कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 1 – स्वदेश (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 1 ‘स्वदेश’ (कवि – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (काव्य) अध्याय: 1 कवि: गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के उन प्रमुख कवियों में से एक हैं जिन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना आरंभ किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ था। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें ‘सनेही’ के अतिरिक्त ‘त्रिशूल’ उपनाम भी रखना पड़ा। राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के साथ-साथ उन्होंने किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी प्रभावकारी रचनाएँ लिखीं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र तथा कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में से हैं।

कविता (मूल पाठ)

‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करता है। प्रत्येक पद के अंत में टेक “वह हृदय नहीं है पत्थर है, / जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥” दोहराई गई है।

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं॥
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।

जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥


जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥

जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥

उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।

है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥


— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

भावार्थ

पहला पद: कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान कठोर एवं संवेदनहीन है। जो व्यक्ति अपने भीतर जीवंत जोश एवं उत्साह नहीं जगा पाता, उसके जीवन का कोई सार (महत्त्व) नहीं रहता। जो संसार के साथ कदम मिलाकर नहीं चल सकता, संसार भी उसका साथ नहीं देता; और जो साहस को छोड़ देता है, वह जीवन के किसी भी लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।

दूसरा पद: जिस व्यक्ति से अपनी जाति अर्थात् समाज एवं देश का उद्धार (भला) नहीं हुआ, उसका अपना भी उद्धार नहीं हो सकता। जो हृदय कोमल भावों से भरा हुआ नहीं है तथा जिसमें प्रेम एवं संवेदना की रस-धारा नहीं बहती, वह भी पत्थर के समान निर्जीव है। इस प्रकार देश-प्रेम के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा एवं निरर्थक है।

तीसरा पद: कवि मातृभूमि की महिमा बताते हैं – यही वह भूमि है जिसकी मिट्टी में हम जन्मे, पले-बढ़े और जिससे हमें अन्न-जल (दाना-पानी) मिला। इसी देश में हमारे माता-पिता, भाई-बंधु एवं सगे-संबंधी हैं और हम ही इसके राजा-रानी अर्थात् स्वामी हैं। इस देश ने ज्ञान एवं संस्कृति के अनमोल खजाने (अद्वितीय नवरत्न) खोले हैं, जिन पर बड़े-बड़े ज्ञानी भी मुग्ध होते हैं और सारी दुनिया दीवानी रहती है।

चौथा पद: ऐसी महान मातृभूमि के प्रति जिसका हृदय नहीं पसीजता (द्रवित नहीं होता), वह व्यक्ति धरती पर एक भार के समान है। मृत्यु तो निश्चित ही है — हर किसी को एक दिन इस संसार से जाना है; काल का दीपक निरंतर जल रहा है और परवानों (मनुष्यों) को उस पर जल मरना ही है। फिर क्यों न इस सीमित जीवन को देश के काम आने दें? सब कुछ हमारे ही हाथों में है — देश-सेवा के लिए तोप-तलवार की आवश्यकता नहीं, हमारा साहस, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही हमारे सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं। इसलिए कवि अंत में फिर दोहराते हैं कि देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
हृदयदिल, मन
स्वदेशअपना देश, मातृभूमि
जोशउत्साह, उमंग
सारतत्त्व, महत्त्व
संसार-संगसंसार के साथ (कदम मिलाकर)
साहसहिम्मत, निडरता
पार(लक्ष्य का) किनारा, अंत
जाति-उद्धारसमाज/देश का कल्याण
उद्धारमुक्ति, भला होना
रस-धारप्रेम/भाव की धारा
दाना-पानीअन्न-जल, भरण-पोषण
बंधुभाई, सगा-संबंधी
लासानीबेजोड़, अद्वितीय
नव रत्ननौ अनमोल रत्न; यहाँ अमूल्य निधियाँ
ज्ञानीविद्वान, बुद्धिमान
दीवानीमोहित, मुग्ध
पसीजनाद्रवित होना, दया से भर जाना
भूपृथ्वी, धरती
निस्संशयसंदेह-रहित, निश्चित रूप से
काल-दीपसमय/मृत्यु रूपी दीपक
परवानादीपक पर जल मरने वाला पतंगा; यहाँ देशभक्त मनुष्य
तोप / तलवारयुद्ध के अस्त्र-शस्त्र

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—

• सामाजिकता से

• संवेदनहीनता से

• कठोरता से

• नैतिकता से

उत्तर★ संवेदनहीनता से तथा ★ कठोरता से।हृदय के ‘पत्थर’ होने का अर्थ है उसका भावशून्य (संवेदनहीन) एवं कठोर हो जाना – ऐसा हृदय जिसमें देश-प्रेम जैसी कोमल भावना नहीं बचती।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

• देश की प्रगति

• देश के प्रति प्रेम

• देश की सुरक्षा

• देश की स्वतंत्रता

उत्तर★ देश के प्रति प्रेम।पूरी कविता का केंद्रीय भाव स्वदेश-प्रेम (देश के प्रति प्रेम) ही है; कवि बार-बार कहते हैं कि देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए

• देश की शासन व्यवस्था के लिए

• देश के समस्त नागरिकों के लिए

• देश के सभी प्राणियों के लिए

उत्तर★ देश के समस्त नागरिकों के लिए।‘हम’ से तात्पर्य देश के सभी नागरिकों से है – जो इस मातृभूमि के स्वामी (राजा-रानी) हैं और जिन पर देश की देखभाल एवं उन्नति का दायित्व है।

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

• जिसमें साहस की कमी है

• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है

• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है

• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है

उत्तर★ जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है (तथा ★ जिसमें स्नेह का भाव नहीं है)।कविता की मुख्य पंक्ति के अनुसार वह हृदय पत्थर के समान है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं; साथ ही जो भावों एवं स्नेह की रस-धारा से रहित है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तरयह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कविता के संदर्भ एवं शब्दों के भाव को आधार बनाया – जैसे ‘पत्थर’ शब्द कठोरता तथा संवेदनहीनता दोनों का सूचक है, इसलिए दोनों उत्तर उपयुक्त लगे।भिन्न उत्तर इसलिए संभव हैं क्योंकि एक ही पंक्ति को अलग-अलग दृष्टि से समझा जा सकता है; परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (सही भाव/संदर्भ)
1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
सही मिलान1 → (जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता)2 → (जो स्वयं के साथ दूसरों को भी प्रेरित-उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है)3 → (जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है)4 → (जैसे युद्ध में तोप-तलवार आवश्यक हैं, वैसे ही प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति आवश्यक है)

पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में कवि मृत्यु की अनिवार्यता बताते हैं – यह निश्चित एवं संदेह-रहित सत्य है कि हर प्राण को एक दिन इस संसार से जाना है।‘काल-दीप’ समय/मृत्यु रूपी दीपक है जो निरंतर जलता रहता है और ‘परवाने’ (मनुष्य) को उस पर जल मरना ही है। तात्पर्य यह कि जब मृत्यु तय है, तो जीवन को देश एवं समाज के काम आने दें, यही सार्थक मृत्यु है।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

अर्थ/विचारकवि कहते हैं कि देश-सेवा एवं उन्नति का सारा सामर्थ्य हमारे अपने हाथों में है; इसके लिए तोप-तलवार जैसे हथियारों की आवश्यकता नहीं।हमारा साहस, परिश्रम, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही हमारे सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं। जिस हृदय में यह देश-प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

अर्थ/विचारजो हृदय कोमल भावों (प्रेम, करुणा, संवेदना) से भरा नहीं है और जिसमें भावनाओं की रस-धारा नहीं बहती, वह वास्तव में हृदय नहीं बल्कि पत्थर है।भावशून्यता एवं देश-प्रेम का अभाव मनुष्य को संवेदनहीन बना देता है – सच्चा हृदय वही है जो भावों एवं देश-प्रेम से ओतप्रोत हो।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?

उत्तरयहाँ ‘राजा-रानी’ देश के समस्त नागरिकों को कहा गया है।कवि का आशय यह है कि यह देश किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हम सब नागरिकों का है; हम ही इसके स्वामी हैं। इसलिए इसकी रक्षा, सेवा एवं उन्नति का दायित्व भी हमारा अपना है।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?

उत्तर‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है समाज एवं समय के साथ कदम मिलाकर चलना, बदलते परिवेश को अपनाना तथा सबके साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना।जो व्यक्ति समाज से कटकर अकेला, स्वार्थी या रुका हुआ रहता है, वह सबसे पिछड़ जाता है; ऐसे व्यक्ति को न तो समाज अपनाता है और न ही वह संसार के सुख-सहयोग का भागीदार बन पाता है – इसी कारण संसार उसका नहीं हो पाता।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तरइन पंक्तियों का अर्थ है कि जिस व्यक्ति का हृदय अपनी इतनी महान मातृभूमि के प्रति भी नहीं पसीजता (द्रवित नहीं होता), वह धरती पर केवल एक बोझ (भार) के समान है।अर्थात् देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित व्यक्ति का जीवन व्यर्थ है; वह न अपने काम आता है, न देश के – इसलिए वह पृथ्वी पर भार ही है।

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।

उत्तरदेश-प्रेम का अर्थ है अपने देश, उसकी मिट्टी, भाषा, संस्कृति एवं नागरिकों के प्रति सच्चा लगाव एवं समर्पण।देश-प्रेम केवल युद्धभूमि में लड़ने तक सीमित नहीं; ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना, स्वच्छता रखना, संसाधनों का संरक्षण करना, नियमों का पालन करना, जरूरतमंदों की सहायता करना तथा देश की उन्नति में योगदान देना – ये सब देश-प्रेम के ही रूप हैं।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।

उत्तरओजपूर्ण भाषा: कविता की भाषा सरल, ओजमयी एवं प्रेरक है, जो पाठक के मन में जोश भर देती है।लयात्मकता एवं तुक: ‘पत्थर-प्यार’, ‘सार-संसार’, ‘पानी-रानी’ जैसे तुकांत शब्दों से कविता में मधुर लय एवं गेयता आ गई है।टेक की आवृत्ति: “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” टेक के रूप में बार-बार दोहराई गई है, जिससे मुख्य भाव प्रभावशाली बनता है। साथ ही प्रतीक (काल-दीप, परवाना), अलंकार एवं प्रश्न-शैली का सुंदर प्रयोग हुआ है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?

उत्तरइस पंक्ति में भौतिक धन-दौलत के खजाने नहीं, बल्कि भारत के ज्ञान, विद्या, संस्कृति, कला, साहित्य, अध्यात्म एवं सभ्यता के अनमोल खजानों की बात की गई है।भारत की इसी ज्ञान-संपदा एवं प्राकृतिक समृद्धि पर बड़े-बड़े ज्ञानी मुग्ध रहे हैं और सारा संसार दीवाना रहा है।

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?

उत्तर‘उगे-बढ़े’ देश के नागरिकों अर्थात् ‘हम’ सबके लिए कहा गया है।इसका भाव यह है कि हम इसी देश की मिट्टी में जन्मे, पले और बड़े हुए हैं; जैसे पौधा अपनी भूमि में उगकर बढ़ता है, वैसे ही हमारा पालन-पोषण इसी मातृभूमि ने किया है – इसलिए इसके प्रति हमारा गहरा लगाव एवं कृतज्ञता स्वाभाविक है।

(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?

उत्तरपत्थर कठोर, भावशून्य एवं संवेदना-रहित होता है; उसमें न कोमलता होती है, न कोई द्रवित होने का भाव।कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना पत्थर से इसलिए की है, ताकि यह स्पष्ट हो कि जिस हृदय में देश-प्रेम एवं भावनाएँ नहीं, वह भी पत्थर की भाँति कठोर एवं निर्जीव है।

(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत— पत्थर— जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।…)

उत्तर (नमूना)पत्थर: “कभी मैं पहाड़ का अंग था, फिर टूटकर नदी में आ गिरा। वर्षों तक नदी की धारा ने मुझे रगड़-रगड़कर चिकना एवं गोल बना दिया। मैं चुपचाप सब सहता रहा, इसलिए कठोर हो गया।”मैं: “हे पत्थर! तुम कठोर भले हो, पर तुमने सेतु, मंदिर एवं भवन बनकर मनुष्य की सेवा की है। काश! हर कठोर हृदय भी तुम्हारी तरह किसी के काम आ सके। मनुष्य को तुमसे धैर्य एवं सहनशीलता सीखनी चाहिए, पर हृदय की कोमलता एवं देश-प्रेम कभी नहीं छोड़ना चाहिए।”

(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?

उत्तरदेश के अनेक संसाधनों एवं धरोहरों को संरक्षण की आवश्यकता है – जल, वन, वन्य-जीव, नदियाँ, मिट्टी एवं वायु जैसे प्राकृतिक संसाधन; ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर एवं स्मारक; तथा हमारी भाषा, कला एवं संस्कृति।इनका संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि ये सीमित एवं अमूल्य हैं; इनके नष्ट होने पर पर्यावरण असंतुलित होगा, आने वाली पीढ़ियाँ इनसे वंचित रह जाएँगी और देश की पहचान एवं समृद्धि को क्षति पहुँचेगी।

कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों (दाना-पानी, राजा-रानी) की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?

उत्तरतुक मिलाने से कविता में मधुर लय, संगीतात्मकता एवं प्रवाह उत्पन्न हो जाता है।समान ध्वनि वाले शब्द (पानी-रानी, पत्थर-प्यार) कविता को गुनगुनाने एवं याद रखने में आसान बना देते हैं तथा उसके भाव को अधिक प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी बनाते हैं।

(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?

उत्तरकविता को प्रभावशाली बनाने के लिए सरल एवं ओजपूर्ण भाषा, टेक (पंक्ति की आवृत्ति), तुकांत शब्द, प्रश्न-शैली (‘क्या तोप नहीं तलवार नहीं’) एवं प्रतीकों (काल-दीप, परवाना, पत्थर) का प्रयोग किया गया है।इन प्रयोगों से कविता में लय, भाव-तीव्रता एवं प्रेरणा शक्ति बढ़ी है और यह एक सजीव आह्वान गीत बन गई है।

आपकी बात

(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे? (ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में वे ही कार्य रखे जाएँगे जो देश, समाज या पर्यावरण के हित में हों, जैसे – पौधों को पानी देना, हैंडपंप से जल भरने में मदद करना, सैनिक का सम्मान करना, कूड़ा साफ़ करना, खेत जोतना, बुज़ुर्ग को सड़क पार कराना, राष्ट्रगान/ध्वज को सम्मान देना, बैंक में अनुशासित ढंग से पंक्ति में खड़े रहना तथा फूल न तोड़ना।तर्क: ये सभी कार्य स्वच्छता, अनुशासन, संसाधन-संरक्षण, सहयोग एवं देश के सम्मान को दर्शाते हैं – और यही सच्चे देश-प्रेम के व्यावहारिक रूप हैं।इनके विपरीत ट्रेन में कूड़ा फैलाना, स्मारक की दीवार पर लिखना, या फूल तोड़ना देश-प्रेम के विरुद्ध हैं, अतः उन पर सही का चिह्न नहीं लगाया जाएगा।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द लिखिए।

उत्तरमातृभूमि, देशभक्ति, राष्ट्र, स्वतंत्रता, तिरंगा, स्वाभिमान, देशवासी, स्वदेशी, राष्ट्रप्रेम, मातृभाषा आदि।

(ख) विराम चिह्नों को समझें (योजक चिह्न)

नीचे दी पंक्तियों में योजक चिह्न (-) के स्थान पर का, की, के, में में से उपयुक्त शब्द जोड़कर अर्थ स्पष्ट कीजिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)

योजक-चिह्न वाली पंक्तिउपयुक्त शब्द जोड़कर
जो चल न सका संसार-संगजो चल न सका संसार के संग
बहती जिसमें रस-धार नहींबहती जिसमें रस की धार नहीं
पाया जिसमें दाना-पानीपाया जिसमें दाना और पानी
हैं माता-पिता बंधु जिसमेंहैं माता और पिता बंधु जिसमें
हम हैं जिसके राजा-रानीहम हैं जिसके राजा और रानी
जिससे न जाति-उद्धार हुआजिससे न जाति का उद्धार हुआ

(योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।)

(ग) शब्द-मित्र / लयात्मकता

“है जान एक दिन जाने को”, “है काल-दीप जलता हरदम” – इन पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आने से कविता में लयात्मकता आ गई है। नीचे दी पंक्तियों में ‘है/हैं’ पहले करके पुनः लिखिए।

उत्तरमूल: “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, / जिस पर है दुनिया दीवानी॥”परिवर्तित (है/हैं पहले): “जिस पर हैं मरते ज्ञानी भी, / जिस पर है दुनिया दीवानी॥”अंतर: ‘है/हैं’ को पहले रखने से पंक्ति में लय बढ़ती है, पर कई बार शब्द-क्रम बदलने से स्वाभाविक प्रवाह कुछ बदल जाता है – इसी से सिद्ध होता है कि शब्दों का क्रम कविता के सौंदर्य को प्रभावित करता है।

(घ) समानार्थी शब्द

शब्दसमानार्थी शब्द
भूधरा, पृथ्वी
दीपदीपक, प्रदीप
हृदयदिल, जी
तलवारकृपाण, असि
दुनियासंसार, जग
पत्थरपाहन, पाषाण

कविता का शीर्षक

इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। यदि आपको कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर (नमूना)मैं “जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” अथवा “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति को शीर्षक बनाऊँगा।पहली पंक्ति पूरी कविता के केंद्रीय भाव – देश-प्रेम – को सीधे व्यक्त करती है; जबकि दूसरी पंक्ति यह प्रेरणा देती है कि देश की उन्नति का सामर्थ्य हमारे ही हाथों में है। दोनों ही पंक्तियाँ कविता के मूल संदेश को संक्षेप में प्रकट करती हैं।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” – बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश-प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?

उत्तरविद्यार्थी: पुस्तक, कलम, ज्ञान एवं अनुशासन।अध्यापक: शिक्षा, ज्ञान एवं अच्छे संस्कार।कृषक: हल, बीज, परिश्रम एवं खेत।चिकित्सक: औषधि, सेवा-भाव एवं चिकित्सा-ज्ञान।वैज्ञानिक: प्रयोग, शोध एवं नवीन आविष्कार।श्रमिक: मेहनत, औज़ार एवं लगन।पत्रकार: कलम, सत्य एवं निर्भीक लेखनी।

तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास

अपने दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न और किन से उदास होगा।

उत्तरप्रसन्न होगा: समय पर अध्ययन करने, सच बोलने, स्वच्छता रखने, बड़ों का आदर करने, पौधे लगाने तथा जरूरतमंद की सहायता करने से।उदास होगा: झूठ बोलने, गंदगी फैलाने, पानी-बिजली बर्बाद करने, झगड़ा करने या किसी का अपमान करने से। ये कार्य देश के सम्मान एवं मूल्यों के विरुद्ध हैं।

अपनी भाषा अपने गीत / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)अपनी भाषा अपने गीत: यह कक्षा में मिलकर देश-प्रेम के गीत संकलित कर उनकी संगीतात्मक प्रस्तुति देने की रचनात्मक गतिविधि है।झरोखे से / साझी समझ: इसमें सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ पढ़कर तुलना करनी है कि स्वतंत्रता-आंदोलन के समय लिखी दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार व्यक्त हुआ है। ‘स्वदेश’ में देश-प्रेम को हृदय की भावना एवं कर्तव्य के रूप में, तथा ‘खादी गीत’ में स्वदेशी वस्त्र (खादी) के माध्यम से आत्मसम्मान एवं अपनेपन के रूप में दर्शाया गया है।खोजबीन के लिए: दी गई इंटरनेट कड़ियों से ‘सारे जहाँ से अच्छा’, ‘दीवानों की हस्ती’ एवं ‘झाँसी की रानी’ जैसी देश-प्रेम की रचनाएँ खोजकर पढ़ी जा सकती हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं और वे किस प्रकार के कवि माने जाते हैं?

उत्तर‘स्वदेश’ कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ हैं। उन्होंने ब्रजभाषा से आरंभ कर खड़ी बोली में अपना स्थान बनाया और राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर एवं सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रभावकारी कविताएँ लिखीं।

2. कवि ने देश-प्रेम से रहित हृदय की तुलना किससे की है और क्यों?

उत्तरकवि ने ऐसे हृदय की तुलना पत्थर से की है। क्योंकि पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, उसी प्रकार जिस हृदय में देश-प्रेम एवं संवेदना नहीं होती, वह भी कठोर एवं निर्जीव होता है।

3. कविता में ‘काल-दीप’ एवं ‘परवाने’ का प्रयोग किस भाव को व्यक्त करने के लिए हुआ है?

उत्तर‘काल-दीप’ मृत्यु/समय का तथा ‘परवाने’ मनुष्यों के प्रतीक हैं। इनके माध्यम से कवि बताते हैं कि मृत्यु अवश्यंभावी है, इसलिए मनुष्य को अपना जीवन देश के काम में लगा देना चाहिए।

4. “सब कुछ है अपने हाथों में” पंक्ति से कवि क्या प्रेरणा देते हैं?

उत्तरकवि प्रेरणा देते हैं कि देश की उन्नति एवं सेवा का सारा सामर्थ्य हमारे ही हाथों में है। इसके लिए तोप-तलवार की आवश्यकता नहीं; हमारा साहस, परिश्रम एवं देश-प्रेम ही सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं।

5. ‘जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइसका आशय है कि जो व्यक्ति अपने समाज एवं देश का भला नहीं करता, उसका अपना जीवन भी सार्थक एवं सफल नहीं होता। दूसरों के कल्याण में ही व्यक्ति का सच्चा उद्धार (कल्याण) निहित है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘स्वदेश’ कविता का मूल भाव सच्चा देश-प्रेम जगाना है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है। जो व्यक्ति जोश, साहस एवं भावना से रहित है तथा समाज के साथ मिलकर नहीं चलता, उसका जीवन निरर्थक है।कवि मातृभूमि की महिमा बताते हुए कहते हैं कि यही भूमि हमें जन्म, पालन एवं अनमोल ज्ञान-संपदा देती है। मृत्यु निश्चित है, इसलिए मनुष्य को अपना जीवन देश के काम में लगाना चाहिए। देश-सेवा के लिए तोप-तलवार नहीं, बल्कि साहस, परिश्रम एवं देश-प्रेम ही सच्चे अस्त्र हैं। इस प्रकार यह कविता हमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण की प्रेरणा देती है।

7. कविता के आधार पर बताइए कि ‘सच्चा देश-प्रेम’ किसे कहा जा सकता है?

उत्तरकविता के अनुसार सच्चा देश-प्रेम केवल देश के लिए युद्ध करना या नारे लगाना नहीं है, बल्कि हृदय में देश के प्रति गहरी भावना एवं समर्पण रखना है। सच्चा देशप्रेमी वह है जो जोश एवं साहस से भरा हो, समाज के साथ मिलकर चले तथा दूसरों के कल्याण में अपना भला समझे।वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है, देश की मिट्टी, संस्कृति एवं संसाधनों का सम्मान एवं संरक्षण करता है तथा अपने श्रम, ज्ञान एवं चरित्र से देश की उन्नति में योगदान देता है। ऐसा व्यक्ति, चाहे वह विद्यार्थी हो, किसान हो या वैज्ञानिक, अपने-अपने क्षेत्र में देश की सेवा करके सच्चा देश-प्रेम प्रकट करता है।

8. इस कविता को ‘आह्वान गीत’ क्यों कहा गया है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरइस कविता को ‘आह्वान गीत’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यह पाठक को देश-प्रेम एवं कर्म के लिए ललकारती एवं प्रेरित करती है। आह्वान गीत वह रचना है जो लोगों को किसी उच्च उद्देश्य के लिए जगाती एवं उत्साहित करती है।“जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं” तथा “सब कुछ है अपने हाथों में” जैसी पंक्तियाँ मनुष्य को साहस एवं आत्मविश्वास से कर्म करने को प्रेरित करती हैं। ओजपूर्ण भाषा, टेक की आवृत्ति एवं प्रश्न-शैली इसे और प्रभावशाली बनाती हैं। इस प्रकार यह कविता एक सजीव आह्वान गीत है जो हर नागरिक के मन में देश-प्रेम की ज्योति जगाती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘स्वदेश’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

(ग) सोहनलाल द्विवेदी

(घ) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर(ख) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’।

2. कवि ‘सनेही’ जी का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?

(क) प्रयागराज

(ख) कानपुर

(ग) उन्नाव

(घ) लखनऊ

उत्तर(ग) उन्नाव।

3. कविता में हृदय की तुलना किससे की गई है?

(क) फूल से

(ख) पत्थर से

(ग) दीपक से

(घ) नदी से

उत्तर(ख) पत्थर से।

4. ‘लासानी’ शब्द का अर्थ है—

(क) बेजोड़, अद्वितीय

(ख) साधारण

(ग) पुराना

(घ) मूल्यहीन

उत्तर(क) बेजोड़, अद्वितीय।

5. “हम हैं जिसके राजा-रानी” में ‘हम’ का तात्पर्य है—

(क) देश की सरकार

(ख) देश के राजा-महाराजा

(ग) देश के समस्त नागरिक

(घ) देश के सैनिक

उत्तर(ग) देश के समस्त नागरिक।

6. ‘काल-दीप’ किसका प्रतीक है?

(क) ज्ञान का

(ख) समय/मृत्यु का

(ग) देश-प्रेम का

(घ) उत्साह का

उत्तर(ख) समय/मृत्यु का।

7. ‘परवाने’ किसे कहा गया है?

(क) पक्षियों को

(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को

(ग) सैनिकों को

(घ) कवियों को

उत्तर(ख) दीपक पर जल मरने वाले पतंगों/मनुष्यों को।

8. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?

(क) प्रकृति-वर्णन

(ख) देश-प्रेम

(ग) मित्रता

(घ) हास्य

उत्तर(ख) देश-प्रेम।

9. कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?

(क) तोप और तलवार

(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम

(ग) धन और सत्ता

(घ) भाषण और नारे

उत्तर(ख) साहस, परिश्रम और देश-प्रेम।

10. ‘स्वदेश’ कविता को किस प्रकार की रचना कहा गया है?

(क) हास्य-व्यंग्य

(ख) आह्वान गीत

(ग) शोक-गीत

(घ) प्रेम-गीत

उत्तर(ख) आह्वान गीत।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(क), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): देश-प्रेम से रहित हृदय पत्थर के समान है।

कारण (R): पत्थर कठोर एवं भावशून्य होता है, जैसे देश-प्रेम से रहित हृदय।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार मनुष्य को साहस छोड़ देना चाहिए।

कारण (R): जिसने साहस को छोड़ दिया, वह लक्ष्य रूपी पार तक नहीं पहुँच सकता।

उत्तर(घ) A गलत है (कवि साहस छोड़ने को नहीं, बल्कि साहस बनाए रखने को कहते हैं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): देश-सेवा के लिए केवल तोप-तलवार ही आवश्यक हैं।

कारण (R): कवि कहते हैं “सब कुछ है अपने हाथों में”।

उत्तर(घ) A गलत है (देश-सेवा के लिए साहस, परिश्रम एवं देश-प्रेम पर्याप्त हैं, तोप-तलवार आवश्यक नहीं), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): भारत के ज्ञान एवं संस्कृति पर सारा संसार मुग्ध रहा है।

कारण (R): कवि कहते हैं — “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।”

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘स्वदेश’ एक आह्वान गीत है।

कारण (R): यह रचना पाठक को देश-प्रेम के लिए प्रेरित एवं उत्साहित करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘स्वदेश’ कविता के कवि कौन हैं?

‘स्वदेश’ कविता के कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हैं, जो राष्ट्र-प्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

‘स्वदेश’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव सच्चा देश-प्रेम है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान कठोर एवं निर्जीव है।

“वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति का क्या आशय है?

इसका आशय है कि देश-प्रेम एवं संवेदना से रहित हृदय कठोर एवं भावशून्य होता है, अतः वह हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।

कविता के अनुसार देश-सेवा के सच्चे अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?

कवि के अनुसार देश-सेवा के लिए तोप-तलवार नहीं, बल्कि साहस, परिश्रम, इच्छाशक्ति एवं देश-प्रेम ही सच्चे अस्त्र-शस्त्र हैं।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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