Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 9 Solutions — अतिथिदेवो भव
अतिथिदेवो भव कथा में राधिका, बिल्ली और उसके चार बच्चों के बारे में पढ़ें। आठ अभ्यासों के क्रम में उत्तर, पुस्तक के मेज़-चित्र की सही पहचान, स्थानवाचक अव्यय और दो परियोजनाओं का मार्गदर्शन दिया है।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ एवं अन्वय (अर्थ)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- अव्ययपदानि (व्याकरण-तालिका)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 6 का नवाँ पाठ ‘अतिथिदेवो भव’ भारतीय संस्कृति के एक महान आदर्श – अतिथि-सत्कार – पर आधारित एक सरल कथात्मक (गद्य) पाठ है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं तथा अतिथि-सेवा पञ्चमहायज्ञों में सम्मिलित है। पाठ में राधिका नामक बालिका के घर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक) अतिथि के रूप में आते हैं। राधिका उनकी सेवा करती है और मार्जारी को दूध देती है और उनके नाम भी रख देती है – तन्वी, मृद्वी, शबल और भीम। पितामही राधिका को बताती हैं कि अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। पाठ का केन्द्रीय भाव है – सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ भारतीय संस्कृति के मूल्य ‘अतिथिदेवो भव’ (तैत्तिरीय उपनिषद् का प्रसिद्ध वचन) को एक रोचक बाल-कथा के माध्यम से समझाता है। कथा की नायिका राधिका है, जिसके घर की छत पर एक बिल्ली अपने चार बच्चों के साथ आ बसती है। राधिका इन नन्हे मेहमानों की दिन-रात चिन्ता करती है, उन्हें दूध देती है और बड़े स्नेह से उनके साथ व्यवहार करती है। पितामही उसे अतिथि-सेवा का महत्त्व समझाती हैं। इस सरल कथा के साथ पाठ में स्थान-वाचक अव्ययपदों (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, एकत्र आदि) का अभ्यास भी कराया गया है।
मूल पाठ एवं अन्वय (अर्थ)
(NCERT दीपकम् पुस्तक के मूल गद्यांश ज्यों-के-त्यों; साथ में सरल हिन्दी अर्थ।)
सार (Hindi Summary)
‘अतिथिदेवो भव’ पाठ भारतीय संस्कृति के एक श्रेष्ठ आदर्श – अतिथि-सत्कार – को एक प्यारी बाल-कथा के द्वारा प्रस्तुत करता है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि भारतीय संस्कृति में अतिथियों का बहुत महत्त्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – अतिथि को देवता मानो। हमारे देश में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रिय माने जाते हैं और अतिथि-सेवा पाँच महायज्ञों में से एक है।
कथा में राधिका नामक एक बालिका है, जिसके घर की छत पर इन दिनों कुछ नये एवं विशिष्ट अतिथि आए हैं। वे अतिथि हैं – एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावक)। राधिका दिन-रात उनकी चिन्ता करती है और उसका मन छत पर ही लगा रहता है। उसने इन चारों बच्चों के नाम भी रख दिए हैं – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरा) और भीम (कुछ मोटा)। राधिका बिल्ली को दूध पिलाती है और बिल्ली धन्यवाद-भाव से उसे देखती है। राधिका को देखकर शावक डरते नहीं। पितामही राधिका के इन प्यारे कामों को देखकर हँसती हैं।
पितामही राधिका को समझाती हैं कि अतिथि कब आएँ यह हम नहीं जानते, परन्तु जब भी वे आएँ, तब उनकी ऐसी ही सेवा करनी चाहिए। ‘अतिथिदेवो भव’ अर्थात् अतिथि को देव मानकर आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। राधिका दिन भर इस वाक्य को मन्त्र की तरह दोहराती है और प्यार से बिल्ली के बच्चों से भी कहती है कि वे भी ‘अतिथिदेवो भव’ कहें। इस प्रकार यह पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया, प्रेम एवं अतिथि-सत्कार की सुन्दर शिक्षा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कूर्दमाना | कूदती हुई | Jumping (female) |
| नूतनाः | नये | New |
| मिलित्वा | मिलकर | Together |
| अहोरात्रम् | दिन-रात | Day and night |
| छदाः उपरि | छत के ऊपर | On the roof |
| शावकाः | बिल्ली के बच्चे | Kittens |
| मन्दं मन्दम् | धीरे-धीरे | Slowly |
| पृष्ठतः | पीछे-पीछे | From the back |
| कार्यकलापान् | गतिविधियों को | Activities |
| दृष्ट्वा | देखकर | Having seen |
| एतादृशाः / एतादृशी | इस तरह के / इस तरह की | Like this / such |
| स्थापयन्ती | रखती हुई / डालती हुई | Putting / placing |
| किमर्थम् | क्यों / किसलिए | Why / for what |
| आदिनम् | दिन भर | Whole day |
| वारं वारम् | बार-बार | Again and again |
| मार्जारी | बिल्ली | Cat (female) |
| क्षीरम् | दूध | Milk |
| चित्रवर्णः | चितकबरे रंग का | Of varied colour |
| वात्सल्येन | स्नेह से | With affection |
| पितामही | दादी | Grandmother (paternal) |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) राधिका कथं चलति स्म ?
(ख) गृहे कति अतिथयः सन्ति ?
(ग) कां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति ?
(घ) मार्जार्याः कति शावकाः ?
(ङ) राधिका मार्जार्यै किं ददाति ?
(च) चित्रवर्णः कः अस्ति ?
२. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —
(क) मार्जारीशावकानां नामानि कानि ?
(ख) राधिका मार्जारीशावकान् किं पाठयति ?
(ग) विशिष्टाः अतिथयः के ?
(घ) पितामही राधिकां किं वदति ?
(ङ) मार्जारी कदा राधिकायाः पृष्ठतः आगच्छति ?
(च) मार्जार्याः शावकाः कीदृशाः सन्ति ?
३. अधोलिखितानां वाक्यानां प्रश्न-सूचक-वाक्यानि लिखन्तु —
यथा – लेखनी अत्र अस्ति । → लेखनी कुत्र अस्ति ?
| वाक्यम् | प्रश्न-सूचक-वाक्यम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) वृक्षः तत्र अस्ति । | वृक्षः कुत्र अस्ति ? |
| (ख) देवालयः अन्यत्र अस्ति । | देवालयः कुत्र अस्ति ? |
| (ग) वायुः सर्वत्र अस्ति । | वायुः कुत्र अस्ति ? |
| (घ) बालकाः एकत्र तिष्ठन्ति । | बालकाः कुत्र तिष्ठन्ति ? |
| (ङ) माता अत्र अस्ति । | माता कुत्र अस्ति ? |
४. उत्पीठिकायां किम् अस्ति ? किं नास्ति ? इति चित्रं दृष्ट्वा लिखन्तु —
उत्तर पृष्ठ 101 के वास्तविक चित्र के अनुसार हैं। मेज़ पर पुस्तक, बोतल, हरा थैला, संगणक और लाल गेंद हैं; लेखनी, चषक, घड़ी, पेड़ और फल नहीं दिखते।
| अस्ति — दिख रहा है | नास्ति — नहीं दिख रहा |
|---|---|
| उत्पीठिकायां पुस्तकम् अस्ति। | उत्पीठिकायां घटी नास्ति। |
| उत्पीठिकायां कूपी अस्ति। | उत्पीठिकायां लेखनी नास्ति। |
| उत्पीठिकायां स्यूतः अस्ति। | उत्पीठिकायां चषकः नास्ति। |
| उत्पीठिकायां सङ्गणकम् अस्ति। | उत्पीठिकायां वृक्षः नास्ति। |
| उत्पीठिकायां कन्दुकः अस्ति। | उत्पीठिकायां फलम् नास्ति। |
५. रेखाचित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु —
पृष्ठ 102 के शब्द-समूहों के सभी उदाहरण नीचे हैं। यह अव्यय का भाषा-अभ्यास है। सर्वत्र के वाक्य चित्र की सामान्य या भावात्मक कल्पना के अनुसार हैं; पुष्प हर वास्तविक स्थान पर होने का वैज्ञानिक दावा नहीं है। परमेश्वरः सर्वत्र अस्ति पाठ की आस्था का भाव है।
अत्र
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| छात्रः कुत्र अस्ति? | छात्रः अत्र अस्ति। |
| मार्जारः कुत्र अस्ति? | मार्जारः अत्र अस्ति। |
| काकः कुत्र अस्ति? | काकः अत्र अस्ति। |
| दीपकः कुत्र अस्ति? | दीपकः अत्र अस्ति। |
| घटः कुत्र अस्ति? | घटः अत्र अस्ति। |
| सुधाखण्डः कुत्र अस्ति? | सुधाखण्डः अत्र अस्ति। |
| शिक्षकः कुत्र अस्ति? | शिक्षकः अत्र अस्ति। |
| बालिका कुत्र अस्ति? | बालिका अत्र अस्ति। |
| लेखनी कुत्र अस्ति? | लेखनी अत्र अस्ति। |
| माला कुत्र अस्ति? | माला अत्र अस्ति। |
तत्र
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सेवकः कुत्र अस्ति? | सेवकः तत्र अस्ति। |
| विद्यालयः कुत्र अस्ति? | विद्यालयः तत्र अस्ति। |
| गायकः कुत्र अस्ति? | गायकः तत्र अस्ति। |
| घटी कुत्र अस्ति? | घटी तत्र अस्ति। |
| फलम् कुत्र अस्ति? | फलम् तत्र अस्ति। |
| गृहम् कुत्र अस्ति? | गृहम् तत्र अस्ति। |
| वाटिका कुत्र अस्ति? | वाटिका तत्र अस्ति। |
| हरिणः कुत्र अस्ति? | हरिणः तत्र अस्ति। |
| अजः कुत्र अस्ति? | अजः तत्र अस्ति। |
| मूषकः कुत्र अस्ति? | मूषकः तत्र अस्ति। |
सर्वत्र
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| प्रकाशः कुत्र अस्ति? | प्रकाशः सर्वत्र अस्ति। |
| परमेश्वरः कुत्र अस्ति? | परमेश्वरः सर्वत्र अस्ति। |
| ज्ञानम् कुत्र अस्ति? | ज्ञानम् सर्वत्र अस्ति। |
| आकाशः कुत्र अस्ति? | आकाशः सर्वत्र अस्ति। |
| अणवः कुत्र सन्ति? | अणवः सर्वत्र सन्ति। |
| प्रकृतिः कुत्र अस्ति? | प्रकृतिः सर्वत्र अस्ति। |
| पुष्पाणि कुत्र सन्ति? | पुष्पाणि सर्वत्र सन्ति। |
| वायुः कुत्र अस्ति? | वायुः सर्वत्र अस्ति। |
| प्रेम कुत्र अस्ति? | प्रेम सर्वत्र अस्ति। |
अन्यत्र
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| बालकः कुत्र अस्ति? | बालकः अन्यत्र अस्ति। |
| मयूरः कुत्र अस्ति? | मयूरः अन्यत्र अस्ति। |
| मित्रम् कुत्र अस्ति? | मित्रम् अन्यत्र अस्ति। |
| पुत्रः कुत्र अस्ति? | पुत्रः अन्यत्र अस्ति। |
| महिला कुत्र अस्ति? | महिला अन्यत्र अस्ति। |
| सेविका कुत्र अस्ति? | सेविका अन्यत्र अस्ति। |
| चटका कुत्र अस्ति? | चटका अन्यत्र अस्ति। |
| दोला कुत्र अस्ति? | दोला अन्यत्र अस्ति। |
६. भोजनशालायां किं किम् अस्ति ? इति पञ्चभिः वाक्यैः लिखन्तु —
यथा – भोजनशालायां पाचकः अस्ति । (सूचकपदानि – पाचकः, पात्रम्, तण्डुलाः, शाकानि, अग्निः, जलम्)
७. अधोलिखितेभ्यः वाक्येभ्यः अव्ययपदानि चित्वा लिखन्तु —
| वाक्यम् | अव्ययपदम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) अमितः गृहात् बहिः गच्छति । | बहिः |
| (ख) एकः वानरः वृक्षस्य उपरि तिष्ठति । | उपरि |
| (ग) सः फलानि अधः क्षिपति । | अधः |
| (घ) तत्र एकः बिडालः अस्ति । | तत्र |
| (ङ) बिडालः गृहस्य अन्तः प्रविशति । | अन्तः |
८. उदाहरणानुसारं कः कुत्र अस्ति ? कुत्र नास्ति ? इति लिखन्तु ।
यथा – सिंहः वने अस्ति । कार्यालये नास्ति । / छात्रः आकाशे नास्ति । छात्रः विद्यालये अस्ति ।
अभ्यास 8 में भाषा सीखने के सामान्य उदाहरण हैं। चन्द्रमा अमावस्या पर भी रहता है, पर दिखाई नहीं देता; इसलिए वाक्य का आशय उस दिन चन्द्र-दर्शन से है। रविवार का अवकाश नमूना है; वास्तविक विद्यालय का समय अलग हो सकता है।
अव्ययपदानि (व्याकरण-तालिका)
इस पाठ में ‘अव्ययपद’ का परिचय कराया गया है। अव्ययलक्षण है –
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥
अर्थात् जो शब्द तीनों लिङ्गों, सभी विभक्तियों एवं सभी वचनों में समान (अपरिवर्तनीय) रहता है, वह अव्यय कहलाता है। अव्ययपदों में लिङ्ग-भेद, विभक्ति-भेद एवं वचन-भेद नहीं होता; ये सर्वदा एकरूप रहते हैं।
स्थानवाचक एवं प्रमुख अव्ययपद
| अव्ययपदम् | हिन्दी अर्थ | English |
|---|---|---|
| अत्र | यहाँ | Here |
| तत्र | वहाँ | There |
| कुत्र | कहाँ | Where |
| सर्वत्र | सब जगह | Everywhere |
| अन्यत्र | अन्य जगह | Elsewhere |
| एकत्र | एक जगह | At one place |
| उपरि | ऊपर | Above / on |
| अधः | नीचे | Below |
| अन्तः | भीतर | Inside |
| बहिः | बाहर | Outside |
| पुरतः | आगे | In front |
| पृष्ठतः | पीछे | Behind |
उदाहरण – ‘अत्र’ अव्यय एकवचन (अत्र बालकः अस्ति), बहुवचन (अत्र बालकाः सन्ति), पुल्लिङ्ग एवं स्त्रीलिङ्ग सभी में समान रहता है – इसमें वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
पाठ में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत एक मनोरंजक गीत दिया गया है, जिसे सभी मिलकर पढ़ें एवं गाएँ –
अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम् ॥
मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ॥
इस गीत में भी ‘कुत्र, अत्र, तत्र, अन्यत्र’ आदि अव्ययपदों का प्रयोग हुआ है।
पृष्ठ 105 — बिडालः कुत्र अस्ति?
| चित्र का शब्द | हिन्दी अर्थ | नमूना उत्तर |
|---|---|---|
| उपरि | ऊपर | बिडालः उपरि अस्ति। |
| अधः | नीचे | बिडालः अधः अस्ति। |
| कोणे | कोने में | बिडालः कोणे अस्ति। |
| केन्द्रे | बीच में / केन्द्र में | बिडालः केन्द्रे अस्ति। |
| समीपे | पास | बिडालः समीपे अस्ति। |
| दूरे | दूर | बिडालः दूरे अस्ति। |
| अन्तः | भीतर | बिडालः अन्तः अस्ति। |
| बहिः | बाहर | बिडालः बहिः अस्ति। |
| पुरतः | आगे | बिडालः पुरतः अस्ति। |
| पृष्ठतः | पीछे | बिडालः पृष्ठतः अस्ति। |
| दक्षिणतः | दाहिनी ओर | बिडालः दक्षिणतः अस्ति। |
| वामतः | बाईं ओर | बिडालः वामतः अस्ति। |
दक्षिणतः और वामतः में चित्र के बालक की दाहिनी और बाईं दिशा देखें, देखने वाले की नहीं। कोणे और केन्द्रे स्थान बताने वाले सप्तमी-रूप हैं; इन्हें अव्यय की सूची में न जोड़ें।

परियोजनाकार्यम् — दो कार्य
1. नाम और उनके पीछे का विचार — नमूना विमर्श
राधिका ने रूप और गुण देखकर नाम सोचे: तन्वी आकृत्या सुन्दरी, मृद्वी स्पर्शेन कोमला, शबलः चित्रवर्णः और भीमः किञ्चित् स्थूलः। तन्वी का शब्दगत भाव पतली / सुकुमार भी है, पर कथा में विशेषता आकृत्या सुन्दरी कही है।
यह काल्पनिक नमूना है। अपने नाम का प्रमाणित अर्थ और परिवार से ज्ञात नामकरण का कारण लिखें; केवल अनुमान को निश्चित तथ्य न बनाएँ।
2. विद्यालयपरिसर — नमूना वाक्य
अपने विद्यालय के अनुसार अस्ति, सन्ति और नास्ति चुनें। नीचे केवल नमूने हैं।
- विद्यालयपरिसरे वृक्षाः सन्ति।
- विद्यालयपरिसरे क्रीडाङ्गणम् अस्ति।
- विद्यालयपरिसरे पुस्तकालयः अस्ति।
- विद्यालयपरिसरे कक्षाः सन्ति।
- विद्यालयपरिसरे नदी नास्ति।
- विद्यालयपरिसरे पर्वतः नास्ति।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
1. ‘अतिथिदेवो भव’ का क्या अर्थ है और यह कहाँ से लिया गया है?
2. राधिका के घर कौन-से विशिष्ट अतिथि आए थे?
3. राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा किस प्रकार करती है?
4. पितामही ने राधिका को क्या शिक्षा दी?
5. अव्यय किसे कहते हैं? तीन उदाहरण दीजिए।
अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
6. ‘अतिथिदेवो भव’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. राधिका के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
8. अव्यय की पहचान कैसे होती है? पाठ के स्थानवाचक अव्ययों के उदाहरण देकर समझाइए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘अतिथिदेवो भव’ किसका वचन है?
(क) रामायणस्य
(ख) उपनिषदः
(ग) महाभारतस्य
(घ) पुराणस्य
2. राधिका के घर के विशिष्ट अतिथि कौन थे?
(क) नये पड़ोसी
(ख) बिल्ली और उसके चार बच्चे
(ग) कुत्ता और उसके बच्चे
(घ) पक्षी
3. राधिका मार्जारी (बिल्ली) को क्या देती है?
(क) फलम्
(ख) जलम्
(ग) क्षीरम् (दूध)
(घ) ओदनम्
4. मार्जारी के कितने शावक हैं?
(क) द्वौ
(ख) त्रयः
(ग) चत्वारः
(घ) पञ्च
5. निम्नलिखित में से शावक का नाम कौन-सा नहीं है?
(क) तन्वी
(ख) मृद्वी
(ग) शबलः
(घ) राधिका
6. राधिका के कार्यकलापों को देखकर कौन हँसती है?
(क) माता
(ख) पितामही (दादी)
(ग) सखी
(घ) मार्जारी
7. ‘चित्रवर्णः’ (चितकबरे रंग का) शावक कौन है?
(क) तन्वी
(ख) मृद्वी
(ग) शबलः
(घ) भीमः
8. ‘अहोरात्रम्’ शब्द का अर्थ है—
(क) सवेरे
(ख) दिन-रात
(ग) दोपहर
(घ) शाम
9. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द अव्यय है?
(क) बालकः
(ख) सर्वत्र
(ग) मार्जारी
(घ) क्षीरम्
10. अतिथि-सेवा किसमें सम्मिलित है?
(क) षड्दर्शनेषु
(ख) पञ्चमहायज्ञेषु
(ग) चतुर्वेदेषु
(घ) षड्ऋतुषु
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): यह पाठ अतिथि-सत्कार का संदेश देता है।
कारण (R): ‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जो अतिथि को देव मानकर सेवा करने की प्रेरणा देता है।
2. अभिकथन (A): राधिका बिल्ली एवं उसके बच्चों की सेवा करती है।
कारण (R): बिल्ली एवं उसके बच्चे राधिका के घर विशिष्ट अतिथि के रूप में आए हैं।
3. अभिकथन (A): ‘सर्वत्र’ शब्द में वचन-भेद, लिङ्ग-भेद एवं विभक्ति-भेद नहीं होता।
कारण (R): ‘सर्वत्र’ एक संज्ञा-शब्द है, अतः इसके रूप विभक्ति के अनुसार बदलते हैं।
4. अभिकथन (A): शावक राधिका को देखकर डरते नहीं हैं।
कारण (R): राधिका उनके साथ स्नेहपूर्वक व्यवहार करती है। पाठ में दूध पीने वाली मार्जारी है।
5. अभिकथन (A): राधिका ने शावकों के नाम तन्वी, मृद्वी, शबल एवं भीम रखे।
कारण (R): उसने उनके रूप एवं स्वभाव-गुण के अनुसार ये नाम सोचे।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- चारों शावकों के नाम एवं उनकी विशेषताएँ (तन्वी – सुन्दर, मृद्वी – कोमल, शबल – चितकबरा, भीम – मोटा) क्रम से याद रखें।
- शब्दार्थ (कूर्दमाना, अहोरात्रम्, शावकाः, पृष्ठतः, क्षीरम् आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- सभी स्थानवाचक अव्यय (अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, उपरि, अधः, अन्तः, बहिः) याद करें – इनसे प्रश्न प्रायः आते हैं।
- ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें; ‘एकपदेन’ में केवल एक शब्द।
- प्रश्न-निर्माण में स्थानवाचक पद के लिए सही प्रश्नवाचक ‘कुत्र’ का प्रयोग करें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- अव्यय को संज्ञा मानकर उसके विभक्ति-रूप बनाना – अव्यय का रूप कभी नहीं बदलता।
- ‘मार्जारी’ (स्त्रीलिङ्ग) के स्थान पर ‘मार्जारः’ लिख देना।
- ‘अस्ति’ (एकवचन) एवं ‘सन्ति’ (बहुवचन) का प्रयोग गड़बड़ा देना – पञ्च अतिथयः सन्ति।
- शावकों के नाम का लिङ्ग न मिलाना – तन्वी, मृद्वी (स्त्रीलिङ्ग); शबलः, भीमः (पुल्लिङ्ग)।
- ‘अतिथिदेवो भव’ को गलती से महाभारत/रामायण का वचन बताना – यह उपनिषद् का वचन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 6 का पाठ 9 ‘अतिथिदेवो भव’ किस विषय पर है?
यह पाठ भारतीय संस्कृति के आदर्श ‘अतिथि-सत्कार’ पर आधारित है। इसमें राधिका नामक बालिका अपने घर आई बिल्ली और उसके चार बच्चों की प्रेमपूर्वक सेवा करती है। पाठ हमें सब प्राणियों के प्रति दया एवं अतिथि-सत्कार की शिक्षा देता है।
‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ क्या है?
‘अतिथिदेवो भव’ उपनिषद् का वचन है, जिसका अर्थ है – ‘अतिथि को देवता मानो’। अर्थात् अतिथि की देव के समान आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए।
राधिका ने बिल्ली के चार बच्चों के क्या नाम रखे?
राधिका ने उनके रूप एवं स्वभाव के अनुसार नाम रखे – तन्वी (सुन्दर), मृद्वी (कोमल), शबल (चितकबरे रंग का) और भीम (कुछ मोटा)।
पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 9, पृष्ठ 98–105; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। व्याख्याएँ, अतिरिक्त अभ्यास और नमूना परियोजनाएँ ClearStudy के स्वतंत्र अध्ययन-सहायक हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।
