Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 6 Solutions (NCERT 2026–27) – अहं प्रातः उत्तिष्ठामि

This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 6 ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ (षष्ठः पाठः) – a दिनचर्या (daily-routine) lesson in which सन्दीप and खुशी describe their morning routine and learn to tell the time in Sanskrit. The page includes the मूल पाठ with अन्वय/भावार्थ, सार (Hindi summary), शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यास (वयम् अभ्यासं कुर्मः) along with the संख्या / समय (time-telling) tables, extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 6 (षष्ठः पाठः) पाठ: अहं प्रातः उत्तिष्ठामि Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का छठा पाठ ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ एक सरल गद्य-पाठ है, जो दिनचर्या (daily routine) पर आधारित है। पाठ में सन्दीपः एवं खुशी नामक दो विद्यार्थी अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या उत्तमपुरुष में बताते हैं – प्रातः पाँच बजे उठना, भूमि-वन्दना एवं माता-पिता को प्रणाम करना, उषःपान करना, शौच, मुखप्रक्षालन एवं दन्तधावन करना, सूर्य-नमस्कार एवं योगासन, स्वाध्याय, परिसर की स्वच्छता, स्नान, प्रार्थना एवं गीतापाठ, चरण-वन्दना, प्रातराश तथा आठ बजे विद्यालय जाना। पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को संस्कृत में समय बताना (पञ्चवादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन आदि) तथा १ से १२ तक की संख्याएँ सिखाना है। साथ ही पाठ नियमित, अनुशासित एवं सुसंस्कृत दिनचर्या के महत्त्व का संदेश देता है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ संवाद-शैली में आरम्भ होता है। सन्दीपः एवं खुशी कहते हैं – ‘नमो नमः । मम नाम सन्दीपः / खुशी । अहं मम दिनचर्यां वदामि ।’ इसके पश्चात् वे चित्रों के साथ क्रमशः अपनी समय-सहित दिनचर्या प्रस्तुत करते हैं। पाठ में संस्कृत में समय बताने की रीति सिखाई गई है – पूरे घंटे (वादनम्), पौन घंटा अधिक (सपाद = सवा), आधा घंटा अधिक (सार्ध = साढ़े) तथा पौने (पादोन)। साथ ही ‘संख्या’ तालिका में एकम् से द्वादश तक की संख्याएँ दी गई हैं। यह पाठ छात्रों को व्यवहार-योग्य (functional) संस्कृत सिखाता है।

मूल पाठ (दिनचर्या) एवं अन्वय

(पाठ का मूल गद्य ज्यों-का-त्यों; दायीं ओर हिन्दी भावार्थ/अन्वय।)

नमो नमः । मम नाम सन्दीपः । अहं मम दिनचर्यां वदामि ।
नमो नमः । मम नाम खुशी । अहम् अपि मम दिनचर्यां वदामि ॥
— दीपकम्, षष्ठः पाठः ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’
मूल वाक्यम् (संस्कृतम्)भावार्थः / अन्वयः (हिन्दी)
अहं प्रतिदिनं प्रातः पञ्चवादने (५ः००) उत्तिष्ठामि ।मैं प्रतिदिन प्रातः पाँच बजे उठता/उठती हूँ ।
प्रथमं भूमेः वन्दनं करोमि, मातापितरौ च नमामि ।सबसे पहले भूमि को वन्दना करता/करती हूँ और माता-पिता को प्रणाम करता/करती हूँ ।
ततः उषःपानं करोमि, कवोष्णं जलं पिबामि ।फिर उषःपान करता/करती हूँ, गुनगुना जल पीता/पीती हूँ ।
अहं सपाद-पञ्चवादने (५ः१५) शौचं करोमि, तदनन्तरं मुखप्रक्षालनं दन्तधावनं च करोमि ।मैं सवा पाँच बजे शौच करता/करती हूँ, उसके बाद मुँह धोना एवं दाँतों का मञ्जन करता/करती हूँ ।
अहं सार्ध-पञ्चवादने (५ः३०) सूर्य-नमस्कारं योगासनं च करोमि ।मैं साढ़े पाँच बजे सूर्य-नमस्कार एवं योगासन करता/करती हूँ ।
अहं षड्वादने (६ः००) स्वाध्यायं करोमि ।मैं छह बजे स्वाध्याय करता/करती हूँ ।
अहं सार्ध-षड्वादने (६ः३०) मम परिसरं स्वच्छं करोमि ।मैं साढ़े छह बजे अपने परिसर को स्वच्छ करता/करती हूँ ।
ततः पादोन-सप्तवादने (६ः४५) स्नानं करोमि ।फिर पौने सात बजे स्नान करता/करती हूँ ।
अहं सप्तवादने (७ः००) प्रार्थनां करोमि, गीतापाठं च करोमि ।मैं सात बजे प्रार्थना करता/करती हूँ और गीतापाठ करता/करती हूँ ।
तदनन्तरं मातुः पितुः च चरणवन्दनं करोमि ।उसके बाद माता एवं पिता की चरण-वन्दना करता/करती हूँ ।
अहं सार्ध-सप्तवादने (७ः३०) प्रातराशं करोमि ।मैं साढ़े सात बजे अल्पाहार (नाश्ता) करता/करती हूँ ।
तत्पश्चात् अष्टवादने (८ः००) विद्यालयं गच्छामि ।उसके पश्चात् आठ बजे विद्यालय जाता/जाती हूँ ।

सार (Hindi Summary)

‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ पाठ में सन्दीप एवं खुशी नामक दो विद्यार्थी संस्कृत में अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या बताते हैं। दोनों कहते हैं – ‘नमो नमः, मेरा नाम सन्दीप / खुशी है, मैं अपनी दिनचर्या बताता/बताती हूँ।’ इसके पश्चात् वे क्रम से अपनी दिनचर्या समय के साथ प्रस्तुत करते हैं।

वे प्रतिदिन प्रातः पाँच बजे उठते हैं। सबसे पहले भूमि को प्रणाम करते हैं तथा माता-पिता को नमस्कार करते हैं। फिर उषःपान करते हैं और गुनगुना जल पीते हैं। सवा पाँच बजे शौच, मुँह धोना तथा दाँत साफ़ करते हैं। साढ़े पाँच बजे सूर्य-नमस्कार एवं योगासन करते हैं तथा छह बजे स्वाध्याय करते हैं। साढ़े छह बजे अपने परिसर की सफ़ाई करते हैं और पौने सात बजे स्नान करते हैं।

सात बजे वे प्रार्थना एवं गीतापाठ करते हैं तथा माता-पिता की चरण-वन्दना करते हैं। साढ़े सात बजे नाश्ता (प्रातराश) करते हैं और आठ बजे विद्यालय जाते हैं। इस प्रकार यह पाठ एक आदर्श, नियमित एवं अनुशासित दिनचर्या प्रस्तुत करता है। साथ ही यह छात्रों को संस्कृत में समय बताना (पञ्चवादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन) तथा एकम् से द्वादश तक की संख्याएँ सिखाता है। पाठ का संदेश है – अनुशासित, स्वच्छ एवं संस्कारयुक्त जीवन ही उन्नति का आधार है।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
दिनचर्याम्दैनिक कार्य, दिनचर्याDaily routine
वदामिबोल रहा/रही हूँ, कहता/कहती हूँI speak / I say
प्रतिदिनम्हर दिन, नित्यDaily
उत्तिष्ठामिजागता/जागती हूँ, उठता/उठती हूँI wake up / get up
भूमेःभूमि का / पृथ्वी काOf the earth
वन्दनम्अभिवादन, नमनSalutation
मातापितरौमाता एवं पिता (दोनों)Mother and father
उषःपानम्सुबह गुनगुना जल पीनाDrinking warm water in the morning
कवोष्णम्गुनगुना (हल्का गर्म)Lukewarm
मुखप्रक्षालनम्मुँह धोनाFacewash
तदनन्तरम्उसके पश्चात्After that
दन्तधावनम्दाँतों का मञ्जनBrushing teeth
योगासनम्योगासनYogasana
स्वाध्यायम्स्वयं अध्ययनSelf-study
परिसरम्आस-पास का स्थान, परिसरSurroundings / premises
स्नानम्नहानाBath
प्रार्थनाम्प्रार्थनाPrayer
चरणवन्दनम्चरण-स्पर्श, पैर छूनाTouching the feet (in reverence)
प्रातराशम्अल्पाहार, नाश्ताBreakfast
विद्यालयम्विद्यालय को, पाठशाला कोTo the school
गच्छामिजाता/जाती हूँI go
इदानीम्अभी, सम्प्रतिNow

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

1. पिट्टकातः शिष्टाचारस्य पदानि चित्वा लिखन्तु —

(शब्द-पेटिका में से शिष्टाचार/सद्व्यवहार के पद (शब्द) चुनकर लिखिए। पेटिका में सद्गुण एवं दुर्गुण दोनों मिले हुए हैं; केवल शिष्टाचार के पद चुनने हैं।)

उत्तर (शिष्टाचारस्य पदानि) यथा – गुरुवन्दनम् । वृद्धसेवा, अतिथिसत्कारः, मातृप्रेम, पितृभक्तिः, ज्येष्ठेषु आदरः, कनिष्ठेषु प्रीतिः, बन्धुषु प्रीतिः, प्राणिषु दया, प्रियवचनम्, सत्यकथनम्, सत्पात्रे दानम्, सर्वेषु मैत्रीभावः, अहिंसा, समयपालनम्, स्वच्छता, प्रकृतिरक्षणम्, स्वाभिमानम्, परोपकारः, भ्रातृषु भगिनीषु च स्नेहः । (अशिष्टाचारस्य पदानि – न चित्वा त्यजनीयानि): कलहः, अहङ्कारः, परस्परद्वेषः, असूया, हिंसा ।

2. उदाहरणानुगुणं समयं संख्याभिः लिखन्तु —

(उदाहरण के अनुसार समय को अंकों में लिखिए।) यथा – पादोन-सप्तवादनम् – ६ः४५

समयः (अक्षरैः)संख्याभिः (उत्तर)
सार्ध-दशवादनम्१०ः३०
दशवादनम्१०ः००
सपाद-षड्वादनम्६ः१५
सार्ध-चतुर्वादनम्४ः३०
पादोन-एकादशवादनम्१०ः४५

3. उदाहरणानुगुणं समयम् अक्षरैः लिखन्तु —

(उदाहरण के अनुसार समय को संस्कृत शब्दों में लिखिए।) यथा – ०६ः०० – षड्वादनम्

समयः (संख्याभिः)अक्षरैः (उत्तर)
०५ः३०सार्ध-पञ्चवादनम्
०९ः४५पादोन-दशवादनम्
१२ः००द्वादशवादनम्
०६ः४५पादोन-सप्तवादनम्
११ः३०सार्ध-एकादशवादनम्

4. उदाहरणानुगुणं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु —

(उदाहरण के अनुसार प्रश्न बनाइए।) यथा – सः सार्ध-सप्तवादने अध्ययनं करोति । – सः कदा अध्ययनं करोति ?

वाक्यम्प्रश्ननिर्माणम् (उत्तर)
(क) सा सपाद-नववादने विद्यालयं गच्छति ।सा कदा विद्यालयं गच्छति ?
(ख) सतीशः सार्ध-द्वादशवादने भोजनं करोति ।सतीशः कदा भोजनं करोति ?
(ग) यानं पञ्चवादने आगच्छति ।यानं कदा आगच्छति ?
(घ) गोपालः षड्वादने गोदोहनं करोति ।गोपालः कदा गोदोहनं करोति ?
(ङ) माता दशवादने कार्यालयं गच्छति ।माता कदा कार्यालयं गच्छति ?

5. स्वस्य दिनचर्यां सरलवाक्यैः लिखन्तु —

(अपनी दिनचर्या सरल वाक्यों में लिखिए।) यथा – अहं प्रातः षड्वादने उत्तिष्ठामि ।

उत्तर (नमूना) अहं प्रातः षड्वादने उत्तिष्ठामि । अहं सपाद-षड्वादने दन्तधावनं मुखप्रक्षालनं च करोमि । अहं सार्ध-षड्वादने स्नानं करोमि । अहं सप्तवादने प्रार्थनां स्वाध्यायं च करोमि । अहं सार्ध-सप्तवादने प्रातराशं करोमि । अहम् अष्टवादने विद्यालयं गच्छामि । (छात्र अपनी वास्तविक दिनचर्या के अनुसार समय बदल सकते हैं।)

6. वाक्येषु शिष्टाचारपदं योजयन्तु —

(वाक्यों में उपयुक्त शिष्टाचार-पद जोड़िए। पेटिका – नियमपालनं, सेवां, मैत्रीभावः, साहाय्यं, सत्कारं, दयाभावः) यथा – युवकः मातापित्रोः सेवां करोति ।

उत्तर (क) सा दुर्बलानां साहाय्यं करोति । (ख) सर्वेषु प्राणिषु दयाभावः भवतु । (ग) सर्वे छात्राः पाठशालायाः नियमपालनं कुर्वन्तु । (घ) वयं सर्वे अतिथीनां सत्कारं कुर्मः । (ङ) परस्परं छात्रेषु मैत्रीभावः भवतु ।

अत्र इदम् अवधेयम् (समय-तालिकाः)

संस्कृत में समय बताने के लिए घंटे को वादनम् कहते हैं। पूरे घंटे के साथ सपाद (सवा, +१५ मि.), सार्ध (साढ़े, +३० मि.) तथा पादोन (पौने, −१५ मि. अर्थात् अगले घंटे से १५ मि. कम) जोड़ते हैं।

1. संख्या (एकम् – द्वादश)

अङ्कःसंस्कृतम्अङ्कःसंस्कृतम्
एकम्सप्त
द्वेअष्ट
त्रीणिनव
चत्वारि१०दश
पञ्च११एकादश
षट्१२द्वादश

2. समय-निर्देशः (इदानीं कः समयः ?)

समयः (समय)संस्कृतम्
५ः००पञ्च-वादनम्
६ः००षड्-वादनम्
७ः००सप्त-वादनम्
८ः००अष्ट-वादनम्
५ः१५ (सवा)सपाद-पञ्चवादनम्
६ः१५सपाद-षड्वादनम्
५ः३० (साढ़े)सार्ध-पञ्चवादनम्
६ः३०सार्ध-षड्वादनम्
५ः४५ (पौने ६)पादोन-षड्वादनम्
६ः४५ (पौने ७)पादोन-सप्तवादनम्

ध्यातव्यम् – पादोन का अर्थ है ‘एक चौथाई कम’; अतः पादोन-सप्तवादनम् = ७ बजने में १५ मिनट कम = ६ः४५ ।

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः – भारतीयज्ञान-परम्परायां समयः घटीयन्त्राणि च

प्राचीन भारत में लोग समय जानने के लिए सूर्य की गति देखते थे और इसके लिए अनेक विज्ञान-यन्त्र बनाए। ऐसे यन्त्र प्रायः प्रसिद्ध देवालयों में देखे जा सकते हैं।

यन्त्रम् / स्थानम्विवरणम्
सूर्यमन्दिरम् – कोणार्कः (ओडिशा)मन्दिर के चक्र (चक्राणि) समय-निर्देशक के रूप में प्रसिद्ध हैं।
घटिकायन्त्रम् – जन्तर-मन्तर, जयपुरसूर्य की छाया से समय बताने वाला बृहत् यन्त्र।
मिश्रयन्त्रम् – जन्तर-मन्तर, दिल्लीविविध खगोलीय गणनाओं हेतु यन्त्र।

प्रातः-स्मरणम् — कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

भूमि-वन्दना — समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले । विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥

परियोजनाकार्यम् (Project Work)

1. स्फोरकपत्रे घटीनां चित्राणि रचयन्तु, तेषु विविधान् रङ्गान् पूरयन्तु, संस्कृतेन समयं च लिखन्तु ।

मार्गदर्शनम्यह गतिविधि-कार्य है। चार्ट/स्फोरक-पत्र पर अलग-अलग घड़ियों के चित्र बनाइए, उनमें रंग भरिए तथा प्रत्येक घड़ी के नीचे संस्कृत में समय (यथा – पञ्चवादनम्, सपाद-षड्वादनम्, सार्ध-सप्तवादनम्) लिखिए।

2. मात्रा / पित्रा सह चर्चां कृत्वा स्वस्याः / स्वस्य दिनचर्यां संस्कृतेन लिखन्तु ।

मार्गदर्शनम्माता या पिता के साथ चर्चा करके अपनी पूरी दिनचर्या संस्कृत में सरल वाक्यों में लिखिए (यथा – अहं षड्वादने उत्तिष्ठामि, सार्ध-षड्वादने स्नानं करोमि, अष्टवादने विद्यालयं गच्छामि)।

3. शिष्टाचारस्य विषये पञ्चानां श्लोकानां संग्रहं कुर्वन्तु स्मरन्तु च ।

मार्गदर्शनम्शिष्टाचार/सद्व्यवहार से सम्बन्धित पाँच संस्कृत श्लोक (यथा – ‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्…’, ‘विद्या ददाति विनयम्…’ आदि) एकत्र कीजिए तथा उन्हें कण्ठस्थ कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. इस पाठ में कौन-कौन अपनी दिनचर्या बताते हैं?

उत्तरइस पाठ में सन्दीपः एवं खुशी नामक दो विद्यार्थी संस्कृत में अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या बताते हैं। दोनों उत्तमपुरुष में ‘अहं…करोमि’ रूप का प्रयोग करते हैं।

2. सन्दीपः कति वादने उत्तिष्ठति तथा प्रथमं किं करोति?

उत्तरसन्दीपः प्रतिदिनं प्रातः पञ्चवादने (५ः००) उत्तिष्ठति । प्रथमं सः भूमेः वन्दनं करोति तथा मातापितरौ नमति

3. संस्कृत में ‘सपाद’, ‘सार्ध’ एवं ‘पादोन’ का क्या अर्थ है?

उत्तरसपाद = सवा (पूरे घंटे में १५ मिनट अधिक), सार्ध = साढ़े (३० मिनट अधिक), तथा पादोन = पौने (अगले घंटे से १५ मिनट कम)। यथा – सपाद-षड्वादनम् = ६ः१५, सार्ध-षड्वादनम् = ६ः३०, पादोन-सप्तवादनम् = ६ः४५ ।

4. पादोन-सप्तवादने सन्दीपः किं करोति?

उत्तरपादोन-सप्तवादने (६ः४५) सन्दीपः स्नानं करोति । तत्पूर्वं सः सार्ध-षड्वादने अपने परिसर को स्वच्छ करता है ।

5. पाठ का मुख्य उद्देश्य (शिक्षा) क्या है?

उत्तरपाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को संस्कृत में समय बताना एवं एकम् से द्वादश तक की संख्याएँ सिखाना है। साथ ही यह नियमित, अनुशासित एवं स्वच्छ दिनचर्या के महत्त्व का संदेश देता है ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. सन्दीप अथवा खुशी की दिनचर्या क्रम से अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरसन्दीप प्रतिदिन प्रातः पाँच बजे उठता है। सबसे पहले वह भूमि को वन्दना करता है तथा माता-पिता को प्रणाम करता है। फिर उषःपान करके गुनगुना जल पीता है। सवा पाँच बजे वह शौच, मुँह धोना तथा दाँतों का मञ्जन करता है। साढ़े पाँच बजे सूर्य-नमस्कार एवं योगासन करता है और छह बजे स्वाध्याय करता है।साढ़े छह बजे वह अपने परिसर की सफ़ाई करता है तथा पौने सात बजे स्नान करता है। सात बजे प्रार्थना एवं गीतापाठ करता है और माता-पिता की चरण-वन्दना करता है। साढ़े सात बजे वह नाश्ता करता है और आठ बजे विद्यालय जाता है। इस प्रकार उसकी दिनचर्या नियमित, स्वच्छ एवं अनुशासित है।

7. नियमित एवं अनुशासित दिनचर्या के क्या लाभ हैं? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरपाठ ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ एक आदर्श दिनचर्या प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रत्येक कार्य का निश्चित समय है। नियमित दिनचर्या से समय का सदुपयोग होता है तथा कोई भी आवश्यक कार्य छूटता नहीं। प्रातः जल्दी उठना, योगासन, सूर्य-नमस्कार एवं स्नान से शरीर स्वस्थ एवं स्फूर्तियुक्त रहता है।स्वाध्याय एवं प्रार्थना से मन एकाग्र होता है और पढ़ाई अच्छी होती है। माता-पिता की चरण-वन्दना से संस्कार एवं विनय की भावना बढ़ती है तथा परिसर की स्वच्छता से स्वस्थ वातावरण बनता है। समय पर विद्यालय पहुँचने से अनुशासन का विकास होता है। इस प्रकार अनुशासित दिनचर्या स्वास्थ्य, सफलता एवं उत्तम चरित्र का आधार है।

8. संस्कृत में समय बताने की रीति को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरसंस्कृत में घंटे को ‘वादनम्’ कहते हैं। पूरे घंटे के लिए संख्या के साथ ‘वादनम्’ जोड़ते हैं – यथा पञ्चवादनम् (५ः००), षड्वादनम् (६ः००), अष्टवादनम् (८ः००)।घंटे में मिनट जोड़ने/घटाने के लिए तीन शब्द प्रयुक्त होते हैं – सपाद (सवा/+१५ मि.), सार्ध (साढ़े/+३० मि.) तथा पादोन (पौने/−१५ मि.)। यथा – सपाद-पञ्चवादनम् = ५ः१५, सार्ध-पञ्चवादनम् = ५ः३०, पादोन-सप्तवादनम् = ६ः४५। इस प्रकार संख्या एवं इन उपसर्गों के मेल से संस्कृत में सरलता से समय बताया जा सकता है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ का शीर्षक क्या है?

(क) मम विद्यालयः

(ख) अहं प्रातः उत्तिष्ठामि

(ग) संख्या

(घ) मम परिवारः

उत्तर(ख) अहं प्रातः उत्तिष्ठामि।

2. सन्दीपः प्रातः कति वादने उत्तिष्ठति?

(क) षड्वादने

(ख) पञ्चवादने

(ग) सप्तवादने

(घ) अष्टवादने

उत्तर(ख) पञ्चवादने (५ः००)।

3. ‘सपाद-पञ्चवादनम्’ का अर्थ है —

(क) ५ः००

(ख) ५ः१५

(ग) ५ः३०

(घ) ५ः४५

उत्तर(ख) ५ः१५। (सपाद = सवा)

4. ‘पादोन-सप्तवादनम्’ कौन-सा समय है?

(क) ७ः१५

(ख) ७ः३०

(ग) ६ः४५

(घ) ७ः४५

उत्तर(ग) ६ः४५। (पादोन = पौने)

5. सन्दीपः कति वादने विद्यालयं गच्छति?

(क) सप्तवादने

(ख) सार्ध-सप्तवादने

(ग) अष्टवादने

(घ) नववादने

उत्तर(ग) अष्टवादने (८ः००)।

6. संस्कृत में ‘६’ (षट्) के बाद कौन-सी संख्या आती है?

(क) पञ्च

(ख) सप्त

(ग) अष्ट

(घ) नव

उत्तर(ख) सप्त (७)।

7. प्रातः उठकर सन्दीपः सबसे पहले क्या करता है?

(क) स्नानं करोति

(ख) भूमेः वन्दनं करोति, मातापितरौ नमति

(ग) विद्यालयं गच्छति

(घ) प्रातराशं करोति

उत्तर(ख) भूमेः वन्दनं करोति, मातापितरौ नमति।

8. ‘प्रातराशम्’ शब्द का अर्थ है —

(क) स्नान

(ख) प्रार्थना

(ग) नाश्ता (अल्पाहार)

(घ) स्वाध्याय

उत्तर(ग) नाश्ता (अल्पाहार)।

9. ‘कवोष्णं जलं’ का अर्थ है —

(क) ठंडा जल

(ख) गुनगुना जल

(ग) खौलता जल

(घ) गंगाजल

उत्तर(ख) गुनगुना (हल्का गर्म) जल।

10. पाठ में दिनचर्या किस पुरुष में बताई गई है?

(क) प्रथमपुरुष (सः/सा)

(ख) मध्यमपुरुष (त्वम्)

(ग) उत्तमपुरुष (अहम्)

(घ) बहुवचन (ते)

उत्तर(ग) उत्तमपुरुष (अहम् – करोमि, गच्छामि, उत्तिष्ठामि)।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): ‘पादोन-सप्तवादनम्’ का अर्थ ६ः४५ है।

कारण (R): ‘पादोन’ का अर्थ ‘एक चौथाई (पाद) कम’ है, अतः सप्तवादन (७ः००) से १५ मिनट कम = ६ः४५ होता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पाठ में सन्दीप एवं खुशी अपनी दिनचर्या बताते हैं।

कारण (R): पाठ संवाद-शैली में आरम्भ होता है, जिसमें दोनों ‘अहं मम दिनचर्यां वदामि’ कहते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): ‘सपाद’ का अर्थ ‘साढ़े’ (आधा घंटा अधिक) है।

कारण (R): सपाद-पञ्चवादनम् = ५ः३० होता है।

उत्तर(घ) A गलत है, R भी गलत है – ‘सपाद’ का अर्थ ‘सवा’ (+१५ मि.) है; सपाद-पञ्चवादनम् = ५ः१५ होता है, ५ः३० नहीं। (निकटतम सही विकल्प – A एवं R दोनों असत्य।)

4. अभिकथन (A): सन्दीपः षड्वादने स्वाध्यायं करोति ।

कारण (R): नियमित दिनचर्या में प्रत्येक कार्य का निश्चित समय होता है, जिससे समय का सदुपयोग होता है।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, किन्तु R, A की सीधी व्याख्या नहीं है (R सामान्य लाभ बताता है)।

5. अभिकथन (A): संस्कृत में ‘८’ को ‘अष्ट’ कहते हैं।

कारण (R): पाठ की ‘संख्या’ तालिका में एकम् से द्वादश तक की संख्याएँ दी गई हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • संख्या (एकम्…द्वादश) कण्ठस्थ करें – समय-लेखन के प्रश्न इन्हीं पर आधारित होते हैं।
  • सपाद = +१५, सार्ध = +३०, पादोन = −१५ मिनट – यह नियम पक्का याद रखें।
  • ‘पादोन’ में अगले घंटे की संख्या जोड़ी जाती है (६ः४५ = पादोन-सप्तवादनम्, पादोन-षड्वादनम् नहीं)।
  • प्रश्ननिर्माण में समय पूछने के लिए सदैव ‘कदा’ का प्रयोग करें।
  • दिनचर्या उत्तमपुरुष में लिखें – उत्तिष्ठामि, करोमि, पिबामि, गच्छामि।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • ‘सपाद’ एवं ‘सार्ध’ में भ्रम – सपाद = सवा, सार्ध = साढ़े।
  • पादोन में गलत संख्या लगाना – ६ः४५ को पादोन-षड्वादनम् लिख देना (सही – पादोन-सप्तवादनम्)।
  • क्रियापद का पुरुष न मिलाना – ‘अहं’ के साथ ‘करोति’ (सही – करोमि)।
  • विसर्ग/मात्रा की अशुद्धि – उत्तिष्ठामि, प्रातराशम्, कवोष्णम् को शुद्ध लिखें।
  • शिष्टाचार-पद चुनते समय दुर्गुण (कलहः, द्वेषः, हिंसा) को सम्मिलित कर देना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 6 ‘अहं प्रातः उत्तिष्ठामि’ किस विषय पर आधारित है?

यह पाठ ‘दिनचर्या’ (daily routine) पर आधारित एक सरल गद्य-पाठ है, जिसमें सन्दीप एवं खुशी संस्कृत में अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या बताते हैं और समय बताना सिखाते हैं।

संस्कृत में ‘सपाद’, ‘सार्ध’ एवं ‘पादोन’ का क्या अर्थ है?

सपाद = सवा (+१५ मिनट), सार्ध = साढ़े (+३० मिनट), पादोन = पौने (अगले घंटे से −१५ मिनट)। यथा – सपाद-षड्वादनम् = ६ः१५, सार्ध-षड्वादनम् = ६ः३०, पादोन-सप्तवादनम् = ६ः४५।

सन्दीप कितने बजे उठता है और कितने बजे विद्यालय जाता है?

सन्दीप प्रातः पञ्चवादने (५ः००) उठता है और अष्टवादने (८ः००) विद्यालय जाता है। बीच में वह योगासन, स्वाध्याय, प्रार्थना, स्नान एवं प्रातराश समय पर करता है।

मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, अन्वय एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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