कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 1 — स्वदेश प्रश्न उत्तर और भावार्थ
स्वदेश प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 1 में गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ की कविता का भावार्थ, सार, शब्दार्थ, सही मिलान, भाषा-अभ्यास और चित्र-गतिविधियाँ पढ़ें। खुले उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 1 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 1–12, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवि परिचय – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के उन प्रमुख कवियों में से एक हैं जिन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ था। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें ‘सनेही’ के अतिरिक्त ‘त्रिशूल’ उपनाम भी रखना पड़ा। राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी प्रभावकारी रचनाएँ लिखीं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र तथा कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।
कविता (मूल पाठ)
‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करता है। प्रत्येक पद के अंत में टेक “वह हृदय नहीं है पत्थर है, / जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥” दोहराई गई है।
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।
जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं॥
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥
जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥
उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

भावार्थ
पहला भाग: कवि स्वदेश-प्रेम को हृदय की संवेदना मानते हैं। वे देश के प्रति लगाव से रहित हृदय को पत्थर कहते हैं और उत्साह, समाज के साथ आगे बढ़ने तथा साहस बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।
दूसरा भाग: समाज के कल्याण में योगदान और प्रेम की भावना को महत्त्व दिया गया है। ‘जाति-उद्धार’ यहाँ समुदाय/समाज के भले के अर्थ में है; किसी जाति को श्रेष्ठ या दूसरी को हीन बताने का संदेश नहीं।
तीसरा भाग: देश ने नागरिकों को जन्मभूमि, अन्न-जल, परिवार और अनमोल ज्ञान-संपदा दी है। ‘राजा-रानी’ का संबोधन नागरिकों के अपनेपन और जिम्मेदारी का संकेत है, प्रत्येक नागरिक को सचमुच राजपद मिलने का कथन नहीं। ‘नव रत्न’ अमूल्य निधियों की काव्यात्मक छवि है, किसी निश्चित नौ व्यक्तियों की सूची नहीं।
अंतिम भाग: सीमित जीवन को सार्थक कार्य में लगाने की प्रेरणा है। काल-दीप और परवाने जीवन की नश्वरता के प्रतीक हैं। ‘सब कुछ है अपने हाथों में’ आत्मविश्वास जगाता है; तोप-तलवार के उल्लेख से साहस और इच्छाशक्ति की तुलना युद्ध-साधनों से होती है। पुस्तक का अगला अभ्यास सैनिकों के वास्तविक साधनों और अन्य पेशों के रूपकात्मक ‘अस्त्र-शस्त्र’ को अलग करता है। इसलिए पद को हथियारों की कभी आवश्यकता न होने का सार्वभौम कथन न बनाएँ।
संक्षिप्त सार
कविता देश-प्रेम, साहस, संवेदना और जिम्मेदारी का आह्वान करती है। देश की उपलब्धियों के प्रति कृतज्ञता के साथ नागरिकों को अपने ज्ञान और परिश्रम से समाज के काम आने की प्रेरणा मिलती है। यह ओजपूर्ण काव्य-भाषा है; किसी व्यक्ति की अलग सोच या कठिन परिस्थिति देखकर उसका जीवन मूल्यहीन ठहराने का आधार नहीं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हृदय | दिल, मन |
| स्वदेश | अपना देश, मातृभूमि |
| जोश | उत्साह, उमंग |
| सार | तत्त्व, महत्त्व |
| संसार-संग | संसार के साथ (कदम मिलाकर) |
| साहस | हिम्मत, निडरता |
| पार | (लक्ष्य का) किनारा, अंत |
| जाति-उद्धार | समाज/देश का कल्याण |
| उद्धार | मुक्ति, भला होना |
| रस-धार | प्रेम/भाव की धारा |
| दाना-पानी | अन्न-जल, भरण-पोषण |
| बंधु | भाई, सगा-संबंधी |
| लासानी | बेजोड़, अद्वितीय |
| नव रत्न | नौ अनमोल रत्न; यहाँ अमूल्य निधियाँ |
| ज्ञानी | विद्वान, बुद्धिमान |
| दीवानी | मोहित, मुग्ध |
| पसीजना | द्रवित होना, दया से भर जाना |
| भू | पृथ्वी, धरती |
| निस्संशय | संदेह-रहित, निश्चित रूप से |
| काल-दीप | समय/मृत्यु रूपी दीपक |
| परवाना | दीपक की ओर आकर्षित पतंगा; कविता में नश्वर मनुष्य/समर्पण का प्रतीक |
| तोप / तलवार | युद्ध के अस्त्र-शस्त्र |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
• सामाजिकता से
• संवेदनहीनता से
• कठोरता से
• नैतिकता से
2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
• देश की प्रगति
• देश के प्रति प्रेम
• देश की सुरक्षा
• देश की स्वतंत्रता
3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
• देश की शासन व्यवस्था के लिए
• देश के समस्त नागरिकों के लिए
• देश के सभी प्राणियों के लिए
4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
• जिसमें साहस की कमी है
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 4 के मूल स्तंभ 2 का क्रम:
| स्तंभ 1 / मुख्य संकेत | सही भाव का क्रम | भाव |
|---|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया… | 3 | साहस छोड़ने से लक्ष्य पाना कठिन है |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका… | 4 | स्वयं तथा दूसरों को उत्साहित करने की प्रेरणा |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं… | 1 | देश की ज्ञान-संपदा से विश्व प्रभावित है |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में… | 2 | प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति युद्ध में साधनों के समान महत्त्वपूर्ण हैं |
मिलान: 1→3, 2→4, 3→1, 4→2।
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।
(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत— पत्थर— जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
कविता की रचना
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों (दाना-पानी, राजा-रानी) की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
आपकी कविता — नया नमूना
जल की बूँदें व्यर्थ न जाएँ।
सबके श्रम का मान बढ़ाएँ,
अपने देश को सुंदर बनाएँ।
यह ClearStudy का नया नमूना है, मूल कविता की अगली पंक्तियाँ नहीं। अपने विचार से नई पंक्तियाँ लिखें।
भाषा की बात
(क) शब्द से जुड़े शब्द
‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।
(ख) विराम चिह्नों को समझें (योजक चिह्न)
नीचे दी पंक्तियों में योजक चिह्न (-) के स्थान पर का, की, के, में में से उपयुक्त शब्द जोड़कर अर्थ स्पष्ट कीजिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)
| योजक-चिह्न वाली पंक्ति | उपयुक्त शब्द जोड़कर |
|---|---|
| जो चल न सका संसार-संग | जो चल न सका संसार के संग |
| बहती जिसमें रस-धार नहीं | बहती जिसमें रस की धार नहीं |
| पाया जिसमें दाना-पानी | पाया जिसमें दाना और पानी |
| हैं माता-पिता बंधु जिसमें | हैं माता और पिता बंधु जिसमें |
| हम हैं जिसके राजा-रानी | हम हैं जिसके राजा और रानी |
| जिससे न जाति-उद्धार हुआ | जिससे न जाति का उद्धार हुआ |
(योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।)
(ग) शब्द-मित्र / लयात्मकता
“है जान एक दिन जाने को”, “है काल-दीप जलता हरदम” – इन पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आने से कविता में लयात्मकता आ गई है। नीचे दी पंक्तियों में ‘है/हैं’ पहले करके पुनः लिखिए।
(घ) समानार्थी शब्द
| शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| भू | धरा, पृथ्वी |
| दीप | दीपक, प्रदीप |
| हृदय | दिल, जी |
| तलवार | कृपाण, असि |
| दुनिया | संसार, जग |
| पत्थर | पाहन, पाषाण |
कविता का शीर्षक
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। यदि आपको कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
आपकी बात
पृष्ठ 9–10 के चित्रों को पंक्ति-दर-पंक्ति बाएँ से दाएँ गिनें। ये नमूना चयन हैं; कार्य और कारण स्पष्ट करें।
| क्रम / चित्र | चयन और कारण |
|---|---|
| 1 पौधों को पानी | ✓ पर्यावरण की देखभाल |
| 2 रेल में कचरा फैलाना | ✗ साझा स्थान गंदा करना |
| 3 कुश्ती | ✓ नियमपूर्वक खेल, अनुशासन और क्षमता का विकास; केवल जीत को देश-प्रेम का प्रमाण न मानें |
| 4 सामूहिक पानी भरना | ✓ सहयोग और सबको अवसर |
| 5 सैनिक का स्वागत | ✓ सेवा का सम्मान |
| 6 सफाई | ✓ साझा परिवेश स्वच्छ रखना |
| 7 खेती | ✓ भोजन उत्पादन और जिम्मेदार श्रम |
| 8 बुजुर्ग के साथ सड़क पार करना | ✓ जरूरत पूछकर सुरक्षित सहायता |
| 9 बुजुर्ग से बातचीत | ✓ सुनना और सम्मान देना |
| 10 स्मारक पर लिखना | ✗ धरोहर को नुकसान |
| 11 ध्वज के सामने अनुशासित समूह | ✓ राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान |
| 12 बैंक में कतार | ✓ दूसरों के समय और अवसर का सम्मान |
| 13 फूल न तोड़ने का निर्देश मानना | ✓ संरक्षण |
| 14 खाली कमरे में पंखा/बत्ती/एसी चलते रहना | ✗ अनावश्यक ऊर्जा-खपत |
| 15 बहते नल पर ध्यान दिलाना | ✓ पानी बचाने का कदम; बेवजह पानी बहने देना ✗ |
चित्र के कार्य का मूल्यांकन करें, व्यक्ति की पूरी देशभक्ति का नहीं। सहायता में सामने वाले की इच्छा और सुरक्षा भी महत्त्वपूर्ण है।
शब्द-मित्र — ‘है/हैं’ को अंत में लाना
पुस्तक का पहला निर्देश भी पूरा करें। नमूने: ‘हम जिसके राजा-रानी हैं’; ‘माता-पिता बंधु जिसमें हैं’; ‘वह हृदय नहीं, पत्थर है’; ‘निश्चित, निस्संशय निश्चित है’। मूल अर्थ और सही वचन बनाए रखें। कविता का एक संभव क्रम बदलना है, मूल पंक्ति को अशुद्ध बताना नहीं।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
हमारे अस्त्र-शस्त्र
“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” – बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश-प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास
अपने दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से काव्यात्मक मानवीकरण में तिरंगा झंडा प्रसन्न और किन से उदास होगा।
अपनी भाषा अपने गीत / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं और वे किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?
2. कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना किससे की है और क्यों?
3. कविता में ‘काल-दीप’ एवं ‘परवाने’ का प्रयोग किस भाव को व्यक्त करने के लिए हुआ है?
4. “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति से कवि क्या प्रेरणा देते हैं?
5. ‘जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. कविता के आधार पर बताइए कि ‘सच्चा देश-प्रेम’ किसे कहा जा सकता है?
8. इस कविता को ‘आह्वान गीत’ क्यों कहा गया है? उदाहरण सहित समझाइए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
2. कवि ‘सनेही’ जी का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?
(क) प्रयागराज
(ख) कानपुर
(ग) उन्नाव
(घ) लखनऊ
3. कविता में हृदय की तुलना किससे की गई है?
(क) फूल से
(ख) पत्थर से
(ग) दीपक से
(घ) नदी से
4. ‘लासानी’ शब्द का अर्थ है—
(क) बेजोड़, अद्वितीय
(ख) साधारण
(ग) पुराना
(घ) मूल्यहीन
5. “हम हैं जिसके राजा-रानी” में ‘हम’ का तात्पर्य है—
(क) देश की सरकार
(ख) देश के राजा-महाराजा
(ग) देश के समस्त नागरिक
(घ) देश के सैनिक
6. ‘काल-दीप’ किसका प्रतीक है?
(क) ज्ञान का
(ख) समय/मृत्यु का
(ग) देश-प्रेम का
(घ) उत्साह का
7. ‘परवाने’ किसे कहा गया है?
(क) पक्षियों को
(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को
(ग) सैनिकों को
(घ) कवियों को
8. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति-वर्णन
(ख) देश-प्रेम
(ग) मित्रता
(घ) हास्य
9. कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?
(क) तोप और तलवार
(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम
(ग) धन और सत्ता
(घ) भाषण और नारे
10. ‘स्वदेश’ कविता को किस प्रकार की रचना कहा गया है?
(क) हास्य-व्यंग्य
(ख) आह्वान गीत
(ग) शोक-गीत
(घ) प्रेम-गीत
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।
कारण (R): पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, जैसे देश-प्रेम से रहित हृदय।
2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार मनुष्य को साहस छोड़ देना चाहिए।
कारण (R): जिसने साहस को छोड़ दिया, वह लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।
3. अभिकथन (A): देश-सेवा के लिए केवल तोप-तलवार ही आवश्यक हैं।
कारण (R): कवि कहते हैं “सब कुछ है अपने हाथों में”।
4. अभिकथन (A): भारत के ज्ञान एवं संस्कृति पर सारा संसार मुग्ध रहा है।
कारण (R): कवि कहते हैं — “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।”
5. अभिकथन (A): ‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है।
कारण (R): यह रचना पाठक को देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘स्वदेश’ कविता के कवि कौन हैं?
‘स्वदेश’ कविता के कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हैं, जो राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘स्वदेश’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव सच्चा देश-प्रेम है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।
“वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति का क्या आशय है?
इसका आशय है कि देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित हृदय कठोर एवं भावशून्य होता है, अतः वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।
कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?
पुस्तक का रूपकात्मक अभ्यास देश-सेवा के अलग क्षेत्रों में साहस, परिश्रम, ज्ञान और इच्छाशक्ति को उपयोगी साधन मानता है; सैनिक के वास्तविक साधन और अन्य पेशों के रूपकात्मक साधन अलग हैं।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
