कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 11 ‘यः जानाति सः पण्डितः’ हल (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) के एकादश पाठ ‘यः जानाति सः पण्डितः’ का सम्पूर्ण समाधान देता है। यह एक प्रहेलिका (पहेली) पाठ है, जिसमें पाँच रोचक संस्कृत प्रहेलिकाएँ दी गई हैं। यहाँ मूल पाठ, अन्वय, सार, शब्दार्थ तथा अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः) के प्रत्येक प्रश्न के मौलिक, परीक्षोपयोगी उत्तर, साथ ही षष्ठी-विभक्ति की व्याकरण-तालिकाएँ, अतिरिक्त प्रश्न, 10 MCQ, 5 अभिकथन-कारण एवं FAQ दिए गए हैं।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ (प्रहेलिकाः) एवं अन्वय
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- अवधेयांशः & व्याकरण-तालिकाः
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का एकादश पाठ ‘यः जानाति सः पण्डितः’ संस्कृत-साहित्य की रोचक विधा प्रहेलिका (पहेली) पर आधारित है। संस्कृत-साहित्य में प्रहेलिकाओं का विशिष्ट स्थान है। ये बाल से लेकर वृद्ध तक सभी को मानसिक उल्लास प्रदान करती हैं, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति बढ़ाती हैं तथा चिन्तन-क्षमता का विकास करती हैं। साथ ही ये प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता एवं कल्पना-शक्ति को भी दर्शाती हैं। इस पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, जिनका उत्तर खोजकर छात्र अपनी सूझ-बूझ की परीक्षा करते हैं। पाठ का केन्द्रीय भाव यही है कि जो इन पहेलियों का उत्तर जान लेता है, वही सच्चा पण्डित (बुद्धिमान) है। पाठ के साथ ‘अवधेयांशः’ में गुरु-शिष्य, ग्रन्थ-ग्रन्थकर्ता, पति-पत्नी सम्बन्ध तथा षष्ठी-विभक्ति का अभ्यास दिया गया है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ संस्कृत की प्रहेलिका परम्परा से संकलित है। ‘प्रहेलिका’ शब्द ‘हेला’ (क्रीडा) से बना है – जो खेल-खेल में अपना अभिप्राय छिपा ले, वही प्रहेलिका है। यह विनोदकला के अन्तर्गत आती है। पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ श्लोक-रूप में दी गई हैं तथा प्रत्येक के नीचे ‘विवरणम्’ में प्रश्नों के रूप में संकेत दिए गए हैं। पाठ के अन्त में सभी प्रहेलिकाओं के उत्तर भी दिए गए हैं। इस पाठ का व्याकरणिक मुख्य बिन्दु षष्ठी-विभक्ति (सम्बन्धकारक) है।
मूल पाठ (प्रहेलिकाः) एवं अन्वय
(पाठ की पाँचों प्रहेलिकाएँ, ज्यों-की-त्यों, सरल अन्वय एवं उत्तर सहित।)
कथं विष्णुपदं प्रोक्तं तक्रं शक्रस्य दुर्लभम् ॥ १ ॥ — प्रहेलिका १
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यदि जानासि तद्वद ॥ २ ॥ — प्रहेलिका २
अकारादिं सकारान्तं यो जानाति स पण्डितः ॥ ३ ॥ — प्रहेलिका ३
को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥ ४ ॥ — प्रहेलिका ४
द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति स पण्डितः ॥ ५ ॥ — प्रहेलिका ५
प्रहेलिकानाम् उत्तराणि (पाठानुसार):
१. तक्रं / शक्रस्य / दुर्लभम् २. नयनम् ३. अनानसः
४. मृत्युम् / जयः ५. कुम्भः / कर्णः (कुम्भकर्णः)
सार (Hindi Summary)
‘यः जानाति सः पण्डितः’ पाठ संस्कृत-साहित्य की मनोरंजक एवं बुद्धिवर्धक विधा ‘प्रहेलिका’ (पहेली) पर आधारित है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि संस्कृत में प्रहेलिकाओं का विशिष्ट स्थान है। ये बालक से लेकर वृद्ध तक सभी को मानसिक आनन्द देती हैं, बुद्धि एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं, चिन्तन-क्षमता का विकास करती हैं तथा प्राचीन कवियों की बुद्धिमत्ता और कल्पना-शक्ति को प्रकट करती हैं।
पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं। पहली में पूछा गया है कि भोजन के बाद पीने योग्य क्या है, जयन्त किसका पुत्र है, और विष्णुपद किसे कहते हैं – इनके उत्तर क्रमशः तक्र (छाछ), शक्र (इन्द्र) तथा दुर्लभ (आकाश) हैं। दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ (आँख) है, क्योंकि इसका आदि एवं अन्त दोनों ‘न’ तथा मध्य में ‘य’ है। तीसरी का उत्तर ‘अनानसः’ है, जिसका आदि ‘अ’ एवं अन्त ‘स’ है। चौथी में काशी, युद्ध एवं देवताओं से सम्बन्धित प्रश्नों का एक उत्तर ‘मृत्यु/जय’ है। पाँचवीं का उत्तर ‘कुम्भकर्णः’ है – कुम्हार के घर ‘कुम्भ’, हस्तिनापुर में ‘कर्ण’, और लंका में दोनों मिलकर ‘कुम्भकर्ण’।
पाठ के साथ ‘अवधेयांशः’ भाग में गुरु-शिष्य सम्बन्ध (वसिष्ठ-राम, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चन्द्रगुप्त आदि), ग्रन्थ एवं ग्रन्थकर्ता (रामायण-वाल्मीकि, महाभारत-व्यास आदि) तथा पति-पत्नी सम्बन्ध का परिचय दिया गया है। व्याकरण में ‘षष्ठी-विभक्ति’ (सम्बन्धकारक) के शब्दरूप सिखाए गए हैं – जहाँ दो वस्तुओं/व्यक्तियों में सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है, जैसे – ‘बालकस्य पुस्तकम्’। संक्षेप में, यह पाठ खेल-खेल में बुद्धि, तर्क एवं संस्कृत-शब्दज्ञान को बढ़ाता है तथा सम्बन्ध-बोधक षष्ठी विभक्ति का अभ्यास कराता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रहेलिका | पहेली | Riddle |
| पेयम् | पीने योग्य (पातुं योग्यम्) | Fit for drinking |
| सुतः | पुत्र | Son |
| तक्रम् | छाछ (मथितम्) | Butter milk |
| शक्रः | इन्द्र | Indra |
| दुर्लभम् | कठिनता से प्राप्य | Difficult to obtain |
| विष्णुपदम् | आकाश (विष्णु का पद) | The sky |
| आदिः | आरम्भ | Beginning |
| अन्तः | अन्त | End |
| नयनम् | आँख | Eye |
| वृक्षस्य | पेड़ का | Of the tree |
| फलम् | फल | Fruit |
| पण्डितः | विद्वान्, बुद्धिमान् | Learned / wise person |
| काश्याम् | काशी में | In Kashi (Varanasi) |
| रणे | युद्ध में (युद्धे) | In war |
| हितः | हितकारी | Beneficial |
| वन्द्यः | वन्दनीय, पूजनीय | Worthy of worship |
| कुलालस्य | कुम्हार का (कुम्भकारस्य) | Of the potter |
| अर्धम् | आधा | Half |
| द्वयम् | दोनों | Both / the two |
| मिलित्वा | मिलकर | Having joined |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
1. पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु —
(क) भोजनान्ते पातुं योग्यं किम् ?
(ख) सर्वदेवानां वन्दनीयः कः ?
(ग) जयन्तः कस्य सुतः ?
(घ) लङ्कायां मिलित्वा कस्य पूर्णरूपम् अस्ति ?
2. पाठस्य आधारेण निम्नलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु —
(क) विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ?
(ख) कस्य आदिः अन्तः च ‘न’ अस्ति ?
(ग) नरः काश्यां किम् इच्छति ?
(घ) कुलालस्य गृहे अर्धं किम् अस्ति ?
3. अधोलिखितानि शब्दरूपाणि पठन्तु अवगच्छन्तु स्मरन्तु च —
(षष्ठी-विभक्त्यन्तानि रूपाणि – शब्दरूप पढ़कर समझिए एवं स्मरण कीजिए। यह कण्ठस्थ करने का अभ्यास है।)
| लिङ्गम् | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| अकारान्त-पुंलिङ्गम् | छात्रः | छात्रस्य | छात्रयोः | छात्राणाम् |
| विद्यालयः | विद्यालयस्य | विद्यालययोः | विद्यालयानाम् | |
| सुतः | सुतस्य | सुतयोः | सुतानाम् | |
| रामः | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् | |
| आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् | सीता | सीतायाः | सीतयोः | सीतानाम् |
| कथा | कथायाः | कथयोः | कथानाम् | |
| प्रिया | प्रियायाः | प्रिययोः | प्रियाणाम् | |
| ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् | नदी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| देवी | देव्याः | देव्योः | देवीनाम् | |
| अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम् | पुस्तकम् | पुस्तकस्य | पुस्तकयोः | पुस्तकानाम् |
| उद्यानम् | उद्यानस्य | उद्यानयोः | उद्यानानाम् | |
| फलम् | फलस्य | फलयोः | फलानाम् | |
| सर्वनामपदानि | अहम् (अस्मद्) | मम | आवयोः | अस्माकम् |
| त्वम् (युष्मद्) | तव | युवयोः | युष्माकम् | |
| तत् (पुंलिङ्गम्) | तस्य | तयोः | तेषाम् | |
| तत् (स्त्रीलिङ्गम्) | तस्याः | तयोः | तासाम् | |
| एतत् (पुंलिङ्गम्) | एतस्य | एतयोः | एतेषाम् | |
| एतत् (स्त्रीलिङ्गम्) | एतस्याः | एतयोः | एतासाम् |
4. उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु —
यथा – विद्यालयः, छात्रः → विद्यालयस्य छात्रः गच्छति ।
| दत्त-पदे (शब्दौ) | क्रिया | पूर्ण वाक्यम् (उत्तर) |
|---|---|---|
| (क) द्विचक्रिका, चक्रम् | भ्रमति | द्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति । |
| (ख) वृक्षः, फलम् | खादति | वृक्षस्य फलं खादति । |
| (ग) छात्रा, नाम | पृच्छति | छात्रायाः नाम पृच्छति । |
| (घ) रामः, पुस्तकम् | आनयति | रामस्य पुस्तकम् आनयति । |
| (ङ) मन्दिरम्, शिखरम् | पश्यति | मन्दिरस्य शिखरं पश्यति । |
5. तालिकायां प्रदत्तानां शब्दानां षष्ठीविभक्तेः रूपाणि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु —
यथा – देवः → देवस्य, रमा → रमायाः, भवनम् → भवनस्य ।
| पुंलिङ्गम् | षष्ठी रूप | स्त्रीलिङ्गम् | षष्ठी रूप | नपुंसकलिङ्गम् | षष्ठी रूप |
|---|---|---|---|---|---|
| वृक्षः | वृक्षस्य | छात्रा | छात्रायाः | उद्यानम् | उद्यानस्य |
| द्वारपालः | द्वारपालस्य | दोला | दोलायाः | वनम् | वनस्य |
| स्यूतः | स्यूतस्य | उपासना | उपासनायाः | सूत्रम् | सूत्रस्य |
| अनुजः | अनुजस्य | पुस्तिका | पुस्तिकायाः | पत्रम् | पत्रस्य |
| अग्रजः | अग्रजस्य | भ्रातृजाया | भ्रातृजायायाः | यन्त्रम् | यन्त्रस्य |
| पितामहः | पितामहस्य | अग्रजा | अग्रजायाः | वातायनम् | वातायनस्य |
| मातुलः | मातुलस्य | स्नुषा | स्नुषायाः | पुष्पम् | पुष्पस्य |
| प्राचार्यः | प्राचार्यस्य | लेखनी | लेखन्याः | सङ्गणकम् | सङ्गणकस्य |
| विद्यालयः | विद्यालयस्य | पत्नी | पत्न्याः | गृहम् | गृहस्य |
| पितृव्यः | पितृव्यस्य | पुत्री | पुत्र्याः | वार्तापत्रम् | वार्तापत्रस्य |
6. रिक्तस्थानेषु कुटुम्बस्य परिचयं लिखन्तु —
यथा – मम नाम दिनेशः । मम पितुः नाम सुरेशः । (यह व्यक्तिगत अभ्यास है; नीचे एक नमूना उत्तर दिया गया है।)
7. अधः श्रीरामस्य कुटुम्बस्य रेखाचित्रम् अस्ति । चित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि रचयन्तु —
यथा – रामस्य पिता दशरथः । (रेखाचित्र के आधार पर सम्बन्ध-वाचक वाक्य।)
8. निम्नाङ्कित-पुस्तकसूचि-मध्ये कस्य उपरि किम् अस्ति इति लिखन्तु —
यथा – १. लीलावत्याः उपरि पञ्चतन्त्रम् अस्ति । २. भगवद्गीतायाः उपरि लीलावती अस्ति ।
(दत्त-सूची: (क) पञ्चतन्त्रम् (ख) लीलावती (ग) भगवद्गीता (घ) रामायणम् (ङ) हितोपदेशः (च) योगशास्त्रम् (छ) रघुवंशम् (ज) मनुस्मृतिः (झ) अमरकोषः (ञ) अष्टाध्यायी (ट) महाभारतम् (ठ) अर्थशास्त्रम्)
अवधेयांशः & व्याकरण-तालिकाः
पाठ के ‘अवधेयांशः’ (पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु च) भाग में निम्नलिखित सम्बन्ध-तालिकाएँ दी गई हैं।
1. गुरुः – शिष्यः (षष्ठी सम्बन्ध)
| गुरुः | शिष्यः |
|---|---|
| वसिष्ठः | श्रीरामः |
| परशुरामः | कर्णः |
| द्रोणः | अर्जुनः |
| चाणक्यः | चन्द्रगुप्तः |
| शङ्कराचार्यः | पद्मपादः |
| रामकृष्णः | विवेकानन्दः |
2. ग्रन्थः – ग्रन्थकर्ता
| ग्रन्थः | रचयिता |
|---|---|
| रामायणम् | वाल्मीकिः |
| महाभारतम् | व्यासः |
| कर्णभारम् (नाटकम्) | भासः |
| रघुवंशम् | कालिदासः |
| पञ्चतन्त्रम् | विष्णुशर्मा |
| हितोपदेशः | नारायणपण्डितः |
3. पति – पत्नी सम्बन्धः
| पतिः | पत्नी |
|---|---|
| वसिष्ठः | अरुन्धती |
| श्रीरामः | सीता |
| लक्ष्मणः | उर्मिला |
| पाण्डुराजः | कुन्ती |
| कृष्णः | रुक्मिणी |
| अर्जुनः | सुभद्रा |
4. षष्ठी-विभक्तिः (सम्बन्धकारक)
जहाँ दो पदों के बीच सम्बन्ध होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है। यथा – ‘बालकस्य पुस्तकम्’ में पुस्तक का सम्बन्ध बालक से है, अतः ‘बालक’ शब्द में षष्ठी विभक्ति लगी है। एकवचन में अकारान्त पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग में ‘-स्य’ (रामस्य, फलस्य), आकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आयाः’ (सीतायाः), ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग में ‘-आः’ (नद्याः) प्रत्यय लगते हैं।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
- प्रहेलिका: प्रकृष्टा हेलिका = प्रहेलिका । ‘हेला’ का अर्थ है क्रीडा (खेल)। जो खेल-खेल में अपना अभिप्राय छिपा ले, वह प्रहेलिका है। यह विनोदकला के अन्तर्गत आती है।
- षष्ठी विभक्ति: जहाँ सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी विभक्ति होती है (बालकस्य पुस्तकम्)।
- हस्तकुटुम्बकम् (गीत): अङ्गुष्ठ (तात), तर्जनी (माता), मध्यमा (ज्येष्ठा पुत्री), अनामिका (भगिनी), कनिष्ठिका (कनिष्ठ बाला) – हाथ की पाँच अंगुलियों को परिवार के रूप में दर्शाया गया है।
- सुभाषितम्: “अलसस्य कुतो विद्या…” तथा “हस्तस्य भूषणं दानम्…” – आलसी को विद्या नहीं, और हाथ का आभूषण दान एवं वाणी का आभूषण सत्य है।
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. स्वपरिवारस्य मित्रपरिवारस्य च परिचयं प्रत्येकं दशभिः-दशभिः वाक्यैः लिखन्तु ।
2. मातृभाषया एतादृशानां पञ्चानां प्रहेलिकानां संग्रहं कुर्वन्तु ।
3. क्रीडा (लुका-छिपी कथा) पठन्तु —
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. प्रहेलिका किसे कहते हैं? इसका क्या लाभ है?
2. दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ क्यों है?
3. पाँचवीं प्रहेलिका में ‘कुम्भकर्णः’ उत्तर कैसे बनता है?
4. षष्ठी विभक्ति का प्रयोग कब होता है? उदाहरण दीजिए।
5. श्रीराम के गुरु एवं अर्जुन के गुरु कौन थे?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘यः जानाति सः पण्डितः’ पाठ का मुख्य भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. पाठ में दी गई पाँचों प्रहेलिकाओं के उत्तर उनके कारण सहित संक्षेप में लिखिए।
8. षष्ठी विभक्ति पर एक टिप्पणी लिखिए तथा तीन उदाहरण दीजिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. इस पाठ में किस साहित्यिक विधा का वर्णन है?
(क) कथा
(ख) प्रहेलिका (पहेली)
(ग) नाटक
(घ) सुभाषित
2. भोजन के अन्त में पीने योग्य क्या है?
(क) जलम्
(ख) दुग्धम्
(ग) तक्रम् (छाछ)
(घ) रसः
3. जयन्त किसका पुत्र है?
(क) शक्रस्य (इन्द्र)
(ख) विष्णोः
(ग) ब्रह्मणः
(घ) शिवस्य
4. जिस पद का आदि एवं अन्त ‘न’ तथा मध्य ‘य’ हो, वह क्या है?
(क) वदनम्
(ख) नयनम्
(ग) चरणम्
(घ) भवनम्
5. जिसका आदि ‘अ’ एवं अन्त ‘स’ है, वह फल कौन-सा है?
(क) आम्रः
(ख) कदलीफलम्
(ग) अनानसः
(घ) द्राक्षा
6. काशी में मनुष्य क्या चाहता है?
(क) धनम्
(ख) मृत्युम्
(ग) यशः
(घ) राज्यम्
7. कुम्हार के घर एवं हस्तिनापुर के दो आधे भाग लंका में मिलकर क्या बनाते हैं?
(क) कुम्भकर्णः
(ख) रावणः
(ग) विभीषणः
(घ) मेघनादः
8. इस पाठ का व्याकरणिक मुख्य बिन्दु कौन-सी विभक्ति है?
(क) द्वितीया
(ख) चतुर्थी
(ग) षष्ठी (सम्बन्धकारक)
(घ) सप्तमी
9. अर्जुन के गुरु कौन थे?
(क) वसिष्ठः
(ख) द्रोणः
(ग) परशुरामः
(घ) चाणक्यः
10. ‘रामायणम्’ के रचयिता कौन हैं?
(क) व्यासः
(ख) वाल्मीकिः
(ग) कालिदासः
(घ) भासः
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): दूसरी प्रहेलिका का उत्तर ‘नयनम्’ है।
कारण (R): ‘नयनम्’ का आदि एवं अन्त ‘न’ तथा मध्य में ‘य’ रहता है।
2. अभिकथन (A): प्रहेलिकाएँ चिन्तन-क्षमता एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं।
कारण (R): प्रहेलिकाओं का संस्कृत-साहित्य में कोई स्थान नहीं है।
3. अभिकथन (A): पाँचवीं प्रहेलिका का उत्तर ‘कुम्भकर्णः’ है।
कारण (R): ‘कुम्भ’ कुम्हार के घर एवं ‘कर्ण’ हस्तिनापुर से सम्बन्धित है, दोनों मिलकर लंका में ‘कुम्भकर्ण’ बनते हैं।
4. अभिकथन (A): ‘बालकस्य पुस्तकम्’ में ‘बालक’ शब्द में षष्ठी विभक्ति है।
कारण (R): जहाँ सम्बन्ध होता है, वहाँ षष्ठी विभक्ति लगती है।
5. अभिकथन (A): काशी में मनुष्य धन की कामना करता है।
कारण (R): चौथी प्रहेलिका के अनुसार काशी में मनुष्य मृत्यु (मोक्ष) की कामना करता है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- पाँचों प्रहेलिकाओं के उत्तर (तक्रम्, नयनम्, अनानसः, मृत्युम्/जयः, कुम्भकर्णः) उनके कारण सहित याद रखें।
- शब्दार्थ (पेयम्, सुतः, तक्रम्, कुलालस्य, रणे आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में स्मरण करें।
- षष्ठी विभक्ति के शब्दरूप (छात्रस्य, सीतायाः, नद्याः, फलस्य) तालिका सहित कण्ठस्थ करें।
- ‘एकपदेन उत्तरम्’ वाले प्रश्न में केवल एक शब्द एवं ‘पूर्णवाक्येन’ में पूरा वाक्य लिखें।
- गुरु-शिष्य एवं ग्रन्थ-रचयिता की जोड़ियाँ (वाल्मीकि-रामायण, व्यास-महाभारत) याद रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- षष्ठी रूप में ‘-आयाः’ एवं ‘-आः’ का घालमेल – सीता → सीतायाः, परन्तु नदी → नद्याः।
- प्रहेलिका के उत्तर को बिना कारण लिखना – उत्तर के साथ शब्द-विश्लेषण भी लिखें।
- ‘कुलालः’ का अर्थ कुम्हार है, राजा नहीं – ध्यान रखें।
- लेखनी (ईकारान्त) का षष्ठी रूप ‘लेखन्याः’ होता है, ‘लेखनीयाः’ नहीं।
- पाठ को कथा/नाटक समझ लेना – यह प्रहेलिका (पहेली) पाठ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 के पाठ 11 ‘यः जानाति सः पण्डितः’ में किसका वर्णन है?
यह पाठ संस्कृत की प्रहेलिका (पहेली) विधा पर आधारित है। इसमें पाँच रोचक प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, जिनके उत्तर हैं – तक्रम् (छाछ), नयनम् (आँख), अनानसः, मृत्युम्/जयः तथा कुम्भकर्णः।
‘यः जानाति सः पण्डितः’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – ‘जो (इन पहेलियों का उत्तर) जानता है, वही पण्डित (बुद्धिमान्) है।’ यह बुद्धि एवं तर्क-शक्ति को बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
इस पाठ में मुख्य व्याकरण-बिन्दु क्या है?
इस पाठ का मुख्य व्याकरण-बिन्दु षष्ठी विभक्ति (सम्बन्धकारक) है – जहाँ दो पदों में सम्बन्ध हो, वहाँ षष्ठी लगती है, जैसे ‘रामस्य पुस्तकम्’, ‘सीतायाः कथा’।
प्रहेलिकाएँ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, अन्वय एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
