Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 1 Solutions — वन्दे भारतमातरम्
Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 1 solutions: वन्दे भारतमातरम् का संवाद, सरल हिन्दी अर्थ, शब्दार्थ और पुस्तक के आठ अभ्यासों के क्रमबद्ध उत्तर पढ़ें। परियोजनाओं के नमूने और राष्ट्रध्वज का सही रंगों वाला चार्ट भी दिया गया है।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ
- अन्वय / भावार्थ
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
- व्याकरण-तालिकाः
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 7 का प्रथम पाठ ‘वन्दे भारतमातरम्’ माता एवं बच्चों के एक रोचक संवाद से आरम्भ होता है। बच्चे आकाशवाणी एवं विद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ गीत बहुत बार सुनते हैं, किन्तु उसका अर्थ नहीं जानते। माता उन्हें बताती हैं कि इस गीत को महान् देशभक्त बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्यायः ने सन् १८८२ में रचित ‘आनन्दमठः’ उपन्यास में लिखा था; यह गीत संस्कृत एवं बाङ्ग्ला दोनों भाषाओं में है तथा इसमें भारतमाता के सुन्दर स्वरूप का वर्णन है। इसके पश्चात् पाठ में भारतमाता के माहात्म्य (हिमालय-मुकुट, समुद्र-चरण-प्रक्षालन, पवित्र नदियाँ, श्रेष्ठ पर्वत एवं तीर्थक्षेत्र) तथा त्रिवर्ण राष्ट्रध्वज के केसरिया, श्वेत, हरित वर्णों एवं नील धर्मचक्र के संदेश का वर्णन है। पाठ का केन्द्रीय भाव देशभक्ति, मातृभूमि-वन्दना एवं राष्ट्रीय एकता है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ संवाद-शैली (नाट्य-गद्य) में रचित है। इसमें माता एवं उनके पुत्र-पुत्री के बीच ‘वन्दे मातरम्’ गीत के अर्थ, इतिहास एवं वैशिष्ट्य तथा भारत के राष्ट्रध्वज को लेकर वार्तालाप होता है। ‘वन्दे मातरम्’ गीत बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्यायः द्वारा रचित है, जो उनके सन् १८८२ में प्रकाशित उपन्यास ‘आनन्दमठः’ में संकलित है। ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ है – ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ (मैं माता को प्रणाम करता/करती हूँ)। स्वतन्त्रता-आन्दोलन में अनेक देशभक्त इसे मन्त्र की भाँति गाते थे। पाठ का उद्देश्य छात्रों में मातृभूमि के प्रति प्रेम, देशभक्ति एवं राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रगीत एवं त्रिरंगा ध्वज) के प्रति सम्मान जगाना है।
मूल पाठ
(पाठ का मुख्य गद्यांश – भारतमाता का माहात्म्य एवं राष्ट्रध्वज का वर्णन, ज्यों-के-त्यों।)
(संवादः) — अम्ब ! वयं विभिन्नेषु कार्यक्रमेषु, आकाशवाण्यां, शालायां च ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं बहुत्र शृणुमः । किन्तु अस्य अर्थं न जानीमः । मातः ! अस्य कः अर्थः ? ‘इदं गीतं कः लिखितवान्’ इत्यपि मम जिज्ञासा अस्ति ।
वत्सौ ! महान् देशभक्तः बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः १८८२ तमे वर्षे ‘आनन्दमठः’ इति नामकम् उपन्यासं लिखितवान् । ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं तस्मिन् एव उपन्यासे वर्तते । ‘वन्दे मातरम्’ इत्यस्य अर्थः अस्ति यत् ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ इति ।
मातः ! इदं गीतं कस्यां भाषायाम् अस्ति ? — पुत्रि ! एतत् गीतं संस्कृतं बाङ्ग्ला च इति भाषाद्वये वर्तते । — मातः ! अस्मिन् गीते वर्ण्यः विषयः कः अस्ति ? — पुत्र ! अस्मिन् गीते भारतमातुः स्वरूपस्य रम्यं वर्णनम् अस्ति ।
(भारतमातुः माहात्म्यम्) — एषा अस्माकं वत्सला भारतमाता । अहो अस्माकं भारतमातुः माहात्म्यम् ! साक्षात् पर्वतराजः हिमालयः मुकुटरूपेण अस्याः मस्तके शोभते । अस्याः चरणौ प्रक्षालयति स्वयं रत्नाकरः समुद्रः । भारतभूमौ महेन्द्रः, मलयः, सह्यः, रैवतकः, विन्ध्यः, अरावलिः इत्यादयः श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते । अत्रैव गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धुः, ब्रह्मपुत्रः, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी इत्यादयः पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति । नद्यः अपि अस्माकं मातरः इव ।
अयोध्या, मथुरा, हरिद्वारम्, काशी, काञ्ची, अवन्तिका, वैशाली, द्वारिका, पुरी, गया, प्रयागः, पाटलीपुत्रं, विजयनगरम्, इन्द्रप्रस्थं, सोमनाथः, अमृतसरः इत्यादीनि मङ्गलानि तीर्थक्षेत्राणि नगराणि च भारतभूमौ एव सुशोभन्ते । एतेषां तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयितुं विविधेभ्यः प्रदेशेभ्यः असंख्याः जनाः आगच्छन्ति ।
(राष्ट्रध्वजस्य वर्णनम्) — भारतमातुः हस्ते विलसति त्रिवर्णयुतः राष्ट्रध्वजः । अहो अस्य शोभा ! अस्मिन् राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः विराजन्ते । ध्वजस्य मध्ये सुन्दरं नीलवर्णं चक्रमपि शोभते । ध्वजे विराजमानाः वर्णाः चक्रं च विशिष्टं सन्देशं प्रयच्छन्ति ।
(केशरवर्णः) — त्रिवर्णध्वजस्य ऊर्ध्वभागे विराजते केशरवर्णः । एषः वर्णः त्यागपरम्परायाः शौर्यपरम्परायाः च सूचकः अस्ति । ये भारतमातुः आजीवनं सेवां कृतवन्तः, देशस्य स्वतन्त्रतां प्राप्तुं सहर्षं स्वप्राणान् अर्पितवन्तः च, तेषां वीराणां बलिदानं सूचयति एषः वर्णः । ‘जयतु सैनिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः अयं केशरवर्णः ।
(हरितवर्णः) — कृषकबान्धवाः अस्माकं भारतभूमिं सर्वदा स्व-स्वेदबिन्दुभिः सिञ्चन्ति । एतेषां परिश्रमेण एव भारतभूमिः हरितवर्णमयी समृद्धा सस्यश्यामला च सञ्जाता । भारतमातुः समृद्धेः एषा आभा हरितवर्णरूपेण अस्माकं राष्ट्रध्वजे विराजते । ‘जयतु कृषकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः एषः हरितवर्णः ।
(श्वेतवर्णः) — मध्ये स्थितः श्वेतवर्णः शान्तेः सत्यस्य च द्योतकः अस्ति । अणुशास्त्रे, सङ्गणकशास्त्रे, चिकित्साशास्त्रे, अन्तरिक्षशास्त्रे, आयुधशास्त्रे इत्यादिषु विज्ञानस्य विभिन्नेषु क्षेत्रेषु भारतीयैः वैज्ञानिकैः महत् यशः प्राप्तम् अस्ति । वैज्ञानिकानां तत् धवलं यशः धवलवर्णरूपेण राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति । भारतीयं विज्ञानं शान्तिं प्रगतिं सुरक्षां च परिपोषयति । ‘जयतु वैज्ञानिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजमध्यस्थः अयं धवलवर्णः ।
(धर्मचक्रम्) — ध्वजे विराजमानस्य घननीलवर्णस्य चक्रस्य नाम धर्मचक्रम् इति । अस्मिन् चक्रे चतुर्विंशतिः अराः सन्ति । एतत् चक्रं ‘चलनीयं कर्तव्यपथे वै, न विरम, सततं चल’ इति भावं बोधयति । सूर्यः विरामं विना नित्यं सञ्चरति । नदी कष्टानि सहमाना अपि ध्येयं प्रति नित्यं प्रवहति । इदं चक्रं ‘जीवने श्रान्तेः, आलस्यस्य प्रमादस्य च स्थानं न भवतु’ इति सन्देशं प्रयच्छति ।
वयं सर्वेऽपि धन्याः यत् अस्यां पवित्रभूम्यां जन्म प्राप्तवन्तः । वयं पवित्रायाः भारतमातुः नित्यं वन्दनं कुर्मः अस्याः गौरववर्धनार्थं च प्रयत्नं कुर्मः । आगच्छन्तु मिलित्वा सर्वे गायाम: –
वयं बालिका भारतभक्ताः ।
वयं हि सर्वे भारतभक्ताः
पृथ्वीं स्वर्गं जेतुं शक्ताः ॥
— दीपकम्, प्रथमः पाठः “वन्दे भारतमातरम्”
अन्वय / भावार्थ
पाठ संवाद-गद्य में है, अतः मुख्य अंशों का भावार्थ (हिन्दी आशय) इस प्रकार है –
- संवाद-आरम्भ: बच्चे माता से पूछते हैं – “हे माँ! हम आकाशवाणी एवं विद्यालय के कार्यक्रमों में अनेक स्थानों पर ‘वन्दे मातरम्’ गीत सुनते हैं, पर उसका अर्थ नहीं जानते। इसका क्या अर्थ है और इसे किसने लिखा?”
- माता का उत्तर: “बच्चो! महान् देशभक्त बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन् १८८२ में ‘आनन्दमठः’ नामक उपन्यास लिखा। ‘वन्दे मातरम्’ गीत उसी उपन्यास में है। इसका अर्थ है – ‘मैं माता का वन्दन करता/करती हूँ।’ यह गीत संस्कृत एवं बाङ्ग्ला दोनों भाषाओं में है तथा इसमें भारतमाता के सुन्दर स्वरूप का वर्णन है।”
- भारतमातुः माहात्म्यम्: यह हमारी स्नेहमयी भारतमाता है। पर्वतराज हिमालय मुकुट बनकर इसके मस्तक पर शोभित है; रत्नों का आकर समुद्र स्वयं इसके चरण धोता है। यहाँ महेन्द्र, मलय, सह्य, रैवतक, विन्ध्य, अरावलि जैसे श्रेष्ठ पर्वत तथा गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि पवित्र नदियाँ हैं – ये नदियाँ भी हमारी माताओं के समान हैं। अयोध्या, मथुरा, काशी, काञ्ची आदि अनेक मङ्गलमय तीर्थक्षेत्र इसी भूमि पर सुशोभित हैं, जहाँ की धूलि माथे पर लगाने अनेक प्रदेशों से असंख्य लोग आते हैं।
- राष्ट्रध्वजः (त्रिरंगा): भारतमाता के हाथ में त्रिवर्णयुक्त राष्ट्रध्वज शोभित है, जिसमें केसरिया, श्वेत एवं हरित वर्ण तथा मध्य में नीला चक्र है। ये वर्ण एवं चक्र एक विशेष संदेश देते हैं।
- केशरवर्णः: सबसे ऊपर का केसरिया रंग त्याग एवं शौर्य की परम्परा का सूचक है; यह उन वीरों का बलिदान दर्शाता है जिन्होंने देश के लिए प्राण अर्पित किए। यह ‘जयतु सैनिकः’ (सैनिक की जय हो) कहने को प्रेरित करता है।
- हरितवर्णः: किसान भाई अपने पसीने से भारतभूमि सींचते हैं, जिससे वह हरी-भरी एवं समृद्ध बनती है। यही समृद्धि हरे रंग के रूप में ध्वज में है; यह ‘जयतु कृषकः’ (किसान की जय हो) कहने को प्रेरित करता है।
- श्वेतवर्णः: बीच का श्वेत रंग शान्ति एवं सत्य का प्रतीक है; परमाणु, संगणक, चिकित्सा, अन्तरिक्ष आदि विज्ञान-क्षेत्रों में भारतीय वैज्ञानिकों का धवल यश इसमें झलकता है। यह ‘जयतु वैज्ञानिकः’ (वैज्ञानिक की जय हो) कहने को प्रेरित करता है।
- धर्मचक्रम्: बीच का नीला धर्मचक्र, जिसमें चौबीस तीलियाँ हैं, यह संदेश देता है – ‘कर्तव्य-पथ पर सतत चलते रहो, रुको मत।’ जैसे सूर्य बिना रुके चलता है एवं नदी कष्ट सहती हुई भी बहती रहती है, वैसे ही जीवन में थकान, आलस्य एवं प्रमाद का स्थान नहीं होना चाहिए।
- उपसंहार: हम धन्य हैं कि इस पवित्र भूमि पर जन्मे; हम भारतमाता का नित्य वन्दन एवं उसके गौरव-वर्धन का प्रयत्न करते हैं। अन्त में सब मिलकर गाते हैं – “हम बालक-बालिकाएँ भारतभक्त हैं, हम सब पृथ्वी एवं स्वर्ग को जीतने में समर्थ हैं।”
सार (Hindi Summary)
‘वन्दे भारतमातरम्’ पाठ माता एवं उनके बच्चों के संवाद से आरम्भ होता है। बच्चे ‘वन्दे मातरम्’ गीत बहुत बार सुनते हैं, पर उसका अर्थ नहीं जानते। माता बताती हैं कि यह गीत महान् देशभक्त बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन् १८८२ में रचित उपन्यास ‘आनन्दमठः’ में लिखा था; इसका अर्थ है – ‘मैं माता को प्रणाम करता हूँ।’ यह गीत संस्कृत एवं बाङ्ग्ला दोनों भाषाओं में है तथा इसमें भारतमाता के रमणीय स्वरूप का वर्णन है। स्वतन्त्रता-आन्दोलन में देशभक्त इसे मन्त्र की तरह गाते थे एवं आज भी यह हमें प्रेरित करता है।
आगे पाठ में भारतमाता के माहात्म्य का वर्णन है – हिमालय इसका मुकुट है, समुद्र इसके चरण धोता है, अनेक श्रेष्ठ पर्वत (महेन्द्र, मलय, सह्य, विन्ध्य, अरावलि आदि), पवित्र नदियाँ (गङ्गा, यमुना, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि) तथा अयोध्या, काशी, मथुरा आदि तीर्थक्षेत्र इसी भूमि पर सुशोभित हैं। फिर माता बच्चों को त्रिवर्ण राष्ट्रध्वज का अर्थ समझाती हैं।
ध्वज का केसरिया रंग त्याग एवं शौर्य का सूचक है (जयतु सैनिकः); हरित रंग किसानों के परिश्रम एवं भूमि की समृद्धि का प्रतीक है (जयतु कृषकः); श्वेत रंग शान्ति, सत्य एवं वैज्ञानिकों के धवल यश का द्योतक है (जयतु वैज्ञानिकः); तथा बीच का नीला धर्मचक्र, जिसमें चौबीस अरे (तीलियाँ) हैं, कर्तव्य-पथ पर निरन्तर चलते रहने का संदेश देता है। अन्त में सब मिलकर भारतभक्ति का गीत गाते हुए संकल्प लेते हैं कि वे सदैव भारतमाता का वन्दन एवं गौरव-वर्धन करेंगे। इस प्रकार यह पाठ छात्रों में देशभक्ति, मातृभूमि-वन्दना एवं राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना जगाता है।
इस पाठ में भारतमाता का वर्णन काव्यात्मक मानवीकरण है। रंगों से सैनिक, किसान और वैज्ञानिक को जोड़ना पाठ की शिक्षण-व्याख्या है। वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत है; जन गण मन राष्ट्रगान है। भारत सरकार का राष्ट्रीय प्रतीक संदर्भ।

शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वन्दे | प्रणाम करता/करती हूँ | I greet / I bow |
| आलिङ्ग्य | आलिंगन करके | Having embraced |
| बहुत्र | अनेक स्थानों पर | In many places |
| शृणुमः | हम सुनते हैं | We listen / hear |
| जिज्ञासा | जानने की इच्छा | Curiosity |
| उपन्यासम् | उपन्यास को | Novel |
| रम्यम् | रमणीय, सुन्दर | Pleasant / beautiful |
| आन्दोलने | आन्दोलन में | In the movement |
| वत्सला | स्नेहमयी | Loving / affectionate |
| माहात्म्यम् | महिमा, महत्त्व | Greatness |
| मुकुटरूपेण | मुकुट के रूप में | As a crown |
| पर्वतराजः | पर्वतों का राजा | The King of mountains |
| रत्नाकरः | सागर, समुद्र | Sea / Ocean |
| तीर्थक्षेत्राणि | तीर्थस्थल | Holy places |
| धूलिम् | धूल को | Dust |
| ललाटे | माथे पर | On the forehead |
| विराजमानः | सुशोभित होता हुआ | Shining / present gloriously |
| सूचकः | सूचित करने वाला | Indicator |
| केशरवर्णः | केसरिया रंग | Saffron colour |
| प्राप्तुम् | पाने के लिए | To get / obtain |
| वक्तुम् | बोलने के लिए | To speak |
| कृषकबान्धवाः | किसान भाई | Our dear farmers |
| स्वेदबिन्दुभिः | पसीने की बूँदों से | By sweat-drops |
| सिञ्चन्ति | सींचते हैं | (They) sprinkle / irrigate |
| सस्यश्यामला | उपजों से हरी-भरी | Densely covered with crops |
| आभा | चमक, कान्ति | Lustre |
| धवलम् | श्वेत, सफेद | White |
| घननीलवर्णस्य | गहरे नीले रंग का | Of navy-blue colour |
| अराः | (चक्र की) तीलियाँ | Spokes of a wheel |
| कर्तव्यपथे | कर्तव्य-मार्ग पर | On the path of duty |
| श्रान्तेः | थकान का | Of tiredness |
| प्रमादस्य | असावधानता का | Of carelessness |
| जेतुम् | जीतने के लिए | To win / conquer |
| अन्य पाठ-शब्द | हिन्दी अर्थ | English |
|---|---|---|
| अणुशास्त्रे | परमाणु-विज्ञान में | in atomic science |
| आयुधशास्त्रे | शस्त्र-विज्ञान में | in the science of weapons |
| सहमाना | सहती हुई | bearing / enduring |
वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन पदद्वयेन वा उत्तरं लिखन्तु —
(क) पर्वतराजः कः ?
(ख) समुद्रः कस्याः चरणौ प्रक्षालयति ?
(ग) त्रिवर्णयुतः ध्वजः कुत्र विलसति ?
(घ) ध्वजस्थितः केशरवर्णः अस्मान् किं वक्तुं प्रेरयति ?
(ङ) कृषकबान्धवाः भारतभूमिं कैः सिञ्चन्ति ?
(च) केषां धवलं यशः राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति ?
(छ) सूर्यः कं विना नित्यं सञ्चरति ?
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु —
(क) पवित्राः नद्यः काः ?
(ख) विविधेभ्यः प्रदेशेभ्यः जनाः किमर्थम् आगच्छन्ति ?
(ग) धर्मचक्रं कं भावं बोधयति ?
(घ) कृषकबान्धवानां परिश्रमेण भारतभूमिः कथं सञ्जाता ?
(ङ) विज्ञानस्य केषु क्षेत्रेषु भारतीयैः यशः प्राप्तम् ?
(च) अन्ते सर्वे किं गीतं गायन्ति ?
३. रेखाङ्कितानि पदानि आश्रित्य उदाहरणानुसारं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु —
यथा – अस्माकं वत्सला भारतमाता । → केषां वत्सला भारतमाता ?
| वाक्यम् (रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में) | प्रश्ननिर्माणम् – उत्तर |
|---|---|
| (क) समुद्रः भारतमातुः चरणौ प्रक्षालयति । | कः भारतमातुः चरणौ प्रक्षालयति ? |
| (ख) जनाः तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयन्ति । | जनाः तीर्थक्षेत्राणां धूलिं कुत्र स्थापयन्ति ? |
| (ग) वीराः भारतमातुः सर्वदा सेवां कृतवन्तः । | के भारतमातुः सर्वदा सेवां कृतवन्तः ? |
| (घ) ‘जयतु कृषकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति । | ‘जयतु कृषकः’ इति वक्तुं कान् प्रेरयति ? |
| (ङ) नदी कष्टानि सहमाना प्रवहति । | नदी कानि सहमाना प्रवहति ? |
| (च) वयं गौरववर्धनार्थं प्रयत्नं कुर्मः । | वयं गौरववर्धनार्थं किं कुर्मः ? |
४. अधः प्रदत्तानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानेषु रूपाणि लिखन्तु —
| शब्दः (विभक्तिः) | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| (क) चरणम् (द्वितीया) | चरणम् | चरणौ | चरणान् |
| (ख) नदी (प्रथमा) | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| (ग) ललाट (सप्तमी) | ललाटे | ललाटयोः | ललाटेषु |
| (घ) देश (चतुर्थी) | देशाय | देशाभ्याम् | देशेभ्यः |
| (ङ) चक्रम् (प्रथमा) | चक्रम् | चक्रे | चक्राणि |
| (च) वैज्ञानिक (तृतीया) | वैज्ञानिकेन | वैज्ञानिकाभ्याम् | वैज्ञानिकैः |
| (छ) अस्मद् (प्रथमा) | अहम् | आवाम् | वयम् |
| (ज) विज्ञान (षष्ठी) | विज्ञानस्य | विज्ञानयोः | विज्ञानानाम् |
५. अधः प्रदत्तानि वाक्यानि पठित्वा मातृभाषायां / प्रान्तीयभाषायाम् / आङ्ग्लभाषायां वा अनुवादं कुर्वन्तु —
| संस्कृत-वाक्यम् | हिन्दी अनुवादः (मातृभाषा) |
|---|---|
| (क) भारतभूमौ पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति । | भारतभूमि में पवित्र नदियाँ बहती हैं । |
| (ख) भारतस्य मस्तके हिमालयः मुकुटरूपेण शोभते । | भारत के मस्तक पर हिमालय मुकुट के रूप में सुशोभित है । |
| (ग) भारतभूमौ श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते । | भारतभूमि में श्रेष्ठ पर्वत सुशोभित हैं । |
| (घ) राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः सन्ति । | राष्ट्रध्वज में केसरिया, श्वेत एवं हरित रंग हैं । |
| (ङ) वयं भारते जन्म प्राप्तवन्तः । | हमने भारत में जन्म प्राप्त किया है । |
६. अधः प्रदत्तानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखन्तु —
यथा – भारतमाता → प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् ।
| शब्दः | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|
| (क) भारतमाता | प्रथमा विभक्तिः | एकवचनम् |
| (ख) नद्यः | प्रथमा विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ग) ललाटे | सप्तमी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (घ) तीर्थक्षेत्राणाम् | षष्ठी विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ङ) देशस्य | षष्ठी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (च) बलिदानम् | द्वितीया विभक्तिः (पाठ के वाक्य में कर्म) | एकवचनम् |
| (छ) कृषीवलबान्धवाः | प्रथमा विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ज) अस्मान् | द्वितीया विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (झ) क्षेत्रेषु | सप्तमी विभक्तिः | बहुवचनम् |
७. पाठे प्रयुक्तानि क्रियापदानि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु —
पाठ में अन्य क्रियारूप भी हैं; यह रिक्त स्थानों के लिए एक स्वीकार्य सूची है। लिखितवान्, कृतवन्तः और प्राप्तवन्तः कृदन्त रूप हैं; इन्हें लट्-लकार के रूपों से अलग समझें।
८. अधः प्रदत्तानां क्रियापदानां त्रिषु पुरुषेषु त्रिषु वचनेषु च लट्-लकारस्य रूपाणि लिखन्तु —
(क) भू-धातु (भवति)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भवति | भवतः | भवन्ति |
| मध्यमपुरुषः | भवसि | भवथः | भवथ |
| उत्तमपुरुषः | भवामि | भवावः | भवामः |
(ख) अस्-धातु (अस्ति)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अस्ति | स्तः | सन्ति |
| मध्यमपुरुषः | असि | स्थः | स्थ |
| उत्तमपुरुषः | अस्मि | स्वः | स्मः |
(ग) इष्-धातु (इच्छति) – उत्तमपुरुष-बहुवचनम् ‘इच्छामः’
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | इच्छति | इच्छतः | इच्छन्ति |
| मध्यमपुरुषः | इच्छसि | इच्छथः | इच्छथ |
| उत्तमपुरुषः | इच्छामि | इच्छावः | इच्छामः |
(घ) आ + गम्-धातु (आगच्छति) – प्रथमपुरुष-बहुवचनम् ‘आगच्छन्ति’
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | आगच्छति | आगच्छतः | आगच्छन्ति |
| मध्यमपुरुषः | आगच्छसि | आगच्छथः | आगच्छथ |
| उत्तमपुरुषः | आगच्छामि | आगच्छावः | आगच्छामः |
व्याकरण-तालिकाः (शब्दरूप / सहायक-सामग्री)
१. पाठ में दिए स्थान और उनके अन्य नाम
| स्थान / नाम | पुस्तक में दिए अन्य नाम |
|---|---|
| हरिद्वारम् | माया / मायापुरी |
| काशी | वाराणसी |
| अवन्तिका | उज्जैन |
| इन्द्रप्रस्थम् | देहली / दिल्ली |
| यमुना | कालिन्दी |
| गङ्गा | जाह्नवी / भागीरथी / अलकनन्दा |
| शुतुद्रिः | शतद्रु / सतलुज |
| वितस्ता | झेलम |
| चन्द्रभागा | असिक्नी / चिनाब |
| सह्याद्रिः | पश्चिमी-घाट पर्वतमाला (उपरि-भागः) |
ये सूचीबद्ध पारम्परिक नाम हैं। गङ्गा की प्रवाह-धारा से जुड़ी भागीरथी और अलकनन्दा अलग नदियाँ हैं; आज के भूगोल में इन्हें एक ही नदी का हर स्थान पर समान नाम न समझें।
२. भू-धातु (परस्मैपद) – लोट्-लकारः (आज्ञार्थ)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भवतु | भवताम् | भवन्तु |
| मध्यमपुरुषः | भव | भवतम् | भवत |
| उत्तमपुरुषः | भवानि | भवाव | भवाम |
लोट्-लकार का प्रयोग आज्ञा (गच्छ), प्रार्थना/आमन्त्रण (आगच्छन्तु) तथा आशीर्वाद (आयुष्मान् भव) में होता है। आगच्छन्तु लोट्-लकार है; गायामः लट्-लकार, उत्तमपुरुष, बहुवचन है। साथ गाने का प्रस्ताव करने पर भी गायामः का व्याकरणिक रूप लट् ही रहता है।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
| विषयः | विवरणम् |
|---|---|
| गीत-रचयिता | बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः |
| उपन्यास का प्रकाशन | सन् १८८२ — आनन्दमठ में गीत प्रकाशित; यह गीत की प्रथम रचना की तारीख का दावा नहीं है। |
| भाषा | संस्कृतम् + बाङ्ग्ला (भाषाद्वये) |
| अर्थः | ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ (मैं माता को प्रणाम करता हूँ) |
| राष्ट्रध्वज-वर्णाः | केशरः (त्याग-शौर्य), श्वेतः (शान्ति-सत्य), हरितः (समृद्धि) |
| धर्मचक्रम् | घननीलवर्णम्; चतुर्विंशतिः (२४) अराः; कर्तव्यपथे सतत चलनस्य सन्देशः |
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
१. ‘जयतु सैनिकः, जयतु कृषकः, जयतु वैज्ञानिकः’ इति उद्घोषान् बृहत्फलके विलिख्य विद्यालयस्य कक्षायाः च भित्तिषु स्थापयन्तु । एतेषां मातृभाषया अनुवादं च कुर्वन्तु ।
२. स्वप्रदेशे विद्यमानानां नदीनां पर्वतानां तीर्थक्षेत्राणां च नामानि लिखन्तु ।
३. विरामदिनेषु मातापितृभ्यां सह कृषिक्षेत्रं गत्वा तत्र कृषिकार्यं दृष्ट्वा संस्कृतभाषया पञ्चवाक्यैः अस्य वर्णनं कुर्वन्तु अथवा चित्रं रचयन्तु ।
४. दस देशभक्तों के नाम और चित्र — नमूना परियोजना
दस देशभक्तों के नाम सहित प्रमाणित चित्र संकलित करके A3 कागज पर लगाएँ। नमूना नाम: महात्मा गांधी, सुभाषचन्द्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, बाल गंगाधर तिलक, बिरसा मुंडा और बेगम हजरत महल। यह खुला चयन है; अन्य उपयुक्त नाम ले सकते हैं। चित्रों के लिए संग्रहालय या सरकारी अभिलेख का स्रोत और उपयोग की अनुमति जाँचें; कल्पित चेहरे को ऐतिहासिक तस्वीर न बताएं।
योग्यताविस्तर को समझें
पुस्तक राष्ट्रगीत की पूरी रचना का सामूहिक पाठ और उसके ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन कराती है। गीत आनन्दमठ में 1882 में प्रकाशित हुआ; पुस्तक यह भी बताती है कि वह प्रकाशन से पहले गाया जाता था। इसलिए 1882 को गीत की प्रथम रचना का निश्चित वर्ष न लिखें।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
1. ‘वन्दे मातरम्’ गीत किसने लिखा और किस उपन्यास में प्रकाशित हुआ?
2. ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ क्या है तथा इसमें किसका वर्णन है?
3. राष्ट्रध्वज की तीन पट्टियों के रंग और चक्र का रंग क्या हैं?
4. ध्वज का हरित वर्ण किसका सूचक है?
5. धर्मचक्र हमें क्या संदेश देता है?
अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
6. ‘वन्दे भारतमातरम्’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. भारतमाता के माहात्म्य का वर्णन पाठ के आधार पर कीजिए।
8. राष्ट्रध्वज के तीन वर्णों एवं धर्मचक्र का संदेश स्पष्ट कीजिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘वन्दे मातरम्’ गीत किसने लिखा था?
(क) रवीन्द्रनाथ ठाकुरः
(ख) बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः
(ग) सुभाषचन्द्रः बोसः
(घ) कालिदासः
2. यह गीत किस उपन्यास में संकलित है?
(क) आनन्दमठः
(ख) गोदानम्
(ग) देवदासः
(घ) कपालकुण्डला
3. भारतमाता के मस्तक पर मुकुट के रूप में कौन शोभित है?
(क) विन्ध्यः
(ख) अरावलिः
(ग) हिमालयः
(घ) सह्यः
4. राष्ट्रध्वज में कितनी क्षैतिज पट्टियाँ हैं?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
5. धर्मचक्र में कितनी तीलियाँ (अराः) हैं?
(क) बारह
(ख) सोलह
(ग) चौबीस
(घ) बत्तीस
6. केसरिया वर्ण किसका सूचक है?
(क) समृद्धि का
(ख) शान्ति एवं सत्य का
(ग) त्याग एवं शौर्य का
(घ) विज्ञान का
7. श्वेत वर्ण किसका द्योतक है?
(क) शान्ति एवं सत्य का
(ख) त्याग का
(ग) समृद्धि का
(घ) शौर्य का
8. भारतमाता के चरण कौन धोता है?
(क) नदी
(ख) समुद्रः (रत्नाकरः)
(ग) वायुः
(घ) हिमालयः
9. ‘वन्दे मातरम्’ गीत किन भाषाओं में है?
(क) केवल संस्कृत
(ख) केवल बाङ्ग्ला
(ग) संस्कृत एवं बाङ्ग्ला
(घ) हिन्दी एवं संस्कृत
10. हरित वर्ण किसके परिश्रम का प्रतीक है?
(क) सैनिकों के
(ख) वैज्ञानिकों के
(ग) कृषकों (किसानों) के
(घ) शिक्षकों के
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘वन्दे मातरम्’ गीत में भारतमाता के स्वरूप का वर्णन है।
कारण (R): इस गीत को बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने ‘आनन्दमठः’ उपन्यास में लिखा था।
2. अभिकथन (A): ध्वज का केसरिया वर्ण त्याग एवं शौर्य का सूचक है।
कारण (R): यह वर्ण देश के लिए प्राण अर्पित करने वाले वीरों के बलिदान को दर्शाता है।
3. अभिकथन (A): हिमालय भारतमाता का मुकुट कहलाता है।
कारण (R): हिमालय पर्वतराज है और भारतमाता के मस्तक पर मुकुट के रूप में शोभित है।
4. अभिकथन (A): धर्मचक्र हमें कर्तव्य-पथ पर निरन्तर चलते रहने की प्रेरणा देता है।
कारण (R): धर्मचक्र में बारह तीलियाँ होती हैं।
5. अभिकथन (A): हरित वर्ण समृद्धि एवं किसानों के परिश्रम का प्रतीक है।
कारण (R): किसान अपने पसीने से भारतभूमि सींचते हैं, जिससे वह हरी-भरी एवं सस्यश्यामला बनती है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- गीत-रचयिता (बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय), उपन्यास का प्रकाशन (१८८२) एवं उपन्यास (आनन्दमठः) अवश्य याद रखें।
- ध्वज के तीन रंगों एवं धर्मचक्र (२४ अरे) के अर्थ – जयतु सैनिकः / कृषकः / वैज्ञानिकः – अच्छी तरह याद करें।
- शब्दार्थ (वन्दे, माहात्म्यम्, सिञ्चन्ति, अराः, ललाटे आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें, केवल एक शब्द नहीं।
- प्रश्ननिर्माण में रेखांकित पद के अनुसार सही प्रश्नवाचक शब्द (कः, का, कुत्र, कदा, किमर्थम्) चुनें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- धर्मचक्र की तीलियों की संख्या को बारह/सोलह लिख देना – सही संख्या चौबीस (२४) है।
- केसरिया एवं हरित वर्ण के संदेश को आपस में बदल देना (केसर = सैनिक, हरित = कृषक)।
- गीत को रवीन्द्रनाथ ठाकुर का बता देना – यह बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय का है (राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ ठाकुर का है)।
- मात्रा एवं विसर्ग की अशुद्धि – माहात्म्यम्, चरणौ, नद्यः, ललाटे को शुद्ध लिखें।
- विभक्ति-पहचान में भूल – ‘ललाटे’ सप्तमी एकवचन है, ‘नद्यः’ प्रथमा बहुवचन है।
पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 7, पाठ 1, पृष्ठ 1–14; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। उत्तर और व्याख्याएँ ClearStudy की मौलिक शिक्षण सामग्री हैं; खुली गतिविधियों के उत्तर नमूने हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 7 का पहला पाठ ‘वन्दे भारतमातरम्’ किस विषय पर है?
यह पाठ देशभक्ति एवं मातृभूमि-वन्दना पर आधारित संवाद-गद्य है। इसमें ‘वन्दे मातरम्’ गीत का अर्थ-इतिहास, भारतमाता का माहात्म्य तथा त्रिवर्ण राष्ट्रध्वज एवं धर्मचक्र का संदेश समझाया गया है।
‘वन्दे मातरम्’ गीत किसने लिखा और किस उपन्यास में प्रकाशित हुआ?
इसे महान् देशभक्त बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। यह सन् १८८२ में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘आनन्दमठः’ में संकलित है और संस्कृत एवं बाङ्ग्ला दोनों भाषाओं में है।
राष्ट्रध्वज के तीन रंग एवं धर्मचक्र क्या संदेश देते हैं?
केसरिया रंग त्याग-शौर्य (जयतु सैनिकः), श्वेत रंग शान्ति-सत्य एवं वैज्ञानिक-यश (जयतु वैज्ञानिकः) तथा हरित रंग समृद्धि एवं कृषक-परिश्रम (जयतु कृषकः) का प्रतीक है। बीच का नीला धर्मचक्र, जिसमें चौबीस तीलियाँ हैं, कर्तव्य-पथ पर निरन्तर चलते रहने का संदेश देता है।
मूल संवाद का अध्ययन करने के लिए पाठ्यपुस्तक भी पढ़ें। अतिरिक्त MCQ और अभिकथन-कारण ClearStudy के अभ्यास प्रश्न हैं।
