कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 2 — दो गौरैया प्रश्न उत्तर और सार
दो गौरैया प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 2 में भीष्म साहनी की कहानी का सार, शब्दार्थ, अभ्यास, संवाद, क्रिया-विशेषण, मात्रा-अंतर, हास्य-व्यंग्य और पूरक पठन ‘मित्रलाभ’ की सहायता पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 2 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 13–28; पूरक मित्रलाभ 29–35, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
लेखक परिचय – भीष्म साहनी
भीष्म साहनी (सन् 1915–2003) हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन की पीड़ा और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया था। बच्चों के लिए उन्होंने ‘गुलेल का खेल’ आदि कई कहानियाँ लिखी हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जीवंत है। ‘दो गौरैया’ कहानी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से मनुष्य और पशु-पक्षियों के सहअस्तित्व तथा बदलते दृष्टिकोण को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।
पाठ का सार

एक बालक अपने घर की कहानी सुनाता है। घर में माँ, पिताजी और वह रहते हैं, पर अनेक जीवों के आने-जाने से पिता उसे ‘सराय’ कहते हैं। दो गौरैया घर देखकर बैठक के पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। उन्हें भगाने के पिता के प्रयास और माँ के चुटीले संवाद हास्य पैदा करते हैं।
गौरैयाँ दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से वापस आती रहती हैं। बार-बार खदेड़े जाने के बाद कथावाचक उन्हें दुबली, कुछ काली और चुप देखता है। पिता घोंसला हटाने लगते हैं, तभी उसमें दो बच्चों की ‘चीं-चीं’ सुनाई देती है। वे रुक जाते हैं, लाठी रख देते हैं और नीचे आ बैठते हैं। माँ दरवाजे खोलती हैं। माता-पिता गौरैयाँ भीतर आकर बच्चों को चुग्गा देती हैं; पिता अब शोर सुनकर भी मुसकराते हैं। यह उनके दृष्टिकोण का परिवर्तन है।
‘मैं’ कहानी का बालक कथावाचक है; रचनाकार भीष्म साहनी हैं। प्रथम-पुरुष शैली को अपने-आप लेखक की प्रमाणित निजी घटना न मानें। पक्षियों के विचार और संवाद मानवीकरण हैं। वास्तविक पंखे के पास पक्षी हों तो पंखा बन्द रखें और किसी बड़े की सहायता लें; घोंसला, अंडे या बच्चे न छुएँ।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सराय | यात्रियों के ठहरने का स्थान, धर्मशाला |
| डेरा डालना | अस्थायी रूप से ठहरना, रहने लगना |
| निरीक्षण | ध्यान से देख-परखकर जाँच करना |
| रोशनदान | दीवार के ऊपरी भाग में बना झरोखा जिससे हवा-प्रकाश आता है |
| बिछावन | बिछाने की वस्तु, बिस्तर |
| व्यंग्य | हँसी-मजाक या उपहास के द्वारा किसी कमी/विडंबना को उजागर करना |
| धमा-चौकड़ी | उछल-कूद और शोरगुल |
| अँगीठी | आग जलाकर सेंकने या पकाने का छोटा चूल्हा |
| कसरत | व्यायाम |
| छावनी | सेना के ठहरने का स्थान |
| हुक्म | आदेश |
| झिड़कना | डाँटकर बात करना, फटकारना |
| खदेड़ना | भगाना, दौड़ाना |
| सहनशीलता | सहने का गुण, धैर्य |
| स्टूल | बिना पीठ की ऊँची चौकी |
| झालर | सजावट के लिए लटकाई जाने वाली लड़ी |
| थिगली | कपड़े का छोटा टुकड़ा, पैबंद |
| गुमसुम | चुपचाप, उदास और शांत |
| अवाक् | हक्का-बक्का, चकित होकर बिना बोले |
| चुग्गा | पक्षियों का दाना-चारा |
| मुसकराना | हल्के-से हँसना, मुस्कुराना |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—
• घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
• घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
• पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
• घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
(2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
• माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
• लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
• जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
• मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
• दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
• पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
• दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
• माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
• माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
• माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
• माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
• माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
• दूसरों पर निर्भर रहना
• असफलताओं से हार मान लेना
• अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
• संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 20 की हर पंक्ति में दो विकल्प हैं। नीचे उसी पंक्ति के विकल्प 1 या 2 का चयन दिया है:
| पंक्ति / संकेत | सही विकल्प | कारण |
|---|---|---|
| 1. कानों के पर्दे फट जाएँ… | 2 | पिता को शोर, अन्य लोगों को संगीत जैसा लगता है |
| 2. पक्षी डेरा डाले रहते हैं | 1 | पेड़ पर पक्षियों का निवास; सचमुच मेला नहीं |
| 3. धमा-चौकड़ी, नींद नहीं | 2 | चूहों की भागदौड़ |
| 4. माँ मजाक उड़ा रही हैं | 2 | पिता को अपनी चेष्टाओं का उपहास होने का भ्रम |
| 5. छाती फैलाए बैठे | 1 | गर्व, विजयी मुद्रा; साँस फूलने का विवरण नहीं |
| 6. रात पड़ गई | 2 | धीरे-धीरे रात और अँधेरा |
| 7. मल्हार गा रही थीं | 1 | प्रसन्न चहचहाहट की तुलना राग से; वास्तविक संगीत-प्रशिक्षण नहीं |
चयन: 2, 1, 2, 2, 1, 2, 1। समूह में संदर्भ बताते हुए चयन की तुलना करें।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
सोच-विचार के लिए
(क) पसंद का पात्र — नमूना: मुझे माँ का पात्र अच्छा लगता है। वे हास्यप्रिय हैं और अंत में गौरैयों के लिए दरवाजे खोल देती हैं। अपनी पसंद घटना और कारण से बताएँ।
(ख) घोंसला: बैठक की छत के पंखे के गोले में। ऊँचाई और आश्रय उन्हें अनुकूल लगे होंगे—यह कारण का अनुमान है। वास्तविक चलता पंखा सुरक्षित घोंसला-स्थान नहीं।
(ग) घर और बच्चों का लगाव: कहानी में गौरैयाँ वापस आती हैं और बच्चों को चुग्गा देती हैं। इससे देखभाल का भाव उभरता है। सभी प्रजातियों के परिवार और संतान-पालन का ढंग मनुष्यों के समान होता है, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकालें।
(घ) पिता के गुण: ‘हार मानने वाला आदमी नहीं’ में जिद, दृढ़ता और आत्मविश्वास हैं। कहानी उस जिद की विडंबना भी दिखाती है; हर जिद उपयोगी नहीं।
(ङ) व्यवहार का परिवर्तन: शुरू में वे चहचहाती हैं; खदेड़े जाने के दौर में कथावाचक उन्हें चुप, दुबली और कुछ काली पड़ी देखता है। परेशानी और बच्चों की चिंता एक संभव व्याख्या है; तनाव से पंखों का रंग अवश्य बदलता है, ऐसा जैविक नियम न बनाएँ।
(च) प्रवेश के रास्ते: प्रारंभ में खुले रोशनदान/खिड़की के आसपास आती-जाती हैं। बार-बार लौटते समय दरवाजों के नीचे की खाली जगह और एक शीशा टूटे रोशनदान का उल्लेख है। पिता छेद बन्द करते हैं, फिर भी रात में लौटने का रास्ता कथावाचक को नहीं पता। अज्ञात रास्ते को नया नाम देकर न गढ़ें।
(छ) कौन सुनाता है? घर का बालक। ‘माँ, पिताजी और मैं’ तथा पिता का उससे दरवाजे बन्द कराने वाला संवाद संकेत हैं।
(ज) माँ का अनुमान: वे समझती हैं कि घोंसले और शायद अंडों से लगाव के कारण पक्षी नहीं जाएँगे। अंडों की बात वे अनुमान से कहती हैं; अंत में दो बच्चे दिखाई देते हैं।
अनुमान और कल्पना से
(क) अपना व्यवहार — नमूना: मैं दूर से देखता, उन्हें परेशान नहीं करता और किसी बड़े को बताता। पंखे को बन्द रखते और किसी सुरक्षित व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित सहायता लेते। बच्चों को खिलाने के लिए घोंसले में हाथ न डालते।
(ख) एक दूसरा प्राणी — नमूना: तितली आए तो मैं उसे पकड़ने के बजाय कमरे में बाहर जाने का रास्ता खुला रखने के लिए बड़े की सहायता लूँगा। घर के सभी लोगों की सुरक्षा और प्राणी के प्रति करुणा दोनों पर विचार करें। हर अपरिचित जानवर को छूना या तुरन्त पाल लेना उचित नहीं।
(ग) विस्मय: बालक ने घोंसले में दो नन्हीं गौरैया देखकर अचरज अनुभव किया; अब तक बाहर लौटती दो वयस्क गौरैयों पर ही ध्यान था।
(घ) माँ ने सहायता क्यों नहीं की? उनके संवाद से लगता है कि वे निकालने के प्रयासों को व्यर्थ समझती थीं और नहीं चाहती थीं कि घोंसला उजड़े। यह चरित्र के मनोभाव का संदर्भ-आधारित अनुमान है।
(ङ) अवलोकन — नमूना: बार-बार घड़ी देखते और टहलते व्यक्ति के बारे में अनुमान हो सकता है कि उसे कहीं समय पर पहुँचना है। यह निश्चित तथ्य नहीं; उसके रंग-रूप या कपड़ों से स्वभाव तय न करें।
(च) घर और सराय: घर स्थायी निवास, सराय यात्रियों का अस्थायी ठहराव है। घर किराये का भी हो सकता है और सराय का मालिक हो सकता है; ‘घर पर अधिकार’ और ‘सराय पर किसी का अधिकार नहीं’ सार्वभौम भेद नहीं। यहाँ पिता आने-जाने वाले जीवों के कारण व्यंग्य करते हैं।
संवाद और अभिनय
नीचे चार कल्पित नमूना संवाद हैं। समूह में अलग भूमिकाएँ लेकर मौखिक अभिनय करें; ये मूल कहानी के शब्दशः संवाद नहीं।
(क) दो बच्चे: पहला—माँ-बाप कहाँ हैं? दूसरा—हमें भूख लगी है, उन्हें पुकारें!
(ख) पिता की चेष्टाएँ: पहला—यह आदमी बार-बार कूद क्यों रहा है? दूसरा—शायद हमें निकालना चाहता है; हमारे बच्चे भीतर हैं।
(ग) पहली बार घर देखना: पहला—यह ऊँची जगह आश्रय जैसी लगती है। दूसरा—इधर आने-जाने का रास्ता भी है। (यह पक्षियों की कल्पित दृष्टि है, सुरक्षित पंखा-स्थान की सलाह नहीं।)
(घ) मिलन: माता-पिता—हम लौट आए, यह लो चुग्गा। बच्चे—हम तुम्हें बुला रहे थे!
बदली कहानी — यदि बच्चे न निकले होते
नया नमूना: पिता घोंसले के तिनके हटाने लगे। माँ ने कहा कि उनकी जगह पर कोई अपना घर तोड़े तो कैसा लगेगा। पिता रुककर सोचने लगे। परिवार ने पक्षियों को परेशान न करने का निर्णय लिया। समय आने पर खाली घोंसले के बारे में सुरक्षित व्यवस्था की बात की। यह कल्पित नया अंत है; पुस्तक की घटना नहीं।
कहने के ढंग / क्रिया विशेषण
“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।” में ‘खिलखिलाकर’ क्रिया विशेषण है (कार्य कैसे किया गया, यह बताने वाला शब्द)। नीचे दिए रेखांकित शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
अब इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए। (संकेत— धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि)
घर के प्राणी
कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे? (पहला उदाहरण पुस्तक में दिया गया है।)
| प्राणी | मनुष्यों जैसा व्यवहार/कार्य |
|---|---|
| (क) बिल्ली | ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है। |
| (ख) चूहा (बूढ़ा) | अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, जैसे उसे सर्दी लगती हो। |
| (ग) दूसरा चूहा | बाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठना पसंद करता है, जैसे उसे गरमी लगती हो। |
| (घ) चमगादड़ | शाम पड़ते ही कमरों के आर-पार पर फैलाकर मानो कसरत करने लगते हैं। |
| (ङ) गौरैयाँ | मकान का निरीक्षण करती हैं, घोंसला बनाती हैं और मजे से बैठकर गाना (मल्हार) गाती हैं। |
हेर-फेर मात्रा का
मात्रा और वर्तनी के छोटे अंतर से अर्थ बदलता है। सभी दिए रूपों के नए नमूना वाक्य:
| रूप | अर्थ और वाक्य |
|---|---|
| नाच / नाचा / नचा | नृत्य—उसने नाच दिखाया। नृत्य किया—मोहन नाचा। नृत्य करवाने का आदेश—कठपुतली को नचा। |
| हार / हरा / हारा | माला—यह फूलों का हार है। रंग—मेरा रूमाल हरा है। पराजित हुआ—वह मैच हारा। |
| पिता / पीता | पिताजी—मेरे पिता शिक्षक हैं। पीना—मोहन पानी पीता है। |
| चुक / चूक | समाप्त होना—राशन चुक गया। भूल—मुझसे चूक हुई। |
| नीचा / नीचे | कम ऊँचाई वाला—यह स्टूल नीचा है। स्थान—गेंद मेज के नीचे है। |
| सहसा / साहस | अचानक—सहसा घंटी बजी। हिम्मत—उसने साहस दिखाया। |
‘सहसा–साहस’ में मात्राओं के साथ वर्णों का क्रम भी बदलता है। ‘और’ (तथा) तथा ‘ओर’ (दिशा) के उदाहरण: माँ और पिता बैठे हैं। वे दरवाजे की ओर देखते हैं। ‘उड़ा’—उसे पहले उड़ा देते; ‘उड़’—तो वह उड़ जाती।
वाद-विवाद — क्या माँ निकालना चाहती थीं?
पक्ष में: एक दरवाजा खुला रखने की सलाह दी। विपक्ष में: बाद में गंभीरता से निकालने से मना करती हैं और अंत में दरवाजे खोल देती हैं। पूरी कहानी में बाद के कथन माँ की सहृदयता का अधिक स्पष्ट प्रमाण हैं; एक वाक्य से उनका मन निश्चित न करें। समूहों में तर्क दें और दूसरे पक्ष की बात सुनें।
कहानी की रचना और आपकी बात
| पृष्ठ 25 की विशेषता | संक्षिप्त उदाहरण / व्याख्या |
|---|---|
| 1. बढ़ा-चढ़ाकर कहना | हर पक्षी मानो पता लिखवाकर घर पहुँचता है—कल्पना/अतिशयोक्ति |
| 2. हास्य | पिता की उछल-कूद पर माँ का ‘नाच’ वाला संकेत |
| 3. सोचा कुछ, हुआ कुछ | पिता निकालते हैं, पक्षी फिर लौटते हैं |
| 4. मनोभाव का अनुमान | अँगीठी के पीछे चूहे को देख बूढ़ा/ठंड का अनुमान |
| 5. अपनी बात के मूल शब्द | पिता का ‘हार मानने वाला आदमी नहीं’ कहना |
| 6. दूसरा नाम देना | पक्षियों का चहकना ‘मल्हार गाना’ |
| 7. बिना वक्ता-नाम संवाद | दरवाजे के नीचे से आने की बात माँ कहती हैं; आसपास के वर्णन से वक्ता पहचानें |
शुरू में पिता का गुस्सा और अंत में उनकी मुसकान कहानी का परिवर्तन दिखाते हैं। तीन व्यक्तिगत नमूने: (क) मैंने कबूतर को तिनका ले जाते देखा—यह अवलोकन है, उसके मन का निश्चित ज्ञान नहीं। (ख) पुस्तक साझा करने में हम समय तय करते हैं। (ग) नए साथी से बात करके मुझे उसकी रुचियाँ समझ आईं। अपने अनुभव से उत्तर बदलें।
चिड़ियों का घोंसला — करने की गतिविधि
दूर से निरीक्षण करें; घोंसले, अंडे या बच्चों को न छुएँ। तालिका में स्वयं जाँचें:
| क्रम | स्थान | दिखी सामग्री | खाली या सक्रिय | पक्षी / पहचान का स्रोत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | अपने अवलोकन से भरें | दूर से दिखी सामग्री | बिना छुए लिखें | पहचान न हो तो अनिश्चित |
| 2 | अपने अवलोकन से भरें | दूर से दिखी सामग्री | बिना छुए लिखें | पहचान न हो तो अनिश्चित |
| 3 | अपने अवलोकन से भरें | दूर से दिखी सामग्री | बिना छुए लिखें | पहचान न हो तो अनिश्चित |
| 4 | अपने अवलोकन से भरें | दूर से दिखी सामग्री | बिना छुए लिखें | पहचान न हो तो अनिश्चित |
| 5 | अपने अवलोकन से भरें | दूर से दिखी सामग्री | बिना छुए लिखें | पहचान न हो तो अनिश्चित |
काल्पनिक निरीक्षण को वास्तविक आँकड़ा बताकर न भरें। अलग पक्षियों के घोंसलों का प्रस्तुतीकरण पुस्तकालय के चित्र और स्रोत से तैयार करें।
मल्हार
वर्षा से जुड़ा भारतीय शास्त्रीय राग/राग-परिवार है। कहानी में पक्षियों की प्रसन्न चहचहाहट का रूपक है; गौरैयाँ संगीत की कक्षा में राग नहीं सीख रही थीं। पुस्तक के पृष्ठ 26 की श्रवण-कड़ियाँ शिक्षक के साथ सुनें और अनुभव बताएँ।
हास्य-व्यंग्य
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” – इस प्रकार बात को सीधे न कहकर उलटे या संकेतात्मक ढंग से कहना ‘व्यंग्य’ कहलाता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए। (ख) इनमें से कौन-से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं?
आज की पहेली — रेखा का रास्ता
पृष्ठ 27 के मूल चित्र में बिल्ली की ओर की हर रेखा का एक-एक करके अनुसरण करें। जहाँ रेखाएँ एक-दूसरे को पार करती हैं, उसी रेखा की दिशा बनाए रखें; हर कटाव को नया रास्ता मानकर न मुड़ें। जो रेखा चूहे तक पहुँचती है, उसे अलग रंग से अंकित करें। यह चित्र पर करने का कार्य है; पाठ के बिना कोई मनगढ़ंत दिशा-क्रम यहाँ नहीं दिया गया है।
झरोखे से / साझी समझ — गौरैया संरक्षण
पृष्ठ 28 के स्रोत PIB: विश्व गौरैया दिवस 2025 में 20 मार्च, घोंसला-स्थानों की कमी और संरक्षण के प्रयास पढ़ें। जरूरी स्पष्टता: स्रोत स्वयं बताता है कि 2010 में Nature Forever ने यह पहल की। केवल ‘भारत सरकार ने दिवस घोषित किया’ कहना अधूरा है। आयोजक Nature Forever Society भी पहल और तिथि बताता है। स्थानीय संख्या को स्वयं देखे बिना न गढ़ें और एक कारण को हर जगह की गिरावट का निश्चित कारण न मानें।
पढ़ने के लिए — मित्रलाभ
पृष्ठ 29–35 की पंचतंत्र-कथा में लघुपतनक कौआ पक्षियों को शिकारी से सावधान करता है। चित्रग्रीव के कबूतर लालच में फँसते हैं, फिर एकजुट होकर जाल सहित उड़ते हैं। हिरण्यक चूहा बंधन काटता है। कौआ उससे सावधानी और भरोसे के साथ मित्रता करता है। आगे मन्थरक कछुआ और चित्रांग हिरन साथ आते हैं। हिरन जाल में फँसता है; मित्र उसे छुड़ाते हैं, पर धीमे कछुए को शिकारी पकड़ लेता है। हिरन मृतवत लेटता है, कौआ उसे चोंच मारने का अभिनय करता है, और चूहा कछुए के बंधन काटता है। सब बच निकलते हैं।
कथा का संदेश सहयोग, विवेक, भरोसा और मित्र की सहायता है। यह पशुओं का काल्पनिक मानवीकरण है; अलग जीव वास्तविक प्रकृति में हमेशा इसी तरह व्यवहार करेंगे, ऐसा नियम नहीं। पूरक पठन में अलग प्रश्नावली नहीं; पंचतंत्र की दूसरी कथा स्रोत सहित चुनकर कक्षा में सुनाएँ।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. लेखक के घर में कौन-कौन से प्राणी रहते थे?
2. गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया था?
3. पिताजी ने गौरैयों को निकालने के लिए कौन-कौन से उपाय किए?
4. पिताजी का दृष्टिकोण कब और क्यों बदल गया?
5. कहानी का नाम ‘दो गौरैया’ तथा पुस्तक का नाम ‘मल्हार’ क्यों रखा गया है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ‘दो गौरैया’ कहानी में माँ और पिताजी के स्वभाव की तुलना कीजिए।
2. इस कहानी से हमें क्या संदेश/शिक्षा मिलती है?
3. कहानी में लेखक ने हास्य-व्यंग्य का प्रयोग किस प्रकार किया है? उदाहरण देकर समझाइए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
नीचे दिए बहुविकल्पीय प्रश्न पाठ की पुनरावृत्ति एवं स्वमूल्यांकन के लिए हैं। सही विकल्प चुनिए।
1. ‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) भीष्म साहनी
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) हरिशंकर परसाई
2. लेखक के घर में कुल कितने व्यक्ति रहते थे?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
3. गौरैयों ने घर में अपना घोंसला कहाँ बनाया?
(क) आम के पेड़ पर
(ख) खिड़की पर
(ग) पंखे के गोले में
(घ) रोशनदान में
4. पिताजी घर को क्या कहते थे?
(क) महल
(ख) सराय
(ग) चिड़ियाघर
(घ) किला
5. गौरैयों के प्रति माँ का व्यवहार कैसा था?
(क) क्रोधपूर्ण
(ख) उदासीन
(ग) स्नेहपूर्ण एवं विनोदपूर्ण
(घ) भयभीत
6. ‘मल्हार’ क्या है?
(क) एक नदी का नाम
(ख) एक पक्षी का नाम
(ग) वर्षा ऋतु से जुड़ा एक शास्त्रीय राग
(घ) एक त्योहार
7. पिताजी ने अंततः गौरैयों का घोंसला तोड़ने का प्रयास किस पर चढ़कर किया?
(क) कुर्सी
(ख) सोफे
(ग) मेज
(घ) स्टूल
8. घोंसला तोड़ते समय अचानक कौन-सी आवाज आई?
(क) ‘गुटर-गूँ’
(ख) ‘चीं-चीं’
(ग) ‘श…श’
(घ) ‘म्याऊँ’
9. कहानी के अंत में पिताजी का व्यवहार कैसा हो गया?
(क) वे और क्रोधित हो गए
(ख) उन्होंने घर छोड़ दिया
(ग) वे गौरैयों को देखकर केवल मुसकराते रहे
(घ) उन्होंने घोंसला पूरी तरह तोड़ दिया
10. गौरैयाँ घर में किस-किस रास्ते से प्रवेश करती थीं?
(क) केवल मुख्य दरवाजे से
(ख) केवल खिड़की से
(ग) दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से
(घ) चिमनी से
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए— (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है; (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पिताजी ने अंत में घोंसला तोड़ना बंद कर दिया।
कारण (R): उन्हें घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चे दिखाई दे गए।
2. अभिकथन (A): माँ पिताजी के प्रयासों में सहायता नहीं करती थीं।
कारण (R): माँ नहीं चाहती थीं कि गौरैयों को घर से निकाला जाए।
3. अभिकथन (A): गौरैयाँ बार-बार घर लौट आती थीं।
कारण (R): उनके घोंसले में अंडे और बच्चे थे जिन्हें वे छोड़ नहीं सकती थीं।
4. अभिकथन (A): कुछ समय बाद गौरैयों ने चहकना और गाना बंद कर दिया।
कारण (R): गौरैयाँ ‘मल्हार’ राग सीख रही थीं।
5. अभिकथन (A): पिताजी ने घर को सराय कहा।
कारण (R): घर में अनेक जीव-जंतु बेरोक-टोक आते-जाते और रहते थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?
‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक भीष्म साहनी हैं और यह कहानी (गद्य) विधा की रचना है। यह कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक ‘मल्हार’ का अध्याय 2 है।
‘दो गौरैया’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
यह कहानी पशु-पक्षियों के प्रति दया, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश देती है। यह सिखाती है कि किसी निर्दोष प्राणी का घर उजाड़ना कठोरता है और सच्ची मनुष्यता संवेदना में है। साथ ही यह घर-परिवार के प्रति अटूट लगाव को भी दर्शाती है।
कहानी के अंत में पिताजी मुसकराने क्यों लगे?
जब पिताजी ने घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चों को अपने माँ-बाप को पुकारते देखा, तो उनका कठोर हृदय पिघल गया। उन्होंने लाठी रख दी और गौरैयों के परिवार को मिलते देखकर वे संतोष एवं स्नेह से केवल मुसकराते रहे।
पुस्तक एवं कहानी में ‘मल्हार’ शब्द का क्या अर्थ है?
‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है, जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। कहानी में गौरैयों के प्रसन्न होकर चहचहाने को ‘मल्हार गाना’ कहा गया है, और इसी राग के नाम पर पाठ्यपुस्तक का नाम भी ‘मल्हार’ रखा गया है।
