कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 3 — फूल और काँटा प्रश्न उत्तर और भावार्थ

फूल और काँटा प्रश्न उत्तर: कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 3 में हरिऔध की कविता का भावार्थ, सार, शब्दार्थ, अभ्यास, मुहावरे, विशेषण और पौधों की चित्र-पहेली समझें। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने हैं।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 3 रचनाकार: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ विधा: कविता स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 3 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 29–40, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

कवि परिचय – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में हुआ था। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक एवं सरल कविताएँ लिखीं; प्रसिद्ध बाल-कविता “उठो लाल, अब आँखें खोलो” भी उन्हीं की रचना है। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनके अनेक कविता-संकलन प्रकाशित हैं, जिनमें चंद्र-खिलौना तथा खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं। सरल, मधुर एवं भावपूर्ण भाषा उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता है।

कविता (मूल पाठ)

‘फूल और काँटा’ में कवि एक ही पौधे पर उगने वाले फूल और काँटे के उदाहरण से यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके कुल से नहीं, उसके गुणों एवं कर्मों से पहचाना जाता है।

हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।

मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।

छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।

फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी की खिला।

है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।

— अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
फूल और काँटा: एक ही गुलाब की शाखा पर गुलाबी फूल, हरी पत्तियाँ और नुकीले भूरे काँटे
एक ही गुलाब की शाखा पर फूल और काँटे का AI-सहायता से बनाया गया वनस्पति चित्र। कविता में इनके विरोधी व्यवहार मानवीय गुणों के प्रतीक हैं; चित्र किसी वास्तविक पौधे की तस्वीर नहीं है।

पाठांतर ध्यान दें: मुद्रित पृष्ठ 29 की मूल कविता में “है सदा देता कली जी की खिला।” है; पृष्ठ 34 की गतिविधि में “है सदा देता कली का जी खिला।” उद्धृत है। यहाँ मूल कविता के अनुसार “जी की कली खिलाना” का भाव मन को प्रसन्न करना लिया गया है।

भावार्थ

पहला पद: कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चाँद भी दोनों पर समान रूप से चमकता है और एक-सी चाँदनी बरसाता है। आशय यह कि कविता में दोनों को समान परिस्थितियाँ मिलती हैं; कवि आगे उनके भिन्न व्यवहार की तुलना करते हैं।

दूसरा पद: वर्षा (मेह) भी दोनों पर समान रूप से बरसती है और एक-सी हवाएँ दोनों पर बहती हैं। फिर भी यह सदा दिखाई देता है कि फूल और काँटे का स्वभाव (ढंग) एक-सा नहीं होता। समान देखभाल पाकर भी दोनों के गुण एवं व्यवहार भिन्न होते हैं।

तीसरा पद: काँटा किसी की उँगलियों में चुभकर उन्हें छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र (वर बसन) फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है तथा भौंरे के काले शरीर (श्याम तन) को भी बेध (छेद) देता है। अर्थात् काँटे का स्वभाव दूसरों को कष्ट एवं हानि पहुँचाने वाला है।

चौथा पद: इसके विपरीत फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा (अद्भुत) रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं निराले रंगों से मन की कली खिला देता है, अर्थात् सबका मन प्रसन्न करता है। अर्थात् फूल का स्वभाव दूसरों को सुख, सुगंध एवं प्रसन्नता देने वाला है।

पाँचवाँ पद: इसी भिन्न स्वभाव के कारण काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवता के शीश (सिर) पर सुशोभित होता है। अंत में कवि प्रश्न करते हैं कि किसी का कुल (वंश) उसके किस काम आ सकता है, यदि उस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की कमी (कसर) है। तात्पर्य यह कि व्यक्ति का सम्मान उसके ऊँचे कुल से नहीं, बल्कि उसके अच्छे गुणों एवं कर्मों से होता है।

कविता का सार

‘फूल और काँटा’ अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित एक प्रेरक एवं प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें कवि ने फूल और काँटे के उदाहरण द्वारा यह गंभीर जीवन-संदेश दिया है कि मनुष्य का बड़प्पन उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं कर्मों से आँका जाता है। कवि बताते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उनका पालन-पोषण करता है। चाँद की चाँदनी, वर्षा की बूँदें और बहती हवाएँ — प्रकृति की ये सारी देन दोनों को समान रूप से मिलती हैं। कविता में समान पौधा, चाँदनी, वर्षा और हवा उनकी समान परिस्थिति के संकेत हैं।

फिर भी दोनों का स्वभाव सर्वथा भिन्न है। काँटा अपने कठोर स्वभाव के कारण किसी की उँगलियों को छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के शरीर को भी बेध देता है — अर्थात् वह दूसरों को केवल कष्ट एवं हानि पहुँचाता है। इसके विपरीत फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से तितलियों को गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध और निराले रंगों से सबका मन प्रसन्न कर देता है। इसी भिन्नता का परिणाम यह होता है कि काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि वही फूल देवता के शीश पर चढ़कर सम्मान पाता है।

कविता के अंत में कवि एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं — जिस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की ही कमी हो, उसका ऊँचा कुल भला किस काम आएगा? इस प्रकार कविता हमें यह शिक्षा देती है कि समान परिस्थितियाँ पाकर भी व्यक्ति अपने स्वभाव एवं कर्मों से ही महान या तुच्छ बनता है। सच्चा सम्मान कुल या जन्म से नहीं, बल्कि अच्छे गुणों, उदारता एवं परोपकार से प्राप्त होता है। सरल भाषा, मधुर लय एवं सटीक प्रतीकों के कारण यह कविता बाल-मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।

कविता फूल और काँटे को मानवीय गुणों के प्रतीक बनाती है। इसका अर्थ वास्तविक काँटों को बुरा या व्यर्थ कहना नहीं है; अनेक पौधों के काँटे रक्षा में सहायक होते हैं। पाठ के आगे के संवाद और वाद-विवाद में इसी दूसरे पक्ष पर सोचिए।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
जनमजन्म, उत्पत्ति
पालतापालन-पोषण करता है
चाँदनीचाँद का प्रकाश
मेहवर्षा, बारिश
हवायेंहवाएँ, पवन
ढंगतरीका, स्वभाव
छेद करचुभाकर, छेदकर
उँगलियाँअँगुलियाँ
वर बसनसुंदर/उत्तम वस्त्र
कतरकाट देना
भौंरभौंरा, भ्रमर
बेध देताछेद देता है, बींध देता है
श्याम तनकाला शरीर (भौंरे का)
अनूठाअद्भुत, अनोखा
रसमकरंद, मधु
निजअपना
सुगंधअच्छी महक, खुशबू
निरालेअनोखे, विशेष
कली का जी खिला देनाकली का मन प्रसन्न करना/खिलाना
खटकताआँखों में चुभता, अप्रिय लगता
सोहतासुशोभित होता, शोभा देता
सुर शीशदेवता के सिर (पर)
कुलवंश, परिवार-परंपरा
बड़ाईप्रशंसा, गौरव
बड़प्पनश्रेष्ठता, महानता, बड़ा होने का भाव
कसरकमी, अभाव

मेरी समझ से

(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?

• काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।

• काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।

• काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।

• काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।

उत्तर★ काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।कविता में स्पष्ट कहा गया है — “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” अतः यही कथन सत्य है। शेष कथन कविता में नहीं आए हैं।

(2) कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?

• फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का।

• फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।

• फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।

• फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।

उत्तर★ फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं तथा ★ फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।कविता दोनों की समानता (एक ही पौधा, समान चाँदनी, वर्षा एवं हवा) तथा विभिन्नता (एक कष्ट देता है, दूसरा सुख) — दोनों को दर्शाती है, इसलिए ये दोनों कथन सही हैं।

(3) कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है?

• व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।

• व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।

• कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।

• यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।

उत्तर★ व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं तथा ★ यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।कविता का संदेश है कि सम्मान कुल से नहीं, गुणों एवं कर्मों से मिलता है; और अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति से उसके कुल को भी प्रसिद्धि प्राप्त होती है — इसलिए ये दोनों निष्कर्ष उपयुक्त हैं।

(4) कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?

• धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।

• कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।

• बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।

• कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।

उत्तर★ बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।यही कविता का केंद्रीय भाव है — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” अर्थात् सच्चा बड़प्पन गुणों एवं कर्मों से ही आँका जाता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता की सीधी पंक्तियों को आधार बनाया — जैसे काँटे के बारे में वही कथन चुना जो पाठ में लिखा है।कुछ प्रश्नों में एक से अधिक उत्तर इसलिए संभव हैं क्योंकि कविता समानता और भिन्नता दोनों दिखाती है। परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों का अर्थ है कि वर्षा और हवा — प्रकृति की देन फूल और काँटे दोनों को समान रूप से मिलती हैं; प्रकृति किसी में भेदभाव नहीं करती।फिर भी दोनों का ‘ढंग’ अर्थात् स्वभाव एक-सा नहीं होता। तात्पर्य यह कि समान परिस्थितियाँ एवं समान अवसर पाकर भी हर व्यक्ति या वस्तु का स्वभाव एवं आचरण अलग-अलग होता है।

(ख) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”

अर्थ/विचारकवि प्रश्न के रूप में कहते हैं कि जिस व्यक्ति में स्वयं बड़प्पन (श्रेष्ठता) की कमी हो, उसका ऊँचा कुल (वंश) उसके किस काम आ सकता है।आशय यह है कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई महान नहीं बन जाता; सच्ची प्रतिष्ठा व्यक्ति के अपने अच्छे गुणों, स्वभाव एवं कर्मों से ही प्राप्त होती है।

मिलकर करें मिलान

इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए कि फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। दिए गए भावों को उपयुक्त प्रतीक (फूल/काँटा) से जोड़िए।

प्रतीकजुड़े भाव (मिलान)
फूल (कोमल, परोपकारी स्वभाव)दया, परोपकार, प्रेम, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, प्रसन्नता, आनंद
काँटा (कठोर, कष्ट देने वाला स्वभाव)स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा
मार्गदर्शनफूल कोमलता एवं भलाई का प्रतीक है, इसलिए उससे दया, परोपकार, प्रेम, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, प्रसन्नता एवं आनंद जैसे शुभ भाव जुड़ते हैं।काँटा कठोरता एवं कष्ट का प्रतीक है, इसलिए उससे स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता एवं पीड़ा जैसे भाव जुड़ते हैं। समूह में चर्चा करके इन प्रतीकों के अन्य उदाहरण भी सोचे जा सकते हैं।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो (फूल और काँटे) दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं?

उत्तरकविता में निम्नलिखित समानताएँ बताई गई हैं — (1) दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं, (2) एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है, (3) चाँद दोनों पर एक-सी चाँदनी डालता है, (4) वर्षा दोनों पर समान रूप से बरसती है, तथा (5) एक-सी हवाएँ दोनों पर बहती हैं।अर्थात् प्रकृति की सभी देन दोनों को समान रूप से प्राप्त होती हैं।

(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया?

उत्तरमुख्य अंतर स्वभाव का है। काँटा कठोर एवं कष्टदायी है — वह उँगलियों को छेदता है, वस्त्र फाड़ता है तथा तितली व भौंरे को हानि पहुँचाता है।इसके विपरीत फूल कोमल एवं परोपकारी है — वह तितली को गोद देता है, भौंरे को रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं रंगों से सबको प्रसन्न करता है। इसी कारण काँटा सबकी आँखों में खटकता है और फूल देवता के शीश पर सुशोभित होता है।

(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरकविता में मुख्य रूप से यह बात कही गई है कि व्यक्ति का सम्मान एवं बड़प्पन उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं कर्मों से होता है।फूल और काँटा एक ही पौधे पर समान देखभाल पाकर भी अपने भिन्न स्वभाव के कारण भिन्न आदर पाते हैं — ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी अपने अच्छे या बुरे कर्मों से ही महान या तुच्छ समझा जाता है।

(घ) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तरइसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति में स्वयं अच्छे गुणों एवं बड़प्पन की कमी हो, उसका ऊँचा कुल उसके किसी काम का नहीं रहता।उदाहरण: यदि किसी प्रतिष्ठित परिवार का बालक झूठ बोले, दूसरों को कष्ट दे और परिश्रम न करे, तो उसका प्रसिद्ध कुल उसे सम्मान नहीं दिला सकता। इसके विपरीत साधारण परिवार में जन्मे ईमानदार, परिश्रमी एवं परोपकारी व्यक्ति को समाज सिर-आँखों पर बिठाता है। अतः बड़प्पन कुल से नहीं, गुणों से आता है।

(ङ) “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?

उत्तरलोग ऐसे व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं जो फूल के समान कोमल, विनम्र, परोपकारी एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा दूसरों को सुख एवं सहायता देते हैं।इसके विपरीत लोग काँटे के समान कठोर, स्वार्थी, अहंकारी एवं दूसरों को कष्ट पहुँचाने वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं, क्योंकि ऐसे लोग सबकी आँखों में खटकते हैं।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)यदि चाँदनी, हवा और वर्षा केवल एक ही पौधे को मिले, तो शेष पौधे मुरझाए, सूखे एवं निर्जीव दिखाई देंगे; उनकी पत्तियाँ पीली पड़ जाएँगी और वे धीरे-धीरे सूखकर नष्ट हो जाएँगे।जल एवं वायु के बिना उनका जीवन संभव ही नहीं है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि प्रकृति का समान एवं निष्पक्ष व्यवहार सभी जीवों के जीवन के लिए आवश्यक है।

(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो प्रकृति की विविधता एवं सुंदरता समाप्त हो जाती; न रंग-बिरंगे फूल होते, न भिन्न-भिन्न फल, न अलग-अलग सुगंध।संसार नीरस एवं एकरस लगता। विविधता ही प्रकृति का सौंदर्य है; इसी कारण दुनिया रंगीन, रोचक एवं संतुलित बनी रहती है।

(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)यदि काँटे न होते तो पौधों को पशुओं एवं हानिकारक जीवों से सुरक्षा नहीं मिल पाती, क्योंकि काँटे पौधे की रक्षा भी करते हैं।केवल फूल देखने में तो सुंदर लगते, पर सुरक्षा के अभाव में बहुत-से पौधे जल्दी नष्ट हो जाते। इससे यह समझ आता है कि प्रकृति में हर वस्तु का अपना उपयोग एवं महत्त्व है — काँटे का भी।

(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?

उत्तर (नमूना संवाद)तितली: “काँटे भाई! सब तुमसे डरते हैं, पर मैं तुमसे मित्रता करना चाहती हूँ। क्या तुम मुझे कष्ट तो नहीं दोगे?”काँटा: “प्रिय तितली! लोग मुझे चुभने वाला समझते हैं, पर मैं तो पौधे की रक्षा करता हूँ। यदि तुम सावधानी से पास आओगी तो मैं तुम्हें कभी हानि नहीं पहुँचाऊँगा; बल्कि मैं तुम्हें और फूलों को शत्रुओं से बचाऊँगा।”तितली: “तब तो तुम भी अच्छे हो! आज से हम मित्र हैं।”

(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)मैं फूल और काँटे — दोनों के अच्छे गुणों को अपनाना चाहूँगा। फूल से मैं कोमलता, परोपकार, मधुर व्यवहार एवं दूसरों को प्रसन्न रखने का गुण सीखूँगा।काँटे से मैं आत्म-रक्षा, दृढ़ता एवं अपने तथा दूसरों की रक्षा करने का साहस सीखूँगा। इस प्रकार कोमल स्वभाव के साथ आवश्यक दृढ़ता रखकर मैं एक संतुलित एवं उपयोगी जीवन जी सकूँगा।

शब्द से जुड़े शब्द / बड़प्पन

‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है — बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्त्व, गौरव।

‘बड़प्पन’ से जुड़े (भाव व्यक्त करने वाले) शब्द लिखिए।

उत्तरसंतोष, उदारता, विनम्रता, त्याग, सहनशीलता, दया, सम्मान, आदर, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना, समर्पण आदि।

नीचे दिए गए शब्दों में से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते हैं उन पर गोला बनाइए, और जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते उनके नीचे रेखा खींचिए।

बड़प्पन के भाव (◯ गोला)बड़प्पन के विपरीत भाव (रेखा)
सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावनाअहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन
उत्तरबड़प्पन के भाव वाले शब्द: सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना।बड़प्पन का भाव व्यक्त न करने वाले शब्द: अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन।

कविता की रचना

पृष्ठ 34 की गतिविधि में “निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।” उद्धृत है। मूल कविता के पाठांतर का नोट ऊपर देखें।

(क) कविता की विशेषताएँ

“औ” का अर्थ “और” है। “प्यार-डूबी” का विस्तार “प्यार में डूबी” है। संक्षिप्त शब्द कविता की लय में बैठते हैं। तुकांत जोड़े: पालता–डालता, बही–नहीं, बसन–तन, पिला–खिला, पर–कसर। फूल और काँटे प्रतीक हैं; उन्हें गोद लेने, रस पिलाने जैसे मानवीय काम करते दिखाया गया है।

(ख) विशेषता और पंक्ति का मिलान

विशेषता का मूल क्रमपंक्ति का मूल क्रम और कारण
1. एक ही वर्ण से शुरू होते पास-पास शब्द2 — “अपना अनूठा” दोनों ‘अ’ से शुरू। पंक्ति 4 में “सोहता सुर” और गतिविधि की पंक्ति 5 में “कली का” भी उदाहरण हैं।
2. मुहावरा4 — “आँख में खटकना”: अप्रिय लगना। “वर बसन फाड़ देना” वस्त्र फटने का सीधा वर्णन है, मुहावरा नहीं।
3. प्रश्न1 — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे”
4. मानवीकरण6 — “फूल लेकर तितलियों को गोद में”; पंक्ति 2 का रस पिलाना भी उपयुक्त है।
5. विपरीत प्रभाव4 — काँटा आँख में खटकता है, फूल देवता के शीश पर सोहता है। ये प्रसंग में विपरीत भाव हैं; “एक” और “दूसरा” शब्दकोशीय विलोम नहीं हैं।

मुख्य मिलान: 1→2, 2→4, 3→1, 4→6, 5→4। जहाँ उपयुक्त हो, कारण सहित अन्य पंक्ति भी स्वीकार की जा सकती है।

कविता का सौंदर्य

(क) सबसे उपयुक्त शब्द चुनिए

मूल कविता की पंक्तिचुने शब्द
रात में उन पर चमकता चाँद भीरात; चाँद
मेह उन पर है बरसता एक सामेह — वर्षा
एक सी उन पर हवायें हैं बहीहवायें — आज की सामान्य वर्तनी ‘हवाएँ’

(ख) समूह में चर्चा — नमूना कारण

मूल कविता के शब्द अर्थ और लय के साथ बैठते हैं। ‘मेह’ यहाँ वर्षा है; ‘मेघ’ बादल है, इसलिए दोनों को हर प्रसंग में एक जैसा नहीं मानेंगे। ‘हवाएँ’ स्त्रीलिंग बहुवचन है और ‘हैं बही’ से मेल खाता है। ‘पवन’ या ‘समीर’ रखने पर क्रिया भी बदलनी पड़ती। समूह में अलग चुनाव करें तो अर्थ, लय और व्याकरण का कारण दें; यह दावा न करें कि बिना चर्चा सभी साथी एक ही शब्द चुनेंगे।

विशेषण

जो शब्द संज्ञा की विशेषता बताए वह विशेषण है; जिस संज्ञा की विशेषता बताई जाए वह विशेष्य है।

(क) विशेषण–विशेष्य

अभ्यास की पंक्तिविशेषणविशेष्य
1. भौंर का है बेध देता श्याम तनश्यामतन
2. फाड़ देता है किसी का वर बसनवर — उत्तम / सुंदरबसन
3. भौंर को अपना अनूठा रस पिलाअनूठा; ‘अपना’ भी संबंध बताता हैरस
4. निज सुगंधों औ निराले ढंग सेनिराले; ‘निज’ भी संबंध बताता हैढंग; निज→सुगंधों

पृष्ठ 35 के विशेषण अभ्यास में ‘ढंग’ है, जबकि पृष्ठ 29 की मूल कविता में ‘रंग’ है। अभ्यास के अनुसार निराले→ढंग; मूल कविता का संदर्भ लें तो निराले→रंग लिखें। ‘निज’ और ‘अपना’ यहाँ संज्ञा के साथ आए सार्वनामिक विशेषण हैं।

(ख) अपने विशेषण लिखिए — नमूने

फूल—सुगंधित; काँटा—नुकीला; मेह—मूसलाधार; चाँद—चमकीला; रात—शांत। अन्य उचित विशेषण भी लिख सकते हैं।

आपकी बात / सृजन

(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)मैं फूल को चुनूँगा, क्योंकि फूल कोमल, सुगंधित एवं परोपकारी होता है। वह तितलियों को गोद देता है, भौंरे को रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं सुंदरता से सबका मन प्रसन्न करता है।फूल दूसरों को सुख एवं आनंद देता है, इसलिए वह सबका प्रिय है और देवता के शीश तक पर सुशोभित होता है। (विद्यार्थी चाहें तो रक्षा-गुण के कारण काँटे को भी अपने तर्क सहित चुन सकते हैं।)

(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध एवं व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता एवं आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता एवं आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)मैं सबसे मीठा एवं विनम्र व्यवहार करता हूँ, बड़ों का आदर एवं छोटों से स्नेह करता हूँ, मित्रों की पढ़ाई में सहायता करता हूँ तथा किसी के दुखी होने पर उसे सांत्वना देता हूँ।आगे मैं और भी कर सकता हूँ — घर के काम में हाथ बँटाना, बीमार की सेवा करना, साथियों से झगड़ा न करना, सबकी प्रशंसा करना एवं जरूरतमंद की मदद करना। इन कार्यों से चारों ओर प्रसन्नता एवं आनंद फैलता है।

(ग) ‘फूल’ और ‘काँटा’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए। (संकेत — नमक-चीनी; शांत-क्रोधी; खट्टा-मीठा; काला-सफेद; सुख-दुख आदि)

उत्तरवस्तुएँ: नमक और चीनी, दूध और नींबू। स्वभाव: शांत और क्रोधी, उदार और कंजूस।स्वाद: खट्टा और मीठा, तीखा और फीका। रंग: काला और सफेद। अनुभव: सुख और दुख, हँसी और आँसू। ये सभी एक-दूसरे से भिन्न होते हुए भी जीवन में साथ-साथ पाए जाते हैं।

(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।

उत्तर (नमूना / मार्गदर्शन)समस्या: मेरे आस-पास सड़कों एवं गलियों में फैली गंदगी काँटे के समान है — यह बीमारियाँ फैलाती है, बदबू देती है तथा सबको कष्ट पहुँचाती है।समाधान: कूड़ा कूड़ेदान में ही डालें, मिलकर सफाई-अभियान चलाएँ, गीले-सूखे कचरे को अलग रखें तथा दूसरों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करें। इस प्रकार इस ‘काँटे’ रूपी समस्या को दूर किया जा सकता है।

सृजन

(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। (ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत (संवाद) अपनी कल्पना से लिखिए।

उत्तर (नमूना संवाद)फूल: “मैं दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ। तितलियाँ एवं भौंरे मुझ पर मँडराते हैं और देवता मुझे अपने शीश पर सजाते हैं।”काँटा: “और मैं संघर्ष की याद दिलाने तथा पौधे को सुरक्षा देने के लिए हूँ। भले ही लोग मुझे चुभने वाला समझें, पर मैं तुम्हारी और पौधे की रक्षा करता हूँ।”फूल: “सच है मित्र! तुम्हारी रक्षा के कारण ही मैं निश्चिंत होकर खिल पाता हूँ। हम दोनों एक ही पौधे के अंग हैं और दोनों का अपना महत्त्व है।”(चित्र: एक पौधे पर खिला रंग-बिरंगा फूल, उस पर मँडराती तितली एवं भौंरा, और शाखा पर नुकीले काँटे — अपनी कल्पना एवं उपलब्ध रंगों से बनाइए।)

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

वाद-विवाद

विषय — ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है।’ इस पर विभिन्न समूह बनाकर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन-तर्क)फूल के पक्ष में: फूल कोमलता, प्रेम, सुगंध एवं सुख देता है; वह जीवन को सुंदर एवं आनंदमय बनाता है, इसलिए जीवन में फूल जैसे कोमल एवं परोपकारी गुण आवश्यक हैं।काँटे के पक्ष में: काँटा रक्षा करता है तथा संघर्ष एवं सावधानी का प्रतीक है; जीवन में कठिनाइयाँ (काँटे) ही हमें दृढ़, सहनशील एवं सतर्क बनाती हैं।निष्कर्ष: जैसे एक ही पौधे पर फूल एवं काँटा दोनों होते हैं, वैसे ही जीवन में सुख-दुख एवं कोमलता-दृढ़ता दोनों की आवश्यकता है। (पुस्तक के अनुसार 7–8 समूह बनाएँ: लगभग आधे फूल के पक्ष में, शेष काँटे के पक्ष में और एक निर्णायक समूह। तैयारी के लिए 15 मिनट, वक्तव्य के लिए 3–4 मिनट और प्रतिवाद के लिए 1–2 मिनट रखें। बीच में न टोकें; विषय-वस्तु, भाषा और प्रस्तुति पर मूल्यांकन करें।)

आज की पहेली — चित्रों का सही मिलान

पृष्ठ 39 के चित्रों को ऊपर से नीचे 1 नागफनी, 2 बेर, 3 नीबू, 4 गुलाब, 5 बबूल, 6 करौंदा गिनें। बाईं ओर दिए नामों का मूल क्रम बनाए रखने पर मिलान:

नाम का मूल क्रमचित्र का क्रमपहचान का संकेत
1. बबूल5छोटी संयुक्त पत्तियाँ, पीले गोल पुष्प-गुच्छे
2. गुलाब4गुलाबी फूल और तने पर काँटे
3. नागफनी1मोटे चपटे हरे खंड और काँटे
4. बेर2डाल पर गोल पीले-हरे फल
5. करौंदा6लाल, कुछ लंबे फल
6. नीबू3पीले नीबू के फल

मिलान: 1→5, 2→4, 3→1, 4→2, 5→6, 6→3। फूलों का रंग और पौधे का रूप प्रजाति व अवस्था के अनुसार बदल सकते हैं; चित्रों की पहचान इस पृष्ठ में दिखे संकेतों पर आधारित है। पौधों को बिना तोड़े देखें और काँटे न छुएँ।

खोजबीन के लिए

रंग-बिरंगे फूलों एवं फूलों की घाटी से संबंधित कविताएँ/वीडियो खोजिए।

उत्तर (गतिविधि)यह खोजबीन गतिविधि है। बड़ों के मार्गदर्शन में रंग-बिरंगे फूलों एवं ‘फूलों की घाटी’ पर आधारित कविताएँ एवं वीडियो देखे-सुने जा सकते हैं तथा उनके बारे में कक्षा में चर्चा की जा सकती है।इसके अतिरिक्त अपने आस-पास के बगीचे एवं पौधों को ध्यान से देखकर भी विभिन्न फूलों एवं काँटों की जानकारी एकत्र की जा सकती है।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।

उत्तरइस कविता के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हैं। उनका जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक सरल एवं रोचक कविताएँ लिखीं; उनकी रचना ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली का पहला महाकाव्य मानी जाती है।

2. कविता में फूल और काँटे को कौन-कौन सी समान चीज़ें मिलती हैं?

उत्तरदोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उन्हें पालता है। चाँद की एक-सी चाँदनी, समान रूप से बरसती वर्षा (मेह) तथा एक-सी हवाएँ — प्रकृति की ये सारी देन दोनों को बराबर मिलती हैं।

3. काँटे का स्वभाव कैसा है? कविता के आधार पर बताइए।

उत्तरकाँटे का स्वभाव कठोर एवं कष्टदायी है। वह किसी की उँगलियों को छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख काट देता है तथा भौंरे के शरीर को भी बेध देता है। इसी कारण वह सबकी आँखों में खटकता है।

4. फूल अपने व्यवहार से दूसरों को क्या-क्या देता है?

उत्तरफूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं निराले रंगों से मन की कली खिला देता है, अर्थात् सबका मन प्रसन्न करता है। अर्थात् वह सबको सुख एवं आनंद देता है।

5. कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तरकविता का मुख्य संदेश है कि व्यक्ति का सम्मान एवं बड़प्पन उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं अच्छे कर्मों से होता है। समान अवसर पाकर भी व्यक्ति अपने आचरण से ही महान या तुच्छ बनता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. फूल और काँटे के स्वभाव की तुलना कीजिए और बताइए कि उनसे हमें क्या शिक्षा मिलती है।

उत्तरफूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों को प्रकृति से समान चाँदनी, वर्षा एवं हवा मिलती है, फिर भी उनका स्वभाव बिलकुल विपरीत है। काँटा कठोर एवं कष्टदायी है — वह उँगलियों को छेदता है, वस्त्र फाड़ता है तथा तितली व भौंरे को हानि पहुँचाता है, इसलिए सबकी आँखों में खटकता है।इसके विपरीत फूल कोमल एवं परोपकारी है — वह तितली को गोद देता है, भौंरे को रस पिलाता है तथा सुगंध एवं रंगों से सबका मन प्रसन्न करता है, इसलिए वह देवता के शीश पर सुशोभित होता है। इनसे हमें शिक्षा मिलती है कि समान परिस्थितियों में रहकर भी हमें फूल के समान कोमल, उदार एवं परोपकारी बनना चाहिए, क्योंकि सच्चा सम्मान अच्छे स्वभाव एवं कर्मों से ही मिलता है।

7. “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि सच्चा बड़प्पन किसे कहते हैं।

उत्तरइस पंक्ति में कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति में स्वयं श्रेष्ठता (बड़प्पन) की कमी हो, उसका ऊँचा कुल किसी काम का नहीं रहता। अर्थात् केवल बड़े या प्रसिद्ध परिवार में जन्म लेने से कोई महान नहीं बन जाता।सच्चा बड़प्पन वह है जो व्यक्ति के अपने गुणों, मधुर स्वभाव, उदारता, विनम्रता, परिश्रम एवं परोपकार जैसे अच्छे कर्मों से प्रकट होता है। जैसे फूल अपने कोमल स्वभाव के कारण ही आदर पाता है, वैसे ही व्यक्ति अपने सद्गुणों एवं भले कार्यों से ही समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। इसलिए हमें कुल पर घमंड करने के बजाय अपने गुणों एवं कर्मों को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए।

8. इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ किसके प्रतीक हैं? प्रतीकों के माध्यम से कवि क्या समझाना चाहते हैं?

उत्तरइस कविता में ‘फूल’ अच्छाई, कोमलता, परोपकार, प्रेम एवं सद्गुणों का प्रतीक है, जबकि ‘काँटा’ बुराई, कठोरता, स्वार्थ एवं दूसरों को कष्ट देने वाले स्वभाव का प्रतीक है।इन प्रतीकों के माध्यम से कवि यह समझाना चाहते हैं कि संसार में अच्छे एवं बुरे — दोनों प्रकार के लोग साथ-साथ रहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे फूल और काँटा एक ही पौधे पर। समान परिस्थितियाँ पाकर भी कोई व्यक्ति अपने अच्छे गुणों से फूल की भाँति प्रिय एवं सम्मानित बनता है, और कोई अपने बुरे स्वभाव से काँटे की भाँति सबकी आँखों में खटकता है। कवि का संदेश है कि हमें अपने गुणों एवं कर्मों से फूल बनने का प्रयास करना चाहिए।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुमित्रानंदन पंत

(ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

(ग) मैथिलीशरण गुप्त

(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

उत्तर(ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

2. कवि ‘हरिऔध’ का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?

(क) आजमगढ़

(ख) वाराणसी

(ग) उन्नाव

(घ) प्रयागराज

उत्तर(क) आजमगढ़।

3. फूल और काँटा दोनों को क्या समान रूप से मिलता है?

(क) केवल चाँदनी

(ख) केवल वर्षा

(ग) चाँदनी, वर्षा और हवा

(घ) कुछ भी समान नहीं

उत्तर(ग) चाँदनी, वर्षा और हवा।

4. कविता में काँटा किसको हानि पहुँचाता है?

(क) केवल उँगलियों को

(ख) उँगलियों, वस्त्र, तितली और भौंरे को

(ग) केवल फूल को

(घ) किसी को नहीं

उत्तर(ख) उँगलियों, वस्त्र, तितली और भौंरे को।

5. ‘श्याम तन’ में ‘श्याम’ का अर्थ है—

(क) सुंदर

(ख) काला

(ग) कोमल

(घ) बड़ा

उत्तर(ख) काला। (श्याम तन = भौंरे का काला शरीर।)

6. कविता के अनुसार फूल कहाँ सुशोभित होता है?

(क) सबकी आँखों में

(ख) देवता के शीश (सिर) पर

(ग) काँटे के पास

(घ) पानी में

उत्तर(ख) देवता के शीश (सिर) पर।

7. ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ शब्द का अर्थ है—

(क) अधिकता

(ख) कमी, अभाव

(ग) सुंदरता

(घ) सम्मान

उत्तर(ख) कमी, अभाव।

8. कविता का मुख्य संदेश क्या है?

(क) कुल ही सम्मान का आधार है

(ख) गुण एवं कर्म ही सम्मान का आधार हैं

(ग) धन ही सबसे बड़ा है

(घ) काँटा फूल से श्रेष्ठ है

उत्तर(ख) गुण एवं कर्म ही सम्मान का आधार हैं।

9. कविता में ‘फूल’ किसका प्रतीक है?

(क) बुराई एवं कठोरता का

(ख) अच्छाई, कोमलता एवं परोपकार का

(ग) स्वार्थ का

(घ) क्रोध का

उत्तर(ख) अच्छाई, कोमलता एवं परोपकार का।

10. कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ क्यों लिखा गया है?

(क) वर्तनी की भूल के कारण

(ख) कविता की लय बनाए रखने के लिए

(ग) शब्द का अर्थ बदलने के लिए

(घ) कठिन बनाने के लिए

उत्तर(ख) कविता की लय बनाए रखने के लिए। कवि लय के अनुसार शब्द की अंतिम ध्वनि (‘र’) छोड़ देते हैं।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(क), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): फूल और काँटे को प्रकृति से समान देखभाल मिलती है।

कारण (R): दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा एवं हवा पड़ती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार व्यक्ति का सम्मान उसके कुल से होता है।

कारण (R): कवि कहते हैं — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”

उत्तर(घ) A गलत है (सम्मान कुल से नहीं, गुणों एवं कर्मों से होता है), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): काँटा सबकी आँखों में खटकता है।

कारण (R): काँटा अपने कठोर स्वभाव से उँगलियों को छेदता, वस्त्र फाड़ता तथा तितली-भौंरे को हानि पहुँचाता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): फूल देवता के शीश पर सुशोभित होता है।

कारण (R): फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से सबको सुगंध एवं प्रसन्नता देता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ का प्रयोग हुआ है।

कारण (R): यह कविता गद्य में लिखी गई है, इसलिए शब्द अधूरे हैं।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है — यह कविता (पद्य) है तथा ‘औ’ का प्रयोग लय बनाए रखने के लिए हुआ है, न कि गद्य के कारण।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • कविता की मुख्य पंक्तियाँ (“ढंग उनके एक से होते नहीं”, “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे…”) कंठस्थ रखें — भावार्थ एवं संदेश के प्रश्नों में ये बहुत काम आती हैं।
  • फूल और काँटे की समानताएँ (एक पौधा, चाँदनी, वर्षा, हवा) तथा विभिन्नताएँ (स्वभाव) को अलग-अलग बिंदुओं में याद रखें।
  • कविता का केंद्रीय संदेश — “सम्मान कुल से नहीं, गुण-कर्म से” — हर प्रकार के प्रश्न में उत्तर का आधार बनाएँ।
  • शब्दार्थ एवं प्रतीकों (फूल = अच्छाई, काँटा = बुराई) को उदाहरण सहित लिखें, इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • कवि का नाम गलत न लिखें — सही नाम अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ है, न कि ‘हरिवंश’ या ‘हरिऔम’।
  • यह मत समझें कि कविता काँटे को बुरा एवं फूल को अच्छा ‘ठहराने’ तक सीमित है — इसका असली संदेश गुण-कर्म से सम्मान है।
  • ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ का अर्थ ‘कमी’ है, ‘अधिकता’ नहीं — अर्थ उलटकर मत लिखें।
  • ‘श्याम तन’ को फूल/पौधे का नहीं, बल्कि भौंरे के काले शरीर का वर्णन समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘फूल और काँटा’ कविता के कवि कौन हैं?

‘फूल और काँटा’ कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हैं, जो बच्चों के लिए लिखी सरल एवं मधुर कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

‘फूल और काँटा’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश यह है कि व्यक्ति का सम्मान एवं बड़प्पन उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं अच्छे कर्मों से होता है।

कविता में फूल और काँटे में मुख्य अंतर क्या है?

फूल कोमल एवं परोपकारी है — वह सबको सुगंध एवं सुख देता है; जबकि काँटा कठोर एवं कष्टदायी है — वह दूसरों को हानि पहुँचाता है। इसी कारण फूल देवता के शीश पर सजता है और काँटा सबकी आँखों में खटकता है।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।

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