Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 11 Solutions — यः जानाति सः पण्डितः

यः जानाति सः पण्डितः की पाँच पहेलियों का अर्थ और शब्द-क्रीड़ा समझें। आठ अभ्यासों के उत्तर, पूरी षष्ठी-तालिका, राम-कुटुम्ब के सम्बन्ध, पुस्तक-क्रम और परिवार-परिचय के मौलिक नमूने पुस्तक के क्रम में दिए हैं।

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 11 पाठ: यः जानाति सः पण्डितः Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का एकादश पाठ ‘यः जानाति सः पण्डितः’ संस्कृत-साहित्य की रोचक विधा प्रहेलिका (पहेली) पर आधारित है। संस्कृत-साहित्य में प्रहेलिकाओं का विशिष्ट स्थान है। ये बाल से लेकर वृद्ध तक सभी को मानसिक उल्लास प्रदान करती हैं, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति बढ़ाती हैं तथा चिन्तन-क्षमता का विकास करती हैं। साथ ही ये प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता एवं कल्पना-शक्ति को भी दर्शाती हैं। इस पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, जिनका उत्तर खोजकर छात्र अपनी सूझ-बूझ की परीक्षा करते हैं। पाठ का केन्द्रीय भाव यही है कि जो इन पहेलियों का उत्तर जान लेता है, वही सच्चा पण्डित (बुद्धिमान) है। पाठ के साथ ‘अवधेयांशः’ में गुरु-शिष्य, ग्रन्थ-ग्रन्थकर्ता, पति-पत्नी सम्बन्ध तथा षष्ठी-विभक्ति का अभ्यास दिया गया है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ संस्कृत की प्रहेलिका परम्परा से संकलित है। ‘प्रहेलिका’ शब्द ‘हेला’ (क्रीडा) से बना है – जो खेल-खेल में अपना अभिप्राय छिपा ले, वही प्रहेलिका है। यह विनोदकला के अन्तर्गत आती है। पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ श्लोक-रूप में दी गई हैं तथा प्रत्येक के नीचे ‘विवरणम्’ में प्रश्नों के रूप में संकेत दिए गए हैं। पाठ के अन्त में सभी प्रहेलिकाओं के उत्तर भी दिए गए हैं। इस पाठ का व्याकरणिक मुख्य बिन्दु षष्ठी-विभक्ति (सम्बन्धकारक) है।

मूल पाठ (प्रहेलिकाः) एवं अन्वय

(पाठ की पाँचों प्रहेलिकाएँ, ज्यों-की-त्यों, सरल अन्वय एवं उत्तर सहित।)

भोजनान्ते च किं पेयं जयन्तः कस्य वै सुतः ।
कथं विष्णुपदं प्रोक्तं तक्रं शक्रस्य दुर्लभम् ॥ १ ॥ — प्रहेलिका १
अन्वय एवं भाव अन्वय: भोजनान्ते किं पेयम् (भवति) ? जयन्तः कस्य वै सुतः (अस्ति) ? विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ? (एतेषां त्रयाणां प्रश्नानाम् उत्तराणि अन्तिमपङ्क्तौ सन्ति) – तक्रं शक्रस्य दुर्लभम् । भाव: भोजन के अन्त में पीने योग्य क्या है? जयन्त किसका पुत्र है? विष्णुपद (यहाँ विष्णु का परम पद) कैसा कहा गया है? इन तीनों प्रश्नों के उत्तर इसी श्लोक में छिपे हैं – (1) पेय = तक्र (छाछ), (2) जयन्त = शक्र (इन्द्र) का पुत्र, (3) विष्णुपद = दुर्लभ (आकाश)। अतः छाछ इन्द्र को भी दुर्लभ है।
न तस्यादिर्न तस्यान्तो मध्ये यस्तस्य तिष्ठति ।
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यदि जानासि तद्वद ॥ २ ॥ — प्रहेलिका २
अन्वय एवं भाव अन्वय: तस्य आदिः ‘न’ अस्ति, तस्य अन्तः अपि ‘न’ अस्ति, तस्य मध्ये ‘य’ तिष्ठति । तत् तव अपि अस्ति, मम अपि अस्ति । यदि जानासि (तर्हि) तत् वद । भाव: जिस शब्द के आरम्भ और अन्त में ‘न’ तथा बीच में ‘य’ है, वह तुम्हारे पास भी है और मेरे पास भी – यदि जानते हो तो बताओ। उत्तर – नयनम् (आँख)। (‘नयनम्’ का नयन प्रातिपदिक का आदि अक्षर ‘न’ तथा अन्त अक्षर भी ‘न’, और मध्य में ‘य’ है।)
वृक्षस्याग्रे फलं दृष्टं फलाग्रे वृक्ष एव च ।
अकारादिं सकारान्तं यो जानाति स पण्डितः ॥ ३ ॥ — प्रहेलिका ३
अन्वय एवं भाव अन्वय: वृक्षस्य अग्रे फलं दृष्टम्, फलस्य अग्रे वृक्षः एव च (दृष्टः) । अकारादिं सकारान्तं (तत् पदं) यः जानाति, सः पण्डितः । भाव: वृक्ष के आगे फल दिखाई देता है और फल के आगे वृक्ष ही। जिस पद का आदि अक्षर ‘अ’ तथा अन्त अक्षर ‘स’ हो, उसे जो जानता है वही पण्डित है। उत्तर – अनानसः (अनन्नास/पाइनएप्पल)।
किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः ।
को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥ ४ ॥ — प्रहेलिका ४
अन्वय एवं भाव अन्वय: नरः काश्यां किम् इच्छति ? भूपानां रणे कः हितः ? सर्वदेवानां कः वन्द्यः ? एकम् उत्तरं दीयताम् । भाव: मनुष्य काशी में क्या चाहता है? राजाओं का युद्ध में हितकारी कौन है? सभी देवों का वन्दनीय कौन है? तीनों का एक ही उत्तर दीजिए – (1) काशी में मनुष्य मृत्यु चाहता है, (2) युद्ध में जय (विजय) हितकारी है, (3) देवों में जय (विष्णु/श्रेष्ठ) वन्दनीय है। (एकपद-उत्तर – मृत्युम् / जयः।)
कुलालस्य गृहे ह्यर्धं तदर्धं हस्तिनापुरे ।
द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति स पण्डितः ॥ ५ ॥ — प्रहेलिका ५
अन्वय एवं भाव अन्वय: कुलालस्य गृहे हि अर्धं (अस्ति), तत् अर्धं हस्तिनापुरे (अस्ति), द्वयं मिलित्वा लङ्कायां (पूर्णरूपम् अस्ति) । (तत्) यः जानाति, सः पण्डितः । भाव: जिसका आधा भाग कुम्हार (कुलाल) के घर में है, आधा हस्तिनापुर में, और दोनों मिलकर पूरा रूप लंका में मिलता है – उसे जो जान ले वही पण्डित है। उत्तर – कुम्भः / कर्णः (कुम्हार के घर ‘कुम्भ’, हस्तिनापुर में ‘कर्ण’, और लंका में ‘कुम्भकर्णः’)।

प्रहेलिकानाम् उत्तराणि (पाठानुसार):
१. तक्रं / शक्रस्य / दुर्लभम्    २. नयनम्    ३. अनानसः
४. मृत्युम् / जयः    ५. कुम्भः / कर्णः (कुम्भकर्णः)

सार (Hindi Summary)

‘यः जानाति सः पण्डितः’ पाठ संस्कृत-साहित्य की मनोरंजक एवं बुद्धिवर्धक विधा ‘प्रहेलिका’ (पहेली) पर आधारित है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि संस्कृत में प्रहेलिकाओं का विशिष्ट स्थान है। ये बालक से लेकर वृद्ध तक सभी को मानसिक आनन्द देती हैं, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं, चिन्तन-क्षमता का विकास करती हैं तथा प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता और कल्पना-शक्ति को प्रकट करती हैं।

पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं। पहली में पूछा गया है कि भोजन के बाद पीने योग्य क्या है, जयन्त किसका पुत्र है, और विष्णुपद किसे कहते हैं – इनके उत्तर क्रमशः तक्रम् (छाछ), शक्रस्य (इन्द्र का) तथा दुर्लभम् (कठिनता से प्राप्त) हैं। दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ (आँख) है, क्योंकि इसका आदि एवं अन्त दोनों ‘न’ तथा मध्य में ‘य’ है। तीसरी का उत्तर ‘अनानसः’ है, जिसका आदि ‘अ’ एवं अन्त ‘स’ है। चौथी में काशी, युद्ध एवं देवताओं से सम्बन्धित प्रश्नों का एक उत्तर ‘मृत्यु + जय → मृत्युञ्जयः’ है। पाँचवीं का उत्तर ‘कुम्भकर्णः’ है – कुम्हार के घर ‘कुम्भ’, हस्तिनापुर में ‘कर्ण’, और लंका में दोनों मिलकर ‘कुम्भकर्ण’।

पाठ के साथ ‘अवधेयांशः’ भाग में गुरु-शिष्य सम्बन्ध (वसिष्ठ-राम, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चन्द्रगुप्त आदि), ग्रन्थ एवं ग्रन्थकर्ता (रामायण-वाल्मीकि, महाभारत-व्यास आदि) तथा पति-पत्नी सम्बन्ध का परिचय दिया गया है। व्याकरण में ‘षष्ठी-विभक्ति’ (सम्बन्धकारक) के शब्दरूप सिखाए गए हैं – जहाँ दो वस्तुओं/व्यक्तियों में सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है, जैसे – ‘बालकस्य पुस्तकम्’। संक्षेप में, यह पाठ खेल-खेल में बुद्धि, तर्क एवं संस्कृत-शब्दज्ञान को बढ़ाता है तथा सम्बन्ध-बोधक षष्ठी विभक्ति का अभ्यास कराता है।

नयन शब्द में न य न और अनानस शब्द में आरम्भ अ, अन्त स की पहेली का अक्षर-चार्ट
मौलिक अक्षर-चार्ट: पहेली प्रातिपदिक नयन और अनानस पर है। उत्तर लिखते समय नयनम् और अनानसः के व्याकरणिक अन्त भी लिखें।

चौथी पहेली के संयुक्त उत्तर मृत्युञ्जयः का अर्थ मृत्यु को जीतने वाला है और यह शिव का नाम है; जयन्तः इन्द्र का पुत्र है, अलग पात्र। Sanskrit Heritage शब्दकोश में यह नाम देखें।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
प्रहेलिकापहेलीRiddle
पेयम्पीने योग्य (पातुं योग्यम्)Fit for drinking
सुतःपुत्रSon
तक्रम्छाछ (मथितम्)Butter milk
शक्रःइन्द्रIndra
दुर्लभम्कठिनता से प्राप्यDifficult to obtain
विष्णुपदम्विष्णु का पद / परम स्थान — यहाँ दुर्लभ कहा हैVishnu’s supreme abode in this riddle
आदिःआरम्भBeginning
अन्तःअन्तEnd
नयनम्आँखEye
वृक्षस्यपेड़ काOf the tree
फलम्फलFruit
पण्डितःविद्वान्, बुद्धिमान्Learned / wise person
काश्याम्काशी मेंIn Kashi (Varanasi)
रणेयुद्ध में (युद्धे)In war
हितःहितकारीBeneficial
वन्द्यःवन्दनीय, पूजनीयWorthy of worship
कुलालस्यकुम्हार का (कुम्भकारस्य)Of the potter
अर्धम्आधाHalf
द्वयम्दोनोंBoth / the two
मिलित्वामिलकरHaving joined

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

1. पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु —

(क) भोजनान्ते पातुं योग्यं किम् ?

उत्तरतक्रम् ।

(ख) सर्वदेवानां वन्दनीयः कः ?

उत्तरजयः (जयन्तः) ।

(ग) जयन्तः कस्य सुतः ?

उत्तरशक्रस्य (इन्द्रस्य) ।

(घ) लङ्कायां मिलित्वा कस्य पूर्णरूपम् अस्ति ?

उत्तरकुम्भकर्णस्य ।

2. पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु —

(क) विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ?

उत्तरविष्णुपदं दुर्लभम् इति प्रोक्तम् । (यहाँ कथं का उत्तर दुर्लभम् है — कठिनता से प्राप्त होने वाला। दुर्लभम् का अर्थ आकाश नहीं है।)

(ख) कस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति ?

उत्तरनयनस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति । (‘नयनम्’ इत्यस्य आदौ ‘न’, अन्ते अपि ‘न’, मध्ये च ‘य’ तिष्ठति ।)

(ग) नरः काश्यां किम् इच्छति ?

उत्तरनरः काश्यां मृत्युम् इच्छति । (यह पहेली की परम्परागत धार्मिक कल्पना है; सभी लोगों की वास्तविक इच्छा का दावा नहीं।)

(घ) कुलालस्य गृहे अर्धं किम् अस्ति ?

उत्तरकुलालस्य गृहे अर्धं कुम्भः अस्ति । (कुम्भकर्ण-शब्दस्य पूर्वार्धं ‘कुम्भः’ कुलालस्य गृहे लभ्यते ।)

3. अधोलिखितानि शब्दरूपाणि पठन्तु अवगच्छन्तु स्मरन्तु च —

(षष्ठी-विभक्त्यन्तानि रूपाणि – शब्दरूप पढ़कर समझिए एवं स्मरण कीजिए। यह कण्ठस्थ करने का अभ्यास है।)

लिङ्गम्शब्दःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
अकारान्त-पुंलिङ्गम्छात्रःछात्रस्यछात्रयोःछात्राणाम्
विद्यालयःविद्यालयस्यविद्यालययोःविद्यालयानाम्
सुतःसुतस्यसुतयोःसुतानाम्
रामःरामस्यरामयोःरामाणाम्
आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम्सीतासीतायाःसीतयोःसीतानाम्
कथाकथायाःकथयोःकथानाम्
प्रियाप्रियायाःप्रिययोःप्रियाणाम्
ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम्नदीनद्याःनद्योःनदीनाम्
देवीदेव्याःदेव्योःदेवीनाम्
अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम्पुस्तकम्पुस्तकस्यपुस्तकयोःपुस्तकानाम्
उद्यानम्उद्यानस्यउद्यानयोःउद्यानानाम्
फलम्फलस्यफलयोःफलानाम्
भोजनम्भोजनस्यभोजनयोःभोजनानाम्
सर्वनामपदानिअहम् (अस्मद्)ममआवयोःअस्माकम्
त्वम् (युष्मद्)तवयुवयोःयुष्माकम्
तत् (पुंलिङ्गम्)तस्यतयोःतेषाम्
तत् (स्त्रीलिङ्गम्)तस्याःतयोःतासाम्
तत् (नपुंसकलिङ्गम्)तस्यतयोःतेषाम्
एतत् (पुंलिङ्गम्)एतस्यएतयोःएतेषाम्
एतत् (स्त्रीलिङ्गम्)एतस्याःएतयोःएतासाम्
एतत् (नपुंसकलिङ्गम्)एतस्यएतयोःएतेषाम्

4. उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु —

यथा – विद्यालयः, छात्रः → विद्यालयस्य छात्रः गच्छति ।

दत्त-पदे (शब्दौ)क्रियापूर्ण वाक्यम् (उत्तर)
(क) द्विचक्रिका, चक्रम्भ्रमतिद्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति ।
(ख) वृक्षः, फलम्खादतिवृक्षस्य फलं खादति ।
(ग) छात्रा, नामपृच्छतिछात्रायाः नाम पृच्छति ।
(घ) रामः, पुस्तकम्आनयतिरामस्य पुस्तकम् आनयति ।
(ङ) मन्दिरम्, शिखरम्पश्यतिमन्दिरस्य शिखरं पश्यति ।

5. तालिकायां प्रदत्तानां शब्दानां षष्ठीविभक्तेः रूपाणि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु —

यथा – देवः → देवस्य, रमा → रमायाः, भवनम् → भवनस्य ।

पुंलिङ्गम्षष्ठी रूपस्त्रीलिङ्गम्षष्ठी रूपनपुंसकलिङ्गम्षष्ठी रूप
वृक्षःवृक्षस्यछात्राछात्रायाःउद्यानम्उद्यानस्य
द्वारपालःद्वारपालस्यदोलादोलायाःवनम्वनस्य
स्यूतःस्यूतस्यउपासनाउपासनायाःसूत्रम्सूत्रस्य
अनुजःअनुजस्यपुस्तिकापुस्तिकायाःपत्रम्पत्रस्य
अग्रजःअग्रजस्यभ्रातृजायाभ्रातृजायायाःयन्त्रम्यन्त्रस्य
पितामहःपितामहस्यअग्रजाअग्रजायाःवातायनम्वातायनस्य
मातुलःमातुलस्यस्नुषास्नुषायाःपुष्पम्पुष्पस्य
प्राचार्यःप्राचार्यस्यलेखनीलेखन्याःसङ्गणकम्सङ्गणकस्य
विद्यालयःविद्यालयस्यपत्नीपत्न्याःगृहम्गृहस्य
पितृव्यःपितृव्यस्यपुत्रीपुत्र्याःवार्तापत्रम्वार्तापत्रस्य

6. रिक्तस्थानेषु कुटुम्बस्य परिचयं लिखन्तु —

यथा – मम नाम दिनेशः । मम पितुः नाम सुरेशः । (यह व्यक्तिगत अभ्यास है; नीचे एक नमूना उत्तर दिया गया है।)

नमूना उत्तर मम मातुः नाम सुनीता । मम अग्रजस्य नाम महेशः । मम अनुजायाः नाम रीता । मम पितामहस्य नाम रामलालः । मम पितामह्याः नाम शान्ता । मम पितृव्यस्य नाम गोपालः । मम पितृव्यायाः नाम गीता । एतत् मम कुटुम्बकम् । (छात्र अपने परिवार के अनुसार नाम भरें।)

7. श्रीरामस्य कुटुम्बस्य रेखाचित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि रचयन्तु —

पृष्ठ 118 के रामायण-परम्परा आधारित चित्र के सभी सम्बन्ध दो दिशाओं में लिखे हैं। यह चित्र का भाषा-अभ्यास है।

एक दिशा में सम्बन्धउलटी दिशा में सम्बन्ध
रामस्य पिता दशरथः।दशरथस्य पुत्रः रामः।
रामस्य माता कौशल्या।कौशल्यायाः पुत्रः रामः।
रामस्य श्वशुरः जनकः।जनकस्य जामाता रामः।
रामस्य श्वश्रूः सुनयना।सुनयनायाः जामाता रामः।
रामस्य अनुजः लक्ष्मणः।लक्ष्मणस्य अग्रजः रामः।
रामस्य पुत्रः लवः।लवस्य पिता रामः।
सीतायाः श्वशुरः दशरथः।दशरथस्य स्नुषा सीता।
सीतायाः श्वश्रूः कौशल्या।कौशल्यायाः स्नुषा सीता।
सीतायाः पिता जनकः।जनकस्य पुत्री सीता।
सीतायाः माता सुनयना।सुनयनायाः पुत्री सीता।
सीतायाः देवरः लक्ष्मणः।लक्ष्मणस्य भ्रातृजाया सीता।
सीतायाः पुत्रः लवः।लवस्य माता सीता।
रामस्य पत्नी सीता।सीतायाः पतिः रामः।

8. पुस्तकसूचि-मध्ये कस्य उपरि किम् अस्ति इति लिखन्तु —

पुस्तक-सूची को क से ठ तक लगातार क्रम मानकर तुरन्त ऊपर की पुस्तक के सभी ग्यारह वाक्य:

  1. लीलावत्याः उपरि पञ्चतन्त्रम् अस्ति।
  2. भगवद्गीतायाः उपरि लीलावती अस्ति।
  3. रामायणस्य उपरि भगवद्गीता अस्ति।
  4. हितोपदेशस्य उपरि रामायणम् अस्ति।
  5. योगशास्त्रस्य उपरि हितोपदेशः अस्ति।
  6. रघुवंशस्य उपरि योगशास्त्रम् अस्ति।
  7. मनुस्मृतेः उपरि रघुवंशम् अस्ति।
  8. अमरकोषस्य उपरि मनुस्मृतिः अस्ति।
  9. अष्टाध्याय्याः उपरि अमरकोषः अस्ति।
  10. महाभारतस्य उपरि अष्टाध्यायी अस्ति।
  11. अर्थशास्त्रस्य उपरि महाभारतम् अस्ति।

ईकारान्त अष्टाध्यायी का रूप अष्टाध्याय्याः और इकारान्त मनुस्मृतिः का रूप मनुस्मृतेः है; सभी नामों में -स्य न जोड़ें।

अवधेयांशः & व्याकरण-तालिकाः

पाठ के ‘अवधेयांशः’ (पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु च) भाग में निम्नलिखित सम्बन्ध-तालिकाएँ दी गई हैं।

1. गुरुः – शिष्यः (षष्ठी सम्बन्ध)

गुरुःशिष्यः
वसिष्ठःश्रीरामः
परशुरामःकर्णः
द्रोणःअर्जुनः
चाणक्यःचन्द्रगुप्तः
शङ्कराचार्यःपद्मपादः
रामकृष्णःविवेकानन्दः

2. ग्रन्थः – ग्रन्थकर्ता

ग्रन्थःरचयिता
रामायणम्वाल्मीकिः
महाभारतम्व्यासः
कर्णभारम् (नाटकम्)भासः
रघुवंशम्कालिदासः
पञ्चतन्त्रम्विष्णुशर्मा
हितोपदेशःनारायणपण्डितः

3. पति – पत्नी सम्बन्धः

पतिःपत्नी
वसिष्ठःअरुन्धती
श्रीरामःसीता
लक्ष्मणःउर्मिला
पाण्डुराजःकुन्ती
कृष्णःरुक्मिणी
अर्जुनःसुभद्रा

4. षष्ठी-विभक्तिः (सम्बन्धकारक)

जहाँ दो पदों के बीच सम्बन्ध होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है। यथा – ‘बालकस्य पुस्तकम्’ में पुस्तक का सम्बन्ध बालक से है, अतः ‘बालक’ शब्द में षष्ठी विभक्ति लगी है। एकवचन में अकारान्त पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग में ‘-स्य’ (रामस्य, फलस्य), आकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आयाः’ (सीतायाः), ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आः’ (नद्याः) प्रत्यय लगते हैं।

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)

  • प्रहेलिका: प्रकृष्टा हेलिका = प्रहेलिका । ‘हेला’ का अर्थ है क्रीडा (खेल)। जो खेल-खेल में अपना अभिप्राय छिपा ले, वह प्रहेलिका है। यह विनोदकला के अन्तर्गत आती है।
  • षष्ठी विभक्ति: जहाँ सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी विभक्ति होती है (बालकस्य पुस्तकम्)।
  • हस्तकुटुम्बकम् (गीत): अङ्गुष्ठ (तात), तर्जनी (माता), मध्यमा (ज्येष्ठा पुत्री), अनामिका (भगिनी), कनिष्ठिका (कनिष्ठ बाला) – हाथ की पाँच अंगुलियों को परिवार के रूप में दर्शाया गया है।
  • सुभाषितम्: “अलसस्य कुतो विद्या…” तथा “हस्तस्य भूषणं दानम्…” – आलसी को विद्या नहीं, और हाथ का आभूषण दान एवं वाणी का आभूषण सत्य है।

परियोजनाकार्यम् — तीन कार्य

1. अपने और मित्र के परिवार का दस-दस वाक्यों में परिचय

दो काल्पनिक मौलिक नमूने हैं। वास्तविक परिवार के अनुसार सम्बन्ध और नाम बदलें; जो सम्बन्ध नहीं है उसे लिखना आवश्यक नहीं।

स्वपरिवारः
  1. मम नाम मोहनः अस्ति।
  2. मम पितुः नाम सुरेशः अस्ति।
  3. मम मातुः नाम सुनीता अस्ति।
  4. मम अग्रजस्य नाम महेशः अस्ति।
  5. मम अनुजायाः नाम रीता अस्ति।
  6. मम पितामह्याः नाम शान्ता अस्ति।
  7. मम पिता कार्यालयं गच्छति।
  8. मम माता पुस्तकं पठति।
  9. मम अग्रजः विद्यालयं गच्छति।
  10. मम परिवारे परस्परं स्नेहः अस्ति।
मित्रपरिवारः
  1. मम मित्रस्य नाम अरुणः अस्ति।
  2. तस्य पितुः नाम गोपालः अस्ति।
  3. तस्य मातुः नाम गीता अस्ति।
  4. तस्य अग्रजायाः नाम सीमा अस्ति।
  5. तस्य पितामह्याः नाम रमा अस्ति।
  6. तस्य पिता कृषकः अस्ति।
  7. तस्य माता अध्यापिका अस्ति।
  8. तस्य अग्रजा पुस्तकम् पठति।
  9. तस्य पितामही कथां कथयति।
  10. तस्य परिवारे सर्वे परस्परं साहाय्यं कुर्वन्ति।

2. मातृभाषा में पाँच पहेलियाँ — मौलिक हिन्दी नमूने

पहेलीउत्तर
बिना मुँह के समय बताऊँ, दीवार पर टिक-टिक गाऊँ।घड़ी
मेरे दाँत खाना न खाएँ, उलझे बालों को सुलझाएँ।कंघी
बारिश आए तो खुल जाता, सिर के ऊपर छत बन जाता।छाता
मेरा अपना चेहरा नहीं, तुम्हारा चेहरा दिखलाता हूँ।दर्पण
कई पन्ने साथ बँधे हैं, अक्षर पढ़कर ज्ञान मिले।पुस्तक

3. गोपनागोपनम् — स्थानों की पहचान

नाजिया खोजती है: मोहित द्वारस्य पृष्ठे; बबली कपाटिकायाः पृष्ठे; उमा पर्यङ्कस्य अधः; मीता पितामह्याः पृष्ठे। अजित वृक्ष के ऊपर से आकर धप्पा कहता है। पृष्ठे का अर्थ पीछे है, उपरिष्टात् का ऊपर से। इन पदों में षष्ठी के सम्बन्ध भी पहचानें। खेल को सुरक्षित स्थान पर खेलें; कहानी में दिखे पेड़ से कूदने का अनुकरण आवश्यक नहीं।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

1. प्रहेलिका किसे कहते हैं? इसका क्या लाभ है?

उत्तरजो खेल-खेल में अपना अभिप्राय (अर्थ) छिपा ले, उसे प्रहेलिका (पहेली) कहते हैं। यह सभी को मानसिक उल्लास देती है, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति बढ़ाती है तथा चिन्तन-क्षमता का विकास करती है।

2. दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ क्यों है?

उत्तर‘नयनम्’ का आदि अक्षर ‘न’ है और अन्त अक्षर भी ‘न’ है, तथा इसके मध्य में ‘य’ रहता है। यह सभी के पास होता है। इसी कारण इस प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ (आँख) है।

3. पाँचवीं प्रहेलिका में ‘कुम्भकर्णः’ उत्तर कैसे बनता है?

उत्तरकुम्हार के घर में आधा भाग ‘कुम्भ’ मिलता है, हस्तिनापुर में दूसरा आधा भाग ‘कर्ण’ (कर्ण हस्तिनापुर से सम्बन्धित था) मिलता है। दोनों मिलकर लंका में ‘कुम्भकर्णः’ (रावण का भाई) बनता है।

4. षष्ठी विभक्ति का प्रयोग कब होता है? उदाहरण दीजिए।

उत्तरजहाँ दो पदों के बीच सम्बन्ध होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है। यथा – ‘रामस्य पुस्तकम्’, ‘बालकस्य गृहम्’, ‘सीतायाः वस्त्रम्’। यहाँ -स्य, -आयाः आदि षष्ठी के चिह्न हैं।

5. श्रीराम के गुरु एवं अर्जुन के गुरु कौन थे?

उत्तरश्रीराम के गुरु महर्षि वसिष्ठ थे तथा अर्जुन के गुरु द्रोणाचार्य थे। इसी प्रकार कर्ण के गुरु परशुराम एवं चन्द्रगुप्त के गुरु चाणक्य थे।

अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

6. ‘यः जानाति सः पण्डितः’ पाठ का मुख्य भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ का मुख्य भाव यह है कि संस्कृत-साहित्य में प्रहेलिकाओं (पहेलियों) का विशिष्ट एवं रोचक स्थान है। प्रहेलिकाएँ बालक से वृद्ध तक सभी को मानसिक आनन्द देती हैं, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं, चिन्तन-क्षमता का विकास करती हैं तथा प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता एवं कल्पना-शक्ति को प्रकट करती हैं।पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, जिनके उत्तर हैं – तक्र (छाछ), नयन (आँख), अनानस, मृत्यु + जय → मृत्युञ्जयः तथा कुम्भकर्ण। इन्हें हल करने वाला ही सच्चा पण्डित कहलाता है। पाठ खेल-खेल में बुद्धि, तर्क एवं संस्कृत-शब्दज्ञान को बढ़ाता है तथा सम्बन्ध-बोधक षष्ठी विभक्ति का अभ्यास भी कराता है।

7. पाठ में दी गई पाँचों प्रहेलिकाओं के उत्तर उनके कारण सहित संक्षेप में लिखिए।

उत्तर(1) तक्रम् – भोजन के बाद का पेय छाछ है, जयन्त शक्र (इन्द्र) का पुत्र है तथा विष्णुपद दुर्लभ कहा गया है। (2) नयनम् – जिसका आदि-अन्त ‘न’ एवं मध्य ‘य’ हो, वह आँख है। (3) अनानसः – जिसका आदि ‘अ’ एवं अन्त ‘स’ हो।(4) मृत्युम् / जयः – काशी में मनुष्य मृत्यु (मोक्ष) चाहता है, युद्ध में जय हितकारी है तथा तीसरे का संयुक्त उत्तर मृत्युञ्जयः (शिवः) है। (5) कुम्भकर्णः – कुम्हार के घर ‘कुम्भ’, हस्तिनापुर में ‘कर्ण’, और दोनों मिलकर लंका में ‘कुम्भकर्ण’। इस प्रकार प्रत्येक प्रहेलिका शब्द-क्रीडा एवं तर्क पर आधारित है।

8. षष्ठी विभक्ति पर एक टिप्पणी लिखिए तथा तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तरसंस्कृत में जहाँ दो पदों (वस्तुओं या व्यक्तियों) के बीच सम्बन्ध प्रकट होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति (सम्बन्धकारक) का प्रयोग होता है। हिन्दी में इसका अर्थ ‘का, के, की’ होता है। अकारान्त पुंलिङ्ग एवं नपुंसकलिङ्ग शब्दों में एकवचन का चिह्न ‘-स्य’ है (रामस्य, फलस्य); आकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आयाः’ (सीतायाः) तथा ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आः’ (नद्याः) चिह्न लगते हैं।उदाहरण – (1) रामस्य धनुः (राम का धनुष), (2) सीतायाः कथा (सीता की कथा), (3) विद्यालयस्य द्वारम् (विद्यालय का द्वार)। इस प्रकार षष्ठी विभक्ति सम्बन्ध को स्पष्ट करती है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ में किस साहित्यिक विधा का वर्णन है?

(क) कथा

(ख) प्रहेलिका (पहेली)

(ग) नाटक

(घ) सुभाषित

उत्तर(ख) प्रहेलिका (पहेली)।

2. भोजन के अन्त में पीने योग्य क्या है?

(क) जलम्

(ख) दुग्धम्

(ग) तक्रम् (छाछ)

(घ) रसः

उत्तर(ग) तक्रम् (छाछ)।

3. जयन्त किसका पुत्र है?

(क) शक्रस्य (इन्द्र)

(ख) विष्णोः

(ग) ब्रह्मणः

(घ) शिवस्य

उत्तर(क) शक्रस्य (इन्द्र)।

4. जिस पद का आदि एवं अन्त ‘न’ तथा मध्य ‘य’ हो, वह क्या है?

(क) वदनम्

(ख) नयनम्

(ग) चरणम्

(घ) भवनम्

उत्तर(ख) नयनम्।

5. जिसका आदि ‘अ’ एवं अन्त ‘स’ है, वह फल कौन-सा है?

(क) आम्रः

(ख) कदलीफलम्

(ग) अनानसः

(घ) द्राक्षा

उत्तर(ग) अनानसः।

6. काशी में मनुष्य क्या चाहता है?

(क) धनम्

(ख) मृत्युम्

(ग) यशः

(घ) राज्यम्

उत्तर(ख) मृत्युम्।

7. कुम्हार के घर एवं हस्तिनापुर के दो आधे भाग लंका में मिलकर क्या बनाते हैं?

(क) कुम्भकर्णः

(ख) रावणः

(ग) विभीषणः

(घ) मेघनादः

उत्तर(क) कुम्भकर्णः।

8. इस पाठ का व्याकरणिक मुख्य बिन्दु कौन-सी विभक्ति है?

(क) द्वितीया

(ख) चतुर्थी

(ग) षष्ठी (सम्बन्धकारक)

(घ) सप्तमी

उत्तर(ग) षष्ठी (सम्बन्धकारक)।

9. अर्जुन के गुरु कौन थे?

(क) वसिष्ठः

(ख) द्रोणः

(ग) परशुरामः

(घ) चाणक्यः

उत्तर(ख) द्रोणः।

10. ‘रामायणम्’ के रचयिता कौन हैं?

(क) व्यासः

(ख) वाल्मीकिः

(ग) कालिदासः

(घ) भासः

उत्तर(ख) वाल्मीकिः।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(क), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(क), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ है।

कारण (R): ‘नयनम्’ का आदि एवं अन्त ‘न’ तथा मध्य में ‘य’ रहता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): प्रहेलिकाएँ चिन्तन-क्षमता एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं।

कारण (R): प्रहेलिकाओं का संस्कृत-साहित्य में कोई स्थान नहीं है।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – संस्कृत-साहित्य में प्रहेलिकाओं का विशिष्ट स्थान है।

3. अभिकथन (A): पाँचवीं प्रहेलिका का उत्तर ‘कुम्भकर्णः’ है।

कारण (R): ‘कुम्भ’ कुम्हार के घर एवं ‘कर्ण’ हस्तिनापुर से सम्बन्धित है, दोनों मिलकर लंका में ‘कुम्भकर्ण’ बनते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘बालकस्य पुस्तकम्’ में ‘बालक’ शब्द में षष्ठी विभक्ति है।

कारण (R): जहाँ सम्बन्ध होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): काशी में मनुष्य धन की कामना करता है।

कारण (R): चौथी प्रहेलिका के अनुसार काशी में मनुष्य मृत्यु (मोक्ष) की कामना करता है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – काशी में मनुष्य मृत्यु (मोक्ष) चाहता है, धन नहीं।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • पाँचों प्रहेलिकाओं के उत्तर (तक्रम्, नयनम्, अनानसः, मृत्युम् / जयः; संयुक्त उत्तर मृत्युञ्जयः, कुम्भकर्णः) उनके कारण सहित याद रखें।
  • शब्दार्थ (पेयम्, सुतः, तक्रम्, कुलालस्य, रणे आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में स्मरण करें।
  • षष्ठी विभक्ति के शब्दरूप (छात्रस्य, सीतायाः, नद्याः, फलस्य) तालिका सहित कण्ठस्थ करें।
  • ‘एकपदेन उत्तरम्’ वाले प्रश्न में केवल एक शब्द एवं ‘पूर्णवाक्येन’ में पूरा वाक्य लिखें।
  • गुरु-शिष्य एवं ग्रन्थ-रचयिता की जोड़ियाँ (वाल्मीकि-रामायण, व्यास-महाभारत) याद रखें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • षष्ठी रूप में ‘-आयाः’ एवं ‘-आः’ का घालमेल – सीता → सीतायाः, परन्तु नदी → नद्याः।
  • प्रहेलिका के उत्तर को बिना कारण लिखना – उत्तर के साथ शब्द-विश्लेषण भी लिखें।
  • ‘कुलालः’ का अर्थ कुम्हार है, राजा नहीं – ध्यान रखें।
  • लेखनी (ईकारान्त) का षष्ठी रूप ‘लेखन्याः’ होता है, ‘लेखनीयाः’ नहीं।
  • पाठ को कथा/नाटक समझ लेना – यह प्रहेलिका (पहेली) पाठ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 के पाठ 11 ‘यः जानाति सः पण्डितः’ में किसका वर्णन है?

यह पाठ संस्कृत की प्रहेलिका (पहेली) विधा पर आधारित है। इसमें पाँच रोचक प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, जिनके उत्तर हैं – तक्रम् (छाछ), नयनम् (आँख), अनानसः, मृत्युम् / जयः; संयुक्त उत्तर मृत्युञ्जयः तथा कुम्भकर्णः।

‘यः जानाति सः पण्डितः’ का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है – ‘जो (इन पहेलियों का उत्तर) जानता है, वही पण्डित (बुद्धिमान्) है।’ यह बुद्धि एवं तर्क-शक्ति को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

इस पाठ में मुख्य व्याकरण-बिन्दु क्या है?

इस पाठ का मुख्य व्याकरण-बिन्दु षष्ठी विभक्ति (सम्बन्धकारक) है – जहाँ दो पदों में सम्बन्ध हो, वहाँ षष्ठी लगती है, जैसे ‘रामस्य पुस्तकम्’, ‘सीतायाः कथा’।

पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 11, पृष्ठ 112–120; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। उत्तर, व्याख्याएँ, अक्षर-चार्ट और नमूने ClearStudy के स्वतंत्र अध्ययन-सहायक हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।

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