कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 1 — स्वदेश प्रश्न उत्तर और भावार्थ

स्वदेश प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 1 में गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की कविता का भावार्थ, सार, शब्दार्थ, सही मिलान, भाषा-अभ्यास और चित्र-गतिविधियाँ पढ़ें। खुले उत्तर नमूने हैं।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार अध्याय: 1 कवि: गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ विधा: कविता स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 1 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 1–12, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

कवि परिचय – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के उन प्रमुख कवियों में से एक हैं जिन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ था। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें ‘सनेही’ के अतिरिक्त ‘त्रिशूल’ उपनाम भी रखना पड़ा। राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी प्रभावकारी रचनाएँ लिखीं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र तथा कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।

कविता (मूल पाठ)

‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करता है। प्रत्येक पद के अंत में टेक “वह हृदय नहीं है पत्थर है, / जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥” दोहराई गई है।

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं॥
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।

जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥


जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥

जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥

उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।

है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥


— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
विद्यालय के बगीचे में मिलकर पौधे को पानी देते और सूखी पत्तियाँ एकत्र करते विद्यार्थी
देश-प्रेम का एक दैनिक रूप: पर्यावरण की देखभाल और सहयोग। AI से बनाया गया सांकेतिक दृश्य; कविता में वर्णित किसी वास्तविक घटना का चित्र नहीं।

भावार्थ

पहला भाग: कवि स्वदेश-प्रेम को हृदय की संवेदना मानते हैं। वे देश के प्रति लगाव से रहित हृदय को पत्थर कहते हैं और उत्साह, समाज के साथ आगे बढ़ने तथा साहस बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।

दूसरा भाग: समाज के कल्याण में योगदान और प्रेम की भावना को महत्त्व दिया गया है। ‘जाति-उद्धार’ यहाँ समुदाय/समाज के भले के अर्थ में है; किसी जाति को श्रेष्ठ या दूसरी को हीन बताने का संदेश नहीं।

तीसरा भाग: देश ने नागरिकों को जन्मभूमि, अन्न-जल, परिवार और अनमोल ज्ञान-संपदा दी है। ‘राजा-रानी’ का संबोधन नागरिकों के अपनेपन और जिम्मेदारी का संकेत है, प्रत्येक नागरिक को सचमुच राजपद मिलने का कथन नहीं। ‘नव रत्न’ अमूल्य निधियों की काव्यात्मक छवि है, किसी निश्चित नौ व्यक्तियों की सूची नहीं।

अंतिम भाग: सीमित जीवन को सार्थक कार्य में लगाने की प्रेरणा है। काल-दीप और परवाने जीवन की नश्वरता के प्रतीक हैं। ‘सब कुछ है अपने हाथों में’ आत्मविश्वास जगाता है; तोप-तलवार के उल्लेख से साहस और इच्छाशक्ति की तुलना युद्ध-साधनों से होती है। पुस्तक का अगला अभ्यास सैनिकों के वास्तविक साधनों और अन्य पेशों के रूपकात्मक ‘अस्त्र-शस्त्र’ को अलग करता है। इसलिए पद को हथियारों की कभी आवश्यकता न होने का सार्वभौम कथन न बनाएँ।

संक्षिप्त सार

कविता देश-प्रेम, साहस, संवेदना और जिम्मेदारी का आह्वान करती है। देश की उपलब्धियों के प्रति कृतज्ञता के साथ नागरिकों को अपने ज्ञान और परिश्रम से समाज के काम आने की प्रेरणा मिलती है। यह ओजपूर्ण काव्य-भाषा है; किसी व्यक्ति की अलग सोच या कठिन परिस्थिति देखकर उसका जीवन मूल्यहीन ठहराने का आधार नहीं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
हृदयदिल, मन
स्वदेशअपना देश, मातृभूमि
जोशउत्साह, उमंग
सारतत्त्व, महत्त्व
संसार-संगसंसार के साथ (कदम मिलाकर)
साहसहिम्मत, निडरता
पार(लक्ष्य का) किनारा, अंत
जाति-उद्धारसमाज/देश का कल्याण
उद्धारमुक्ति, भला होना
रस-धारप्रेम/भाव की धारा
दाना-पानीअन्न-जल, भरण-पोषण
बंधुभाई, सगा-संबंधी
लासानीबेजोड़, अद्वितीय
नव रत्ननौ अनमोल रत्न; यहाँ अमूल्य निधियाँ
ज्ञानीविद्वान, बुद्धिमान
दीवानीमोहित, मुग्ध
पसीजनाद्रवित होना, दया से भर जाना
भूपृथ्वी, धरती
निस्संशयसंदेह-रहित, निश्चित रूप से
काल-दीपसमय/मृत्यु रूपी दीपक
परवानादीपक की ओर आकर्षित पतंगा; कविता में नश्वर मनुष्य/समर्पण का प्रतीक
तोप / तलवारयुद्ध के अस्त्र-शस्त्र

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—

• सामाजिकता से

• संवेदनहीनता से

• कठोरता से

• नैतिकता से

उत्तर★ संवेदनहीनता से तथा ★ कठोरता से।हृदय के ‘पत्थर’ होने का अर्थ है उसका भावशून्य (संवेदनहीन) एवं कठोर हो जाना – ऐसा हृदय जिसमें देश-प्रेम जैसी कोमल भावना नहीं बचती।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

• देश की प्रगति

• देश के प्रति प्रेम

• देश की सुरक्षा

• देश की स्वतंत्रता

उत्तर★ देश के प्रति प्रेम।पूरी कविता का केंद्रीय भाव स्वदेश-प्रेम (देश के प्रति प्रेम) ही है; कवि बार-बार कहते हैं कि देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए

• देश की शासन व्यवस्था के लिए

• देश के समस्त नागरिकों के लिए

• देश के सभी प्राणियों के लिए

उत्तर★ देश के समस्त नागरिकों के लिए।‘हम’ से तात्पर्य देश के सभी नागरिकों से है – जो इस मातृभूमि के स्वामी (राजा-रानी) हैं और जिन पर देश की देखभाल एवं उन्नति का दायित्व है।

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

• जिसमें साहस की कमी है

• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है

• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है

• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है

उत्तर★ जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है (तथा ★ जिसमें स्नेह का भाव नहीं है)।कविता की मुख्य पंक्ति के अनुसार वह हृदय पत्थर के समान है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं; साथ ही जो भावों एवं स्नेह की रस-धारा से रहित है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तरयह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता के संदर्भ एवं शब्दों के भाव को आधार बनाया – जैसे ‘पत्थर’ शब्द कठोरता तथा संवेदनहीनता दोनों का सूचक है, इसलिए दोनों उत्तर उपयुक्त लगे।भिन्न उत्तर इसलिए संभव हैं क्योंकि एक ही पंक्ति को अलग-अलग दृष्टि से समझा जा सकता है; परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पृष्ठ 4 के मूल स्तंभ 2 का क्रम:

स्तंभ 1 / मुख्य संकेतसही भाव का क्रमभाव
1. जिसने साहस को छोड़ दिया…3साहस छोड़ने से लक्ष्य पाना कठिन है
2. जो जीवित जोश जगा न सका…4स्वयं तथा दूसरों को उत्साहित करने की प्रेरणा
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं…1देश की ज्ञान-संपदा से विश्व प्रभावित है
4. सब कुछ है अपने हाथों में…2प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति युद्ध में साधनों के समान महत्त्वपूर्ण हैं

मिलान: 1→3, 2→4, 3→1, 4→2।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में कवि मृत्यु की अनिवार्यता बताते हैं – यह निश्चित एवं संदेह-रहित सत्य है कि हर प्राण को एक दिन इस संसार से जाना है।‘काल-दीप’ समय/मृत्यु रूपी दीपक है जो निरंतर जलता रहता है और ‘परवाने’ (मनुष्य) को उस पर जल मरना ही है। तात्पर्य यह कि जब मृत्यु तय है, तो जीवन को देश एवं समाज के काम आने दें, सीमित जीवन को समाज-हित के काम में लगाना सार्थक है; प्रतीक को सचमुच स्वयं को जलाने का निर्देश न समझें।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

अर्थ/विचारकवि कहते हैं कि देश-सेवा एवं उन्नति का सारा सामर्थ्य हमारे अपने हाथों में है; इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में ज्ञान, परिश्रम और साहस उपयोगी साधन हैं।हमारा साहस, परिश्रम, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही हमारे सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं। जिस हृदय में यह देश-प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

अर्थ/विचारजो हृदय कोमल भावों (प्रेम, करुणा, संवेदना) से भरा नहीं है और जिसमें भावनाओं की रस-धारा नहीं बहती, वह वास्तव में हृदय नहीं बल्कि पत्थर है।भावशून्यता एवं देश-प्रेम का अभाव मनुष्य को संवेदनहीन बना देता है – सच्चा हृदय वही है जो भावों एवं देश-प्रेम से ओतप्रोत हो।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?

उत्तरयहाँ ‘राजा-रानी’ देश के समस्त नागरिकों को कहा गया है।कवि का आशय यह है कि यह देश किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हम सब नागरिकों का है; हम ही इसके स्वामी हैं। इसलिए इसकी रक्षा, सेवा एवं उन्नति का दायित्व भी हमारा अपना है।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?

उत्तर‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है समाज एवं समय के साथ कदम मिलाकर चलना, बदलते परिवेश को अपनाना तथा सबके साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना।जो व्यक्ति समाज से कटकर अकेला, स्वार्थी या रुका हुआ रहता है, वह सबसे पिछड़ जाता है; ऐसे व्यक्ति को न तो समाज अपनाता है और न ही वह संसार के सुख-सहयोग का भागीदार बन पाता है – इसी कारण संसार उसका नहीं हो पाता।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तरइन पंक्तियों का अर्थ है कि जिस व्यक्ति का हृदय अपनी इतनी महान मातृभूमि के प्रति भी नहीं पसीजता (द्रवित नहीं होता), वह धरती पर केवल एक बोझ (भार) के समान है।अर्थात् देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित व्यक्ति का जीवन व्यर्थ है; वह न अपने काम आता है, न देश के – इसलिए वह पृथ्वी पर भार ही है।

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तरदेश-प्रेम का अर्थ है अपने देश, उसकी मिट्टी, भाषा, संस्कृति एवं नागरिकों के प्रति सच्चा लगाव एवं समर्पण।देश-प्रेम केवल युद्धभूमि में लड़ने तक सीमित नहीं; ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना, स्वच्छता रखना, संसाधनों का संरक्षण करना, नियमों का पालन करना, जरूरतमंदों की सहायता करना तथा देश की उन्नति में योगदान देना – ये सब देश-प्रेम के ही रूप हैं।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।

उत्तरओजपूर्ण भाषा: कविता की भाषा सरल, ओजमयी एवं प्रेरक है, जो पाठक के मन में जोश भर देती है।लयात्मकता एवं तुक: ‘दाना-पानी–राजा-रानी’, ‘जाने–परवाने’ जैसे तुकांत शब्दों से कविता में मधुर लय एवं गेयता आ गई है।टेक की आवृत्ति: “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” टेक के रूप में बार-बार दोहराई गई है, जिससे मुख्य भाव प्रभावशाली बनता है। साथ ही प्रतीक (काल-दीप, परवाना), अलंकार एवं प्रश्न-शैली का सुंदर प्रयोग हुआ है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?

उत्तरइस पंक्ति में एक उपयुक्त अनुमान भारत के ज्ञान, विद्या, संस्कृति, कला, साहित्य, अध्यात्म एवं सभ्यता के अनमोल खजानों की बात की गई है।भारत की इसी ज्ञान-संपदा एवं प्राकृतिक समृद्धि पर बड़े-बड़े ज्ञानी मुग्ध रहे हैं और कवि ‘दुनिया दीवानी’ कहकर गौरव-भाव व्यक्त करते हैं।

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?

उत्तर‘उगे-बढ़े’ देश के नागरिकों अर्थात् ‘हम’ सबके लिए कहा गया है।इसका भाव यह है कि हम इसी देश की मिट्टी में जन्मे, पले और बड़े हुए हैं; जैसे पौधा अपनी भूमि में उगकर बढ़ता है, वैसे ही हमारा पालन-पोषण इसी मातृभूमि ने किया है – इसलिए इसके प्रति हमारा गहरा लगाव एवं कृतज्ञता स्वाभाविक है।

(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?

उत्तरपत्थर कठोर, भावशून्य एवं संवेदना-रहित होता है; उसमें न कोमलता होती है, न कोई द्रवित होने का भाव।कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना पत्थर से इसलिए की है, ताकि यह स्पष्ट हो कि जिस हृदय में देश-प्रेम एवं भावनाएँ नहीं, वह भी पत्थर की भाँति कठोर एवं निर्जीव है।

(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत— पत्थर— जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)

उत्तर (नमूना)पत्थर: “कभी मैं पहाड़ का अंग था, फिर टूटकर नदी में आ गिरा। वर्षों तक नदी की धारा ने मुझे रगड़-रगड़कर चिकना एवं गोल बना दिया। मैं पहले से चट्टान का कठोर टुकड़ा था; धारा के घर्षण से मेरी सतह चिकनी हुई।”मैं: “हे पत्थर! तुम कठोर भले हो, पर तुमने सेतु, मंदिर एवं भवन बनकर मनुष्य की सेवा की है। काश! हर कठोर हृदय भी तुम्हारी तरह किसी के काम आ सके। मनुष्य को तुमसे धैर्य एवं सहनशीलता सीखनी चाहिए, पर हृदय की कोमलता एवं देश-प्रेम कभी नहीं छोड़ना चाहिए।”

(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?

उत्तरदेश के अनेक संसाधनों एवं धरोहरों को संरक्षण की आवश्यकता है – जल, वन, वन्य-जीव, नदियाँ, मिट्टी एवं वायु जैसे प्राकृतिक संसाधन; ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर एवं स्मारक; तथा हमारी भाषा, कला एवं संस्कृति।इनका संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि ये सीमित एवं अमूल्य हैं; इनके नष्ट होने पर पर्यावरण असंतुलित होगा, आने वाली पीढ़ियाँ इनसे वंचित रह जाएँगी और देश की पहचान एवं समृद्धि को क्षति पहुँचेगी।

कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों (दाना-पानी, राजा-रानी) की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?

उत्तरतुक मिलाने से कविता में मधुर लय, संगीतात्मकता एवं प्रवाह उत्पन्न हो जाता है।समान ध्वनि वाले शब्द (पानी–रानी, जाने–परवाने) कविता को गुनगुनाने एवं याद रखने में आसान बना देते हैं तथा उसके भाव को अधिक प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी बनाते हैं।

(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?

उत्तरकविता को प्रभावशाली बनाने के लिए सरल एवं ओजपूर्ण भाषा, टेक (पंक्ति की आवृत्ति), तुकांत शब्द, प्रश्न-शैली (‘क्या तोप नहीं तलवार नहीं’) एवं प्रतीकों (काल-दीप, परवाना, पत्थर) का प्रयोग किया गया है।इन प्रयोगों से कविता में लय, भाव-तीव्रता एवं प्रेरणा शक्ति बढ़ी है और यह एक सजीव आह्वान गीत बन गई है।

आपकी कविता — नया नमूना

मिलकर हम पौधे लगाएँ,
जल की बूँदें व्यर्थ न जाएँ।
सबके श्रम का मान बढ़ाएँ,
अपने देश को सुंदर बनाएँ।

यह ClearStudy का नया नमूना है, मूल कविता की अगली पंक्तियाँ नहीं। अपने विचार से नई पंक्तियाँ लिखें।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।

उत्तरमातृभूमि, देशभक्ति, राष्ट्र, स्वतंत्रता, तिरंगा, स्वाभिमान, देशवासी, स्वदेशी, राष्ट्रप्रेम, मातृभाषा आदि।

(ख) विराम चिह्नों को समझें (योजक चिह्न)

नीचे दी पंक्तियों में योजक चिह्न (-) के स्थान पर का, की, के, में में से उपयुक्त शब्द जोड़कर अर्थ स्पष्ट कीजिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)

योजक-चिह्न वाली पंक्तिउपयुक्त शब्द जोड़कर
जो चल न सका संसार-संगजो चल न सका संसार के संग
बहती जिसमें रस-धार नहींबहती जिसमें रस की धार नहीं
पाया जिसमें दाना-पानीपाया जिसमें दाना और पानी
हैं माता-पिता बंधु जिसमेंहैं माता और पिता बंधु जिसमें
हम हैं जिसके राजा-रानीहम हैं जिसके राजा और रानी
जिससे न जाति-उद्धार हुआजिससे न जाति का उद्धार हुआ

(योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।)

(ग) शब्द-मित्र / लयात्मकता

“है जान एक दिन जाने को”, “है काल-दीप जलता हरदम” – इन पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आने से कविता में लयात्मकता आ गई है। नीचे दी पंक्तियों में ‘है/हैं’ पहले करके पुनः लिखिए।

उत्तरमूल: “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, / जिस पर है दुनिया दीवानी॥”परिवर्तित (है/हैं पहले): “हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते, / है जिस पर दुनिया दीवानी।”अंतर: ‘है/हैं’ को पहले रखने से गति और ठहराव बदलते हैं; हर बदलाव से लय बढ़ना तय नहीं, पर कई बार शब्द-क्रम बदलने से स्वाभाविक प्रवाह कुछ बदल जाता है – इसी से सिद्ध होता है कि शब्दों का क्रम कविता के सौंदर्य को प्रभावित करता है।

(घ) समानार्थी शब्द

शब्दसमानार्थी शब्द
भूधरा, पृथ्वी
दीपदीपक, प्रदीप
हृदयदिल, जी
तलवारकृपाण, असि
दुनियासंसार, जग
पत्थरपाहन, पाषाण

कविता का शीर्षक

इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। यदि आपको कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना)मैं “जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” अथवा “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति को शीर्षक बनाऊँगा।पहली पंक्ति पूरी कविता के केंद्रीय भाव – देश-प्रेम – को सीधे व्यक्त करती है; जबकि दूसरी पंक्ति यह प्रेरणा देती है कि देश की उन्नति का सामर्थ्य हमारे ही हाथों में है। दोनों ही पंक्तियाँ कविता के मूल संदेश को संक्षेप में प्रकट करती हैं।

आपकी बात

पृष्ठ 9–10 के चित्रों को पंक्ति-दर-पंक्ति बाएँ से दाएँ गिनें। ये नमूना चयन हैं; कार्य और कारण स्पष्ट करें।

क्रम / चित्रचयन और कारण
1 पौधों को पानी✓ पर्यावरण की देखभाल
2 रेल में कचरा फैलाना✗ साझा स्थान गंदा करना
3 कुश्ती✓ नियमपूर्वक खेल, अनुशासन और क्षमता का विकास; केवल जीत को देश-प्रेम का प्रमाण न मानें
4 सामूहिक पानी भरना✓ सहयोग और सबको अवसर
5 सैनिक का स्वागत✓ सेवा का सम्मान
6 सफाई✓ साझा परिवेश स्वच्छ रखना
7 खेती✓ भोजन उत्पादन और जिम्मेदार श्रम
8 बुजुर्ग के साथ सड़क पार करना✓ जरूरत पूछकर सुरक्षित सहायता
9 बुजुर्ग से बातचीत✓ सुनना और सम्मान देना
10 स्मारक पर लिखना✗ धरोहर को नुकसान
11 ध्वज के सामने अनुशासित समूह✓ राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान
12 बैंक में कतार✓ दूसरों के समय और अवसर का सम्मान
13 फूल न तोड़ने का निर्देश मानना✓ संरक्षण
14 खाली कमरे में पंखा/बत्ती/एसी चलते रहना✗ अनावश्यक ऊर्जा-खपत
15 बहते नल पर ध्यान दिलाना✓ पानी बचाने का कदम; बेवजह पानी बहने देना ✗

चित्र के कार्य का मूल्यांकन करें, व्यक्ति की पूरी देशभक्ति का नहीं। सहायता में सामने वाले की इच्छा और सुरक्षा भी महत्त्वपूर्ण है।

शब्द-मित्र — ‘है/हैं’ को अंत में लाना

पुस्तक का पहला निर्देश भी पूरा करें। नमूने: ‘हम जिसके राजा-रानी हैं’; ‘माता-पिता बंधु जिसमें हैं’; ‘वह हृदय नहीं, पत्थर है’; ‘निश्चित, निस्संशय निश्चित है’। मूल अर्थ और सही वचन बनाए रखें। कविता का एक संभव क्रम बदलना है, मूल पंक्ति को अशुद्ध बताना नहीं।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” – बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश-प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?

उत्तरविद्यार्थी: पुस्तक, कलम, ज्ञान एवं अनुशासन।अध्यापक: शिक्षा, ज्ञान एवं अच्छे संस्कार।कृषक: हल, बीज, परिश्रम एवं खेत।चिकित्सक: औषधि, सेवा-भाव एवं चिकित्सा-ज्ञान।वैज्ञानिक: प्रयोग, शोध एवं नवीन आविष्कार।श्रमिक: मेहनत, औज़ार एवं लगन।पत्रकार: कलम, सत्य एवं निर्भीक लेखनी।

तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास

अपने दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से काव्यात्मक मानवीकरण में तिरंगा झंडा प्रसन्न और किन से उदास होगा।

उत्तरप्रसन्न होगा: समय पर अध्ययन करने, सच बोलने, स्वच्छता रखने, बड़ों का आदर करने, पौधे लगाने तथा जरूरतमंद की सहायता करने से।उदास होगा: झूठ बोलने, गंदगी फैलाने, पानी-बिजली बर्बाद करने, झगड़ा करने या किसी का अपमान करने से। ये कार्य देश के सम्मान एवं मूल्यों के विरुद्ध हैं।

अपनी भाषा अपने गीत / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)अपनी भाषा अपने गीत: यह अलग-अलग मातृभाषाओं में गीत का शीर्षक, रचनाकार/परंपरा और स्रोत लिखकर, भाव समझकर कक्षा में मिलकर देश-प्रेम के गीत संकलित कर उनकी संगीतात्मक प्रस्तुति देने की रचनात्मक गतिविधि है।झरोखे से / साझी समझ: इसमें सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ पढ़कर तुलना करनी है कि स्वतंत्रता-आंदोलन के समय लिखी दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार व्यक्त हुआ है। ‘स्वदेश’ में देश-प्रेम को हृदय की भावना एवं कर्तव्य के रूप में, तथा ‘खादी गीत’ में स्वदेशी वस्त्र (खादी) के माध्यम से आत्मसम्मान एवं अपनेपन के रूप में दर्शाया गया है।खोजबीन के लिए: दी गई इंटरनेट कड़ियों से ‘सारे जहाँ से अच्छा’, ‘दीवानों की हस्ती’ एवं ‘झाँसी की रानी’ जैसी देश-प्रेम की रचनाएँ खोजकर पढ़ी जा सकती हैं।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं और वे किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?

उत्तर‘स्वदेश’ कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ हैं। उन्होंने ब्रजभाषा से आरंभ कर खड़ी बोली में अपना स्थान बनाया और राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रभावकारी कविताएँ लिखीं।

2. कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना किससे की है और क्यों?

उत्तरकवि ने ऐसे हृदय की तुलना पत्थर से की है। क्योंकि पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, उसी प्रकार जिस हृदय में देश-प्रेम एवं संवेदना नहीं होती, वह भी कठोर एवं निर्जीव होता है।

3. कविता में ‘काल-दीप’ एवं ‘परवाने’ का प्रयोग किस भाव को व्यक्त करने के लिए हुआ है?

उत्तर‘काल-दीप’ मृत्यु/समय का तथा ‘परवाने’ मनुष्यों के प्रतीक हैं। इनके माध्यम से कवि बताते हैं कि मृत्यु अवश्यंभावी है, इसलिए मनुष्य को अपना जीवन देश के काम में लगा देना चाहिए।

4. “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति से कवि क्या प्रेरणा देते हैं?

उत्तरकवि प्रेरणा देते हैं कि देश की उन्नति एवं सेवा का सारा सामर्थ्य हमारे ही हाथों में है। इसके लिए साहस और इच्छाशक्ति भी महत्त्वपूर्ण हैं; हमारा साहस, परिश्रम एवं देश-प्रेम ही सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं।

5. ‘जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइसका आशय है कि जो व्यक्ति अपने समाज एवं देश का भला नहीं करता, उसका अपना जीवन भी सार्थक एवं सफल नहीं होता। दूसरों के कल्याण में ही व्यक्ति का सच्चा उद्धार (कल्याण) निहित है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव सच्चा देश-प्रेम जगाना है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है। जो व्यक्ति जोश, साहस एवं भावना से रहित है तथा समाज के साथ मिलकर नहीं चलता, उसका जीवन निरर्थक है।कवि मातृभूमि की महिमा बताते हुए कहते हैं कि यही भूमि हमें जन्म, पालन एवं अनमोल ज्ञान-संपदा देती है। मृत्यु निश्चित है, इसलिए मनुष्य को अपना जीवन देश के काम में लगाना चाहिए। देश-सेवा के अलग क्षेत्रों में साहस, ज्ञान और परिश्रम उपयोगी साधन हैं। इस प्रकार यह कविता हमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण की प्रेरणा देती है।

7. कविता के आधार पर बताइए कि ‘सच्चा देश-प्रेम’ किसे कहा जा सकता है?

उत्तरकविता के अनुसार सच्चा देश-प्रेम केवल देश के लिए युद्ध करना या नारे लगाना नहीं है, बल्कि हृदय में देश के प्रति गहरी भावना एवं समर्पण रखना है। सच्चा देशप्रेमी वह है जो जोश एवं साहस से भरा हो, समाज के साथ मिलकर चले तथा दूसरों के कल्याण में अपना भला समझे।वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है, देश की मिट्टी, संस्कृति एवं संसाधनों का सम्मान एवं संरक्षण करता है तथा अपने श्रम, ज्ञान एवं चरित्र से देश की उन्नति में योगदान देता है। ऐसा व्यक्ति, चाहे वह विद्यार्थी हो, किसान हो या वैज्ञानिक, अपने-अपने क्षेत्र में देश की सेवा करके सच्चा देश-प्रेम प्रकट करता है।

8. इस कविता को ‘आह्वान गीत’ क्यों कहा गया है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरइस कविता को ‘आह्वान गीत’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यह पाठक को देश-प्रेम एवं कर्म के लिए ललकारती एवं प्रेरित करती है। आह्वान गीत वह रचना है जो लोगों को किसी उच्च उद्देश्य के लिए जगाती एवं उत्साहित करती है।“जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं” तथा “सब कुछ है अपने हाथों में” जैसी पंक्तियाँ मनुष्य को साहस एवं आत्मविश्वास से कर्म करने को प्रेरित करती हैं। ओजपूर्ण भाषा, टेक की आवृत्ति एवं प्रश्न-शैली इसे और प्रभावशाली बनाती हैं। इस प्रकार यह कविता एक सजीव आह्वान गीत है जो हर नागरिक के मन में देश-प्रेम की ज्योति जगाती है।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

(ग) सोहनलाल द्विवेदी

(घ) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’।

2. कवि ‘सनेही’ जी का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?

(क) प्रयागराज

(ख) कानपुर

(ग) उन्नाव

(घ) लखनऊ

उत्तर(ग) उन्नाव।

3. कविता में हृदय की तुलना किससे की गई है?

(क) फूल से

(ख) पत्थर से

(ग) दीपक से

(घ) नदी से

उत्तर(ख) पत्थर से।

4. ‘लासानी’ शब्द का अर्थ है—

(क) बेजोड़, अद्वितीय

(ख) साधारण

(ग) पुराना

(घ) मूल्यहीन

उत्तर(क) बेजोड़, अद्वितीय।

5. “हम हैं जिसके राजा-रानी” में ‘हम’ का तात्पर्य है—

(क) देश की सरकार

(ख) देश के राजा-महाराजा

(ग) देश के समस्त नागरिक

(घ) देश के सैनिक

उत्तर(ग) देश के समस्त नागरिक।

6. ‘काल-दीप’ किसका प्रतीक है?

(क) ज्ञान का

(ख) समय/मृत्यु का

(ग) देश-प्रेम का

(घ) उत्साह का

उत्तर(ख) समय/मृत्यु का।

7. ‘परवाने’ किसे कहा गया है?

(क) पक्षियों को

(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को

(ग) सैनिकों को

(घ) कवियों को

उत्तर(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को।

8. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?

(क) प्रकृति-वर्णन

(ख) देश-प्रेम

(ग) मित्रता

(घ) हास्य

उत्तर(ख) देश-प्रेम।

9. कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?

(क) तोप और तलवार

(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम

(ग) धन और सत्ता

(घ) भाषण और नारे

उत्तर(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम।

10. ‘स्वदेश’ कविता को किस प्रकार की रचना कहा गया है?

(क) हास्य-व्यंग्य

(ख) आह्वान गीत

(ग) शोक-गीत

(घ) प्रेम-गीत

उत्तर(ख) आह्वान गीत।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(क), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।

कारण (R): पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, जैसे देश-प्रेम से रहित हृदय।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार मनुष्य को साहस छोड़ देना चाहिए।

कारण (R): जिसने साहस को छोड़ दिया, वह लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।

उत्तर(घ) A गलत है (कवि साहस छोड़ने को नहीं, बल्कि साहस बनाए रखने को कहते हैं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): देश-सेवा के लिए केवल तोप-तलवार ही आवश्यक हैं।

कारण (R): कवि कहते हैं “सब कुछ है अपने हाथों में”।

उत्तर(घ) A गलत है (देश-सेवा अनेक क्षेत्रों में होती है; केवल युद्ध-साधनों तक सीमित नहीं), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): भारत के ज्ञान एवं संस्कृति पर सारा संसार मुग्ध रहा है।

कारण (R): कवि कहते हैं — “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।”

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है।

कारण (R): यह रचना पाठक को देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘स्वदेश’ कविता के कवि कौन हैं?

‘स्वदेश’ कविता के कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हैं, जो राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

‘स्वदेश’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव सच्चा देश-प्रेम है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।

“वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति का क्या आशय है?

इसका आशय है कि देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित हृदय कठोर एवं भावशून्य होता है, अतः वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।

कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?

पुस्तक का रूपकात्मक अभ्यास देश-सेवा के अलग क्षेत्रों में साहस, परिश्रम, ज्ञान और इच्छाशक्ति को उपयोगी साधन मानता है; सैनिक के वास्तविक साधन और अन्य पेशों के रूपकात्मक साधन अलग हैं।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।

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