कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 7 – वर्षा-बहार (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के पाठ 7 ‘वर्षा-बहार’ (कवि – मुकुटधर पाण्डेय) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवि परिचय – मुकुटधर पाण्डेय
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- कविता का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- आपकी रचनाएँ
- शब्द से जुड़े शब्द
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
- विशेषण
- ॠतु और शब्द
- पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – मुकुटधर पाण्डेय
‘वर्षा-बहार’ का मनोरम दृश्य रचने वाले मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989) का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। प्रकृति-सौंदर्य की विभिन्न छवियाँ उनकी रचनाओं में देखने को मिलती हैं। किशोरावस्था में ही उन्होंने कविता और लेख आदि लिखना आरंभ कर दिया था। उस समय की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं — सरस्वती और माधुरी में उनकी रचनाएँ प्रमुखता से प्रकाशित होती थीं। हिंदी साहित्य में उन्हें छायावाद का पूर्व-प्रवर्तक भी माना जाता है। उनके मूल्यवान योगदान को देखते हुए भारत सरकार द्वारा इन्हें ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया गया था।
कविता (मूल पाठ)
‘वर्षा-बहार’ में कवि ने वर्षा ॠतु के मनोहारी दृश्यों का सजीव एवं उल्लासपूर्ण चित्रण किया है – आकाश, बादल, बिजली, झरने, हवा, पक्षी, मोर, मेंढक, फूल, हंस एवं किसान सभी इस ॠतु के आनंद में डूबे हुए हैं।
नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है।
बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं,
पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।
चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब,
बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब।
तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते,
फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते।
करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे,
मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे।
खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है,
बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है।
चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर,
गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।
इस भाँति है अनोखी, वर्षा बहार भू पर,
सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर।
— मुकुटधर पाण्डेय
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि वर्षा रूपी बहार सबके मन को लुभा रही है। आकाश में अनूठी छटा छा गई है और घने काले बादल घनघोर रूप से घिर आए हैं। बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं, मूसलाधार पानी बरस रहा है और पहाड़ों से झरने बहने लगे हैं। चारों ओर वर्षा का सुहावना दृश्य छाया हुआ है।
दूसरा पद: ठंडी हवा बह रही है, जिससे पेड़ों की सभी डालियाँ हिल रही हैं। बागों में मालिनें सुंदर गीत गा रही हैं। तालाबों में रहने वाले जलचर जीव-जंतु अत्यंत प्रसन्न हो रहे हैं। लाखों पपीहे इधर-उधर उड़ते हुए गर्मी (ग्रीष्म) के ताप से छुटकारा पा रहे हैं अर्थात् वर्षा से सबको राहत मिल रही है।
तीसरा पद: वन में मोर नाच रहे हैं और मेंढक अपनी मधुर ध्वनि (टर्र-टर्र) रूपी प्यारे गीत गाकर सबको लुभा रहे हैं। गुलाब के फूल खिलकर चारों ओर सुगंध (सौरभ) फैला रहे हैं। बागों में खूब सुख एवं आनंद (आमोद) छाया हुआ है। पूरा वातावरण उल्लास से भरा है।
चौथा पद: कहीं हंस सुंदर कतार बाँधे (पंक्तिबद्ध होकर) चल रहे हैं। किसान कितने मनहर (मन को हरने वाले) गीत गा रहे हैं! इस प्रकार पृथ्वी पर वर्षा की यह बहार बड़ी अनोखी है। कवि अंत में कहते हैं कि सारे संसार की शोभा एवं समृद्धि इसी वर्षा पर ही निर्भर है – वर्षा से ही धरती पर जीवन, हरियाली एवं सुंदरता बनी रहती है।
कविता का सार
‘वर्षा-बहार’ कविता में कवि मुकुटधर पाण्डेय ने वर्षा ॠतु के सौंदर्य एवं उल्लास का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। कवि कहते हैं कि वर्षा रूपी बहार सभी के मन को मोह लेती है। जब आकाश में काले-घने बादल घिर आते हैं, बिजली चमकती है, बादल गरजते हैं और मूसलाधार वर्षा होती है, तब पहाड़ों से झरने बहने लगते हैं और चारों ओर एक अनूठी छटा छा जाती है।
वर्षा के आगमन से समूची प्रकृति आनंदित हो उठती है। ठंडी हवा चलने से पेड़ों की डालियाँ झूमने लगती हैं, बागों में मालिनें मधुर गीत गाती हैं, तालाबों के जलचर जीव प्रसन्न होते हैं और लाखों पपीहे ग्रीष्म ॠतु के ताप से राहत पाते हैं। वन में मोर नाचते हैं, मेंढक अपनी ध्वनि रूपी प्यारे गीत गाते हैं, गुलाब खिलकर सुगंध बिखेरते हैं और बागों में चारों ओर आमोद (आनंद) छा जाता है।
आकाश में हंस सुंदर कतार बाँधकर उड़ते हैं और खेतों में किसान मनभावन गीत गाते हुए हर्षित होते हैं। कवि कहते हैं कि पृथ्वी पर वर्षा की यह बहार वास्तव में अनोखी है, क्योंकि सारे संसार की शोभा, हरियाली एवं समृद्धि इसी वर्षा पर निर्भर करती है। वर्षा ही धरती को जीवन, जल एवं नई ताजगी प्रदान करती है। इस प्रकार यह कविता वर्षा ॠतु को एक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करती है और हमें प्रकृति के सौंदर्य के प्रति सजग एवं कृतज्ञ बनाती है। सरल भाषा, सुंदर बिंब एवं मधुर लय इस कविता को विशेष रूप से आकर्षक बनाते हैं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बहार | वसंत; यहाँ रौनक, सौंदर्य का समय |
| नभ | आकाश, गगन |
| छटा | शोभा, सुंदरता |
| अनूठी | निराली, अनोखी |
| घनघोर | घना एवं गहरा (बादलों का घिरना) |
| जलचर | जल में रहने वाले जीव |
| अति | बहुत, अत्यधिक |
| पपीहा | एक वर्षा-प्रिय पक्षी (चातक) |
| ग्रीष्म | गरमी की ॠतु |
| ताप | गरमी, तपन |
| मालिन | माली की पत्नी; फूल बेचने/चुनने वाली स्त्री |
| सुगीत | मधुर गीत, सुंदर गान |
| सौरभ | सुगंध, खुशबू |
| आमोद | आनंद, हर्ष, प्रसन्नता |
| कतार | पंक्ति, क्रमबद्ध रूप |
| मनहर | मन को हरने वाला, मनोहर |
| भाँति | तरह, प्रकार |
| अनोखी | विलक्षण, अद्भुत |
| भू | पृथ्वी, धरती |
| जगत | संसार, दुनिया |
| शोभा | सुंदरता, छवि |
| निर्भर | आश्रित, अवलंबित |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. इस कविता में वर्षा ॠतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?
• दुख और निराशा
• आनंद और प्रसन्नता
• भय और चिंता
• क्रोध और विरोध
2. “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ॠतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
• बादलों के घिरने का दृश्य
• बिजली के गिरने का दृश्य
• ठंडी हवा के बहने का दृश्य
• आमोद छा जाने का दृश्य
3. कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्योंकि—
• कवि वर्षा को विशेष ॠतु मानता है।
• वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
• वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
• वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है।
4. “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
• प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
• वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
• बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।
• हमें वर्षा ॠतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते। करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”
(ख) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर। गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए—
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|
| 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं | वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। |
| 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं। |
| 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते | वर्षा ॠतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं। |
| 4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते | वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। |
| 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं। |
| 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। |
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों?
(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” तथा “तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” – दी गई दोनों पंक्तियों में वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
(घ) “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिलते हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है?
(ङ) कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे— ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” – कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” – बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत— आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।)
(ग) “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” – इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे?
आपकी रचनाएँ
(क) कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
(ख) वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?
शब्द से जुड़े शब्द
अपने समूह में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए। (पाठ में ‘उत्साह’ एवं ‘वर्षा’ शब्द-मंडल दिए गए हैं।)
कविता की रचना
“वर्षा-बहार सबके, मन को लुभा रही है” – इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘वर्षा’ एक ॠतु का नाम है। ‘बहार’ ‘वसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वर्षा’ और ‘बहार’ को एक साथ दिया गया है जिससे वर्षा ॠतु की सुंदरता को स्पष्ट किया जा सके। इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं। अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
कविता का सौंदर्य
(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए।
| पंक्ति (रिक्त स्थान सहित) | विकल्प | सबसे उपयुक्त (मूल पाठ का) शब्द |
|---|---|---|
| _____ बहार सबके, मन को लुभा रही है | बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि | वर्षा (मूल पंक्ति में ‘वर्षा-बहार’) |
| _____ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है | आकाश, गगन, अंबर, व्योम | नभ (मूल पंक्ति में ‘नभ में छटा अनूठी’) |
| बिजली चमक रही है, _____ गरज रहे हैं | मेघ, जलधर, घन, जलद | बादल (मूल पंक्ति में ‘बादल गरज रहे हैं’) |
| _____ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं | जल, नीर, सलिल, तोय | पानी (मूल पंक्ति में ‘पानी बरस रहा है’) |
(दिए गए सभी विकल्प ‘वर्षा’, ‘आकाश’, ‘बादल’ एवं ‘पानी’ के पर्यायवाची हैं, अतः अर्थ की दृष्टि से सभी जँचते हैं; किंतु लय एवं मूल पाठ के अनुसार वर्षा, नभ, बादल तथा पानी सर्वाधिक उपयुक्त हैं।)
(ख) अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों?
विशेषण
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” – इस पंक्ति में ‘सुंदर’ शब्द ‘गीत’ की विशेषता बता रहा है, अतः यह ‘विशेषण’ है और ‘गीत’ ‘विशेष्य’ है।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए—
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है | अनूठी | छटा |
| 2. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | सुंदर | कतार |
| 3. मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे | प्यारे | सुगीत |
| 4. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | ठंडी | हवा |
(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए—
| विशेष्य | उपयुक्त विशेषण (उदाहरण) |
|---|---|
| 1. वर्षा | मूसलाधार, झमाझम, सुहानी |
| 2. पानी | ठंडा, स्वच्छ, मीठा |
| 3. बादल | काले, घने, गरजते |
| 4. डालियाँ | हरी, झुकी, कोमल |
| 5. गुलाब | लाल, सुगंधित, खिला |
ॠतु और शब्द
“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते” – ‘ताप’ शब्द ग्रीष्म ॠतु से जुड़ा है। भारत में मुख्य रूप से छह ॠतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर कौन-सी ॠतु का स्मरण होता है? इन शब्दों को तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए—
दिए गए शब्द: धूप, लू, बयार, हिमपात, वृष्टि, पाला, ताप, जाड़ा, झड़ी, ठिठुरन, धुंध, कोहरा, आँधी, उमस, हरियाली, बहार, तपन, जेठ, सावन, रिमझिम, शीतलता, ओस, ठंडक, बादल फटना, कड़ाके की ठंड।
| ॠतु (समय) | संबंधित शब्द |
|---|---|
| वसंत ॠतु (मार्च–अप्रैल) | बयार, बहार, हरियाली |
| ग्रीष्म ॠतु (मई–जून) | धूप, लू, ताप, तपन, उमस, जेठ |
| वर्षा ॠतु (जुलाई–अगस्त) | वृष्टि, झड़ी, सावन, रिमझिम, बादल फटना |
| शरद ॠतु (सितंबर–अक्तूबर) | शीतलता, ओस, ठंडक |
| हेमंत ॠतु (नवंबर–दिसंबर) | धुंध, कोहरा, जाड़ा |
| शिशिर ॠतु (जनवरी–फरवरी) | हिमपात, पाला, ठिठुरन, कड़ाके की ठंड |
(‘आँधी’ प्रायः ग्रीष्म एवं वर्षा के पूर्व चलती है; अपने अनुभव के अनुसार शब्दों को उपयुक्त ॠतु में रखें।)
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात
(क) वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
(ख) बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए।
(ग) वर्षा ॠतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं?
(घ) बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?
(ङ) अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ॠतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए।
साक्षात्कार
“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” – मान लीजिए कि आप अपने विद्यालय की पत्रिका के पत्रकार हैं। आप एक किसान का साक्षात्कार कर रहे हैं जो वर्षा के आने पर अपने खेतों में गीत गा रहा है। (क) कुछ प्रश्न लिखिए। (ख) इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
वर्षा के दृश्य
(क) वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे – आकाश में इंद्रधनुष।
(ख) वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है, या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए।
(ग) आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?
(घ) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” – कविता में हंसों के कतार में अर्थात् पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत – चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि)
वर्षा में ध्वनियाँ
(क) कविता में वर्षा के अनेक दृश्य दिए गए हैं। इन दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई दे रही होंगी?
(ख) “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” – कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?
सृजन
“बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है” – ‘आमोद’ या ‘मोद’ का अर्थ है आनंद, हर्ष, खुशी। नीचे दिए गए ‘आमोद’ से जुड़े विभिन्न दृश्यों का एक-एक अनुच्छेद में वर्णन कीजिए।
वर्षा से जुड़े गीत
हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत एवं लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़िए और लिखिए तथा एक पुस्तिका तैयार कीजिए।
आज की पहेली
भारत की विभिन्न ॠतुओं से जुड़ी पहेलियाँ पढ़कर इन्हें बूझिए।
झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘वर्षा-बहार’ कविता के रचयिता कौन हैं और उनका संबंध किस प्रदेश से है?
2. वर्षा के आगमन से पपीहे को क्या लाभ होता है?
3. कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ क्यों कहा गया है?
4. “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
5. वर्षा ॠतु में वन एवं बाग का दृश्य कैसा हो जाता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘वर्षा-बहार’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कविता के आधार पर वर्षा ॠतु में प्रकृति एवं प्राणी-जगत की प्रसन्नता का वर्णन कीजिए।
8. इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ कहाँ तक सार्थक है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘वर्षा-बहार’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) मुकुटधर पाण्डेय
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
2. कवि मुकुटधर पाण्डेय का जन्म किस प्रदेश में हुआ था?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) छत्तीसगढ़
(घ) बिहार
3. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) ग्रीष्म ॠतु का कष्ट
(ख) वर्षा ॠतु का आनंद एवं सौंदर्य
(ग) देश-प्रेम
(घ) मित्रता
4. वर्षा आने पर वन में कौन नृत्य करते हैं?
(क) हंस
(ख) मोर
(ग) पपीहे
(घ) कोयल
5. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—
(क) ध्वनि
(ख) सुगंध
(ग) सुंदरता
(घ) ठंडक
6. कविता के अनुसार ग्रीष्म के ताप से किसे राहत मिलती है?
(क) मोर को
(ख) पपीहे को
(ग) मालिनों को
(घ) किसान को
7. आकाश में हंस किस प्रकार उड़ते हैं?
(क) बिखरे हुए
(ख) अकेले-अकेले
(ग) सुंदर कतार बाँधे (पंक्तिबद्ध)
(घ) बहुत ऊँचाई पर छिपकर
8. ‘आमोद’ शब्द का अर्थ है—
(क) क्रोध
(ख) भय
(ग) आनंद, हर्ष
(घ) निराशा
9. कविता के अनुसार सारे जगत की शोभा किस पर निर्भर है?
(क) सूर्य पर
(ख) वर्षा पर
(ग) हवा पर
(घ) बिजली पर
10. ‘नभ’ शब्द का अर्थ है—
(क) पृथ्वी
(ख) आकाश
(ग) जल
(घ) वन
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): वर्षा के आगमन से पपीहे ग्रीष्म के ताप से राहत पाते हैं।
कारण (R): वर्षा से वातावरण ठंडा एवं सुहावना हो जाता है।
2. अभिकथन (A): कविता में वर्षा ॠतु को दुख एवं निराशा का काल बताया गया है।
कारण (R): वर्षा के आगमन से मोर नाचते हैं और किसान मनभावन गीत गाते हैं।
3. अभिकथन (A): संसार की समस्त शोभा एवं हरियाली वर्षा पर निर्भर है।
कारण (R): वर्षा से धरती को जल, अन्न एवं नवजीवन प्राप्त होता है।
4. अभिकथन (A): वर्षा के समय बिजली की चमक उसकी ध्वनि से पहले दिखाई देती है।
कारण (R): प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक होती है।
5. अभिकथन (A): कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ सार्थक है।
कारण (R): वर्षा के आगमन से चारों ओर गीत, नृत्य, सुगंध एवं आनंद की बहार छा जाती है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव (Exam Tips)
- कविता की कुछ पंक्तियाँ (जैसे टेक एवं अंतिम पद) कंठस्थ कर लें – भावार्थ एवं उद्धरण-आधारित प्रश्नों में सहायक होंगी।
- कवि का नाम, जन्म-स्थान (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) एवं ‘पद्मश्री’ सम्मान जैसे तथ्य याद रखें।
- विशेषण-विशेष्य एवं पर्यायवाची (नभ, बादल, पानी, वर्षा) से जुड़े व्याकरण-प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं – इन्हें अवश्य दोहराएँ।
- उत्तर लिखते समय कविता की पंक्ति उद्धृत करें – इससे उत्तर अधिक प्रभावशाली एवं अंक-योग्य बनता है।
सामान्य भूलें (Common Mistakes)
- ‘बहार’ का अर्थ केवल ‘वसंत’ न लिखें; यहाँ यह वर्षा की रौनक एवं उल्लास के अर्थ में है।
- कवि का नाम सुमित्रानंदन पंत या सोहनलाल द्विवेदी न लिख दें – सही नाम मुकुटधर पाण्डेय है।
- ‘सौरभ’ (सुगंध) तथा ‘आमोद’ (आनंद) के अर्थ में भ्रम न करें।
- शब्दों की वर्तनी सावधानी से लिखें – जैसे ‘ॠतु’, ‘निर्भर’, ‘जलचर’, ‘मनहर’।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘वर्षा-बहार’ कविता के कवि कौन हैं?
‘वर्षा-बहार’ कविता के कवि मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989) हैं, जिनका जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था और जिन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।
‘वर्षा-बहार’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव वर्षा ॠतु के सौंदर्य एवं आनंद का चित्रण है। वर्षा से प्रकृति, पशु-पक्षी एवं मनुष्य सभी प्रसन्न हो उठते हैं और संसार की समस्त शोभा वर्षा पर ही निर्भर है।
कविता में वर्षा को ‘बहार’ क्यों कहा गया है?
‘बहार’ का अर्थ रौनक एवं उल्लास का समय है। चूँकि वर्षा के आगमन से चारों ओर गीत, नृत्य, सुगंध एवं आनंद छा जाता है, इसलिए कवि ने वर्षा को ‘बहार’ कहा है।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
