कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 1 – स्वदेश (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 1 ‘स्वदेश’ (कवि – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
कवि परिचय – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के उन प्रमुख कवियों में से एक हैं जिन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ था। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें ‘सनेही’ के अतिरिक्त ‘त्रिशूल’ उपनाम भी रखना पड़ा। राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी प्रभावकारी रचनाएँ लिखीं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र तथा कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।
कविता (मूल पाठ)
‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करता है। प्रत्येक पद के अंत में टेक “वह हृदय नहीं है पत्थर है, / जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥” दोहराई गई है।
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।
जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं॥
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥
जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥
उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान कठोर एवं संवेदनहीन है। जो व्यक्ति अपने भीतर जीवंत जोश एवं उत्साह नहीं जगा पाता, उसके जीवन का कोई सार (महत्त्व) नहीं रहता। जो संसार के साथ कदम मिलाकर नहीं चल सकता, संसार भी उसका साथ नहीं देता; और जो साहस को छोड़ देता है, वह जीवन के किसी भी लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।
दूसरा पद: जिस व्यक्ति से अपनी जाति अर्थात् समाज एवं देश का उद्धार (भला) नहीं हुआ, उसका अपना भी उद्धार नहीं हो सकता। जो हृदय कोमल भावों से भरा हुआ नहीं है तथा जिसमें प्रेम एवं संवेदना की रस-धारा नहीं बहती, वह भी पत्थर के समान निर्जीव है। इस प्रकार देश-प्रेम के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा एवं निरर्थक है।
तीसरा पद: कवि मातृभूमि की महिमा बताते हैं – यही वह भूमि है जिसकी मिट्टी में हम जन्मे, पले-बढ़े और जिससे हमें अन्न-जल (दाना-पानी) मिला। इसी देश में हमारे माता-पिता, भाई-बंधु एवं सगे-संबंधी हैं और हम ही इसके राजा-रानी अर्थात् स्वामी हैं। इस देश ने ज्ञान एवं संस्कृति के अनमोल खजाने (अद्वितीय नवरत्न) खोले हैं, जिन पर बड़े-बड़े ज्ञानी भी मुग्ध होते हैं और सारी दुनिया दीवानी रहती है।
चौथा पद: ऐसी महान मातृभूमि के प्रति जिसका हृदय नहीं पसीजता (द्रवित नहीं होता), वह व्यक्ति धरती पर एक भार के समान है। मृत्यु तो निश्चित ही है — हर किसी को एक दिन इस संसार से जाना है; काल का दीपक निरंतर जल रहा है और परवानों (मनुष्यों) को उस पर जल मरना ही है। फिर क्यों न इस सीमित जीवन को देश के काम आने दें? सब कुछ हमारे ही हाथों में है — देश-सेवा के लिए तोप-तलवार की आवश्यकता नहीं, हमारा साहस, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही हमारे सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं। इसलिए कवि अंत में फिर दोहराते हैं कि देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हृदय | दिल, मन |
| स्वदेश | अपना देश, मातृभूमि |
| जोश | उत्साह, उमंग |
| सार | तत्त्व, महत्त्व |
| संसार-संग | संसार के साथ (कदम मिलाकर) |
| साहस | हिम्मत, निडरता |
| पार | (लक्ष्य का) किनारा, अंत |
| जाति-उद्धार | समाज/देश का कल्याण |
| उद्धार | मुक्ति, भला होना |
| रस-धार | प्रेम/भाव की धारा |
| दाना-पानी | अन्न-जल, भरण-पोषण |
| बंधु | भाई, सगा-संबंधी |
| लासानी | बेजोड़, अद्वितीय |
| नव रत्न | नौ अनमोल रत्न; यहाँ अमूल्य निधियाँ |
| ज्ञानी | विद्वान, बुद्धिमान |
| दीवानी | मोहित, मुग्ध |
| पसीजना | द्रवित होना, दया से भर जाना |
| भू | पृथ्वी, धरती |
| निस्संशय | संदेह-रहित, निश्चित रूप से |
| काल-दीप | समय/मृत्यु रूपी दीपक |
| परवाना | दीपक पर जल मरने वाला पतंगा; यहाँ देशभक्त मनुष्य |
| तोप / तलवार | युद्ध के अस्त्र-शस्त्र |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
• सामाजिकता से
• संवेदनहीनता से
• कठोरता से
• नैतिकता से
2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
• देश की प्रगति
• देश के प्रति प्रेम
• देश की सुरक्षा
• देश की स्वतंत्रता
3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
• देश की शासन व्यवस्था के लिए
• देश के समस्त नागरिकों के लिए
• देश के सभी प्राणियों के लिए
4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
• जिसमें साहस की कमी है
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (सही भाव/संदर्भ) |
|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।
(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत— पत्थर— जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
कविता की रचना
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों (दाना-पानी, राजा-रानी) की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
आपकी बात
(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे? (ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
भाषा की बात
(क) शब्द से जुड़े शब्द
‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।
(ख) विराम चिह्नों को समझें (योजक चिह्न)
नीचे दी पंक्तियों में योजक चिह्न (-) के स्थान पर का, की, के, में में से उपयुक्त शब्द जोड़कर अर्थ स्पष्ट कीजिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)
| योजक-चिह्न वाली पंक्ति | उपयुक्त शब्द जोड़कर |
|---|---|
| जो चल न सका संसार-संग | जो चल न सका संसार के संग |
| बहती जिसमें रस-धार नहीं | बहती जिसमें रस की धार नहीं |
| पाया जिसमें दाना-पानी | पाया जिसमें दाना और पानी |
| हैं माता-पिता बंधु जिसमें | हैं माता और पिता बंधु जिसमें |
| हम हैं जिसके राजा-रानी | हम हैं जिसके राजा और रानी |
| जिससे न जाति-उद्धार हुआ | जिससे न जाति का उद्धार हुआ |
(योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।)
(ग) शब्द-मित्र / लयात्मकता
“है जान एक दिन जाने को”, “है काल-दीप जलता हरदम” – इन पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आने से कविता में लयात्मकता आ गई है। नीचे दी पंक्तियों में ‘है/हैं’ पहले करके पुनः लिखिए।
(घ) समानार्थी शब्द
| शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| भू | धरा, पृथ्वी |
| दीप | दीपक, प्रदीप |
| हृदय | दिल, जी |
| तलवार | कृपाण, असि |
| दुनिया | संसार, जग |
| पत्थर | पाहन, पाषाण |
कविता का शीर्षक
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। यदि आपको कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
हमारे अस्त्र-शस्त्र
“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” – बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश-प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास
अपने दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न और किन से उदास होगा।
अपनी भाषा अपने गीत / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं और वे किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?
2. कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना किससे की है और क्यों?
3. कविता में ‘काल-दीप’ एवं ‘परवाने’ का प्रयोग किस भाव को व्यक्त करने के लिए हुआ है?
4. “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति से कवि क्या प्रेरणा देते हैं?
5. ‘जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. कविता के आधार पर बताइए कि ‘सच्चा देश-प्रेम’ किसे कहा जा सकता है?
8. इस कविता को ‘आह्वान गीत’ क्यों कहा गया है? उदाहरण सहित समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
2. कवि ‘सनेही’ जी का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?
(क) प्रयागराज
(ख) कानपुर
(ग) उन्नाव
(घ) लखनऊ
3. कविता में हृदय की तुलना किससे की गई है?
(क) फूल से
(ख) पत्थर से
(ग) दीपक से
(घ) नदी से
4. ‘लासानी’ शब्द का अर्थ है—
(क) बेजोड़, अद्वितीय
(ख) साधारण
(ग) पुराना
(घ) मूल्यहीन
5. “हम हैं जिसके राजा-रानी” में ‘हम’ का तात्पर्य है—
(क) देश की सरकार
(ख) देश के राजा-महाराजा
(ग) देश के समस्त नागरिक
(घ) देश के सैनिक
6. ‘काल-दीप’ किसका प्रतीक है?
(क) ज्ञान का
(ख) समय/मृत्यु का
(ग) देश-प्रेम का
(घ) उत्साह का
7. ‘परवाने’ किसे कहा गया है?
(क) पक्षियों को
(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को
(ग) सैनिकों को
(घ) कवियों को
8. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति-वर्णन
(ख) देश-प्रेम
(ग) मित्रता
(घ) हास्य
9. कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?
(क) तोप और तलवार
(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम
(ग) धन और सत्ता
(घ) भाषण और नारे
10. ‘स्वदेश’ कविता को किस प्रकार की रचना कहा गया है?
(क) हास्य-व्यंग्य
(ख) आह्वान गीत
(ग) शोक-गीत
(घ) प्रेम-गीत
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।
कारण (R): पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, जैसे देश-प्रेम से रहित हृदय।
2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार मनुष्य को साहस छोड़ देना चाहिए।
कारण (R): जिसने साहस को छोड़ दिया, वह लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।
3. अभिकथन (A): देश-सेवा के लिए केवल तोप-तलवार ही आवश्यक हैं।
कारण (R): कवि कहते हैं “सब कुछ है अपने हाथों में”।
4. अभिकथन (A): भारत के ज्ञान एवं संस्कृति पर सारा संसार मुग्ध रहा है।
कारण (R): कवि कहते हैं — “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।”
5. अभिकथन (A): ‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है।
कारण (R): यह रचना पाठक को देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘स्वदेश’ कविता के कवि कौन हैं?
‘स्वदेश’ कविता के कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हैं, जो राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘स्वदेश’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव सच्चा देश-प्रेम है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।
“वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति का क्या आशय है?
इसका आशय है कि देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित हृदय कठोर एवं भावशून्य होता है, अतः वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।
कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?
कवि के अनुसार देश-सेवा के लिए तोप-तलवार नहीं, बल्कि साहस, परिश्रम, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
