कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 1 – माँ, कह एक कहानी (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 1 ‘माँ, कह एक कहानी’ (कवि – मैथिलीशरण गुप्त) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, संवाद, भाषा की बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 1 रचनाकार: मैथिलीशरण गुप्त विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – मैथिलीशरण गुप्त

मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) हिंदी साहित्य के ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में सर्वविदित हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के चिरगाँव में हुआ था। पंद्रह-सोलह वर्ष की आयु में ही उन्होंने कविता लिखना आरंभ कर दिया था। प्रारंभ में ब्रजभाषा में और फिर खड़ी बोली हिंदी में वे आजीवन लेखन करते रहे। स्वतंत्रता-आंदोलन के समय उनकी रचनाओं ने जन-मन में देशप्रेम की भावना जगाई। उनकी अधिकांश कृतियों में भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय चेतना के स्वर मिलते हैं। साकेत, भारत-भारती तथा यशोधरा उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृतियाँ हैं। प्रस्तुत कविता ‘माँ, कह एक कहानी’ उनकी काव्य-कृति यशोधरा से ली गई एक अंश है, जिसमें माता यशोधरा और उनके पुत्र राहुल के बीच संवाद-शैली में बातचीत प्रस्तुत हुई है।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता माँ (यशोधरा) और बेटे (राहुल) के बीच संवाद के रूप में रची गई है। माँ अपने पुत्र को उसके पिता (सिद्धार्थ) से जुड़ी करुणा एवं न्याय की एक कहानी सुनाती हैं।

“माँ, कह एक कहानी।”
“बेटा, समझ लिया क्या तूने
मुझको अपनी नानी?”
“कहती है मुझसे यह चेटी,
तू मेरी नानी की बेटी!
कह माँ, कह, लेटी ही लेटी,
राजा था या रानी?
राजा था या रानी?
माँ, कह एक कहानी।”

“तू है हठी मानधन मेरे,
सुन, उपवन में बड़े सबेरे,
तात भ्रमण करते थे तेरे,
जहाँ, सुरभि मनमानी।”
“जहाँ सुरभि मनमानी?
हाँ, माँ, यही कहानी।”

“वर्ण वर्ण के फूल खिले थे,
झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे,
हलके झोंके हिले-मिले थे,
लहराता था पानी।”
“लहराता था पानी?
हाँ, हाँ, यही कहानी।”

“गाते थे खग कल कल स्वर से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से,
हुई पक्ष की हानी!”
“हुई पक्ष की हानी?
करुणा-भरी कहानी!”

“चौंक उन्होंने उसे उठाया,
नया जन्म-सा उसने पाया।
इतने में आखेटक आया,
लक्ष्य-सिद्धि का मानी।”
“लक्ष्य-सिद्धि का मानी?
कोमल-कठिन कहानी।”

“माँगा उसने आहत पक्षी,
तेरे तात किंतु थे रक्षी।
तब उसने, जो था खगभक्षी–
हठ करने की ठानी।”
“हठ करने की ठानी?
अब बढ़ चली कहानी।”

“हुआ विवाद सदय-निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्वविषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी।”
“सुनी सभी ने जानी?
व्यापक हुई कहानी।”

“राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”

— मैथिलीशरण गुप्त

भावार्थ

आरंभ: बेटा (राहुल) माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। माँ हँसी में कहती हैं – “क्या तूने मुझे अपनी नानी समझ लिया है?” बालक हठ करता है कि उसे सेविका (चेटी) ने बताया है कि माँ तो नानी की बेटी हैं, इसलिए माँ अवश्य कहानी जानती होंगी; वह बार-बार पूछता है – “राजा था या रानी?” और “माँ, कह एक कहानी।”

उपवन का दृश्य: माँ कहती हैं कि उसके पिता (तात) प्रातःकाल एक सुंदर उपवन में टहलने जाया करते थे, जहाँ चारों ओर मनमानी सुगंध (सुरभि) फैली रहती थी। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें (हिम-बिंदु) झिलमिला रही थीं, हल्की हवा के झोंके बह रहे थे और सरोवर का पानी लहरा रहा था।

घटना: पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। तभी अचानक एक हंस ऊपर से तीखे बाण (खर-शर) से बिंधकर घायल होकर गिर पड़ा – उसके पंख (पक्ष) को हानि पहुँची। यह सुनकर बालक कह उठता है – “करुणा-भरी कहानी!”

विवाद: राहुल के पिता ने चौंककर घायल हंस को उठा लिया, मानो उसे नया जीवन मिल गया। तभी एक आखेटक (शिकारी) आया जो उस हंस को अपना शिकार (लक्ष्य-सिद्धि) मान रहा था। उसने घायल पक्षी माँगा, परंतु पिता रक्षक बनकर उसे बचाने पर अड़े रहे। शिकारी (खगभक्षी) ने भी हठ ठान लिया। दयालु (सदय) और निर्दयी (निर्दय) के बीच विवाद हुआ; दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े थे, अतः बात न्यायालय तक पहुँची और सबने सुनी।

निर्णय: माँ बीच में ही बालक से कहती हैं – “राहुल, तू ही निर्णय कर कि न्याय किसका पक्ष लेगा।” बालक निडर होकर उत्तर देता है – यदि कोई निर्दोष को मारता है, तो दूसरे को उसकी रक्षा करनी ही चाहिए; न्याय सदा रक्षक का पक्ष लेता है, भक्षक (मारने वाले) का नहीं, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है। बालक के इस उत्तर पर माँ प्रसन्न होकर कहती हैं – “तूने कहानी को सचमुच समझ लिया (गुनी कहानी)।”

कविता का सार

‘माँ, कह एक कहानी’ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति यशोधरा से लिया गया एक मार्मिक अंश है। यह कविता संवाद-शैली में रची गई है, जिसमें माता यशोधरा और उनका नन्हा पुत्र राहुल आपस में बातें करते हैं। कविता का आरंभ बालक की उस स्वाभाविक हठ से होता है, जिसमें वह माँ से कहानी सुनाने का बार-बार आग्रह करता है। माँ पहले हँसी में टालती हैं, पर बालक के हठ करने पर वे एक कहानी आरंभ करती हैं। माँ बताती हैं कि राहुल के पिता (सिद्धार्थ) प्रातःकाल एक सुंदर उपवन में भ्रमण करते थे। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं, शीतल हवा बह रही थी और सरोवर का जल लहरा रहा था; पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। इसी मनोरम वातावरण में अचानक एक हंस तीखे बाण से बिंधकर घायल होकर गिर पड़ा। राहुल के पिता ने करुणावश उस घायल पक्षी को उठा लिया और उसे मानो नया जीवन दे दिया। तभी एक शिकारी आ पहुँचा, जो हंस को अपना शिकार मानकर माँगने लगा। पिता ने रक्षक बनकर हंस को लौटाने से मना कर दिया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, अतः यह विवाद न्यायालय तक पहुँच गया और चारों ओर चर्चित हो गया। कहानी के इसी निर्णायक मोड़ पर माँ कहानी को स्वयं पूरा नहीं करतीं, बल्कि राहुल से ही न्याय करने को कहती हैं। बालक निर्भय होकर उत्तर देता है कि जो निर्दोष की रक्षा करता है, न्याय सदा उसी का पक्ष लेता है, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है – भक्षक का नहीं, रक्षक का। बालक का यह विवेकपूर्ण उत्तर सुनकर माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इस प्रकार यह कविता बालमन की सरलता, माँ-बेटे के स्नेह तथा करुणा और न्याय के उच्च मूल्यों को बड़े सहज ढंग से प्रस्तुत करती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
चेटीदासी, सेविका
हठीजिद करने वाला
मानधन(संबोधन) मान करने योग्य, प्यारा पुत्र
तातपिता
उपवनबगीचा, बाग
सुरभिसुगंध, खुशबू
मनमानीजी भरकर फैली हुई
वर्ण वर्णतरह-तरह के रंगों के
हिम-बिंदुओस की बूँदें
झिले थेझिलमिला रहे थे
खगपक्षी
हंसएक सुंदर श्वेत पक्षी
बिद्धबिंधा हुआ, घायल
खर-शरतीखा/तेज़ बाण
पक्षपंख; यहाँ पक्षी का पंख
आखेटकशिकारी
लक्ष्य-सिद्धिनिशाना पूरा होना
आहतघायल, चोट खाया
रक्षीरक्षा करने वाला, रक्षक
खगभक्षीपक्षियों को मारकर खाने वाला
सदयदयालु, दया से भरा
निर्दयनिर्दयी, क्रूर
उभयदोनों
आग्रहीअड़े हुए, हठ करने वाले
निरपराधनिर्दोष, बेकसूर
उबारेबचाए, रक्षा करे
वारेपक्ष ले, साथ दे
बानीवाणी, कथन
गुनीसमझ ली, गुण-दोष पहचान लिया

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?

• राजाओं की कहानियों से उसका मनोरंजन करने के लिए।

• उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।

• उसे परिवार की विरासत और पूर्वजों के बारे में बताने के लिए।

• उसे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी देने के लिए।

उत्तर★ उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।माँ चाहती है कि बालक स्वयं सोच-समझकर यह जान सके कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए; इसीलिए वह कहानी को अंत में पूरा न करके बेटे से ही निर्णय करवाती है, ताकि उसमें विवेक एवं नैतिक समझ विकसित हो।

(2) कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?

• निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।

• पिता की वीरता और साहस पर ध्यान दिलाने के लिए।

• करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।

• मित्रता और निष्ठा के महत्व को उजागर करने के लिए।

उत्तर★ करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए (तथा ★ निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए)।घायल हंस की घटना के माध्यम से कवि एक ओर शिकारी की हिंसा एवं क्रूरता तथा दूसरी ओर रक्षक की करुणा को आमने-सामने रखकर यह संघर्ष दर्शाते हैं कि न्याय किस पक्ष में होना चाहिए।

(3) कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?

• न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।

• निर्णय लेते समय सदैव निडर रहना चाहिए।

• आखेटकों का सदैव विरोध करना चाहिए।

• जानवरों की हर स्थिति में रक्षा करनी चाहिए।

उत्तर★ न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।कहानी के अंत में बालक स्वयं कहता है – “न्याय दया का दानी”, अर्थात् सच्चा न्याय वही है जो दया एवं करुणा से युक्त हो और निर्दोष की रक्षा करने वाले का पक्ष ले।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता के भाव एवं अंतिम पंक्तियों को आधार बनाया – जैसे “न्याय दया का दानी” पंक्ति स्पष्ट करती है कि न्याय करुणा के साथ होना चाहिए।भिन्न उत्तर इसलिए संभव हैं क्योंकि एक ही कहानी से अलग-अलग सीख निकाली जा सकती है; आपस में चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझकर सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

इस कविता में माँ अपने पुत्र को उसके पिता की कहानी सुना रही है। ये माँ, पुत्र और पिता कौन हैं – पात्रों को पहचानकर सुमेलित कीजिए।

पात्रये शब्द किनके लिए आए हैं
1. बेटासिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल
2. माँयशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी
3. तात (पिता)सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए
सही मिलान1. बेटा → सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल2. माँ → यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी3. तात (पिता) → सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “कोई निरपराध को मारे, / तो क्यों अन्य उसे न उबारे? / रक्षक पर भक्षक को वारे, / न्याय दया का दानी!”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में बालक राहुल अपना विचार प्रकट करता है कि यदि कोई किसी निर्दोष (निरपराध) को मारता है, तो दूसरे व्यक्ति को उसकी रक्षा अवश्य करनी चाहिए।सच्चा न्याय मारने वाले (भक्षक) का नहीं, बल्कि बचाने वाले (रक्षक) का पक्ष लेता है, क्योंकि न्याय दया से युक्त होता है। तात्पर्य यह कि न्याय और करुणा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

(ख) “हुआ विवाद सदय-निर्दय में, / उभय आग्रही थे स्वविषय में, / गई बात तब न्यायालय में, / सुनी सभी ने जानी।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में दयालु (सदय) व्यक्ति अर्थात् राहुल के पिता और निर्दयी (निर्दय) शिकारी के बीच विवाद का वर्णन है। दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े (आग्रही) हुए थे।जब आपस में निर्णय न हो सका, तो यह विवाद न्यायालय तक पहुँच गया और इसे सभी ने सुना तथा जाना। इससे पता चलता है कि किसी विवाद का उचित समाधान न्याय की प्रक्रिया से ही होना चाहिए।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?

उत्तर (नमूना)मेरे विचार से सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है – “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”यह पंक्ति इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पूरी कविता का केंद्रीय संदेश छिपा है – सच्चा न्याय वही है जो दया से युक्त हो और निर्दोष की रक्षा करने वाले का पक्ष ले, न कि मारने वाले का।

(ख) आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?

उत्तरआखेटक (शिकारी) ने हंस को बाण मारकर घायल किया था और वह उसे अपना शिकार मानकर माँग रहा था।दूसरी ओर बच्चे के पिता ने घायल हंस को उठाकर उसकी रक्षा की थी और उसे रक्षक होने के नाते लौटाने से मना कर दिया। इसी कारण – एक हंस को मारने पर अड़ा था और दूसरा बचाने पर – दोनों के बीच तर्क-वितर्क हुआ।

(ग) माँ ने पुत्र से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?

उत्तरमाँ चाहती थी कि उसका पुत्र स्वयं सोच-समझकर सही और गलत में अंतर कर सके तथा उसमें न्याय एवं विवेक की समझ विकसित हो।इसलिए माँ ने कहानी को स्वयं पूरा न करके बालक से ही निर्णय करवाया, ताकि वह अपने तर्क से सही निष्कर्ष तक पहुँचे और आत्मविश्वास के साथ निडर होकर अपना मत प्रकट करना सीखे।

(घ) यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?

उत्तर (नमूना)यदि मैं उपवन में होता तो सबसे पहले घायल हंस को सावधानी से उठाकर उसके घाव की देखभाल करता, उसका बाण निकलवाकर किसी पशु-चिकित्सक के पास ले जाता और उसके स्वस्थ होने तक उसकी रक्षा करता।मेरे अनुसार न्याय यही होगा कि हंस उसी को सौंपा जाए जो उसकी रक्षा कर सके, क्योंकि निर्दोष पक्षी को मारने का अधिकार किसी को नहीं। न्याय सदा बचाने वाले के पक्ष में, दया के साथ किया जाना चाहिए।

(ङ) कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तरबातचीत से पता चलता है कि बेटा (राहुल) जिज्ञासु, हठी एवं सरल स्वभाव का है, उसे कहानी सुनने का बहुत शौक है और वह विवेकशील भी है – वह सही-गलत का निर्णय स्वयं कर सकता है।माँ (यशोधरा) स्नेहमयी, धैर्यवान एवं समझदार है। वह बेटे को केवल मनोरंजन के लिए कहानी नहीं सुनाती, बल्कि उसमें मूल्यों एवं विवेक की समझ विकसित करना चाहती है। दोनों के बीच गहरा स्नेह एवं अपनापन झलकता है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?

उत्तर (नमूना)यदि मैं यह कहानी सुना रहा होता, तो न्यायालय के दृश्य को विस्तार से बढ़ाता – न्यायाधीश दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनते; शिकारी कहता कि बाण उसी ने चलाया था इसलिए हंस उसका है, और पिता कहते कि जिसने उसे नया जीवन दिया, हंस पर उसी का अधिकार है।अंत में न्यायाधीश यह निर्णय देते कि जीवन देने वाले का अधिकार जीवन लेने वाले से बड़ा होता है, इसलिए हंस रक्षक (पिता) को सौंप दिया जाए – इस प्रकार करुणा एवं न्याय की विजय दिखाता।

(ख) मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?

उत्तर (नमूना)हंस: “मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुमने मुझे तीर मारा? मैं तो आकाश में स्वतंत्र उड़ रहा था और अपने जीवन का आनंद ले रहा था।”शिकारी: “मैं तो शिकार करता हूँ, यही मेरा काम है; इसी से मेरा पेट भरता है।”हंस: “अपना पेट भरने के लिए किसी निर्दोष का प्राण लेना अन्याय है। हर प्राणी को जीने का समान अधिकार है। तुम्हें दया एवं करुणा से काम लेना चाहिए।” (यह कल्पना-आधारित संवाद है, अपने शब्दों में और भी बढ़ाया जा सकता है।)

(ग) मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों? (तीर चलाने वाला / पक्षी / पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति / न्यायाधीश / कोई अन्य पात्र)

उत्तर (नमूना)मैं ‘पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति’ बनना चाहूँगा।क्योंकि किसी निर्दोष एवं असहाय प्राणी की रक्षा करना सबसे बड़ा एवं पुण्य का कार्य है। ऐसा करने से मुझे करुणा, साहस एवं भलाई का अवसर मिलेगा और मैं दूसरों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर सकूँगा। (आप न्यायाधीश आदि कोई अन्य पात्र भी कारण सहित चुन सकते हैं।)

संवाद

इस कविता में माँ और पुत्र का संवाद दिया गया है, परंतु कौन-सा कथन किसने कहा, यह नहीं बताया गया। नीचे कुछ कथनों को पहचानकर सही स्थान पर रखा गया है।

पुत्र द्वारा कहे गए कथनमाँ द्वारा कहे गए कथन
1. “माँ, कह एक कहानी।”1. “बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”
2. “हाँ, माँ, यही कहानी।”2. “तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे…”
3. “करुणा-भरी कहानी!”3. “गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से…”
4. “कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?”4. “राहुल, तू निर्णय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है किसका?”
संकेतमाँ की पंक्तियाँ प्रायः कहानी सुनाती (वर्णनात्मक) हैं, जबकि पुत्र की पंक्तियाँ प्रश्न पूछती या प्रतिक्रिया देती (जिज्ञासु) हैं। उद्धरण-चिह्नों एवं भाव से पहचाना जा सकता है कि कौन-सा कथन किसका है।

शब्द से जुड़े शब्द / पंक्ति से पंक्ति

शब्द से जुड़े शब्द

रिक्त स्थानों में प्रकृति से जुड़े शब्द कविता में से चुनकर लिखिए।

उत्तरकविता में आए प्रकृति से जुड़े शब्द हैं – उपवन, फूल, हिम-बिंदु (ओस), झोंके (हवा), पानी, खग (पक्षी), हंस, सुरभि (सुगंध)।इन शब्दों से कविता में सुंदर एवं सजीव प्राकृतिक वातावरण का चित्र बनता है।

पंक्ति से पंक्ति

स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दिए गए उनके अर्थ से मिलाइए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (अर्थ)
1. कहती है मुझसे यह चेटीयह सेविका मुझसे यह कहती है।
2. तू है हठी मानधन मेरेहे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है।
3. झलमल कर हिम-बिंदु झिले थेहिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं।
4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर सेतेज़ धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया।
5. हुआ विवाद सदय-निर्दय मेंदयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ।
6. कह दे निर्भय, जय हो जिसका।तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए।
7. तूने गुनी कहानी।तूने कहानी को समझ लिया है।
8. उभय आग्रही थे स्वविषय मेंदोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे।
9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी।तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया।
10. रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!न्याय में दया सम्मिलित होती है; न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है।
सही मिलान1→यह सेविका मुझसे यह कहती है।   2→हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है।   3→ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं।   4→तेज़ तीर से घायल होकर गिर गया।   5→दयालु और निर्दयी में झगड़ा हुआ।6→बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए।   7→तूने कहानी समझ ली है।   8→दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े थे।   9→तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय किया।   10→न्याय बचाने वाले का पक्ष लेता है, दया से युक्त होता है।

कविता की रचना / रूप बदलकर / विराम चिह्न

कविता की रचना

“राजा था या रानी? / राजा था या रानी? / माँ, कह एक कहानी।” – इन पंक्तियों की तरह पूरी कविता में अनेक स्थानों पर कुछ पंक्तियाँ दो बार आई हैं।

(क) इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तरसंवादात्मक शैली: पूरी कविता माँ और बेटे के संवाद के रूप में रची गई है।पंक्तियों की पुनरावृत्ति: कई पंक्तियाँ दो बार आई हैं, जिससे बातचीत स्पष्ट होती है और कविता का सौंदर्य बढ़ता है।तुकांत एवं लय: कहानी-नानी, रानी-कहानी जैसे तुकांत शब्दों से कविता में मधुर लय है। वर्णनात्मक शैली: उपवन एवं प्रकृति का सुंदर वर्णन है। साथ ही प्रश्न-उत्तर शैली एवं अनुप्रास (कल कल, हिले-मिले) का सुंदर प्रयोग है।

(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये दिखाई देती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।

उत्तर (मिलान)संवाद दिए गए हैं → “बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”अंतिम शब्द की ध्वनि मिलती-जुलती है (तुक) → “कहती है मुझसे यह चेटी, / तू मेरी नानी की बेटी!”कुछ शब्द दो बार साथ-साथ आए हैं → “गाते थे खग कल कल स्वर से” (कल कल)विपरीतार्थक शब्द साथ-साथ आए हैं → “हुआ विवाद सदय-निर्दय में” / “कोमल-कठिन कहानी”प्रकृति का वर्णन है → “वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, / झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे…”एक ही वर्ण से शुरू होने वाले शब्द एक पंक्ति में (अनुप्रास) → “हलके झोंके हिले-मिले थे”प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं → “राजा था या रानी? / हाँ, माँ, यही कहानी।”शब्द की वर्तनी बदलकर प्रयोग → “हुई पक्ष की हानी।”

रूप बदलकर

“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, / तात भ्रमण करते थे तेरे,” इन पंक्तियों को गद्य रूप में बदलकर लिखिए। (उदाहरण – “सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे…”)

उत्तर (नमूना)एक पद का अनुच्छेद रूप: “सुनो बेटा! एक सुंदर उपवन था, जहाँ चारों ओर मनभावन सुगंध फैली रहती थी। उसमें तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। फूलों एवं पत्तियों पर ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। हल्की-हल्की हवा के झोंके बह रहे थे और पास के सरोवर का पानी लहरा रहा था। ऐसे ही मनोरम उपवन में तुम्हारे पिता प्रतिदिन प्रातःकाल भ्रमण किया करते थे।”

कविता में विराम चिह्न

नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए।

उत्तर“राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!
न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
यहाँ अल्प विराम ( , ), पूर्ण विराम ( । ), प्रश्नवाचक ( ? ), विस्मयादिबोधक ( ! ) तथा उद्धरण ( “ ” ) चिह्नों का प्रयोग हुआ है।

पाठ से आगे (आपकी बात आदि)

आपकी बात

(क) “सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,” – आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं? और क्यों?

उत्तर (नमूना)हम प्रायः प्रातःकाल पास के पार्क, बगीचे या नदी-किनारे भ्रमण के लिए जाते हैं। कभी-कभी छुट्टियों में पहाड़ी स्थलों या उद्यानों में भी घूमने जाते हैं।भ्रमण से शरीर स्वस्थ रहता है, मन प्रसन्न होता है, शुद्ध वायु मिलती है तथा प्रकृति की सुंदरता का आनंद मिलता है – इसीलिए हमें भ्रमण अच्छा लगता है।

(ख) इस पाठ में एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?

उत्तर (नमूना)मैं प्रायः अपनी माँ, दादी-नानी एवं शिक्षकों से कहानियाँ सुनता हूँ। दादी-नानी से प्रायः लोककथाएँ एवं नीति-कथाएँ सुनने को मिलती हैं।मैं अपने छोटे भाई-बहनों एवं मित्रों को पंचतंत्र, अकबर-बीरबल एवं प्रेरक नीति-कथाएँ सुनाता हूँ, जिनसे उन्हें कोई अच्छी सीख भी मिल जाती है।

(ग) माँ ने कहानी सुनाने के बीच में एक प्रश्न पूछ लिया था। क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?

उत्तरहाँ, कहानी के बीच सोच-समझकर प्रश्न पूछना सही है, क्योंकि इससे सुनने वाले की रुचि एवं ध्यान बना रहता है और वह कहानी से जुड़ा रहता है।प्रश्न पूछने से सुनने वाला केवल चुपचाप सुनता नहीं, बल्कि स्वयं भी सोचता एवं समझता है। माँ ने भी राहुल से प्रश्न इसीलिए पूछा ताकि उसमें विवेक एवं निर्णय-शक्ति विकसित हो।

(घ) कविता में बालक अपनी माँ से बार-बार ‘वही’ कहानी सुनने की हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्यों?

उत्तर (नमूना)हाँ, मुझे भी कुछ कहानियाँ बार-बार सुनने का मन करता है, जैसे – ‘एकता में बल’, ‘खरगोश और कछुआ’ अथवा दादी से सुनी कोई लोककथा।ये कहानियाँ मुझे इसलिए बार-बार अच्छी लगती हैं क्योंकि इनमें रोचकता के साथ कोई अच्छी सीख छिपी होती है, और हर बार सुनने पर मन को सुख एवं नया उत्साह मिलता है।

निर्णय करें

“राहुल, तू निर्णय कर इसका–” नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। बताइए कि इन स्थितियों में आप क्या करेंगे?

उत्तर (मार्गदर्शन)1. मित्र ने भूल से नियम तोड़ा: उसे शांति से समझाऊँगा कि उसने नियम तोड़ा है; चूँकि यह भूल थी, अतः उसे एक अवसर और दूँगा।2. सहपाठी को चिढ़ाया जा रहा है: चिढ़ाने वालों को रोकूँगा एवं सहपाठी का साथ दूँगा; आवश्यकता हो तो शिक्षक को बताऊँगा।3. परियोजना में सहपाठी अपना भाग नहीं कर रहा: उससे बात करके कारण जानूँगा और उसे प्रोत्साहित कर सहयोग दूँगा ताकि वह अपना कार्य पूरा कर सके।4. दो मित्रों में छोटी बात पर तर्क-वितर्क: दोनों की बात सुनकर बीच-बचाव कराऊँगा और शांति से समझौता करवाऊँगा।5. किसी को अनुचित रूप से दंडित किया जा रहा है: निडर होकर सच बताऊँगा कि उसने वह कार्य नहीं किया, ताकि उसे अन्याय से बचाया जा सके।6. सहपाठी हार पर उदास है: उसे सांत्वना दूँगा एवं समझाऊँगा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, अगली बार प्रयास से सफलता मिलेगी।7. सहपाठी संकोचवश बोल नहीं पा रहा: उसे प्रोत्साहित करूँगा एवं अपना अवसर देकर उसे बोलने का मौका दिलाऊँगा।8. सहपाठी सहायता माँगता है: जो भी सहायता संभव होगी, सहर्ष करूँगा और उसे विषय समझने में मदद दूँगा।

सुनी कहानी

अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए।

उत्तर (गतिविधि)यह रचनात्मक गतिविधि है। अपने दादा-दादी, नाना-नानी या बड़ों से सुनी कोई लोककथा (जैसे – ‘चतुर कौआ’, ‘ईमानदार लकड़हारा’ या क्षेत्रीय लोककथा) अपनी भाषा में लिखकर कक्षा में सुनाएँ।सभी समूहों की लोककथाओं को मिलाकर एक पुस्तिका बनाई जा सकती है और कक्षा के पुस्तकालय में रखी जा सकती है।

आज की पहेली

नीचे दी गई पहेलियों के उत्तर कविता में से मिलेंगे। पहेलियाँ बूझिए।

उत्तरपहेली 1 (नानी की बेटी, मामा की बहन, पिता की भार्या, चाचा की भाभी) – उत्तर: माँ।पहेली 2 (आसमान में उड़ता, तरह-तरह के गाने गाता, पंख फैलाकर सैर करता, दो पंख व दो पैर) – उत्तर: पक्षी / हंस।पहेली 3 (बागों में सुगंध फैलाती, फूल-फूल में बसती, हवा में घुल-मिल जाती) – उत्तर: सुगंध (सुरभि)।

खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)पाठ में दी गई इंटरनेट कड़ियों (NCERT OFFICIAL एवं प्रसार भारती के यूट्यूब वीडियो) से ‘माँ, कह एक कहानी’ का सस्वर पाठ तथा मैथिलीशरण गुप्त की अन्य कविताएँ सुनी एवं देखी जा सकती हैं।इनसे कविता का भाव एवं लय और अच्छी तरह समझ में आते हैं। (किसी भी वेबसाइट का उपयोग बड़ों की देखरेख में करें।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता किस काव्य-कृति से ली गई है और इसके रचयिता कौन हैं?

उत्तरयह कविता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध काव्य-कृति यशोधरा से ली गई एक अंश है। इसमें माता यशोधरा और उनके पुत्र राहुल के बीच संवाद-शैली में करुणा एवं न्याय की कहानी प्रस्तुत हुई है।

2. उपवन का दृश्य कविता में किस प्रकार चित्रित हुआ है?

उत्तरउपवन में चारों ओर मनभावन सुगंध फैली थी, रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं, हल्की हवा के झोंके बह रहे थे, सरोवर का पानी लहरा रहा था और पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे – यह एक सुंदर एवं सजीव प्राकृतिक दृश्य है।

3. घायल हंस को लेकर पिता और शिकारी के बीच विवाद क्यों हुआ?

उत्तरशिकारी ने हंस को बाण मारकर घायल किया था, इसलिए वह उसे अपना शिकार मानकर माँग रहा था। दूसरी ओर पिता ने घायल हंस को बचाया था, इसलिए वे रक्षक होने के नाते उसे लौटाने को तैयार नहीं थे – इसी कारण दोनों में विवाद हुआ।

4. बालक राहुल ने न्याय के विषय में क्या उत्तर दिया?

उत्तरराहुल ने निडर होकर कहा कि यदि कोई निर्दोष को मारता है तो दूसरे को उसकी रक्षा करनी चाहिए। न्याय सदा मारने वाले (भक्षक) का नहीं, बल्कि बचाने वाले (रक्षक) का पक्ष लेता है, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है।

5. माँ ने कहानी का निर्णय स्वयं न करके बेटे से क्यों करवाया?

उत्तरमाँ चाहती थी कि उसके पुत्र में सही-गलत पहचानने का विवेक एवं स्वतंत्र निर्णय-शक्ति विकसित हो। इसीलिए उसने कहानी को अधूरा छोड़कर बेटे से ही निर्णय करवाया, ताकि वह अपने तर्क से सही निष्कर्ष तक पहुँच सके।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरयह कविता माँ-बेटे के स्नेहपूर्ण संवाद के माध्यम से करुणा एवं न्याय का उच्च संदेश देती है। नन्हा राहुल माँ से कहानी सुनाने की हठ करता है और माँ उसे उसके पिता से जुड़ी एक कहानी सुनाती है। एक सुंदर उपवन में एक हंस शिकारी के बाण से घायल हो जाता है; पिता उसे बचा लेते हैं, पर शिकारी उसे अपना शिकार मानकर माँगता है।विवाद न्यायालय तक पहुँचता है। कहानी के अंत में माँ बेटे से ही निर्णय करवाती है। बालक कहता है कि न्याय सदा रक्षक का पक्ष लेता है, भक्षक का नहीं, क्योंकि न्याय दया से युक्त होता है। इस प्रकार कविता बालमन की सरलता के साथ यह सिखाती है कि सच्चा न्याय करुणा से जुड़ा होता है और निर्दोष की रक्षा करना ही धर्म है।

7. इस कविता की संवाद-शैली एवं भाषा-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।

उत्तरयह संपूर्ण कविता माँ और पुत्र के संवाद के रूप में रची गई है, इसलिए इसे ‘संवादात्मक शैली’ की रचना कहा जाता है। प्रश्न-उत्तर के क्रम में कहानी आगे बढ़ती है, जिससे पाठक को माँ-बेटे की बातचीत सहज ही समझ में आ जाती है। कई पंक्तियों की पुनरावृत्ति (जैसे ‘राजा था या रानी?’) से कविता में लय एवं प्रभाव बढ़ता है।भाषा सरल, मधुर एवं भावपूर्ण है। कहानी-नानी-रानी जैसे तुकांत शब्दों से गेयता आई है; ‘कल कल’, ‘हिले-मिले’ जैसे शब्दों में अनुप्रास का सौंदर्य है; और उपवन का सजीव वर्णन वर्णनात्मक शैली का सुंदर उदाहरण है। इस प्रकार सरल भाषा, संवाद, पुनरावृत्ति एवं प्रकृति-चित्रण से कविता अत्यंत प्रभावशाली बन गई है।

8. कविता के आधार पर ‘सच्चे न्याय’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

उत्तरकविता के अनुसार सच्चा न्याय केवल नियमों के अनुसार निर्णय देना नहीं, बल्कि दया एवं करुणा से युक्त निर्णय है। बालक राहुल स्पष्ट कहता है – “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!” अर्थात् न्याय सदा रक्षा करने वाले का पक्ष लेता है, मारने वाले का नहीं।इसका भाव यह है कि किसी निर्दोष को हानि पहुँचाना अन्याय है और उसकी रक्षा करना धर्म। जहाँ करुणा नहीं, वहाँ सच्चा न्याय भी नहीं हो सकता। इसलिए न्याय करते समय केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि दया, मानवता एवं निर्दोष के जीवन का मूल्य भी ध्यान में रखना चाहिए। यही इस कविता का सबसे बड़ा एवं सार्वकालिक संदेश है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सूरदास

(ख) मैथिलीशरण गुप्त

(ग) सुमित्रानंदन पंत

(घ) रामधारी सिंह दिनकर

उत्तर(ख) मैथिलीशरण गुप्त।

2. यह कविता मैथिलीशरण गुप्त की किस काव्य-कृति से ली गई है?

(क) साकेत

(ख) भारत-भारती

(ग) यशोधरा

(घ) पंचवटी

उत्तर(ग) यशोधरा।

3. कविता में माँ किसके बीच की कहानी सुना रही है?

(क) राजा और रानी

(ख) हंस और मोर

(ग) रक्षक पिता और शिकारी (आखेटक)

(घ) नानी और बेटी

उत्तर(ग) रक्षक पिता और शिकारी (आखेटक)।

4. ‘चेटी’ शब्द का अर्थ है—

(क) रानी

(ख) दासी/सेविका

(ग) बहन

(घ) माँ

उत्तर(ख) दासी/सेविका।

5. उपवन में अचानक क्या घटना घटी?

(क) एक हंस बाण से घायल होकर गिर पड़ा

(ख) तेज़ वर्षा होने लगी

(ग) एक राजा आ पहुँचा

(घ) फूल मुरझा गए

उत्तर(क) एक हंस बाण से घायल होकर गिर पड़ा।

6. घायल हंस को सबसे पहले किसने उठाया?

(क) शिकारी ने

(ख) माँ ने

(ग) राहुल ने

(घ) राहुल के पिता (तात) ने

उत्तर(घ) राहुल के पिता (तात) ने।

7. ‘आखेटक’ का अर्थ है—

(क) माली

(ख) शिकारी

(ग) न्यायाधीश

(घ) सैनिक

उत्तर(ख) शिकारी।

8. विवाद का निपटारा अंततः कहाँ पहुँचा?

(क) राजा के दरबार में

(ख) न्यायालय में

(ग) उपवन में

(घ) विद्यालय में

उत्तर(ख) न्यायालय में।

9. बालक राहुल के अनुसार न्याय किसका पक्ष लेता है?

(क) मारने वाले (भक्षक) का

(ख) बचाने वाले (रक्षक) का

(ग) धनी व्यक्ति का

(घ) बलवान का

उत्तर(ख) बचाने वाले (रक्षक) का।

10. इस कविता की प्रमुख शैली कौन-सी है?

(क) हास्य शैली

(ख) संवादात्मक शैली

(ग) पत्र शैली

(घ) आत्मकथा शैली

उत्तर(ख) संवादात्मक शैली।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ग), 4-(ख), 5-(क), 6-(घ), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बालक राहुल माँ से बार-बार कहानी सुनाने की हठ करता है।

कारण (R): राहुल जिज्ञासु एवं सरल स्वभाव का बालक है, जिसे कहानी सुनने का बहुत शौक है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): माँ ने कहानी का अंत स्वयं न करके राहुल से निर्णय करवाया।

कारण (R): माँ बालक में सही-गलत पहचानने का विवेक एवं निर्णय-शक्ति विकसित करना चाहती थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): कविता के अनुसार न्याय सदा मारने वाले का पक्ष लेता है।

कारण (R): बालक कहता है “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।”

उत्तर(घ) A गलत है (न्याय बचाने वाले/रक्षक का पक्ष लेता है, मारने वाले का नहीं), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): राहुल के पिता ने घायल हंस की रक्षा की।

कारण (R): शिकारी ने हंस को बाण से घायल किया था और वह उसे अपना शिकार मान रहा था।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं करता – पिता ने हंस की रक्षा करुणावश की, न कि केवल इसलिए कि शिकारी उसे माँग रहा था।

5. अभिकथन (A): ‘माँ, कह एक कहानी’ संवादात्मक शैली की कविता है।

कारण (R): यह कविता पूरी तरह माँ और पुत्र की आपसी बातचीत के रूप में रची गई है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • कविता संवाद-शैली में है – उत्तर लिखते समय यह अवश्य लिखें कि कौन-सी पंक्ति माँ की है और कौन-सी राहुल की।
  • केंद्रीय भाव से जुड़ी पंक्ति “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी” याद रखें – यह प्रायः पूछी जाती है।
  • पात्र-परिचय याद रखें: माँ = यशोधरा, बेटा = राहुल, तात = सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध)।
  • कठिन शब्दों (चेटी, खग, बिद्ध, खर-शर, सदय, निर्दय, उभय) के अर्थ रटें; ये शब्दार्थ एवं MCQ में आते हैं।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

  • कवि को ‘सूरदास’ या ‘तुलसीदास’ न लिखें – इस कविता के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं।
  • ‘तात’ का अर्थ ‘चाचा’ नहीं, बल्कि ‘पिता’ है।
  • न्याय का पक्ष भक्षक (शिकारी) की ओर न बताएँ – बालक के अनुसार न्याय रक्षक के पक्ष में है।
  • देवनागरी वर्तनी सावधानी से लिखें – जैसे बिद्ध, खर-शर, सुरभि, निरपराध आदि।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘माँ, कह एक कहानी’ कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) हैं। यह कविता उनकी काव्य-कृति ‘यशोधरा’ से ली गई है।

कविता में माँ, बेटा और पिता कौन हैं?

माँ यशोधरा हैं, बेटा राहुल है तथा पिता (तात) सिद्धार्थ हैं, जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए।

कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा न्याय दया एवं करुणा से युक्त होता है तथा न्याय सदा निर्दोष की रक्षा करने वाले (रक्षक) का पक्ष लेता है, मारने वाले (भक्षक) का नहीं।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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