कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 2 – तीन बुद्धिमान (लोककथा) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 2 ‘तीन बुद्धिमान’ (एक लोककथा) का पूरा समाधान देता है – कहानी का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, अनुमान और कल्पना से, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर। साथ में अतिरिक्त प्रश्न, 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) तथा अभिकथन-कारण भी दिए गए हैं।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 2 रचनाकार: लोककथा (अज्ञात) विधा: कहानी (लोककथा) सत्र: 2026–27

लोककथा के विषय में

‘तीन बुद्धिमान’ एक रोचक लोककथा है। लोककथाएँ वे कहानियाँ हैं जो किसी एक लेखक की रचना न होकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप में आगे बढ़ती रही हैं और अंत में लिखित रूप में संकलित कर ली गई हैं; इसी कारण इनका कोई एक निश्चित रचनाकार नहीं होता। इस लोककथा में एक निर्धन पिता अपने तीन बेटों को धन-दौलत के स्थान पर पैनी दृष्टि (अवलोकन-शक्ति) तथा तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करने की सीख देता है। पिता के बाद तीनों भाई अपने अवलोकन एवं तार्किक सोच के बल पर बिना ऊँट को देखे ही उसके विषय में सब-कुछ बता देते हैं और अंततः अपनी निर्दोषता सिद्ध कर राजा के दरबार में सम्मान पाते हैं। यह कथा हमें ध्यानपूर्वक देखने, सुनने तथा तर्क से सोचने का महत्त्व सिखाती है।

पाठ का सार

किसी समय एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। उसके पास न रुपया-पैसा था और न सोना-चाँदी, इसलिए वह सदा अपने बेटों को समझाता था कि वे एक दूसरे प्रकार का धन संचित करें – हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने-जानने का प्रयास करें, ताकि कोई बात उनकी दृष्टि से न बच पाए। उसने कहा कि रुपये-पैसे के स्थान पर उनके पास पैनी दृष्टि और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी, तो उन्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी।

पिता के देहांत के बाद तीनों भाई जीविका की खोज में यात्रा पर निकल पड़े। वीरान घाटियों और ऊँचे पहाड़ों को पार करते हुए वे चालीस दिन तक चलते रहे। थककर, पैरों में छाले लिए वे अंततः एक बड़े नगर के निकट पहुँचे। नगर के पास पहुँचते ही सबसे बड़े भाई ने धरती देखकर कहा कि यहाँ से थोड़ी देर पहले एक बहुत बड़ा ऊँट गुज़रा है; मँझले भाई ने कहा कि वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता; और सबसे छोटे भाई ने बताया कि उस पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।

कुछ ही देर में एक घुड़सवार उनके पास से निकला, जो अपना खोया ऊँट ढूँढ़ रहा था। जब भाइयों ने ऊँट के सारे लक्षण ठीक-ठीक बता दिए तो घुड़सवार को शक हुआ कि उन्होंने ही ऊँट चुराया है और उसकी पत्नी-बेटे को मार डाला है। वह उन्हें राजा के पास ले गया। राजा ने पहले तो भाइयों को चोर मानकर डाँटा, पर भाइयों ने शांति से कहा कि उन्होंने ऊँट देखा तक नहीं; उन्होंने तो केवल अपनी पैनी दृष्टि और बुद्धि से अनुमान लगाया था।

राजा ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक पेटी मँगवाई। तीनों भाइयों ने ध्यान से देखा कि पेटी कैसे लाई और रखी गई। बड़े भाई ने बताया कि पेटी में कोई छोटी-सी गोल वस्तु है, मँझले ने कहा कि वह अनार है और छोटे ने कहा कि वह कच्चा है। पेटी खुलने पर सचमुच कच्चा अनार निकला। राजा चकित रह गया। भाइयों ने समझाया कि उन्होंने पैरों के चिह्नों, चरी हुई घास, रेत के निशानों और ध्वनि-गंध के आधार पर सब अनुमान लगाए थे। राजा ने उनकी निर्दोषता मानी, उनका आदर-सत्कार किया और प्रशंसा करते हुए कहा कि भले ही उनके पास सांसारिक धन न हो, पर उनके पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है। उसने तीनों को अपने दरबार में रख लिया।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
निर्धनगरीब, धनहीन
संचित करनाइकट्ठा करना, जमा करना
पैनी दृष्टितीक्ष्ण/सूक्ष्म नज़र, गहरी अवलोकन-शक्ति
तीव्र बुद्धितेज़ समझ, कुशाग्र बुद्धि
उन्नीस रहनाकिसी से थोड़ा कम/पीछे रहना
चल बसनादेहांत हो जाना, मर जाना
श्रमिकमेहनत-मज़दूरी करने वाला, मज़दूर
चरवाहापशु चराने वाला
सुनसान-वीराननिर्जन, जहाँ कोई न हो
लाँघनापार करना, फलाँगना
थककर चूर होनाबहुत अधिक थक जाना
छाले पड़नात्वचा पर फफोले बन जाना
संभवतःशायद, हो सकता है
घुड़सवारघोड़े पर सवार व्यक्ति
शंकासंदेह, अविश्वास
रेवड़पशुओं का झुंड
भटकनारास्ता भूल जाना
धमकानाडराना, भय दिखाना
फुसफुसानाधीमे-धीमे कान में कहना
उद्यानबगीचा, बाग
आवभगतआदर-सत्कार, खातिरदारी
निर्दोषबेकसूर, जिसका कोई दोष न हो
असाधारणअनोखा, सामान्य से कहीं बढ़कर
तीक्ष्णतेज़, पैना
ज्ञानेंद्रियाँज्ञान देने वाली पाँच इंद्रियाँ (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा)

मेरी समझ से

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?

• खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना

• पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना

• ऊँट का व्यापार करना

• गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना

उत्तर★ पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना।पिता ने स्पष्ट कहा था कि रुपये-पैसे के स्थान पर पैनी दृष्टि तथा सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि ही उनका असली धन है, अतः ‘धन संचय’ से यही अर्थ निकलता है।

(2) तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

• बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है।

• समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।

• किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।

• ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।

उत्तर★ समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।भाइयों ने ऊँट को देखे बिना केवल पैरों के निशान, घास तथा रेत के चिह्नों का बारीकी से निरीक्षण करके सही अनुमान लगाया; इसी से यह निष्कर्ष निकलता है कि ध्यानपूर्वक निरीक्षण समस्या-समाधान की कुंजी है।

(3) राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?

• भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।

• राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।

• राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।

• भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।

उत्तर★ भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।पेटी की परीक्षा में सही उत्तर देने के बाद भाइयों ने राजा को एक-एक चिह्न का तार्किक कारण बताया (पैरों के निशान, चरी हुई घास, गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि आदि), जिससे राजा को उनकी बुद्धिमत्ता पर विश्वास हो गया।

(4) लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?

• दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।

• अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।

• राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।

• ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

उत्तर★ अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।राजा ने भाइयों को तुरंत दंड न देकर पहले पेटी द्वारा उनकी परीक्षा ली और सच्चाई जानने के बाद ही निर्णय किया – यही न्यायप्रिय एवं विवेकपूर्ण मूल्य उसके निर्णय के पीछे छिपा है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने लोककथा की घटनाओं तथा पात्रों के व्यवहार को आधार बनाया – जैसे पिता के कथन से ‘धन’ का अर्थ बुद्धि एवं दृष्टि निकलता है, और राजा के व्यवहार से न्यायप्रियता का मूल्य।कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं; भिन्न उत्तर इसलिए आते हैं क्योंकि एक ही घटना को अलग-अलग दृष्टि से समझा जा सकता है। परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझकर सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।”

अर्थ/विचारपिता बताते हैं कि सच्चा धन केवल रुपया-पैसा या सोना-चाँदी नहीं है। यदि मनुष्य के पास गहरी अवलोकन-शक्ति (पैनी दृष्टि) और तेज़ बुद्धि हो, तो यही उसका सबसे बड़ा धन है।ऐसी संपत्ति कभी समाप्त नहीं होती; इसके बल पर मनुष्य हर परिस्थिति में स्वयं को सँभाल लेता है और किसी से पीछे (उन्नीस) नहीं रहता। यही इस लोककथा का केंद्रीय संदेश है।

(ख) “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में पिता बेटों को सिखाते हैं कि वे आसपास की हर वस्तु तथा घटना को ध्यान से देखें, समझें और उसके पीछे का कारण जानने का प्रयास करें।यदि छोटी-से-छोटी बात भी हमारी नज़र से न छूटे तो हमारी समझ गहरी होती जाती है। यही सूक्ष्म निरीक्षण आगे चलकर भाइयों के काम आता है और वे बिना ऊँट देखे ही उसके विषय में सब बता देते हैं।

(ग) “हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”

अर्थ/विचारभाई स्पष्ट करते हैं कि उनकी अद्भुत समझ कोई जादू नहीं, बल्कि लंबे अभ्यास का परिणाम है। उन्होंने वर्षों तक अपने आसपास की चीज़ों को ध्यान से देखने और तर्क से सोचने का अभ्यास किया है।यह विचार सिखाता है कि अवलोकन और तर्क की क्षमता जन्मजात उपहार नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास से विकसित होने वाला गुण है।

मिलकर करें मिलान

इस लोककथा में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनके भाव या अर्थ से मिलते-जुलते वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित कीजिए।

स्तंभ 1स्तंभ 2
1. कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे।1. घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा।
2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे।2. थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया।
3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा।3. लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।
4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं।
5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था।5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ-न-कुछ मिल ही जाएगा।
सही मिलान1 → 2 (थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया।)2 → 5 (हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ-न-कुछ मिल ही जाएगा।)3 → 1 (घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा।)4 → 4 (बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं।)5 → 3 (लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।)

सोच-विचार के लिए

लोककथा को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?

उत्तरतीनों भाइयों ने अपनी पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के विषय में बताया। बड़े भाई ने धूल पर बने बड़े पैरों के निशानों से जाना कि कोई बहुत बड़ा ऊँट गुज़रा है।मँझले भाई ने देखा कि सड़क के एक ओर की घास तो चरी हुई थी पर दूसरी ओर की ज्यों-की-त्यों, इससे उसने अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता। छोटे भाई ने ऊँट के बैठने के स्थान पर महिला के जूतों तथा बच्चे के छोटे पैरों के निशान देखकर बताया कि उस पर एक महिला और बच्चा सवार थे।

(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है – तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।

उत्तरमेरे अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व अवलोकन और तार्किक सोच को दिया गया है, क्योंकि भाइयों की सारी सफलता का आधार यही दोनों गुण हैं – पहले उन्होंने बारीकी से चीज़ें देखीं (अवलोकन) और फिर उनसे सही निष्कर्ष निकाला (तार्किक सोच)।साथ ही सत्यवादिता का भी महत्व है, क्योंकि चोर कहे जाने पर भी भाई शांति से सच बोलते रहे। फिर भी कथा का केंद्रीय भाव यही है कि ध्यानपूर्वक देखना और बुद्धि से सोचना मनुष्य का सबसे बड़ा धन है।

(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?

उत्तरआरंभ में राजा को घुड़सवार की बात पर विश्वास था, इसलिए उसने भाइयों को चोर समझकर डाँटा। परंतु जब उसने पेटी की परीक्षा ली और भाइयों ने बिना देखे ही उसमें कच्चा अनार होने की बात सही-सही बता दी, तो राजा चकित रह गया।भाइयों ने प्रत्येक अनुमान का तार्किक कारण भी समझाया, जिससे राजा को स्पष्ट हो गया कि वे चोर नहीं, बल्कि असाधारण रूप से बुद्धिमान हैं। इसी प्रमाण और तर्क के कारण राजा की सोच बदल गई और उसने उन्हें निर्दोष मान लिया।

(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?

उत्तरऊँट के स्वामी ने सोचा कि जब भाइयों ने उसके बिना बताए ही ऊँट के सारे लक्षण ठीक-ठीक बता दिए, तो अवश्य उन्होंने ही ऊँट देखा होगा अथवा चुराया होगा – इसी कारण उसने तुरंत उन पर संदेह कर लिया।मेरे विचार से उसे क्रोधित होकर भाइयों को बंदी बनाने के बजाय धैर्यपूर्वक उनकी बात सुननी चाहिए थी और भाइयों के बताए रास्ते पर अपना घोड़ा दौड़ाना चाहिए था। ऐसा करने पर उसे अपना ऊँट उसी दिशा में आसानी से मिल जाता।

(ङ) पिता ने बेटों को “दूसरे प्रकार का धन” संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तरपिता निर्धन था; उसके पास बेटों को देने के लिए रुपया-पैसा या सोना-चाँदी नहीं था। इसलिए उसने उन्हें पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी ऐसा धन संचित करने को कहा जो कभी समाप्त नहीं होता और जीवन-भर काम आता है।इससे पता चलता है कि पिता दूरदर्शी, अनुभवी और बुद्धिमान था। वह जानता था कि सच्ची संपत्ति ज्ञान, समझ और बुद्धि है। वह एक अच्छा मार्गदर्शक भी था, जिसने अपनी निर्धनता को बेटों के विकास में बाधा नहीं बनने दिया।

(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

उत्तरपेटी की परीक्षा से पता चलता है कि राजा विवेकशील और न्यायप्रिय था। उसने केवल आरोप के आधार पर भाइयों को दंड नहीं दिया, बल्कि सच्चाई जानने के लिए स्वयं एक व्यावहारिक परीक्षा की व्यवस्था की।वह बुद्धिमान, जिज्ञासु तथा खुले विचारों वाला शासक था जो प्रमाण और तर्क के आधार पर ही निर्णय लेता था। उसकी निर्णय शैली जल्दबाज़ी से नहीं, बल्कि सोच-विचार और जाँच-पड़ताल से चलती थी – यही एक अच्छे न्यायकर्ता का गुण है।

(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना)मैं भाइयों की पैनी दृष्टि और ध्यानपूर्वक निरीक्षण करने की आदत को अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी, क्योंकि यदि हम आसपास की वस्तुओं और घटनाओं को बारीकी से देखें-समझें, तो हम छोटी-छोटी बातों से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं।इसके साथ ही मुझे उनका विपरीत परिस्थिति में भी शांत और सच्चा रहना भी अच्छा लगा। चोर कहे जाने पर भी वे क्रोधित नहीं हुए, बल्कि शांति से सच बोलते रहे – यह गुण जीवन में हर कठिनाई का सामना करने में सहायक होता है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?

उत्तर (कल्पना)यदि राजा बिना जाँच किए भाइयों को दोषी ठहरा देता तो तीनों निर्दोष भाइयों को अनुचित दंड भुगतना पड़ता और सच्चाई कभी सामने न आती।ऊँट का असली पता भी न चलता, क्योंकि भाई ही उसका सही रास्ता बता सकते थे। ऐसे में अन्याय होता, राजा की बुद्धिमत्ता और न्यायप्रियता पर प्रश्न उठता, तथा लोककथा का प्रेरक संदेश — ‘जाँच किए बिना किसी को दोषी न ठहराना’ — भी न मिल पाता।

(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।

उत्तर (कल्पना)यदि भाई पेटी के विषय में सही अनुमान न लगाते तो राजा को उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता का प्रमाण न मिलता और शायद उनका संदेह बना रहता।संभव है कि उन्हें चोर मानकर दंडित किया जाता और कथा का सुखद अंत न होता। इस घटना ने ही भाइयों की निर्दोषता सिद्ध की और उन्हें राजा के दरबार में सम्मान दिलाया, इसलिए कथा में इसका विशेष महत्व है।

(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?

उत्तर (कल्पना)यदि भाई स्वयं ऊँट खोजने जाते तो उन्हें अनजान रास्ते, चढ़ाई-उतराई वाले पहाड़, धूप-गर्मी, भूख-प्यास तथा थकान जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।रास्ते में जंगली जानवरों या लुटेरों का भय भी हो सकता था; साथ ही महिला और बच्चे की खोज में अधिक समय भी लग सकता था। फिर भी अपनी पैनी दृष्टि से वे पैरों के निशानों का पीछा करके अंततः ऊँट तक पहुँच सकते थे।

(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।

उत्तर (कल्पना)यदि मैं राजा होता/होती तो भाइयों को कुछ ढकी हुई वस्तुएँ दिखाकर केवल ध्वनि, गंध या भार के आधार पर उनका नाम बताने को कहता/कहती।इसके अतिरिक्त मैं उन्हें किसी व्यक्ति के पैरों के निशान या किसी चित्र की एक झलक दिखाकर उसके विषय में अनुमान लगाने को कहता/कहती, अथवा कोई पहेली या रहस्य सुलझाने देता/देती। इन गतिविधियों से उनकी अवलोकन-शक्ति और तार्किक सोच की सच्ची परीक्षा हो जाती।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘मस्तिष्क’ और ‘बुद्धि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए।

उत्तर‘मस्तिष्क’ से जुड़े शब्द: सोच, विचार, स्मृति (याददाश्त), कल्पना, एकाग्रता, तर्क, ज्ञान, चिंतन।‘बुद्धि’ से जुड़े शब्द: समझ, विवेक, चतुराई, कुशाग्रता, सूझ-बूझ, अक्ल, मेधा, प्रज्ञा, तीक्ष्णता।

लोककथा को सुनाना

लोककथा को रोचक और प्रभावशाली ढंग से सुनाने के लिए पुस्तक में कुछ सुझाव (कथा सुनाना) दिए गए हैं। उन सुझावों को ध्यान में रखते हुए नीचे संक्षेप में मार्गदर्शन दिया गया है।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली मौखिक गतिविधि है। लोककथा को आकर्षक ढंग से सुनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें –स्वर में उतार-चढ़ाव: रोमांचक या रहस्यमय पलों (जैसे ऊँट का वर्णन या पेटी की परीक्षा) पर आवाज़ धीमी या तीव्र करें ताकि उत्सुकता बनी रहे।भावों की अभिव्यक्ति एवं भिन्न स्वर: खुशी, दुख, आश्चर्य आदि को स्वर से दर्शाएँ और पिता, राजा, घुड़सवार तथा भाइयों के लिए अलग-अलग स्वर का प्रयोग करें ताकि पात्र पहचाने जा सकें।हाव-भाव एवं रोचक मोड़: चेहरे के भाव और हाथों की मुद्राओं का उपयोग करें; किसी रोमांचक मोड़ पर रुककर पूछें – “क्या आप जानना चाहते हैं कि आगे क्या हुआ?” संवादों को स्पष्ट एवं स्वाभाविक रखें और हास्यपूर्ण क्षणों को मुसकान के साथ प्रस्तुत करें।

कारक (भाषा की बात)

संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले ‘ने, को, पर, से, के द्वारा, का, में, के लिए, की, के’ आदि शब्दों को कारक या परसर्ग कहते हैं। नीचे दिए गए वाक्यों में उपयुक्त कारक भरकर इन्हें पूरा कीजिए।

1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट ____ देखा तक नहीं”, भाइयों ____ परेशान होते हुए कहा।

उत्तर“हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं”, भाइयों ने परेशान होते हुए कहा।

2. “मैं अपने रेवड़ों ____ पहाड़ों ____ लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे ____ साथ एक बड़े-से ऊँट ____ मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”

उत्तर“मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”

3. राजा ____ उसी समय अपने मंत्री ____ बुलाया और उसके कान ____ कुछ फुसफुसाया।

उत्तरराजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।

4. यह सुनकर राजा ____ पेटी ____ पास लाने ____ आदेश दिया। सेवकों ____ तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ____ सेवकों ____ पेटी खोलने ____ लिए कहा।

उत्तरयह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों को पेटी खोलने के लिए कहा।

सूचनापत्र

कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज़ पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।

उत्तर (नमूना सूचनापत्र) सूचना खोया हुआ ऊँट — ढूँढ़ने में सहायता कीजिए! मेरा एक बहुत बड़ा ऊँट बीते सप्ताह पहाड़ी मार्ग से जाते समय खो गया है। उस पर मेरी पत्नी और छोटा बेटा सवार थे, जो रास्ता भटककर पीछे रह गए। पहचान: ऊँट आकार में बहुत बड़ा है तथा एक आँख से नहीं देख पाता। उसके साथ एक महिला एवं एक छोटा बच्चा हैं। जिस किसी भाई-बंधु को इस ऊँट या मेरे परिवार के विषय में कोई जानकारी मिले, वह कृपया तुरंत नगर के मुख्य द्वार पर सूचित करे। सहायता करने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा। — (आपका नाम), पशुपालक

आपकी बात

(पाठ से आगे) नीचे दिए प्रश्न आपके अपने अनुभव से जुड़े हैं। नमूने के रूप में मार्गदर्शन दिया गया है; आप अपने अनुभव के अनुसार लिख सकते हैं।

1. लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्टि की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्टि का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।

उत्तर (नमूना)हाँ, एक बार मेरी कक्षा की चाबी खो गई थी। मैंने ध्यान से देखा कि किसने अंत में दरवाज़ा खोला था और कहाँ-कहाँ चीज़ें रखी गई थीं। मुझे एक मेज़ के नीचे चमकती हुई चाबी दिख गई। मेरी पैनी दृष्टि से समस्या तुरंत हल हो गई।

2. लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने “बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।” यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

उत्तर (नमूना)हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत से मैं अपनी चीज़ें कम खोता/खोती हूँ, पढ़ाई में बातें जल्दी समझ जाता/जाती हूँ और गलतियाँ कम करता/करती हूँ। इससे मेरी एकाग्रता एवं स्मरण-शक्ति भी बढ़ी है और छोटी-छोटी समस्याओं को मैं स्वयं हल कर लेता/लेती हूँ।

3. लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आईं, जैसे – भूख, थकान और पैरों में छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।

उत्तर (नमूना)अपने दैनिक जीवन में मुझे कभी-कभी समय पर विद्यालय पहुँचने, गृहकार्य पूरा करने, कठिन विषयों को समझने तथा खेल और पढ़ाई में संतुलन बनाने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मैं समय-सारणी बनाकर, धैर्य रखकर और बड़ों की सहायता लेकर इन कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास करता/करती हूँ।

4. भाइयों ने बिना देखे ही ऊँट के बारे में सही-सही बातें बताईं। क्या आपको लगता है कि अनुभव और समझ से देखे बिना भी सही निर्णय लिया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा किया है?

उत्तर (नमूना)हाँ, अनुभव और समझ से कई बार बिना सीधे देखे भी सही अनुमान लगाया जा सकता है। जैसे बादल देखकर वर्षा का अनुमान या किसी मित्र की आवाज़ सुनकर उसके मन की स्थिति समझ लेना। एक बार रसोई से जलने की गंध आने पर मैंने बिना देखे ही समझ लिया कि कुछ जल रहा है और तुरंत बता दिया।

5. जब ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर शंका की तो भाइयों ने बिना गुस्सा किए शांति से उत्तर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है?

उत्तर (नमूना)हाँ, संदेह होने पर शांत रहकर उत्तर देना ही सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि क्रोध करने से बात और बिगड़ जाती है, जबकि शांति से सच कहने पर सामने वाला हमारी बात पर विश्वास कर लेता है। एक बार मुझ पर किसी की वस्तु लेने का गलत आरोप लगा था, तब मैंने शांति से सच बताया और बाद में वह वस्तु मिल जाने पर मेरी सच्चाई सिद्ध हो गई।

6. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच, समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिलकुल नया और चौंकाने वाला हो?

उत्तर (नमूना)हाँ, एक बार मैंने अपने दादाजी को बिना घड़ी देखे केवल सूरज की स्थिति से समय बता देते देखा, तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने मुझे यह कौशल सिखाया, जो मेरे लिए बिलकुल नया और रोचक था। इसी प्रकार किसी मित्र से मानसिक गणना (बिना कागज़ के जोड़-घटाव) सीखकर भी मैं चकित रह गया/गई थी।

7. लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज्ञान जमा करें। क्या आपको कभी किसी बड़े व्यक्ति से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंगे?

उत्तर (नमूना)हाँ, मेरे माता-पिता ने मुझे सलाह दी थी कि “प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा पढ़ो और हर दिन कुछ नया सीखो।” यह सलाह मेरे लिए बहुत उपयोगी रही, क्योंकि इससे मेरी पढ़ाई का बोझ कम हुआ और ज्ञान बढ़ा। मैं भी अपने छोटे भाई-बहनों को यही सलाह दूँगा/दूँगी कि समय का सदुपयोग करें और सीखते रहें।

8. भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता है कि सदा सच बोलना महत्वपूर्ण है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा है कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?

उत्तर (नमूना)हाँ, सदा सच बोलना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सच्चाई से विश्वास बनता है और अंत में सत्य की ही जीत होती है, भले ही आरंभ में कठिनाई हो। एक बार मुझसे गलती से कोई वस्तु टूट गई थी; मैंने डरने के बजाय सच बता दिया, तो बड़ों ने डाँटने के बजाय मेरी ईमानदारी की सराहना की और मामला आसानी से सुलझ गया।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना

इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना और वस्तु को ध्यान से देखते, सुनते, सूँघते और अनुभव करते हैं अर्थात् अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं। पुस्तक में दो खेल दिए गए हैं।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती हैं – आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। हम आँख से देखकर, कान से सुनकर, नाक से सूँघकर, जीभ से चखकर तथा त्वचा से स्पर्श करके किसी वस्तु के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं।(क) ‘हाँ’ या ‘नहीं’ प्रश्न-उत्तर खेल: एक विद्यार्थी कोई वस्तु मन में चुनता है; अन्य विद्यार्थी अधिकतम 20 ऐसे प्रश्न पूछते हैं जिनका उत्तर केवल ‘हाँ’ या ‘नहीं’ हो (जैसे — क्या यह खाने की चीज़ है? क्या यह लकड़ी की बनी है?)। सोच-समझकर पूछे गए प्रश्नों से वस्तु का नाम पता लगाना ही जीत है।(ख) ‘स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना’: आँखों पर पट्टी बाँधकर थैले/डिब्बे की वस्तु को केवल छूकर, सूँघकर या चखकर पहचानना होता है। यह खेल हमारी ज्ञानेंद्रियों एवं बुद्धि को तेज़ करता है — ठीक वैसे ही जैसे लोककथा के भाइयों ने अपनी इंद्रियों का प्रयोग किया।

आज की पहेली

1. कौन है यह प्राणी? (संकेत – लंबी पूँछ जो शाखाओं से लिपटी रहती है; मुख्य आहार कीट और छोटे जीव; परिवेश में घुल-मिल जाता है और रंग बदल सकता है; तेज़ आँखें जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।)

उत्तरयह प्राणी गिरगिट (कमेलियन) है। यह अपने परिवेश के अनुसार रंग बदल लेता है, इसकी आँखें अलग-अलग दिशाओं में घूम सकती हैं और यह कीड़े-मकोड़ों को चुपके से पकड़कर खाता है।

2. रंगीन डिब्बे: एक मेज़ पर चार रंगीन डिब्बे (लाल, हरा, नीला, पीला) बराबर-बराबर रखे हैं। बताइए पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है? (संकेत – 1. लाल डिब्बा नीले के पास है। 2. हरा डिब्बा पीले के पास नहीं है। 3. पीला डिब्बा लाल के पास नहीं है। 4. हरा डिब्बा लाल के पास है।)

उत्तरपीले डिब्बे के बराबर में नीला डिब्बा है।समझाइश: संकेत 1 और 4 से लाल डिब्बा एक ओर नीले के और दूसरी ओर हरे के पास है, अर्थात क्रम बनता है – हरा, लाल, नीला। संकेत 2 के अनुसार हरा पीले के पास नहीं, और संकेत 3 के अनुसार पीला लाल के पास नहीं; अतः पीला डिब्बा नीले के बगल में आएगा। इस प्रकार क्रम बनता है – हरा – लाल – नीला – पीला, जिसमें पीले के बराबर में नीला है।

खोजबीन के लिए

पुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ियों (‘सुनो लोककथा’, ‘दुनिया की छत’, ‘भूल चूक लेनी देनी’) के माध्यम से अनेक अन्य रोचक लोककथाएँ देखी-सुनी जा सकती हैं।

उत्तर (गतिविधि)यह खोजबीन की गतिविधि है। इन कड़ियों से विभिन्न प्रदेशों एवं संस्कृतियों की लोककथाएँ सुनकर हम जान सकते हैं कि लोककथाएँ मनोरंजन के साथ-साथ कोई-न-कोई सीख भी देती हैं। आप इन्हें सुनकर अपनी पसंदीदा लोककथा कक्षा में साझा कर सकते हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. पिता ने अपने बेटों को कौन-सा ‘धन’ संचित करने की सलाह दी और क्यों?

उत्तरपिता ने बेटों को पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करने की सलाह दी, क्योंकि वह निर्धन था और जानता था कि यह धन कभी समाप्त नहीं होता तथा जीवन-भर हर परिस्थिति में काम आता है।

2. तीनों भाई यात्रा पर क्यों निकले?

उत्तरपिता के देहांत के बाद भाइयों के पास घर पर करने को कुछ नहीं था, इसलिए वे जगत देखने तथा जीविका कमाने के उद्देश्य से यात्रा पर निकल पड़े। उन्हें विश्वास था कि वे कहीं भी भूखे नहीं मरेंगे।

3. घुड़सवार ने भाइयों पर ऊँट चुराने का संदेह क्यों किया?

उत्तरघुड़सवार ने सोचा कि जब भाइयों ने उसके कुछ बताए बिना ही ऊँट के सारे लक्षण (बड़ा, एक आँख से अंधा, महिला-बच्चे का सवार होना) ठीक-ठीक बता दिए, तो अवश्य उन्होंने ही ऊँट चुराया होगा; इसी कारण उसने उन पर संदेह किया।

4. राजा ने भाइयों की परीक्षा कैसे ली?

उत्तरराजा ने मंत्री से एक बड़ी पेटी मँगवाई और भाइयों से पूछा कि उसमें क्या है। भाइयों ने बिना खोले ही बता दिया कि उसमें एक छोटी, गोल वस्तु – कच्चा अनार – है। पेटी खुलने पर उनकी बात सही निकली।

5. अंत में राजा ने भाइयों के विषय में क्या कहा और क्या किया?

उत्तरराजा ने कहा कि भले ही भाइयों के पास सांसारिक धन न हो, पर उनके पास बुद्धि का बहुत बड़ा कोष है। उसने उन्हें निर्दोष माना, उनका आदर-सत्कार किया तथा प्रसन्न होकर तीनों को अपने दरबार में रख लिया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘तीन बुद्धिमान’ लोककथा का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘तीन बुद्धिमान’ लोककथा का मूल भाव यह है कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन रुपया-पैसा नहीं, बल्कि पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि है। निर्धन पिता अपने बेटों को यही सीख देता है कि वे हर वस्तु एवं स्थिति को ध्यान से देखें-समझें।इसी अवलोकन-शक्ति और तार्किक सोच के बल पर भाई बिना ऊँट देखे ही उसके विषय में सब-कुछ बता देते हैं और बाद में पेटी की परीक्षा में भी सफल होकर अपनी निर्दोषता सिद्ध कर देते हैं। कथा यह भी सिखाती है कि किसी पर बिना जाँच के आरोप नहीं लगाना चाहिए और कठिन परिस्थिति में भी शांत रहकर सच का साथ देना चाहिए। इस प्रकार यह लोककथा ज्ञान, अवलोकन, धैर्य एवं सत्य के महत्व का सुंदर संदेश देती है।

7. इस लोककथा के तीनों भाइयों के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरतीनों भाई अत्यंत बुद्धिमान, अवलोकनशील एवं तार्किक हैं। बचपन से ही उन्होंने हर वस्तु को ध्यान से देखने और बुद्धि से सोचने की आदत डाली है, इसीलिए वे पैरों के निशान, चरी हुई घास और रेत के चिह्नों से ही ऊँट के विषय में सही अनुमान लगा लेते हैं।वे धैर्यवान और शांतचित्त भी हैं – चोर कहे जाने तथा तलवार दिखाए जाने पर भी वे क्रोधित नहीं होते, बल्कि शांति से सच कहते रहते हैं। वे सत्यवादी एवं निडर हैं और परिश्रमी भी, क्योंकि वे चालीस दिन की कठिन यात्रा साहस से पूरी करते हैं। इन्हीं गुणों के कारण अंत में उन्हें राजा के दरबार में सम्मान मिलता है।

8. इस लोककथा से हमें क्या-क्या शिक्षाएँ मिलती हैं? सोदाहरण लिखिए।

उत्तरइस लोककथा से हमें अनेक शिक्षाएँ मिलती हैं। पहली शिक्षा यह है कि ज्ञान और बुद्धि ही सबसे बड़ा धन है – जैसे पिता निर्धन होते हुए भी बेटों को यही धन देता है। दूसरी शिक्षा है कि ध्यानपूर्वक निरीक्षण एवं तार्किक सोच से कठिन समस्याएँ भी सुलझ जाती हैं – भाई बिना ऊँट देखे ही उसके लक्षण बता देते हैं।तीसरी शिक्षा है कि बिना जाँच के किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए – राजा पहले परीक्षा लेता है, फिर निर्णय करता है। चौथी शिक्षा है कि विपरीत परिस्थिति में भी धैर्य एवं सत्य का साथ देना चाहिए – भाई शांति से सच कहकर अंततः निर्दोष सिद्ध होते हैं। इस प्रकार यह कथा हमें जीवन के लिए बहुमूल्य मूल्य सिखाती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘तीन बुद्धिमान’ किस प्रकार की रचना है?

(क) कविता

(ख) निबंध

(ग) लोककथा (कहानी)

(घ) नाटक

उत्तर(ग) लोककथा (कहानी)।

2. पिता ने अपने बेटों को किस प्रकार का धन संचित करने को कहा?

(क) सोना-चाँदी

(ख) रुपया-पैसा

(ग) पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि

(घ) खेत और पशु

उत्तर(ग) पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि।

3. भाई कितने दिनों तक लगातार चलते रहे?

(क) बीस दिन

(ख) तीस दिन

(ग) चालीस दिन

(घ) पचास दिन

उत्तर(ग) चालीस दिन।

4. सबसे बड़े भाई ने धरती देखकर क्या बताया?

(क) यहाँ से एक घोड़ा गया है

(ख) यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है

(ग) यहाँ से एक हाथी गया है

(घ) यहाँ से एक बैलगाड़ी गई है

उत्तर(ख) यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है।

5. मँझले भाई ने यह कैसे जाना कि ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता?

(क) ऊँट को सामने देखकर

(ख) सड़क के एक ओर की घास चरी थी, दूसरी ओर की नहीं

(ग) घुड़सवार के बताने पर

(घ) राजा के बताने पर

उत्तर(ख) सड़क के एक ओर की घास चरी थी, दूसरी ओर की नहीं।

6. घुड़सवार भाइयों को कहाँ ले गया?

(क) अपने घर

(ख) मंदिर

(ग) राजा के भवन में

(घ) बाज़ार में

उत्तर(ग) राजा के भवन में।

7. राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किसका उपयोग किया?

(क) एक तलवार

(ख) एक बड़ी पेटी

(ग) एक घोड़ा

(घ) एक थैला

उत्तर(ख) एक बड़ी पेटी।

8. पेटी में क्या रखा हुआ था?

(क) पका हुआ आम

(ख) कच्चा अनार

(ग) सोने के सिक्के

(घ) एक पत्र

उत्तर(ख) कच्चा अनार।

9. छोटे भाई ने अनार के कच्चा होने का अनुमान कैसे लगाया?

(क) पेटी खोलकर देखकर

(ख) उद्यान में सभी अनार उस समय कच्चे थे, इसलिए

(ग) राजा के बताने पर

(घ) सूँघकर

उत्तर(ख) उद्यान में सभी अनार उस समय कच्चे थे, इसलिए।

10. अंत में राजा ने भाइयों के साथ क्या किया?

(क) उन्हें दंड दिया

(ख) उन्हें कारागार में डाल दिया

(ग) उनका आदर-सत्कार कर अपने दरबार में रख लिया

(घ) उन्हें नगर से निकाल दिया

उत्तर(ग) उनका आदर-सत्कार कर अपने दरबार में रख लिया।
उत्तर-कुंजी: 1-(ग), 2-(ग), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): भाइयों ने बिना ऊँट को देखे ही उसके विषय में सही बता दिया।

कारण (R): उन्होंने पैरों के निशान, चरी हुई घास और रेत के चिह्नों का बारीकी से निरीक्षण किया था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पिता के पास बेटों को देने के लिए बहुत सोना-चाँदी था।

कारण (R): पिता एक निर्धन व्यक्ति था जिसके पास रुपया-पैसा या सोना-चाँदी नहीं था।

उत्तर(घ) A गलत है (पिता के पास सोना-चाँदी नहीं था), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): राजा ने भाइयों को बिना जाँच किए तुरंत दंड दे दिया।

कारण (R): राजा ने पहले पेटी द्वारा भाइयों की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली, फिर निर्णय किया।

उत्तर(घ) A गलत है (राजा ने पहले परीक्षा ली, तुरंत दंड नहीं दिया), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): चोर कहे जाने पर भी भाइयों ने शांति से उत्तर दिया।

कारण (R): भाई सच्चे एवं धैर्यवान थे और जानते थे कि वे निर्दोष हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): राजा ने भाइयों को अपने दरबार में रख लिया।

कारण (R): राजा उनकी असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि से अत्यंत प्रभावित हुआ था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव (Exam Tips)

  • कथा के तीन प्रमुख प्रसंग क्रम से याद रखें – पिता की सीख, ऊँट के विषय में अनुमान, तथा पेटी की परीक्षा।
  • हर अनुमान के पीछे का कारण अवश्य लिखें (जैसे – घास का एक ओर चरा होना → ऊँट एक आँख से अंधा); केवल निष्कर्ष लिखने से अंक कम मिलते हैं।
  • कथा का केंद्रीय संदेश – ‘ज्ञान एवं अवलोकन ही सच्चा धन है’ – उत्तर के अंत में अवश्य जोड़ें।
  • मूल्य-आधारित प्रश्न (राजा की न्यायप्रियता, सत्य का साथ) के लिए कथा की घटनाओं का उदाहरण दें।

सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)

  • इसे कविता समझ लेना – यह एक लोककथा (कहानी) है, इसका कोई एक रचनाकार नहीं है।
  • तीनों भाइयों के अनुमानों को आपस में मिला देना – बड़ा भाई → ऊँट का बड़ा होना, मँझला → एक आँख से अंधा, छोटा → महिला व बच्चे का सवार होना।
  • पेटी में ‘पका अनार’ लिख देना – उसमें कच्चा अनार था।
  • कारक भरते समय ‘ने’ और ‘को’ में भ्रम करना – कर्ता के साथ प्रायः ‘ने’ तथा कर्म के साथ ‘को’ आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘तीन बुद्धिमान’ पाठ की विधा क्या है और इसके रचनाकार कौन हैं?

‘तीन बुद्धिमान’ एक लोककथा (कहानी) है। लोककथा होने के कारण इसका कोई एक निश्चित रचनाकार नहीं है; यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप में चलती रही कहानी है जिसे बाद में संकलित किया गया है।

पिता ने अपने बेटों को कौन-सा धन संचित करने को कहा था?

पिता ने बेटों को रुपये-पैसे और सोने-चाँदी के स्थान पर पैनी दृष्टि (गहरी अवलोकन-शक्ति) और तीव्र बुद्धि रूपी धन संचित करने को कहा, क्योंकि यह धन कभी समाप्त नहीं होता।

भाइयों ने बिना ऊँट देखे उसके विषय में कैसे बताया?

उन्होंने धूल पर बने पैरों के निशान, सड़क के एक ओर चरी हुई घास तथा रेत पर महिला के जूतों एवं बच्चे के छोटे पैरों के चिह्नों का बारीकी से निरीक्षण करके ऊँट के विषय में सही अनुमान लगाया।

राजा ने भाइयों को निर्दोष क्यों माना?

पेटी की परीक्षा में भाइयों ने बिना खोले ही बता दिया कि उसमें कच्चा अनार है। प्रत्येक अनुमान का तार्किक कारण समझाने पर राजा को विश्वास हो गया कि वे चोर नहीं, बल्कि असाधारण बुद्धिमान हैं, इसलिए उसने उन्हें निर्दोष माना।

कहानी (लोककथा) एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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