Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 15 Solutions (NCERT 2026–27) – माधवस्य प्रियम् अङ्गम्

This page gives the complete solution for Class 6 Sanskrit Deepakam (दीपकम्) Chapter 15 ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ (पञ्चदशः पाठः) – a delightful Sanskrit story in which the boy माधव dreams that all his body-parts (शरीराङ्गानि) quarrel over who is the greatest. The page contains the मूल पाठ with अन्वय (सरलार्थ), सार (Hindi summary), शब्दार्थ, and original, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः) along with the शरीराङ्ग-नाम tables, extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs.

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 15 (पञ्चदशः पाठः) पाठ: माधवस्य प्रियम् अङ्गम् Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का पंद्रहवाँ पाठ ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ एक रोचक कथा है। माधव नामक एक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को परस्पर चर्चा करते हुए देखता है। पाद, हस्त, नयन, कर्ण, मुख तथा उदर – प्रत्येक अंग स्वयं को सबसे श्रेष्ठ बताता है। पाद कहता है मेरे कारण माधव चलता है, हस्त कहता है मेरे कारण लिखता है, नयन कहता है मेरे बिना वह देख नहीं सकता, कर्ण कहता है मेरे कारण सुनता और सावधान रहता है, मुख कहता है मेरे कारण बोलता एवं भोजन करता है। अन्त में उदर के सुझाव पर सब माधव से ही पूछते हैं। माधव समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपकारी एवं प्रिय हैं – क्योंकि नयन से देखना, कर्ण से सुनना, मुख से बोलना-खाना, उदर से शक्ति पाना तथा पादों से चलना – सब आवश्यक हैं। पाठ का केन्द्रीय संदेश है – परस्पर सहयोग एवं सबका महत्त्व

मूल पाठ एवं अन्वय (सरलार्थ)

(पाठ का मूल गद्यांश ज्यों-का-त्यों, नीचे प्रत्येक अंश का सरल हिन्दी सरलार्थ/अन्वय।)

माधवनामकः एकः बालकः आसीत् । सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान् । तानि परस्परं चर्चां कुर्वन्ति स्म ।

पादः वदति – अहं श्रेष्ठः । मम कारणेन माधवः चलति ।

हस्तः अनुक्षणं वदति – अरे अरे ! मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च । अतः अहम् एव श्रेष्ठः ।

मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् ? इति नयनं वदति ।

कर्णः स्मितं कृत्वा कथयति – माधवः यदा मार्गे गच्छति तदा पृष्ठतः यानानां ध्वनिं यदि न शृणोति सावधानः च न भवति, तर्हि दुर्घटना भवेत् । माधवः मम कारणेन एव शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा ज्ञानं वर्धयति, सङ्गीतं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभवति ।

झटिति मुखं सूचयति – ‘भोः! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति, शिक्षकस्य प्रश्नस्य उत्तरं वदति । मम साहाय्येन उदरम् अपि भोजनं प्राप्नोति । भवन्तः सर्वे सबलाः भवन्ति । अतः अहम् एव श्रेष्ठः’ ।

उदरं सूचयति – ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः’ इति ।

माधवः विचारयति बोधयति च – ‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति । अहं नयनाभ्यां पश्यामि, कर्णाभ्यां शृणोमि, मुखेन भाषणं करोमि भोजनं करोमि च, उदरेण पाचनात् शक्तिं प्राप्नोमि, पादाभ्यां च चलामि । अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः । भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः’ । — दीपकम्, कक्षा ६, पञ्चदशः पाठः

अन्वय / सरलार्थ (हिन्दी में)

सरलार्थ आरम्भ – माधव नाम का एक बालक था। उसने स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को देखा। वे आपस में चर्चा कर रहे थे। पाद – पैर बोलता है – “मैं श्रेष्ठ हूँ। मेरे कारण माधव चलता है।” हस्त – हाथ तुरन्त बोलता है – “अरे अरे! मेरे कारण माधव लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है। इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।” नयन – आँख कहती है – “मेरे बिना क्या माधव कुछ भी देख सकता है?” कर्ण – कान मुस्कुराकर कहता है – “माधव जब मार्ग में चलता है, तब यदि पीछे से वाहनों की ध्वनि न सुने और सावधान न हो, तो दुर्घटना हो सकती है। माधव मेरे ही कारण शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है और संगीत सुनकर आनन्द का अनुभव करता है।” मुख – मुख झट से बताता है – “सब सुनो, माधव मेरे कारण भोजन करता है, भाषण करता है, शिक्षक के प्रश्न का उत्तर देता है। मेरी सहायता से उदर भी भोजन पाता है। आप सब बलवान बनते हैं। इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।” उदर – पेट कहता है – “ठहरो-ठहरो, शोर मत करो। हम सब माधव से ही पूछते हैं कि कौन श्रेष्ठ है।” माधव – माधव विचार करके समझाता है – “मेरे शरीर के सभी अंग मेरे लिए उपकारी हैं। मैं आँखों से देखता हूँ, कानों से सुनता हूँ, मुख से बोलता एवं भोजन करता हूँ, उदर से पाचन द्वारा शक्ति पाता हूँ और पैरों से चलता हूँ। इसलिए आप सब श्रेष्ठ हैं। आप सब मुझे प्रिय हैं।”

सार (Hindi Summary)

‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ माधव नामक एक बालक की कथा है। एक रात्रि माधव स्वप्न में अपने शरीर के विभिन्न अंगों को परस्पर चर्चा करते हुए देखता है। चर्चा का विषय है – ‘हम सबमें कौन सबसे श्रेष्ठ है?’ पाद (पैर) कहता है कि उसके कारण माधव चलता है, इसलिए वह श्रेष्ठ है। हस्त (हाथ) कहता है कि उसके कारण माधव लिखता है, गृहकार्य करता है तथा वस्तुएँ लाता है। नयन (आँख) कहती है कि उसके बिना माधव कुछ भी नहीं देख सकता।

कर्ण (कान) मुस्कुराकर बताता है कि मार्ग में वाहनों की ध्वनि सुनकर ही माधव सावधान रहता है तथा दुर्घटना से बचता है; उसी के कारण वह शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है एवं संगीत सुनकर आनन्द पाता है। मुख गर्व से कहता है कि उसी के कारण माधव भोजन करता है, बोलता है तथा प्रश्नों के उत्तर देता है, और उसी की सहायता से उदर भी भोजन पाता है। अन्त में उदर सबको शान्त करते हुए सुझाव देता है कि शोर न करके स्वयं माधव से ही पूछा जाए कि कौन श्रेष्ठ है।

माधव बड़े विवेक से सबको समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपकारी एवं आवश्यक हैं – आँखों से देखना, कानों से सुनना, मुख से बोलना एवं खाना, उदर से शक्ति पाना तथा पैरों से चलना – सब अंग मिलकर ही शरीर को सक्षम बनाते हैं। इसलिए सभी अंग श्रेष्ठ हैं और सभी उसे समान रूप से प्रिय हैं। यह पाठ हमें यह शिक्षा देता है कि किसी को भी छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए; परस्पर सहयोग एवं एकता से ही जीवन सफल बनता है।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
स्वप्नेस्वप्न में (स्वप्नसमये)In a dream
स्वशरीरस्यअपने शरीर केOf his own body
अङ्गानिअंग (अवयव)Body parts
दृष्टवान्देखाSaw
चर्चाम्चर्चा कोDiscussion
श्रेष्ठःउत्तम, सबसे बड़ाGreat / best
अनुक्षणम्उसी क्षण, तुरन्तInstantly
गृहकार्यम्गृहकार्यHomework
मां विनामेरे बिनाWithout me
स्मितम्मन्द मुस्कान (थोड़ा हँसकर)Smile
शक्नोतिसमर्थ होता हैIs able to
मार्गेमार्ग में, रास्ते मेंOn the road
सङ्गीतम्संगीत (सुन्दर गीत)Music
साहाय्येनसहायता सेWith the help of
प्राप्नोतिप्राप्त करता हैGets / obtains
सबलाःबलवानStrong
भवेत्हो सकता/सकती हैMay happen
कोलाहलम्शोरNoise / clamour
विचारयतिविचार करता हैThinks
बोधयतिसमझाता हैAdvises / explains
उपकारकाणिसहायता करने वाले, उपकारीHelpful
शक्तिम्ताकत, सामर्थ्यStrength
द्रष्टुम्देखने के लिएTo see
नयनाभ्याम्दोनों आँखों सेWith both eyes
पादाभ्याम्दोनों पैरों सेWith both feet

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

(NCERT पाठ के सभी अभ्यास-प्रश्न ज्यों-के-त्यों, क्रमानुसार; नीचे प्रत्येक का हल।)

1. चित्रं दृष्ट्वा अङ्गस्य नाम लिखन्तु —

(चित्र देखकर अंग का नाम लिखिए। पुस्तक में दिए चित्रों के अनुसार सम्भावित उत्तर।)

उत्तर (नमूना) (क) – नयनम् (नेत्रम् / आँख) (ख) – कर्णः (कान) (ग) – हस्तः (हाथ) (घ) – पादः (पैर) (ङ) – मुखम् (मुख) नोट: चित्र पुस्तक में हैं; ऊपर के नाम चित्र के अनुसार ही लिखें।

2. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारम् अङ्गस्य कार्यं लिखन्तु —

यथा – नयनं – पश्यति

अङ्गम् (दत्त-विकल्पाः)उत्तर (समुचितं क्रियापदम्)
(क) मुखम् – (चलति, हसति, वदति)वदति (बोलता है)
(ख) पादः – (लिखति, चलति, पश्यति)चलति (चलता है)
(ग) कर्णः – (हसति, वदति, शृणोति)शृणोति (सुनता है)
(घ) नासिका – (आघ्राणं करोति, नृत्यति, धावति)आघ्राणं करोति (सूँघती है)
(ङ) जिह्वा – (धावनं करोति, आस्वादनं करोति, पश्यति)आस्वादनं करोति (स्वाद लेती है)

3. कोष्ठकात् समुचितां सङ्ख्यां चित्वा रिक्तस्थानं पूरयन्तु —

उत्तर (क) मम एकम् शिरः अस्ति । (विकल्प: एकम्, अनेकं, चत्वारि) (ख) मम द्वौ पादौ स्तः । (विकल्प: त्रयः, द्वौ, पञ्च) (ग) मम बहवः केशाः सन्ति । (विकल्प: दश, अष्ट, बहवः) (घ) मम द्वात्रिंशत् दन्ताः सन्ति । (विकल्प: चत्वारः, अष्टाविंशतिः, द्वात्रिंशत् – पूर्ण वयस्क के 32 दाँत) (ङ) मम हस्तयोः दश अङ्गुल्यः सन्ति । (विकल्प: अष्ट, दश, पञ्चदश)

4. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु —

यथा – पश्यति – नयनम्

क्रिया (दत्त-विकल्पाः)उत्तर (शरीराङ्गस्य नाम)
(क) शृणोति – (गुल्फः, चिबुकम्, कर्णः)कर्णः (कान सुनता है)
(ख) धावति – (पादद्वयम्, हस्तद्वयम्, नयनद्वयम्)पादद्वयम् (दोनों पैरों से दौड़ते हैं)
(ग) नमति – (शिरः, कूर्परः, जङ्घा)शिरः (सिर झुकता है)
(घ) सूचयति – (अङ्गुली, नखः, चरणः)अङ्गुली (अँगुली इशारा करती है)
(ङ) लिखति – (हस्तः, मणिबन्धः, कटिः)हस्तः (हाथ लिखता है)

5. पिट्टकातः शब्दान् चित्वा यथायोग्यं गणेषु लिखन्तु —

पिट्टका (शब्द-मञ्जूषा): नासिका, मणिबन्धः, चिबुकम्, कूर्परः, हस्तः, कपोलः, भुजः, ललाटम्, स्कन्धः, जङ्घा, नयनम्, जानु, ऊरुः

शिरः-प्रदेशस्य अङ्गानि (सिर/मुख क्षेत्र)हस्तस्य अङ्गानि (हाथ क्षेत्र)पादस्य अङ्गानि (पैर क्षेत्र)
नासिका, चिबुकम्, ललाटम्, कपोलः, नयनम्मणिबन्धः, कूर्परः, हस्तः, भुजः, स्कन्धःजङ्घा, जानु, ऊरुः

(शिर/मुख क्षेत्र = नासिका, चिबुक, ललाट, कपोल, नयन; हाथ-क्षेत्र = मणिबन्ध, कूर्पर, हस्त, भुज, स्कन्ध; पैर-क्षेत्र = जङ्घा, जानु, ऊरु।)

6. कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु —

उत्तर (क) अहं मुखेन गायनं करोमि । (विकल्प: पादेन, नासिकया, मुखेन) (ख) अहं पादाभ्यां धावनं करोमि । (विकल्प: पादाभ्यां, ललाटेन, कूर्परेण) (ग) अहं नासिकया आघ्राणं करोमि । (विकल्प: नखैः, नासिकया, चरणेन) (घ) अहं कर्णाभ्याम् श्रवणं करोमि । (विकल्प: कर्णाभ्याम्, नासिकया, अङ्गुष्ठैः) (ङ) अहं मुखेन भोजनं करोमि । (विकल्प: मुखेन, पादेन, नासिकया)

7. पिट्टकातः समुचितं शरीराङ्गं चित्वा भगिनी कुत्र किं धरति इति सूचयन्तु —

पिट्टका: कण्ठे, ललाटे, नयनयोः, ओष्ठयोः, पादयोः, कर्णयोः, हस्तयोः, वामहस्ते, अङ्गुल्यां, नेत्रयोः

उत्तर भगिनी पादयोः पादकुाद्वयं (पायल) धरति । भगिनी हस्तयोः कङ्कणानि (चूड़ियाँ) धरति । भगिनी अङ्गुल्यां मुद्रिकां (अँगूठी) धरति । भगिनी वामहस्ते घटीयन्त्रं (घड़ी) धरति । भगिनी कण्ठे मालां (माला) धरति । भगिनी कर्णयोः कुण्डलद्वयं (कान के झुमके) धरति । भगिनी नेत्रयोः उपनेत्रं (चश्मा) धरति । भगिनी ललाटे कुङ्कुमं (कुमकुम/बिंदी) धरति । भगिनी ओष्ठयोः ओष्ठरागं (लिपस्टिक) धरति । भगिनी नयनयोः कज्जलं (काजल) धरति ।

8. वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इति सूचयन्तु —

उत्तर (क) अहं कर्णाभ्यां भोजनं करोमि । → अशुद्धम् (भोजन मुख से होता है, कानों से नहीं) (ख) अहं नासिकाद्वारा श्वासं स्वीकरोमि । → शुद्धम् (नाक से ही श्वास लिया जाता है) (ग) अहम् अङ्गुष्ठैः गणनां करोमि । → शुद्धम् (अँगुलियों/अँगूठों से गिनती की जाती है) (घ) अहं नयनाभ्यां श्रवणं करोमि । → अशुद्धम् (सुनना कानों से होता है, आँखों से नहीं) (ङ) अहं हस्तेन कार्यं करोमि । → शुद्धम् (हाथ से कार्य किया जाता है)

शरीराङ्गानां नामानि (व्याकरण-तालिकाः)

पाठ के ‘योग्यताविस्तरः’ भाग में दिए गए शरीर के अंगों के संस्कृत नाम परीक्षा की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी हैं। इन्हें भली-भाँति याद करें।

1. शरीराङ्गानां संस्कृत-नामानि

संस्कृत नामहिन्दीसंस्कृत नामहिन्दी
केशाःबालललाटम्माथा
नेत्रम् / नयनम्आँखभ्रूःभौंह
कर्णःकाननासिकानाक
कपोलःगालचिबुकम्ठोड़ी
मुखम्मुखग्रीवागरदन
कण्ठःगलास्कन्धःकंधा
भुजःबाँहकूर्परःकोहनी
वक्षःस्थलम्छातीनाभिःनाभि
उदरम्पेटमणिबन्धःकलाई
हस्तःहाथअङ्गुष्ठःअँगूठा
अङ्गुल्यःअँगुलियाँकटिःकमर
ऊरुःजाँघजानुघुटना
जङ्घापिंडलीगुल्फःटखना
पादःपैरनखाःनाखून
पार्ष्णिःएड़ीपादाङ्गुष्ठःपैर का अँगूठा

2. अङ्गानां कार्याणि (अंग एवं उनके कार्य)

अङ्गम्कार्यम् (क्रिया)
नयनम् / नेत्रम्पश्यति (देखता है)
कर्णःशृणोति (सुनता है)
नासिकाआघ्राणं करोति, श्वसिति (सूँघती है, साँस लेती है)
जिह्वाआस्वादनं करोति (स्वाद लेती है)
मुखम्वदति, भोजनं करोति (बोलता है, खाता है)
हस्तःलिखति, कार्यं करोति (लिखता है, काम करता है)
पादःचलति, धावति (चलता है, दौड़ता है)
उदरम्पाचनात् शक्तिं ददाति (पचाकर शक्ति देता है)

मधुराष्टकम् & परियोजनाकार्यम्

मधुराष्टकम् (पठन एवं स्मरण हेतु)

पाठ के अन्त में श्रीवल्लभाचार्य-कृत ‘मधुराष्टकम्’ पढ़ने एवं स्मरण करने के लिए दिया गया है – इसमें श्रीकृष्ण की हर वस्तु की मधुरता का वर्णन है।

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥ — श्रीवल्लभाचार्य-कृतं मधुराष्टकम् (आंशिक)

गतिविधि-कार्यम् एवं परियोजनाकार्यम् (Activity & Project Work)

1. (गतिविधि) कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु ।

मार्गदर्शनम्यह कक्षा-गतिविधि है। शिक्षक के मार्गदर्शन में सभी छात्र इस पाठ का नाट्य-अभिनय करें। एक छात्र माधव बने तथा अन्य छात्र पाद, हस्त, नयन, कर्ण, मुख एवं उदर के संवाद बोलें।

2. (परियोजना) योग्यताविस्तरभागे विद्यमानं चित्रं स्फोरकपत्रे रचयित्वा अङ्गानां नामानि लिखन्तु ।

मार्गदर्शनम्योग्यताविस्तर भाग में दिए मानव-शरीर के चित्र को चार्ट-पेपर (स्फोरकपत्र) पर बनाइए तथा प्रत्येक अंग का संस्कृत नाम (केशाः, ललाटम्, नयनम्, कर्णः, नासिका, मुखम्, हस्तः, उदरम्, पादः आदि) लिखिए।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. माधवः स्वप्ने किं दृष्टवान् ?

उत्तरमाधवः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान् । तानि अङ्गानि परस्परं चर्चां कुर्वन्ति स्म यत् – अस्माकं मध्ये कः श्रेष्ठः इति । (माधव ने स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को आपस में ‘कौन श्रेष्ठ है’ इस पर चर्चा करते देखा।)

2. कर्णः किं किं कथयति ?

उत्तरकर्णः कथयति यत् – माधवः मार्गे यानानां ध्वनिं श्रुत्वा सावधानः भवति, दुर्घटनातः रक्षति, शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा ज्ञानं वर्धयति, सङ्गीतं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभवति । (कान कहता है कि उसी के कारण माधव सावधान रहता है, ज्ञान बढ़ाता है तथा आनन्द पाता है।)

3. उदरं किं सूचयति ?

उत्तरउदरं सूचयति – ‘कोलाहलं मा कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम यत् कः श्रेष्ठः’ इति । (उदर शोर न करने को कहकर सुझाव देता है कि कौन श्रेष्ठ है, यह माधव से ही पूछा जाए।)

4. माधवः अङ्गानि किम् इति बोधयति ?

उत्तरमाधवः बोधयति यत् – मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि उपकारकाणि सन्ति, अतः सर्वाणि अङ्गानि श्रेष्ठानि सन्ति, सर्वाणि च मम प्रियाणि सन्ति । (माधव समझाता है कि सभी अंग उपकारी एवं समान रूप से श्रेष्ठ तथा प्रिय हैं।)

5. वयं केन अङ्गेन किं कुर्मः ? (त्रीणि उदाहरणानि लिखत)

उत्तरवयं नयनाभ्यां पश्यामः, कर्णाभ्यां शृणुमः, मुखेन वदामः भोजनं च कुर्मः, पादाभ्यां चलामः । (हम आँखों से देखते हैं, कानों से सुनते हैं, मुख से बोलते एवं खाते हैं, पैरों से चलते हैं।)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ का केन्द्रीय संदेश है – शरीर के सभी अंग समान रूप से उपयोगी हैं तथा परस्पर सहयोग से ही जीवन चलता है। माधव स्वप्न में देखता है कि उसके अंग – पाद, हस्त, नयन, कर्ण, मुख, उदर – अपने-अपने महत्त्व पर गर्व करते हुए ‘कौन श्रेष्ठ है’ इस पर झगड़ते हैं।माधव विवेकपूर्वक समझाता है कि नयन से देखना, कर्ण से सुनना, मुख से बोलना-खाना, उदर से शक्ति पाना तथा पादों से चलना – सभी कार्य आवश्यक हैं और कोई भी अंग दूसरे से कम नहीं है। इसी प्रकार समाज में भी प्रत्येक व्यक्ति का अपना महत्त्व है। हमें किसी को छोटा या बड़ा न मानकर परस्पर सहयोग एवं एकता से रहना चाहिए।

7. पाठ के आधार पर बताइए कि माधव के विभिन्न अंगों ने स्वयं को श्रेष्ठ क्यों कहा?

उत्तरस्वप्न में माधव के प्रत्येक अंग ने अपने कार्य के आधार पर स्वयं को श्रेष्ठ बताया। पाद ने कहा कि उसके कारण माधव चलता है। हस्त ने कहा कि उसके कारण माधव लिखता है, गृहकार्य करता है तथा वस्तुएँ लाता है। नयन ने कहा कि उसके बिना माधव कुछ भी नहीं देख सकता।कर्ण ने कहा कि उसी के कारण माधव सावधान रहकर दुर्घटना से बचता है, ज्ञान बढ़ाता है तथा संगीत का आनन्द लेता है। मुख ने कहा कि उसी के कारण माधव बोलता है, भोजन करता है तथा प्रश्नों के उत्तर देता है। अन्त में माधव ने सबको समझाया कि सभी अंग मिलकर ही शरीर को सक्षम बनाते हैं, इसलिए सभी श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं।

8. शरीर के दस अंगों के संस्कृत नाम एवं उनके कार्य लिखिए।

उत्तरशरीर के दस प्रमुख अंग एवं उनके कार्य इस प्रकार हैं – (1) नयनम् – पश्यति (देखता है), (2) कर्णः – शृणोति (सुनता है), (3) नासिका – आघ्राणं करोति, श्वसिति (सूँघती है, साँस लेती है), (4) जिह्वा – आस्वादनं करोति (स्वाद लेती है), (5) मुखम् – वदति (बोलता है)।(6) हस्तः – लिखति, कार्यं करोति (लिखता है, काम करता है), (7) पादः – चलति, धावति (चलता-दौड़ता है), (8) उदरम् – पाचनात् शक्तिं ददाति (शक्ति देता है), (9) शिरः – नमति (झुकता है), (10) अङ्गुली – सूचयति (इशारा करती है)। ये सभी अंग मिलकर शरीर को क्रियाशील बनाते हैं।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. माधवः स्वप्ने किं दृष्टवान् ?

(क) मित्राणि

(ख) स्वशरीरस्य अङ्गानि

(ग) पशवः

(घ) वृक्षाः

उत्तर(ख) स्वशरीरस्य अङ्गानि।

2. ‘मम कारणेन माधवः चलति’ – इति कः वदति ?

(क) हस्तः

(ख) नयनम्

(ग) पादः

(घ) कर्णः

उत्तर(ग) पादः।

3. वयं केन शृणुमः ?

(क) नयनेन

(ख) कर्णेन

(ग) मुखेन

(घ) नासिकया

उत्तर(ख) कर्णेन। (कानों से सुनते हैं)

4. ‘श्रेष्ठः’ इत्यस्य अर्थः कः ?

(क) निर्बलः

(ख) उत्तमः

(ग) लघुः

(घ) कुटिलः

उत्तर(ख) उत्तमः। (सबसे अच्छा/बड़ा)

5. कोलाहलं मा कुर्वन्तु इति कः सूचयति ?

(क) मुखम्

(ख) उदरम्

(ग) हस्तः

(घ) पादः

उत्तर(ख) उदरम्।

6. वयं केन भोजनं कुर्मः ?

(क) कर्णेन

(ख) मुखेन

(ग) पादेन

(घ) नासिकया

उत्तर(ख) मुखेन।

7. आघ्राणं केन क्रियते ?

(क) कर्णेन

(ख) नयनेन

(ग) नासिकया

(घ) जिह्वया

उत्तर(ग) नासिकया। (नाक से सूँघते हैं)

8. माधवस्य मतेन कति अङ्गानि श्रेष्ठानि सन्ति ?

(क) एकम् एव

(ख) द्वे एव

(ग) सर्वाणि अङ्गानि

(घ) न कोऽपि

उत्तर(ग) सर्वाणि अङ्गानि। (सभी अंग श्रेष्ठ हैं)

9. ‘ललाटम्’ इत्यस्य हिन्दी-अर्थः कः ?

(क) गाल

(ख) माथा

(ग) ठोड़ी

(घ) कोहनी

उत्तर(ख) माथा।

10. अस्य पाठस्य मुख्यः सन्देशः कः ?

(क) केवलं हस्तः श्रेष्ठः

(ख) परस्परं सहयोगः, सर्वेषाम् अङ्गानां महत्त्वम्

(ग) कलहः करणीयः

(घ) निद्रा एव श्रेष्ठा

उत्तर(ख) परस्परं सहयोगः, सर्वेषाम् अङ्गानां महत्त्वम्।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): माधव के अनुसार शरीर के सभी अंग श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं।

कारण (R): प्रत्येक अंग का अपना कार्य है और सभी अंग मिलकर ही शरीर को सक्षम बनाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कान सावधान रहने में सहायता करता है।

कारण (R): मार्ग में वाहनों की ध्वनि सुनकर ही माधव सतर्क रहता है और दुर्घटना से बचता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): हम कानों से भोजन करते हैं।

कारण (R): भोजन एवं बोलना मुख का कार्य है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – भोजन कानों से नहीं, मुख से किया जाता है।

4. अभिकथन (A): उदर ने झगड़ा शान्त करने का सुझाव दिया।

कारण (R): उदर ने कहा कि शोर न करके स्वयं माधव से ही पूछा जाए कि कौन श्रेष्ठ है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): यह पाठ परस्पर सहयोग एवं एकता की शिक्षा देता है।

कारण (R): अंगों के झगड़े के माध्यम से बताया गया है कि कोई भी अंग दूसरे से कम महत्त्वपूर्ण नहीं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • शरीर के अंगों के संस्कृत नाम (नयनम्, कर्णः, नासिका, मुखम्, हस्तः, पादः, उदरम्, ललाटम् आदि) हिन्दी अर्थ सहित कण्ठस्थ करें।
  • प्रत्येक अंग का कार्य (कः किं करोति) तालिका रूप में याद रखें – इसी से शुद्ध/अशुद्ध एवं मिलान के प्रश्न बनते हैं।
  • करण-कारक (तृतीया) के रूप – नयनाभ्याम्, कर्णाभ्याम्, मुखेन, पादाभ्याम्, नासिकया – शुद्ध लिखें।
  • संख्यावाचक शब्द – एकम्, द्वौ, दश, द्वात्रिंशत्, बहवः – उनके अर्थ सहित याद करें।
  • कथा का केन्द्रीय भाव – ‘सभी अंग समान रूप से उपयोगी एवं प्रिय’ – संक्षेप में लिखना आ जाए।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • करण-रूप की भूल – ‘कर्णेन’ के स्थान पर ‘कर्णः’ लिख देना।
  • कार्य का गलत अंग से मिलान – भोजन कानों से, श्रवण आँखों से बताना अशुद्ध है।
  • ‘नासिका’ का करण-रूप ‘नासिकया’ होता है, ‘नासिकेन’ नहीं।
  • द्विवचन/बहुवचन की गड़बड़ी – द्वौ पादौ, दश अङ्गुल्यः को शुद्ध लिखें।
  • पाठ का मुख्य भाव केवल ‘एक अंग श्रेष्ठ है’ समझना – सही भाव है कि ‘सभी अंग श्रेष्ठ एवं प्रिय हैं’।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 15 ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ किस विषय पर है?

यह एक कथा-पाठ है जिसमें माधव नामक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को ‘कौन श्रेष्ठ है’ इस पर झगड़ते देखता है। अन्त में वह समझाता है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से उपयोगी एवं प्रिय हैं।

इस पाठ में माधव के कौन-कौन से अंग चर्चा करते हैं?

इस पाठ में पाद (पैर), हस्त (हाथ), नयन (आँख), कर्ण (कान), मुख तथा उदर (पेट) परस्पर चर्चा करते हैं कि उनमें कौन सबसे श्रेष्ठ है।

‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?

इस पाठ से शिक्षा मिलती है कि शरीर के सभी अंग समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं और परस्पर सहयोग से ही शरीर एवं जीवन सुचारु रूप से चलता है। हमें किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।

मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, अन्वय एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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