कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 1 – माँ, कह एक कहानी (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 1 ‘माँ, कह एक कहानी’ (कवि – मैथिलीशरण गुप्त) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, संवाद, भाषा की बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवि परिचय – मैथिलीशरण गुप्त
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- कविता का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- संवाद
- शब्द से जुड़े शब्द / पंक्ति से पंक्ति
- कविता की रचना / रूप बदलकर / विराम चिह्न
- पाठ से आगे (आपकी बात आदि)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – मैथिलीशरण गुप्त
मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) हिंदी साहित्य के ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में सर्वविदित हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के चिरगाँव में हुआ था। पंद्रह-सोलह वर्ष की आयु में ही उन्होंने कविता लिखना आरंभ कर दिया था। प्रारंभ में ब्रजभाषा में और फिर खड़ी बोली हिंदी में वे आजीवन लेखन करते रहे। स्वतंत्रता-आंदोलन के समय उनकी रचनाओं ने जन-मन में देशप्रेम की भावना जगाई। उनकी अधिकांश कृतियों में भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय चेतना के स्वर मिलते हैं। साकेत, भारत-भारती तथा यशोधरा उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृतियाँ हैं। प्रस्तुत कविता ‘माँ, कह एक कहानी’ उनकी काव्य-कृति यशोधरा से ली गई एक अंश है, जिसमें माता यशोधरा और उनके पुत्र राहुल के बीच संवाद-शैली में बातचीत प्रस्तुत हुई है।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता माँ (यशोधरा) और बेटे (राहुल) के बीच संवाद के रूप में रची गई है। माँ अपने पुत्र को उसके पिता (सिद्धार्थ) से जुड़ी करुणा एवं न्याय की एक कहानी सुनाती हैं।
“बेटा, समझ लिया क्या तूने
मुझको अपनी नानी?”
“कहती है मुझसे यह चेटी,
तू मेरी नानी की बेटी!
कह माँ, कह, लेटी ही लेटी,
राजा था या रानी?
राजा था या रानी?
माँ, कह एक कहानी।”
“तू है हठी मानधन मेरे,
सुन, उपवन में बड़े सबेरे,
तात भ्रमण करते थे तेरे,
जहाँ, सुरभि मनमानी।”
“जहाँ सुरभि मनमानी?
हाँ, माँ, यही कहानी।”
“वर्ण वर्ण के फूल खिले थे,
झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे,
हलके झोंके हिले-मिले थे,
लहराता था पानी।”
“लहराता था पानी?
हाँ, हाँ, यही कहानी।”
“गाते थे खग कल कल स्वर से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से,
हुई पक्ष की हानी!”
“हुई पक्ष की हानी?
करुणा-भरी कहानी!”
“चौंक उन्होंने उसे उठाया,
नया जन्म-सा उसने पाया।
इतने में आखेटक आया,
लक्ष्य-सिद्धि का मानी।”
“लक्ष्य-सिद्धि का मानी?
कोमल-कठिन कहानी।”
“माँगा उसने आहत पक्षी,
तेरे तात किंतु थे रक्षी।
तब उसने, जो था खगभक्षी–
हठ करने की ठानी।”
“हठ करने की ठानी?
अब बढ़ चली कहानी।”
“हुआ विवाद सदय-निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्वविषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी।”
“सुनी सभी ने जानी?
व्यापक हुई कहानी।”
“राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
— मैथिलीशरण गुप्त
भावार्थ
आरंभ: बेटा (राहुल) माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। माँ हँसी में कहती हैं – “क्या तूने मुझे अपनी नानी समझ लिया है?” बालक हठ करता है कि उसे सेविका (चेटी) ने बताया है कि माँ तो नानी की बेटी हैं, इसलिए माँ अवश्य कहानी जानती होंगी; वह बार-बार पूछता है – “राजा था या रानी?” और “माँ, कह एक कहानी।”
उपवन का दृश्य: माँ कहती हैं कि उसके पिता (तात) प्रातःकाल एक सुंदर उपवन में टहलने जाया करते थे, जहाँ चारों ओर मनमानी सुगंध (सुरभि) फैली रहती थी। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें (हिम-बिंदु) झिलमिला रही थीं, हल्की हवा के झोंके बह रहे थे और सरोवर का पानी लहरा रहा था।
घटना: पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। तभी अचानक एक हंस ऊपर से तीखे बाण (खर-शर) से बिंधकर घायल होकर गिर पड़ा – उसके पंख (पक्ष) को हानि पहुँची। यह सुनकर बालक कह उठता है – “करुणा-भरी कहानी!”
विवाद: राहुल के पिता ने चौंककर घायल हंस को उठा लिया, मानो उसे नया जीवन मिल गया। तभी एक आखेटक (शिकारी) आया जो उस हंस को अपना शिकार (लक्ष्य-सिद्धि) मान रहा था। उसने घायल पक्षी माँगा, परंतु पिता रक्षक बनकर उसे बचाने पर अड़े रहे। शिकारी (खगभक्षी) ने भी हठ ठान लिया। दयालु (सदय) और निर्दयी (निर्दय) के बीच विवाद हुआ; दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े थे, अतः बात न्यायालय तक पहुँची और सबने सुनी।
निर्णय: माँ बीच में ही बालक से कहती हैं – “राहुल, तू ही निर्णय कर कि न्याय किसका पक्ष लेगा।” बालक निडर होकर उत्तर देता है – यदि कोई निर्दोष को मारता है, तो दूसरे को उसकी रक्षा करनी ही चाहिए; न्याय सदा रक्षक का पक्ष लेता है, भक्षक (मारने वाले) का नहीं, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है। बालक के इस उत्तर पर माँ प्रसन्न होकर कहती हैं – “तूने कहानी को सचमुच समझ लिया (गुनी कहानी)।”
कविता का सार
‘माँ, कह एक कहानी’ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति यशोधरा से लिया गया एक मार्मिक अंश है। यह कविता संवाद-शैली में रची गई है, जिसमें माता यशोधरा और उनका नन्हा पुत्र राहुल आपस में बातें करते हैं। कविता का आरंभ बालक की उस स्वाभाविक हठ से होता है, जिसमें वह माँ से कहानी सुनाने का बार-बार आग्रह करता है। माँ पहले हँसी में टालती हैं, पर बालक के हठ करने पर वे एक कहानी आरंभ करती हैं। माँ बताती हैं कि राहुल के पिता (सिद्धार्थ) प्रातःकाल एक सुंदर उपवन में भ्रमण करते थे। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे, ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं, शीतल हवा बह रही थी और सरोवर का जल लहरा रहा था; पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। इसी मनोरम वातावरण में अचानक एक हंस तीखे बाण से बिंधकर घायल होकर गिर पड़ा। राहुल के पिता ने करुणावश उस घायल पक्षी को उठा लिया और उसे मानो नया जीवन दे दिया। तभी एक शिकारी आ पहुँचा, जो हंस को अपना शिकार मानकर माँगने लगा। पिता ने रक्षक बनकर हंस को लौटाने से मना कर दिया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, अतः यह विवाद न्यायालय तक पहुँच गया और चारों ओर चर्चित हो गया। कहानी के इसी निर्णायक मोड़ पर माँ कहानी को स्वयं पूरा नहीं करतीं, बल्कि राहुल से ही न्याय करने को कहती हैं। बालक निर्भय होकर उत्तर देता है कि जो निर्दोष की रक्षा करता है, न्याय सदा उसी का पक्ष लेता है, क्योंकि सच्चा न्याय दया से युक्त होता है – भक्षक का नहीं, रक्षक का। बालक का यह विवेकपूर्ण उत्तर सुनकर माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इस प्रकार यह कविता बालमन की सरलता, माँ-बेटे के स्नेह तथा करुणा और न्याय के उच्च मूल्यों को बड़े सहज ढंग से प्रस्तुत करती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चेटी | दासी, सेविका |
| हठी | जिद करने वाला |
| मानधन | (संबोधन) मान करने योग्य, प्यारा पुत्र |
| तात | पिता |
| उपवन | बगीचा, बाग |
| सुरभि | सुगंध, खुशबू |
| मनमानी | जी भरकर फैली हुई |
| वर्ण वर्ण | तरह-तरह के रंगों के |
| हिम-बिंदु | ओस की बूँदें |
| झिले थे | झिलमिला रहे थे |
| खग | पक्षी |
| हंस | एक सुंदर श्वेत पक्षी |
| बिद्ध | बिंधा हुआ, घायल |
| खर-शर | तीखा/तेज़ बाण |
| पक्ष | पंख; यहाँ पक्षी का पंख |
| आखेटक | शिकारी |
| लक्ष्य-सिद्धि | निशाना पूरा होना |
| आहत | घायल, चोट खाया |
| रक्षी | रक्षा करने वाला, रक्षक |
| खगभक्षी | पक्षियों को मारकर खाने वाला |
| सदय | दयालु, दया से भरा |
| निर्दय | निर्दयी, क्रूर |
| उभय | दोनों |
| आग्रही | अड़े हुए, हठ करने वाले |
| निरपराध | निर्दोष, बेकसूर |
| उबारे | बचाए, रक्षा करे |
| वारे | पक्ष ले, साथ दे |
| बानी | वाणी, कथन |
| गुनी | समझ ली, गुण-दोष पहचान लिया |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?
• राजाओं की कहानियों से उसका मनोरंजन करने के लिए।
• उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
• उसे परिवार की विरासत और पूर्वजों के बारे में बताने के लिए।
• उसे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी देने के लिए।
(2) कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?
• निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।
• पिता की वीरता और साहस पर ध्यान दिलाने के लिए।
• करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
• मित्रता और निष्ठा के महत्व को उजागर करने के लिए।
(3) कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?
• न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
• निर्णय लेते समय सदैव निडर रहना चाहिए।
• आखेटकों का सदैव विरोध करना चाहिए।
• जानवरों की हर स्थिति में रक्षा करनी चाहिए।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
इस कविता में माँ अपने पुत्र को उसके पिता की कहानी सुना रही है। ये माँ, पुत्र और पिता कौन हैं – पात्रों को पहचानकर सुमेलित कीजिए।
| पात्र | ये शब्द किनके लिए आए हैं |
|---|---|
| 1. बेटा | सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल |
| 2. माँ | यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| 3. तात (पिता) | सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “कोई निरपराध को मारे, / तो क्यों अन्य उसे न उबारे? / रक्षक पर भक्षक को वारे, / न्याय दया का दानी!”
(ख) “हुआ विवाद सदय-निर्दय में, / उभय आग्रही थे स्वविषय में, / गई बात तब न्यायालय में, / सुनी सभी ने जानी।”
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
(ख) आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?
(ग) माँ ने पुत्र से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?
(घ) यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?
(ङ) कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?
(ख) मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?
(ग) मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों? (तीर चलाने वाला / पक्षी / पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति / न्यायाधीश / कोई अन्य पात्र)
संवाद
इस कविता में माँ और पुत्र का संवाद दिया गया है, परंतु कौन-सा कथन किसने कहा, यह नहीं बताया गया। नीचे कुछ कथनों को पहचानकर सही स्थान पर रखा गया है।
| पुत्र द्वारा कहे गए कथन | माँ द्वारा कहे गए कथन |
|---|---|
| 1. “माँ, कह एक कहानी।” | 1. “बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?” |
| 2. “हाँ, माँ, यही कहानी।” | 2. “तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे…” |
| 3. “करुणा-भरी कहानी!” | 3. “गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से…” |
| 4. “कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?” | 4. “राहुल, तू निर्णय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है किसका?” |
शब्द से जुड़े शब्द / पंक्ति से पंक्ति
शब्द से जुड़े शब्द
रिक्त स्थानों में प्रकृति से जुड़े शब्द कविता में से चुनकर लिखिए।
पंक्ति से पंक्ति
स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दिए गए उनके अर्थ से मिलाइए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (अर्थ) |
|---|---|
| 1. कहती है मुझसे यह चेटी | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| 2. तू है हठी मानधन मेरे | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 3. झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे | हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | तेज़ धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 5. हुआ विवाद सदय-निर्दय में | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसका। | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 7. तूने गुनी कहानी। | तूने कहानी को समझ लिया है। |
| 8. उभय आग्रही थे स्वविषय में | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी। | तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी! | न्याय में दया सम्मिलित होती है; न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
कविता की रचना / रूप बदलकर / विराम चिह्न
कविता की रचना
“राजा था या रानी? / राजा था या रानी? / माँ, कह एक कहानी।” – इन पंक्तियों की तरह पूरी कविता में अनेक स्थानों पर कुछ पंक्तियाँ दो बार आई हैं।
(क) इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये दिखाई देती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
रूप बदलकर
“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, / तात भ्रमण करते थे तेरे,” इन पंक्तियों को गद्य रूप में बदलकर लिखिए। (उदाहरण – “सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे…”)
कविता में विराम चिह्न
नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए।
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!
न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”यहाँ अल्प विराम ( , ), पूर्ण विराम ( । ), प्रश्नवाचक ( ? ), विस्मयादिबोधक ( ! ) तथा उद्धरण ( “ ” ) चिह्नों का प्रयोग हुआ है।
पाठ से आगे (आपकी बात आदि)
आपकी बात
(क) “सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,” – आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं? और क्यों?
(ख) इस पाठ में एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?
(ग) माँ ने कहानी सुनाने के बीच में एक प्रश्न पूछ लिया था। क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?
(घ) कविता में बालक अपनी माँ से बार-बार ‘वही’ कहानी सुनने की हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्यों?
निर्णय करें
“राहुल, तू निर्णय कर इसका–” नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। बताइए कि इन स्थितियों में आप क्या करेंगे?
सुनी कहानी
अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए।
आज की पहेली
नीचे दी गई पहेलियों के उत्तर कविता में से मिलेंगे। पहेलियाँ बूझिए।
खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता किस काव्य-कृति से ली गई है और इसके रचयिता कौन हैं?
2. उपवन का दृश्य कविता में किस प्रकार चित्रित हुआ है?
3. घायल हंस को लेकर पिता और शिकारी के बीच विवाद क्यों हुआ?
4. बालक राहुल ने न्याय के विषय में क्या उत्तर दिया?
5. माँ ने कहानी का निर्णय स्वयं न करके बेटे से क्यों करवाया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कविता की संवाद-शैली एवं भाषा-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
8. कविता के आधार पर ‘सच्चे न्याय’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘माँ, कह एक कहानी’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सूरदास
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) रामधारी सिंह दिनकर
2. यह कविता मैथिलीशरण गुप्त की किस काव्य-कृति से ली गई है?
(क) साकेत
(ख) भारत-भारती
(ग) यशोधरा
(घ) पंचवटी
3. कविता में माँ किसके बीच की कहानी सुना रही है?
(क) राजा और रानी
(ख) हंस और मोर
(ग) रक्षक पिता और शिकारी (आखेटक)
(घ) नानी और बेटी
4. ‘चेटी’ शब्द का अर्थ है—
(क) रानी
(ख) दासी/सेविका
(ग) बहन
(घ) माँ
5. उपवन में अचानक क्या घटना घटी?
(क) एक हंस बाण से घायल होकर गिर पड़ा
(ख) तेज़ वर्षा होने लगी
(ग) एक राजा आ पहुँचा
(घ) फूल मुरझा गए
6. घायल हंस को सबसे पहले किसने उठाया?
(क) शिकारी ने
(ख) माँ ने
(ग) राहुल ने
(घ) राहुल के पिता (तात) ने
7. ‘आखेटक’ का अर्थ है—
(क) माली
(ख) शिकारी
(ग) न्यायाधीश
(घ) सैनिक
8. विवाद का निपटारा अंततः कहाँ पहुँचा?
(क) राजा के दरबार में
(ख) न्यायालय में
(ग) उपवन में
(घ) विद्यालय में
9. बालक राहुल के अनुसार न्याय किसका पक्ष लेता है?
(क) मारने वाले (भक्षक) का
(ख) बचाने वाले (रक्षक) का
(ग) धनी व्यक्ति का
(घ) बलवान का
10. इस कविता की प्रमुख शैली कौन-सी है?
(क) हास्य शैली
(ख) संवादात्मक शैली
(ग) पत्र शैली
(घ) आत्मकथा शैली
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बालक राहुल माँ से बार-बार कहानी सुनाने की हठ करता है।
कारण (R): राहुल जिज्ञासु एवं सरल स्वभाव का बालक है, जिसे कहानी सुनने का बहुत शौक है।
2. अभिकथन (A): माँ ने कहानी का अंत स्वयं न करके राहुल से निर्णय करवाया।
कारण (R): माँ बालक में सही-गलत पहचानने का विवेक एवं निर्णय-शक्ति विकसित करना चाहती थी।
3. अभिकथन (A): कविता के अनुसार न्याय सदा मारने वाले का पक्ष लेता है।
कारण (R): बालक कहता है “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।”
4. अभिकथन (A): राहुल के पिता ने घायल हंस की रक्षा की।
कारण (R): शिकारी ने हंस को बाण से घायल किया था और वह उसे अपना शिकार मान रहा था।
5. अभिकथन (A): ‘माँ, कह एक कहानी’ संवादात्मक शैली की कविता है।
कारण (R): यह कविता पूरी तरह माँ और पुत्र की आपसी बातचीत के रूप में रची गई है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- कविता संवाद-शैली में है – उत्तर लिखते समय यह अवश्य लिखें कि कौन-सी पंक्ति माँ की है और कौन-सी राहुल की।
- केंद्रीय भाव से जुड़ी पंक्ति “रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी” याद रखें – यह प्रायः पूछी जाती है।
- पात्र-परिचय याद रखें: माँ = यशोधरा, बेटा = राहुल, तात = सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध)।
- कठिन शब्दों (चेटी, खग, बिद्ध, खर-शर, सदय, निर्दय, उभय) के अर्थ रटें; ये शब्दार्थ एवं MCQ में आते हैं।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- कवि को ‘सूरदास’ या ‘तुलसीदास’ न लिखें – इस कविता के रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं।
- ‘तात’ का अर्थ ‘चाचा’ नहीं, बल्कि ‘पिता’ है।
- न्याय का पक्ष भक्षक (शिकारी) की ओर न बताएँ – बालक के अनुसार न्याय रक्षक के पक्ष में है।
- देवनागरी वर्तनी सावधानी से लिखें – जैसे बिद्ध, खर-शर, सुरभि, निरपराध आदि।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘माँ, कह एक कहानी’ कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) हैं। यह कविता उनकी काव्य-कृति ‘यशोधरा’ से ली गई है।
कविता में माँ, बेटा और पिता कौन हैं?
माँ यशोधरा हैं, बेटा राहुल है तथा पिता (तात) सिद्धार्थ हैं, जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए।
कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा न्याय दया एवं करुणा से युक्त होता है तथा न्याय सदा निर्दोष की रक्षा करने वाले (रक्षक) का पक्ष लेता है, मारने वाले (भक्षक) का नहीं।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
