Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 12 Solutions (NCERT 2026–27) – त्वम् आपणं गच्छ
This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 12 (द्वादशः पाठः) ‘त्वम् आपणं गच्छ’ – a lively माता-पुत्र संवाद in which राकेश goes to the आपण (market) to buy household goods. The lesson teaches the लोट्लकारः (imperative mood) – आज्ञा and प्रार्थना forms of verbs. You get the complete मूल पाठ (दोनों संवाद) with हिन्दी अन्वय, सार, शब्दार्थ, original exam-ready answers to every question of the अभ्यासः, the धातुरूप tables, extra questions, 10 MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ एवं अन्वय (हिन्दी)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
- अत्र इदम् अवधेयम् (लोट्लकार-तालिकाः)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का द्वादश पाठ ‘त्वम् आपणं गच्छ’ एक रोचक संवाद-पाठ है। इसमें दो दृश्य हैं – पहले दृश्य में अम्बा (माता) अपने पुत्र राकेश को बाज़ार (आपण) जाकर घरेलू सामान लाने का आदेश देती है तथा उसे स्यूत (थैला), धन एवं वस्तुओं की नामावली (सूची) देती है। माता उसे अधिक चॉकलेट खाने से होने वाली हानि के विषय में सावधान भी करती है और मार्ग में वाहनों की गति देखकर सावधानी से सड़क पार करने को कहती है। दूसरे दृश्य में राकेश आपणिक (दुकानदार) से मूँग, गुड़, शर्करा, द्विदल, सर्षप आदि वस्तुएँ खरीदता है, मूल्य चुकाता है और शेष धन वापस लेता है। पाठ का मुख्य उद्देश्य लोट्लकार (आज्ञा एवं प्रार्थना अर्थ की क्रियाएँ) का सहज अभ्यास कराना है – जैसे ‘गच्छ, आनय, ददातु, स्वीकरोतु, पश्यतु’।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ दैनिक जीवन के एक सामान्य प्रसंग – बाज़ार से सामान खरीदने – पर आधारित सरल संवाद है। पाठ का व्याकरणिक केन्द्र-बिन्दु है लोट्लकारः। लोट्लकार क्रिया का भावसूचक (Mood) है, जिसका प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है – जैसे ‘त्वं पठ’ (तुम पढ़ो), ‘भवान् पिबतु’ (आप पीजिए), ‘यूयम् उत्तिष्ठत’ (तुम सब उठो)। पाठ में मोटे (स्थूल) अक्षरों में लिखे क्रियापद इसी लोट्लकार के उदाहरण हैं। संवाद के माध्यम से छात्र संख्यावाची शब्द (एककिलोमितः, अर्धकिलोमितः, पादकिलोमितः) तथा क्रय-विक्रय की शब्दावली भी सीखते हैं।
मूल पाठ एवं अन्वय (हिन्दी)
(संवाद NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक के साथ सरल हिन्दी अर्थ/अन्वय दिया गया है।)
दृश्यम् – १ (गृहे : अम्बा-राकेशयोः संवादः)
राकेशः – आम् अम्ब ! कथय किं कार्यं करवाणि ?
अम्बा – अद्य तव तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति । त्वम् आपणं गच्छ । वस्तूनि आनय । वस्तूनां नामावली अपि अत्र अस्ति ।
राकेशः – अस्तु । स्यूतं ददातु । वस्तूनां नामावलीम् अहं स्वीकरोमि ।
अम्बा – स्वीकुरु । धनम् अपि नय ।
राकेशः – अम्ब ! इतोऽपि एकं वस्तु स्वीकरवाणि ?
अम्बा – चाकलेहम् इच्छति खलु वत्स ! जानातु, अधिकं चाकलेह-खादनं स्वास्थ्याय हानिकरं भवति ।
राकेशः – केवलम् अद्य एव स्वीकरोमि ।
अम्बा – अस्तु । मार्गे यानानां गतिं पश्यतु । अनन्तरं सावधानं पारं गच्छतु ।
राकेशः – आम् । अहं गच्छामि ।
दृश्यम् – २ (आपणे : राकेश-आपणिकयोः संवादः)
आपणिकः – पश्यामि ।
मुद्गः – अर्धकिलोमितः । शर्करा – एककिलोमिता ।
गुडः – एककिलोमितः । द्विदलम् – एककिलोमितम् ।
सर्षपः – पादकिलोमितः ।
सर्वं सिद्धम् अस्ति । स्यूतं ददातु, तत्र स्थापयामि ।
राकेशः – अस्तु, कति रूप्यकाणि यच्छानि ?
आपणिकः – चत्वारि शतानि षष्टिं (४६०) च रूप्यकाणि ददातु ।
राकेशः – महोदय ! नीलवर्णा लेखनी अस्ति किम् ?
आपणिकः – आम्, अस्ति ।
राकेशः – एकं चाकलेहम् एकां लेखनीं च ददातु । तस्य मूल्यम् अपि योजयतु ।
आपणिकः – अस्तु । लेखन्याः विंशतिं रूप्यकाणि चाकलेहस्य दश रूप्यकाणि च योजयामि । आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रूप्यकाणि ददातु ।
राकेशः – आम्, पञ्च शतानि (५००) रूप्यकाणि सन्ति । स्वीकरोतु, अवशिष्टं च ददातु ।
आपणिकः – सर्वं स्यूते स्थापितम् अस्ति । दश (१०) रूप्यकाणि अवशिष्टानि, स्वीकरोतु ।
राकेशः – अस्तु । धन्यवादः ।
आपणिकः – पुनरपि आगच्छतु ।
सार (Hindi Summary)
‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ दैनिक जीवन के एक साधारण किन्तु शिक्षाप्रद प्रसंग पर आधारित है। एक दिन राकेश के पिताजी कार्यालय से देर से आने वाले होते हैं, इसलिए माता (अम्बा) राकेश को बाज़ार (आपण) भेजती है। वह उसे वस्तुओं की सूची (नामावली), थैला (स्यूत) तथा धन देती है। माता पुत्र को अधिक चॉकलेट खाने से होने वाली स्वास्थ्य-हानि से सावधान करती है और मार्ग में वाहनों की गति देखकर सावधानी से सड़क पार करने का परामर्श देती है। इस प्रकार पाठ में माता का स्नेह, सतर्कता एवं उत्तम संस्कार झलकते हैं।
दूसरे दृश्य में राकेश दुकान पर पहुँचकर दुकानदार (आपणिक) को सूची देता है। दुकानदार मूँग (आधा किलो), शर्करा (एक किलो), गुड़ (एक किलो), दाल (एक किलो) तथा सरसों (पाव किलो) तौलकर थैले में रख देता है, जिसका मूल्य ४६० रुपये होता है। राकेश एक चॉकलेट तथा एक नीली कलम भी खरीदता है, जिससे कुल मूल्य ४९० रुपये हो जाता है। वह ५०० रुपये देता है और दुकानदार उसे शेष १० रुपये लौटा देता है। राकेश धन्यवाद कहकर लौटता है तथा दुकानदार उसे फिर आने को कहता है। इस सरल संवाद के माध्यम से छात्र लोट्लकार (आज्ञा एवं प्रार्थना अर्थ की क्रियाएँ), क्रय-विक्रय की शब्दावली एवं संख्यावाची शब्द सहजता से सीख जाते हैं। साथ ही यह पाठ शिष्टाचार, मित-व्यय एवं सतर्कता जैसे जीवन-मूल्यों की भी शिक्षा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्यूतम् (प्रसेवम्) | थैला | Bag |
| नामावली (नामसूचिः) | सूची | List |
| आपणम् | बाज़ार (वस्तु-विक्रय-केन्द्र) | Market / Shop |
| आनय (आहर) | लाओ | (You) Bring |
| नय (गृहाण) | ले जाओ | (You) Take away |
| चाकलेहः | चॉकलेट | Chocolate |
| यानानाम् (वाहनानाम्) | गाड़ियों की | Of vehicles |
| गतिम् (गमनम्) | चलना, गति | Movement / speed |
| मुद्गः (धान्यविशेषः) | मूँग | Green gram |
| शर्करा (सिता) | चीनी | Sugar |
| गुडः (इक्षुसारः) | गुड़ | Jaggery |
| द्विदलम् | दाल | Pulses |
| सर्षपः | सरसों | Mustard seeds |
| अवशिष्टम् (शेषभागः) | बाकी, शेष | Remaining |
| विपणिम् (आपण-वीथिम्) | बाज़ार | Market |
| आपणिकः | दुकानदार | Shopkeeper |
| रूप्यकाणि | रुपये | Rupees |
| लेखनी | कलम | Pen |
| मूल्यम् | दाम, कीमत | Price / value |
| हानिकरम् | हानिकारक | Harmful |
वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
१. पूर्वपृष्ठस्य कोष्ठके दत्तानि रूपाणि दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
(पिछले पृष्ठ के कोष्ठक में दिए गए ‘पठ्’-धातु के लोट्लकार रूपों के आधार पर ‘लिख्’ एवं ‘क्रीड्’ धातुओं के रूप भरिए।)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | लिखतु | लिखताम् | लिखन्तु |
| मध्यमपुरुषः | लिख | लिखतम् | लिखत |
| उत्तमपुरुषः | लिखानि | लिखाव | लिखाम |
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | क्रीडतु | क्रीडताम् | क्रीडन्तु |
| मध्यमपुरुषः | क्रीड | क्रीडतम् | क्रीडत |
| उत्तमपुरुषः | क्रीडानि | क्रीडाव | क्रीडाम |
२. निम्नलिखितेषु सुभाषितेषु लोट्लकारस्य क्रियापदानि चित्वा लिखन्तु —
(निम्नलिखित सुभाषितों में से लोट्लकार की क्रियाएँ छाँटकर लिखिए।)
३. उदाहरणानुगुणं लोट्लकारस्य रूपाणि लिखन्तु —
(उदाहरणानुसार लट्-लकार की क्रिया का समान पुरुष-वचन का लोट्लकार रूप लिखिए। यथा – पठति → पठतु।)
| लट्-लकारः | लोट्लकारः (उत्तर) | लट्-लकारः | लोट्लकारः (उत्तर) |
|---|---|---|---|
| पठति | पठतु | खादति | खादतु |
| क्रीडामि | क्रीडानि | पश्यसि | पश्य |
| हसति | हसतु | नयसि | नय |
| नृत्यति | नृत्यतु | गच्छामि | गच्छानि |
४. उदाहरणानुगुणं बहुवचनस्य रूपाणि लिखन्तु —
(उदाहरणानुसार लोट्लकार के बहुवचन रूप लिखिए। यथा – उत्तिष्ठतु → उत्तिष्ठन्तु।)
| दत्तरूपम् | बहुवचनम् (उत्तर) | दत्तरूपम् | बहुवचनम् (उत्तर) |
|---|---|---|---|
| उत्तिष्ठतु | उत्तिष्ठन्तु | खादतु | खादन्तु |
| आगच्छतु | आगच्छन्तु | पठानि | पठाम |
| उपविशतु | उपविशन्तु | पततु | पतन्तु |
| गच्छ | गच्छत | – | – |
५. विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवे के-के किं-किं कुर्वन्ति इति सूचनारूपेण वाक्यानि पुनः लिखन्तु —
(लट्-लकार के वाक्यों को सूचना/आज्ञारूप अर्थात् लोट्लकार में पुनः लिखिए। यथा – दशमकक्षायाः छात्राः वेदिकाम् अलङ्कुर्वन्ति → …अलङ्कुर्वन्तु।)
६. पट्टिकातः उचितैः क्रियारूपैः अनुच्छेदस्य रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
पट्टिका (शब्द-मञ्जूषा): शृण्वन्तु, गच्छन्तु, लिखन्तु, पठन्तु, पृच्छन्तु, कुर्वन्तु, वदन्तु, उत्तिष्ठन्तु, उपविशन्तु, अभिवादयन्तु
७. मार्गे सूचनादीपाः फलकानि च भवन्ति । तेषां चित्राणि दृष्ट्वा पट्टिकापदैः वाक्यानि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु —
पट्टिका: तिष्ठ, प्रतीक्षस्व, वामतः गच्छ, दक्षिणतः गच्छ, यानं मा स्थापय, पदयात्रिकाः!, गच्छ, अग्रे विद्यालयः
८. उदाहरणानुसारं क्रियापदस्य लोट्-लकाररूपैः वाक्यानि पूरयन्तु —
(यथा – छात्राः प्रातः शीघ्रम् उत्तिष्ठन्तु । [उत् + तिष्ठ्])
९. चिह्नानि ( ? ! । , ) भावानुसारं वाक्ये योजयन्तु —
(यथा – राकेश ! कुत्र असि ? अत्र आगच्छ ।)
अत्र इदम् अवधेयम् (लोट्लकार-तालिकाः)
पाठ में मोटे (स्थूल) अक्षरों में लिखे क्रियापद लोट्लकार के हैं। लोट्लकार क्रिया का भावसूचक (Mood) है, जिसका प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है।
1. पठ्-धातुः (लोट्लकारः) – आदर्श रूप
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | पठतु | पठताम् | पठन्तु |
| मध्यमपुरुषः | पठ | पठतम् | पठत |
| उत्तमपुरुषः | पठानि | पठाव | पठाम |
2. लोट्लकारस्य चिह्नानि (प्रत्यय-तालिका)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अतु | अताम् | अन्तु |
| मध्यमपुरुषः | अ | अतम् | अत |
| उत्तमपुरुषः | आनि | आव | आम |
पठन्तु अवगच्छन्तु – पाठ के चित्र-वाक्य: भवान् पिबतु (आप पीजिए) • यूयम् उत्तिष्ठत (तुम सब उठो) • भवन्तः खादन्तु (आप सब खाइए) • अहं संशयं पृच्छानि (मैं संशय पूछूँ) • त्वं पठ (तुम पढ़ो) • वयं गच्छाम (हम चलें)।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
योग्यताविस्तर में ‘कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्’ (कवि: वासुदेवद्विवेदी शास्त्री) नामक गीत दिया गया है, जिसमें भी अधिकांश क्रियापद लोट्लकार में हैं। यह गीत सद्गुण ग्रहण करने, उपकार करने, अहंकार एवं दुर्व्यसन छोड़ने तथा समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देता है। इसे कण्ठस्थ करके समूह में गाना चाहिए और उसमें आए लोट्लकार रूपों को पहचानना चाहिए।
| गीत-पंक्तिः (लोट्लकार-क्रिया) | भावः (हिन्दी) |
|---|---|
| कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम् | उपकार करो, उद्धार करो |
| मा कुरु दर्पं, मा कुरु गर्वम् | घमंड एवं अहंकार मत करो |
| मा भव मानी, मानय सर्वम् | अभिमानी मत बनो, सबका सम्मान करो |
| तनयं पाठय, तनयां पाठय | पुत्र एवं पुत्री दोनों को पढ़ाओ |
| मा वद मिथ्या, मा वद व्यर्थम् | झूठ एवं व्यर्थ मत बोलो |
| मा पिब मादकवस्तु अपेयम् | हानिकारक नशीली वस्तु मत पिओ |
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. पुस्तकात् लोट्लकारस्य क्रियापदानि चित्वा लिखन्तु ।
2. गृहे माता भवन्तं/भवतीं “किं-किम् आदिशति” इति लोट्लकारे पञ्च वाक्यानि लिखन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. अम्बा राकेशम् आपणं किमर्थं प्रेषयति?
2. अम्बा चाकलेहविषये राकेशं किं वदति?
3. राकेशः आपणात् कानि वस्तूनि क्रीणाति?
4. लोट्लकारस्य प्रयोगः कस्मिन् अर्थे भवति?
5. आपणिकः राकेशाय कति रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति, कथं च?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ से हमें क्या-क्या जीवन-शिक्षा मिलती है? अपने शब्दों में लिखिए।
7. लोट्लकार क्या है? उसके प्रयोग एवं रूपों को उदाहरण सहित समझाइए।
8. पाठ के दोनों दृश्यों का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. अम्बा राकेशं कुत्र प्रेषयति?
(क) विद्यालयम्
(ख) आपणम्
(ग) क्रीडाङ्गणम्
(घ) कार्यालयम्
2. ‘स्यूतम्’ इत्यस्य अर्थः कः?
(क) सूची
(ख) धनम्
(ग) थैला (प्रसेवम्)
(घ) कलम
3. अयं पाठः कस्य लकारस्य अभ्यासाय अस्ति?
(क) लट्-लकारस्य
(ख) लृट्-लकारस्य
(ग) लोट्-लकारस्य
(घ) लङ्-लकारस्य
4. लोट्लकारस्य प्रयोगः केषु अर्थयोः भवति?
(क) भूतकाले
(ख) आज्ञा-प्रार्थनयोः
(ग) भविष्यत्काले
(घ) सन्देहे
5. ‘पठ्’-धातोः लोट्लकारे उत्तमपुरुष-एकवचनरूपं किम्?
(क) पठतु
(ख) पठ
(ग) पठानि
(घ) पठन्तु
6. राकेशः सर्वमिलित्वा कति रूप्यकाणि आपणिकाय ददाति?
(क) ४६० रूप्यकाणि
(ख) ४९० रूप्यकाणि
(ग) ५०० रूप्यकाणि
(घ) ४७० रूप्यकाणि
7. ‘मुद्गः’ इत्यस्य हिन्दी-अर्थः कः?
(क) गुड़
(ख) चीनी
(ग) मूँग
(घ) सरसों
8. आपणिकः राकेशाय कति रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति?
(क) विंशतिम्
(ख) दश
(ग) पञ्च
(घ) पञ्चाशत्
9. अम्बा कस्य वस्तुनः खादनं स्वास्थ्याय हानिकरम् इति वदति?
(क) गुडस्य
(ख) शर्करायाः
(ग) चाकलेहस्य
(घ) मुद्गस्य
10. ‘गच्छ’ इत्यस्य लोट्लकारे बहुवचनरूपं किम्?
(क) गच्छतु
(ख) गच्छत
(ग) गच्छन्तु
(घ) गच्छानि
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): अम्बा राकेशम् आपणं प्रेषयति।
कारण (R): अद्य राकेशस्य तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति।
2. अभिकथन (A): अधिकं चाकलेह-खादनं स्वास्थ्याय हानिकरम् अस्ति।
कारण (R): चाकलेहः मधुरः रोचकः च भवति, अतः सः सर्वथा अपेयः अखाद्यः च।
3. अभिकथन (A): ‘सङ्गच्छध्वम्’… नहीं, ‘गच्छ, पश्यतु, आनय’ इति पाठे लोट्लकारस्य क्रियापदानि सन्ति।
कारण (R): लोट्लकारः आज्ञायाः प्रार्थनायाः च अर्थे प्रयुज्यते।
4. अभिकथन (A): आपणिकः राकेशाय दश रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति।
कारण (R): सर्वेषां वस्तूनां मूल्यं ४९० रूप्यकाणि आसीत्, राकेशेन च ५०० रूप्यकाणि दत्तानि।
5. अभिकथन (A): ‘पठानि, पठाव, पठाम’ इति लोट्लकारस्य उत्तमपुरुष-रूपाणि सन्ति।
कारण (R): लोट्लकारे उत्तमपुरुषस्य चिह्नानि ‘आनि, आव, आम’ भवन्ति।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- लोट्लकार के तीनों पुरुषों के प्रत्यय-चिह्न (अतु/अताम्/अन्तु, अ/अतम्/अत, आनि/आव/आम) तालिका सहित कण्ठस्थ करें।
- उत्तमपुरुष में सदैव ‘आ’ जुड़ता है – पठानि, पठाव, पठाम (यहाँ अधिकांश छात्र गलती करते हैं)।
- शब्दार्थ (स्यूतम्, आपणम्, मुद्गः, गुडः, सर्षपः, अवशिष्टम्, आपणिकः) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- संवाद के आधार पर पूर्णवाक्य में उत्तर लिखने का अभ्यास करें (कः, किम्, कति, कुत्र प्रश्न)।
- विराम-चिह्न ( ? ! । , ) भाव के अनुसार सही स्थान पर लगाना सीखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- लट् एवं लोट् रूपों में भ्रम – ‘गच्छति’ (वर्तमान) एवं ‘गच्छतु’ (आज्ञा) को अलग पहचानें।
- उत्तमपुरुष में ‘आ’ भूल जाना (गलत – पठनि; सही – पठानि)।
- मध्यमपुरुष एकवचन में प्रत्यय न लगाना – धातु ज्यों-का-त्यों रहता है (पठ, गच्छ, वद)।
- संख्या-गणना की भूल – कुल मूल्य ४९० है (४६० + २० + १०), शेष १० रुपये।
- शब्दों के अर्थ में भ्रम – मुद्गः (मूँग), द्विदलम् (दाल), सर्षपः (सरसों) को न मिलाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 12 ‘त्वम् आपणं गच्छ’ किस व्याकरण-विषय पर आधारित है?
यह पाठ लोट्लकार (Imperative Mood) के अभ्यास पर आधारित है। लोट्लकार का प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है, जैसे – ‘त्वं पठ’, ‘भवान् पिबतु’।
‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ का मुख्य कथानक क्या है?
इस पाठ में माता (अम्बा) अपने पुत्र राकेश को बाज़ार (आपण) भेजती है। राकेश दुकानदार से मूँग, चीनी, गुड़, दाल, सरसों, एक चॉकलेट एवं एक कलम खरीदता है, ४९० रुपये चुकाता है और शेष १० रुपये वापस लेता है।
राकेश ने कुल कितने रुपये का सामान खरीदा?
राकेश ने कुल ४९० रुपये का सामान खरीदा – वस्तुओं (मूँग, चीनी, गुड़, दाल, सरसों) के ४६० रुपये, कलम के २० रुपये तथा चॉकलेट के १० रुपये। उसने ५०० रुपये दिए और दुकानदार ने १० रुपये लौटाए।
मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
