Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 13 Solutions (NCERT 2026–27) – पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 13 ‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि’ – a collection of seven famous सुभाषितानि (wise sayings) drawn from नीति-ग्रन्थ such as चाणक्यनीति, हितोपदेश, पञ्चतन्त्र and रामायण. You get the मूल सुभाषितानि with अन्वय & भावार्थ, शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः), along with extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल सुभाषितानि (अन्वय + भावार्थ)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का त्रयोदश (13वाँ) पाठ ‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि’ सात प्रसिद्ध सुभाषितों (सुन्दर एवं उपदेशप्रद वचनों) का संकलन है। पाठ का आरम्भ एक रोचक संवाद से होता है, जिसमें आचार्य छात्रों को स्फोरकपत्र (फ्लैश-कार्ड) दिखाते हैं, जिन पर सुन्दर चित्र एवं श्लोक अंकित हैं। आचार्य बताते हैं कि ‘सुन्दर वचन ही सुभाषित कहलाते हैं’ और ये हमें उत्तम कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। पाठ में दिए गए सात सुभाषित जल-अन्न-सुभाषित रूपी तीन रत्नों, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की उदार भावना, परिश्रम के महत्त्व, बड़ों के सम्मान, उद्यम-साहस-धैर्य जैसे गुणों, विद्या से प्राप्त सुख तथा मातृभूमि की महिमा का बोध कराते हैं। पाठ का केन्द्रीय भाव है – नीति, परिश्रम, उदारता एवं विद्या ही जीवन के सच्चे रत्न हैं।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ किसी एक ग्रन्थ से नहीं, अपितु अनेक प्रसिद्ध नीति-ग्रन्थों से चुने गए सुभाषितों का संग्रह है। सुभाषित का अर्थ है – ‘सु + भाषित’ अर्थात् सुन्दर रूप से कहा गया वचन। पाठ के अन्त में ‘योग्यताविस्तरः’ में बताया गया है कि ये सुभाषित चाणक्यनीतिः, मनुस्मृतिः, पञ्चतन्त्रम्, हितोपदेशः, रामायणम् तथा सुभाषितरत्नभाण्डागारः जैसे ग्रन्थों से लिए गए हैं। ये वचन सूत्ररूप में जीवन के मूल्यों एवं आदर्शों की शिक्षा देते हैं और छात्रों को उत्तम कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।
मूल सुभाषितानि (अन्वय + भावार्थ)
(पाठ के सात सुभाषित ज्यों-के-त्यों, साथ में अन्वय एवं भावार्थ।)
सुभाषितम् 1 – तीन रत्न
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ॥ — (नीति-सुभाषितम्)
सुभाषितम् 2 – वसुधैव कुटुम्बकम्
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ — (हितोपदेशः / पञ्चतन्त्रम्)
सुभाषितम् 3 – उद्यम का महत्त्व
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः ॥ — (हितोपदेशः)
सुभाषितम् 4 – बड़ों के सम्मान का फल
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ॥ — (मनुस्मृतिः)
सुभाषितम् 5 – छह गुण
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत् ॥ — (नीति-सुभाषितम्)
सुभाषितम् 6 – विद्या का फल
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥ — (हितोपदेशः)
सुभाषितम् 7 – मातृभूमि की महिमा
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ — (रामायणम्)
सुभाषितम् 8 – बुद्धिस्थ विद्या एवं स्वहस्त-धन
कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम् ॥ — (चाणक्यनीतिः)
सार (Hindi Summary)
‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि’ पाठ का आरम्भ आचार्य एवं छात्रों के एक मनोरम संवाद से होता है। आचार्य छात्रों को स्फोरकपत्र (फ्लैश-कार्ड) दिखाते हैं, जिन पर सुन्दर चित्र एवं श्लोक हैं। आचार्य बताते हैं कि ये ‘सुभाषित’ हैं अर्थात् सुन्दर वचन, जो हमें उत्तम कार्य की प्रेरणा देते हैं। इसके बाद पाठ में सात प्रसिद्ध सुभाषित दिए गए हैं।
पहला सुभाषित कहता है कि पृथ्वी पर सच्चे तीन रत्न जल, अन्न और सुभाषित हैं, मणि-पत्थर नहीं। दूसरा सुभाषित ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उदार भाव सिखाता है – उदार लोगों के लिए सारी पृथ्वी ही परिवार है। तीसरा सुभाषित परिश्रम का महत्त्व बताता है – कार्य केवल इच्छा से नहीं, उद्यम से ही सिद्ध होते हैं, जैसे सोते सिंह के मुख में हिरण स्वयं नहीं आते। चौथा सुभाषित कहता है कि बड़ों का अभिवादन एवं सेवा करने वाले की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।
पाँचवाँ सुभाषित बताता है कि जहाँ उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम होते हैं, वहाँ ईश्वर भी सहायता करते हैं। छठा सुभाषित विद्या की महिमा दर्शाता है – विद्या से विनय, विनय से योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है। सातवाँ सुभाषित (रामायण से) मातृभूमि की महिमा बताता है – श्रीराम कहते हैं कि स्वर्णमयी लङ्का भी उन्हें प्रिय नहीं, क्योंकि माता एवं जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान् हैं। अन्तिम सुभाषित सिखाता है कि केवल पुस्तक में रही विद्या और दूसरे के हाथ गया धन समय पर काम नहीं आते। संक्षेप में, यह पाठ नीति, परिश्रम, उदारता, बड़ों का सम्मान, मातृभूमि-प्रेम एवं विद्या के महत्त्व की प्रेरणा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मूढैः | मूर्ख जनों के द्वारा | By fools |
| पाषाणखण्डेषु | पत्थर के टुकड़ों में | In pieces of stone |
| रत्नसंज्ञा | रत्न का नाम/संज्ञा | The name ‘jewel’ |
| निजः | अपना (स्वकीयः) | Own |
| परः | अन्य/पराया जन | Other |
| लघुचेतसाम् | संकुचित/क्षुद्र हृदय वालों का | Of the narrow-minded |
| वसुधा | पृथ्वी (धरित्री) | The Earth |
| कुटुम्बकम् | परिवार/कुटुम्ब | Family |
| उद्यमेन | परिश्रम से | By effort |
| मनोरथैः | केवल इच्छाओं से | By mere wishes |
| सुप्तस्य | सोते हुए (का) | Of the sleeping (one) |
| अभिवादनशीलस्य | अभिवादन/प्रणाम करने वाले का | Of one who greets respectfully |
| वृद्धोपसेविनः | बड़ों की सेवा करने वाले का | Of one who serves elders |
| वर्धन्ते | बढ़ते हैं | Increase / grow |
| सहायकृत् | सहायता करने वाला | One who helps |
| पात्रताम् | योग्यता को | Worthiness / ability |
| आप्नोति | प्राप्त करता है | Obtains / receives |
| गरीयसी | श्रेष्ठ/महान | Greater / superior |
| स्वर्णमयी | सोने की बनी हुई | Made of gold |
| परहस्तगतम् | दूसरे के हाथ में गया हुआ | Gone into another’s hand |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
1. एतानि सर्वाणि सुभाषितानि उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु लिखन्तु च ।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति ?
(ख) अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ?
(ग) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति ?
(घ) विद्या किं ददाति ?
(ङ) जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ?
(च) लङ्का कीदृशी आसीत् ?
3. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु —
(क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि सन्ति ?
(ख) उदारचरितानां भावः कः भवति ?
(ग) मृगाः स्वयमेव कस्य मुखे न प्रविशन्ति ?
(घ) अभिवादनशीलस्य नित्यं कानि वर्धन्ते ?
(ङ) मनुष्यः धनात् किम् आप्नोति ?
(च) उत्पन्नेषु कार्येषु कीदृशं धनम् उपयोगाय न भवति ?
4. चित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि रचयन्तु —
(पुस्तक के चित्रों को देखकर वाक्य बनाइए। उदाहरण पुस्तक में दिया गया है।)
5. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति लिखन्तु —
यथा – किं पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति ? → आम् ।
6. चित्रे दर्शितस्य नाम लिङ्गं च निर्दिशन्तु —
(चित्र में दर्शाई वस्तु का नाम एवं लिङ्ग लिखिए। उदाहरण पुस्तक में दिया गया है।)
7. वलये पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु —
(वृत्त (वलय) में दिए पदों को क्रम से लगाकर सुभाषित पूरा कीजिए।)
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥
8. पिट्टकातः पदानि चित्वा निर्देशानुसारं पदानि लिखन्तु —
पिट्टका (शब्द-मञ्जूषा): जननी, धैर्यम्, विद्या, विनयः, निजः, पत्रम्, बुद्धिः, मूलम्, पराक्रमः, शक्तिः, धनम्, उद्यमः
9. पाठगतानि सुभाषितानि स्मृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
10. चित्राणि दृष्ट्वा उचितान् श्लोकांशान् लिखन्तु —
(चित्रों को देखकर उनसे सम्बन्धित उपयुक्त सुभाषित-अंश लिखिए। नमूना उत्तर नीचे दिए गए हैं।)
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (सुभाषितों के स्रोत-ग्रन्थ)
पाठ के ये सुभाषित विविध ग्रन्थों से लिए गए हैं। उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है –
| ग्रन्थः | परिचयः (Introduction) |
|---|---|
| चाणक्यनीतिः | एक नीतिग्रन्थ; रचनाकार – चाणक्य। इसमें सूत्ररूप में धर्म, संस्कृति, न्यायव्यवस्था, शान्ति एवं सुशिक्षा का सुन्दर वर्णन है। |
| मनुस्मृतिः | प्रसिद्ध नीति एवं धर्मग्रन्थ; रचनाकार – महर्षि मनु। इसमें बारह अध्याय हैं तथा संसार की उत्पत्ति, धर्म, संस्कृति एवं मनुष्य के कर्तव्यों का वर्णन है। |
| पञ्चतन्त्रम् | कथाग्रन्थ; रचनाकार – पण्डित विष्णुशर्मा। इसमें पाँच तन्त्र हैं – मित्रभेदः, मित्रलाभः, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाशः एवं अपरीक्षितकारकम्। |
| हितोपदेशः | रचनाकार – नारायण पण्डित। इसमें पशु-पक्षियों की कथाओं द्वारा बालकों को नीति का बोध कराया गया है। |
| रामायणम् | भारतीय संस्कृति का आदर्श-स्वरूप दर्शाने वाला ग्रन्थ; रचयिता – महर्षि वाल्मीकि। इसमें श्रीराम का चरित वर्णित है; यह ‘आदिकाव्य’ नाम से प्रसिद्ध है। |
| सुभाषितरत्नभाण्डागारः | विविध संस्कृत-ग्रन्थों से चुने गए सुभाषितों का संग्रह-ग्रन्थ। |
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. पाठस्य सर्वाणि सुभाषितानि बृहत्-स्फोरकपत्रे सचित्रं लिखित्वा कक्षायाः भित्तौ स्थापयन्तु ।
2. सुभाषितेषु प्रयुक्तानां क्रियापदानां सूचीं कुर्वन्तु । तेषाम् आधारेण वाक्यरचनां कुर्वन्तु ।
वाक्य-नमूना – (1) कार्याणि उद्यमेन सिद्ध्यन्ति । (2) विद्या विनयं ददाति । (3) तस्य यशः वर्धते ।
3. विद्या, उद्यमः, अभिवादनशीलः इत्यादिगुणाः येषु सन्ति तादृशानां पञ्चानां महापुरुषाणां जीवनपरिचयं पठन्तु लिखन्तु च ।
4. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ इति विषये एकां भाषणप्रतियोगिताम् आयोजयन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. सुभाषित किसे कहते हैं?
2. पृथ्वी पर तीन सच्चे रत्न कौन-से हैं और क्यों?
3. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का क्या अर्थ है?
4. श्रीराम को स्वर्णमयी लङ्का भी प्रिय क्यों नहीं लगी?
5. किन छह गुणों के होने पर ईश्वर भी सहायता करते हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि’ सुभाषित का भाव विस्तार से समझाइए।
7. ‘विद्या ददाति विनयम्’ सुभाषित में विद्या से सुख तक की शृंखला को स्पष्ट कीजिए।
8. इस पाठ के सुभाषित किन-किन ग्रन्थों से लिए गए हैं? संक्षेप में बताइए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. पृथ्वी पर कितने (सच्चे) रत्न बताए गए हैं?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
2. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ किनके लिए होता है?
(क) लघुचेतसां जनानाम्
(ख) मूढानाम्
(ग) उदारचरितानाम्
(घ) क्रोधिनाम्
3. कार्य किससे सिद्ध होते हैं?
(क) मनोरथैः
(ख) उद्यमेन
(ग) निद्रया
(घ) आलस्येन
4. अभिवादनशील एवं वृद्धों की सेवा करने वाले की कौन-सी चार वस्तुएँ बढ़ती हैं?
(क) धन, मित्र, सुख, यश
(ख) आयु, विद्या, यश, बल
(ग) रूप, बल, धन, विद्या
(घ) आयु, धन, सुख, बुद्धि
5. ‘उद्यमः साहसं धैर्यं…’ में कितने गुण बताए गए हैं?
(क) चार
(ख) पाँच
(ग) छह
(घ) सात
6. विद्या सबसे पहले क्या प्रदान करती है?
(क) धनम्
(ख) विनयम्
(ग) सुखम्
(घ) पात्रताम्
7. श्रीराम ने किससे कहा कि लङ्का उन्हें प्रिय नहीं लगती?
(क) सीतायै
(ख) हनुमते
(ग) लक्ष्मणाय
(घ) भरताय
8. जननी एवं जन्मभूमि किससे भी श्रेष्ठ (गरीयसी) हैं?
(क) धनात्
(ख) स्वर्गात्
(ग) राज्यात्
(घ) विद्यायाः
9. किस सुभाषित में ‘सिंह’ एवं ‘मृग’ का उदाहरण आया है?
(क) विद्या ददाति विनयम्
(ख) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि
(ग) अयं निजः परो वेति
(घ) अपि स्वर्णमयी लङ्का
10. केवल पुस्तक में रही विद्या एवं दूसरे के हाथ गया धन कब काम नहीं आते?
(क) रात्रौ
(ख) कार्यकाले समुत्पन्ने (आवश्यकता के समय)
(ग) उत्सवे
(घ) यात्रायाम्
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पृथ्वी पर जल, अन्न एवं सुभाषित को तीन रत्न कहा गया है।
कारण (R): ये तीनों जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं, इसीलिए इन्हें सच्चे रत्न कहा गया है।
2. अभिकथन (A): ‘अयं निजः परो वा’ ऐसी गणना उदार लोग करते हैं।
कारण (R): उदार स्वभाव वाले लोगों के लिए सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।
3. अभिकथन (A): सोते हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करते।
कारण (R): कार्य केवल इच्छा (मनोरथ) से नहीं, अपितु परिश्रम (उद्यम) से ही सिद्ध होते हैं।
4. अभिकथन (A): श्रीराम को स्वर्णमयी लङ्का भी प्रिय नहीं लगती।
कारण (R): माता एवं जन्मभूमि स्वर्ग से भी अधिक श्रेष्ठ हैं।
5. अभिकथन (A): विद्या मनुष्य को विनम्रता प्रदान करती है।
कारण (R): विद्या से विनय, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म एवं धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- सातों सुभाषित कण्ठस्थ करें – रिक्तस्थान-पूर्ति एवं श्लोक-लेखन के प्रश्न प्रायः इन्हीं से आते हैं।
- एकपदेन एवं एकवाक्येन उत्तर के अन्तर को समझें – प्रश्न-संख्या 2 में केवल एक शब्द, संख्या 3 में पूरा वाक्य लिखें।
- हर सुभाषित का भावार्थ (तीन रत्न, वसुधैव कुटुम्बकम्, उद्यम, बड़ों का सम्मान, छह गुण, विद्या, मातृभूमि) याद रखें।
- शब्दार्थ (मूढैः, लघुचेतसाम्, उद्यमेन, गरीयसी, आकूतिः-समान शब्द) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें।
- प्रत्येक सुभाषित किस ग्रन्थ से लिया गया है – योग्यताविस्तरः से जोड़कर याद रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- ‘अयं निजः परो वा’ की गणना को उदार लोगों का बताना – यह ‘लघुचेतसां’ का भाव है।
- तीन रत्नों में ‘पाषाण/मणि’ जोड़ देना – सच्चे रत्न केवल जल, अन्न एवं सुभाषित हैं।
- सन्धि-विच्छेद की भूल – ‘स्वर्गादपि’ = स्वर्गात् + अपि, ‘जलमन्नम्’ = जलम् + अन्नम्।
- मात्रा एवं विसर्ग की अशुद्धि – सिद्ध्यन्ति, गरीयसी, वृद्धोपसेविनः को शुद्ध लिखें।
- छह गुणों में से किसी को छोड़ देना – उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम – सभी छह लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 पाठ 13 ‘पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि’ में किन तीन रत्नों की बात है?
इस पाठ के पहले सुभाषित के अनुसार पृथ्वी पर तीन सच्चे रत्न हैं – जल, अन्न और सुभाषित (सुन्दर वचन)। मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों (मणि-हीरे) को रत्न मानते हैं।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है। उदार हृदय वाले लोग सबको अपना मानते हैं और ‘अपना-पराया’ जैसी संकुचित भावना नहीं रखते।
इस पाठ के सुभाषित किन ग्रन्थों से लिए गए हैं?
ये सुभाषित चाणक्यनीतिः, मनुस्मृतिः, पञ्चतन्त्रम्, हितोपदेशः, रामायणम् तथा सुभाषितरत्नभाण्डागारः जैसे प्रसिद्ध नीति एवं संग्रह-ग्रन्थों से लिए गए हैं।
सुभाषितानि, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
