कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 9 – चिड़िया (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 9 ‘चिड़िया’ (कवि – आरसी प्रसाद सिंह) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 9 कवि: आरसी प्रसाद सिंह विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – आरसी प्रसाद सिंह

आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) हिंदी एवं मैथिली के प्रसिद्ध कवि थे, जिन्होंने प्रकृति और जीवन-संघर्ष को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से चित्रित किया। उनकी कविताओं में प्रेम, करुणा, त्याग-बलिदान, मुक्ति तथा मिल-जुलकर एक सुंदर संसार रचने की कल्पना बार-बार दिखाई देती है – जैसा कि ‘चिड़िया’ कविता में भी देखने को मिलता है। उन्होंने चिड़िया के माध्यम से कितनी सुंदर बात कही है — “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!” कलापी और आरसी उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं।

कविता (मूल पाठ)

‘चिड़िया’ एक प्रेरक प्रकृति-कविता है, जिसमें कवि पक्षियों के स्वच्छंद, संतोषी एवं मिल-जुलकर रहने वाले जीवन के माध्यम से मनुष्य को स्वतंत्रता, प्रेम तथा लोभ-त्याग का संदेश देते हैं।

पीपल की ऊँची डाली पर
बैठी चिड़िया गाती है!
तुम्हें ज्ञात क्या अपनी
बोली में संदेश सुनाती है?

चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की
रीति हमें सिखलाती है!
वह जग के बंदी मानव को
मुक्ति-मंत्र बतलाती है!

वन में जितने पंछी हैं, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;
काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!

सब मिल-जुलकर रहते हैं वे,
सब मिल-जुलकर खाते हैं;
आसमान ही उनका घर है;
जहाँ चाहते, जाते हैं!

रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी
दुनिया एक बसाते हैं;
दिन भर करते काम, रात में
पेड़ों पर सो जाते हैं!

उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं;
जग का सारा माल हड़पकर
जाने की भी चाह नहीं।

जो मिलता है अपने श्रम से,
उतना भर ले लेते हैं;
बच जाता जो, औरों के हित,
उसे छोड़ वे देते हैं!

सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं;
नहीं कमाई से औरों की
अपना घर वे भरते हैं!

वे कहते हैं, मानव! सीखो
तुम हमसे जीना जग में;
हम स्वच्छंद और क्यों तुमने
डाली है बेड़ी पग में?

तुम देखो हमको, फिर अपनी
सोने की कड़ियाँ तोड़ो;
ओ मानव! तुम मानवता से
द्रोह-भावना को छोड़ो!

पीपल की डाली पर चिड़िया
यही सुनाने आती है
बैठ घड़ी भर, हमें चकित कर,
गा-कर फिर उड़ जाती है।

— आरसी प्रसाद सिंह

कविता का सार

‘चिड़िया’ कविता में कवि आरसी प्रसाद सिंह ने एक छोटी-सी चिड़िया के माध्यम से मनुष्य को जीवन जीने की महान शिक्षा दी है। पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया जब मधुर स्वर में गाती है, तो वह केवल गीत नहीं गाती, बल्कि अपनी बोली में मनुष्य को गहरा संदेश भी सुनाती है। कवि कहते हैं कि चिड़िया हमें प्रेम और प्रीति की रीति सिखाती है तथा बंधनों में जकड़े मानव को मुक्ति का मंत्र देती है।

कवि बताते हैं कि वन में खंजन, कपोत, चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता आदि अनेक पक्षी रहते हैं, परंतु वे सब आपस में हिल-मिलकर, प्रेमपूर्वक रहते हैं। वे मिल-जुलकर खाते-पीते हैं; सारा आकाश उनका घर है और वे जहाँ चाहें, स्वतंत्र होकर उड़ जाते हैं। पक्षी दिन भर परिश्रम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं। उनके मन में न लोभ है, न पाप, न किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता। वे संसार का सारा धन हड़पने की चाह नहीं रखते; अपने श्रम से जितना मिलता है उतना ही ले लेते हैं और शेष दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।

असीम आकाश में निर्भय होकर विचरण करते ये पक्षी कभी दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते। इसी कारण वे मनुष्य को सीख देते हैं कि वह भी उनकी भाँति स्वतंत्र, संतोषी और प्रेममय जीवन जिए। पक्षी पूछते हैं कि हम तो स्वच्छंद हैं, फिर मनुष्य ने अपने पैरों में लोभ, स्वार्थ और बंधन की ‘सोने की बेड़ी’ क्यों डाल रखी है? वे मनुष्य से आग्रह करते हैं कि वह इन बेड़ियों को तोड़कर मानवता के प्रति द्रोह-भावना त्याग दे। इस प्रकार चिड़िया घड़ी भर डाली पर बैठकर, मनुष्य को चकित कर, यह अमूल्य संदेश सुनाकर फिर उड़ जाती है। पूरी कविता प्रेम, समानता, संतोष और स्वतंत्रता का संदेश देती है।

भावार्थ

(पहला अंश): कवि कहते हैं कि पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया मधुर स्वर में गा रही है। वह केवल गीत नहीं गाती, अपितु अपनी बोली में मनुष्य को एक संदेश भी देती है। चिड़िया हमें प्रेम और प्रीति से रहने की रीति सिखाती है तथा स्वार्थ एवं बंधनों में बँधे मनुष्य को मुक्ति (स्वतंत्रता) का मंत्र समझाती है।

(दूसरा अंश): वन में खंजन, कपोत (कबूतर), चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता आदि अनेक पक्षी रहते हैं और वे सब आपस में मिल-जुलकर प्रेम से रहते हैं। वे मिलकर खाते हैं, सारा आसमान उनका घर है और वे जहाँ चाहें स्वतंत्र होकर उड़ जाते हैं। जहाँ रहते हैं वहीं अपनी एक दुनिया बसा लेते हैं; दिन भर परिश्रम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं।

(तीसरा अंश): पक्षियों के मन में न लोभ है, न पाप, न ही किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता। वे संसार का सारा धन हड़पने की कोई इच्छा नहीं रखते। अपने परिश्रम से जितना मिलता है उतना ही ले लेते हैं और जो बच जाता है, उसे दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं। असीम आकाश में निर्भय विचरण करते हुए वे कभी दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते।

(चौथा अंश): पक्षी मनुष्य को सीख देते हैं कि वह भी उनकी भाँति संसार में स्वतंत्र, संतोषी एवं प्रेममय जीवन जीना सीखे। वे पूछते हैं कि हम तो स्वच्छंद हैं, फिर मनुष्य ने अपने पैरों में स्वार्थ और लोभ की ‘सोने की बेड़ी’ क्यों डाल रखी है। वे आग्रह करते हैं कि मनुष्य इन सोने की कड़ियों (बंधनों) को तोड़ दे तथा मानवता के प्रति द्रोह-भावना त्याग दे। इस प्रकार चिड़िया घड़ी भर डाली पर बैठकर यह अमूल्य संदेश सुनाती है और फिर उड़ जाती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
डालीपेड़ की शाखा, टहनी
ज्ञातमालूम, जाना हुआ
संदेशसीख, संदेसा
प्रीतिप्रेम, स्नेह
रीतितरीका, ढंग, परंपरा
बंदीबँधा हुआ, कैदी
मुक्ति-मंत्रस्वतंत्रता का उपाय
पंछी / पंखीपक्षी, चिड़िया
खंजनएक छोटा सुंदर पक्षी
कपोतकबूतर
चातकपपीहा (वर्षा-बूँद पर पलने वाला पक्षी)
कोकिलकोयल
काककौआ
शुकतोता
हिलमिलमिल-जुलकर, घुल-मिलकर
लोभलालच
हड़पकरछीनकर, हथियाकर
श्रमपरिश्रम, मेहनत
हितभला, कल्याण
सीमा-हीन गगनअसीम आकाश
निर्भय विचरणनिडर होकर घूमना
स्वच्छंदस्वतंत्र, बंधन-रहित
बेड़ी / कड़ियाँबंधन, जंजीर
द्रोह-भावनाशत्रुता एवं विरोध का भाव
चकितआश्चर्यचकित, हैरान

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?

• प्रेम-प्रीति

• मिल-जुलकर रहना

• लोभ और पाप

• निर्भय विचरण

उत्तर★ लोभ और पाप।कविता में स्पष्ट कहा गया है – “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं।” अर्थात् पक्षियों के जीवन में लोभ और पाप का गुण नहीं पाया जाता; प्रेम-प्रीति, मिल-जुलकर रहना तथा निर्भय विचरण तो उनमें मौजूद हैं।

2. “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?

• असमानता और विभाजन

• प्रतिस्पर्धा और संघर्ष

• समानता और एकता

• स्वार्थ और ईर्ष्या

उत्तर★ समानता और एकता।यह पंक्ति पक्षियों के आपसी सहयोग, भाईचारे एवं समान रूप से मिल-बाँटकर रहने के भाव को व्यक्त करती है, अर्थात् समानता और एकता की ओर संकेत करती है।

3. “वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?

• आकाश में उड़ते रहना

• बंधन में रहना

• स्वच्छंद रहना

• संचय करना

उत्तर★ स्वच्छंद रहना।पक्षी मनुष्य को लोभ एवं स्वार्थ की बेड़ियाँ तोड़कर अपनी तरह स्वच्छंद (स्वतंत्र), संतोषी एवं प्रेममय जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता की पंक्तियों को आधार बनाया – जैसे “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं” से स्पष्ट हुआ कि लोभ-पाप पक्षियों में नहीं है, इसलिए वही उत्तर चुना।परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं; कई बार साथी अलग उत्तर चुनते हैं क्योंकि एक ही पंक्ति को अलग दृष्टि से समझा जा सकता है – चर्चा से हम सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए।

संदर्भभाव
1. चिड़िया की बोलीप्रेम और स्वतंत्रता का संदेश
2. सोने की कड़ियाँबंधन और लालच
3. निर्भय विचरणस्वतंत्रता और निर्बाध जीवन
4. मुक्ति-मंत्रबंधन से मुक्ति
5. दिनभर कामश्रम और संतोष
सही मिलान1. चिड़िया की बोली → प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश2. सोने की कड़ियाँ → बंधन और लालच3. निर्भय विचरण → स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन4. मुक्ति-मंत्र → बंधन से मुक्ति5. दिनभर काम → श्रम और संतोष

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!”

अर्थ/विचारइस पंक्ति का अर्थ है कि चिड़िया अपने व्यवहार से मनुष्य को प्रेम एवं प्रीति से रहने का ढंग सिखाती है।पक्षी आपस में बिना भेदभाव के, मिल-जुलकर प्रेमपूर्वक रहते हैं। उनका यही व्यवहार मनुष्य के लिए एक सीख है कि उसे भी आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे के साथ जीवन जीना चाहिए।

(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में बताया गया है कि पक्षियों के मन में न तो धन-संग्रह का लोभ है, न कोई बुरा (पाप) कार्य करने का भाव, और न ही कल की व्यर्थ चिंता।वे संतोषी एवं निश्चिंत जीवन जीते हैं। यह मनुष्य के लिए संदेश है कि लोभ, बुराई एवं अनावश्यक चिंता त्यागकर ही सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जिया जा सकता है।

(ग) “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं”

अर्थ/विचारइसका अर्थ है कि पक्षी असीम (सीमा-रहित) आकाश में बिना किसी भय एवं बंधन के स्वतंत्र होकर उड़ते-घूमते हैं।यह पक्षियों की पूर्ण स्वतंत्रता का प्रतीक है। कवि इसके द्वारा यह भी संकेत करते हैं कि स्वतंत्रता एवं निर्भयता ही सच्चे, आनंदमय जीवन का आधार है।

सोच-विचार के लिए

नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रश्न दिए गए हैं। कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरपक्षियों के मिल-जुलकर रहने एवं मिल-बाँटकर खाने की भावना हमें सहयोग, एकता एवं भाईचारे की सीख देती है।यदि हम भी समाज में परस्पर सहयोग करें, चीज़ों को मिल-बाँटकर भोगें तथा भेदभाव छोड़ दें, तो आपसी झगड़े समाप्त होंगे, प्रेम बढ़ेगा और समाज सुखी एवं समृद्ध बनेगा। एकता में ही बल है – यही भावना परिवार, विद्यालय एवं राष्ट्र की उन्नति का आधार है।

(ख) “जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?

उत्तरपक्षी अपने श्रम से जितना मिलता है उतना ही ले लेते हैं और शेष दूसरों के लिए छोड़ देते हैं – वे संतोषी एवं निर्लोभी होते हैं।इसके विपरीत मनुष्य लोभी प्रवृत्ति का है; वह आवश्यकता से कहीं अधिक धन एवं वस्तुओं का संग्रह करता रहता है, कभी संतुष्ट नहीं होता और कई बार दूसरों का हक भी हड़पना चाहता है। यही लोभ मनुष्य को पक्षियों से भिन्न तथा कई बार दुखी एवं अशांत बना देता है।

(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?

उत्तरपक्षी को स्वच्छंद इसलिए कहा गया है क्योंकि वह असीम आकाश में निर्भय एवं स्वतंत्र होकर उड़ता है; उस पर लोभ, स्वार्थ या किसी प्रकार के बंधन का बोझ नहीं है।मनुष्य को बेड़ियों में बँधा इसलिए बताया गया है क्योंकि उसने स्वयं ही अपने पैरों में लोभ, स्वार्थ, धन-संग्रह एवं भेदभाव की ‘सोने की बेड़ी’ डाल रखी है। ये बंधन भले ही सोने जैसे आकर्षक लगें, पर वास्तव में मनुष्य की स्वतंत्रता एवं शांति छीन लेते हैं।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए।

1. चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?

उत्तर (मार्गदर्शन)जिनकी स्वतंत्रता है: मनुष्य को अपने विचार प्रकट करने, मनचाहा पढ़ने-लिखने, मेहनत से जीविका कमाने, धर्म एवं संस्कृति का पालन करने तथा घूमने-फिरने की स्वतंत्रता है।जिनकी स्वतंत्रता नहीं है: किसी को हानि पहुँचाने, दूसरों का हक छीनने, झूठ-धोखा करने, कानून तोड़ने या किसी की स्वतंत्रता में बाधा डालने की स्वतंत्रता किसी को नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के साथ जीना है।

2. चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?

उत्तरचिड़िया का जीवन स्वच्छंद, संतोषी एवं निर्लोभ है – वह आवश्यकता भर ही लेती है, मिल-जुलकर रहती है और निश्चिंत होकर उड़ती है।मनुष्य का जीवन सुविधाओं से भरा होते हुए भी लोभ, स्पर्धा, स्वार्थ एवं चिंता से बँधा है। मनुष्य अधिक से अधिक संग्रह करना चाहता है, जबकि चिड़िया प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर सरल जीवन जीती है – यही दोनों के जीवन का मुख्य अंतर है।

3. चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना)यदि मेरे पास चिड़िया जैसी सुविधा होती तो मैं अपना घर किसी हरे-भरे पहाड़ की चोटी पर अथवा नदी के किनारे किसी बड़े वृक्ष पर बनाना चाहता।वहाँ शुद्ध हवा, शांति एवं प्राकृतिक सौंदर्य होता; मैं ऊँचाई से सारा संसार देख पाता और जब चाहता स्वतंत्र होकर उड़ जाता। प्रकृति के निकट रहने से मन सदा प्रसन्न एवं शांत रहता।

4. यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?

उत्तर (नमूना)यदि मैं चिड़िया की भाषा समझ पाता तो उससे पूछता कि वह इतने मधुर स्वर में क्या गाती है और कौन-सा संदेश सुनाती है।मैं उससे उसके स्वतंत्र जीवन, उसकी लंबी उड़ानों एवं घोंसला बनाने की कला के बारे में जानना चाहता। साथ ही उससे आग्रह करता कि वह मनुष्यों को संतोष, प्रेम एवं स्वतंत्रता का संदेश इसी प्रकार देती रहे, और मैं उसे विश्वास दिलाता कि हम पक्षियों एवं पेड़ों की रक्षा करेंगे।

कविता की रचना

“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे / सब मिल-जुलकर खाते हैं” – रेखांकित शब्द (मिल-जुलकर) लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्रायः कविता में आती है। अब आप सब मिलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए—
संकेत— सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे / सब मिल-जुलकर गाते हैं…

उत्तर (नमूना रचना)सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे,
सब मिल-जुलकर गाते हैं;
सब मिल-जुलकर उड़ते नभ में,
सब मिल-जुलकर खाते हैं!
सब मिल-जुलकर श्रम करते हैं,
सब मिल-जुलकर सोते हैं;
प्रेम-प्रीति की डोर बाँधकर,
सुख-दुख साथ पिरोते हैं!
(विद्यार्थी इसी लय में अपनी कल्पना से अन्य पंक्तियाँ जोड़ सकते हैं।)

भाषा की बात

(क) क्रिया शब्द पहचानना

“पीपल की ऊँची डाली पर / बैठी चिड़िया गाती है! / तुम्हें ज्ञात क्या अपनी / बोली में संदेश सुनाती है?” – रेखांकित शब्द ‘गाती’ और ‘सुनाती’ से चिड़िया के काम का बोध होता है। ऐसे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध हो, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया-शब्द ढूँढ़कर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तरकविता के कुछ क्रिया-शब्द: गाती है, सुनाती है, सिखलाती है, बतलाती है, रहते हैं, खाते हैं, जाते हैं, बसाते हैं, सो जाते हैं, ले लेते हैं, छोड़ देते हैं, उड़ते हैं, विचरण करते हैं, भरते हैं, कहते हैं, तोड़ो, छोड़ो, आती है, उड़ जाती है।नए वाक्य:गाती है – कोयल आम के पेड़ पर बैठकर मीठा गीत गाती है।उड़ते हैं – आकाश में पक्षी झुंड बनाकर उड़ते हैं।सिखाती है – हमारी अध्यापिका हमें अच्छी आदतें सिखाती है।छोड़ देते हैं – दयालु लोग अपना बचा हुआ भोजन ज़रूरतमंदों के लिए छोड़ देते हैं।

(ख) शब्द एक : अर्थ अनेक

“उनके मन में लोभ नहीं है” में ‘मन’ का अर्थ ‘चित्त’ (बुद्धि) है, किंतु ‘मन’ शब्द के अन्य अर्थ भी हो सकते हैं – जैसे “आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है” (इच्छा), “व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा” (तौल की इकाई)। नीचे दिए शब्दों का अलग-अलग अर्थों/संदर्भों में प्रयोग कीजिए— (क) कर (ख) जल (ग) अर्थ (घ) फल (ङ) आम

शब्दभिन्न अर्थ एवं प्रयोग-वाक्य
कर(i) हाथ – भगवान ने अपने कर से आशीर्वाद दिया। (ii) टैक्स/कर – व्यापारी समय पर सरकार को कर चुकाता है। (iii) करना (क्रिया) – अपना कार्य ध्यान से कर
जल(i) पानी – प्यासे को शीतल जल पिलाओ। (ii) जलना (क्रिया) – दीपक रात भर जल रहा है।
अर्थ(i) मतलब – इस शब्द का अर्थ बताओ। (ii) धन – अर्थ के बिना अनेक कार्य रुक जाते हैं।
फल(i) खाने योग्य फल – आम मीठा फल है। (ii) परिणाम – परिश्रम का फल मीठा होता है।
आम(i) एक फल – गर्मियों में आम खूब मिलते हैं। (ii) साधारण/सर्वसाधारण – यह आम बात है।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

भावों की बात

(क) दिए गए दृश्यों को देखकर आपको कैसा महसूस होता है? (प्रेम, करुणा, क्रोध, आनंद, घृणा, शांति आदि भावों में से चुनिए।) (ख) ये भाव आप कब-कब अनुभव करते हैं? उनके नाम लिखकर एक-एक वाक्य लिखिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)(क) कुछ संभावित उत्तर: पक्षी के चहचहाने की आवाज सुनकर – आनंद/शांति; पेड़ पर अनगिनत पक्षियों का एक साथ चहचहाना – आनंद; गाय का अपने बच्चे को दूध पिलाना – ममता/प्रेम; वाहन से कूड़ा बाहर फेंकना – घृणा/क्रोध; बच्चे का कागज कूड़ेदान में डालना – प्रसन्नता/आभार; बिना हेलमेट तेज बाइक चलाना – डर/चिंता; दो प्राणियों का लड़ना – दुख; दिव्यांग का तिपहिया गाड़ी पर यात्रा करना – आत्मविश्वास/सहानुभूति; ब्रेल लिपि के सूचना-बोर्ड – आभार/आनंद; किसी को अपशब्द कहना – क्रोध/दुख; भूखे को भोजन देना – करुणा/दया; भाई का बहन को भोजन खिलाना – प्रेम/ममता(ख) उदाहरण: आत्मविश्वास – जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ। करुणा – जब मैं किसी घायल पशु को देखता हूँ। आनंद – जब परीक्षा में अच्छे अंक आते हैं।

आज की पहेली

कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़े। नीचे दी गई पहेलियों में छिपे पक्षियों को पहचानिए।

उत्तर• “दिखने में हूँ हरा-हरा… खाता हूँ मैं मिर्च लाल, कहते सब मुझे मिट्ठूलाल” – तोता (शुक)• “रहता है घर के आस-पास, रंग है उसका काला खास… झुंड में आ जाता है वो” – कौआ (काक)• “सुंदर काले मेरे नैन, श्वेत-श्याम है मेरे डैन… खेलूँ पानी में तो आए चैन” – खंजन• “कूहू-कूहू मधुर आवाज सुनाती… काली हूँ पर काक नहीं” – कोयल (कोकिल)• “संदेश पहुँचाना मेरा काम, देता हूँ शांति का पैगाम, करता हूँ मैं गूटर-गूँ” – कबूतर (कपोत)• “पीता हूँ बारिश की बूँदें… देखो चकोर है मेरी साथी” – चातक (पपीहा)• “तन मेरा सफेद, गर्दन मेरी लंबी… कहलाता हूँ मैं जलपक्षी” – हंस

चित्र की बात

दिए गए तीनों चित्रों को ध्यान से देखकर बताइए – आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों?

उत्तर (मार्गदर्शन)मैं पक्षियों को खुले आसमान, हरे-भरे पेड़ों एवं प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से उड़ता हुआ देखना पसंद करूँगा, न कि पिंजरे में बंद।क्योंकि पक्षियों का स्वभाव स्वच्छंद है; खुले वातावरण में ही वे स्वस्थ, प्रसन्न एवं निर्भय रहते हैं। पिंजरे में बंद पक्षी अपनी स्वतंत्रता खो देता है, यह उसके स्वाभाविक जीवन के विरुद्ध है। कविता का संदेश भी यही है कि स्वतंत्रता ही पक्षियों का सच्चा सुख है।

साथ-साथ

“वन में जितने पंछी हैं… करते सब आपस में हिलमिल!” 1. वन के सभी पक्षी एक साथ रहते हैं; हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है? 2. हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?

उत्तर1. पशु-पक्षी हमारे पर्यावरण का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। वे फूलों का परागण करते हैं, बीज फैलाते हैं, हानिकारक कीड़ों को खाकर फसल की रक्षा करते हैं और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। उनके बिना प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा, इसलिए उनका हमारे परिवेश में रहना आवश्यक है।2. हम पशु-पक्षियों की सहायता इस प्रकार कर सकते हैं – छत या आँगन में दाना-पानी रखकर, पेड़ लगाकर, घोंसलों को न उजाड़कर, उन्हें न मारकर एवं न पकड़कर, घायल पक्षियों की देखभाल करके तथा गर्मी में पानी के बर्तन रखकर।

रचनात्मकता / हमारा पर्यावरण / परियोजना कार्य / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)रचनात्मकता: खुले आसमान, टहनियों एवं छतों पर बैठे/उड़ते पक्षियों के चित्रों का कोलाज बनाकर कक्षा में प्रदर्शित करें; तथा कविता की किसी पंक्ति को लेकर ‘स्वतंत्रता और प्रेम’ के संदेश वाला पोस्टर तैयार करें।हमारा पर्यावरण: मनुष्य द्वारा किए जा रहे जिन कार्यों से पशु-पक्षियों पर संकट आता है, उनकी सूची बनाइए – जैसे जंगलों की कटाई, ऊँचे भवनों का निर्माण, प्रदूषण, शिकार एवं प्लास्टिक कचरा। उपाय: वृक्षारोपण, प्रदूषण-नियंत्रण, शिकार पर रोक एवं संरक्षित क्षेत्र बनाना।परियोजना कार्य: घर-विद्यालय में प्लास्टिक थैले के प्रयोग की सूची बनाकर उसके स्थान पर कागज/कपड़े के थैले के विकल्प सुझाइए; तथा ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर नुक्कड़ नाटक तैयार कर प्रांगण में प्रस्तुत करें।झरोखे से (‘पक्षियों की प्रवास यात्राएँ’): इस गद्यांश से पता चलता है कि अनेक पक्षी हर वर्ष शरद ऋतु में ठंडे देशों से गरम देशों की ओर तथा गर्मियों में पुनः उत्तर की ओर लंबी यात्राएँ करते हैं; वे प्रायः दल बनाकर (सारस-हंस ‘V’ आकृति में) उड़ते हैं और मार्ग में अनेक कष्ट सहते हैं।साझी समझ / खोजबीन के लिए: इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों (जैसे साइबेरियन सारस) के बारे में रोचक जानकारी एकत्र कर लेख लिखें तथा दी गई इंटरनेट कड़ियों से जीव-जगत के बारे में और जानें।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘चिड़िया’ कविता के रचयिता कौन हैं और कविता का मुख्य भाव क्या है?

उत्तर‘चिड़िया’ कविता के रचयिता आरसी प्रसाद सिंह हैं। कविता का मुख्य भाव यह है कि चिड़िया (पक्षी) के स्वतंत्र, संतोषी एवं प्रेममय जीवन से मनुष्य को प्रेम, समानता, संतोष तथा लोभ-त्याग की प्रेरणा लेनी चाहिए।

2. चिड़िया पीपल की डाली पर बैठकर मनुष्य को क्या-क्या संदेश देती है?

उत्तरचिड़िया मनुष्य को प्रेम-प्रीति से मिल-जुलकर रहने, लोभ एवं स्वार्थ त्यागने, संतोषपूर्वक श्रम करने तथा बंधनों को तोड़कर स्वच्छंद एवं निर्भय जीवन जीने का संदेश देती है। वह मानवता के प्रति द्रोह-भाव छोड़ने की भी सीख देती है।

3. कविता के अनुसार पक्षियों के मन में किन बुराइयों का अभाव होता है?

उत्तरपक्षियों के मन में लोभ, पाप तथा व्यर्थ की परवाह (चिंता) नहीं होती। वे संसार का धन हड़पना नहीं चाहते और दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते – इसलिए उनका जीवन निर्मल एवं संतोषी होता है।

4. पक्षी अपने श्रम से प्राप्त वस्तु का उपयोग किस प्रकार करते हैं?

उत्तरपक्षी अपने श्रम से जितना मिलता है, उतना ही (अपनी आवश्यकता भर) ले लेते हैं और जो बच जाता है, उसे दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं। यह उनके संतोष एवं उदारता का परिचय देता है।

5. ‘सोने की कड़ियाँ’ से कवि का क्या आशय है?

उत्तर‘सोने की कड़ियाँ’ से कवि का आशय मनुष्य द्वारा स्वयं अपने पैरों में डाली गई लोभ, स्वार्थ एवं धन-संग्रह की बेड़ियों से है। ये बंधन भले ही आकर्षक (सोने जैसे) लगें, पर ये मनुष्य की स्वतंत्रता एवं शांति को छीन लेते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘चिड़िया’ कविता का केंद्रीय भाव (मूल संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘चिड़िया’ कविता का केंद्रीय भाव यह है कि छोटी-सी चिड़िया भी मनुष्य को जीवन जीने की महान शिक्षा दे सकती है। कवि बताते हैं कि वन के सभी पक्षी प्रेम एवं भाईचारे से मिल-जुलकर रहते हैं, मिल-बाँटकर खाते हैं और स्वच्छंद होकर आकाश में उड़ते हैं।उनके मन में लोभ, पाप एवं व्यर्थ की चिंता नहीं होती; वे अपने श्रम से आवश्यकता भर ही लेते हैं और शेष दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। इसी कारण पक्षी मनुष्य को संदेश देते हैं कि वह भी लोभ एवं स्वार्थ की ‘सोने की बेड़ियाँ’ तोड़कर स्वतंत्र, संतोषी एवं प्रेममय जीवन जिए तथा मानवता के प्रति द्रोह-भाव त्याग दे। इस प्रकार कविता प्रेम, समानता, संतोष एवं स्वतंत्रता का अमूल्य संदेश देती है।

7. कविता के आधार पर पक्षियों एवं मनुष्य के जीवन की तुलना कीजिए।

उत्तरकविता के अनुसार पक्षियों एवं मनुष्य के जीवन में स्पष्ट अंतर है। पक्षी स्वच्छंद, निर्भय एवं संतोषी जीवन जीते हैं – वे असीम आकाश में स्वतंत्र उड़ते हैं, मिल-जुलकर रहते हैं और आवश्यकता भर ही ग्रहण करते हैं। उनके मन में न लोभ है, न स्वार्थ, न दूसरों का हक छीनने की चाह।इसके विपरीत मनुष्य ने अनेक सुविधाएँ पा लेने पर भी स्वयं को लोभ, स्वार्थ, स्पर्धा एवं चिंता की बेड़ियों में बाँध लिया है। वह आवश्यकता से अधिक संग्रह करता है, दूसरों से आगे निकलना चाहता है और कभी संतुष्ट नहीं होता। कवि चाहते हैं कि मनुष्य पक्षियों से प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता का गुण सीखे और अपने आत्मनिर्मित बंधनों को तोड़कर सरल, सुखी जीवन जिए।

8. इस कविता के द्वारा कवि पर्यावरण एवं स्वतंत्रता के विषय में क्या प्रेरणा देते हैं?

उत्तरकवि इस कविता द्वारा यह प्रेरणा देते हैं कि प्रकृति एवं उसके जीव-जंतु हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं और उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। पक्षी प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहते हैं – न अधिक संग्रह करते हैं, न दूसरों को हानि पहुँचाते हैं।स्वतंत्रता के विषय में कवि बताते हैं कि सच्चा सुख स्वच्छंद एवं निर्भय जीवन में है, बंधनों में नहीं। मनुष्य ने लोभ एवं स्वार्थवश स्वयं को बाँध लिया है तथा प्रकृति का दोहन कर पक्षियों का जीवन भी संकट में डाल दिया है। अतः कवि का संदेश है कि मनुष्य प्रकृति एवं पशु-पक्षियों की रक्षा करे, लोभ त्यागे और स्वतंत्रता, प्रेम एवं संतोष के साथ जीवन जिए।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘चिड़िया’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुमित्रानंदन पंत

(ख) आरसी प्रसाद सिंह

(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(घ) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर(ख) आरसी प्रसाद सिंह।

2. चिड़िया किस पेड़ की ऊँची डाली पर बैठकर गाती है?

(क) आम

(ख) नीम

(ग) पीपल

(घ) बरगद

उत्तर(ग) पीपल।

3. कविता के अनुसार पक्षियों के मन में क्या नहीं है?

(क) प्रेम

(ख) लोभ और पाप

(ग) एकता

(घ) स्वतंत्रता

उत्तर(ख) लोभ और पाप।

4. ‘कपोत’ किस पक्षी को कहते हैं?

(क) तोता

(ख) कौआ

(ग) कबूतर

(घ) कोयल

उत्तर(ग) कबूतर।

5. ‘शुक’ का अर्थ है—

(क) हंस

(ख) तोता

(ग) कोयल

(घ) खंजन

उत्तर(ख) तोता।

6. पक्षियों का घर कविता में किसे बताया गया है?

(क) पेड़ की डाली

(ख) घोंसला

(ग) आसमान

(घ) वन

उत्तर(ग) आसमान। कविता में कहा गया है – “आसमान ही उनका घर है।”

7. पक्षी अपने श्रम से प्राप्त वस्तु में से जो बच जाता है, उसका क्या करते हैं?

(क) संग्रह कर लेते हैं

(ख) फेंक देते हैं

(ग) औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं

(घ) छिपा लेते हैं

उत्तर(ग) औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।

8. ‘सोने की कड़ियाँ’ किसका प्रतीक हैं?

(क) आभूषण

(ख) लोभ एवं स्वार्थ के बंधन

(ग) धन-संपत्ति

(घ) मित्रता

उत्तर(ख) लोभ एवं स्वार्थ के बंधन।

9. कविता में चिड़िया मनुष्य से किस भावना को छोड़ने के लिए कहती है?

(क) प्रेम-भावना

(ख) द्रोह-भावना

(ग) दया-भावना

(घ) त्याग-भावना

उत्तर(ख) द्रोह-भावना।

10. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?

(क) धन कमाना ही जीवन है

(ख) प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता

(ग) अधिक से अधिक संग्रह करना

(घ) अकेले रहना

उत्तर(ख) प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ग), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): चिड़िया मनुष्य को मुक्ति-मंत्र (स्वतंत्रता का संदेश) देती है।

कारण (R): चिड़िया स्वयं असीम आकाश में निर्भय एवं स्वच्छंद होकर विचरण करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पक्षी संसार का सारा धन हड़पकर संग्रह करना चाहते हैं।

कारण (R): पक्षी अपने श्रम से आवश्यकता भर ही लेते हैं और शेष औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (पक्षियों के मन में लोभ एवं संग्रह की चाह नहीं है), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): वन के सभी पक्षी आपस में मिल-जुलकर रहते हैं।

कारण (R): उनके मन में प्रेम, एकता एवं भाईचारे का भाव होता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): मनुष्य ने स्वयं अपने पैरों में बंधन डाल रखे हैं।

कारण (R): मनुष्य लोभ एवं स्वार्थ की ‘सोने की कड़ियों’ में बँधा हुआ है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘चिड़िया’ एक प्रकृति-परक प्रेरक कविता है।

कारण (R): यह कविता पक्षियों के जीवन के माध्यम से मनुष्य को प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता की प्रेरणा देती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(घ), 3-(क), 4-(क), 5-(क)

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

• कविता की मुख्य पंक्ति “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है” एवं कवि का नाम (आरसी प्रसाद सिंह) अवश्य याद रखें।
• कविता में आए पक्षियों के नाम और उनके अर्थ (खंजन, कपोत=कबूतर, चातक=पपीहा, कोकिल=कोयल, काक=कौआ, शुक=तोता, हंस) क्रमवार याद कर लें।
• कविता का संदेश तीन शब्दों में पकड़ें – प्रेम, संतोष, स्वतंत्रता; उत्तर लिखते समय इन्हीं को विस्तार दें।
• ‘सोने की कड़ियाँ’, ‘मुक्ति-मंत्र’, ‘द्रोह-भावना’ जैसे प्रतीकात्मक शब्दों का भाव स्पष्ट लिखें।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

• कवि का नाम ‘आरसी प्रसाद सिंह’ है – इसे ‘रामधारी सिंह’ या अन्य कवि से न मिलाएँ।
• ‘चातक’ को कौआ एवं ‘कपोत’ को तोता लिख देना सामान्य भूल है – चातक = पपीहा, कपोत = कबूतर, शुक = तोता।
• ‘सोने की कड़ियाँ’ को सचमुच का सोना/आभूषण न समझें; यह लोभ एवं स्वार्थ के बंधन का प्रतीक है।
• कविता को केवल पक्षियों का वर्णन न समझें – इसका असली उद्देश्य मनुष्य को जीवन-शिक्षा देना है।
• देवनागरी वर्तनी ध्यान से लिखें (निर्भय, स्वच्छंद, द्रोह) – मात्रा-अशुद्धि से अंक कटते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘चिड़िया’ कविता के कवि कौन हैं?

‘चिड़िया’ कविता के कवि आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) हैं, जो हिंदी एवं मैथिली के प्रसिद्ध कवि थे और प्रकृति तथा जीवन-संघर्ष के सुंदर चित्रण के लिए जाने जाते हैं।

‘चिड़िया’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को पक्षियों की भाँति प्रेम, समानता, संतोष एवं स्वतंत्रता के साथ जीवन जीना चाहिए तथा लोभ, स्वार्थ एवं द्रोह-भावना त्याग देनी चाहिए।

कविता में ‘सोने की कड़ियाँ’ का क्या आशय है?

‘सोने की कड़ियाँ’ मनुष्य द्वारा स्वयं अपने ऊपर डाले गए लोभ एवं स्वार्थ के बंधनों का प्रतीक हैं, जो आकर्षक तो लगते हैं पर उसकी स्वतंत्रता छीन लेते हैं।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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