कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 5 – नहीं होना बीमार (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 5 ‘नहीं होना बीमार’ (लेखक – स्वयं प्रकाश) का पूरा समाधान देता है – कहानी का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, अनुमान और कल्पना से, कहानी की रचना, समस्या और समाधान, शब्द से जुड़े शब्द, खोजबीन, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- कहानी की रचना
- समस्या और समाधान
- शब्द से जुड़े शब्द
- खोजबीन
- शीर्षक
- लेखन के अनोखे तरीके
- विराम चिह्न
- पाठ से आगे (आपकी बात आदि)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश
स्वयं प्रकाश (1947–2019) हिंदी के जाने-माने लेखक थे। उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों, दोनों के दिलों को छू जाती हैं। उनकी रचनाएँ पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो वे हमारे ही जीवन की कहानियाँ हों और हमारे ही अनुभव उन्होंने लिख दिए हों। उन्होंने बच्चों के लिए कई मनोरंजक कहानियाँ लिखीं, जिनमें साहसिक कारनामे, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे किंतु महत्त्वपूर्ण पहलुओं को बड़ी रोचकता से प्रस्तुत किया गया है। उनकी कहानियों की विशेषता यह है कि उन्हें पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो; वे न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि सोचने-समझने की नई दिशाएँ भी देती हैं। मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी तथा फ़ीनिक्स आदि उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।
पाठ का सार
‘नहीं होना बीमार’ एक रोचक एवं हास्यपूर्ण कहानी है, जिसमें एक बच्चा अपने अनुभव सुनाता है। एक दिन उसकी नानीजी उसे साथ लेकर पड़ोसी सुधाकर काका को देखने अस्पताल जाती हैं। अस्पताल में पहली बार पहुँचा बच्चा वहाँ का साफ-सुथरा, शांत वातावरण देखकर मुग्ध हो जाता है – सफ़ेद चादरें, हरे परदे, चमकता फ़र्श, खिड़कियों के पास झूमते पेड़ और चारों ओर शांति। नानीजी सुधाकर काका को साबूदाने की खीर खिलाती हैं। बच्चा सोचता है – ‘क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! काश! मैं भी बीमार पड़ जाता।’
कुछ दिनों बाद बच्चे का मन स्कूल जाने का नहीं करता, क्योंकि उसने होमवर्क नहीं किया था और सज़ा का डर था। वह बीमार पड़ने का बहाना बना देता है और रजाई में पड़ा रहता है। नानीजी, नानाजी उसे बुखार समझकर दवा की कड़वी पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय देते हैं और दिनभर खाना न देने का निर्णय लेते हैं – ताकि ‘सारे विकार निकल जाएँ।’ घर के सब लोग अपने-अपने काम पर चले जाते हैं और बच्चा अकेला रह जाता है।
अकेले लेटे-लेटे उसे ऊब, भूख और बोरियत सताने लगती है। वह घर और बाहर की गतिविधियों के अनुमान लगाता रहता है। भूख के मारे उसे तरह-तरह के व्यंजन याद आते हैं – कचौड़ी, बर्फ़ी, गोलगप्पे और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर। दोपहर में जब घरवाले दाल-चावल खाते हैं और मुन्नू आम चूसता है, तो बच्चे को जलन एवं कुढ़न होती है। पूरा दिन उसे भूखे पेट ही बिताना पड़ता है। अंत में वह समझ जाता है कि बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है – इसके बाद उसने स्कूल से छुट्टी मारने के लिए बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया। कहानी हँसते-हँसते यह सीख देती है कि झूठा बहाना अंततः स्वयं को ही भारी पड़ता है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वार्ड | अस्पताल में किसी विशेष कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ कक्ष/स्थान |
| सिरहाने | सिर की ओर, सिर के पास |
| माहौल | वातावरण, परिवेश |
| शोरगुल | हल्ला, कोलाहल |
| गुनगुन | धीमी-धीमी आवाज़, फुसफुसाहट |
| नर्स | रोगियों, घायलों या वृद्धों की देखभाल करने वाला व्यक्ति |
| साबूदाना | सागू वृक्ष के तने के गूदे से बने दाने, सागूदाना |
| ठाठ | ऐश-आराम, सुख-सुविधा |
| होमवर्क | गृहकार्य |
| रजाई | रुई भरा, दोहरे कपड़े वाला जाड़े का ओढ़ना |
| नब्ज़ | नाड़ी, धड़कन |
| थर्मामीटर | शरीर का तापमान (बुखार) नापने का छोटा यंत्र |
| पुड़िया | कागज़ में लपेटी हुई दवा की छोटी मात्रा |
| काढ़ा | जड़ी-बूटियों को उबालकर बनाया गया औषधीय पेय |
| विकार | दोष, खराबी; यहाँ शरीर के रोग-दोष |
| चहल-पहल | रौनक, आना-जाना, हलचल |
| ड्राइक्लीनर | नाज़ुक कपड़ों को बिना पानी-साबुन के मशीन से साफ़ करने वाला |
| बघार | तड़का, छौंक |
| भुक्कड़ | बहुत खाने वाला, पेटू |
| कुढ़न | मन-ही-मन जलन एवं चिढ़ |
| रुआँसा | रोने को तैयार, आँसू भरा |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?
• उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
• उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था।
• उसने गृहकार्य नहीं किया था।
• उसे बुखार हो गया था।
2. कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि—
• घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
• बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती।
• झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
• इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
3. “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?
• उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
• उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
• वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
• बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
4. “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि—
• बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
• बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
• बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
• बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थ से मिलाइए।
| शब्द | सही अर्थ |
|---|---|
| 1. साबूदाना | सागू नामक वृक्ष के तने का गूदा (सागूदाना); पहले आटे के रूप में, फिर कूटकर दानों के रूप में सुखा लिया जाता है। |
| 2. वार्ड | किसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान। |
| 3. नर्स | वह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे। |
| 4. रजाई | एक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है। |
| 5. थर्मामीटर | शरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र। |
| 6. काढ़ा | कई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय; सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन-समस्याओं में लाभदायक माना जाता है। |
| 7. ड्राइक्लीनर | रेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाज़ुक कपड़ों को पानी, साबुन और डिटर्जेंट के बिना मशीनों से साफ़ करने वाला व्यक्ति। |
| 8. ताजमहल | उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित 17वीं सदी में निर्मित एक विश्व-प्रसिद्ध स्मारक, जो सफ़ेद संगमरमर से बना है। |
| 9. अरहर | एक दाल, जिसे तुअर भी कहते हैं। |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
(ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीज़ें अच्छी लगीं और क्यों?
(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे? (संकेत— मन में उत्पन्न होने वाले विचार को भाव कहते हैं, जैसे – क्रोध, दुख, भय, करुणा, प्रेम आदि।)
(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए।
(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता? (संकेत— उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे? (संकेत— नानीजी की जगह एक मनोरंजक योजना बनाइए जिससे बच्चा स्वयं सारी बातें बता दे।)
(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?
(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
कहानी की रचना
“अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था… न ट्रैफ़िक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी… बाकी एकदम शांति।” ऐसे वर्णन से हमारी आँखों के सामने चित्र-सा बन जाता है; इसे ‘चित्रात्मक भाषा’ कहते हैं। लेखक ने कहानी में और भी अनेक तरीके अपनाए हैं, जैसे ‘बच्चे द्वारा कल्पना करना।’
(क) इस पाठ को फिर से पढ़कर अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए—
| विशेष बिंदु | कहानी में से उदाहरण |
|---|---|
| बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना | अस्पताल में सुधाकर काका को साबूदाने की खीर खाते देखना याद करना – “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी… काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता!” |
| हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग | “तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे… चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।” |
| बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना | पहले – “चलो बीमार पड़ जाते हैं”; अंत में – “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” |
| कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना | नानाजी-नानीजी को पता ही नहीं चलता कि बच्चे को सचमुच बुखार नहीं है – “बुखार तो नहीं है। नानाजी बोले।” |
| बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना | “अब छोटे मामा नहाकर निकले… अब मुन्नू अपना जूता ढूँढ़ रहा है…” तथा भोजन के बारे में मन-ही-मन सोचना। |
समस्या और समाधान
कहानी को फिर से पढ़कर पता लगाइए—
(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए शब्दों से जुड़े (संबंधित) शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए—
खोजबीन
कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि—
(क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
शीर्षक
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। चर्चा करके लिखिए कि यह नाम उपयुक्त है या नहीं। कारण भी बताइए।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
लेखन के अनोखे तरीके
साधारण बातों को कुछ अलग ढंग से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ जाती है। नीचे साधारण वाक्य दिए हैं; कहानी में ढूँढ़िए कि इन्हें किस विशेष ढंग से लिखा गया है—
| साधारण वाक्य | कहानी में लिखा गया विशेष रूप |
|---|---|
| 1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए। | “हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।” |
| 2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे। | “बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।” |
| 3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं। | “सिर्फ़ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।” |
| 4. फुसफुसाने की आवाज़ों के सिवा वहाँ कोई आवाज़ नहीं थी। | “बाकी एकदम शांति।” |
| 5. बीमार लोगों के बहुत मज़े होते हैं। | “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।” |
| 6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ। | “चलो बीमार पड़ जाते हैं।” |
विराम चिह्न
“देखें!” नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ… इस बीच नानीजी भी आ गईं। “क्या हुआ?”, नानीजी ने पूछा। शब्दों से पहले या बाद में लगे ये चिह्न ‘विराम चिह्न’ कहलाते हैं। नीचे दिए विराम चिह्नों का प्रयोग समझिए—
| विराम चिह्न | कहाँ/कैसे प्रयोग किया जाता है |
|---|---|
| पूर्ण विराम ( । ) | वाक्य पूरा होने पर उसके अंत में – जैसे “दोनों चले गए।” |
| अल्प विराम ( , ) | वाक्य के भीतर थोड़ा रुकने या कई शब्दों/वाक्यांशों को अलग करने के लिए – जैसे “क्या हुआ?”, नानीजी ने पूछा। |
| प्रश्नवाचक चिह्न ( ? ) | प्रश्न पूछने वाले वाक्य के अंत में – जैसे “क्या हो गया?” |
| विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) | हर्ष, विस्मय, आश्चर्य आदि भाव व्यक्त करने पर – जैसे “देखें!” तथा “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” |
| उद्धरण चिह्न ( “ ” ) | किसी की कही हुई बात (संवाद) को ज्यों-का-त्यों लिखने के लिए – जैसे “मैं आज बीमार हूँ।” |
पाठ से आगे (आपकी बात, बहाने, अनुमान आदि)
आपकी बात
(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।
(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिनभर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
(ग) कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया ताकि यह भावना दूर हो जाए?
(घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे? (ङ) आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं?
बहाने
(क) क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? उस समय आपके मन में कौन-से भाव थे? (ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की सूची बनाइए। (ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
अनुमान / घर का सामान / खान-पान और आप / आज की पहेली
(अनुमान) क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/स्थान के विषय में अनुमान लगाया है? (घर का सामान) ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो खोजने पर नहीं मिलतीं, जो कोई माँगकर ले जाता है, या जो आप किसी से माँगकर लाते हैं। (खान-पान) बीमार होने पर क्या खिलाया जाता है, आपको क्या खाने का मन करता है, आदि।
कैसी होगी गली / चेहरों पर मुस्कान / अभिनय (रचनात्मक गतिविधियाँ)
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं और वे किस प्रकार के लेखक माने जाते हैं?
2. बच्चे को अस्पताल का वातावरण इतना अच्छा क्यों लगा?
3. बच्चे ने बीमार पड़ने का बहाना क्यों बनाया?
4. ‘साबूदाने की खीर’ कहानी में बच्चे के लिए किस बात की प्रतीक बन जाती है?
5. कहानी के अंत में बच्चे ने क्या सीखा?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कहानी में हास्य एवं चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किस प्रकार हुआ है? उदाहरण देकर समझाइए।
8. इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) स्वयं प्रकाश
(ग) हरिशंकर परसाई
(घ) महादेवी वर्मा
2. नानीजी और बच्चा अस्पताल में किसे देखने गए थे?
(क) मुन्नू को
(ख) छोटे मामा को
(ग) सुधाकर काका को
(घ) कुसुम मौसी को
3. नानीजी अस्पताल में सुधाकर काका के लिए क्या बनाकर लाई थीं?
(क) दाल-चावल
(ख) साबूदाने की खीर
(ग) कचौड़ी
(घ) आम
4. बच्चे ने स्कूल न जाने के लिए क्या बहाना बनाया?
(क) पैर में मोच का
(ख) सिरदर्द, पेट दर्द एवं बुखार का
(ग) आँख दुखने का
(घ) दाँत दर्द का
5. नानाजी ने बच्चे को खाने के लिए क्या दिया?
(क) मिठाई
(ख) फल
(ग) कड़वी पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय
(घ) साबूदाने की खीर
6. घर में खोजने पर कौन-सी वस्तु नहीं मिली?
(क) रजाई
(ख) थर्मामीटर
(ग) चम्मच
(घ) कंबल
7. मुन्नू को किस फल को चूसते देखकर बच्चे को जलन हुई?
(क) अमरूद
(ख) आम
(ग) सेब
(घ) केला
8. “तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना” – यह बात कौन कहता है?
(क) नर्स
(ख) नानाजी
(ग) सुधाकर काका
(घ) मुन्नू
9. कहानी की विधा क्या है?
(क) कविता
(ख) कहानी (गद्य)
(ग) नाटक
(घ) निबंध
10. कहानी से मिलने वाली मुख्य सीख क्या है?
(क) बीमार पड़ने में बड़ा आराम है
(ख) झूठा बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है
(ग) स्कूल नहीं जाना चाहिए
(घ) हमेशा खीर खानी चाहिए
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया।
कारण (R): उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क नहीं किया था।
2. अभिकथन (A): बच्चे को असल में बुखार था।
कारण (R): नानाजी ने माथा एवं नब्ज़ देखकर कहा “बुखार तो नहीं है।”
3. अभिकथन (A): बच्चे को दिनभर भूखे पेट रहना पड़ा।
कारण (R): नानाजी ने उसे आराम के लिए दिनभर कुछ खाने को न देने का निर्णय लिया था।
4. अभिकथन (A): बच्चे को अस्पताल का वातावरण अच्छा लगा।
कारण (R): वहाँ सफ़ाई एवं शांति थी, न शोरगुल था, न धूल, न मच्छर-मक्खी।
5. अभिकथन (A): बच्चे ने आगे कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया।
कारण (R): बहाना बनाने पर उसे साबूदाने की खीर खूब मिली थी।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-टिप
उत्तर लिखते समय कहानी की घटनाओं का क्रम (अस्पताल जाना → बहाना बनाना → दिनभर भूख-ऊब → पछतावा एवं सीख) ध्यान में रखें। सार एवं संदेश पूछे जाने पर अंत की पंक्ति “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया” का उल्लेख अवश्य करें – यही कहानी की कुंजी है।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
1. यह समझ लेना कि बच्चा सचमुच बीमार था – वह केवल बहाना बना रहा था। 2. लेखक का नाम गलत लिखना; सही नाम स्वयं प्रकाश है (प्रेमचंद नहीं)। 3. विधा को कविता लिख देना – यह कहानी (गद्य) है। 4. साबूदाने की खीर को बच्चे को मिली बता देना – उसे तो वह मिली ही नहीं। 5. खुले/रचनात्मक प्रश्नों (आपकी बात, बहाने) में अपना मौलिक अनुभव लिखना चाहिए, रटा-रटाया उत्तर नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं, जो हिंदी के जाने-माने कथाकार थे और बच्चों एवं बड़ों, दोनों के लिए रोचक कहानियाँ लिखते थे।
‘नहीं होना बीमार’ कहानी का मुख्य भाव/संदेश क्या है?
कहानी का संदेश है कि झूठा बहाना बनाकर कर्तव्य से भागना स्वयं को ही भारी पड़ता है। बीमारी का बहाना बनाने पर बच्चे को आराम के बजाय दिनभर अकेले एवं भूखे रहना पड़ा, जिससे उसने सच्चाई एवं कर्तव्यनिष्ठा का महत्त्व समझा।
बच्चे ने स्कूल न जाने के लिए क्या बहाना बनाया था?
बच्चे ने सिरदर्द, पेट दर्द एवं बुखार होने का बहाना बनाया, क्योंकि उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था।
कहानी एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
