कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 5 — नहीं होना बीमार प्रश्न उत्तर और सार

नहीं होना बीमार प्रश्न उत्तर: कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 5 में स्वयं प्रकाश की हास्य-कहानी का सार, शब्दार्थ, सभी अभ्यास, कहानी की रचना, विराम चिह्न और भोजन-पहेलियाँ पढ़ें। व्यक्तिगत और कल्पनात्मक उत्तर नमूने हैं।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 5 लेखक: स्वयं प्रकाश विधा: कहानी (गद्य) स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 5 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 57–72; पहेली-उत्तर पृष्ठ 152, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश (1947–2019) हिंदी के जाने-माने लेखक थे। उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों, दोनों के दिलों को छू जाती हैं। उनकी रचनाएँ पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो वे हमारे ही जीवन की कहानियाँ हों और हमारे ही अनुभव उन्होंने लिख दिए हों। उन्होंने बच्चों के लिए कई मनोरंजक कहानियाँ लिखीं, जिनमें साहसिक कारनामे, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे किंतु महत्त्वपूर्ण पहलुओं को बड़ी रोचकता से प्रस्तुत किया गया है। उनकी कहानियों की विशेषता यह है कि उन्हें पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो; वे न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि सोचने-समझने की नई दिशाएँ भी देती हैं। मात्रा और भार, अगली किताब, ज्योति रथ के सारथी तथा फ़ीनिक्स आदि उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।

पाठ का सार

‘नहीं होना बीमार’ एक रोचक एवं हास्यपूर्ण कहानी है, जिसमें एक बच्चा अपने अनुभव सुनाता है। एक दिन उसकी नानीजी उसे साथ लेकर पड़ोसी सुधाकर काका को देखने अस्पताल जाती हैं। अस्पताल में पहली बार पहुँचा बच्चा वहाँ का साफ-सुथरा, शांत वातावरण देखकर मुग्ध हो जाता है – सफ़ेद चादरें, हरे परदे, चमकता फ़र्श, खिड़कियों के पास झूमते पेड़ और चारों ओर शांति। नानीजी सुधाकर काका को साबूदाने की खीर खिलाती हैं। बच्चा सोचता है – ‘क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! काश! मैं भी बीमार पड़ जाता।’

कुछ दिनों बाद बच्चे का मन स्कूल जाने का नहीं करता, क्योंकि उसने होमवर्क नहीं किया था और सज़ा का डर था। वह बीमार पड़ने का बहाना बना देता है और रजाई में पड़ा रहता है। नानीजी, नानाजी उसे बुखार समझकर दवा की कड़वी पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय देते हैं और दिनभर खाना न देने का निर्णय लेते हैं – ताकि ‘सारे विकार निकल जाएँ।’ घर के सब लोग अपने-अपने काम पर चले जाते हैं और बच्चा अकेला रह जाता है।

अकेले लेटे-लेटे उसे ऊब, भूख और बोरियत सताने लगती है। वह घर और बाहर की गतिविधियों के अनुमान लगाता रहता है। भूख के मारे उसे तरह-तरह के व्यंजन याद आते हैं – कचौड़ी, बर्फ़ी, गोलगप्पे और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर। दोपहर में जब घरवाले दाल-चावल खाते हैं और मुन्नू आम चूसता है, तो बच्चे को जलन एवं कुढ़न होती है। पूरा दिन उसे भूखे पेट ही बिताना पड़ता है। अंत में वह समझ जाता है कि बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है – इसके बाद उसने स्कूल से छुट्टी मारने के लिए बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया। कहानी हँसते-हँसते यह सीख देती है कि झूठा बहाना अंततः स्वयं को ही भारी पड़ता है।

नहीं होना बीमार: नानी के साथ अस्पताल में सुधाकर काका से मिलने आया बच्चा; सफेद बिस्तर, लाल कंबल और हरे परदे
कहानी के अस्पताल-भेंट प्रसंग का AI-सहायता से बनाया गया साहित्यिक पुनर्निर्माण। पात्र कल्पित हैं; यह वास्तविक रोगी, अस्पताल या लेखक के परिवार की तस्वीर नहीं है।

कथा और स्वास्थ्य-सलाह में फर्क: कहानी में दवा की पुड़िया, काढ़े जैसी चाय और खाना न देना पात्रों के व्यवहार का वर्णन है। “भूखे रहने से सारे विकार निकलते हैं” को उपचार का नियम न मानें। वास्तव में तबीयत खराब हो तो भरोसेमंद बड़े को लक्षण बताएँ और जरूरत पर स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लें; स्वयं दवा या अज्ञात काढ़ा न लें। भूख लगे तो बीमारी के अनुसार उपयुक्त भोजन और पर्याप्त तरल देना सामान्य देखभाल का हिस्सा है। बच्चों के बुखार की देखभाल पर NHS मार्गदर्शन देखें।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
वार्डअस्पताल में किसी विशेष कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ कक्ष/स्थान
सिरहानेसिर की ओर, सिर के पास
माहौलवातावरण, परिवेश
शोरगुलहल्ला, कोलाहल
गुनगुनधीमी-धीमी आवाज़, फुसफुसाहट
नर्सरोगियों, घायलों या वृद्धों की देखभाल करने वाला व्यक्ति
साबूदानापुस्तक में सागू के गूदे से तैयार दाने; कसावा-स्टार्च वाला साबूदाना भी मिलता है
ठाठऐश-आराम, सुख-सुविधा
होमवर्कगृहकार्य
रजाईरुई भरा, दोहरे कपड़े वाला जाड़े का ओढ़ना
नब्ज़नाड़ी, धड़कन
थर्मामीटरशरीर का तापमान (बुखार) नापने का छोटा यंत्र
पुड़ियाकागज़ में लपेटी हुई दवा की छोटी मात्रा
काढ़ाजड़ी-बूटियों को उबालकर बनाया गया औषधीय पेय
विकारदोष, खराबी; यहाँ शरीर के रोग-दोष
चहल-पहलरौनक, आना-जाना, हलचल
ड्राइक्लीनरनाज़ुक कपड़ों को बिना पानी-साबुन के मशीन से साफ़ करने वाला
बघारतड़का, छौंक
भुक्कड़बहुत खाने वाला, पेटू
कुढ़नमन-ही-मन जलन एवं चिढ़
रुआँसारोने को तैयार, आँसू भरा

मेरी समझ से

पुस्तक कुछ प्रश्नों में एक से अधिक विकल्प की अनुमति देती है। सबसे सीधे पाठ-समर्थित उत्तर पहले दिए हैं।

(क) सही विकल्प

1. विद्यालय न जाने का मुख्य कारण: ★ विकल्प 3—उसने गृहकार्य नहीं किया था। पाठ में विद्यालय जाने का मन न होना भी कहा है, इसलिए विकल्प 1 परिस्थिति बताता है; गृहकार्य न होने और सजा के डर से वह बहाना बनाता है। उसे वास्तविक बुखार नहीं बताया गया है।

2. फिर बहाना न बनाने का निर्णय: ★ विकल्प 4—दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा। विकल्प 1—विद्यालय जाना अधिक रोचक है—के लिए उसके स्कूल, मित्रों और रिसेस को याद करने का तर्क दे सकते हैं।

3. “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी”: ★ विकल्प 1—बिस्तर पर पड़े रहने से ऊब गई थी। संदर्भ में वह उठना चाहता था और बाहर आहट पर फिर लेट जाता था; इसे सचमुच बीमारी का प्रमाण नहीं मानेंगे।

4. “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!”: ★ विकल्प 1, 2 और 4—आराम, अच्छा खाना और अस्पताल में शांति से लेटना। साफ बिस्तर और काका की साबूदाने की खीर देखकर वह ऐसा सोचता है। विकल्प 3, विद्यालय न जाना, अस्पताल वाले तत्काल वर्णन में कारण नहीं है; यह बाद में उसके बहाने से जुड़ता है।

(ख) चर्चा — नमूना तरीका

अपना चुना विकल्प पढ़ें, कहानी का संबंधित प्रसंग बताएँ और कारण दें। सामान्य विचार की जगह वही उत्तर अधिक सटीक है जिसे इस घटना से समर्थन मिलता है। भिन्न विकल्पों का कारण सुनें; मतभेद होने पर पाठ फिर पढ़ें।

मिलकर करें मिलान

पृष्ठ 63 के दूसरे स्तंभ का मूल क्रम:

शब्द का मूल क्रमअर्थ का क्रमसरल अर्थ
1. साबूदाना8पुस्तक की परिभाषा: सागू वृक्ष के तने के गूदे से तैयार दाने
2. वार्ड1विशिष्ट कार्य के लिए अलग/घेरा स्थान; यहाँ अस्पताल का रोगी-कक्ष
3. नर्स9रोगियों आदि की देखभाल करने वाला प्रशिक्षित व्यक्ति
4. रजाई2रुई भरा दोहरे कपड़े का जाड़े का ओढ़ना
5. थर्मामीटर3तापमान मापने का यंत्र
6. काढ़ा4जड़ी-बूटियों आदि को उबालकर तैयार पेय; किसी रोग में लाभ का दावा हर मिश्रण पर लागू नहीं
7. ड्राइक्लीनर5कपड़ों को सामान्य पानी-साबुन की धुलाई की जगह विशेष विधि से साफ करने वाला
8. ताजमहल6आगरा का 17वीं सदी का संगमरमर का प्रसिद्ध स्मारक
9. अरहर7तुअर नाम से भी जानी जाने वाली दाल

मिलान: 1→8, 2→1, 3→9, 4→2, 5→3, 6→4, 7→5, 8→6, 9→7।

शब्दार्थ का संदर्भ: पुस्तक सागू-आधारित साबूदाने की परिभाषा देती है। कसावा/टैपिओका के स्टार्च से भी साबूदाना बनाया जाता है; इसलिए प्रत्येक बाजारू दाने को सागू वृक्ष का उत्पाद कहना सही नहीं। ICAR का कसावा परिचय देखें।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”

अर्थ/विचारइस पंक्ति से पता चलता है कि बच्चा सचमुच बीमार नहीं है, बल्कि स्कूल जाने और सज़ा से बचने के लिए जान-बूझकर बीमार पड़ने का बहाना बना रहा है।‘चलो बीमार पड़ जाते हैं’ कहना यह दर्शाता है कि वह बीमारी को अपनी सुविधा का साधन समझ बैठा है; उसे लगता है बीमार पड़ना उसके वश में है और इससे उसे आराम एवं अच्छा खाना मिलेगा। यही उसकी भूल थी।

(ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में बच्चे की भूख, झुँझलाहट एवं अकेलेपन की पीड़ा झलकती है। उसे लगता है कि घरवालों ने उसकी इच्छा तक नहीं पूछी; वह तो बस साबूदाने की खीर माँगता, कोई बड़ी या असंभव चीज़ (ताजमहल) नहीं।‘विकार निकल जाएँ, चाहे तुम खुद शिकार हो जाओ’ में हास्य के साथ व्यंग्य भी है – बच्चे को लगता है कि बीमारी के ‘विकार’ निकालने के चक्कर में वह खुद भूख का शिकार हो रहा है। यह उसके पछतावे की शुरुआत है।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीज़ें अच्छी लगीं और क्यों?

उत्तरअस्पताल में बच्चे को वहाँ की साफ़-सफ़ाई एवं शांति बहुत अच्छी लगी – लाइन से लगे एक जैसे पलंग, सफ़ेद चादरें, लाल कंबल, सफ़ेद दीवारें, ऊँची छत, हरे परदे और चमकता फ़र्श।उसे यह भी अच्छा लगा कि वहाँ न ट्रैफ़िक का शोर था, न धूल, न मच्छर-मक्खी; बड़ी खिड़कियों के पास हरे पेड़ झूम रहे थे और केवल धीमी-धीमी बातचीत की गुनगुन सुनाई दे रही थी। इस शांत एवं स्वच्छ वातावरण ने उसे बहुत भाया।

(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?

उत्तरहाँ, बच्चे का अंतिम निर्णय बिलकुल सही था। उसने जान लिया कि बीमारी का झूठा बहाना बनाने से उसे कोई सुख नहीं मिला, उल्टे दिनभर अकेले, भूखे एवं ऊबकर पड़े रहना पड़ा और कड़वी दवा भी खानी पड़ी।स्कूल जाने पर शायद सज़ा मिल जाती, पर वहाँ दोस्त, पढ़ाई, खेल और रौनक होती। इसलिए झूठ का सहारा लेने के बजाय सच्चाई एवं अपने कर्तव्य का पालन करना ही बेहतर है – यह सीख उसका निर्णय सही सिद्ध करती है।

(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे? (संकेत— मन में उत्पन्न होने वाले विचार को भाव कहते हैं, जैसे – क्रोध, दुख, भय, करुणा, प्रेम आदि।)

उत्तरबहाना बनाकर लेटे रहने के दौरान बच्चे के मन में अनेक भाव आते-जाते रहे – पहले उसे अपनी चतुराई पर थोड़ा संतोष हुआ, फिर अकेलेपन से ऊब एवं बोरियत होने लगी।भूख के कारण उसके मन में बेचैनी, ललचाहट एवं झुँझलाहट आई; मुन्नू को आम चूसते देख जलन एवं कुढ़न हुई; होमवर्क की याद आने पर वह रुआँसा एवं उदास हो गया। अंत में पछतावे का भाव जागा कि बहाना बनाना गलत था।

(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?

उत्तरसमानता: दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति को बिस्तर पर लेटे रहना पड़ता है, स्कूल/काम पर नहीं जाना पड़ता और दूसरों से देखभाल मिलती है।अंतर: बच्चे की सोच में बीमारी केवल आराम और स्वादिष्ट खीर तक सीमित थी, जबकि असल में बीमार पड़ने पर दर्द, कमज़ोरी, कड़वी दवा, रोग के अनुसार भोजन संबंधी सावधानी और बेचैनी झेलनी पड़ती है। सच्ची बीमारी सुख नहीं, कष्ट देती है – इसलिए बच्चे की कल्पना वास्तविकता से बहुत अलग एवं भोली थी।

(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उत्तर (नमूना)कहानी में नाना-नानी अपनी समझ से उसकी देखभाल करते हैं, पर नानाजी कहते हैं कि बुखार नहीं है। बिना वास्तविक लक्षण समझे दवा देना और पूरे दिन भोजन रोकना उचित देखभाल का सामान्य नियम नहीं है। बेहतर होता कि वे उससे बात करते, उसकी बात और परेशानी समझते तथा जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेते। नीयत अच्छी होने और उपाय सही होने में अंतर है।

अनुमान और कल्पना से

ये पाँचों उत्तर कल्पनात्मक नमूने हैं, मूल कहानी में हुई घटनाएँ नहीं।

(क) सच बता देता तो?

वह गृहकार्य न होने और डर की बात बताता। बड़े उसके साथ छूटा काम पूरा करने की योजना बनाते और बिना बहाना बनाए मदद माँगना सिखाते। मन का बोझ कम होता।

(ख) नानी की जगह मेरी योजना

मैं उससे खिलंदड़े ढंग से पूछती—“आज स्कूल में क्या नया होगा? कौन-सा काम अटक गया?” बताती कि सच कहने पर हम साथ समाधान ढूँढ़ेंगे। भोजन को सच उगलवाने की शर्त या दंड न बनाती।

(ग) अकेलेपन से ऊब कैसे घटाऊँ?

कहानी पढ़ूँ, चित्र बनाऊँ, पहेली हल करूँ और छूटा काम पूरा करूँ। असुविधा हो तो भरोसेमंद बड़े से संपर्क करूँ।

(घ) स्कूल जाता / अगले दिन स्कूल पहुँचा तो?

स्कूल जाता तो काम न होने की बात शिक्षक से सच कहता और मदद माँगता; मित्रों और पढ़ाई में दिन बीतता। अगले दिन वह छूटा पाठ पूछकर पूरा करता और काम समय पर करने का निश्चय करता। ये संभावित घटनाएँ हैं; निश्चित सजा का दावा नहीं करें।

(ङ) नाना-नानी की जगह मैं क्या करता?

बच्चे की बात सुनता, तापमान ठीक तरीके से जाँचने में मदद लेता और वास्तविक बीमारी होने पर उचित सलाह लेता। बिना सलाह दवा न देता, भूख लगने पर रोग के अनुसार उपयुक्त भोजन/तरल देता और उसके पास रहकर आश्वस्त करता।

कहानी की रचना

“अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था… न ट्रैफ़िक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी… बाकी एकदम शांति।” ऐसे वर्णन से हमारी आँखों के सामने चित्र-सा बन जाता है; इसे ‘चित्रात्मक भाषा’ कहते हैं। लेखक ने कहानी में और भी अनेक तरीके अपनाए हैं, जैसे ‘बच्चे द्वारा कल्पना करना।’

(क) इस पाठ को फिर से पढ़कर अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तरचित्रात्मक भाषा: अस्पताल, गली एवं भोजन का सजीव वर्णन। हास्य: ‘क्या ठाठ हैं बीमारों के भी’ जैसी विनोदपूर्ण बातें।आत्मकथात्मक शैली: कहानी ‘मैं’ शैली में, बच्चे की ज़ुबानी कही गई है। स्वगत-कथन एवं कल्पना: बच्चा अकेले लेटे-लेटे मन-ही-मन बातें एवं अनुमान करता है। संवादों का सजीव प्रयोग तथा अंत में मिलने वाली सहज सीख भी इसकी विशेषताएँ हैं।

(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए—

उत्तर
विशेष बिंदुकहानी में से उदाहरण
बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जानाअस्पताल में सुधाकर काका को साबूदाने की खीर खाते देखना याद करना – “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी… काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता!”
हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग“तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे… चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”
बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आनापहले – “चलो बीमार पड़ जाते हैं”; अंत में – “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।”
कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होनाबच्चे का बहाना पाठक जानते हैं; नानाजी-नानीजी को उसका पूरा उद्देश्य नहीं बताया गया। नानाजी बुखार न होने की बात कहते हैं – “बुखार तो नहीं है। नानाजी बोले।”
बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना“अब छोटे मामा नहाकर निकले… अब मुन्नू अपना जूता ढूँढ़ रहा है…” तथा भोजन के बारे में मन-ही-मन सोचना।

समस्या और समाधान

कहानी को फिर से पढ़कर पता लगाइए—

(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

उत्तरसमस्या: बच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था, इसलिए उसे सज़ा मिलने का डर था।समाधान (जो उसने निकाला): उसने बीमार पड़ने का बहाना बना लिया, ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। परंतु यह समाधान गलत निकला – इससे उसे दिनभर अकेले, भूखे रहना पड़ा और अंत में उसने यह बहाना दोबारा कभी न बनाने का निश्चय किया।

(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

उत्तरसमस्या: उन्हें लगा कि बच्चा बीमार है – उसके सिर में दर्द, पेट दर्द एवं बुखार है, और उसे ठीक करना है।समाधान: नानाजी ने उसका माथा एवं नब्ज़ देखी, दवा की पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय दी, उसे आराम करने को कहा तथा दिनभर खाना न देने का निर्णय लिया, ताकि उसका ‘विकार’ निकल जाए।

शब्द से जुड़े शब्द

छह खाली स्थानों के लिए पाठ से चुन सकते हैं: अस्पताल, नर्स, बुखार, थर्मामीटर, दवा, नब्ज़। दिया शब्द ‘काढ़ा’ इनके साथ जोड़ें। अन्य संबंधित पाठ-शब्द भी स्वीकार हैं; पाठ में न आए शब्दों को पाठ से चुना हुआ न कहें।

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि—

(क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।

उत्तर“सब पर एक जैसी सफ़ेद चादर और लाल कंबल” तथा बच्चे का “मैं रजाई से निकला ही नहीं” और बार-बार रजाई में पड़े रहना – रजाई एवं कंबल का प्रयोग सर्दी के मौसम की ओर संकेत करता है।

(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।

उत्तर“क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता।” तथा अंत में – “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।”

(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।

उत्तर“आँख जरा लगती भी तो खाने ही खाने की चीज़ें दिखाई देतीं। गरमागरम खस्ता कचौड़ी… मावे की बर्फ़ी… बेसन की चिक्की… गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर!” तथा खुशबू सूँघकर रसोई में झाँकने जाना।

(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।

उत्तर“इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। कितना मज़ा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक-मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।” तथा दोस्तों एवं स्कूल की बातें याद करना।

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। चर्चा करके लिखिए कि यह नाम उपयुक्त है या नहीं। कारण भी बताइए।

उत्तरयह शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त है। पूरी कहानी एक बच्चे के झूठमूठ बीमार पड़ने और उसके परिणाम भुगतने के इर्द-गिर्द घूमती है, और अंत में वह यह सीख लेता है कि (झूठा) बीमार नहीं होना चाहिए।‘नहीं होना बीमार’ शीर्षक उसी मुख्य भाव एवं संदेश को संक्षेप में व्यक्त करता है – कि झूठा बहाना बनाकर बीमार पड़ने का दिखावा करना मुसीबत मोल लेना है। इसलिए यह नाम कहानी के अनुकूल है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

उत्तर (नमूना)मैं इस कहानी को ‘बहाने की सज़ा’ या ‘भूखे पेट का दिन’ अथवा ‘साबूदाने की खीर’ नाम दे सकता हूँ।‘बहाने की सज़ा’ इसलिए, क्योंकि बहाना बनाने का नतीजा बच्चे को भुगतना पड़ा; ‘भूखे पेट का दिन’ इसलिए, क्योंकि उसका पूरा दिन भूखे रहकर बीता; और ‘साबूदाने की खीर’ इसलिए, क्योंकि वही खीर कहानी में बच्चे की सबसे बड़ी ललक बनी रहती है।

लेखन के अनोखे तरीके

साधारण बातों को कुछ अलग ढंग से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ जाती है। नीचे साधारण वाक्य दिए हैं; कहानी में ढूँढ़िए कि इन्हें किस विशेष ढंग से लिखा गया है—

उत्तर
साधारण वाक्यकहानी में लिखा गया विशेष रूप
1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।“हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।”
2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।“बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे।”
3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं।“सिर्फ़ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन।”
4. फुसफुसाने की आवाज़ों के सिवा वहाँ कोई आवाज़ नहीं थी।“बाकी एकदम शांति।”
5. बीमार लोगों के बहुत मज़े होते हैं।“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।”
6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।“चलो बीमार पड़ जाते हैं।”

विराम चिह्न

पृष्ठ 69 में पाँच चिह्न पूछे हैं। इनके काम और पाठ से छोटे उदाहरण:

चिह्नकामउदाहरण
पूर्ण विराम ।सामान्य कथन के अंत मेंदोनों चले गए।
अल्प विराम ,छोटा विराम या संबोधन के बादले, पुड़िया खा ले।
प्रश्नवाचक ?प्रश्न के अंत मेंक्या हो गया?
विस्मयादिबोधक !विस्मय या तीव्र भावक्या ठाठ हैं बीमारों के भी!
उद्धरण “ ”सीधे बोले शब्द दिखाने के लिए“मैं आज बीमार हूँ।”

पाठ से आगे (आपकी बात, बहाने, अनुमान आदि)

आपकी बात

(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।

उत्तर (नमूना)मेरी कक्षा हवादार एवं रोशनी से भरी है। दीवारें हल्के नीले रंग की हैं, जिन पर सुंदर चार्ट एवं विद्यार्थियों के बनाए चित्र लगे हैं। एक ओर हरा बोर्ड एवं अध्यापक की मेज़ है, तो दूसरी ओर खिड़कियों से बाहर हरे पेड़ झाँकते हैं।डेस्क कतारों में सजी हैं और बच्चों की धीमी-धीमी बातचीत एवं हँसी से कक्षा गुलज़ार रहती है। घंटी बजते ही सब अपनी जगह बैठ जाते हैं और कक्षा में अनुशासित शांति छा जाती है।

(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिनभर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?

उत्तर (नमूना)हाँ, एक बार घर में सब बाहर गए थे और मुझे कुछ घंटे अकेले रहना पड़ा। शुरू में मुझे थोड़ा अकेलापन एवं डर-सा लगा, पर फिर मैंने मन लगा लिया।मैंने अपनी पसंदीदा कहानी पढ़ी, कुछ चित्र बनाए और बीच-बीच में घड़ी देखता रहा कि घरवाले कब लौटेंगे। जब वे लौटे तो मुझे बहुत राहत एवं खुशी महसूस हुई।

(ग) कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया ताकि यह भावना दूर हो जाए?

उत्तर (नमूना)हाँ, कभी-कभी किसी मित्र की नई चीज़ या उसकी प्रशंसा देखकर मन में हल्की ईर्ष्या आ जाती है। ऐसा होना स्वाभाविक है।इस भावना को दूर करने के लिए मैंने यह सोचा कि हर किसी की अपनी खूबियाँ होती हैं; मैंने मित्र की सफलता पर खुश होना सीखा और स्वयं मेहनत करके अपनी कमी सुधारने का प्रयास किया। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने काम पर ध्यान देने से ईर्ष्या अपने आप कम हो जाती है।

(घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे? (ङ) आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं?

उत्तर (नमूना)(घ) घर में माता-पिता, दादा-दादी एवं भाई-बहन मेरा ध्यान रखते हैं – समय पर भोजन देकर, पढ़ाई में मदद करके एवं बीमार पड़ने पर देखभाल करके। विद्यालय में अध्यापक पढ़ाकर एवं मार्गदर्शन देकर तथा मित्र साथ देकर मेरा ध्यान रखते हैं।(ङ) मैं भी अपने परिजनों एवं मित्रों का ध्यान रखता हूँ – बड़ों का आदर करके, छोटों की सहायता करके, बीमार होने पर उनकी देखभाल करके, और ऐसे काम न करके जिनसे उन्हें परेशानी हो (जैसे झगड़ा करना या उनका सामान बिगाड़ना)।

बहाने

(क) क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? उस समय आपके मन में कौन-से भाव थे? (ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की सूची बनाइए। (ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर (नमूना)(क) हाँ, एक बार होमवर्क न होने पर मैंने पेट दर्द का बहाना बनाया था। उस समय मन में डर, घबराहट एवं पकड़े जाने की चिंता थी, और बाद में पछतावा हुआ।(ख) आम बहाने: “मेरी तबीयत ठीक नहीं”, “कॉपी घर भूल आया”, “बस छूट गई”, “बिजली नहीं थी, इसलिए पढ़ नहीं पाया”, “सिरदर्द हो रहा है।”(ग) बहाने प्रायः किसी काम से बचने, सज़ा या डाँट से डरने अथवा आलस्य के कारण बनाए जाते हैं। बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हमें अपना काम समय पर एवं ईमानदारी से पूरा करना चाहिए, सच बोलना चाहिए और गलती होने पर उसे स्वीकार कर सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

अनुमान — अपना अनुभव

नमूना: पेड़ से आवाज सुनकर मैंने पक्षी होने का अनुमान लगाया; देखकर उसकी पुष्टि की। संकेत और निष्कर्ष अलग लिखें। अपना वास्तविक अनुभव दें।

घर का सामान — नमूना सूची

खोजने पर नहीं मिलताकोई माँगकर ले जाता हैहम माँगकर लाते हैं
पेन, कैंची, चार्जरछाता, पुस्तक, बर्तनकुर्सी, पुस्तक, उपकरण

अपने घर के अनुसार बदलें; उधार की चीज समय पर लौटाएँ।

खान-पान और आप — छह प्रश्नों का मार्गदर्शन

  1. बीमार होने पर घर में वास्तव में क्या दिया जाता है, लिखें। किसी भोजन को हर बीमारी का उपचार न कहें।
  2. मनपसंद भोजन और कारण: नमूना—दाल-चावल का स्वाद मुझे अच्छा लगता है।
  3. विशेष अवसर का पकवान: नमूना—घर के त्योहार पर गुजिया; अपना अवसर लिखें।
  4. विद्यालय में अपना भोजन: नमूना—घर का टिफिन, रोटी-सब्जी और फल।
  5. भोजन की बचपन की याद: कहाँ, किसके साथ और किस स्वाद की याद है, स्पष्ट करें।
  6. किस सुगंध से रसोई में देखने का मन हुआ: नमूना—तड़के की खुशबू से दाल बनने का अनुमान हुआ।

आज की पहेली — पुस्तक की उत्तर सूची

पहेलीउत्तर — पृष्ठ 152संकेत
1आलू का पराठारोटी जैसा, आलू से भरा
2मसाला डोसादाल-चावल, सांभर-चटनी; गोल या मोड़कर त्रिकोण
3वड़ा पावमहाराष्ट्र, वड़ा और पाव
4ढोकलागुजरात, नरम टुकड़े
5पानी पूरीगोल खोल, चटनी और पानी
6मक्के की रोटीहल्का पीला आटा, साग और मक्खन
7बाटीआग में पकती, दाल और चूरमा
8रसगुल्लासफेद, गोल, मीठी चाशनी

कैसी होगी गली / चेहरों पर मुस्कान / अभिनय (रचनात्मक गतिविधियाँ)

उत्तर (गतिविधि)कैसी होगी गली: कहानी में चंदूभाई ड्राइक्लीनर, तेजराम की दुकान, महेश घी सेंटर एवं तारों पर बैठी चिड़ियों का उल्लेख है; इन्हीं बातों एवं अपनी कल्पना के आधार पर गली का चित्र बनाइए।चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी: ‘क्या ठाठ हैं बीमारों के भी’ जैसी पंक्तियाँ पढ़कर मुस्कान आती है; और कचौड़ी, बर्फ़ी, गोलगप्पे एवं साबूदाने की खीर के वर्णन से मुँह में पानी आ जाता है – इन्हें रेखांकित कीजिए।अभिनय: दिए गए संवाद (“बुखार आ गया।” मैंने कराहते हुए कहा; “आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।” आदि) को हाव-भाव एवं उचित आरोह-अवरोह के साथ कक्षा में बोलकर प्रस्तुत कीजिए।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं और वे किस प्रकार के लेखक माने जाते हैं?

उत्तरइस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं। वे हिंदी के जाने-माने कथाकार थे, जिनकी कहानियाँ बच्चों एवं बड़ों दोनों के दिलों को छू जाती हैं तथा मनोरंजन के साथ सोचने-समझने की नई दिशाएँ भी देती हैं।

2. बच्चे को अस्पताल का वातावरण इतना अच्छा क्यों लगा?

उत्तरअस्पताल में चारों ओर सफ़ाई एवं शांति थी – सफ़ेद चादरें, चमकता फ़र्श, हरे परदे, खिड़कियों के पास झूमते पेड़ और बिना शोर-धूल-मच्छर का माहौल। यह स्वच्छ एवं शांत वातावरण बच्चे को बहुत भाया।

3. बच्चे ने बीमार पड़ने का बहाना क्यों बनाया?

उत्तरबच्चे का स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था; स्कूल जाने पर सज़ा मिलने का डर था। इसी से बचने के लिए उसने झूठमूठ बीमार पड़ने का बहाना बनाया।

4. ‘साबूदाने की खीर’ कहानी में बच्चे के लिए किस बात की प्रतीक बन जाती है?

उत्तरसाबूदाने की खीर बच्चे के लिए बीमारी के ‘सुख’ एवं अपनी सबसे बड़ी ललक की प्रतीक बन जाती है। पहले सुधाकर काका को खाते देखकर उसका मन ललचाया और बाद में भूख में बार-बार उसे यही खीर याद आती रही।

5. कहानी के अंत में बच्चे ने क्या सीखा?

उत्तरबच्चे ने सीखा कि बीमारी का झूठा बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है; इससे उसे आराम के बजाय अकेलापन, भूख एवं ऊब झेलनी पड़ी। इसीलिए उसने आगे कभी स्कूल से छुट्टी मारने के लिए बहाना न बनाने का निश्चय किया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘नहीं होना बीमार’ कहानी का मूल भाव यह है कि झूठा बहाना बनाकर कर्तव्य से भागना अंततः स्वयं को ही भारी पड़ता है। एक बच्चा अस्पताल में बीमार सुधाकर काका को आराम करते एवं खीर खाते देखकर सोचता है कि बीमार रहने में बड़े ठाठ हैं।इसी सोच में वह स्कूल से बचने के लिए बीमारी का बहाना बना लेता है। परंतु दिनभर उसे अकेले, भूखे एवं ऊबकर पड़े रहना पड़ता है, कड़वी दवा खानी पड़ती है और घरवालों को मज़े से खाते देख जलन होती है। अंत में वह समझ जाता है कि सच्चाई एवं अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। कहानी हँसते-हँसते सीख देती है कि बहाने बनाने के बजाय ईमानदारी अपनानी चाहिए।

7. इस कहानी में हास्य एवं चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किस प्रकार हुआ है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तरलेखक ने कहानी को रोचक बनाने के लिए हास्य एवं चित्रात्मक भाषा का सुंदर प्रयोग किया है। हास्य: ‘क्या ठाठ हैं बीमारों के भी’, ‘तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना… चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ’ तथा मुन्नू को ‘भुक्कड़’ कहना – ऐसी बातें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।चित्रात्मक भाषा: अस्पताल का वर्णन (‘न ट्रैफ़िक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी… बाकी एकदम शांति’) तथा भोजन का वर्णन (गरमागरम कचौड़ी, मावे की बर्फ़ी, गोलगप्पे) पढ़कर दृश्य आँखों के सामने जीवंत हो उठते हैं। इन्हीं प्रयोगों से कहानी सरस, सजीव एवं मनोरंजक बन गई है।

8. इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर समझाइए।

उत्तरइस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें झूठ एवं बहानों का सहारा कभी नहीं लेना चाहिए। बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाकर सोचा था कि उसे आराम एवं अच्छा खाना मिलेगा, पर उसे उल्टे कष्ट ही भुगतना पड़ा।हमारे जीवन में भी कई बार पढ़ाई या काम से बचने के लिए बहाना बनाने का मन करता है, परंतु इससे समस्या टलती नहीं, और बढ़ जाती है। यदि हम अपना काम समय पर एवं मन लगाकर पूरा करें तथा गलती होने पर सच बोल दें, तो हमें न डर सताता है, न पछताना पड़ता है। इस प्रकार सच्चाई, परिश्रम एवं कर्तव्यनिष्ठा ही जीवन में सुख एवं सम्मान दिलाते हैं।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) स्वयं प्रकाश

(ग) हरिशंकर परसाई

(घ) महादेवी वर्मा

उत्तर(ख) स्वयं प्रकाश।

2. नानीजी और बच्चा अस्पताल में किसे देखने गए थे?

(क) मुन्नू को

(ख) छोटे मामा को

(ग) सुधाकर काका को

(घ) कुसुम मौसी को

उत्तर(ग) सुधाकर काका को।

3. नानीजी अस्पताल में सुधाकर काका के लिए क्या बनाकर लाई थीं?

(क) दाल-चावल

(ख) साबूदाने की खीर

(ग) कचौड़ी

(घ) आम

उत्तर(ख) साबूदाने की खीर।

4. बच्चे ने स्कूल न जाने के लिए क्या बहाना बनाया?

(क) पैर में मोच का

(ख) सिरदर्द, पेट दर्द एवं बुखार का

(ग) आँख दुखने का

(घ) दाँत दर्द का

उत्तर(ख) सिरदर्द, पेट दर्द एवं बुखार का।

5. नानाजी ने बच्चे को खाने के लिए क्या दिया?

(क) मिठाई

(ख) फल

(ग) कड़वी पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय

(घ) साबूदाने की खीर

उत्तर(ग) कड़वी पुड़िया एवं काढ़े जैसी चाय।

6. घर में खोजने पर कौन-सी वस्तु नहीं मिली?

(क) रजाई

(ख) थर्मामीटर

(ग) चम्मच

(घ) कंबल

उत्तर(ख) थर्मामीटर।

7. मुन्नू को किस फल को चूसते देखकर बच्चे को जलन हुई?

(क) अमरूद

(ख) आम

(ग) सेब

(घ) केला

उत्तर(ख) आम।

8. “तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना” – यह बात कौन कहता है?

(क) नर्स

(ख) नानाजी

(ग) सुधाकर काका

(घ) मुन्नू

उत्तर(ख) नानाजी (बच्चे के अनुसार सुबह नानाजी ही यह उपाय बता रहे थे)।

9. कहानी की विधा क्या है?

(क) कविता

(ख) कहानी (गद्य)

(ग) नाटक

(घ) निबंध

उत्तर(ख) कहानी (गद्य)।

10. कहानी से मिलने वाली मुख्य सीख क्या है?

(क) बीमार पड़ने में बड़ा आराम है

(ख) झूठा बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है

(ग) स्कूल नहीं जाना चाहिए

(घ) हमेशा खीर खानी चाहिए

उत्तर(ख) झूठा बहाना बनाना मुसीबत मोल लेना है।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया।

कारण (R): उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क नहीं किया था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): बच्चे को असल में बुखार था।

कारण (R): नानाजी ने माथा एवं नब्ज़ देखकर कहा “बुखार तो नहीं है।”

उत्तर(घ) A गलत है (बच्चे को सचमुच बुखार नहीं था, उसने बहाना बनाया था), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): बच्चे को दिनभर भूखे पेट रहना पड़ा।

कारण (R): नानाजी ने उसे आराम के लिए दिनभर कुछ खाने को न देने का निर्णय लिया था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): बच्चे को अस्पताल का वातावरण अच्छा लगा।

कारण (R): वहाँ सफ़ाई एवं शांति थी, न शोरगुल था, न धूल, न मच्छर-मक्खी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): बच्चे ने आगे कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया।

कारण (R): बहाना बनाने पर उसे साबूदाने की खीर खूब मिली थी।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है – बहाने के कारण उसे खीर नहीं, बल्कि भूख एवं अकेलापन मिला; इसीलिए उसने दोबारा बहाना नहीं बनाया।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-टिप

उत्तर लिखते समय कहानी की घटनाओं का क्रम (अस्पताल जाना → बहाना बनाना → दिनभर भूख-ऊब → पछतावा एवं सीख) ध्यान में रखें। सार एवं संदेश पूछे जाने पर अंत की पंक्ति “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया” का उल्लेख अवश्य करें – यही कहानी की कुंजी है।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

1. यह समझ लेना कि बच्चा सचमुच बीमार था – वह केवल बहाना बना रहा था। 2. लेखक का नाम गलत लिखना; सही नाम स्वयं प्रकाश है (प्रेमचंद नहीं)। 3. विधा को कविता लिख देना – यह कहानी (गद्य) है। 4. साबूदाने की खीर को बच्चे को मिली बता देना – उसे तो वह मिली ही नहीं। 5. खुले/रचनात्मक प्रश्नों (आपकी बात, बहाने) में अपना मौलिक अनुभव लिखना चाहिए, रटा-रटाया उत्तर नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश (1947–2019) हैं, जो हिंदी के जाने-माने कथाकार थे और बच्चों एवं बड़ों, दोनों के लिए रोचक कहानियाँ लिखते थे।

‘नहीं होना बीमार’ कहानी का मुख्य भाव/संदेश क्या है?

कहानी का संदेश है कि झूठा बहाना बनाकर कर्तव्य से भागना स्वयं को ही भारी पड़ता है। बीमारी का बहाना बनाने पर बच्चे को आराम के बजाय दिनभर अकेले एवं भूखे रहना पड़ा, जिससे उसने सच्चाई एवं कर्तव्यनिष्ठा का महत्त्व समझा।

बच्चे ने स्कूल न जाने के लिए क्या बहाना बनाया था?

बच्चे ने सिरदर्द, पेट दर्द एवं बुखार होने का बहाना बनाया, क्योंकि उसका स्कूल जाने का मन नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।

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