Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 3 Solutions — एषः कः? एषा का? एतत् किम्?
दीपकम् पाठ 3 में एषः, एषा और एतत् का प्रयोग, तीन लिङ्ग और एक–द्वि–बहुवचन समझें। पुस्तक के नौ अभ्यासों के उत्तर, चित्रों की पहचान, शब्दों का वर्गीकरण और परियोजना के नमूने नीचे दिए गए हैं।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ (शब्दरूप एवं संवाद) + अन्वय
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का तृतीय पाठ ‘एषः कः? एषा का? एतत् किम्?’ एक व्याकरण-प्रधान पाठ है, जो तीन सर्वनाम-शब्दों – तद् (सः/सा/तत्), एतद् (एषः/एषा/एतत्) तथा किम् (कः/का/किम्) के प्रयोग की शिक्षा देता है। पाठ में सबसे पहले तीनों लिङ्गों (पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग) के अकारान्त तथा आकारान्त संज्ञाओं और सर्वनामों के एकवचन, द्विवचन एवं बहुवचन रूप चित्रों सहित दिखाए गए हैं; जैसे – बालकः-बालकौ-बालकाः, बालिका-बालिके-बालिकाः, पत्रम्-पत्रे-पत्राणि। इसके बाद क्रियापदों (पठति, पिबति, खादति, गच्छति, क्रीडति) के तीनों वचनों के रूप तथा छोटे-छोटे प्रश्नोत्तर-संवादों द्वारा ‘कः? का? किम्?’ पूछना एवं उत्तर देना सिखाया गया है। पाठ का मुख्य उद्देश्य है – निकट की वस्तु/व्यक्ति (एषः/एषा/एतत्) तथा दूर की वस्तु/व्यक्ति (सः/सा/तत्) में अन्तर समझना तथा लिङ्ग एवं वचन के अनुसार सही सर्वनाम का प्रयोग करना।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह कोई कथा या काव्य नहीं, अपितु संस्कृत-व्याकरण की नींव बनाने वाला संरचना-पाठ (structure lesson) है। संस्कृत में प्रत्येक नाम (संज्ञा) का एक लिङ्ग होता है – पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग अथवा नपुंसकलिङ्ग, और प्रत्येक का तीन वचनों (एक, द्वि, बहु) में रूप बदलता है। इस पाठ में तद्, एतद् एवं किम् सर्वनामों के प्रथमा-विभक्ति के रूप सिखाए गए हैं – जहाँ ‘एषः/एषा/एतत्’ निकट (this) के लिए, ‘सः/सा/तत्’ दूर (that) के लिए तथा ‘कः/का/किम्’ प्रश्न (who/what) के लिए प्रयुक्त होते हैं। पाठ में बहुत-से प्रश्नोत्तर-संवाद हैं जो छात्र को बोलकर अभ्यास (उच्चैः पठन्तु, स्मरन्तु, अवगच्छन्तु च) करने को प्रेरित करते हैं।
मूल पाठ (शब्दरूप एवं संवाद) + अन्वय
(पाठ के शब्दरूप और संवादों की अध्ययन-व्याख्या।)
१. लिङ्गानुसारं शब्दरूपाणि (एक · द्वि · बहु)
| लिङ्गम् | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| पुंलिङ्गम् | बालकः | बालकौ | बालकाः |
| वृक्षः | वृक्षौ | वृक्षाः | |
| गजः | गजौ | गजाः | |
| स्त्रीलिङ्गम् | बालिका | बालिके | बालिकाः |
| वैद्या | वैद्ये | वैद्याः | |
| अजा | अजे | अजाः | |
| नपुंसकलिङ्गम् | पत्रम् | पत्रे | पत्राणि |
| चक्रम् | चक्रे | चक्राणि | |
| पुस्तकम् | पुस्तके | पुस्तकानि |
अन्वय/भाव: पुंलिङ्ग अकारान्त शब्दों का बहुवचन ‘-आः’, स्त्रीलिङ्ग आकारान्त का ‘-आः’ तथा नपुंसकलिङ्ग का बहुवचन ‘-आनि/-आणि’ में बनता है। इन उदाहरणों में अकारान्त पुंलिङ्ग का द्विवचन -औ, आकारान्त स्त्रीलिङ्ग और अकारान्त नपुंसकलिङ्ग का -ए है। सभी शब्दों पर यही प्रत्यय न लगाएँ।
२. क्रियापदानि (एक · द्वि · बहु)
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|
| पठति | पठतः | पठन्ति |
| पिबति | पिबतः | पिबन्ति |
| खादति | खादतः | खादन्ति |
| गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| क्रीडति | क्रीडतः | क्रीडन्ति |
अन्वय/भाव: एक कर्ता के साथ ‘-ति’, दो के साथ ‘-तः’ तथा बहुत के साथ ‘-न्ति’ क्रिया-रूप लगता है (पठति = पढ़ता है, पठतः = दोनों पढ़ते हैं, पठन्ति = सब पढ़ते हैं)।
३. सर्वनाम-प्रयोगः (तद् / एतद् + संज्ञा)
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|
| सः शुकः | तौ शुकौ | ते शुकाः |
| एषः बालकः | एतौ बालकौ | एते बालकाः |
| सा शिक्षिका | ते शिक्षिके | ताः शिक्षिकाः |
| एषा बालिका | एते बालिके | एताः बालिकाः |
| तत् फलम् | ते फले | तानि फलानि |
| एतत् फलम् | एते फले | एतानि फलानि |
अन्वय/भाव: ‘सः/सा/तत्’ दूर की ओर संकेत करते हैं (वह), ‘एषः/एषा/एतत्’ निकट की ओर (यह)। सर्वनाम का लिङ्ग एवं वचन उसके साथ आने वाली संज्ञा के अनुसार होता है।
४. प्रश्नोत्तर-संवादाः (कः? का? किम्?)
पुंलिङ्गम् (दूरवाची तद्):
सः कः? – सः शिक्षकः। सः किं करोति? – सः पाठयति। किं सः भ्रमति? – न, सः न भ्रमति। सः तु पाठयति।
तौ कौ? – तौ मयूरौ। तौ किं कुरुतः? – तौ नृत्यतः। किं तौ खादतः? – न, तौ न खादतः। तौ तु नृत्यतः।
ते के? – ते बालकाः। ते किं कुर्वन्ति? – ते क्रीडन्ति। किं ते गायन्ति? – न, ते न गायन्ति। ते तु क्रीडन्ति।
पुंलिङ्गम् (निकटवाची एतद्):
एषः कः? – एषः शिक्षकः। शिक्षकः किं करोति? – शिक्षकः लिखति। किम् एषः पठति? – न, एषः न पठति। एषः लिखति।
एतौ कौ? – एतौ बालकौ। बालकौ किं कुरुतः? – बालकौ पठतः। किम् एतौ लिखतः? – न, एतौ न लिखतः। एतौ तु पठतः।
एते के? – एते बालकाः। बालकाः किं कुर्वन्ति? – बालकाः पिबन्ति। किम् एते जलं पिबन्ति? – आम्, एते जलं पिबन्ति।
स्त्रीलिङ्गम् (तद् & एतद्):
सा का? – सा वृद्धा। सा किं करोति? – सा विहरति। किं सा क्रीडति? – न, सा न क्रीडति। सा तु विहरति।
ते के? – ते अजे। ते किं कुरुतः? – ते चरतः। किं ते पिबतः? – न, ते न पिबतः। ते तु चरतः।
ताः काः? – ताः महिलाः। ताः किं कुर्वन्ति? – ताः धावन्ति। किं ताः गायन्ति? – न, ताः न गायन्ति। ताः तु धावन्ति।
एषा का? – एषा लता। एषा किं करोति? – एषा खादति। किम् एषा पठति? – न, एषा न पठति। एषा तु खादति।
एते के? – एते बालिके। एते किं कुरुतः? – एते भ्रमतः। किम् एते धावतः? – न, एते न धावतः। एते तु भ्रमतः।
एताः काः? – एताः अजाः। एताः किं कुर्वन्ति? – एताः चरन्ति। किम् एताः धावन्ति? – न, एताः न धावन्ति। एताः तु चरन्ति।
नपुंसकलिङ्गम् (तद् & एतद्):
तत् किम्? – तत् चन्द्रयानम्। किं तत् विमानम्? – न, तत् विमानं न। तत् तु चन्द्रयानम् अस्ति।
ते के? – ते पुस्तके। किं ते पत्रे? – न, ते पत्रे न। ते तु पुस्तके स्तः।
तानि कानि? – तानि रेलयानानि। किं तानि बसयानानि? – न, तानि बसयानानि न। तानि तु रेलयानानि सन्ति।
एतत् किम्? – एतत् दूरदर्शनम्। किम् एतत् सङ्गणकम्? – न, एतत् सङ्गणकं न। एतत् तु दूरदर्शनम् अस्ति।
एते के? – एते फले। किम् एते कन्दुके? – न, एते कन्दुके न। एते तु फले स्तः।
एतानि कानि? – एतानि पुस्तकानि। किम् एतानि सोपानानि सन्ति? – न, एतानि सोपानानि न। एतानि तु पुस्तकानि सन्ति।
अन्वय/भाव: प्रश्न करते समय लिङ्ग-वचन के अनुसार ‘कः/कौ/के’ (पुं), ‘का/के/काः’ (स्त्री), ‘किम्/के/कानि’ (नपुं) का प्रयोग होता है; उत्तर में निषेध के लिए ‘न’ तथा स्वीकृति के लिए ‘आम्’ तथा बल देने के लिए ‘तु’ लगता है।
५. सर्वनाम-सारणी (उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च)
| पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वचनम् → | एक | द्वि | बहु | एक | द्वि | बहु | एक | द्वि | बहु |
| तद् (दूर) | सः | तौ | ते | सा | ते | ताः | तत् | ते | तानि |
| एतद् (निकट) | एषः | एतौ | एते | एषा | एते | एताः | एतत् | एते | एतानि |
| किम् (प्रश्न) | कः | कौ | के | का | के | काः | किम् | के | कानि |
लता के दो प्रयोग: “एषा लता। एषा खादति।” में लता बालिका का नाम है। “सा लता” के दूसरे उदाहरण में लता का अर्थ बेल भी हो सकता है। व्याकरण का लिङ्ग केवल जीवित / निर्जीव से तय नहीं होता: वृक्षः निर्जीव वस्तु का पुंलिङ्ग नाम है और फलम् नपुंसकलिङ्ग है। क्रिया का वचन कर्ता से मिलता है; बालकः पठति और बालिका पठति में क्रिया लिङ्ग बदलने से नहीं बदली।

सार (Hindi Summary)
‘एषः कः? एषा का? एतत् किम्?’ पाठ संस्कृत-व्याकरण का एक मूलभूत संरचना-पाठ है, जिसका उद्देश्य छात्रों को तद् (वह), एतद् (यह) तथा किम् (कौन/क्या) सर्वनामों का सही प्रयोग सिखाना है। पाठ के आरम्भ में तीनों लिङ्गों के शब्दों के एकवचन, द्विवचन एवं बहुवचन रूप चित्रों सहित दिए गए हैं – जैसे बालकः-बालकौ-बालकाः (पुंलिङ्ग), बालिका-बालिके-बालिकाः (स्त्रीलिङ्ग) तथा पत्रम्-पत्रे-पत्राणि (नपुंसकलिङ्ग)। साथ ही पठति, पिबति, खादति, गच्छति, क्रीडति जैसी क्रियाओं के तीनों वचनों के रूप भी सिखाए गए हैं।
इसके पश्चात् अनेक छोटे-छोटे प्रश्नोत्तर-संवादों द्वारा यह दिखाया गया है कि किस प्रकार लिङ्ग एवं वचन के अनुसार प्रश्न (कः? का? किम्? / कौ? के? कानि?) पूछा जाता है और उसका उत्तर दिया जाता है। ‘एषः/एषा/एतत्’ का प्रयोग पास की वस्तु या व्यक्ति के लिए (this) तथा ‘सः/सा/तत्’ का प्रयोग दूर की वस्तु या व्यक्ति के लिए (that) होता है। उत्तरों में निषेध के लिए ‘न’, स्वीकृति के लिए ‘आम्’ तथा बल देने के लिए ‘तु’ का प्रयोग होता है।
पाठ के अन्त में एक सुन्दर सारणी दी गई है, जिसमें तद्, एतद् एवं किम् के तीनों लिङ्गों एवं तीनों वचनों के सभी रूप एक साथ दिए गए हैं। ‘योग्यताविस्तरः’ भाग में अकारान्त, आकारान्त एवं ईकारान्त शब्दों तथा सर्वनामों की रचना समझाई गई है, और ‘परियोजनाकार्यम्’ में घरेलू वस्तुओं को लिङ्गानुसार छाँटने का अभ्यास दिया गया है। संक्षेप में, यह पाठ छात्रों में संस्कृत-वाक्य-रचना की नींव दृढ़ करता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एषः / एषा / एतत् | यह (निकट का) | This |
| सः / सा / तत् | वह (दूर का) | That |
| कः / का / किम् | कौन / क्या | Who / What |
| लता | बेल; संवाद में बालिका का नाम भी | Creeper |
| फलम् | फल | Fruit |
| पुस्तकम् | पुस्तक | Book |
| अजा | बकरी | Goat (female) |
| सोपानम् | सीढ़ी | Stairs |
| सङ्गणकम् | संगणक / कंप्यूटर | Computer |
| दूरदर्शनम् | दूरदर्शन / टीवी | Television |
| चन्द्रयानम् | चन्द्रयान | Lunar spacecraft |
| विमानम् | हवाई जहाज़ | Aeroplane |
| रेलयानम् | रेलगाड़ी | Train |
| कन्दुकम् | गेंद | Ball |
| विहरति | घूमती/टहलती है | Strolls / wanders |
| चरति | चरती है | Grazes |
| नृत्यति | नाचता है | Dances |
| आम् | हाँ | Yes |
| न | नहीं | No / not |
| तु | तो / ही (बल हेतु) | indeed / but |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
१. उदाहरणं दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
यथा – बालकः | बालकौ | बालकाः
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|
| (क) चषकः | चषकौ | चषकाः |
| (ख) देवः | देवौ | देवाः |
| (ग) सैनिकः | सैनिकौ | सैनिकाः |
| (घ) रजकः | रजकौ | रजकाः |
| (ङ) तन्त्रज्ञः | तन्त्रज्ञौ | तन्त्रज्ञाः |
२. उदाहरणानुसारं पट्टिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानेषु संयोजयन्तु —
पट्टिका (शब्द-मञ्जूषा): शुकः, स्यूतः, अजा, फलम्, पुष्पम्, महिषी, वृक्षः, कुक्कुरः, पार्वती, पुस्तकम्
यथा – सः शुकः।
प्रश्न 3: चित्रों के संस्कृत नाम
(क) पुस्तकम् — पुस्तक; (ख) बालकौ — दो लड़के; (ग) सैनिकः — सैनिक; (घ) वातायनम् — खिड़की; (ङ) गायिका — गाने वाली स्त्री; (च) त्रिशूलम् — त्रिशूल।
विशेष: (ख) में दो बालक हैं, इसलिए बालकौ लिखें, बालकः नहीं। ये वास्तविक पाठ्यपुस्तक के चित्रों के उत्तर हैं।
प्रश्न 4: पट्टिका के शब्दों को एकवचन और बहुवचन में रखें
यह दिए हुए शब्दों का वर्गीकरण है; प्रत्येक पंक्ति के दोनों शब्द एक-दूसरे के एकवचन–बहुवचन रूप नहीं हैं। पंक्तियों का क्रम बदल सकता है, पर हर शब्द सही स्तम्भ में होना चाहिए।
| एकवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|
| पुष्पम् — उदाहरण | बालकाः — उदाहरण |
| फलम् | वृक्षाः |
| गायिका | शिक्षिकाः |
| रजकः | अजाः |
| सः | मापिकाः |
| लेखनी | फलानि |
५. पट्टिकायां कानिचन पदानि सन्ति, तानि पदानि उचिते घटे पूरयन्तु (एषः / एषा / एतत्) —
पट्टिका: सैनिकः, चषकः, गायिका, महिषी, जलम्, कुक्कुरः, द्वारम्, फलम्, वृद्धा, वृक्षः, अजा, वातायनम्, अङ्कनी, पुस्तकम्, शुकः
| एषः (पुंलिङ्ग) | एषा (स्त्रीलिङ्ग) | एतत् (नपुंसकलिङ्ग) |
|---|---|---|
| सैनिकः | गायिका | जलम् |
| चषकः | महिषी | द्वारम् |
| कुक्कुरः | वृद्धा | फलम् |
| वृक्षः | अजा | वातायनम् |
| शुकः | अङ्कनी | पुस्तकम् |
६. उदाहरणानुसारं पट्टिकातः उपयुक्तपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
पट्टिका: माला, युवकौ, पाठशाला, मुखम्, कमले, भवनानि, बिडालः, छात्राः, लेखन्यौ, मालाः
यथा – सा का? सा पाठशाला।
७. निम्नलिखितानि वाक्यानि अधिकृत्य उदाहरणानुसारं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु —
यथा – सः गजः। → सः कः?
८. परस्परं सम्बद्धानि पदानि संयोजयन्तु, रिक्तस्थानेषु पूरयन्तु च —
(कर्ता एवं उपयुक्त क्रिया का मिलान करके वाक्य बनाइए। यथा – नर्तकी नृत्यति।)
| पदम् (कर्ता) | उचिता क्रिया | वाक्यम् (उत्तर) |
|---|---|---|
| (क) नर्तकी | नृत्यति | नर्तकी नृत्यति। |
| (ख) लेखकः | लिखति | लेखकः लिखति। |
| (ग) फलम् | पतति | फलम् पतति। |
| (घ) कमलम् | विकसति | कमलम् विकसति। |
| (ङ) चालकः | चालयति | चालकः चालयति। |
| (च) गायिका | गायति | गायिका गायति। |
९. उदाहरणानुसारं कोष्ठकेभ्यः उचितानि पदानि चित्वा वाक्यानि रचयन्तु —
यथा – कः/का लिखति? (लेखकः, छात्रः, सा) → लेखकः लिखति। छात्रः लिखति। सा लिखति।
योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
पाठ के ‘योग्यताविस्तरः’ भाग में शब्दों के अन्त्य-वर्ण (अकारान्त, आकारान्त, ईकारान्त) तथा सर्वनामों के प्रथमा-एकवचन रूप समझाए गए हैं।
1. शब्दान्त-भेदः
| शब्द-प्रकारः | नियमः | उदाहरणानि |
|---|---|---|
| अकारान्तः शब्दः | जिसके अन्त में ‘अ’ वर्ण हो (प्रायः पुंलिङ्ग या नपुंसकलिङ्ग) | बालक्+अ = बालक, फल्+अ = फल, अज्+अ, हस्त्+अ, ज्ञान्+अ, गृह्+अ |
| आकारान्तः शब्दः | जिसके अन्त में ‘आ’ वर्ण हो (प्रायः स्त्रीलिङ्ग) | बालिक्+आ = बालिका, रम्+आ = रमा, लत्+आ = लता |
| ईकारान्तः शब्दः | जिसके अन्त में ‘ई’ वर्ण हो (प्रायः स्त्रीलिङ्ग) | नद्+ई = नदी, लेखन्+ई = लेखनी, घट्+ई = घटी |
2. सर्वनाम-प्रथमैकवचन-रूपाणि
| शब्दः / लिङ्गम् | तद् (प्रथमैकवचन) | एतद् (प्रथमैकवचन) | किम् (प्रथमैकवचन) |
|---|---|---|---|
| पुंलिङ्गम् | सः | एषः | कः |
| स्त्रीलिङ्गम् | सा | एषा | का |
| नपुंसकलिङ्गम् | तत् | एतत् | किम् |
3. परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. गृहजनानां मित्राणां वा साहाय्येन पञ्चदश (१५) गृहवस्तूनां नामानि लिङ्गविभागेन लिखन्तु।
2. अधः के चन व्यावहारिकाः शब्दाः सन्ति। तेषाम् अर्थं शिक्षकस्य साहाय्येन अन्विष्य लिखन्तु।
परियोजना 2 — पृष्ठ 46 की शब्द-सूची: नीचे अध्ययन हेतु सरल अर्थ हैं। कुछ शब्दों के अनेक अर्थ होते हैं; उदाहरण-वाक्य और वस्तु का संदर्भ भी देखें। आधुनिक प्रयोग का अर्थ शिक्षक के स्थानीय प्रयोग से मिला लें।
अकारान्त पुंलिङ्ग
| शब्द | सरल हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| आसन्दः | कुर्सी |
| सुधाखण्डः | चॉक |
| स्यूतः | थैला |
| विद्यालयः | विद्यालय |
| वृक्षः | पेड़ |
| कटः | चटाई |
| तालः | ताला |
| दर्पणः | आईना |
| दीपः | दीपक |
| घटः | घड़ा |
| दण्डदीपः | ट्यूबलाइट |
| गजः | हाथी |
| नागदन्तः | वस्तु टाँगने की दीवार की खूँटी |
| रजकः | धोबी |
| धीवरः | मछुआरा |
| युवकः | युवक |
| प्रश्नः | सवाल |
| शुनकः | कुत्ता |
| आचार्यः | शिक्षक / गुरु |
| खगः | पक्षी |
| सागरः | समुद्र |
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग
| शब्द | सरल हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| फलम् | फल |
| उपनेत्रम् | चश्मा |
| युतकम् | कमीज |
| मन्दिरम् | मन्दिर |
| भवनम् | भवन |
| वातायनम् | खिड़की |
| व्यजनम् | पंखा |
| भोजनम् | भोजन |
| कदलीफलम् | केला |
| पाथेयपात्रम् | यात्रा / भोजन का डिब्बा |
| द्वारम् | दरवाजा |
| वलयम् | कड़ा / चूड़ी |
| उद्यानम् | बगीचा |
| सूच्यौषधम् | इंजेक्शन से दी जाने वाली औषधि |
| उपांशुकम् | आधुनिक वस्त्र-संबन्धी अर्थ की शिक्षक से पुष्टि करें |
| पादांशुकम् | पायजामा / पतलून |
| दिनम् | दिन |
| उत्तरम् | उत्तर / जवाब |
| उष्णीषम् | पगड़ी |
| वस्त्रम् | कपड़ा |
| नगरम् | शहर |
आकारान्त स्त्रीलिङ्ग
| शब्द | सरल हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| बालिका | लड़की |
| महिला | महिला |
| शाटिका | साड़ी |
| पेटिका | डिब्बा |
| पादुका | जूता / चप्पल |
| उत्पीठिका | मेज |
| रोटिका | रोटी |
| स्थालिका | थाली |
| कुञ्चिका | चाबी |
| सूचिका | सुई |
| तूलिका | चित्रकारी का ब्रश |
| मञ्जूषा | सन्दूक / पेटी |
| छुरिका | छुरी |
| गृहगोधिका | घर की छिपकली |
| धूमनलिका | धुएँ की नली |
| दिनदर्शिका | कैलेंडर |
| खट्वा | खाट |
| शाखा | डाली |
| शिक्षिका | अध्यापिका |
| गुलिका | गोली |
| पिपीलिका | चींटी |
ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग
| शब्द | सरल हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| लेखनी | कलम |
| अङ्कनी | पेंसिल |
| दूरवाणी | टेलीफोन |
| कूपी | बोतल |
| द्रोणी | नाँद / हौज / टब जैसा पात्र |
| नदी | नदी |
| घटी | घड़ी |
| नर्तकी | नाचने वाली स्त्री |
| वेणी | चोटी |
| कर्तरी | कैंची |
| गृहिणी | गृहिणी |
| मार्जनी | सफाई की झाड़ू / ब्रश |
| सम्मार्जनी | झाड़ू |
| सखी | सहेली |
| आकाशवाणी | रेडियो / आकाश से वाणी |
| वर्णलेखनी | रंगीन पेंसिल |
| जननी | माँ |
| नारी | स्त्री |
| नगरी | नगरी / शहर |
| पुनःपूरणी | कलम की रिफिल |
| कुमारी | कुमारी / बालिका |
शब्दार्थ सहायता: Monier-Williams: नागदन्त — खूँटी; Monier-Williams: ताल — ताला। उपांशुकम् का सुनिश्चित आधुनिक अर्थ विश्वसनीय संदर्भ में नहीं मिला; शिक्षक से पुष्टि का संकेत दिया गया है।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
1. ‘एषः’ तथा ‘सः’ में क्या अन्तर है?
2. नपुंसकलिङ्ग शब्दों के तीनों वचन एक उदाहरण से समझाइए।
3. प्रश्न पूछते समय ‘कः’, ‘का’ एवं ‘किम्’ का प्रयोग कब होता है?
4. उत्तर में ‘आम्’, ‘न’ तथा ‘तु’ का क्या प्रयोग है?
5. आकारान्त एवं ईकारान्त शब्द किसे कहते हैं? एक-एक उदाहरण दीजिए।
अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
6. तद्, एतद् एवं किम् सर्वनामों के तीनों लिङ्गों एवं तीनों वचनों के रूप सारणी सहित समझाइए।
7. इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है? यह छात्रों के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘बालकः’ का बहुवचन रूप है—
(क) बालकौ
(ख) बालकाः
(ग) बालकानि
(घ) बालके
2. निकट की पुंलिङ्ग वस्तु के लिए कौन-सा सर्वनाम प्रयुक्त होता है?
(क) सः
(ख) एषः
(ग) तत्
(घ) एषा
3. ‘तत् किम्?’ का सही उत्तर हो सकता है—
(क) तत् बालकः
(ख) तत् बालिका
(ग) तत् फलम्
(घ) सः गजः
4. ‘पत्रम्’ का द्विवचन रूप है—
(क) पत्रौ
(ख) पत्राणि
(ग) पत्रे
(घ) पत्राः
5. स्त्रीलिङ्ग के लिए प्रश्नवाचक सर्वनाम है—
(क) कः
(ख) का
(ग) किम्
(घ) के
6. ‘ते बालकाः किं कुर्वन्ति?’ – इसमें क्रियापद किस वचन का है?
(क) एकवचन
(ख) द्विवचन
(ग) बहुवचन
(घ) इनमें से कोई नहीं
7. ‘लता’ शब्द किस प्रकार का है?
(क) अकारान्त पुंलिङ्ग
(ख) आकारान्त स्त्रीलिङ्ग
(ग) ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग
(घ) अकारान्त नपुंसकलिङ्ग
8. ‘एतानि’ किस लिङ्ग एवं वचन का रूप है?
(क) पुंलिङ्ग बहुवचन
(ख) स्त्रीलिङ्ग बहुवचन
(ग) नपुंसकलिङ्ग बहुवचन
(घ) नपुंसकलिङ्ग द्विवचन
9. ‘सः गजः।’ वाक्य का सही प्रश्न है—
(क) सः किम्?
(ख) सः का?
(ग) सः कः?
(घ) तत् किम्?
10. ‘पठति’ क्रिया का बहुवचन रूप है—
(क) पठतः
(ख) पठन्ति
(ग) पठतु
(घ) पठ
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘एषः’ का प्रयोग निकट की पुंलिङ्ग वस्तु के लिए होता है।
कारण (R): ‘एतद्’ सर्वनाम निकटता (this) का बोधक है और पुंलिङ्ग में इसका प्रथमैकवचन रूप ‘एषः’ है।
2. अभिकथन (A): ‘फलम्’ का बहुवचन ‘फलाः’ होता है।
कारण (R): नपुंसकलिङ्ग अकारान्त शब्दों का बहुवचन ‘-आनि’ प्रत्यय से बनता है।
3. अभिकथन (A): प्रश्न करते समय नपुंसकलिङ्ग के लिए ‘किम्’ का प्रयोग होता है।
कारण (R): ‘किम्’ सर्वनाम का पुंलिङ्ग रूप ‘कः’, स्त्रीलिङ्ग रूप ‘का’ तथा नपुंसकलिङ्ग रूप ‘किम्’ है।
4. अभिकथन (A): दो कर्ताओं के साथ क्रिया का द्विवचन रूप (यथा पठतः) प्रयुक्त होता है।
कारण (R): संस्कृत में क्रिया का वचन उसके कर्ता के वचन के अनुसार होता है।
5. अभिकथन (A): ‘लता’ एवं ‘बालिका’ आकारान्त शब्द हैं।
कारण (R): जिन शब्दों के अन्त में ‘आ’ वर्ण होता है, वे आकारान्त कहलाते हैं और प्रायः स्त्रीलिङ्ग होते हैं।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- तद्, एतद् एवं किम् की पूरी सारणी (तीनों लिङ्ग × तीनों वचन) समझकर बोलने और लिखने का अभ्यास करें।
- संज्ञा-शब्दों के तीनों वचन याद रखें – पुंलिङ्ग (-ः, -औ, -आः), स्त्रीलिङ्ग (-आ, -ए, -आः), नपुंसकलिङ्ग (-म्, -ए, -आनि/-आणि)।
- क्रियापद के तीनों रूप (-ति, -तः, -न्ति) कर्ता के वचन से मिलाकर प्रयोग करें।
- प्रश्ननिर्माण में कर्ता के लिङ्ग के अनुसार ही ‘कः / का / किम्’ चुनें।
- निकट के लिए एषः/एषा/एतत् तथा दूर के लिए सः/सा/तत् – यह भेद स्पष्ट रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- नपुंसकलिङ्ग बहुवचन में ‘-आः’ लगा देना (फलाः) – सही रूप ‘फलानि’ है।
- स्त्रीलिङ्ग द्विवचन को ‘-औ’ में बनाना – यहाँ आकारान्त स्त्रीलिङ्ग और अकारान्त नपुंसकलिङ्ग का द्विवचन -ए है (बालिके, पत्रे)। ईकारान्त लेखनी का द्विवचन लेखन्यौ है।
- लिङ्ग के विरुद्ध सर्वनाम का प्रयोग – यथा ‘सा बालकः’ (गलत), शुद्ध ‘सः बालकः’।
- पहचान पूछते समय संज्ञा के लिङ्ग के अनुसार कः / का / किम् चुनें। हाँ–नहीं वाले प्रश्न में किं का प्रयोग किसी भी लिङ्ग के कर्ता के साथ हो सकता है, जैसे किं सः पठति?
- क्रिया-वचन का कर्ता से मेल न करना (यथा – तौ पठन्ति × ; शुद्ध – तौ पठतः &checkmark)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 के पाठ 3 ‘एषः कः? एषा का? एतत् किम्?’ में क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में तद् (सः/सा/तत् – वह), एतद् (एषः/एषा/एतत् – यह) तथा किम् (कः/का/किम् – कौन/क्या) सर्वनामों का तीनों लिङ्गों एवं तीनों वचनों में सही प्रयोग सिखाया गया है, साथ ही संज्ञा एवं क्रियापदों के वचन-रूप भी।
‘एषः’ और ‘सः’ में क्या अन्तर है?
‘एषः’ का अर्थ है ‘यह’ (निकट का पुंलिङ्ग) तथा ‘सः’ का अर्थ है ‘वह’ (दूर का पुंलिङ्ग)। इसी प्रकार एषा/सा (स्त्री) तथा एतत्/तत् (नपुंसक) निकट एवं दूर के लिए प्रयुक्त होते हैं।
प्रश्न पूछते समय ‘कः’, ‘का’ और ‘किम्’ का प्रयोग कब करें?
पुंलिङ्ग शब्द के लिए ‘कः’, स्त्रीलिङ्ग के लिए ‘का’ तथा नपुंसकलिङ्ग शब्द के लिए ‘किम्’ का प्रयोग होता है – यथा सः कः? सा का? तत् किम्?
पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 3, पृष्ठ 31–46; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। प्रश्नों का क्रम पुस्तक के अनुसार है। परियोजना में घरेलू वस्तुओं की सूची नमूना है; अपनी देखी वस्तुओं के नाम लिखें। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।
