीराः |
| शूर | शूरः | शूरौ | शूराः |
| जनसेवक | जनसेवकः | जनसेवकौ | जनसेवकाः |
| शुभचिन्तक | शुभचिन्तकः | शुभचिन्तकौ | शुभचिन्तकाः |
| बाल | बालः | बालौ | बालाः |
| निखिल | निखिलः | निखिलौ | निखिलाः |
| कामना | कामना | कामने | कामनाः |
| वासना | वासना | वासने | वासनाः |
| वञ्चना | वञ्चना | वञ्चने | वञ्चनाः |
| समराङ्गण | समराङ्गणम् | समराङ्गणे | समराङ्गणानि |
| शोभन | शोभनम् | शोभने | शोभनानि |
| नियत | नियतम् | नियते | नियतानि |
3. परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. अधः प्रदत्तेषु महापुरुषेषु एकस्य लघुजीवनवृत्तं लिखन्तु – स्वामी विवेकानन्दः / शिवाजिः / राणाप्रतापः ।
2. अस्मिन् पाठे प्रयुक्तानां प्रथमाविभक्तेः बहुवचनान्त-पदानां सङ्ग्रहणं कुर्वन्तु । दशशब्दानां वाक्ये प्रयोगम् अपि कुर्वन्तु ।
3. अन्यत् संस्कृतदेशभक्तिगीतम् अन्विष्य तस्य सामूहिकं वाचनं कुर्वन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. इस गीत के रचनाकार कौन हैं? उनके विषय में संक्षेप में लिखिए।
2. गीत में ‘वयम्’ शब्द किनके लिए प्रयुक्त हुआ है?
3. हमारे हृदय में किन तीन दोषों का अभाव बताया गया है?
4. विजयार्थी बालक कहाँ जाते हैं और कैसे?
5. अन्तिम पद्य में परमात्मा से क्या प्रार्थना की गई है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ गीत का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. पाठ के आरम्भ में आए संवाद का सार लिखिए तथा बताइए कि उससे क्या शिक्षा मिलती है।
8. इस गीत में कौन-कौन से गुण भारतीयों के बताए गए हैं? सोदाहरण लिखिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. इस गीत के रचनाकार कौन हैं?
(क) कालिदासः
(ख) श्रीधर भास्कर वर्णेकरः
(ग) भर्तृहरिः
(घ) बाणभट्टः
2. कवि वर्णेकर का जन्म किस नगर में हुआ था?
(क) पुणे
(ख) मुम्बई
(ग) नागपुर
(घ) काशी
3. ‘वयम्’ शब्द गीत में किनके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) केवल छात्रों के लिए
(ख) सभी भारतीयों के लिए
(ग) केवल सैनिकों के लिए
(घ) केवल आचार्य के लिए
4. इस गीत में कुल कितने पद्य हैं?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छह
5. ‘जयगामिनः’ का अर्थ है—
(क) धन कमाने वाले
(ख) विजय की ओर बढ़ने वाले
(ग) भयभीत होने वाले
(घ) सोने वाले
6. तीसरे पद्य के अनुसार हमारे हृदय में क्या नहीं है?
(क) साहस
(ख) वञ्चना (कपट)
(ग) नीति
(घ) तेज
7. विजयार्थी बालक कहाँ जाते हैं?
(क) विद्यालयम्
(ख) समराङ्गणम्
(ग) उद्यानम्
(घ) देवालयम्
8. ‘गतभीतयः’ का अर्थ है—
(क) भयरहित
(ख) धनवान्
(ग) आलसी
(घ) दुःखी
9. अन्तिम पद्य में बालक किससे प्रार्थना करते हैं?
(क) राजा से
(ख) आचार्य से
(ग) परमात्मा (भगवन्) से
(घ) मित्र से
10. बालक परमात्मा से क्या माँगते हैं?
(क) धनम्
(ख) जयमङ्गलं परमोज्ज्वलम् (उज्ज्वल विजय एवं मंगल)
(ग) सुखम् एव
(घ) विश्रामम्
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ एक देशभक्ति-गीत है।
कारण (R): इस गीत में प्रत्येक भारतीय को शूर, वीर एवं धीर बताकर राष्ट्र-सेवा की प्रेरणा दी गई है।
2. अभिकथन (A): इस गीत के रचनाकार श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं।
कारण (R): वर्णेकर महोदय एक प्राचीन वैदिक ऋषि थे जिन्होंने ऋग्वेद की रचना की।
3. अभिकथन (A): हमारे हृदय में कपट (वञ्चना) नहीं है।
कारण (R): हम तेजस्वी, स्फूर्तिवान् एवं नीतिमान् हैं तथा विजय में अविचल रहते हैं।
4. अभिकथन (A): विजयार्थी बालक समराङ्गण में जाते हैं।
कारण (R): वे भयरहित, नीतिमान् एवं दृढ़-शक्ति से युक्त होकर विजय चाहते हैं।
5. अभिकथन (A): अन्तिम पद्य में परमात्मा से उज्ज्वल विजय एवं मंगल की प्रार्थना की गई है।
कारण (R): बालक परमात्मा को जगदीश, परमेश एवं सकलेश कहकर सम्बोधित करते हैं।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- पाँचों पद्य कण्ठस्थ करें – पद्य-लेखन, रिक्तस्थान-पूर्ति एवं स्तम्भ-मेलन के प्रश्न प्रायः इन्हीं से आते हैं।
- शब्दार्थ (शूराः, धीराः, गतलालसाः, ऊर्जस्वलाः, समराङ्गणम्, देहि आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- तद्, एतद्, अस्मद् एवं युष्मद् सर्वनामों के प्रथमा-विभक्ति के रूप तालिका सहित याद करें।
- ‘एकपदेन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में केवल एक उपयुक्त पद ही लिखें (जैसे – वयम्, दृढमानसाः)।
- वचन-परिवर्तन में एकवचन ↔ बहुवचन का ध्यान रखें (शूरः → शूराः, धीरः → धीराः)।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- कवि वर्णेकर को वैदिक ऋषि समझ लेना – वे आधुनिक संस्कृत-कवि थे।
- मात्रा एवं विसर्ग की अशुद्धि – गुणशालिनः, जयगामिनः, ऊर्जस्वलाः को शुद्ध लिखें।
- लट्-लकार में कर्ता के अनुसार क्रिया-रूप न लगाना (यथा – छात्रौ पठतः, वयं पठामः)।
- सर्वनाम-रूपों में लिङ्ग/वचन का मिलान न करना (तद् पुं. बहुवचन = ते, एतद् नपुं. बहुवचन = एतानि)।
- ‘समराङ्गणम्’ को स्त्रीलिङ्ग मान लेना – यह नपुंसकलिङ्ग शब्द है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 7 ‘शूराः वयं धीराः वयम्’ किस प्रकार का पाठ है और इसके रचनाकार कौन हैं?
यह एक देशभक्ति-गीत (पद्य पाठ) है, जिसमें पाँच पद्य हैं। इसके रचनाकार सुप्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत-कवि श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं, जिनका जन्म नागपुर में हुआ था।
‘शूराः वयं धीराः वयम्’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – ‘हम शूर (पराक्रमी) हैं, हम धीर (धैर्यवान्) हैं’। यह गीत प्रत्येक भारतीय के साहस, वीरता एवं श्रेष्ठ गुणों का गौरवपूर्ण वर्णन करता है।
इस गीत के अन्तिम पद्य में क्या प्रार्थना की गई है?
अन्तिम पद्य में बालक परमात्मा को जगदीश, परमेश, सकलेश एवं भगवन् कहकर प्रार्थना करते हैं कि हे परमात्मन्! हमें परम उज्ज्वल विजय एवं मंगल (जयमङ्गलं परमोज्ज्वलम्) प्रदान कीजिए।
गीत, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
