कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 10 – मीरा के पद (पद/काव्य) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 10 ‘मीरा के पद’ (रचनाकार – कवयित्री मीरा) का पूरा समाधान देता है – दोनों पदों का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, शब्दों के रूप, भाषा एवं पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवयित्री परिचय – मीरा
- पद (मूल पाठ)
- भावार्थ
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- कविता की रचना
- अनुमान और कल्पना से
- शब्दों के रूप / शब्द से जुड़े शब्द
- कविता का सौंदर्य / रूप बदलकर
- मुहावरे
- आपकी बात
- पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवयित्री परिचय – मीरा
मीरा (मीराबाई) हिंदी की महान कवयित्री, कृष्ण-भक्त एवं संत थीं। उनकी रचनाएँ आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व रची गई थीं। माना जाता है कि मीरा बचपन से ही श्रीकृष्ण की भक्ति में मगन रहती थीं। राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने संतों का जीवन चुना और महलों को त्यागकर तीर्थों की यात्राएँ करने लगीं। वे मंदिरों में भजन गातीं और सत्संग करतीं। उनके गाए हुए भजन एवं पद लोग आज भी श्रद्धा और प्रेम से गाते, पढ़ते और सुनते-सुनाते हैं। उनके पदों में श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण एवं भक्ति का भाव मिलता है। मीरा प्रायः अपने पदों के अंत में ‘मीरा के प्रभु गिरधर नागर’ कहकर अपने आराध्य का स्मरण करती हैं।
पद (मूल पाठ)
पाठ में मीरा के दो पद दिए गए हैं – पहला पद श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करता है और दूसरा पद सावन ऋतु में प्रभु-मिलन की उमंग को व्यक्त करता है।
पद (1)
मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥
अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥
क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥
मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल॥
पद (2)
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की।
नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आनंद मंगल गावन की॥
— मीरा
भावार्थ
पद (1): मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि हे नंदलाल! आप सदा मेरी आँखों में बस जाइए। श्रीकृष्ण की मूर्ति (रूप) मोहित करने वाली है, उनकी सूरत साँवली है और उनके नेत्र बड़े-बड़े (विशाल) हैं। उनके होंठों पर अमृत-रस से भरी हुई मुरली सुशोभित है और उनके वक्षस्थल (छाती) पर वैजयंती माला झूल रही है। उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं और पैरों में बँधे नूपुर (पायल/घुँघरू) मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले तथा अपने भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।
पद (2): सावन की बदली (बादल) बरस रही है – यह सावन मन को भाने वाला है। सावन के आते ही मीरा का मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण (हरि) के आने की आहट (भनक) सुनाई दी है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आ गए हैं, बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेघ बरस रहे हैं और शीतल पवन मन को सुहावना लग रहा है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु गिरधर नागर के मिलन की आशा से उनके मन में आनंद एवं मंगल गीत गाने की उमंग जाग उठी है।
पाठ का सार
‘मीरा के पद’ पाठ में कृष्ण-भक्त कवयित्री मीरा के दो भक्ति-पद संकलित हैं, जिनमें श्रीकृष्ण के प्रति उनका अनन्य प्रेम एवं समर्पण प्रकट होता है। पहले पद में मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें। इस पद में श्रीकृष्ण के सुंदर रूप का सजीव चित्रण हुआ है – उनकी मोहक मूर्ति, साँवली सूरत, विशाल नेत्र, अधरों पर सजी अमृत-रस भरी मुरली, छाती पर झूलती वैजयंती माला, कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ तथा पैरों में मधुर ध्वनि करते नूपुर। मीरा अपने प्रभु को संतों को सुख देने वाला और भक्तों से स्नेह करने वाला ‘भक्तवत्सल गोपाल’ कहती हैं।
दूसरे पद में मीरा सावन ऋतु के माध्यम से प्रभु-मिलन की उत्कट उमंग व्यक्त करती हैं। सावन की मनभावन बदली बरस रही है और इस ऋतु को देखकर मीरा का मन उमंग से भर उठता है, क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनाई देती है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, वर्षा की झड़ी लग जाती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन मन को सुहावना बना देता है। प्रकृति का यह सौंदर्य मीरा के हृदय में आनंद एवं मंगल-गीत गाने की प्रेरणा जगाता है। दोनों पदों में मीरा अपने नाम के साथ अपने आराध्य का स्मरण करती हैं — ‘मीरा के प्रभु संतन सुखदाई’ तथा ‘मीरा के प्रभु गिरधर नागर’। इस प्रकार ये पद भक्ति-भावना, प्रकृति-सौंदर्य एवं प्रेम का मधुर संगम प्रस्तुत करते हैं और हमें सच्ची भक्ति एवं समर्पण का संदेश देते हैं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नैनन / नैना | नेत्र, आँखें |
| नंदलाल | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| मोहनि मूरति | मन को मोहने वाली मूर्ति/रूप |
| साँवरि सूरति | साँवली सूरत (मुखाकृति) |
| अधर | होंठ |
| सुधा रस | अमृत-रस |
| राजति | सुशोभित होना, शोभा देना |
| उर | हृदय, वक्षस्थल (छाती) |
| वैजंती माल | वैजयंती माला |
| क्षुद्र घंटिका | छोटी घंटी, घुँघरू |
| कटितट | कमर का भाग |
| सोभित | शोभित, सुशोभित |
| नूपुर | पैर का गहना, पायल/घुँघरू |
| रसाल | रसीला, मधुर, सुंदर |
| भक्तवछल | भक्तवत्सल, भक्तों से स्नेह करने वाला |
| बदरिया | बदली, बादल |
| भावन | भाने वाली, अच्छी लगने वाली |
| उमग्यो | उमंग से भर गया |
| मनवा | मन |
| भनक | हल्की/अस्पष्ट आहट, उड़ती हुई खबर |
| हरि | श्रीकृष्ण/विष्णु |
| चहुँ दिश | चारों दिशाएँ |
| दामिन | दामिनी, बिजली |
| दमकै | चमकना |
| मेहा / मेह | मेघ, वर्षा, बादल |
| सोहावन | सुहावना, अच्छा लगने वाला |
| गिरधर नागर | पर्वत (गोवर्धन) को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
• संतों से
• भक्तों से
• वैजंती से
• श्रीकृष्ण से
(2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?
• प्रेम और भक्ति
• प्रकृति की सुंदरता
• युद्ध और शांति
• ज्ञान और शिक्षा
(3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
• सर्दी
• गरमी
• वर्षा
• वसंत
(4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—
• प्रसन्न हैं।
• दुखी हैं।
• उदास हैं।
• चिंतित हैं।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।
| शब्द | अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| 1. नंदलाल | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| 2. वैजंती माल | वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| 3. सावन | श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले का महीना |
| 4. गिरधर | पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्तवछल गोपाल॥”
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
कविता की रचना
“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” तथा “मीरा के प्रभु गिरधर नागर” – इन दोनों पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपना नाम जोड़ देते थे।
(क) इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
शब्दों के रूप / शब्द से जुड़े शब्द
शब्दों के रूप
पद में कुछ शब्द ऐसे रूपों में आए हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते-बोलते होंगे। नीचे ऐसे शब्द उनके प्रचलित (मानक) रूप के साथ दिए गए हैं।
| पद का शब्द | प्रचलित (मानक) रूप |
|---|---|
| नैनन | नैनों / आँखों |
| सोभित | शोभित |
| भक्तवछल | भक्तवत्सल |
| बदरिया | बदली / बादल |
| मेरो मनवा | मेरा मन |
| आवन | आना / आगमन |
| दिश | दिशा |
| मेहा | मेघ |
शब्द से जुड़े शब्द (श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द)
पद में से श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द चुनकर लिखिए।
पंक्ति से पंक्ति (मिलान)
मिलती-जुलती पंक्तियों को मिलाइए—
कविता का सौंदर्य / रूप बदलकर
कविता का सौंदर्य (अनुप्रास)
“बरसे बदरिया सावन की।” – इस पंक्ति में आपको कौन-सी विशेष बात दिखाई दी? पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
रूप बदलकर
पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।
मुहावरे
“बसो मेरे नैनन में नंदलाल।” – ‘नैनों/आँखों में बस जाना’ एक मुहावरा है। नीचे आँखों से जुड़े कुछ मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग दिए गए हैं।
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| आँखों का तारा | बहुत प्यारा होना | नन्हा मोहन अपनी दादी की आँखों का तारा है। |
| आँखों पर परदा पड़ना | लोभ/मोह में सच न दिखना | धन के लोभ में उसकी आँखों पर परदा पड़ गया। |
| आँखों के आगे अँधेरा छाना | घबरा जाना, कुछ न सूझना | दुर्घटना का समाचार सुनते ही उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। |
| आँख दिखाना | क्रोध से डराना/धमकाना | बड़े भाई के आँख दिखाते ही छोटा बच्चा चुप हो गया। |
| आँख का काँटा | बुरा या अप्रिय लगना | ईमानदार कर्मचारी भ्रष्ट अधिकारी की आँख का काँटा बन गया। |
| आँखें फेरना | उपेक्षा करना, बेरुख़ी दिखाना | विपत्ति में उसके मित्रों ने भी आँखें फेर लीं। |
| आँख भर आना | आँसू आ जाना, भावुक होना | बेटी की विदाई पर माँ की आँख भर आई। |
| आँखें चुराना | सामना करने से बचना | गलती पकड़े जाने पर वह सबसे आँखें चुराने लगा। |
| आँखों से उतारना | आदर/प्रेम समाप्त कर देना | विश्वासघात के बाद उसने मित्र को आँखों से उतार दिया। |
| आँखों में खटकना | बुरा लगना, ईर्ष्या का पात्र होना | उसकी सफलता प्रतियोगियों की आँखों में खटकने लगी। |
आपकी बात
(क) “बरसे बदरिया सावन की” – जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? सावन में कौन-सी ध्वनियाँ सुनाई देती हैं और आपके मन में कौन-सी भावनाएँ उठती हैं? वर्षा ऋतु में कौन-सी गतिविधियाँ अच्छी लगती हैं? सावन में कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं?
(ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” – क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? साथ ही किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों के साथ कीजिए।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
विशेषताएँ
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” – श्रीकृष्ण की कौन-सी बातों ने आपको सबसे अधिक आकर्षित किया? किसी व्यक्ति/वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? अपनी बाह्य एवं आंतरिक विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
मधुर ध्वनियाँ (पहेलियाँ – वाद्ययंत्र)
पद की पंक्तियों में जिन वस्तुओं से मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं, उन्हें पहचानिए। साथ ही दी गई पहेलियों से मधुर ध्वनि करने वाले वाद्ययंत्रों को पहचानिए।
आज की पहेली (समान ध्वनि वाले शब्द)
पाठ में से चुने गए शब्दों की अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजकर लिखिए।
चित्र करते हैं बातें / सावन से जुड़े गीत / खोजबीन
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं और वे किस प्रकार की कवयित्री मानी जाती हैं?
2. पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या विनती करती हैं?
3. ‘भनक सुनी हरि आवन की’ पंक्ति का क्या आशय है?
4. मीरा अपने दोनों पदों के अंत में अपने प्रभु को किन नामों से पुकारती हैं?
5. दूसरे पद में सावन ऋतु का मीरा के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. पहले पद के आधार पर श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
7. ‘मीरा के पद’ में भक्ति एवं प्रकृति का संगम किस प्रकार हुआ है? समझाइए।
8. मीरा के जीवन एवं भक्ति से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं?
(क) सूरदास
(ख) मीरा (मीराबाई)
(ग) तुलसीदास
(घ) कबीरदास
2. मीरा किसकी भक्त थीं?
(क) श्रीराम की
(ख) शिव की
(ग) श्रीकृष्ण की
(घ) दुर्गा की
3. ‘नंदलाल’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) किसी राजा के लिए
(ख) श्रीकृष्ण के लिए
(ग) किसी संत के लिए
(घ) मीरा के पिता के लिए
4. पहले पद में श्रीकृष्ण के होंठों पर क्या सुशोभित है?
(क) वैजयंती माला
(ख) मुरली (बाँसुरी)
(ग) नूपुर
(घ) घंटिका
5. ‘भक्तवछल’ (भक्तवत्सल) शब्द का अर्थ है—
(क) भक्तों से क्रोध करने वाला
(ख) भक्तों से स्नेह करने वाला
(ग) भक्तों से दूर रहने वाला
(घ) भक्तों की परीक्षा लेने वाला
6. दूसरे पद में किस ऋतु का वर्णन है?
(क) ग्रीष्म
(ख) शरद
(ग) सावन (वर्षा)
(घ) वसंत
7. ‘दामिन’ शब्द का अर्थ है—
(क) बादल
(ख) बिजली
(ग) वर्षा
(घ) पवन
8. सावन ऋतु में मीरा का मन कैसा हो जाता है?
(क) उदास
(ख) उमंग एवं आनंद से भरा
(ग) भयभीत
(घ) क्रोधित
9. ‘गिरधर नागर’ का अर्थ है—
(क) नगर में रहने वाले
(ख) पर्वत (गोवर्धन) धारण करने वाले श्रीकृष्ण
(ग) मीरा के गुरु
(घ) बादलों के स्वामी
10. “बरसे बदरिया सावन की” पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) रूपक
(घ) यमक
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): मीरा श्रीकृष्ण से अपनी आँखों में बसने की विनती करती हैं।
कारण (R): मीरा श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं और उनका रूप सदा अपने मन में बसाए रखना चाहती थीं।
2. अभिकथन (A): दूसरे पद में मीरा सावन की वर्षा से दुखी एवं उदास हैं।
कारण (R): सावन में मीरा को श्रीकृष्ण के आने की आहट सुनाई देती है।
3. अभिकथन (A): मीरा अपने पदों के अंत में अपने नाम का उल्लेख करती हैं।
कारण (R): मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपना नाम जोड़ देते थे।
4. अभिकथन (A): ‘नंदलाल’ एवं ‘गिरधर नागर’ दोनों शब्द श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं।
कारण (R): पद में श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है।
5. अभिकथन (A): “बरसे बदरिया” पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।
कारण (R): इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हुई है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- दोनों पदों की मुख्य पंक्तियाँ (टेक) – ‘बसो मेरे नैनन में नंदलाल’ तथा ‘बरसे बदरिया सावन की’ – कंठस्थ रखें।
- याद रखें कि पहला पद भक्ति/रूप-वर्णन का है और दूसरा पद सावन ऋतु एवं प्रभु-मिलन की उमंग का।
- श्रीकृष्ण के पर्यायवाची (नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधर नागर) तथा कठिन शब्दार्थ (नूपुर, अधर, उर, दामिन, बदरिया) अवश्य रटें।
- भावार्थ लिखते समय सरल हिंदी में, क्रम से एवं पद के भाव के अनुसार उत्तर दें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘गिरधर’ को नगर का नाम समझ लेना – यह श्रीकृष्ण का ही नाम है (गोवर्धन-धारी)।
- दूसरे पद को विरह/दुःख का पद समझ लेना – यह उमंग एवं आनंद का पद है।
- ‘भक्तवछल’ का अर्थ गलत लिखना – इसका सही अर्थ है ‘भक्तवत्सल’ अर्थात् भक्तों से स्नेह करने वाला।
- पद की पंक्तियों को बोलचाल के रूप में बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों (नैनन, मेहा, चहुँ दिश आदि) लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मीरा के पद’ की रचनाकार कौन हैं?
‘मीरा के पद’ की रचनाकार कवयित्री मीरा (मीराबाई) हैं, जो हिंदी की महान कृष्ण-भक्त एवं संत मानी जाती हैं।
पहले पद का मुख्य भाव क्या है?
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करते हुए उनसे विनती करती हैं कि वे सदा उनकी आँखों में बसे रहें; इसका मुख्य भाव प्रेम एवं भक्ति है।
दूसरे पद में किस ऋतु का वर्णन है और मीरा का मन कैसा है?
दूसरे पद में सावन (वर्षा) ऋतु का वर्णन है। सावन एवं प्रभु-मिलन की आशा से मीरा का मन उमंग एवं आनंद से भर उठता है, अतः वे प्रसन्न हैं।
पद एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
