कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 3 – फूल और काँटा (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 3 ‘फूल और काँटा’ (कवि – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवि परिचय – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- कविता का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शब्द से जुड़े शब्द / बड़प्पन
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
- विशेषण
- आपकी बात / सृजन
- पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में हुआ था। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक एवं सरल कविताएँ लिखीं; प्रसिद्ध बाल-कविता “उठो लाल, अब आँखें खोलो” भी उन्हीं की रचना है। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनके अनेक कविता-संकलन प्रकाशित हैं, जिनमें चंद्र-खिलौना तथा खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं। सरल, मधुर एवं भावपूर्ण भाषा उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता है।
कविता (मूल पाठ)
‘फूल और काँटा’ में कवि एक ही पौधे पर उगने वाले फूल और काँटे के उदाहरण से यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके कुल से नहीं, उसके गुणों एवं कर्मों से पहचाना जाता है।
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।
मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।
छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।
फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली का जी खिला।
है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।
— अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चाँद भी दोनों पर समान रूप से चमकता है और एक-सी चाँदनी बरसाता है। आशय यह कि प्रकृति दोनों के साथ एक-सा व्यवहार करती है, उनमें कोई भेदभाव नहीं करती।
दूसरा पद: वर्षा (मेह) भी दोनों पर समान रूप से बरसती है और एक-सी हवाएँ दोनों पर बहती हैं। फिर भी यह सदा दिखाई देता है कि फूल और काँटे का स्वभाव (ढंग) एक-सा नहीं होता। समान देखभाल पाकर भी दोनों के गुण एवं व्यवहार भिन्न होते हैं।
तीसरा पद: काँटा किसी की उँगलियों में चुभकर उन्हें छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र (वर बसन) फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है तथा भौंरे के काले शरीर (श्याम तन) को भी बेध (छेद) देता है। अर्थात् काँटे का स्वभाव दूसरों को कष्ट एवं हानि पहुँचाने वाला है।
चौथा पद: इसके विपरीत फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा (अद्भुत) रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं निराले रंगों से कली का मन प्रसन्न करके उसे खिला देता है। अर्थात् फूल का स्वभाव दूसरों को सुख, सुगंध एवं प्रसन्नता देने वाला है।
पाँचवाँ पद: इसी भिन्न स्वभाव के कारण काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवता के शीश (सिर) पर सुशोभित होता है। अंत में कवि प्रश्न करते हैं कि किसी का कुल (वंश) उसके किस काम आ सकता है, यदि उस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की कमी (कसर) है। तात्पर्य यह कि व्यक्ति का सम्मान उसके ऊँचे कुल से नहीं, बल्कि उसके अच्छे गुणों एवं कर्मों से होता है।
कविता का सार
‘फूल और काँटा’ अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित एक प्रेरक एवं प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें कवि ने फूल और काँटे के उदाहरण द्वारा यह गंभीर जीवन-संदेश दिया है कि मनुष्य का बड़प्पन उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं कर्मों से आँका जाता है। कवि बताते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उनका पालन-पोषण करता है। चाँद की चाँदनी, वर्षा की बूँदें और बहती हवाएँ — प्रकृति की ये सारी देन दोनों को समान रूप से मिलती हैं। प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती।
फिर भी दोनों का स्वभाव सर्वथा भिन्न है। काँटा अपने कठोर स्वभाव के कारण किसी की उँगलियों को छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के शरीर को भी बेध देता है — अर्थात् वह दूसरों को केवल कष्ट एवं हानि पहुँचाता है। इसके विपरीत फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से तितलियों को गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध और निराले रंगों से सबका मन प्रसन्न कर देता है। इसी भिन्नता का परिणाम यह होता है कि काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि वही फूल देवता के शीश पर चढ़कर सम्मान पाता है।
कविता के अंत में कवि एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं — जिस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की ही कमी हो, उसका ऊँचा कुल भला किस काम आएगा? इस प्रकार कविता हमें यह शिक्षा देती है कि समान परिस्थितियाँ पाकर भी व्यक्ति अपने स्वभाव एवं कर्मों से ही महान या तुच्छ बनता है। सच्चा सम्मान कुल या जन्म से नहीं, बल्कि अच्छे गुणों, उदारता एवं परोपकार से प्राप्त होता है। सरल भाषा, मधुर लय एवं सटीक प्रतीकों के कारण यह कविता बाल-मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जनम | जन्म, उत्पत्ति |
| पालता | पालन-पोषण करता है |
| चाँदनी | चाँद का प्रकाश |
| मेह | वर्षा, बारिश |
| हवायें | हवाएँ, पवन |
| ढंग | तरीका, स्वभाव |
| छेद कर | चुभाकर, छेदकर |
| उँगलियाँ | अँगुलियाँ |
| वर बसन | सुंदर/उत्तम वस्त्र |
| कतर | काट देना |
| भौंर | भौंरा, भ्रमर |
| बेध देता | छेद देता है, बींध देता है |
| श्याम तन | काला शरीर (भौंरे का) |
| अनूठा | अद्भुत, अनोखा |
| रस | मकरंद, मधु |
| निज | अपना |
| सुगंध | अच्छी महक, खुशबू |
| निराले | अनोखे, विशेष |
| कली का जी खिला देना | कली का मन प्रसन्न करना/खिलाना |
| खटकता | आँखों में चुभता, अप्रिय लगता |
| सोहता | सुशोभित होता, शोभा देता |
| सुर शीश | देवता के सिर (पर) |
| कुल | वंश, परिवार-परंपरा |
| बड़ाई | प्रशंसा, गौरव |
| बड़प्पन | श्रेष्ठता, महानता, बड़ा होने का भाव |
| कसर | कमी, अभाव |
मेरी समझ से
(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?
• काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
• काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।
• काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
• काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।
(2) कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?
• फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का।
• फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
• फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
• फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
(3) कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है?
• व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
• व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
• कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
• यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।
(4) कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
• धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
• कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
• बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
• कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।”
(ख) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”
मिलकर करें मिलान
इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए कि फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। दिए गए भावों को उपयुक्त प्रतीक (फूल/काँटा) से जोड़िए।
| प्रतीक | जुड़े भाव (मिलान) |
|---|---|
| फूल (कोमल, परोपकारी स्वभाव) | दया, परोपकार, प्रेम, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, प्रसन्नता, आनंद |
| काँटा (कठोर, कष्ट देने वाला स्वभाव) | स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा |
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो (फूल और काँटे) दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं?
(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया?
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
(घ) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” उदाहरण देकर समझाइए।
(ङ) “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?
(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।
शब्द से जुड़े शब्द / बड़प्पन
‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है — बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्त्व, गौरव।
‘बड़प्पन’ से जुड़े (भाव व्यक्त करने वाले) शब्द लिखिए।
नीचे दिए गए शब्दों में से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते हैं उन पर गोला बनाइए, और जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते उनके नीचे रेखा खींचिए।
| बड़प्पन के भाव (◯ गोला) | बड़प्पन के विपरीत भाव (रेखा) |
|---|---|
| सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना | अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन |
कविता की रचना
“निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘औ’ है। कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ (‘र’ वर्ण छोड़कर) लिखा गया है, क्योंकि कवि कविता की लय के अनुसार शब्द की अंतिम ध्वनि नहीं रखते। इसी प्रकार ‘प्यार में डूबी’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी’ तथा हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द तुकांत है।
(क) कविता की इन विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और पंक्तियाँ दी गई हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| कविता की विशेषता | उपयुक्त पंक्ति |
|---|---|
| 1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक ही पंक्ति में साथ-साथ आए हैं (अनुप्रास)। | 5. है सदा देता कली का जी खिला (साथ ही: 4. है खटकता एक सब की आँख में…) |
| 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | 3. फाड़ देता है किसी का वर बसन |
| 3. प्रश्न पूछा गया है। | 1. किस तरह कुल की बड़ाई काम दे |
| 4. प्राकृतिक वस्तुओं (पेड़-पौधों) में मानवीय कार्यों एवं भावनाओं का वर्णन (मानवीकरण)। | 6. फूल लेकर तितलियों को गोद में |
| 5. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग। | 4. है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर |
कविता का सौंदर्य
(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं; साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। प्रत्येक पंक्ति में जो शब्द सबसे उपयुक्त (जँचता) है, उस पर घेरा बनाइए।
| रिक्त पंक्ति (विकल्प) | उपयुक्त शब्द |
|---|---|
| … में उन पर चमकता … भी (रात/रात्रि/रजनी/निशा) — (शशि/चंद्रमा/चाँद/राकेश/इंदु) | रात में उन पर चमकता चाँद भी |
| … उन पर है बरसता एक सा (मेह/बादल/मेघ/जलद) | मेह उन पर है बरसता एक सा |
| एक सी उन पर … हैं बही (वायु/पवन/समीर/मारुत/बयारें/हवायें) | एक सी उन पर हवायें हैं बही |
(ख) अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि कौन-सा शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है और क्यों?
विशेषण
“भौंर का है बेध देता श्याम तन।” में ‘श्याम’ (काला) ‘तन’ (शरीर) की विशेषता बता रहा है, अतः ‘श्याम’ विशेषण है और ‘तन’ विशेष्य।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए।
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. भौंर का है बेध देता श्याम तन | श्याम | तन |
| 2. फाड़ देता है किसी का वर बसन | वर | बसन |
| 3. भौंर को अपना अनूठा रस पिला | अनूठा | रस |
| 4. निज सुगंधों औ निराले रंग से | निराले | रंग |
(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए।
आपकी बात / सृजन
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध एवं व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता एवं आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता एवं आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
(ग) ‘फूल’ और ‘काँटा’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए। (संकेत — नमक-चीनी; शांत-क्रोधी; खट्टा-मीठा; काला-सफेद; सुख-दुख आदि)
(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
सृजन
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। (ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत (संवाद) अपनी कल्पना से लिखिए।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
वाद-विवाद
विषय — ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है।’ इस पर विभिन्न समूह बनाकर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
आज की पहेली
नीचे कुछ ऐसे पेड़-पौधों के नाम/चित्र दिए गए हैं जिनमें फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते हैं। उन्हें सही जानकारी से जोड़िए।
| पौधा | फूल | काँटे | विशेषता |
|---|---|---|---|
| बबूल | पीले या सफेद छोटे गुच्छेदार | लंबे और नुकीले | ईंधन, चारे एवं औषधियों में उपयोगी |
| गुलाब | लाल, सफेद, गुलाबी आदि रंगों में | तने पर छोटे और तीखे | सजावटी पौधा; इत्र बनाने में प्रसिद्ध |
| नागफनी | पीले, नारंगी या गुलाबी रंग-बिरंगे | पूरी सतह पर छोटे या लंबे | सूखे क्षेत्रों में; सजावटी पौधा |
| बेर | छोटे और हल्के पीले | शाखाओं पर छोटे-छोटे | फल खाद्य एवं औषधीय |
| करौंदा | छोटे, सफेद एवं सुगंधित | शाखाओं पर छोटे-छोटे तीखे | फल से अचार, जैम, जेली; शुष्क-पहाड़ी क्षेत्रों में |
| नींबू | छोटे, सफेद-हल्के गुलाबी, सुगंधित गुच्छेदार | शाखाओं पर छोटे और तीखे | फल खट्टे एवं विटामिन-सी से भरपूर; पेय, अचार आदि में उपयोगी |
खोजबीन के लिए
रंग-बिरंगे फूलों एवं फूलों की घाटी से संबंधित कविताएँ/वीडियो खोजिए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
2. कविता में फूल और काँटे को कौन-कौन सी समान चीज़ें मिलती हैं?
3. काँटे का स्वभाव कैसा है? कविता के आधार पर बताइए।
4. फूल अपने व्यवहार से दूसरों को क्या-क्या देता है?
5. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. फूल और काँटे के स्वभाव की तुलना कीजिए और बताइए कि उनसे हमें क्या शिक्षा मिलती है।
7. “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि सच्चा बड़प्पन किसे कहते हैं।
8. इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ किसके प्रतीक हैं? प्रतीकों के माध्यम से कवि क्या समझाना चाहते हैं?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
2. कवि ‘हरिऔध’ का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?
(क) आजमगढ़
(ख) वाराणसी
(ग) उन्नाव
(घ) प्रयागराज
3. फूल और काँटा दोनों को क्या समान रूप से मिलता है?
(क) केवल चाँदनी
(ख) केवल वर्षा
(ग) चाँदनी, वर्षा और हवा
(घ) कुछ भी समान नहीं
4. कविता में काँटा किसको हानि पहुँचाता है?
(क) केवल उँगलियों को
(ख) उँगलियों, वस्त्र, तितली और भौंरे को
(ग) केवल फूल को
(घ) किसी को नहीं
5. ‘श्याम तन’ में ‘श्याम’ का अर्थ है—
(क) सुंदर
(ख) काला
(ग) कोमल
(घ) बड़ा
6. कविता के अनुसार फूल कहाँ सुशोभित होता है?
(क) सबकी आँखों में
(ख) देवता के शीश (सिर) पर
(ग) काँटे के पास
(घ) पानी में
7. ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ शब्द का अर्थ है—
(क) अधिकता
(ख) कमी, अभाव
(ग) सुंदरता
(घ) सम्मान
8. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
(क) कुल ही सम्मान का आधार है
(ख) गुण एवं कर्म ही सम्मान का आधार हैं
(ग) धन ही सबसे बड़ा है
(घ) काँटा फूल से श्रेष्ठ है
9. कविता में ‘फूल’ किसका प्रतीक है?
(क) बुराई एवं कठोरता का
(ख) अच्छाई, कोमलता एवं परोपकार का
(ग) स्वार्थ का
(घ) क्रोध का
10. कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ क्यों लिखा गया है?
(क) वर्तनी की भूल के कारण
(ख) कविता की लय बनाए रखने के लिए
(ग) शब्द का अर्थ बदलने के लिए
(घ) कठिन बनाने के लिए
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): फूल और काँटे को प्रकृति से समान देखभाल मिलती है।
कारण (R): दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा एवं हवा पड़ती है।
2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार व्यक्ति का सम्मान उसके कुल से होता है।
कारण (R): कवि कहते हैं — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”
3. अभिकथन (A): काँटा सबकी आँखों में खटकता है।
कारण (R): काँटा अपने कठोर स्वभाव से उँगलियों को छेदता, वस्त्र फाड़ता तथा तितली-भौंरे को हानि पहुँचाता है।
4. अभिकथन (A): फूल देवता के शीश पर सुशोभित होता है।
कारण (R): फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से सबको सुगंध एवं प्रसन्नता देता है।
5. अभिकथन (A): कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ का प्रयोग हुआ है।
कारण (R): यह कविता गद्य में लिखी गई है, इसलिए शब्द अधूरे हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- कविता की मुख्य पंक्तियाँ (“ढंग उनके एक से होते नहीं”, “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे…”) कंठस्थ रखें — भावार्थ एवं संदेश के प्रश्नों में ये बहुत काम आती हैं।
- फूल और काँटे की समानताएँ (एक पौधा, चाँदनी, वर्षा, हवा) तथा विभिन्नताएँ (स्वभाव) को अलग-अलग बिंदुओं में याद रखें।
- कविता का केंद्रीय संदेश — “सम्मान कुल से नहीं, गुण-कर्म से” — हर प्रकार के प्रश्न में उत्तर का आधार बनाएँ।
- शब्दार्थ एवं प्रतीकों (फूल = अच्छाई, काँटा = बुराई) को उदाहरण सहित लिखें, इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- कवि का नाम गलत न लिखें — सही नाम अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ है, न कि ‘हरिवंश’ या ‘हरिऔम’।
- यह मत समझें कि कविता काँटे को बुरा एवं फूल को अच्छा ‘ठहराने’ तक सीमित है — इसका असली संदेश गुण-कर्म से सम्मान है।
- ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ का अर्थ ‘कमी’ है, ‘अधिकता’ नहीं — अर्थ उलटकर मत लिखें।
- ‘श्याम तन’ को फूल/पौधे का नहीं, बल्कि भौंरे के काले शरीर का वर्णन समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘फूल और काँटा’ कविता के कवि कौन हैं?
‘फूल और काँटा’ कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हैं, जो बच्चों के लिए लिखी सरल एवं मधुर कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘फूल और काँटा’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश यह है कि व्यक्ति का सम्मान एवं बड़प्पन उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं अच्छे कर्मों से होता है।
कविता में फूल और काँटे में मुख्य अंतर क्या है?
फूल कोमल एवं परोपकारी है — वह सबको सुगंध एवं सुख देता है; जबकि काँटा कठोर एवं कष्टदायी है — वह दूसरों को हानि पहुँचाता है। इसी कारण फूल देवता के शीश पर सजता है और काँटा सबकी आँखों में खटकता है।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
