कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 8 – बिरजू महाराज से साक्षात्कार (साक्षात्कार) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 8 ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ का पूरा समाधान देता है – साक्षात्कार का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, शब्दों की बात, कला का संसार आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर। यह साक्षात्कार पद्मविभूषण कथक-सम्राट पंडित बिरजू महाराज से कुछ बच्चों (श्रेया, तनुश्री, माणिक) द्वारा लिया गया है।
- परिचय – पं. बिरजू महाराज
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- शीर्षक
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- शब्दों की बात
- शब्दों का प्रभाव
- कला का संसार (पाठ से आगे)
- साक्षात्कार की रचना
- सृजन
- आज की पहेली
- साझी समझ & खोजबीन के लिए
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परिचय – पं. बिरजू महाराज
पं. बिरजू महाराज (1938–2022) कथक नृत्य के लखनऊ घराने के सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं सम्मानित कलाकार थे। उन्हें कथक की कला विरासत में मिली – उनके पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू महाराज एवं लच्छू महाराज उनके गुरु थे। बचपन में पारिवारिक आर्थिक संघर्ष के बावजूद उन्होंने कठोर साधना से कथक में महारत प्राप्त की और भारत ही नहीं, विदेशों में भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से ख्याति अर्जित की। नृत्य के साथ-साथ वे गायन, वादन, नृत्य-नाटिकाओं की रचना एवं चित्रकारी में भी निपुण थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी बिरजू महाराज को भारत सरकार ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया। प्रस्तुत पाठ उनके जीवन, साधना एवं विचारों पर आधारित एक व्यक्तिपरक साक्षात्कार है।
पाठ का सार
‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ एक व्यक्तिपरक साक्षात्कार है जिसमें श्रेया, तनुश्री और माणिक नामक बच्चे प्रसिद्ध कथक-नर्तक पं. बिरजू महाराज से प्रश्न पूछते हैं और महाराज उत्तर देते हुए अपने जीवन, साधना एवं कला-दृष्टि से परिचय कराते हैं।
बिरजू महाराज बताते हैं कि एक समय उनका परिवार ‘छोटे नवाब’ कहलाता था, परंतु पिता के देहांत के बाद आर्थिक संकट गहरा गया। उस कठिन दौर में उनकी माँ (अम्मा) उनकी सबसे बड़ी सहयोगी रहीं, जो सदा कहती थीं – “खाने को भले चना मिले या कुछ भी न मिले, पर अभ्यास जरूर करो।” घर में कथक का माहौल होने से वे औपचारिक प्रशिक्षण से पहले ही देख-देखकर कथक सीख गए थे।
वे गुरु-शिष्य परंपरा के ‘गंडा’ (ताबीज़) बँधाने की रस्म का उल्लेख करते हैं और बताते हैं कि उन्होंने इस परंपरा को उलट दिया – वे शिष्य में सच्ची लगन देखकर ही गंडा बाँधते हैं। महाराज कथक की प्राचीन परंपरा, हरिया गाँव के कथिकों की कथा, लखनऊ-जयपुर-बनारस घरानों के विकास तथा संगीत में ‘लय’ के महत्व को समझाते हैं। वे कहते हैं कि लय जीवन के हर काम में संतुलन बनाए रखती है। उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए उसके प्रस्तुतीकरण में नवीनता लाई और टैगोर, त्यागराज जैसे कवियों की रचनाओं पर भी कथक तैयार किया, क्योंकि उनका मानना था कि भाषाएँ भले अलग हों, इंसान सब जगह एक-से हैं।
महाराज शास्त्रीय एवं लोक नृत्य का अंतर बताते हैं, भारत की विभिन्न नृत्य-शैलियों (कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथकली, मोहिनीअट्टम, ओडिसी, मणिपुरी) की चर्चा करते हैं और स्त्री-शिक्षा एवं हुनर के पक्षधर दिखते हैं। वे बच्चों से आग्रह करते हैं कि वे संगीत अवश्य सीखें, क्योंकि लय अनुशासन एवं संतुलन सिखाती है और मन की शांति देती है। इस प्रकार यह साक्षात्कार बिरजू महाराज के संघर्ष, समर्पण, बहुमुखी प्रतिभा एवं जीवन-दर्शन को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| साक्षात्कार | भेंटवार्ता, इंटरव्यू |
| विरासत | पूर्वजों से मिली संपत्ति/धरोहर |
| स्मरण | याद करना |
| साधना | कठोर अभ्यास, तपस्या |
| संघर्ष | कठिनाई से जूझना |
| देहांत | मृत्यु, निधन |
| गंडा | गुरु द्वारा शिष्य को बाँधा जाने वाला ताबीज़/धागा |
| तालीम | शिक्षा, प्रशिक्षण |
| औपचारिक | विधिवत, नियमबद्ध |
| घराना | कलाकारों का समुदाय जो विशिष्ट शैली साझा करे |
| लय | संगीत/गति का नियमित प्रवाह एवं संतुलन |
| लहरा | नृत्य के साथ बजने वाली एक संगीत-धुन |
| भाव-भंगिमा | हाव-भाव एवं अंग-संचालन |
| शास्त्रीय | शास्त्रों/नियमों पर आधारित (परंपरागत) |
| सामूहिक | समूह में मिलकर किया जाने वाला |
| आत्मनिर्भर | अपने पैरों पर खड़ा, स्वावलंबी |
| हुनर | कौशल, कला |
| दयनीय | दया योग्य, खराब स्थिति |
| लासानी / अनोखी | बेजोड़, अद्वितीय |
| अनुशासन | नियमों का पालन, व्यवस्था |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
• वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे।
• वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्वपूर्ण नहीं मानते थे।
• वे नृत्य के प्रति शिष्य के लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।
• वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
2. “जीवन में उतार-चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
• पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।
• कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।
• किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।
• नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
3. बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
• संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।
• कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
• कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
• वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुने गए कुछ शब्द/शब्द-समूहों का उनके सही संदर्भ या अवधारणाओं से मिलान कीजिए।
| शब्द | सही संदर्भ / अवधारणा |
|---|---|
| 1. कर्नाटक संगीत शैली | भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्यतः दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर-शैली की प्रधानता होती है; जलतरंग, वीणा, मृदंग, मैंडोलिन से संगत दी जाती है। |
| 2. घराना | हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत-नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं; जिसमें सिद्धांत एवं शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण द्वारा आगे बढ़ती है। |
| 3. शास्त्रीय संगीत | भारत की प्राचीन गायन-वादन, गीत-नृत्य-अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग; इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्व तथा नियमों की प्रधानता होती है। |
| 4. हिंदुस्तानी संगीत शैली | भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्यतः उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर से संगत दी जाती है; इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है। |
| 5. कनछेदन | हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक; यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है। |
| 6. लोक नृत्य | किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य; ये क्षेत्र की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं तथा प्रायः फसल-कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं। |
शीर्षक
इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? लिखिए।
पंक्तियों पर चर्चा
साक्षात्कार में से चुने गए कुछ वाक्यों को ध्यान से पढ़िए और उन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।”
(ख) “नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।”
(ग) “कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।”
सोच-विचार के लिए
1 (क) बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे?
1 (ख) नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है?
1 (ग) नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी?
1 (घ) बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है?
2. पाठ में से उन प्रसंगों की पहचान कर उन पर चर्चा कीजिए जिनसे पता चलता है कि —
शब्दों की बात
(क) पाठ में आए शब्दों में मूल शब्द के आगे जुड़ने वाले शब्दांश उपसर्ग तथा पीछे जुड़ने वाले शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं।
| उपसर्ग वाले शब्द | विभाजन |
|---|---|
| अदृश्य | अ + दृश्य |
| आवरण | आ + वरण |
| प्रशिक्षण | प्र + शिक्षण |
| प्रत्यय वाले शब्द | विभाजन |
|---|---|
| सीमित | सीमा + इत |
| सुंदरता | सुंदर + ता |
| भारतीय | भारत + ईय |
| सामूहिक | समूह + इक |
(ख) दिए गए शब्दांशों (उपसर्ग व प्रत्यय) तथा मूल शब्दों की सहायता से नए शब्द बनाइए।
(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।
शब्दों का प्रभाव
1. “कुछ कथिक डर गए, किंतु उन कथिकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाकर पढ़िए और पहचानिए कि क्या परिवर्तन आया है?
पाठ में आए ऐसे ही कुछ और शब्द ढूँढ़कर उन्हें रेखांकित कीजिए जिनके प्रयोग से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है।
कला का संसार (पाठ से आगे)
(क) “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” – बताइए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
(ख) लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए।
| आधार | लोक नृत्य | शास्त्रीय नृत्य |
|---|---|---|
| स्वरूप | सामूहिक – लोग मिलकर नाचते हैं। | एक नर्तक अकेला ही काफ़ी होता है। |
| उद्देश्य | थकान दूर करने एवं अपने मनोरंजन के लिए। | मुख्यतः दर्शकों के लिए, कला-प्रदर्शन हेतु। |
| नियम | अनौपचारिक, खुला रूप। | शास्त्रों/नियमों पर आधारित, निश्चित शैली। |
| उदाहरण | क्षेत्रीय फसल/उत्सव के नृत्य। | कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी आदि। |
(ग) “बैरगिया नाला जुलुम जोर, नौ कथिक नचावें तीन चोर…” पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले इस पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र के किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
साक्षात्कार की रचना
प्रस्तुत पाठ की विधा ‘साक्षात्कार’ है। यह एक व्यक्तिपरक साक्षात्कार है, जिसका उद्देश्य साक्षात्कारदाता के जीवन, कामकाज, उपलब्धियों एवं विचारों को पाठकों के सामने लाना है।
(क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक/सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
सृजन
आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन होने जा रहा है।
(क) आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए।
(ख) इस कार्यक्रम की सूचना देने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
★ कथक संध्या ★
राजकीय उच्च विद्यालय, आपका नगर
दिनांक: 25 जुलाई 2026 | समय: सायं 5 बजे | स्थान: विद्यालय सभागार
आइए, कथक के मनमोहक बोल, तत्कार एवं भाव-भंगिमाओं का आनंद लें।
प्रवेश निःशुल्क — सभी सादर आमंत्रित हैं।
(ग) यदि इस नृत्य कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है और वह नृत्य का आनंद लेना चाहे, तो विद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था की जानी चाहिए?
आज की पहेली
शब्द-पहेली में छिपे संगीत की तालों के नाम ढूँढ़कर लिखिए। (कहानी में आए नाम भी सहायक हैं।)
साझी समझ & खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. बिरजू महाराज को कथक की कला किस प्रकार प्राप्त हुई?
2. संघर्ष के दौर में बिरजू महाराज की सबसे बड़ी सहयोगी कौन थीं और उन्होंने क्या कहा?
3. ‘गंडा’ क्या है और बिरजू महाराज ने इस परंपरा में क्या बदलाव किया?
4. बिरजू महाराज के अनुसार ‘लय’ का जीवन में क्या महत्व है?
5. बिरजू महाराज ने स्त्री-शिक्षा एवं हुनर के बारे में क्या विचार व्यक्त किए?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. इस साक्षात्कार के आधार पर बिरजू महाराज की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दीजिए।
7. बिरजू महाराज ने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें कौन-कौन से नए प्रयोग किए? समझाइए।
8. इस साक्षात्कार से हमें कौन-कौन से जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. यह साक्षात्कार किस प्रसिद्ध कलाकार का है?
(क) पं. रविशंकर
(ख) पं. बिरजू महाराज
(ग) उस्ताद ज़ाकिर हुसैन
(घ) पं. भीमसेन जोशी
2. बिरजू महाराज किस शास्त्रीय नृत्य से संबंधित थे?
(क) भरतनाट्यम
(ख) ओडिसी
(ग) कथक
(घ) कथकली
3. संघर्ष के दौर में बिरजू महाराज की सबसे बड़ी सहयोगी कौन थीं?
(क) उनकी बहन
(ख) उनकी माँ (अम्मा)
(ग) उनकी बेटी
(घ) उनके चाचा
4. ‘गंडा’ किसके बीच का पवित्र रिश्ता माना जाता है?
(क) मित्र और मित्र
(ख) माता और पुत्र
(ग) गुरु और शिष्य
(घ) राजा और प्रजा
5. बिरजू महाराज के पिता का नाम क्या था?
(क) शंभू महाराज
(ख) लच्छू महाराज
(ग) अच्छन महाराज
(घ) चक्रधर महाराज
6. कथक के विकास से जुड़े घराने हैं —
(क) लखनऊ, जयपुर एवं बनारस
(ख) दिल्ली, आगरा एवं ग्वालियर
(ग) पटना, राँची एवं भोपाल
(घ) पुणे, नागपुर एवं इंदौर
7. बिरजू महाराज के अनुसार जीवन एवं नृत्य में संतुलन बनाए रखती है —
(क) धन-संपत्ति
(ख) लय
(ग) प्रसिद्धि
(घ) पोशाक
8. नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज की किस कार्य में विशेष रुचि थी?
(क) खेलकूद में
(ख) मशीनें ठीक करने एवं चित्रकारी में
(ग) व्यापार में
(घ) राजनीति में
9. शास्त्रीय नृत्य मुख्यतः किसके लिए किया जाता है?
(क) केवल अपने मनोरंजन के लिए
(ख) दर्शकों के लिए
(ग) केवल पूजा के लिए
(घ) व्यायाम के लिए
10. प्रस्तुत पाठ की विधा क्या है?
(क) कहानी
(ख) कविता
(ग) साक्षात्कार
(घ) निबंध
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बिरजू महाराज औपचारिक प्रशिक्षण से पहले ही कथक सीख गए थे।
कारण (R): उनके घर में कथक का माहौल था और वे देख-देखकर सीख गए थे।
2. अभिकथन (A): बिरजू महाराज शिष्य को तालीम के पहले ही दिन गंडा बाँध देते थे।
कारण (R): वे कई वर्ष सिखाने के बाद, शिष्य में सच्ची लगन देखकर ही गंडा बाँधते थे।
3. अभिकथन (A): नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ आवश्यक है।
कारण (R): गाना, बजाना एवं नाचना तीनों संगीत के अंग हैं और संगीत में लय होती है।
4. अभिकथन (A): बिरजू महाराज महिलाओं की शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता के पक्षधर थे।
कारण (R): उन्होंने अपनी बेटियों को कथक सिखाया और हुनर को न छिनने वाला खज़ाना बताया।
5. अभिकथन (A): लोक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य एक ही समान होते हैं।
कारण (R): लोक नृत्य सामूहिक एवं मनोरंजन के लिए होता है, जबकि शास्त्रीय नृत्य प्रायः दर्शकों के लिए एकल रूप में किया जाता है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- साक्षात्कार के मुख्य बिंदु क्रम से याद रखें – संघर्ष, गुरु-परंपरा (गंडा), लय का महत्व, कथक के नए प्रयोग, बहुमुखी प्रतिभा एवं स्त्री-शिक्षा।
- विधा-आधारित प्रश्न में ‘साक्षात्कार’ को ‘व्यक्तिपरक भेंटवार्ता’ के रूप में परिभाषित करें।
- नृत्य-शैलियों (कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथकली, मोहिनीअट्टम, ओडिसी, मणिपुरी) को उनके राज्य के साथ जोड़कर याद करें।
- उपसर्ग-प्रत्यय के प्रश्न में मूल शब्द एवं जुड़ने वाले शब्दांश दोनों स्पष्ट लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- बिरजू महाराज के पिता (अच्छन महाराज) एवं चाचाओं (शंभू एवं लच्छू महाराज) के नाम आपस में गड्डमड्ड न करें।
- ‘गंडा’ की रस्म को महाराज ने उलट दिया था – यह न लिखें कि वे शुरू में ही गंडा बाँधते थे।
- कथक को दक्षिण भारत का नृत्य न लिखें; यह उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य है।
- ‘साक्षात्कार’ को निबंध या कहानी न लिख दें – इसकी विधा साक्षात्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ पाठ किस विधा का है और किसका साक्षात्कार है?
यह पाठ ‘साक्षात्कार’ (व्यक्तिपरक भेंटवार्ता) विधा का है। इसमें श्रेया, तनुश्री एवं माणिक नामक बच्चे प्रसिद्ध कथक-नर्तक पं. बिरजू महाराज से उनके जीवन, साधना एवं कला के बारे में प्रश्न पूछते हैं।
बिरजू महाराज को कथक की कला कैसे मिली?
उन्हें कथक विरासत में मिला। उनके पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू महाराज एवं लच्छू महाराज उनके गुरु थे, और घर के कथक-माहौल में वे औपचारिक तालीम से पहले ही देख-देखकर सीख गए थे।
बिरजू महाराज के अनुसार ‘लय’ का क्या महत्व है?
उनके अनुसार लय केवल नृत्य में ही नहीं, जीवन की हर गतिविधि में होती है। यह हर काम एवं जीवन में संतुलन बनाए रखती है, अनुशासन सिखाती है और नृत्य को सुंदरता प्रदान करती है।
साक्षात्कार एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
