Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 15 Solutions — माधवस्य प्रियम् अङ्गम्
माधवस्य प्रियम् अङ्गम् के आठ अभ्यासों के उत्तर, चित्रानुसार नाम, अंगों के कार्य और तृतीया के रूप समझें। शरीर-शब्दावली, आठ पदों का मधुराष्टकम्, नाट्य-गतिविधि तथा शरीर-पोस्टर बनाने का मौलिक नमूना भी दिया गया है।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- मूल पाठ एवं अन्वय (सरलार्थ)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- शरीराङ्गानां नामानि (व्याकरण-तालिकाः)
- मधुराष्टकम् & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का पंद्रहवाँ पाठ ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ एक रोचक कथा है। माधव नामक एक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को परस्पर चर्चा करते हुए देखता है। पाद, हस्त, नयन, कर्ण, मुख तथा उदर – प्रत्येक अंग स्वयं को सबसे श्रेष्ठ बताता है। पाद कहता है मेरे कारण माधव चलता है, हस्त कहता है मेरे कारण लिखता है, नयन कहता है मेरे बिना वह देख नहीं सकता, कर्ण कहता है मेरे कारण सुनता और सावधान रहता है, मुख कहता है मेरे कारण बोलता एवं भोजन करता है। अन्त में उदर के सुझाव पर सब माधव से ही पूछते हैं। माधव समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपकारी एवं प्रिय हैं – क्योंकि नयन से देखना, कर्ण से सुनना, मुख से बोलना-खाना, उदर से शक्ति पाना तथा पादों से चलना – सब आवश्यक हैं। पाठ का केन्द्रीय संदेश है – परस्पर सहयोग एवं सबका महत्त्व।
मूल पाठ एवं अन्वय (सरलार्थ)
(पाठ का मूल गद्यांश ज्यों-का-त्यों, नीचे प्रत्येक अंश का सरल हिन्दी सरलार्थ/अन्वय।)
पादः वदति – अहं श्रेष्ठः । मम कारणेन माधवः चलति ।
हस्तः अनुक्षणं वदति – अरे अरे ! मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च । अतः अहम् एव श्रेष्ठः ।
मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् ? इति नयनं वदति ।
कर्णः स्मितं कृत्वा कथयति – माधवः यदा मार्गे गच्छति तदा पृष्ठतः यानानां ध्वनिं यदि न शृणोति सावधानः च न भवति, तर्हि दुर्घटना भवेत् । माधवः मम कारणेन एव शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा ज्ञानं वर्धयति, सङ्गीतं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभवति ।
झटिति मुखं सूचयति – ‘भोः! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति, शिक्षकस्य प्रश्नस्य उत्तरं वदति । मम साहाय्येन उदरम् अपि भोजनं प्राप्नोति । भवन्तः सर्वे सबलाः भवन्ति । अतः अहम् एव श्रेष्ठः’ ।
उदरं सूचयति – ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः’ इति ।
माधवः विचारयति बोधयति च – ‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति । अहं नयनाभ्यां पश्यामि, कर्णाभ्यां शृणोमि, मुखेन भाषणं करोमि भोजनं करोमि च, उदरेण पाचनात् शक्तिं प्राप्नोमि, पादाभ्यां च चलामि । अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः । भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः’ । — दीपकम्, कक्षा ६, पञ्चदशः पाठः
अन्वय / सरलार्थ (हिन्दी में)
सार (Hindi Summary)
‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ माधव नामक एक बालक की कथा है। एक रात्रि माधव स्वप्न में अपने शरीर के विभिन्न अंगों को परस्पर चर्चा करते हुए देखता है। चर्चा का विषय है – ‘हम सबमें कौन सबसे श्रेष्ठ है?’ पाद (पैर) कहता है कि उसके कारण माधव चलता है, इसलिए वह श्रेष्ठ है। हस्त (हाथ) कहता है कि उसके कारण माधव लिखता है, गृहकार्य करता है तथा वस्तुएँ लाता है। नयन (आँख) कहती है कि उसके बिना माधव कुछ भी नहीं देख सकता।
कर्ण (कान) मुस्कुराकर बताता है कि मार्ग में वाहनों की ध्वनि सुनकर ही माधव सावधान रहता है तथा दुर्घटना से बचता है; उसी के कारण वह शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है एवं संगीत सुनकर आनन्द पाता है। मुख गर्व से कहता है कि उसी के कारण माधव भोजन करता है, बोलता है तथा प्रश्नों के उत्तर देता है, और उसी की सहायता से उदर भी भोजन पाता है। अन्त में उदर सबको शान्त करते हुए सुझाव देता है कि शोर न करके स्वयं माधव से ही पूछा जाए कि कौन श्रेष्ठ है।
माधव बड़े विवेक से सबको समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपकारी एवं आवश्यक हैं – आँखों से देखना, कानों से सुनना, मुख से बोलना एवं खाना, उदर से शक्ति पाना तथा पैरों से चलना – सब अंग मिलकर ही शरीर को सक्षम बनाते हैं। इसलिए सभी अंग श्रेष्ठ हैं और सभी उसे समान रूप से प्रिय हैं। यह पाठ हमें यह शिक्षा देता है कि किसी को भी छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए; परस्पर सहयोग एवं एकता से ही जीवन सफल बनता है।

बाएँ नासिका, ललाटम्, नयनम्, कपोलः, चिबुकम् पहचानें। बीच स्कन्धः, भुजः, कूर्परः, मणिबन्धः, हस्तः; दाएँ ऊरुः, जानु, जङ्घा, गुल्फः, पादः पहचानें। नयनम् एक आँख और नयनाभ्याम् दोनों आँखों से; कर्णः एक कान और कर्णाभ्याम् दोनों कानों से — नाम और करण-रूप अलग हैं।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वप्ने | स्वप्न में (स्वप्नसमये) | In a dream |
| स्वशरीरस्य | अपने शरीर के | Of his own body |
| अङ्गानि | अंग (अवयव) | Body parts |
| दृष्टवान् | देखा | Saw |
| चर्चाम् | चर्चा को | Discussion |
| श्रेष्ठः | उत्तम, सबसे बड़ा | Great / best |
| अनुक्षणम् | उसी क्षण, तुरन्त | Instantly |
| गृहकार्यम् | गृहकार्य | Homework |
| मां विना | मेरे बिना | Without me |
| स्मितम् | मन्द मुस्कान (थोड़ा हँसकर) | Smile |
| शक्नोति | समर्थ होता है | Is able to |
| मार्गे | मार्ग में, रास्ते में | On the road |
| सङ्गीतम् | संगीत (सुन्दर गीत) | Music |
| साहाय्येन | सहायता से | With the help of |
| प्राप्नोति | प्राप्त करता है | Gets / obtains |
| सबलाः | बलवान | Strong |
| भवेत् | हो सकता/सकती है | May happen |
| कोलाहलम् | शोर | Noise / clamour |
| विचारयति | विचार करता है | Thinks |
| बोधयति | समझाता है | Advises / explains |
| उपकारकाणि | सहायता करने वाले, उपकारी | Helpful |
| शक्तिम् | ताकत, सामर्थ्य | Strength |
| द्रष्टुम् | देखने के लिए | To see |
| नयनाभ्याम् | दोनों आँखों से | With both eyes |
| पादाभ्याम् | दोनों पैरों से | With both feet |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
(NCERT पाठ के सभी अभ्यास-प्रश्न ज्यों-के-त्यों, क्रमानुसार; नीचे प्रत्येक का हल।)
1. चित्रं दृष्ट्वा अङ्गस्य नाम लिखन्तु
पृष्ठ 155 के वास्तविक चित्रों के अनुसार:
- (क) नयनम् / नेत्रम् — आँख।
- (ख) उदरम् — पेट का मानवीकृत चित्र।
- (ग) पादः — पैर।
- (घ) हस्तः — हाथ।
- (ङ) मस्तिष्कम् — मस्तिष्क का मानवीकृत चित्र।
ये कार्टून हैं, शारीरिक रचना के वैज्ञानिक चित्र नहीं। दूसरे चित्र को कर्णः (कान) और अन्तिम को मुखम् (मुख) न लिखें। शिरः पूरे सिर का नाम है; मस्तिष्कम् उसके भीतर स्थित मस्तिष्क का।
2. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारम् अङ्गस्य कार्यं लिखन्तु —
यथा – नयनं – पश्यति
| अङ्गम् (दत्त-विकल्पाः) | उत्तर (समुचितं क्रियापदम्) |
|---|---|
| (क) मुखम् – (चलति, हसति, वदति) | वदति (बोलता है) |
| (ख) पादः – (लिखति, चलति, पश्यति) | चलति (चलता है) |
| (ग) कर्णः – (हसति, वदति, शृणोति) | शृणोति (सुनता है) |
| (घ) नासिका – (आघ्राणं करोति, नृत्यति, धावति) | आघ्राणं करोति (सूँघती है) |
| (ङ) जिह्वा – (धावनं करोति, आस्वादनं करोति, पश्यति) | आस्वादनं करोति (स्वाद लेती है) |
3. कोष्ठकात् समुचितां सङ्ख्यां चित्वा रिक्तस्थानं पूरयन्तु —
अभ्यास 3 के वाक्य भाषा सीखने के नमूने हैं। पूर्ण वयस्क दन्तावली में 32 दाँत गिने जाते हैं, जिसमें अकल-दाढ़ें शामिल हैं; सभी में ये नहीं होतीं। छात्र की वास्तविक संख्या अलग हो सकती है। स्रोत: NHS inform। शरीर की विविधता के बावजूद सभी व्यक्तियों का सम्मान समान है।
4. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु —
यथा – पश्यति – नयनम्
| क्रिया (दत्त-विकल्पाः) | उत्तर (शरीराङ्गस्य नाम) |
|---|---|
| (क) शृणोति – (गुल्फः, चिबुकम्, कर्णः) | कर्णः (कान सुनता है) |
| (ख) धावति – (पादद्वयम्, हस्तद्वयम्, नयनद्वयम्) | पादद्वयम् (दोनों पैरों से दौड़ते हैं) |
| (ग) नमति – (शिरः, कूर्परः, जङ्घा) | शिरः (सिर झुकता है) |
| (घ) सूचयति – (अङ्गुली, नखः, चरणः) | अङ्गुली (अँगुली इशारा करती है) |
| (ङ) लिखति – (हस्तः, मणिबन्धः, कटिः) | हस्तः (हाथ लिखता है) |
5. पिट्टकातः शब्दान् चित्वा यथायोग्यं गणेषु लिखन्तु —
पिट्टका (शब्द-मञ्जूषा): नासिका, मणिबन्धः, चिबुकम्, कूर्परः, हस्तः, कपोलः, भुजः, ललाटम्, स्कन्धः, जङ्घा, नयनम्, जानु, ऊरुः
| शिरः-प्रदेशस्य अङ्गानि (सिर/मुख क्षेत्र) | हस्तस्य अङ्गानि (हाथ क्षेत्र) | पादस्य अङ्गानि (पैर क्षेत्र) |
|---|---|---|
| नासिका, चिबुकम्, ललाटम्, कपोलः, नयनम् | मणिबन्धः, कूर्परः, हस्तः, भुजः, स्कन्धः | जङ्घा, जानु, ऊरुः |
(शिर/मुख क्षेत्र = नासिका, चिबुक, ललाट, कपोल, नयन; हाथ-क्षेत्र = मणिबन्ध, कूर्पर, हस्त, भुज, स्कन्ध; पैर-क्षेत्र = जङ्घा, जानु, ऊरु।)
6. कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु —
7. पिट्टकातः समुचितं शरीराङ्गं चित्वा भगिनी कुत्र किं धरति इति सूचयन्तु —
पिट्टका: कण्ठे, ललाटे, नयनयोः, ओष्ठयोः, पादयोः, कर्णयोः, हस्तयोः, वामहस्ते, अङ्गुल्यां, नेत्रयोः
8. वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इति सूचयन्तु —
अभ्यास 8 (ग) में पुस्तक का शब्द अङ्गुष्ठैः है — अँगूठों से। हाथ की सामान्य अँगुलियों से गणना के लिए अहम् अङ्गुलिभिः गणनां करोमि अधिक स्पष्ट वाक्य है। एक व्यक्ति के दोनों अँगूठों के लिए अङ्गुष्ठाभ्याम् द्विवचन है। अतः शुद्धम् का यह उत्तर अँगूठे से गिनने के अर्थ में है; इसे अङ्गुली का समानार्थक न मानें।
शरीराङ्गानां नामानि (व्याकरण-तालिकाः)
पाठ के ‘योग्यताविस्तरः’ भाग में दिए गए शरीर के अंगों के संस्कृत नाम परीक्षा की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी हैं। इन्हें भली-भाँति याद करें।
1. शरीराङ्गानां संस्कृत-नामानि
| संस्कृत नाम | हिन्दी | संस्कृत नाम | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| केशाः | बाल | ललाटम् | माथा |
| नेत्रम् / नयनम् | आँख | भ्रूः | भौंह |
| कर्णः | कान | नासिका | नाक |
| कपोलः | गाल | चिबुकम् | ठोड़ी |
| मुखम् | मुख | ग्रीवा | गरदन |
| कण्ठः | गला | स्कन्धः | कंधा |
| भुजः | बाँह | कूर्परः | कोहनी |
| वक्षःस्थलम् | छाती | नाभिः | नाभि |
| स्तनः | छाती का स्तन-भाग | कफोणिः / कूर्परः | कोहनी |
| उदरम् | पेट | मणिबन्धः | कलाई |
| हस्तः | हाथ | अङ्गुष्ठः | अँगूठा |
| अङ्गुल्यः | अँगुलियाँ | कटिः | कमर |
| ऊरुः | जाँघ | जानु | घुटना |
| जङ्घा | पिंडली | गुल्फः | टखना |
| पादः | पैर | नखाः | नाखून |
| पार्ष्णिः | एड़ी | पादाङ्गुष्ठः | पैर का अँगूठा |
2. अङ्गानां कार्याणि (अंग एवं उनके कार्य)
| अङ्गम् | कार्यम् (क्रिया) |
|---|---|
| नयनम् / नेत्रम् | पश्यति (देखता है) |
| कर्णः | शृणोति (सुनता है) |
| नासिका | आघ्राणं करोति, श्वसिति (सूँघती है, साँस लेती है) |
| जिह्वा | आस्वादनं करोति (स्वाद लेती है) |
| मुखम् | वदति, भोजनं करोति (बोलता है, खाता है) |
| हस्तः | लिखति, कार्यं करोति (लिखता है, काम करता है) |
| पादः | चलति, धावति (चलता है, दौड़ता है) |
| उदरम् | पाचनात् शक्तिं ददाति (पचाकर शक्ति देता है) |
मधुराष्टकम् & परियोजनाकार्यम्
मधुराष्टकम् (पठन एवं स्मरण हेतु)
पाठ के अन्त में श्रीवल्लभाचार्य-कृत ‘मधुराष्टकम्’ पढ़ने एवं स्मरण करने के लिए दिया गया है – इसमें श्रीकृष्ण की हर वस्तु की मधुरता का वर्णन है।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥ — श्रीवल्लभाचार्य-कृतं मधुराष्टकम् — पद 1–3
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥४॥
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥५॥
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥६॥
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥७॥
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥८॥
श्रीवल्लभाचार्य-कृत भक्ति-स्तुति का पाठानुसार पूर्ण आठ-पदों वाला पठन। मधुरम् / मधुरा / मधुरः / मधुरौ / मधुराः में लिङ्ग और वचन का मेल देखें: नयनं मधुरम्, माला मधुरा, पाणिः मधुरः, पादौ मधुरौ, गावः मधुराः। यहाँ मधुरता प्रशंसा और भक्ति का भाव है, सभी वस्तुओं के स्वाद का कथन नहीं।
गतिविधि-कार्यम् एवं परियोजनाकार्यम् (Activity & Project Work)
1. (गतिविधि) कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु ।
2. (परियोजना) योग्यताविस्तरभागे विद्यमानं चित्रं स्फोरकपत्रे रचयित्वा अङ्गानां नामानि लिखन्तु ।
नाट्य-गतिविधि का लघु मौलिक नमूना
पात्र: माधवः, हस्तः, पादः, नयनम्, कर्णः, मुखम्, उदरम्। अलग नाम-पट्टिकाएँ लेकर शिक्षक के निर्देशन में अभिनय करें; किसी साथी की शारीरिक विशेषता की नकल करके मज़ाक न करें।
- हस्तः — मम कारणेन माधवः लिखति।
- पादः — मम कारणेन माधवः चलति।
- नयनम् — अहं दर्शनाय उपकारकम् अस्मि।
- कर्णः — मम कारणेन माधवः शृणोति।
- मुखम् — माधवः मम कारणेन भोजनं करोति।
- उदरम् — कोलाहलं न कुर्वन्तु। वयं माधवं पृच्छाम।
- माधवः — मम सर्वाणि अङ्गानि प्रियाणि सन्ति।
पोस्टर का नमूना विन्यास
एक सरल पूरा मानव-आकृति चित्र बनाएँ। सिर के पास केशाः, ललाटम्, नेत्रम्, कर्णः, नासिका, मुखम् और चिबुकम् लिखें; धड़ के पास ग्रीवा, कण्ठः, वक्षःस्थलम्, उदरम्, नाभिः, कटिः; बाँह पर स्कन्धः, भुजः, कूर्परः, मणिबन्धः, हस्तः, अङ्गुल्यः; पैर पर ऊरुः, जानु, जङ्घा, गुल्फः, पादः, पार्ष्णिः, पादाङ्गुष्ठः। नामों की रेखाएँ सही स्थान पर पहुँचाएँ। चित्र पृष्ठ 158 से सीखें; ऊपर का तीन-पैनल अध्ययन-चित्र अतिरिक्त पहचान-अभ्यास है।
मञ्जूषा में मणिबन्धः दो बार छपा है; वर्गीकरण में उसे एक ही स्थान पर एक बार लिखना पर्याप्त है।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
1. माधवः स्वप्ने किं दृष्टवान् ?
2. कर्णः किं किं कथयति ?
3. उदरं किं सूचयति ?
4. माधवः अङ्गानि किम् इति बोधयति ?
5. वयं केन अङ्गेन किं कुर्मः ? (त्रीणि उदाहरणानि लिखत)
अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
6. ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. पाठ के आधार पर बताइए कि माधव के विभिन्न अंगों ने स्वयं को श्रेष्ठ क्यों कहा?
8. शरीर के दस अंगों के संस्कृत नाम एवं उनके कार्य लिखिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. माधवः स्वप्ने किं दृष्टवान् ?
(क) मित्राणि
(ख) स्वशरीरस्य अङ्गानि
(ग) पशवः
(घ) वृक्षाः
2. ‘मम कारणेन माधवः चलति’ – इति कः वदति ?
(क) हस्तः
(ख) नयनम्
(ग) पादः
(घ) कर्णः
3. वयं केन शृणुमः ?
(क) नयनेन
(ख) कर्णेन
(ग) मुखेन
(घ) नासिकया
4. ‘श्रेष्ठः’ इत्यस्य अर्थः कः ?
(क) निर्बलः
(ख) उत्तमः
(ग) लघुः
(घ) कुटिलः
5. कोलाहलं मा कुर्वन्तु इति कः सूचयति ?
(क) मुखम्
(ख) उदरम्
(ग) हस्तः
(घ) पादः
6. वयं केन भोजनं कुर्मः ?
(क) कर्णेन
(ख) मुखेन
(ग) पादेन
(घ) नासिकया
7. आघ्राणं केन क्रियते ?
(क) कर्णेन
(ख) नयनेन
(ग) नासिकया
(घ) जिह्वया
8. माधवस्य मतेन कति अङ्गानि श्रेष्ठानि सन्ति ?
(क) एकम् एव
(ख) द्वे एव
(ग) सर्वाणि अङ्गानि
(घ) न कोऽपि
9. ‘ललाटम्’ इत्यस्य हिन्दी-अर्थः कः ?
(क) गाल
(ख) माथा
(ग) ठोड़ी
(घ) कोहनी
10. अस्य पाठस्य मुख्यः सन्देशः कः ?
(क) केवलं हस्तः श्रेष्ठः
(ख) परस्परं सहयोगः, सर्वेषाम् अङ्गानां महत्त्वम्
(ग) कलहः करणीयः
(घ) निद्रा एव श्रेष्ठा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): माधव के अनुसार शरीर के सभी अंग श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं।
कारण (R): प्रत्येक अंग का अपना कार्य है और सभी अंग मिलकर ही शरीर को सक्षम बनाते हैं।
2. अभिकथन (A): कान सावधान रहने में सहायता करता है।
कारण (R): मार्ग में वाहनों की ध्वनि सुनने से माधव को सतर्क रहने में सहायता मिलती है।
3. अभिकथन (A): हम कानों से भोजन करते हैं।
कारण (R): भोजन एवं बोलना मुख का कार्य है।
4. अभिकथन (A): उदर ने झगड़ा शान्त करने का सुझाव दिया।
कारण (R): उदर ने कहा कि शोर न करके स्वयं माधव से ही पूछा जाए कि कौन श्रेष्ठ है।
5. अभिकथन (A): यह पाठ परस्पर सहयोग एवं एकता की शिक्षा देता है।
कारण (R): अंगों के झगड़े के माध्यम से बताया गया है कि कोई भी अंग दूसरे से कम महत्त्वपूर्ण नहीं।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- शरीर के अंगों के संस्कृत नाम (नयनम्, कर्णः, नासिका, मुखम्, हस्तः, पादः, उदरम्, ललाटम् आदि) हिन्दी अर्थ सहित कण्ठस्थ करें।
- प्रत्येक अंग का कार्य (कः किं करोति) तालिका रूप में याद रखें – इसी से शुद्ध/अशुद्ध एवं मिलान के प्रश्न बनते हैं।
- करण-कारक (तृतीया) के रूप – नयनाभ्याम्, कर्णाभ्याम्, मुखेन, पादाभ्याम्, नासिकया – शुद्ध लिखें।
- संख्यावाचक शब्द – एकम्, द्वौ, दश, द्वात्रिंशत्, बहवः – उनके अर्थ सहित याद करें।
- कथा का केन्द्रीय भाव – ‘सभी अंग समान रूप से उपयोगी एवं प्रिय’ – संक्षेप में लिखना आ जाए।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- करण-रूप की भूल – ‘कर्णेन’ के स्थान पर ‘कर्णः’ लिख देना।
- कार्य का गलत अंग से मिलान – भोजन कानों से, श्रवण आँखों से बताना अशुद्ध है।
- ‘नासिका’ का करण-रूप ‘नासिकया’ होता है, ‘नासिकेन’ नहीं।
- द्विवचन/बहुवचन की गड़बड़ी – द्वौ पादौ, दश अङ्गुल्यः को शुद्ध लिखें।
- पाठ का मुख्य भाव केवल ‘एक अंग श्रेष्ठ है’ समझना – सही भाव है कि ‘सभी अंग श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं’।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 15 ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ किस विषय पर है?
यह एक कथा-पाठ है जिसमें माधव नामक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को ‘कौन श्रेष्ठ है’ इस पर झगड़ते देखता है। अन्त में वह समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपयोगी एवं प्रिय हैं।
इस पाठ में माधव के कौन-कौन से अंग चर्चा करते हैं?
इस पाठ में पाद (पैर), हस्त (हाथ), नयन (आँख), कर्ण (कान), मुख तथा उदर (पेट) परस्पर चर्चा करते हैं कि उनमें कौन सबसे श्रेष्ठ है।
‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?
इस पाठ से शिक्षा मिलती है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं और परस्पर सहयोग से ही शरीर एवं जीवन सुचारु रूप से चलता है। हमें किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।
पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 15, पृष्ठ 152–159; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। व्याख्याएँ और गतिविधि के नमूने स्वतंत्र ClearStudy अध्ययन-सहायक हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।
