कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 4 — पानी रे पानी प्रश्न उत्तर और सार
पानी रे पानी प्रश्न उत्तर: कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 4 में अनुपम मिश्र के लेख का सार, जल-चक्र, धरती की गुल्लक, सभी अभ्यास, समानार्थी शब्द, उपसर्ग और वर्ग-पहेली के उत्तर पढ़ें। सर्वेक्षण तथा व्यक्तिगत उत्तर अपने अवलोकन से पूरे करें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 4 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 41–56; पहेली-उत्तर पृष्ठ 152, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
लेखक परिचय – अनुपम मिश्र
अनुपम मिश्र (1948–2016) एक प्रखर लेखक, संपादक और जाने-माने पर्यावरणविद् होने के साथ-साथ छायाकार भी थे। पर्यावरण-संरक्षण, विशेषकर जल एवं पारंपरिक तालाबों के संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ है, जिसका अनुवाद ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में हो चुका है। ‘साफ माथे का समाज’ उनकी एक और महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक एवं संपादक भी थे। उनका लेखन सरल, रोचक एवं समाज को जल-संरक्षण के प्रति जागरूक करने वाला है।
पाठ का सार
‘पानी रे पानी’ निबंध में अनुपम मिश्र ने सरल एवं रोचक भाषा में यह समझाया है कि हमारा पानी कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है। लेखक बताते हैं कि भूगोल की पुस्तक में पढ़ाया जाने वाला जल-चक्र समुद्र से उठी भाप के बादल बनने, फिर वर्षा होकर नदियों के रास्ते पुनः समुद्र में मिल जाने की एक सतत प्रक्रिया है। यह तो जल-चक्र की किताबी बात है।
परंतु आज वास्तविकता कुछ अलग है। घरों, स्कूलों, कार्यालयों, कारखानों और खेतों में पानी का अजीब-सा चक्कर सामने आ रहा है। नलों में समय पर पानी नहीं आता; जब आता है तो बेवक्त। पानी को लेकर लोगों में आपस में झगड़े होने लगते हैं और कई लोग नलों में मोटर लगाकर दूसरों का हक छीन लेते हैं, जिससे पानी की कमी और बढ़ जाती है। शहरों में अब पानी भी बिकने लगा है और गरमी में देश के कई हिस्सों में अकाल जैसी स्थिति बन जाती है। दूसरी ओर बरसात में चारों ओर पानी ही पानी हो जाता है, सड़कें-रेलपटरियाँ डूब जाती हैं और बाढ़ आ जाती है। लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
लेखक धरती की तुलना एक बहुत बड़ी गुल्लक से करते हैं। जैसे हम गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर उपयोग करते हैं, वैसे ही प्रकृति वर्षा के रूप में धरती की गुल्लक में पानी भरती है। तालाब, झील आदि इस पानी को जमीन के नीचे छिपे भूजल-भंडार तक पहुँचाते हैं, जिससे हम पूरे साल पानी निकाल पाते हैं। परंतु जमीन के लालच में हमने तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर मकान, बाजार, स्टेडियम बना लिए, जिसकी सजा अब सूखते नलों और डूबती बस्तियों के रूप में मिल रही है। लेखक का संदेश है — जल-चक्र को ठीक से समझें, वर्षा होने पर जल को थाम लें, भूजल-भंडार सुरक्षित रखें और अपनी ‘गुल्लक’ भरते रहें, इससे जरूरत के समय पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।

जल-चक्र और धरती की गुल्लक — क्रम समझें
- सूर्य की ऊष्मा: समुद्र और अन्य जलस्रोतों से जल वाष्प बनता है।
- संघनन: जलवाष्प ठंडी होकर छोटी जल-बूँदें बनाती है; बादल बनते हैं और हवा से आगे बढ़ते हैं।
- वर्षा: जल धरती पर बरसता है।
- दो रास्ते: कुछ जल नदियों से समुद्र लौटता है; कुछ मिट्टी में रिसकर भूजल को भरता है।
- फिर वाष्पीकरण: जल की यात्रा चलती रहती है। तालाब वर्षा का जल रोकने और उपयुक्त भूमि में रिसने में सहायता कर सकते हैं।
पाठ के आरंभ में समुद्र–बादल–वर्षा–नदी की यात्रा है; ‘गुल्लक’ वाले खंड में भूजल संचय पर ध्यान है। यह दोनों को जोड़ने वाला अध्ययन-क्रम है, जल-चक्र का पूरा वैज्ञानिक मॉडल नहीं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जल-चक्र | पानी के समुद्र से भाप बनकर बादल बनने, बरसने और पुनः समुद्र में मिलने की सतत प्रक्रिया |
| गुल्लक | पैसे जमा करने का मिट्टी/धातु का पात्र; यहाँ पानी जमा करने वाली धरती का प्रतीक |
| बेवक्त | असमय, गलत समय पर |
| अकाल | सूखा, पानी/अन्न की भारी कमी का समय |
| हक | अधिकार |
| बस्ती | लोगों के रहने का इलाका |
| भूजल | जमीन के नीचे जमा हुआ पानी |
| जलस्रोत | पानी के साधन (नदी, तालाब, कुआँ आदि) |
| समृद्ध | भरा-पूरा, सम्पन्न |
| रिसना | धीरे-धीरे टपककर भीतर जाना |
| लालच | लोभ, अधिक पाने की इच्छा |
| पाटना | गड्ढे/तालाब को भरकर समतल कर देना |
| रखवाली | देखभाल, रक्षा |
| तू-तू, मैं-मैं | आपस में झगड़ा, कहासुनी |
| टंटा | झगड़ा, झंझट |
| वर्षा-जल संग्रहण | वर्षा के पानी को एकत्र कर भंडारण करना |
| उपसर्ग | शब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलने वाला शब्दांश |
| समानार्थी | समान अर्थ देने वाला शब्द (पर्यायवाची) |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?
• नल सूख जाने से।
• पानी बरसने से।
• तालाब और झीलों से।
• बाढ़ आने से।
(2) निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?
• वर्षा जल का संग्रह करना।
• समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
• नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
• बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।
(3) “इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?
• जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
• आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
• तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
• भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 46 के स्तंभ 2 का मूल क्रम बनाए रखते हुए:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 का क्रम और अर्थ |
|---|---|
| 1. वर्षा जल संग्रहण | 2 — वर्षा के जल को प्राकृतिक या मानवीय प्रयासों से धरती में संग्रह करना |
| 2. जल संकट | 3 — जल की अत्यधिक कमी |
| 3. जल-चक्र | 4 — समुद्र से उठी भाप का बादल, वर्षा और फिर समुद्र की ओर लौटने वाला क्रम |
| 4. भूजल | 1 — जमीन के नीचे छिपा जल भंडार |
मिलान: 1→2, 2→3, 3→4, 4→1।
पंक्तियों पर चर्चा
इस पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
• “पानी आता भी है तो बेवक्त।”
• “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”
• “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”
• “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”
सोच-विचार के लिए
लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।
(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
शीर्षक
(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
शब्दों की बात
बात पर बल देना
• “हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” • “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”
(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
समानार्थी शब्द
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। (दिए गए शब्द: सूर्य, मेघ, भास्कर, पवन, वारिद, वायु, दिवाकर, जलद, वाष्प, समीर, दिनकर, नीरद)
| वाक्य (रेखांकित शब्द) | उपयुक्त समानार्थी शब्द |
|---|---|
| (क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे। | सूर्य / भास्कर / दिवाकर / दिनकर |
| (ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है। | वाष्प |
| (ग) अचानक बादल गरजने लगे। | मेघ / वारिद / जलद / नीरद |
| (घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है। | पवन / वायु / समीर |
उपसर्ग
“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ में जुड़कर नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है – समय, मृत्यु; जबकि अकाल का अर्थ है – कुसमय, सूखा। किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसका अर्थ बदलने वाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं।
(क) ‘देश’ शब्द में उपसर्ग जोड़कर बने शब्द लिखिए।
(ख) उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए (सु, अ, वि + पात्र, ज्ञान)।
आपकी बात
(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं? सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें। (ग) अपने बनाए चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
सृजन
(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया… सार्वजनिक नल पर आप और पड़ोसी दोनों पहले बालटी भरना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपस में विवाद (तू-तू मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश-वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें… घर, गाँव या शहर।” इस वाक्य को पढ़कर उभरे चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।
पानी रे पानी — पृष्ठ 50 के नौ चित्र
| ऊपर से, हर पंक्ति में बाएँ से दाएँ | चर्चा का नमूना |
|---|---|
| 1. बाल्टी से स्नान | ज़रूरत के अनुसार मापकर पानी लें; लगातार बहते शावर की तुलना में बचत हो सकती है। |
| 2. झारी से पौधों को पानी | जड़ के पास आवश्यक मात्रा दें। |
| 3. शुद्धिकरण यंत्र का निकलता पानी एकत्र करना | जल की गुणवत्ता और उपयोग देखकर ही उपयुक्त गैर-पेय काम में पुनः उपयोग करें; इसे अपने-आप पीने योग्य न मानें। |
| 4. तालाब की खुदाई | उपयुक्त योजना से जल-संचय क्षमता बढ़ सकती है; खुदाई विद्यार्थियों का स्वतंत्र कार्य नहीं। |
| 5. ब्रश करते समय खुला नल | पानी व्यर्थ बहता है; ब्रश के बीच नल बंद करें। |
| 6. मोटर से पानी भरना | ज़रूरत से अधिक दोहन या मुख्य आपूर्ति से खींचना दूसरों की उपलब्धता घटा सकता है; जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा करें। |
| 7. पौधे लगाना | स्थानीय हरियाली की रक्षा करें और सिंचाई में पानी बचाएँ। |
| 8. नली से वाहन धोना | लगातार बहता पानी बर्बादी कर सकता है; बाल्टी और कपड़े से कम जल में साफ करें। |
| 9. खाली कक्षा में रोशनी और पंखा | ऊर्जा की बर्बादी दिखती है। जल-संरक्षण से अप्रत्यक्ष संबंध पर चर्चा करें; चित्र में नल से पानी बहता नहीं दिखाया गया है। |
सबका पानी — परिचर्चा की नमूना रिपोर्ट
विषय: सभी को आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी। मुद्दे: नियमित और न्यायपूर्ण आपूर्ति, रिसाव रोकना, जलस्रोतों की रक्षा, वर्षा-जल संग्रह और साझा नल पर बारी। अपनी चर्चा की तारीख, प्रतिभागी, वास्तविक प्रस्ताव और सहमति दर्ज करें; बिना आयोजन किए इसे संपन्न रिपोर्ट न लिखें।
दैनिक कार्यों में पानी — अपना मापन
एक बाल्टी की क्षमता मापें। हर कार्य की बाल्टियाँ/पात्र गिनकर लीटर निकालें; दोहराकर गिने पानी को कुल में दो बार न जोड़ें। परिवार का आकार और आदतें अलग हैं, इसलिए कोई एक मात्रा सबके लिए सही नहीं।
| कार्य | पात्र की क्षमता (लीटर) | पात्रों की संख्या | कुल उपयोग |
|---|---|---|---|
| पीना / भोजन | ___ | ___ | ___ |
| नहाना | ___ | ___ | ___ |
| कपड़े / बर्तन | ___ | ___ | ___ |
| सफाई / अन्य | ___ | ___ | ___ |
(ख) पर्याप्त पानी मिलता है या नहीं, अपना वास्तविक अनुभव और कारण लिखें। (ग) घर में टंकी, घड़े या अन्य कौन से पात्र हैं, देखें और लिखें; पेयजल के पात्र साफ और ढके रखें।
जन-सुविधा के रूप में जल — पृष्ठ 51
सार्वजनिक नल पर कतार, टैंकर, खुले जलस्रोत से भरना, दूर से ढोना और ‘जल रेल’—ये चित्र पानी पाने के अलग तरीके और असमान कठिनाइयाँ दिखाते हैं। जहाँ आपूर्ति अनियमित है वहाँ समय, श्रम और साफ जल तक पहुँच की समस्या बढ़ सकती है। अपने क्षेत्र के बारे में जाँची हुई जानकारी जोड़ें; हर चित्र को अपने शहर की वास्तविक घटना न कहें।
बिन पानी सब सून
(क) पाठ में भूजल स्तर कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं (जैसे तालाबों में कचरा भरना)। और क्या कारण हो सकते हैं? (ख) भूजल की कमी से किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है? (ग) आपके स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल बढ़ाने के क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
यह भी जानें – वर्षा-जल संग्रहण
वर्षा-जल संग्रहण क्या है और छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण कैसे किया जाता है?
वर्षा-जल व्यवस्था में छत/नाली की सफाई, शुरुआती दूषित बहाव अलग करना, छनाई और उचित रखरखाव जरूरी हैं। साधारण छानने से पानी अपने-आप पीने योग्य नहीं हो जाता। स्थल और भूजल के अनुसार व्यवस्था विशेषज्ञ की मदद से चुनें। केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड की वर्षा-जल मार्गदर्शिका देखें।
आज की पहेली — सही वर्ग-पहेली शब्द
पृष्ठ 52 की वर्ग-पहेली के लिए पुस्तक के पृष्ठ 152 की सूची में ये 12 शब्द हैं: मेह, जलाशय, नीर, अंबु, सर, सरोवर, सलिल, ताल, तटिनी, बारिश, प्रवाहिनी, तरंगिणी।
| संबंधित अर्थ | शब्द |
|---|---|
| वर्षा | मेह, बारिश |
| पानी | नीर, अंबु, सलिल |
| नदी | तटिनी, प्रवाहिनी, तरंगिणी |
| तालाब / झील / जल रखने का स्थान | सर, सरोवर, ताल, जलाशय |
‘जलाशय’ जल रखने वाले स्थान का व्यापक शब्द है। यह अर्थ-समूह समझने में सहायक सूची है; इसे सभी शब्दों का हर संदर्भ में समानार्थक होना न समझें।
खोजबीन — नमूना योजना
पानी से संबंधित गीत या कविता चुनें, नाम और रचनाकार/स्रोत दर्ज करें, कुछ पंक्तियों का भाव समझाकर कक्षा में प्रस्तुत करें। पुस्तकालय और शिक्षक की सहायता लें।
झरोखे से — पाल के किनारे रखा इतिहास
अनुपम मिश्र के अंश में कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई चार भाइयों तथा पारस पत्थर की लोककथा आती है। राजा निजी सोने की जगह तालाब बनाते रहने को कहता है। लेखक चार तालाबों और 1907 के गजेटियर में दर्ज कथा का उल्लेख करते हैं। लेखक स्वयं कथा की ऐतिहासिक सत्यता के बारे में “नहीं मालूम” कहते हैं; पारस से लोहे का सोना बनना सत्यापित वैज्ञानिक या ऐतिहासिक तथ्य नहीं है। ‘पाल’ तालाब की बाँधनुमा मेड़/किनारा है।
साझी समझ — नमूना उत्तर
दोनों लेख तालाब और वर्षा-जल सँभालने का महत्त्व बताते हैं। ‘पानी रे पानी’ जल-संकट, भूजल और आज की जिम्मेदारी समझाता है; ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ कथा और सामुदायिक स्मृति के माध्यम से तालाब बनाने वालों के योगदान व समाज की कृतज्ञता को सामने रखता है।
पढ़ने के लिए — विश्वेश्वरैया
यह अलग पूरक पाठ है, मुख्य निबंध का लेखक-परिचय नहीं। आर. के. मूर्ति के पाठ का हिंदी अनुवाद सुमन जैन ने किया है। इसमें बालक विश्वेश्वरैया प्रकृति की ऊर्जा और आसपास की गरीबी पर प्रश्न करता है तथा जीवनभर सीखने और समस्या का समाधान ढूँढ़ने का संकल्प लेता है। पाठ में जन्म 15 सितंबर 1861, मुदेनहल्ली लिखा है। संदेश: पहले जानो, फिर करो। ऊपर की सोच, सवाल और स्वावलंबन को समझें; पूरक पाठ को नया क्रमांकित पाठ न मानें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं और वे किस क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध हैं?
2. लेखक ने धरती की तुलना गुल्लक से क्यों की है?
3. ‘अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं’ – इसका क्या अर्थ है?
4. नलों में मोटर लगाने से क्या हानि होती है?
5. लेखक का जल-चक्र के विषय में मुख्य संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘पानी रे पानी’ पाठ का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. पाठ के अनुसार पानी की समस्या के क्या-क्या कारण हैं और इनका समाधान कैसे हो सकता है?
8. भूजल-भंडार किस प्रकार समृद्ध होता है और उसके सूख जाने पर क्या परिणाम होंगे?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) अनुपम मिश्र
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) प्रेमचंद
2. लेखक ने धरती की तुलना किससे की है?
(क) समुद्र से
(ख) गुल्लक से
(ग) बादल से
(घ) नदी से
3. जल-चक्र की शुरुआत किससे होती है?
(क) नदी से
(ख) समुद्र से उठी भाप से
(ग) तालाब से
(घ) कुएँ से
4. पाठ के अनुसार ‘अकाल’ का अर्थ है—
(क) बाढ़
(ख) सूखा / पानी की भारी कमी
(ग) वर्षा
(घ) समय
5. लेखक के अनुसार अकाल और बाढ़—
(क) बिलकुल अलग समस्याएँ हैं
(ख) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
(ग) केवल गाँवों की समस्या हैं
(घ) केवल शहरों की समस्या हैं
6. भूजल-भंडार किससे समृद्ध होता है?
(क) नल सूखने से
(ख) तालाबों-झीलों एवं वर्षा से
(ग) तालाबों को पाटने से
(घ) मोटर लगाने से
7. पाठ में बताई गई ‘बड़ी गलती’ क्या है?
(क) अधिक पेड़ लगाना
(ख) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना
(ग) वर्षा-जल संग्रहण करना
(घ) नल बंद रखना
8. ‘वर्षा-जल संग्रहण’ का मूल उद्देश्य क्या है?
(क) जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए
(ख) पानी बहा देना
(ग) तालाब भरना मना है
(घ) पानी बेचना
9. ‘काल’ शब्द में ‘अ’ उपसर्ग जुड़ने से बना शब्द है—
(क) सुकाल
(ख) प्रकाल
(ग) अकाल
(घ) विकाल
10. इस पाठ की विधा क्या है?
(क) कविता
(ख) निबंध (गद्य)
(ग) नाटक
(घ) पत्र
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक ने धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक कहा है।
कारण (R): धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल उपयोग में लाते हैं।
2. अभिकथन (A): तालाबों को पाटना जल-संरक्षण के लिए लाभदायक है।
कारण (R): तालाब वर्षा-जल को भूजल-भंडार तक पहुँचाने का काम करते हैं।
3. अभिकथन (A): अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
कारण (R): पाठ में दोनों समस्याओं को जल-संचय की उपेक्षा एवं जल के गलत प्रबंधन से भी जोड़ा गया है।
4. अभिकथन (A): वर्षा-जल संग्रहण से जल की उपलब्धता बढ़ती है।
कारण (R): वर्षा के जल को एकत्र कर भंडारण करके बाद में उपयोग किया जा सकता है।
5. अभिकथन (A): छत के वर्षा-जल का उपयोग बिना साफ किए ही कर लेना चाहिए।
कारण (R): छत पर एकत्रित जल में मिट्टी के कण मिल जाते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- जल-चक्र की प्रक्रिया (भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र) क्रम से याद रखें – यह क्रम समझने में उपयोगी है।
- ‘धरती रूपी गुल्लक’ की तुलना (रूपक) पर आधारित प्रश्न में संचय एवं उपयोग की समानता अवश्य लिखें।
- उत्तर में पाठ की मूल पंक्तियाँ (जैसे “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं”) उद्धृत करके उनका अर्थ समझाएँ।
- उपसर्ग वाले प्रश्न में उपसर्ग को अलग दिखाकर (अ + काल = अकाल) लिखें।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- लेखक का नाम ‘अनुपम मिश्र’ है – इसे किसी कवि/कहानीकार से न मिलाएँ; यह पाठ निबंध (गद्य) है, कविता नहीं।
- ‘अकाल’ का अर्थ ‘बाढ़’ न लिखें – अकाल का अर्थ सूखा/पानी की कमी है।
- गुल्लक की तुलना को केवल ‘पैसा जमा करना’ तक सीमित न रखें – इसका भाव ‘पानी का संचय एवं उपयोग’ है।
- तालाबों को पाटना समाधान नहीं, बल्कि समस्या का कारण है – इसे संरक्षण से अलग समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक अनुपम मिश्र (1948–2016) हैं, जो प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, लेखक एवं संपादक थे और जल तथा तालाबों के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।
‘पानी रे पानी’ पाठ की विधा क्या है?
यह पाठ एक निबंध (गद्य) है, जिसमें जल-चक्र, अकाल, बाढ़ तथा वर्षा-जल संग्रहण के महत्त्व को सरल भाषा में समझाया गया है।
लेखक ने धरती को गुल्लक क्यों कहा है?
क्योंकि जैसे गुल्लक में पैसा जमा होता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल जरूरत के अनुसार उपयोग करते हैं।
पाठ-गद्यांश एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
