Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 12 Solutions — त्वम् आपणं गच्छ

त्वम् आपणं गच्छ संवाद के नौ अभ्यासों के क्रम में उत्तर पढ़ें। लोट्-लकार के रूप, चित्रों के ठीक क्रम में यातायात-संकेत, विराम-चिह्न, वस्तुओं की मात्रा, खरीद का हिसाब और दो परियोजनाओं के नमूने समझाए गए हैं।

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 12 (द्वादशः पाठः) पाठ: त्वम् आपणं गच्छ Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का द्वादश पाठ ‘त्वम् आपणं गच्छ’ एक रोचक संवाद-पाठ है। इसमें दो दृश्य हैं – पहले दृश्य में अम्बा (माता) अपने पुत्र राकेश को बाज़ार (आपण) जाकर घरेलू सामान लाने का आदेश देती है तथा उसे स्यूत (थैला), धन एवं वस्तुओं की नामावली (सूची) देती है। माता उसे अधिक चॉकलेट खाने से होने वाली हानि के विषय में सावधान भी करती है और मार्ग में वाहनों की गति देखकर सावधानी से सड़क पार करने को कहती है। दूसरे दृश्य में राकेश आपणिक (दुकानदार) से मूँग, गुड़, शर्करा, द्विदल, सर्षप आदि वस्तुएँ खरीदता है, मूल्य चुकाता है और शेष धन वापस लेता है। पाठ का मुख्य उद्देश्य लोट्लकार (आज्ञा एवं प्रार्थना अर्थ की क्रियाएँ) का सहज अभ्यास कराना है – जैसे ‘गच्छ, आनय, ददातु, स्वीकरोतु, पश्यतु’।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ दैनिक जीवन के एक सामान्य प्रसंग – बाज़ार से सामान खरीदने – पर आधारित सरल संवाद है। पाठ का व्याकरणिक केन्द्र-बिन्दु है लोट्लकारः। लोट्लकार क्रिया का भावसूचक (Mood) है, जिसका प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है – जैसे ‘त्वं पठ’ (तुम पढ़ो), ‘भवान् पिबतु’ (आप पीजिए), ‘यूयम् उत्तिष्ठत’ (तुम सब उठो)। पाठ में मोटे (स्थूल) अक्षरों में लिखे क्रियापद इसी लोट्लकार के उदाहरण हैं। संवाद के माध्यम से छात्र संख्यावाची शब्द (एककिलोमितः, अर्धकिलोमितः, पादकिलोमितः) तथा क्रय-विक्रय की शब्दावली भी सीखते हैं।

मूल पाठ एवं अन्वय (हिन्दी)

(संवाद NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक के साथ सरल हिन्दी अर्थ/अन्वय दिया गया है।)

दृश्यम् – १ (गृहे : अम्बा-राकेशयोः संवादः)

अम्बा – राकेश ! कुत्र असि ? अत्र आगच्छ ।
राकेशः – आम् अम्ब ! कथय किं कार्यं करवाणि ?
अम्बा – अद्य तव तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति । त्वम् आपणं गच्छ । वस्तूनि आनय । वस्तूनां नामावली अपि अत्र अस्ति ।
राकेशः – अस्तु । स्यूतं ददातु । वस्तूनां नामावलीम् अहं स्वीकरोमि ।
अम्बा – स्वीकुरु । धनम् अपि नय ।
राकेशः – अम्ब ! इतोऽपि एकं वस्तु स्वीकरवाणि ?
अम्बा – चाकलेहम् इच्छति खलु वत्स ! जानातु, अधिकं चाकलेह-खादनं स्वास्थ्याय हानिकरं भवति ।
राकेशः – केवलम् अद्य एव स्वीकरोमि ।
अम्बा – अस्तु । मार्गे यानानां गतिं पश्यतु । अनन्तरं सावधानं पारं गच्छतु ।
राकेशः – आम् । अहं गच्छामि ।
अन्वय / हिन्दी अर्थ माता – राकेश! तुम कहाँ हो? यहाँ आओ। राकेश – हाँ माँ! बताइए, मैं क्या काम करूँ? माता – आज तुम्हारे पिताजी कार्यालय से देर से आएँगे। तुम बाज़ार जाओ। सामान लाओ। सामान की सूची भी यहाँ है। राकेश – ठीक है। थैला दीजिए। सामान की सूची मैं ले लेता हूँ। माता – ले लो। धन भी ले जाओ। राकेश – माँ! क्या इसके अतिरिक्त भी एक वस्तु ले लूँ? माता – (तुम्हारा मन) चॉकलेट चाहता है न, बेटा! (पर) जान लो, अधिक चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। राकेश – केवल आज ही ले रहा हूँ। माता – ठीक है। मार्ग में वाहनों की गति देखना। उसके बाद सावधानी से (सड़क के) पार जाना। राकेश – हाँ। मैं जाता हूँ।

दृश्यम् – २ (आपणे : राकेश-आपणिकयोः संवादः)

राकेशः – महोदय ! कृपया एतां नामावलीं पश्यतु, वस्तूनि च ददातु ।
आपणिकः – पश्यामि ।
 मुद्गः – अर्धकिलोमितः । शर्करा – एककिलोमिता ।
 गुडः – एककिलोमितः । द्विदलम् – एककिलोमितम् ।
 सर्षपः – पादकिलोमितः ।
 सर्वं सिद्धम् अस्ति । स्यूतं ददातु, तत्र स्थापयामि ।
राकेशः – अस्तु, कति रूप्यकाणि यच्छानि ?
आपणिकः – चत्वारि शतानि षष्टिं (४६०) च रूप्यकाणि ददातु ।
राकेशः – महोदय ! नीलवर्णा लेखनी अस्ति किम् ?
आपणिकः – आम्, अस्ति ।
राकेशः – एकं चाकलेहम् एकां लेखनीं च ददातु । तस्य मूल्यम् अपि योजयतु ।
आपणिकः – अस्तु । लेखन्याः विंशतिं रूप्यकाणि चाकलेहस्य दश रूप्यकाणि च योजयामि । आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रूप्यकाणि ददातु ।
राकेशः – आम्, पञ्च शतानि (५००) रूप्यकाणि सन्ति । स्वीकरोतु, अवशिष्टं च ददातु ।
आपणिकः – सर्वं स्यूते स्थापितम् अस्ति । दश (१०) रूप्यकाणि अवशिष्टानि, स्वीकरोतु ।
राकेशः – अस्तु । धन्यवादः ।
आपणिकः – पुनरपि आगच्छतु ।
अन्वय / हिन्दी अर्थ राकेश – महोदय! कृपया इस सूची को देखिए और वस्तुएँ दीजिए। दुकानदार – देखता हूँ। मूँग – आधा किलो, शर्करा (चीनी) – एक किलो, गुड़ – एक किलो, दाल – एक किलो, सरसों – पाव (चौथाई) किलो। सब तैयार है। थैला दीजिए, उसमें रखता हूँ। राकेश – ठीक है, कितने रुपये दूँ? दुकानदार – चार सौ साठ (४६०) रुपये दीजिए। राकेश – महोदय! क्या नीले रंग की कलम है? दुकानदार – हाँ, है। राकेश – एक चॉकलेट और एक कलम दीजिए। उसका मूल्य भी जोड़ दीजिए। दुकानदार – ठीक है। कलम के बीस रुपये और चॉकलेट के दस रुपये जोड़ता हूँ। कुल मिलाकर चार सौ नब्बे (४९०) रुपये दीजिए। राकेश – हाँ, पाँच सौ (५००) रुपये हैं। स्वीकार कीजिए और शेष लौटा दीजिए। दुकानदार – सब थैले में रख दिया है। दस (१०) रुपये शेष हैं, ले लीजिए। राकेश – ठीक है। धन्यवाद। दुकानदार – फिर से आइए।

सार (Hindi Summary)

‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ दैनिक जीवन के एक साधारण किन्तु शिक्षाप्रद प्रसंग पर आधारित है। एक दिन राकेश के पिताजी कार्यालय से देर से आने वाले होते हैं, इसलिए माता (अम्बा) राकेश को बाज़ार (आपण) भेजती है। वह उसे वस्तुओं की सूची (नामावली), थैला (स्यूत) तथा धन देती है। माता पुत्र को अधिक चॉकलेट खाने से होने वाली स्वास्थ्य-हानि से सावधान करती है और मार्ग में वाहनों की गति देखकर सावधानी से सड़क पार करने का परामर्श देती है। इस प्रकार पाठ में माता का स्नेह, सतर्कता एवं उत्तम संस्कार झलकते हैं।

दूसरे दृश्य में राकेश दुकान पर पहुँचकर दुकानदार (आपणिक) को सूची देता है। दुकानदार मूँग (आधा किलो), शर्करा (एक किलो), गुड़ (एक किलो), दाल (एक किलो) तथा सरसों (पाव किलो) तौलकर थैले में रख देता है, जिसका मूल्य ४६० रुपये होता है। राकेश एक चॉकलेट तथा एक नीली कलम भी खरीदता है, जिससे कुल मूल्य ४९० रुपये हो जाता है। वह ५०० रुपये देता है और दुकानदार उसे शेष १० रुपये लौटा देता है। राकेश धन्यवाद कहकर लौटता है तथा दुकानदार उसे फिर आने को कहता है। इस सरल संवाद के माध्यम से छात्र लोट्लकार (आज्ञा एवं प्रार्थना अर्थ की क्रियाएँ), क्रय-विक्रय की शब्दावली एवं संख्यावाची शब्द सहजता से सीख जाते हैं। साथ ही यह पाठ शिष्टाचार, मित-व्यय एवं सतर्कता जैसे जीवन-मूल्यों की भी शिक्षा देता है।

ऊपर हरा साबुत मूँग, भूरा गुड़ और सफ़ेद चीनी; नीचे पीली दाल और छोटे सरसों के दाने
ऊपर बाएँ मुद्गः, बीच गुडः, दाएँ शर्करा; नीचे बाएँ द्विदलम्, दाएँ सर्षपः। मौलिक AI अध्ययन-चित्र, वास्तविक फोटो या NCERT चित्र की प्रति नहीं। कटोरियाँ पाठ की तौली गई मात्राएँ नहीं दिखातीं।

नामावली और खरीद का हिसाब — पाठानुसार

वस्तुमात्रा
मुद्गःअर्धकिलोमितः — आधा किलो, 500 ग्राम
गुडःएककिलोमितः — 1 किलो
शर्कराएककिलोमिता — 1 किलो
द्विदलम्एककिलोमितम् — 1 किलो
सर्षपःपादकिलोमितः — चौथाई किलो, 250 ग्राम

मूल सूची ₹460 + लेखनी ₹20 + चाकलेहः ₹10 = ₹490। दिए ₹500 − कुल ₹490 = लौटे ₹10। ये कथा की कीमतें हैं, वर्तमान बाज़ार-मूल्य नहीं। स्त्रीलिङ्ग शर्करा के साथ एककिलोमिता और नपुंसकलिङ्ग द्विदलम् के साथ एककिलोमितम् का मेल देखें।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
स्यूतम् (प्रसेवम्)थैलाBag
नामावली (नामसूचिः)सूचीList
आपणम्बाज़ार (वस्तु-विक्रय-केन्द्र)Market / Shop
आनय (आहर)लाओ(You) Bring
नय (गृहाण)ले जाओ(You) Take away
चाकलेहःचॉकलेटChocolate
यानानाम् (वाहनानाम्)गाड़ियों कीOf vehicles
गतिम् (गमनम्)चलना, गतिMovement / speed
मुद्गः (धान्यविशेषः)मूँगGreen gram
शर्करा (सिता)चीनीSugar
गुडः (इक्षुसारः)गुड़Jaggery
द्विदलम्दालPulses
सर्षपःसरसोंMustard seeds
अवशिष्टम् (शेषभागः)बाकी, शेषRemaining
विपणिम् (आपण-वीथिम्)बाज़ारMarket
आपणिकःदुकानदारShopkeeper
रूप्यकाणिरुपयेRupees
लेखनीकलमPen
मूल्यम्दाम, कीमतPrice / value
हानिकरम्हानिकारकHarmful

वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)

१. पूर्वपृष्ठस्य कोष्ठके दत्तानि रूपाणि दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —

(पिछले पृष्ठ के कोष्ठक में दिए गए ‘पठ्’-धातु के लोट्लकार रूपों के आधार पर ‘लिख्’ एवं ‘क्रीड्’ धातुओं के रूप भरिए।)

उत्तर लिख् (लोट्लकारः) —
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःलिखतुलिखताम्लिखन्तु
मध्यमपुरुषःलिखलिखतम्लिखत
उत्तमपुरुषःलिखानिलिखावलिखाम
क्रीड् (लोट्लकारः) —
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःक्रीडतुक्रीडताम्क्रीडन्तु
मध्यमपुरुषःक्रीडक्रीडतम्क्रीडत
उत्तमपुरुषःक्रीडानिक्रीडावक्रीडाम

२. निम्नलिखितेषु सुभाषितेषु लोट्लकारस्य क्रियापदानि चित्वा लिखन्तु —

(निम्नलिखित सुभाषितों में से लोट्लकार की क्रियाएँ छाँटकर लिखिए।)

उत्तर (क) काले वर्षतु पर्जन्यः… सज्जनाः सन्तु निर्भयाः → लोट्लकार-क्रियापदे – वर्षतु, सन्तु । (ख) सर्वे भवन्तु सुखिनः… सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् → लोट्लकार-क्रियापदे – भवन्तु, सन्तु, पश्यन्तु (मा…भवेत् विधिलिङ्/अनुनयार्थे) । (ग) इमा आपः शिवाः सन्तु… पावनाः शीतलाः सन्तु पूताः → लोट्लकार-क्रियापदे – सन्तु (द्विवारम्) । (घ) निन्दन्तु नीतिनिपुणा… लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा… अद्यैव वा मरणमस्तु → लोट्लकार-क्रियापदे – निन्दन्तु, स्तुवन्तु, समाविशतु, गच्छतु, अस्तु ।

३. उदाहरणानुगुणं लोट्लकारस्य रूपाणि लिखन्तु —

(उदाहरणानुसार लट्-लकार की क्रिया का समान पुरुष-वचन का लोट्लकार रूप लिखिए। यथा – पठति → पठतु।)

लट्-लकारःलोट्लकारः (उत्तर)लट्-लकारःलोट्लकारः (उत्तर)
पठतिपठतुखादतिखादतु
क्रीडामिक्रीडानिपश्यसिपश्य
हसतिहसतुनयसिनय
नृत्यतिनृत्यतुगच्छामिगच्छानि

४. उदाहरणानुगुणं बहुवचनस्य रूपाणि लिखन्तु —

(उदाहरणानुसार लोट्लकार के बहुवचन रूप लिखिए। यथा – उत्तिष्ठतु → उत्तिष्ठन्तु।)

दत्तरूपम्बहुवचनम् (उत्तर)दत्तरूपम्बहुवचनम् (उत्तर)
उत्तिष्ठतुउत्तिष्ठन्तुखादतुखादन्तु
आगच्छतुआगच्छन्तुपठानिपठाम
उपविशतुउपविशन्तुपततुपतन्तु
गच्छगच्छत––

५. विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवे के-के किं-किं कुर्वन्ति इति सूचनारूपेण वाक्यानि पुनः लिखन्तु —

(लट्-लकार के वाक्यों को सूचना/आज्ञारूप अर्थात् लोट्लकार में पुनः लिखिए। यथा – दशमकक्षायाः छात्राः वेदिकाम् अलङ्कुर्वन्ति → …अलङ्कुर्वन्तु।)

उत्तर (क) प्रधानाध्यापकः वार्षिकं विवरणं पठतु । (ख) बालिकाः नृत्यन्तु । (ग) यूयम् आसन्दान् स्थापयत । (घ) छात्रनायकः स्वागतं करोतु । (ङ) मम मित्रं धन्यवादं निवेदयतु । (च) संस्कृत-शिक्षिका वेदिकां सञ्चालयतु । (छ) कार्यक्रमानन्तरं छात्राः उत्थाय राष्ट्रगीतं गायन्तु ।

६. पट्टिकातः उचितैः क्रियारूपैः अनुच्छेदस्य रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —

पट्टिका (शब्द-मञ्जूषा): शृण्वन्तु, गच्छन्तु, लिखन्तु, पठन्तु, पृच्छन्तु, कुर्वन्तु, वदन्तु, उत्तिष्ठन्तु, उपविशन्तु, अभिवादयन्तु

उत्तर यदा अध्यापकः कक्षाम् आगच्छति तदा प्रथमं सर्वे उत्तिष्ठन्तु । उपचारवाक्येन तम् अभिवादयन्तु । यदा सः वदति तदा एव सर्वे उपविशन्तु । तस्य सूचनानुसारं पाठं पठन्तु । गृहपाठं लिखन्तु । परस्परं वार्तालापं न कुर्वन्तु । प्रश्नस्य उत्तरं वदन्तु । संशयं पृच्छन्तु । तस्य उपदेशं शृण्वन्तु । बहिः मा गच्छन्तु ।

७. मार्गे सूचनादीपाः फलकानि च भवन्ति — चित्रानुसार उत्तर

उत्तर पुस्तक पृष्ठ 127–128 के वास्तविक आठ संकेतों के क्रम में हैं। यह चित्र और संस्कृत शब्दों का मिलान है।

चित्र / क्रमपट्टिका का उत्तर
पृष्ठ 127 — बाएँ से पहला, बायाँ तीरवामतः गच्छ।
दूसरा, दायाँ तीरदक्षिणतः गच्छ।
तीसरा, बच्चों वाला चेतावनी-चित्रअग्रे विद्यालयः।
चौथा, पैदल यात्री का चित्रपदयात्रिकाः!
पृष्ठ 128 — लाल बत्तीतिष्ठ।
पीली बत्तीप्रतीक्षस्व।
हरी बत्तीगच्छ।
P पर लाल तिरछी रेखायानं मा स्थापय।

८. उदाहरणानुसारं क्रियापदस्य लोट्-लकाररूपैः वाक्यानि पूरयन्तु —

(यथा – छात्राः प्रातः शीघ्रम् उत्तिष्ठन्तु । [उत् + तिष्ठ्])

उत्तर (क) अम्ब ! अहं क्रीडार्थं गच्छानि । (गच्छ्) (ख) आगच्छन्तु, वयं प्रार्थनागीतं गायाम । (गाय्) (ग) ज्वरः अस्ति । पुत्र ! वृष्टौ न क्रीड । (क्रीड्) (घ) लते ! भवती मम उपनेत्रम् आनयतु । (आ + नय्) (ङ) आर्ये ! अहम् अन्तः प्रविशानि । (प्रविश्) (च) अहं पृच्छामि त्वम् उत्तरं वद । (वद्) (छ) यूयं शीघ्रं नगरम् आगच्छत । (आ + गच्छ्) (ज) तात ! वयं कदा चलचित्रं पश्याम ? (पश्य्)

९. चिह्नानि ( ? ! । , ) भावानुसारं वाक्ये योजयन्तु —

(यथा – राकेश ! कुत्र असि ? अत्र आगच्छ ।)

उत्तर (क) पुत्र ! किं करोषि ? (ख) कः श्लोकं वदति ? (ग) भवान् तत्र तिष्ठतु । (घ) आचार्यः कदा आगच्छति ? (ङ) अहो ! रमणीयः पर्वतः ।

अत्र इदम् अवधेयम् (लोट्लकार-तालिकाः)

पाठ में मोटे (स्थूल) अक्षरों में लिखे क्रियापद लोट्लकार के हैं। लोट्लकार क्रिया का भावसूचक (Mood) है, जिसका प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है।

1. पठ्-धातुः (लोट्लकारः) – आदर्श रूप

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपठतुपठताम्पठन्तु
मध्यमपुरुषःपठपठतम्पठत
उत्तमपुरुषःपठानिपठावपठाम

2. पठ् जैसे लोट्-रूपों के सामान्य चिह्न

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःअतुअताम्अन्तु
मध्यमपुरुषःअअतम्अत
उत्तमपुरुषःआनिआवआम

पठन्तु अवगच्छन्तु – पाठ के चित्र-वाक्य: भवान् पिबतु (आप पीजिए) • यूयम् उत्तिष्ठत (तुम सब उठो) • भवन्तः खादन्तु (आप सब खाइए) • अहं संशयं पृच्छानि (मैं संशय पूछूँ) • त्वं पठ (तुम पढ़ो) • वयं गच्छाम (हम चलें)।

योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)

योग्यताविस्तर में ‘कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्’ (कवि: वासुदेवद्विवेदी शास्त्री) नामक गीत दिया गया है, जिसमें भी अधिकांश क्रियापद लोट्लकार में हैं। यह गीत सद्गुण ग्रहण करने, उपकार करने, अहंकार एवं दुर्व्यसन छोड़ने तथा समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देता है। इसे कण्ठस्थ करके समूह में गाना चाहिए और उसमें आए लोट्लकार रूपों को पहचानना चाहिए।

गीत-पंक्तिः (लोट्लकार-क्रिया)भावः (हिन्दी)
कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्उपकार करो, उद्धार करो
मा कुरु दर्पं, मा कुरु गर्वम्घमंड एवं अहंकार मत करो
मा भव मानी, मानय सर्वम्अभिमानी मत बनो, सबका सम्मान करो
तनयं पाठय, तनयां पाठयपुत्र एवं पुत्री दोनों को पढ़ाओ
मा वद मिथ्या, मा वद व्यर्थम्झूठ एवं व्यर्थ मत बोलो
मा पिब मादकवस्तु अपेयम्हानिकारक नशीली वस्तु मत पिओ

परियोजनाकार्यम् — दो कार्य

1. पुस्तक से लोट्-क्रियाओं का संग्रह — पाठ 12 से चयनित नमूना

मिले रूपपहचान
कथय, गच्छ, आनय, स्वीकुरु, नयमध्यमपुरुष — एकवचन; बताओ, जाओ, लाओ, स्वीकार करो, ले जाओ
ददातु, जानातु, पश्यतु, गच्छतु, योजयतु, स्वीकरोतु, आगच्छतुप्रथमपुरुष — एकवचन; सम्मानपूर्ण अनुरोध के साथ भवान् / भवती भी आता है
करवाणि, स्वीकरवाणि, यच्छानिउत्तमपुरुष — एकवचन; मैं करूँ / स्वीकार करूँ / दूँ
पठ, पठतम्, पठतमध्यमपुरुष — एक, दो, अनेक
पठानि, पठाव, पठामउत्तमपुरुष — एक, दो, अनेक
वर्षतु, सन्तु, भवन्तु, पश्यन्तुसुभाषितों की प्रार्थना के रूप
निन्दन्तु, स्तुवन्तु, समाविशतु, अस्तुपाठ के सुभाषित के अन्य लोट्-रूप
कुरु, भव, मानय, भज, मोदय, पाठय, शिक्षय, वारय, अपनय, त्यज, वद, चल, पालय, लालय, पिबपृष्ठ 129 के गीत से चुने रूप — सभी मध्यमपुरुष एकवचन

भवेत् विधिलिङ् है, लोट् नहीं। गच्छामि / पश्यामि लट् हैं; गच्छानि / पश्यानि लोट् हैं। पहले ही बदले हुए गच्छ, नय, पश्य को मूल धातु न कहें; इनके मूल गम्, नी, दृश् हैं। अन्य पाठों से उदाहरण जोड़ें और पृष्ठ-सन्दर्भ लिखें।

2. माता के पाँच आदेश — काल्पनिक नमूना

  1. प्रातः शीघ्रम् उत्तिष्ठ।
  2. हस्तौ प्रक्षालय।
  3. नियमेन पाठं पठ।
  4. समये भोजनं खाद।
  5. सत्यम् एव वद।

अपने घर में कहे जाने वाले उपयुक्त वाक्य चुनें। भवान् / भवती के लिए पठतु और त्वम् के लिए पठ का अन्तर समझें; ये सम्मान और सम्बोधन के अलग रूप हैं।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

1. अम्बा राकेशम् आपणं किमर्थं प्रेषयति?

उत्तरअद्य राकेशस्य तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति, अतः अम्बा गृहस्य आवश्यकानि वस्तूनि आनेतुं राकेशम् आपणं प्रेषयति । सा तस्मै स्यूतं, नामावलीं धनं च ददाति । (माता राकेश को घरेलू सामान लाने के लिए बाज़ार भेजती है।)

2. अम्बा चाकलेहविषये राकेशं किं वदति?

उत्तरअम्बा वदति यत् – ‘अधिकं चाकलेह-खादनं स्वास्थ्याय हानिकरं भवति।’ अर्थात् अधिक चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इस प्रकार वह राकेश को सावधान करती है।

3. राकेशः आपणात् कानि वस्तूनि क्रीणाति?

उत्तरराकेशः आपणात् मुद्गम् (अर्धकिलो), शर्कराम् (एककिलो), गुडम् (एककिलो), द्विदलम् (एककिलो), सर्षपम् (पादकिलो), एकं चाकलेहम् एकां नीलवर्णां लेखनीं च क्रीणाति। (राकेश मूँग, चीनी, गुड़, दाल, सरसों, एक चॉकलेट तथा एक कलम खरीदता है।)

4. लोट्लकारस्य प्रयोगः कस्मिन् अर्थे भवति?

उत्तरलोट्लकारस्य प्रयोगः आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) इति अर्थयोः भवति। यथा – ‘त्वं पठ’ (आज्ञा), ‘भवान् पिबतु’ (प्रार्थना)। लोट्लकारः क्रियायाः भावसूचकः (Mood) भवति।

5. आपणिकः राकेशाय कति रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति, कथं च?

उत्तरसर्वेषां वस्तूनां आहत्य मूल्यं ४९० रूप्यकाणि अभवत्। राकेशः ५०० रूप्यकाणि अददात्। अतः आपणिकः तस्मै अवशिष्टं दश (१०) रूप्यकाणि ददाति। (कुल ४९० रुपये में से ५०० देने पर १० रुपये शेष लौटाए।)

अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

6. ‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ से हमें क्या-क्या जीवन-शिक्षा मिलती है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ एक सरल संवाद के माध्यम से अनेक जीवन-मूल्य सिखाता है। सबसे पहले यह पाठ परिवार में सहयोग की भावना दिखाता है – पिताजी के देर से आने पर राकेश बिना आनाकानी के बाज़ार जाकर सामान लाने को तैयार हो जाता है। दूसरे, माता का व्यवहार स्नेह एवं सतर्कता का आदर्श है – वह अधिक चॉकलेट खाने की हानि बताती है तथा सड़क पार करते समय वाहनों की गति देखकर सावधान रहने का परामर्श देती है।तीसरे, बाज़ार के दृश्य में राकेश का दुकानदार के साथ शिष्ट एवं विनम्र व्यवहार (‘महोदय’, ‘कृपया’, ‘धन्यवादः’) झलकता है। साथ ही वह हिसाब-किताब में सावधानी रखता है और शेष धन वापस लेता है। इस प्रकार यह पाठ हमें आज्ञापालन, शिष्टाचार, मित-व्यय, सतर्कता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की शिक्षा देता है। साथ ही लोट्लकार का सरल अभ्यास भी कराता है।

7. लोट्लकार क्या है? उसके प्रयोग एवं रूपों को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरलोट्लकार संस्कृत क्रिया का वह लकार (काल/अर्थ) है जो क्रिया का भावसूचक (Mood) है। इसका प्रयोग मुख्यतः दो अर्थों में होता है – (1) आज्ञा (Order), जैसे – ‘त्वम् आपणं गच्छ’, ‘यूयम् उत्तिष्ठत’; तथा (2) प्रार्थना/अनुरोध (Request), जैसे – ‘भवान् पिबतु’, ‘कृपया वस्तूनि ददातु’। इसके अतिरिक्त आशीर्वाद के अर्थ में भी इसका प्रयोग होता है (आयुष्मान् भव)।पठ्-धातु के लोट्लकार रूप इस प्रकार हैं – प्रथमपुरुष: पठतु/पठताम्/पठन्तु; मध्यमपुरुष: पठ/पठतम्/पठत; उत्तमपुरुष: पठानि/पठाव/पठाम। इसके प्रत्यय-चिह्न हैं – प्रथमपुरुष में अतु/अताम्/अन्तु, मध्यमपुरुष में अ/अतम्/अत तथा उत्तमपुरुष में आनि/आव/आम। पठ् जैसे दिए रूपों में उत्तमपुरुष के चिह्न आनि, आव, आम हैं (पठानि, पठाव, पठाम), इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

8. पाठ के दोनों दृश्यों का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरप्रथम दृश्य (घर में): माता अम्बा राकेश को बुलाकर कहती है कि आज पिताजी देर से आएँगे, इसलिए वह बाज़ार जाकर सामान ले आए। वह उसे थैला, सूची एवं धन देती है। राकेश अधिक चॉकलेट लेने की इच्छा करता है, पर माता उसे उसकी हानि बताकर सावधान करती है और मार्ग में सावधानी से चलने को कहती है।द्वितीय दृश्य (दुकान पर): राकेश दुकानदार को सूची देता है। दुकानदार मूँग, चीनी, गुड़, दाल एवं सरसों तौलकर थैले में रखता है (मूल्य ४६० रुपये)। राकेश एक चॉकलेट एवं एक नीली कलम भी लेता है, जिससे कुल मूल्य ४९० रुपये हो जाता है। वह ५०० रुपये देता है और शेष १० रुपये वापस लेता है। राकेश धन्यवाद कहकर लौटता है, और दुकानदार उसे फिर आने को कहता है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. अम्बा राकेशं कुत्र प्रेषयति?

(क) विद्यालयम्

(ख) आपणम्

(ग) क्रीडाङ्गणम्

(घ) कार्यालयम्

उत्तर(ख) आपणम्।

2. ‘स्यूतम्’ इत्यस्य अर्थः कः?

(क) सूची

(ख) धनम्

(ग) थैला (प्रसेवम्)

(घ) कलम

उत्तर(ग) थैला (प्रसेवम्)।

3. अयं पाठः कस्य लकारस्य अभ्यासाय अस्ति?

(क) लट्-लकारस्य

(ख) लृट्-लकारस्य

(ग) लोट्-लकारस्य

(घ) लङ्-लकारस्य

उत्तर(ग) लोट्-लकारस्य।

4. लोट्लकारस्य प्रयोगः केषु अर्थयोः भवति?

(क) भूतकाले

(ख) आज्ञा-प्रार्थनयोः

(ग) भविष्यत्काले

(घ) सन्देहे

उत्तर(ख) आज्ञा-प्रार्थनयोः।

5. ‘पठ्’-धातोः लोट्लकारे उत्तमपुरुष-एकवचनरूपं किम्?

(क) पठतु

(ख) पठ

(ग) पठानि

(घ) पठन्तु

उत्तर(ग) पठानि।

6. राकेशेन क्रीतानां सर्वेषां वस्तूनां मूल्यं कति रूप्यकाणि?

(क) ४६० रूप्यकाणि

(ख) ४९० रूप्यकाणि

(ग) ५०० रूप्यकाणि

(घ) ४७० रूप्यकाणि

उत्तर(ख) ४९० रूप्यकाणि। (वस्तूनि ४६० + लेखनी २० + चाकलेह १० = ४९०)

7. ‘मुद्गः’ इत्यस्य हिन्दी-अर्थः कः?

(क) गुड़

(ख) चीनी

(ग) मूँग

(घ) सरसों

उत्तर(ग) मूँग।

8. आपणिकः राकेशाय कति रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति?

(क) विंशतिम्

(ख) दश

(ग) पञ्च

(घ) पञ्चाशत्

उत्तर(ख) दश (१०) रूप्यकाणि।

9. अम्बा कस्य वस्तुनः खादनं स्वास्थ्याय हानिकरम् इति वदति?

(क) गुडस्य

(ख) शर्करायाः

(ग) चाकलेहस्य

(घ) मुद्गस्य

उत्तर(ग) चाकलेहस्य (अधिकं चॉकलेट खाना)।

10. ‘गच्छ’ इत्यस्य लोट्लकारे बहुवचनरूपं किम्?

(क) गच्छतु

(ख) गच्छत

(ग) गच्छन्तु

(घ) गच्छानि

उत्तर(ख) गच्छत। (मध्यमपुरुष-बहुवचनम्; ‘गच्छ’ मध्यमपुरुष-एकवचनम् अस्ति)
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ख), 9-(ग), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): अम्बा राकेशम् आपणं प्रेषयति।

कारण (R): अद्य राकेशस्य तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): अधिकं चाकलेह-खादनं स्वास्थ्याय हानिकरम् अस्ति।

कारण (R): चाकलेहः मधुरः रोचकः च भवति, अतः सः सर्वथा अपेयः अखाद्यः च।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – केवल अधिक चॉकलेट खाना हानिकारक है, चॉकलेट सर्वथा अखाद्य नहीं है।

3. अभिकथन (A): ‘गच्छ, पश्यतु, आनय’ इति पाठे लोट्लकारस्य क्रियापदानि सन्ति।

कारण (R): लोट्लकारः आज्ञायाः प्रार्थनायाः च अर्थे प्रयुज्यते।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): आपणिकः राकेशाय दश रूप्यकाणि अवशिष्टं ददाति।

कारण (R): सर्वेषां वस्तूनां मूल्यं ४९० रूप्यकाणि आसीत्, राकेशेन च ५०० रूप्यकाणि दत्तानि।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है (५०० − ४९० = १०)।

5. अभिकथन (A): ‘पठानि, पठाव, पठाम’ इति लोट्लकारस्य उत्तमपुरुष-रूपाणि सन्ति।

कारण (R): लोट्लकारे उत्तमपुरुषस्य चिह्नानि ‘आनि, आव, आम’ भवन्ति।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • लोट्लकार के तीनों पुरुषों के प्रत्यय-चिह्न (अतु/अताम्/अन्तु, अ/अतम्/अत, आनि/आव/आम) तालिका सहित कण्ठस्थ करें।
  • पठ् जैसे रूपों में पठानि, पठाव, पठाम पहचानें; पाठ के करवाणि, स्वीकरवाणि, यच्छानि जैसे अलग अङ्ग वाले रूप भी देखें।
  • शब्दार्थ (स्यूतम्, आपणम्, मुद्गः, गुडः, सर्षपः, अवशिष्टम्, आपणिकः) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
  • संवाद के आधार पर पूर्णवाक्य में उत्तर लिखने का अभ्यास करें (कः, किम्, कति, कुत्र प्रश्न)।
  • विराम-चिह्न ( ? ! । , ) भाव के अनुसार सही स्थान पर लगाना सीखें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • लट् एवं लोट् रूपों में भ्रम – ‘गच्छति’ (वर्तमान) एवं ‘गच्छतु’ (आज्ञा) को अलग पहचानें।
  • उत्तमपुरुष में ‘आ’ भूल जाना (गलत – पठनि; सही – पठानि)।
  • मध्यमपुरुष एकवचन के पठ, गच्छ, वद जैसे रूप पहचानें। रूप मूल धातु की हूबहू नकल नहीं: गम् से गच्छ, कृ से कुरु बनता है।
  • संख्या-गणना की भूल – कुल मूल्य ४९० है (४६० + २० + १०), शेष १० रुपये।
  • शब्दों के अर्थ में भ्रम – मुद्गः (मूँग), द्विदलम् (दाल), सर्षपः (सरसों) को न मिलाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 12 ‘त्वम् आपणं गच्छ’ किस व्याकरण-विषय पर आधारित है?

यह पाठ लोट्लकार (Imperative Mood) के अभ्यास पर आधारित है। लोट्लकार का प्रयोग आज्ञा (Order) तथा प्रार्थना (Request) के अर्थ में होता है, जैसे – ‘त्वं पठ’, ‘भवान् पिबतु’।

‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ का मुख्य कथानक क्या है?

इस पाठ में माता (अम्बा) अपने पुत्र राकेश को बाज़ार (आपण) भेजती है। राकेश दुकानदार से मूँग, चीनी, गुड़, दाल, सरसों, एक चॉकलेट एवं एक कलम खरीदता है, ४९० रुपये चुकाता है और शेष १० रुपये वापस लेता है।

राकेश ने कुल कितने रुपये का सामान खरीदा?

राकेश ने कुल ४९० रुपये का सामान खरीदा – वस्तुओं (मूँग, चीनी, गुड़, दाल, सरसों) के ४६० रुपये, कलम के २० रुपये तथा चॉकलेट के १० रुपये। उसने ५०० रुपये दिए और दुकानदार ने १० रुपये लौटाए।

पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 12, पृष्ठ 121–129; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। उत्तर, व्याख्याएँ और परियोजना के नमूने ClearStudy के स्वतंत्र अध्ययन-सहायक हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।

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