कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 10 – मीरा के पद (पद/काव्य) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 10 ‘मीरा के पद’ (रचनाकार – कवयित्री मीरा) का पूरा समाधान देता है – दोनों पदों का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, शब्दों के रूप, भाषा एवं पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 10 रचनाकार: मीरा (मीराबाई) विधा: पद (काव्य) सत्र: 2026–27

कवयित्री परिचय – मीरा

मीरा (मीराबाई) हिंदी की महान कवयित्री, कृष्ण-भक्त एवं संत थीं। उनकी रचनाएँ आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व रची गई थीं। माना जाता है कि मीरा बचपन से ही श्रीकृष्ण की भक्ति में मगन रहती थीं। राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने संतों का जीवन चुना और महलों को त्यागकर तीर्थों की यात्राएँ करने लगीं। वे मंदिरों में भजन गातीं और सत्संग करतीं। उनके गाए हुए भजन एवं पद लोग आज भी श्रद्धा और प्रेम से गाते, पढ़ते और सुनते-सुनाते हैं। उनके पदों में श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण एवं भक्ति का भाव मिलता है। मीरा प्रायः अपने पदों के अंत में ‘मीरा के प्रभु गिरधर नागर’ कहकर अपने आराध्य का स्मरण करती हैं।

पद (मूल पाठ)

पाठ में मीरा के दो पद दिए गए हैं – पहला पद श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करता है और दूसरा पद सावन ऋतु में प्रभु-मिलन की उमंग को व्यक्त करता है।

पद (1)

बसो मेरे नैनन में नंदलाल।
मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥
अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥
मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल॥

पद (2)

बरसे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की।
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की।
नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आनंद मंगल गावन की॥
— मीरा

भावार्थ

पद (1): मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि हे नंदलाल! आप सदा मेरी आँखों में बस जाइए। श्रीकृष्ण की मूर्ति (रूप) मोहित करने वाली है, उनकी सूरत साँवली है और उनके नेत्र बड़े-बड़े (विशाल) हैं। उनके होंठों पर अमृत-रस से भरी हुई मुरली सुशोभित है और उनके वक्षस्थल (छाती) पर वैजयंती माला झूल रही है। उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं और पैरों में बँधे नूपुर (पायल/घुँघरू) मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले तथा अपने भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।

पद (2): सावन की बदली (बादल) बरस रही है – यह सावन मन को भाने वाला है। सावन के आते ही मीरा का मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण (हरि) के आने की आहट (भनक) सुनाई दी है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आ गए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेघ बरस रहे हैं और शीतल पवन मन को सुहावना लग रहा है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधर नागर के मिलन की आशा से उनके मन में आनंद एवं मंगल गीत गाने की उमंग जाग उठी है।

पाठ का सार

‘मीरा के पद’ पाठ में कृष्ण-भक्त कवयित्री मीरा के दो भक्ति-पद संकलित हैं, जिनमें श्रीकृष्ण के प्रति उनका अनन्य प्रेम एवं समर्पण प्रकट होता है। पहले पद में मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें। इस पद में श्रीकृष्ण के सुंदर रूप का सजीव चित्रण हुआ है – उनकी मोहक मूर्ति, साँवली सूरत, विशाल नेत्र, अधरों पर सजी अमृत-रस भरी मुरली, छाती पर झूलती वैजयंती माला, कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ तथा पैरों में मधुर ध्वनि करते नूपुर। मीरा अपने प्रभु को संतों को सुख देने वाला और भक्तों से स्नेह करने वाला ‘भक्तवत्सल गोपाल’ कहती हैं।

दूसरे पद में मीरा सावन ऋतु के माध्यम से प्रभु-मिलन की उत्कट उमंग व्यक्त करती हैं। सावन की मनभावन बदली बरस रही है और इस ऋतु को देखकर मीरा का मन उमंग से भर उठता है, क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनाई देती है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, वर्षा की झड़ी लग जाती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन मन को सुहावना बना देता है। प्रकृति का यह सौंदर्य मीरा के हृदय में आनंद एवं मंगल-गीत गाने की प्रेरणा जगाता है। दोनों पदों में मीरा अपने नाम के साथ अपने आराध्य का स्मरण करती हैं — ‘मीरा के प्रभु संतन सुखदाई’ तथा ‘मीरा के प्रभु गिरधर नागर’। इस प्रकार ये पद भक्ति-भावना, प्रकृति-सौंदर्य एवं प्रेम का मधुर संगम प्रस्तुत करते हैं और हमें सच्ची भक्ति एवं समर्पण का संदेश देते हैं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
नैनन / नैनानेत्र, आँखें
नंदलालनंद के पुत्र, श्रीकृष्ण
मोहनि मूरतिमन को मोहने वाली मूर्ति/रूप
साँवरि सूरतिसाँवली सूरत (मुखाकृति)
अधरहोंठ
सुधा रसअमृत-रस
राजतिसुशोभित होना, शोभा देना
उरहृदय, वक्षस्थल (छाती)
वैजंती मालवैजयंती माला
क्षुद्र घंटिकाछोटी घंटी, घुँघरू
कटितटकमर का भाग
सोभितशोभित, सुशोभित
नूपुरपैर का गहना, पायल/घुँघरू
रसालरसीला, मधुर, सुंदर
भक्तवछलभक्तवत्सल, भक्तों से स्नेह करने वाला
बदरियाबदली, बादल
भावनभाने वाली, अच्छी लगने वाली
उमग्योउमंग से भर गया
मनवामन
भनकहल्की/अस्पष्ट आहट, उड़ती हुई खबर
हरिश्रीकृष्ण/विष्णु
चहुँ दिशचारों दिशाएँ
दामिनदामिनी, बिजली
दमकैचमकना
मेहा / मेहमेघ, वर्षा, बादल
सोहावनसुहावना, अच्छा लगने वाला
गिरधर नागरपर्वत (गोवर्धन) को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?

• संतों से

• भक्तों से

• वैजंती से

• श्रीकृष्ण से

उत्तर★ श्रीकृष्ण से।इस पद में मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण (नंदलाल) से विनती करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें।

(2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?

• प्रेम और भक्ति

• प्रकृति की सुंदरता

• युद्ध और शांति

• ज्ञान और शिक्षा

उत्तर★ प्रेम और भक्ति।इस पद का मुख्य विषय श्रीकृष्ण के प्रति मीरा का प्रेम एवं भक्ति है; पूरा पद उनके मनोहर रूप एवं भक्ति-भाव का वर्णन करता है।

(3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?

• सर्दी

• गरमी

• वर्षा

• वसंत

उत्तर★ वर्षा।इस पद में सावन (वर्षा) ऋतु का वर्णन है – बदली बरसती है, बिजली चमकती है और शीतल पवन बहती है।

(4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—

• प्रसन्न हैं।

• दुखी हैं।

• उदास हैं।

• चिंतित हैं।

उत्तर★ प्रसन्न हैं।सावन की वर्षा एवं श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनकर मीरा का मन उमंग एवं आनंद से भर उठता है, इसलिए वे प्रसन्न प्रतीत होती हैं।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तरयह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने पद के शब्दों एवं भाव को आधार बनाया – जैसे ‘नंदलाल’ एवं ‘भक्तवछल’ शब्दों से स्पष्ट है कि विनती श्रीकृष्ण से की गई है, तथा ‘उमग्यो मेरो मनवा’ से मीरा की प्रसन्नता प्रकट होती है।परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं और अपने उत्तर का कारण स्पष्ट कर पाते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।

शब्दअर्थ/संदर्भ
1. नंदलालनंद के पुत्र, श्रीकृष्ण
2. वैजंती मालवैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला
3. सावनश्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले का महीना
4. गिरधरपर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण
सही मिलान1. नंदलाल → नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण2. वैजंती माल → वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला3. सावन → श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले का महीना4. गिरधर → पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में सावन की वर्षा का सुंदर चित्रण है – आकाश से नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेघ बरस रहे हैं और साथ बहती शीतल पवन मन को सुहावनी लग रही है।वर्षा की रिमझिम एवं शीतल हवा का यह दृश्य मन में आनंद एवं उमंग भर देता है; मीरा इसी सुहावने वातावरण में प्रभु-मिलन की प्रसन्नता अनुभव करती हैं।

(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल॥”

अर्थ/विचारमीरा कहती हैं कि उनके प्रभु श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले हैं तथा अपने भक्तों से अत्यंत स्नेह करने वाले (भक्तवत्सल) गोपाल हैं।इस पंक्ति से मीरा की अपने आराध्य के प्रति गहरी श्रद्धा एवं विश्वास प्रकट होता है – वे मानती हैं कि भगवान सच्चे भक्तों का सदा कल्याण करते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?

उत्तरपहले पद में श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का विस्तृत वर्णन है –• उनकी मूर्ति (रूप) मन को मोहने वाली है और उनकी सूरत साँवली है।• उनके नेत्र बड़े-बड़े (विशाल) हैं।• उनके होंठों पर अमृत-रस से भरी मुरली सुशोभित है।• उनके वक्षस्थल (छाती) पर वैजयंती माला झूलती है।• उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा देती हैं और पैरों के नूपुर मधुर ध्वनि करते हैं।• वे संतों को सुख देने वाले तथा भक्तों से स्नेह करने वाले (भक्तवत्सल) गोपाल हैं।

(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?

उत्तरदूसरे पद में सावन (वर्षा) ऋतु का सजीव वर्णन है –• सावन की मनभावन बदली बरस रही है।• सावन देखकर मीरा का मन उमंग से भर उठता है क्योंकि उन्हें हरि के आने की आहट सुनाई देती है।• चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं और बिजली चमकती है।• वर्षा की झड़ी लग जाती है तथा नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं।• शीतल पवन मन को सुहावनी लगती है और चारों ओर आनंद-मंगल का वातावरण बन जाता है।

कविता की रचना

“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” तथा “मीरा के प्रभु गिरधर नागर” – इन दोनों पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपना नाम जोड़ देते थे।

(क) इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर1. नाम का उल्लेख (छाप): मीरा ने दोनों पदों के अंत में अपने नाम के साथ अपने आराध्य का स्मरण किया है।2. छोटी-छोटी पंक्तियाँ: पदों में छोटी, सरल एवं गेय पंक्तियाँ हैं जिन्हें सहज ही गाया जा सकता है।3. श्रीकृष्ण के अनेक नाम: कृष्ण के लिए नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधर नागर आदि भिन्न-भिन्न नामों का प्रयोग हुआ है।4. भक्ति एवं प्रकृति का संगम: पहले पद में भक्ति-भाव तथा दूसरे में प्रकृति (सावन) के सौंदर्य के साथ प्रभु-मिलन की उमंग व्यक्त हुई है।5. तुकांत एवं लय: ‘नंदलाल-विशाल-माल-रसाल’ तथा ‘भावन-आवन-लावन-सोहावन-गावन’ जैसे तुकांत शब्दों से पदों में मधुर लय है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तरयह समूह-कार्य की गतिविधि है। प्रत्येक समूह अपनी बनाई विशेषताओं की सूची कक्षा में पढ़कर सुनाएगा और सभी समूहों की विशेषताओं को मिलाकर एक संयुक्त सूची तैयार की जा सकती है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?

उत्तर (नमूना)बादलों ने गरजते-बरसते हुए मधुर स्वर में कहा होगा – “हे मीरा! प्रसन्न हो जाओ, सावन की रिमझिम के साथ तुम्हारे प्रिय श्रीकृष्ण तुमसे मिलने आ रहे हैं। हम चारों दिशाओं से उमड़कर यह शुभ संदेश सुनाने आए हैं। अपने मन की उमंग से उनका स्वागत करो और आनंद के मंगल-गीत गाओ।”बादलों ने यह संदेश कोमल, स्नेहभरे एवं उत्साह जगाने वाले ढंग से सुनाया होगा, ताकि मीरा का मन हर्ष से भर उठे।

(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?

उत्तर (नमूना)मैं मीरा से कहूँगा कि आपके भक्ति-पद आज भी लोगों के मन में श्रद्धा एवं प्रेम जगाते हैं; आपका समर्पण हमारे लिए प्रेरणा है।मैं उनसे पूछूँगा – आपके मन में श्रीकृष्ण के प्रति इतना अटूट प्रेम कैसे उत्पन्न हुआ? राजमहल के सुख छोड़कर संतों का जीवन चुनना कितना कठिन रहा? आप अपने पद किस भाव-दशा में रचतीं और गातीं थीं?

शब्दों के रूप / शब्द से जुड़े शब्द

शब्दों के रूप

पद में कुछ शब्द ऐसे रूपों में आए हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते-बोलते होंगे। नीचे ऐसे शब्द उनके प्रचलित (मानक) रूप के साथ दिए गए हैं।

पद का शब्दप्रचलित (मानक) रूप
नैनननैनों / आँखों
सोभितशोभित
भक्तवछलभक्तवत्सल
बदरियाबदली / बादल
मेरो मनवामेरा मन
आवनआना / आगमन
दिशदिशा
मेहामेघ

शब्द से जुड़े शब्द (श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द)

पद में से श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द चुनकर लिखिए।

उत्तरश्रीकृष्ण से जुड़े शब्द: नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधर नागर, मुरली, मूरति, साँवरि सूरति, वैजंती माल, नूपुर, भक्तवछल आदि।

पंक्ति से पंक्ति (मिलान)

मिलती-जुलती पंक्तियों को मिलाइए—

सही मिलान1. “अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल” → होंठों पर सुरीली धुनों से भरी बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है।2. “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल” → कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं और पैरों में बँधे नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं।3. “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल” → हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो।4. “सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की” → सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनी है।5. “उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की” → चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है।

कविता का सौंदर्य / रूप बदलकर

कविता का सौंदर्य (अनुप्रास)

“बरसे बदरिया सावन की।” – इस पंक्ति में आपको कौन-सी विशेष बात दिखाई दी? पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तरइस पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्द ‘ब’ वर्ण से आरंभ होते हैं, अर्थात् ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इसी से पंक्ति और भी सुंदर एवं लयबद्ध बन गई है। (यह अनुप्रास अलंकार का उदाहरण है।)पाठ में से अन्य उदाहरण:ावन की मन भावन की” – ‘न की’ ध्वनि की आवृत्ति; “ोहनि ूरति” – ‘म’ की आवृत्ति; “ाँवरि ूरति” – ‘स’ की आवृत्ति; “मड़ घुड़” तथा “न्हीं न्हीं” – शब्दों की आवृत्ति।

रूप बदलकर

पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

उत्तर (नमूना)दूसरे पद का गद्य-रूप: सावन की काली घटाएँ झूम-झूमकर बरस रही हैं। यह सावन मन को बहुत भाने वाला है। इस ऋतु को देखकर मीरा का मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि उन्हें अपने प्रिय श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनाई दी है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आ गए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरस रही हैं और शीतल पवन मन को सुहावनी लग रही है। इस मनोरम वातावरण में मीरा का हृदय आनंद एवं मंगल-गीत गाने को उमड़ पड़ा है।

मुहावरे

“बसो मेरे नैनन में नंदलाल।” – ‘नैनों/आँखों में बस जाना’ एक मुहावरा है। नीचे आँखों से जुड़े कुछ मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग दिए गए हैं।

मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
आँखों का ताराबहुत प्यारा होनानन्हा मोहन अपनी दादी की आँखों का तारा है।
आँखों पर परदा पड़नालोभ/मोह में सच न दिखनाधन के लोभ में उसकी आँखों पर परदा पड़ गया।
आँखों के आगे अँधेरा छानाघबरा जाना, कुछ न सूझनादुर्घटना का समाचार सुनते ही उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया।
आँख दिखानाक्रोध से डराना/धमकानाबड़े भाई के आँख दिखाते ही छोटा बच्चा चुप हो गया।
आँख का काँटाबुरा या अप्रिय लगनाईमानदार कर्मचारी भ्रष्ट अधिकारी की आँख का काँटा बन गया।
आँखें फेरनाउपेक्षा करना, बेरुख़ी दिखानाविपत्ति में उसके मित्रों ने भी आँखें फेर लीं।
आँख भर आनाआँसू आ जाना, भावुक होनाबेटी की विदाई पर माँ की आँख भर आई।
आँखें चुरानासामना करने से बचनागलती पकड़े जाने पर वह सबसे आँखें चुराने लगा।
आँखों से उतारनाआदर/प्रेम समाप्त कर देनाविश्वासघात के बाद उसने मित्र को आँखों से उतार दिया।
आँखों में खटकनाबुरा लगना, ईर्ष्या का पात्र होनाउसकी सफलता प्रतियोगियों की आँखों में खटकने लगी।

आपकी बात

(क) “बरसे बदरिया सावन की” – जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? सावन में कौन-सी ध्वनियाँ सुनाई देती हैं और आपके मन में कौन-सी भावनाएँ उठती हैं? वर्षा ऋतु में कौन-सी गतिविधियाँ अच्छी लगती हैं? सावन में कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं?

उत्तर (नमूना)मौसम में परिवर्तन: सावन आते ही आकाश में काले बादल छा जाते हैं, गरमी की तपन घट जाती है, हवा शीतल हो जाती है, चारों ओर हरियाली छा जाती है तथा नदी-तालाब जल से भर जाते हैं।ध्वनियाँ एवं भावनाएँ: बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली का कड़कना, बूँदों के टपकने की रिमझिम, मेंढकों की टर्र-टर्र एवं पक्षियों का कलरव सुनाई देता है। इन ध्वनियों से मन में कभी रोमांच एवं उमंग तो कभी कौतूहल जाग उठता है।गतिविधियाँ: वर्षा में काग़ज़ की नाव चलाना, झूला झूलना, बारिश में भीगना तथा पकौड़े खाने का आनंद अच्छा लगता है।त्योहार: सावन में रक्षाबंधन, हरियाली तीज एवं नागपंचमी जैसे त्योहार मनाए जाते हैं; रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और परिवार में उल्लास का वातावरण रहता है।

(ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” – क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? साथ ही किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों के साथ कीजिए।

उत्तर (नमूना)सहायक एवं प्रिय व्यक्ति: मेरे जीवन में मेरी दादी ऐसी हैं, जो सदैव मेरी सहायता करती हैं और मुझे आनंदित रखती हैं। वे मुझे प्रेम से कहानियाँ सुनातीं, अच्छे संस्कार देतीं और कठिनाई में हौसला बढ़ातीं हैं। उनके स्नेह से मेरा मन सदा प्रसन्न रहता है।छोटी-छोटी बातों सहित वर्णन: जैसे मीरा ने श्रीकृष्ण की मुरली, माला, घंटिका एवं नूपुर जैसी छोटी-छोटी बातें बताईं, वैसे ही मैं अपनी दादी का वर्णन करूँगा – उनका झुर्रियों भरा स्नेहमय चेहरा, चश्मे के पीछे झाँकती कोमल आँखें, हाथ का सुंदर कंगन, धीमी-मीठी वाणी तथा सुबह तुलसी को जल चढ़ाते समय गुनगुनाया जाने वाला भजन।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

विशेषताएँ

“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” – श्रीकृष्ण की कौन-सी बातों ने आपको सबसे अधिक आकर्षित किया? किसी व्यक्ति/वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? अपनी बाह्य एवं आंतरिक विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर (नमूना)आकर्षण: मुझे श्रीकृष्ण की मोहक मुस्कान, मुरली की मधुर धुन एवं उनका भक्तवत्सल स्वभाव सबसे अधिक आकर्षित करता है।आकर्षित करने वाला गुण: किसी व्यक्ति का सच्चा एवं दयालु स्वभाव मुझे सबसे अधिक आकर्षित करता है, क्योंकि वह दूसरों के दुःख में सहायता करता है।बाह्य विशेषताएँ: (i) स्वच्छ एवं सादा वेश-भूषा, (ii) मुस्कुराता हुआ चेहरा।आंतरिक विशेषताएँ: (i) सच बोलना एवं ईमानदारी, (ii) दूसरों के प्रति सहानुभूति एवं सहायता-भाव।

मधुर ध्वनियाँ (पहेलियाँ – वाद्ययंत्र)

पद की पंक्तियों में जिन वस्तुओं से मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं, उन्हें पहचानिए। साथ ही दी गई पहेलियों से मधुर ध्वनि करने वाले वाद्ययंत्रों को पहचानिए।

उत्तरपद में मधुर ध्वनि वाली वस्तुएँ: (1) मुरली (बाँसुरी), (2) क्षुद्र घंटिका (घंटी/घुँघरू), (3) नूपुर (पायल)।पहेलियों के उत्तर (वाद्ययंत्र): बाँसुरी, तबला, शहनाई, वीणा, ढोलक, बीन, संतूर तथा मजीरा।

आज की पहेली (समान ध्वनि वाले शब्द)

पाठ में से चुने गए शब्दों की अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजकर लिखिए।

उत्तर1. मूरति → सूरति2. सावन → आवन3. उमड़ → घुमड़4. नागर → नगर5. नंदलाल → गोपाल

चित्र करते हैं बातें / सावन से जुड़े गीत / खोजबीन

उत्तर (गतिविधि)चित्र करते हैं बातें: यह काँगड़ा शैली में बने मीरा के चित्र को देखकर अनुच्छेद लिखने की गतिविधि है – चित्र में मीरा को एकतारा/तानपूरा लिए श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन भजन गाते हुए दिखाया जाता है, जिससे उनकी भक्ति एवं समर्पण झलकता है।सावन से जुड़े गीत: इसमें अपने परिजनों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन के लोकगीत/कविताएँ ढूँढ़कर एक पुस्तिका बनानी है।खोजबीन: कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार में पढ़े गए कृष्ण-भक्त कवि सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाई जा सकती हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं और वे किस प्रकार की कवयित्री मानी जाती हैं?

उत्तर‘मीरा के पद’ की रचनाकार मीरा (मीराबाई) हैं। वे हिंदी की महान कृष्ण-भक्त कवयित्री एवं संत मानी जाती हैं, जिन्होंने श्रीकृष्ण की भक्ति में अनेक मधुर पद एवं भजन रचे।

2. पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या विनती करती हैं?

उत्तरपहले पद में मीरा श्रीकृष्ण (नंदलाल) से विनती करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें, अर्थात् उनका मनोहर रूप हर समय उनके मन-नेत्रों में बना रहे।

3. ‘भनक सुनी हरि आवन की’ पंक्ति का क्या आशय है?

उत्तरइसका आशय है कि मीरा को श्रीकृष्ण (हरि) के आने की हल्की आहट सुनाई दी है। इसी आहट से उनका मन उमंग एवं आनंद से भर उठता है।

4. मीरा अपने दोनों पदों के अंत में अपने प्रभु को किन नामों से पुकारती हैं?

उत्तरपहले पद के अंत में मीरा अपने प्रभु को ‘संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल’ तथा दूसरे पद के अंत में ‘गिरधर नागर’ कहकर पुकारती हैं। दोनों ही नाम श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं।

5. दूसरे पद में सावन ऋतु का मीरा के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तरसावन की वर्षा, उमड़ते बादल एवं शीतल पवन देखकर मीरा का मन उमंग से भर उठता है। उन्हें प्रभु-मिलन की आशा होती है, जिससे उनका हृदय आनंद एवं मंगल-गीत गाने को उत्सुक हो उठता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. पहले पद के आधार पर श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कीजिए।

उत्तरपहले पद में मीरा ने श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। श्रीकृष्ण की मूर्ति (रूप) मन को मोह लेने वाली है और उनकी सूरत साँवली है। उनके नेत्र बड़े-बड़े (विशाल) एवं सुंदर हैं। उनके होंठों पर अमृत-रस से भरी हुई मुरली सुशोभित रहती है, जिससे मधुर धुन निकलती है।उनके वक्षस्थल (छाती) पर वैजयंती माला झूलती है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा देती हैं और पैरों में बँधे नूपुर मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार मीरा ने श्रीकृष्ण के मुख, नेत्र, मुरली, माला, घंटिका एवं नूपुर का वर्णन करके उनके सम्पूर्ण रूप-सौंदर्य को साकार कर दिया है। अंत में वे उन्हें संतों को सुख देने वाला एवं भक्तवत्सल गोपाल कहती हैं।

7. ‘मीरा के पद’ में भक्ति एवं प्रकृति का संगम किस प्रकार हुआ है? समझाइए।

उत्तर‘मीरा के पद’ में भक्ति एवं प्रकृति का सुंदर संगम मिलता है। पहला पद पूर्णतः भक्ति-भाव से भरा है, जिसमें मीरा श्रीकृष्ण के रूप का वर्णन करते हुए उनसे अपने हृदय-नेत्रों में बसने की विनती करती हैं।दूसरे पद में प्रकृति (सावन ऋतु) के माध्यम से भक्ति को व्यक्त किया गया है। बरसती बदली, उमड़ते बादल, चमकती बिजली, नन्हीं बूँदें एवं शीतल पवन का मनोरम चित्रण है। किंतु यह प्रकृति-वर्णन केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं रहता – सावन की यह छटा मीरा के मन में प्रभु-मिलन की उमंग एवं आनंद जगा देती है। इस प्रकार मीरा प्रकृति के सौंदर्य को अपनी कृष्ण-भक्ति से जोड़कर दोनों का मधुर समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

8. मीरा के जीवन एवं भक्ति से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तरमीरा का जीवन एवं भक्ति हमें अनेक प्रेरणाएँ देती है। राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने महलों के सुख त्यागकर संतों का जीवन चुना और अपने आराध्य श्रीकृष्ण की भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। उनकी अटूट श्रद्धा एवं एकनिष्ठ प्रेम हमें सिखाते हैं कि सच्ची लगन से किया गया कार्य सब बाधाओं को पार कर जाता है।मीरा ने अपने भावों को सरल एवं मधुर पदों में ढालकर भक्ति-संगीत की अमर परंपरा को समृद्ध किया। उनसे हमें समर्पण, सरलता, निडरता एवं अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा मिलती है। उनके पद आज भी लोगों के मन में श्रद्धा, प्रेम एवं शांति का संचार करते हैं।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं?

(क) सूरदास

(ख) मीरा (मीराबाई)

(ग) तुलसीदास

(घ) कबीरदास

उत्तर(ख) मीरा (मीराबाई)।

2. मीरा किसकी भक्त थीं?

(क) श्रीराम की

(ख) शिव की

(ग) श्रीकृष्ण की

(घ) दुर्गा की

उत्तर(ग) श्रीकृष्ण की।

3. ‘नंदलाल’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

(क) किसी राजा के लिए

(ख) श्रीकृष्ण के लिए

(ग) किसी संत के लिए

(घ) मीरा के पिता के लिए

उत्तर(ख) श्रीकृष्ण के लिए।

4. पहले पद में श्रीकृष्ण के होंठों पर क्या सुशोभित है?

(क) वैजयंती माला

(ख) मुरली (बाँसुरी)

(ग) नूपुर

(घ) घंटिका

उत्तर(ख) मुरली (बाँसुरी)।

5. ‘भक्तवछल’ (भक्तवत्सल) शब्द का अर्थ है—

(क) भक्तों से क्रोध करने वाला

(ख) भक्तों से स्नेह करने वाला

(ग) भक्तों से दूर रहने वाला

(घ) भक्तों की परीक्षा लेने वाला

उत्तर(ख) भक्तों से स्नेह करने वाला।

6. दूसरे पद में किस ऋतु का वर्णन है?

(क) ग्रीष्म

(ख) शरद

(ग) सावन (वर्षा)

(घ) वसंत

उत्तर(ग) सावन (वर्षा)।

7. ‘दामिन’ शब्द का अर्थ है—

(क) बादल

(ख) बिजली

(ग) वर्षा

(घ) पवन

उत्तर(ख) बिजली।

8. सावन ऋतु में मीरा का मन कैसा हो जाता है?

(क) उदास

(ख) उमंग एवं आनंद से भरा

(ग) भयभीत

(घ) क्रोधित

उत्तर(ख) उमंग एवं आनंद से भरा।

9. ‘गिरधर नागर’ का अर्थ है—

(क) नगर में रहने वाले

(ख) पर्वत (गोवर्धन) धारण करने वाले श्रीकृष्ण

(ग) मीरा के गुरु

(घ) बादलों के स्वामी

उत्तर(ख) पर्वत (गोवर्धन) धारण करने वाले श्रीकृष्ण।

10. “बरसे बदरिया सावन की” पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

(क) उपमा

(ख) अनुप्रास

(ग) रूपक

(घ) यमक

उत्तर(ख) अनुप्रास। (‘ब’ वर्ण की आवृत्ति के कारण।)
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): मीरा श्रीकृष्ण से अपनी आँखों में बसने की विनती करती हैं।

कारण (R): मीरा श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं और उनका रूप सदा अपने मन में बसाए रखना चाहती थीं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): दूसरे पद में मीरा सावन की वर्षा से दुखी एवं उदास हैं।

कारण (R): सावन में मीरा को श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनाई देती है।

उत्तर(घ) A गलत है (मीरा सावन में दुखी नहीं, बल्कि उमंग एवं आनंद से भरी हैं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): मीरा अपने पदों के अंत में अपने नाम का उल्लेख करती हैं।

कारण (R): मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपना नाम जोड़ देते थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘नंदलाल’ एवं ‘गिरधर नागर’ दोनों शब्द श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं।

कारण (R): पद में श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): “बरसे बदरिया” पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

कारण (R): इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हुई है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • दोनों पदों की मुख्य पंक्तियाँ (टेक) – ‘बसो मेरे नैनन में नंदलाल’ तथा ‘बरसे बदरिया सावन की’ – कंठस्थ रखें।
  • याद रखें कि पहला पद भक्ति/रूप-वर्णन का है और दूसरा पद सावन ऋतु एवं प्रभु-मिलन की उमंग का।
  • श्रीकृष्ण के पर्यायवाची (नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधर नागर) तथा कठिन शब्दार्थ (नूपुर, अधर, उर, दामिन, बदरिया) अवश्य रटें।
  • भावार्थ लिखते समय सरल हिंदी में, क्रम से एवं पद के भाव के अनुसार उत्तर दें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • ‘गिरधर’ को नगर का नाम समझ लेना – यह श्रीकृष्ण का ही नाम है (गोवर्धन-धारी)।
  • दूसरे पद को विरह/दुःख का पद समझ लेना – यह उमंग एवं आनंद का पद है।
  • ‘भक्तवछल’ का अर्थ गलत लिखना – इसका सही अर्थ है ‘भक्तवत्सल’ अर्थात् भक्तों से स्नेह करने वाला।
  • पद की पंक्तियों को बोलचाल के रूप में बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों (नैनन, मेहा, चहुँ दिश आदि) लिखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं?

‘मीरा के पद’ की रचनाकार कवयित्री मीरा (मीराबाई) हैं, जो हिंदी की महान कृष्ण-भक्त एवं संत मानी जाती हैं।

पहले पद का मुख्य भाव क्या है?

पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करते हुए उनसे विनती करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें; इसका मुख्य भाव प्रेम एवं भक्ति है।

दूसरे पद में किस ऋतु का वर्णन है और मीरा का मन कैसा है?

दूसरे पद में सावन (वर्षा) ऋतु का वर्णन है। सावन एवं प्रभु-मिलन की आशा से मीरा का मन उमंग एवं आनंद से भर उठता है, अतः वे प्रसन्न हैं।

पद एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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