Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 2 Solutions (NCERT 2026–27) – नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्
यह पृष्ठ कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) के द्वितीय पाठ ‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ का सम्पूर्ण हल प्रस्तुत करता है। इस पाठ में नौ प्रसिद्ध सुभाषितानि संगृहीत हैं, जो जीवन में सद्गुणों, परिश्रम, सत्य, विद्या, मधुर वचन एवं परोपकार की प्रेरणा देते हैं। यहाँ प्रत्येक श्लोक का मूल पाठ, पदच्छेद, अन्वय एवं भावार्थ, सार, शब्दार्थ-तालिका तथा पाठ के अभ्यासः के प्रत्येक प्रश्न एवं उप-भाग का मौलिक, परीक्षा-उपयोगी उत्तर दिया गया है, साथ ही तृतीया-विभक्ति की शब्दरूप-तालिका, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण भी सम्मिलित हैं।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ (सुभाषितानि) + अन्वय एवं भावार्थ
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- अत्र इदम् अवधेयम् (व्याकरण-तालिका)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 7 का द्वितीय पाठ ‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ सुभाषितों (सुन्दर एवं हितकारी वचनों) का संग्रह है। पाठ का आरम्भ एक रोचक संवाद से होता है, जिसमें छात्र विद्यालय की भित्ति पर लिखी पंक्ति ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः’ का भाव अपने आचार्य से पूछते हैं। आचार्य बताते हैं कि श्रेष्ठ जनों द्वारा कहे गए सुवचन ही सुभाषित कहलाते हैं तथा इनके पठन से हमारा नैतिक एवं सामाजिक विकास होता है – ये बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इसी प्रसंग के बाद नौ सुभाषित दिए गए हैं, जिनमें पाँच ‘व’कारों से युक्त पुरुष की पूज्यता, त्यागने योग्य छह दोष, शुद्धि के साधन, भारतवर्ष का परिचय, निरन्तर अभ्यास का महत्त्व, ज्ञानार्जन की विधि, मधुर वचन, उद्यम (परिश्रम) तथा परोपकार जैसे जीवनोपयोगी मूल्यों की शिक्षा दी गई है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ संस्कृत-साहित्य की समृद्ध सुभाषित-परम्परा पर आधारित है। ‘सुभाषित’ शब्द का अर्थ है – ‘सु + भाषित’ अर्थात् सुन्दर रूप से कहा गया हितकारी वचन। ये श्रेष्ठ-जनों (कवियों, ऋषियों, नीतिकारों) के अनुभव से निकले संक्षिप्त किन्तु गहन उपदेश हैं, जो मनुष्यों के ‘विविध-मूल्यों के विकास’ एवं ‘चिन्तन-विकास’ के लिए कहे गए हैं। प्रस्तुत पाठ में संवाद के माध्यम से रमा, सुरेश, सुशीला आदि छात्र आचार्य से सुभाषितों का महत्त्व जानते हैं और फिर नौ सुभाषितों का सस्वर रसपान करते हैं। पाठ का शीर्षक ‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ का अर्थ है – ‘आओ, हम प्रतिदिन सुभाषितों के रस का पान करें’।
मूल पाठ (सुभाषितानि) + अन्वय एवं भावार्थ
(पाठ के नौ सुभाषित ज्यों-के-त्यों; प्रत्येक के साथ पदच्छेद, अन्वय एवं भावार्थ।)
वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः ॥ १ ॥ — सुभाषितम् १
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता ॥ २ ॥ — सुभाषितम् २
विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति ॥ ३ ॥ — सुभाषितम् ३
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥ ४ ॥ — सुभाषितम् ४
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ॥ ५ ॥ — सुभाषितम् ५
तस्य दिवाकरकिरणैः नलिनीदलमिव विस्तारिता बुद्धिः ॥ ६ ॥ — सुभाषितम् ६
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ॥ ७ ॥ — सुभाषितम् ७
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥ ८ ॥ — सुभाषितम् ८
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥ ९ ॥ — सुभाषितम् ९
सार (Hindi Summary)
‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ पाठ का आरम्भ छात्रों एवं आचार्य के संवाद से होता है। विद्यालय की दीवार पर लिखी पंक्ति ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः’ का भाव छात्र आचार्य से पूछते हैं। आचार्य समझाते हैं कि संसार में कोई भी मनुष्य अयोग्य नहीं है, सभी योग्य हैं; केवल प्रेरक एवं मार्गदर्शक (योजक) का अभाव रहता है। आगे वे बताते हैं कि श्रेष्ठ-जनों द्वारा कहे गए सुवचन ही ‘सुभाषित’ कहलाते हैं और इनका पठन हमारे नैतिक एवं सामाजिक विकास का कारण बनता है, क्योंकि ये बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
इसके पश्चात् पाठ में नौ सुभाषित दिए गए हैं। पहले सुभाषित में बताया गया है कि वस्त्र, शरीर, वाणी, विद्या एवं विनय – इन पाँच ‘व’कारों से युक्त मनुष्य सम्मान पाता है। दूसरे में निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य एवं दीर्घसूत्रता – इन छह दोषों को त्यागने का उपदेश है। तीसरे में शुद्धि के साधन बताए गए हैं – जल से शरीर, सत्य से मन, विद्या-तप से जीव तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है। चौथे सुभाषित में भारतवर्ष का भौगोलिक परिचय दिया गया है। पाँचवें में निरन्तर अभ्यास का महत्त्व जल-बिन्दु एवं घड़े के उदाहरण से समझाया गया है।
छठे सुभाषित में पढ़ने, लिखने, देखने, प्रश्न पूछने एवं विद्वानों की संगति से बुद्धि के विकास की बात कमल के खिलने के उदाहरण से कही गई है। सातवें में मधुर वचन बोलने का उपदेश है, क्योंकि प्रिय वचन से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं। आठवें में आलस्य को सबसे बड़ा शत्रु एवं उद्यम (परिश्रम) को सबसे अच्छा मित्र बताया गया है। नौवें सुभाषित में महर्षि व्यास के अठारह पुराणों का सार – ‘परोपकार पुण्य है और परपीड़न पाप है’ – दिया गया है। इस प्रकार सम्पूर्ण पाठ सद्गुण, परिश्रम, सत्य, विद्या, मधुर वचन एवं परोपकार जैसे जीवनोपयोगी मूल्यों की प्रेरणा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | संस्कृत अर्थः | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|---|
| उत्थाय | उत्थानं कृत्वा | खड़े होकर | Having got up |
| प्रेरकः | प्रेरणादायकः | प्रेरित करने वाला | One who inspires |
| नैतिकः | सदाचारयुक्तः | नैतिक | Moral / ethical |
| वपुषा | शरीरेण | शरीर से | By physique |
| सम्मानम् | आदरः | आदर | Respect |
| हातव्याः | त्यक्तव्याः | छोड़ना चाहिए | Worth discarding |
| भूतिम् | वैभवम् | ऐश्वर्य | Prosperity |
| तन्द्रा | अकर्मण्यता | कर्महीनता | Lassitude |
| दीर्घसूत्रता | विलम्बकार्यप्रवृत्तिः | कार्य को आगे टालने की प्रवृत्ति | Procrastination |
| अवरोधकाः | निवारकाः | रोकनेवाले | Barriers |
| वाञ्छति | इच्छति | चाहता/ती है | Wants / Desires |
| अद्भिः | जलैः | जल से | By water |
| भूतात्मा | जीवः | प्राणी | Soul |
| द्वन्द्वः | द्वैधीभावः | दुविधा | Dilemma |
| वर्षम् | भूमेः विभागः | महाद्वीप का विभाग | A division of continent |
| सन्ततिः | अपत्यम् | सन्तान | Progeny |
| निपातेन | पतनेन | गिरने से | By falling |
| हेतुः | कारणम् | कारण | Reason |
| परिपृच्छति | सादरं पृच्छति | विनय से पूछता/ती है | Humbly enquires |
| उपाश्रयति | समीपम् गच्छति | पास जाता/जाती है | Approaches |
| सङ्गतिः | संसर्गः | संग | Association |
| तुष्यन्ति | सन्तोषम् अनुभवन्ति | संतुष्ट होते हैं | Feeling satisfied |
| रिपुः | शत्रुः | वैरी | Enemy |
| पुण्यम् | सत्कर्मणां फलम् | सत्कार्यों के फल | Fruits of meritorious deeds |
| परपीडनम् | अन्येभ्यः कष्टप्रदानम् | दूसरों को पीड़ा देना | Bothering others |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) नरः कतिभिः वकारैः पूजितः भवति ?
(ख) पुरुषेण कति दोषाः हातव्याः ?
(ग) बुद्धिः केन शुध्यति ?
(घ) जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः कः पूर्यते ?
(ङ) आलस्यं केषां महान् रिपुः अस्ति ?
2. निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —
(क) नरः कथं पूजितो भवति ?
(ख) पुरुषेण के दोषाः हातव्याः ?
(ग) कस्य बुद्धिः विस्तारिता भवति ?
(घ) किं कृत्वा मनुष्यः नावसीदति ?
(ङ) व्यासस्य वचनद्वयं किम् ?
3. उदाहरणानुसारं श्लोकांशान् यथोचितं योजयन्तु —
(श्लोक के पूर्वार्ध को उसके सही उत्तरार्ध से मिलाइए।)
| श्लोकांशः (पूर्वार्धम्) | सही योजना (उत्तरार्धम्) |
|---|---|
| (क) विद्यया वपुषा वाचा वस्त्रेण विनयेन च । | वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः ॥ |
| (ख) षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता । | निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता ॥ |
| (ग) अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति । | विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति ॥ |
| (घ) उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् । | वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥ |
| (ङ) जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः । | स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ॥ |
4. निम्नलिखितानां वाक्यानां समानार्थकान् श्लोकांशान् पाठात् चित्वा लिखन्तु —
(क) मधुरवाण्या सर्वे प्रसन्नाः भवन्ति ।
(ख) परिश्रमेण तुल्यः बान्धवः नास्ति ।
(ग) परोपकारेण मानवस्य पुण्यार्जनं भवति ।
(घ) हिन्दमहासागरात् हिमालयपर्यन्तं भारतवर्षम् ।
5. अधोलिखितानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं पर्यायपदानि लिखन्तु —
यथा – वपुः – शरीरम् ।
6. अधः रिक्तस्थानानि तृतीयाविभक्तेः समुचितरूपैः पूरयन्तु —
(रिक्तस्थानों को तृतीया विभक्ति के उचित रूप से भरिए। नीचे की तालिका में रिक्त-स्थानों के उत्तर मोटे अक्षरों में दिए गए हैं।)
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|
| सुधाखण्डेन | सुधाखण्डाभ्याम् | सुधाखण्डैः |
| वृक्षेण | वृक्षाभ्याम् | वृक्षैः |
| लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
| देशेन | देशाभ्याम् | देशैः |
| पुण्येन | पुण्याभ्याम् | पुण्यैः |
| विनयेन | विनयाभ्याम् | विनयैः |
7. कोष्ठके पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु —
(दिए गए पदों से सुभाषित (श्लोक 4 एवं 7) को पूर्ण कीजिए।)
वर्षं तद्भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥ प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।
तस्मात् तदेव वक्तव्यम् वचने का दरिद्रता ॥
8. उपर्युक्तानि सुभाषितानि पठित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
अत्र इदम् अवधेयम् (व्याकरण-तालिका)
पाठ में ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ के अन्तर्गत तृतीया-विभक्ति के शब्दरूप दिए गए हैं, जिन्हें उच्च स्वर से पढ़कर कण्ठस्थ करना चाहिए।
| लिङ्गः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| पुंल्लिङ्गशब्दाः | छात्र | छात्रेण | छात्राभ्याम् | छात्रैः |
| शिक्षक | शिक्षकेण | शिक्षकाभ्याम् | शिक्षकैः | |
| स्त्रीलिङ्गशब्दाः | विद्या | विद्यया | विद्याभ्याम् | विद्याभिः |
| छात्रा | छात्रया | छात्राभ्याम् | छात्राभिः | |
| नपुंसकलिङ्गशब्दाः | सत्य | सत्येन | सत्याभ्याम् | सत्यैः |
| ज्ञान | ज्ञानेन | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानैः | |
| सर्वनाम | किम् | केन | काभ्याम् | कैः |
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः – पर्यायपदानि (अमरकोशः)
| शब्दः | पर्यायपदानि (अमरकोशात्) |
|---|---|
| वपुः | गात्रं वपुः संहननं शरीरं वर्ष्म विग्रहः । |
| नराः | मनुष्याः मानुषाः मर्त्याः मनुजाः मानवाः नराः । |
| भूतिः | विभूतिः भूतिः ऐश्वर्यम् । |
| मनः | चित्तं तु चेतो हृदयं स्वान्तं हृन्मानसं मनः । |
| बुद्धिः | बुद्धिर्मनीषा धिषणा धीः प्रज्ञा शेमुषी मतिः । |
| धनम् | द्रव्यं वित्तं स्वापतेयं रिक्थम् ऋक्थं धनं वसु । |
| पण्डितः | विद्वान् विपश्चित् दोषज्ञः सन् सुधीः कोविदो बुधः । |
| दिवाकरः | सूरः सूर्यः अर्यमा आदित्यः द्वादशात्मा दिवाकरः । |
| जन्तुः | प्राणी तु चेतनः जन्मी जन्तुः जन्युः शरीरी । |
| रिपुः | रिपुः वैरी सपत्नः अरिः द्विषन् दुर्हृत् । |
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. ‘शुध्’ इति धातोः लट्-लकारस्य रूपाणि स्फोरकपत्रे लिखित्वा आनयन्तु ।
प्रथमपुरुषः: शुध्यति, शुध्यतः, शुध्यन्ति ।
मध्यमपुरुषः: शुध्यसि, शुध्यथः, शुध्यथ ।
उत्तमपुरुषः: शुध्यामि, शुध्यावः, शुध्यामः ।
इन रूपों को चार्ट-पेपर (स्फोरकपत्र) पर सुन्दर अक्षरों में लिखकर कक्षा में लाइए।
2. सुभाषितेषु आगतानि तृतीयाविभक्तिरूपाणि संगृह्य उत्तरपुस्तिकायां लिखन्तु । तेषां प्रयोगं कृत्वा वाक्यानि अपि लिखन्तु ।
3. कार्यकलापः – ‘सुभाषितकण्ठपाठविषये’ एकां प्रतियोगितां वर्गे, कक्षायां, विद्यालये च आयोजयन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘सुभाषित’ किसे कहते हैं?
2. किन पाँच ‘व’कारों से युक्त मनुष्य सम्मान पाता है?
3. ऐश्वर्य चाहने वाले मनुष्य को किन छह दोषों का त्याग करना चाहिए?
4. ‘जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः’ से क्या शिक्षा मिलती है?
5. महर्षि व्यास के अनुसार अठारह पुराणों का सार क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. पाठ ‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ में दिए गए शुद्धि के साधनों का वर्णन कीजिए।
7. आलस्य एवं उद्यम के विषय में पाठ का सन्देश अपने शब्दों में लिखिए।
8. चौथे सुभाषित के आधार पर भारतवर्ष के भौगोलिक स्वरूप का वर्णन कीजिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. इस पाठ का शीर्षक है—
(क) वन्दे भारतमातरम्
(ख) नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्
(ग) सेवा हि परमो धर्मः
(घ) दशमः कः?
2. कितने ‘व’कारों से युक्त मनुष्य पूजित होता है?
(क) त्रिभिः
(ख) चतुर्भिः
(ग) पञ्चभिः
(घ) षड्भिः
3. ऐश्वर्य चाहने वाले को कितने दोषों का त्याग करना चाहिए?
(क) चत्वारः
(ख) पञ्च
(ग) षट् (षड्)
(घ) सप्त
4. ‘मनः’ की शुद्धि किससे होती है?
(क) जलेन
(ख) सत्येन
(ग) ज्ञानेन
(घ) तपसा
5. ‘बुद्धिः’ की शुद्धि किससे होती है?
(क) अद्भिः
(ख) सत्येन
(ग) ज्ञानेन
(घ) विनयेन
6. भारतवर्ष किसके उत्तर एवं हिमालय के दक्षिण में है?
(क) समुद्रस्य
(ख) नद्याः
(ग) वनस्य
(घ) पर्वतस्य
7. जल की बूँदों के निरन्तर गिरने से क्या भर जाता है?
(क) सरोवरः
(ख) घटः
(ग) नदी
(घ) कूपः
8. किसकी बुद्धि कमल के समान विकसित होती है?
(क) यः केवलं शेते
(ख) यः पठति लिखति पश्यति परिपृच्छति च
(ग) यः क्रीडति
(घ) यः धनं सञ्चिनोति
9. पाठ के अनुसार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कौन है?
(क) क्रोधः
(ख) आलस्यम्
(ग) लोभः
(घ) भयम्
10. व्यास के वचनद्वय के अनुसार पुण्य किससे होता है?
(क) परपीडनेन
(ख) परोपकारेण
(ग) धनसञ्चयेन
(घ) निद्रया
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ऐश्वर्य चाहने वाले मनुष्य को आलस्य का त्याग करना चाहिए।
कारण (R): आलस्य निद्रा, तन्द्रा आदि छह दोषों में से एक है, जो उन्नति में बाधक होते हैं।
2. अभिकथन (A): निरन्तर अभ्यास से सामान्य मनुष्य भी विद्या, धर्म एवं धन प्राप्त कर लेता है।
कारण (R): जैसे जल-बिन्दुओं के निरन्तर गिरने से घड़ा भर जाता है, वैसे ही निरन्तर अभ्यास फलदायी होता है।
3. अभिकथन (A): मधुर वचन बोलने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।
कारण (R): प्रिय वचन से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं तथा मधुर भाषण में कोई हानि नहीं है।
4. अभिकथन (A): मन की शुद्धि केवल जल से होती है।
कारण (R): ‘मनः सत्येन शुध्यति’ – मन की शुद्धि सत्य से होती है, जल से तो शरीर शुद्ध होता है।
5. अभिकथन (A): परोपकार पुण्य का कारण है।
कारण (R): अठारह पुराणों के सारस्वरूप व्यास के वचनद्वय में परोपकार को पुण्य एवं परपीड़न को पाप कहा गया है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- नौ सुभाषित कण्ठस्थ करें – श्लोक-पूर्ति, रिक्तस्थान-पूर्ति एवं श्लोकांश-योजना के प्रश्न प्रायः इन्हीं से आते हैं।
- प्रत्येक सुभाषित का अन्वय एवं भावार्थ अलग से याद रखें; एकपदेन एवं पूर्णवाक्येन दोनों प्रकार के उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
- शब्दार्थ (वपुषा, भूतिम्, दीर्घसूत्रता, अद्भिः, परपीडनम् आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- तृतीया-विभक्ति की शब्दरूप-तालिका (छात्रेण, विद्यया, ज्ञानेन, केन) तथा रिक्तस्थान-पूर्ति का अभ्यास करें।
- पर्यायपद (जलम्, लोचनम्, धनम्, बुद्धिः, रिपुः) एवं अमरकोश के पर्याय याद रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- मात्रा एवं विसर्ग की अशुद्धि – भूतिम्, हातव्याः, सन्ततिः, रिपुः को शुद्ध लिखें।
- तृतीया-विभक्ति के रूप में भूल – स्त्रीलिङ्ग ‘लता’ का एकवचन ‘लतया’ (न कि ‘लतेन’)।
- शुद्धि-साधनों में मिश्रण – जल से शरीर, सत्य से मन, ज्ञान से बुद्धि – इन्हें न उलझाएँ।
- ‘षड् दोषाः’ को ‘पञ्च दोषाः’ लिख देना – दोष छह हैं, ‘व’कार पाँच।
- एकपदेन उत्तर वाले प्रश्न में पूरा वाक्य तथा पूर्णवाक्येन वाले में केवल एक शब्द लिख देना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 7 पाठ 2 ‘नित्यं पिबाम: सुभाषितरसम्’ में क्या है?
इस पाठ में नौ प्रसिद्ध सुभाषित (सुन्दर हितकारी वचन) संगृहीत हैं, जो सद्गुण, परिश्रम, सत्य, विद्या, मधुर वचन एवं परोपकार जैसे जीवनोपयोगी मूल्यों की शिक्षा देते हैं। शीर्षक का अर्थ है – ‘आओ, हम प्रतिदिन सुभाषितों के रस का पान करें’।
‘सुभाषित’ का क्या अर्थ है?
‘सुभाषित’ (सु + भाषित) का अर्थ है – श्रेष्ठ जनों द्वारा सुन्दर रूप से कहा गया हितकारी वचन। ये मनुष्य के नैतिक एवं सामाजिक विकास तथा चिन्तन-विकास के लिए कहे जाते हैं।
इस पाठ के अनुसार शुद्धि के साधन कौन-से हैं?
तीसरे सुभाषित के अनुसार – शरीर की शुद्धि जल से, मन की शुद्धि सत्य से, जीव (आत्मा) की शुद्धि विद्या एवं तप से तथा बुद्धि की शुद्धि ज्ञान से होती है।
सुभाषितानि, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय, भावार्थ, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
