कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 3 – एक आशीर्वाद (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 3 ‘एक आशीर्वाद’ (कवि – दुष्यंत कुमार) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी अभ्यास गतिविधियों के मौलिक उत्तर।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (काव्य) अध्याय: 3 कवि: दुष्यंत कुमार विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार (1933–1975) हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ था। बहुत कम समय में ही इन्होंने अपनी विविधतापूर्ण रचनाओं एवं जीवंत भाषा से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल संग्रह है, जिसने हिंदी ग़ज़ल को आम जन की पीड़ा और प्रतिरोध की आवाज़ बना दिया। इनका संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली के नाम से चार खंडों में प्रकाशित है। इनकी रचनाओं में आम आदमी की भावनाएँ, सामाजिक चेतना और स्वप्न-संकल्प की प्रेरणा सहज रूप से अभिव्यक्त हुई है।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता एक आशीर्वाद के रूप में है, जिसमें कवि बड़ों की ओर से बच्चे/युवा को बड़े सपने देखने तथा आत्मनिर्भर बनने का आशीर्वाद देते हैं।

जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें
हँसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उँगली जलाएँ
अपने पाँवों पर खड़े हों।
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों।
— दुष्यंत कुमार

भावार्थ

इस कविता में कवि एक स्नेहिल आशीर्वाद के रूप में अपनी कामना व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं – “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों”, अर्थात् ईश्वर करे तेरे सपने, तेरी आकांक्षाएँ और लक्ष्य ऊँचे एवं विशाल हों। कवि चाहते हैं कि ये सपने केवल कोरी कल्पना (भावना की गोद) में ही न रहें, बल्कि जल्दी ही धरती पर उतरकर, यथार्थ की भूमि पर अपने पाँवों से चलना सीखें – अर्थात् सपने व्यावहारिक प्रयासों में बदलें।

कवि का आशीर्वाद है कि यह नई पीढ़ी चाँद-तारों जैसी कठिन और दूर दिखने वाली (अप्राप्य) सच्चाइयों को पाने के लिए हठ करे, रूठे और मचले – अर्थात् असंभव-से लगने वाले बड़े लक्ष्यों के लिए भी दृढ़ता और लगन से प्रयास करती रहे। वे चाहते हैं कि यह पीढ़ी हँसती-मुसकराती और गाती रहे, अर्थात् कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह और मनोबल बनाए रखे।

“हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ, उँगली जलाएँ” पंक्तियों में कवि कहते हैं कि ज्ञान एवं अनुभव के हर प्रकाश के प्रति इस पीढ़ी के मन में ललक हो; वह नई-नई चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस रखे, भले ही उसमें कभी कष्ट (उँगली जलना) क्यों न हो। अंततः कवि का सबसे बड़ा आशीर्वाद यही है कि नई पीढ़ी ‘अपने पाँवों पर खड़ी हो’ – अर्थात् आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और स्वतंत्र बने। “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” की पुनरावृत्ति इस आशीर्वाद को और प्रभावी एवं हृदयस्पर्शी बना देती है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
स्वप्नसपना, आकांक्षा, अभिलाषा
भावनामन का भाव, कल्पना
गोद(यहाँ) आश्रय, घेरा
उतरकरनीचे आकर, बाहर निकलकर
पृथ्वी / धराधरती, यथार्थ की भूमि
अप्राप्यजो आसानी से प्राप्त न हो सके, दुर्लभ
सच्चाइयाँसत्य, वास्तविकताएँ
रूठनानाराज़ होना
मचलनाहठ करना, ज़िद करना
मुसकरानाहलके से हँसना
ललचानापाने की तीव्र इच्छा होना, ललक होना
दीया / दीपकजलता हुआ दीप (यहाँ ज्ञान/प्रकाश का प्रतीक)
रोशनी / आलोकप्रकाश, उजाला
उँगली जलाना(यहाँ) चुनौती स्वीकार करना, कष्ट सहना
अपने पाँवों पर खड़े होनाआत्मनिर्भर / स्वावलंबी होना
आशीर्वादबड़ों द्वारा दी गई शुभकामना/मंगल-कामना
नक्षत्र / तारकतारा
निशाकर / शशि / मयंकचंद्रमा
वसुधा / अवनिपृथ्वी

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ★ ) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. कविता में किसे संबोधित किया गया है? • युवा वर्ग को • नागरिकों को • बच्चों को • श्रमिकों को

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर – युवा वर्ग को तथा बच्चों को (★)।कविता एक आशीर्वाद के रूप में है, जो प्रायः बड़ों द्वारा नई पीढ़ी – अर्थात् बच्चों और युवाओं – को बड़े सपने देखने और आत्मनिर्भर बनने के लिए दिया जाता है। ‘तेरे स्वप्न बड़े हों’ जैसी पंक्तियाँ नई पीढ़ी को ही संबोधित हैं।

2. “तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है? • कल्पना की उड़ान भरना • आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना • बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना • बड़े लक्ष्य निर्धारित करना

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर – आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना तथा बड़े लक्ष्य निर्धारित करना (★)।यहाँ ‘स्वप्न’ का अर्थ नींद में देखे गए सपने नहीं, बल्कि मन की ऊँची आकांक्षाएँ, रुचियाँ और जीवन के बड़े लक्ष्य हैं, जिन्हें कवि बड़ा (विशाल) देखने का आशीर्वाद देते हैं।

3. “उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है— • चुनौतियों को स्वीकार करना • प्रकाश का प्रसार करना • अग्नि के ताप का अनुभव करना • कष्टों से नहीं घबराना

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर – चुनौतियों को स्वीकार करना तथा कष्टों से नहीं घबराना (★)।दीये की रोशनी पाने के लिए उँगली जलाना इस बात का प्रतीक है कि लक्ष्य पाने के लिए कठिनाइयों एवं चुनौतियों का सामना करने तथा कष्ट सहने से नहीं घबराना चाहिए।

4. “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है? • अपने पैरों पर खड़े होना • सफलता प्राप्त करना • कठिनाइयों का सामना करना • आत्मनिर्भर होना

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर – आत्मनिर्भर होना (★)।‘अपने पाँवों पर खड़े होना’ मुहावरा है, जिसका अर्थ है स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनना – दूसरों पर निर्भर न रहकर अपने बल पर जीवन में आगे बढ़ना। इसमें सफलता पाना और कठिनाइयों का सामना करना भी अंतर्निहित है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (संकेत)यह समूह-चर्चा की गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने चुने हुए उत्तर के पीछे का कारण बताना चाहिए – जैसे ‘स्वप्न’ को मैंने ‘बड़े लक्ष्य’ इसलिए माना क्योंकि कवि बार-बार सपनों के ‘बड़े’ होने की बात करते हैं।चर्चा से पता चलता है कि एक ही पंक्ति के एक से अधिक उपयुक्त अर्थ हो सकते हैं, और दूसरों के तर्क सुनकर हमारी अपनी समझ और गहरी होती है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए।

क्रमस्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भाव/संदर्भ)सही मिलान
1.भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें(1) विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना
(2) सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें; कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें
(3) भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना
(4) असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना
(3)
2.हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ (1)
3.चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें (4)
4.…हँसें/मुसकराएँ/गाएँ (2)
सही मिलान1 → (3);   2 → (1);   3 → (4);   4 → (2)।‘पृथ्वी पर चलना’ का अर्थ है यथार्थ का सामना; ‘दीये की रोशनी देखकर ललचाना’ का अर्थ ज्ञान की ललक; ‘रूठना-मचलना’ अर्थात् कठिन लक्ष्यों के लिए हठ; और ‘हँसें-मुसकराएँ-गाएँ’ का अर्थ है सपनों को आनंद में बदलकर मनोबल बनाए रखना।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—

(क) “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों”

उत्तरइस पंक्ति में कवि नई पीढ़ी को आशीर्वाद देते हैं कि उसके सपने, आकांक्षाएँ और लक्ष्य ऊँचे एवं विशाल हों। ‘बड़े सपने’ देखने वाला व्यक्ति ही जीवन में बड़ी सफलता और ऊँचाइयों तक पहुँचता है।

(ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”

उत्तरइसका अर्थ है कि सपने केवल कल्पना तक सीमित न रहें, बल्कि शीघ्र ही यथार्थ की भूमि पर उतरकर व्यावहारिक प्रयास का रूप लें। केवल सपना देखना पर्याप्त नहीं, उसे साकार करने के लिए धरातल पर कार्य करना भी आवश्यक है।

(ग) “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें”

उत्तरचाँद-तारे दूर एवं कठिनता से प्राप्य लक्ष्यों के प्रतीक हैं। इस पंक्ति का भाव है कि असंभव-से लगने वाले बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए भी मन में हठ, ज़िद और दृढ़ संकल्प होना चाहिए, ताकि व्यक्ति बार-बार प्रयास करता रहे और हार न माने।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?

उत्तरबड़े सपने वे होते हैं जो केवल अपने स्वार्थ तक सीमित न रहकर समाज और देश के लिए भी उपयोगी हों – जैसे एक अच्छा डॉक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षक या समाजसेवी बनना, गरीबों की सहायता करना, या देश को आगे ले जाने वाली कोई खोज करना।ऐसे सपने इसलिए बड़े कहलाते हैं क्योंकि इन्हें पूरा करने के लिए कठोर परिश्रम, लगन और त्याग की आवश्यकता होती है, और इनसे केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि अनेक लोगों का भला होता है।

(ख) “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/उँगली जलाएँ” पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों? (संकेत— योजना, प्रयास आदि)

उत्तरकेवल ललक (इच्छा) से लक्ष्य पूरा नहीं होता; उसके साथ एक स्पष्ट योजना, निरंतर परिश्रम एवं प्रयास, धैर्य, आत्मविश्वास और कठिनाइयों का सामना करने का साहस भी आवश्यक है।इनके बिना इच्छा केवल कल्पना बनकर रह जाती है। योजना से दिशा मिलती है, प्रयास से लक्ष्य निकट आता है, और धैर्य से असफलता के बाद भी आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।

(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?

उत्तर (संकेत)यदि मेरा सपना मेरा मित्र होता, तो मैं उससे कहता – “मित्र, तुम्हें पाने के लिए मैं हर संभव प्रयास करूँगा। तुम मुझे कठिन समय में भी प्रेरित करते रहना।” मैं उससे पूछता कि उसे पाने के लिए मुझे और किन गुणों एवं तैयारियों की आवश्यकता है।(यह कल्पना-आधारित प्रश्न है; विद्यार्थी अपने सपने के अनुसार अपनी मौलिक बातचीत लिख सकते हैं।)

(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?

उत्तर (संकेत)मैं अपने छोटे भाई-बहनों एवं मित्रों को यह आशीर्वाद देना चाहूँगा कि वे सदा सच्चे, मेहनती और आत्मनिर्भर बनें तथा उनके सभी अच्छे सपने पूरे हों।ऐसा इसलिए, क्योंकि सच्चाई, परिश्रम और आत्मनिर्भरता ही जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं। (विद्यार्थी अपने अनुसार उत्तर दे सकते हैं।)

कविता की रचना & सृजन

कविता की रचना – इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।

उत्तरमानवीकरण: सपने को हँसते, मुसकराते, गाते, रूठते और मचलते हुए मनुष्य की तरह दिखाया गया है।प्रतीकात्मकता: ‘चाँद-तारे’ कठिन लक्ष्यों के, और ‘दीये की रोशनी’ ज्ञान/प्रकाश के प्रतीक हैं।सरल एवं प्रवाहमयी भाषा: कविता की भाषा सहज, बोलचाल की और भावपूर्ण है।पुनरावृत्ति: “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति को दोहराकर आशीर्वाद के भाव को बल दिया गया है।मुक्त छंद: कविता बँधे हुए छंद में न होकर भाव-प्रधान मुक्त शैली में लिखी गई है।

सृजन – इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे— चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुसकराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए।

उत्तर (उदाहरण)उदाहरण के लिए ‘बादल’ को केंद्र में रखकर:बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
बूँद-बूँद बन धरती को सींचते देखा है।
(यह केवल एक नमूना है; विद्यार्थी ‘नदी’, ‘सूरज’, ‘पेड़’ आदि किसी संज्ञा को लेकर अपनी मौलिक कविता रच सकते हैं।)

कविता का शीर्षक & भाषा की बात

कविता का शीर्षक – इस कविता का शीर्षक ‘एक आशीर्वाद’ है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों?

उत्तरमैं इस कविता का शीर्षक “तेरे स्वप्न बड़े हों” रखना चाहूँगा।ऐसा इसलिए, क्योंकि यही पंक्ति कविता के आरंभ और अंत में दोहराई गई है तथा पूरी कविता का केंद्रीय भाव – बड़े सपने देखने एवं उन्हें साकार करने का आशीर्वाद – इसी पंक्ति में स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है। (विद्यार्थी ‘स्वप्न’ जैसा शब्द भी उपयुक्त तर्क के साथ चुन सकते हैं।)

भाषा की बात (क) – नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए।

उत्तर‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द: सपना, ख़्वाब, कल्पना, अरमान, आकांक्षा, अभिलाषा, इच्छा, लक्ष्य, उम्मीद, आशा।

भाषा की बात (ख) – कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ देते हों।

उत्तर(जिन शब्दों का अर्थ दिए गए शब्द से भिन्न है, उन्हें घेरना है –) पृथ्वी – धरा, वसुधा, अवनि (समानार्थी); घेरें → सुता (अर्थ ‘पुत्री’ – भिन्न)। चाँद – शशि, निशाकर, मयंक (समानार्थी); घेरें → मधुकर (अर्थ ‘भौंरा’ – भिन्न)। तारे – नक्षत्र, तारक, उडुगण (समानार्थी); घेरें → सोम (अर्थ ‘चंद्रमा’ – भिन्न)। रोशनी – प्रकाश, उजाला, आलोक (समानार्थी); घेरें → लालिमा (अर्थ ‘लाली’ – भिन्न)। स्वप्न – सपना, इच्छा, कल्पना (समानार्थी/समीप); घेरें → यथार्थ (अर्थ ‘वास्तविकता’ – विपरीत/भिन्न)। दीया – ज्योति, दीपक, प्रदीप (समानार्थी); घेरें → दीन (अर्थ ‘गरीब/विनम्र’ – भिन्न)।

आना-जाना – ‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।

उत्तर (उदाहरण वाक्य)आना: 1. मेरे मित्र कल मेरे घर आएँगे। 2. परीक्षा का परिणाम आ गया है। 3. इस फूल से अच्छी सुगंध आ रही है।जाना: 1. हम सब रविवार को पार्क जाएँगे। 2. मुझे यह प्रश्न अच्छी तरह समझ में आ गया (आना-जाना का प्रयोग)। 3. वह पढ़ने के लिए विद्यालय गया।

पाठ से आगे

डायरी (हँसें-मुसकराएँ-गाएँ) – अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?

उत्तर (संकेत)यह व्यक्तिगत डायरी-लेखन की गतिविधि है। विद्यार्थी अपने दिन की सच्ची घटनाएँ लिखें – जैसे “सुबह मित्र के चुटकुले पर खूब हँसा, अच्छे अंक देखकर मुसकराया, खेल के समय गीत गाया, गृहकार्य अधूरा रहने पर माँ से रूठ गया” आदि।

आपकी बात (क) – कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर (संकेत)हमें प्रायः “खूब पढ़ो”, “स्वस्थ रहो”, “सदा खुश रहो”, “बड़े होकर अच्छा इंसान बनो”, “परीक्षा में सफल हो” जैसे आशीर्वाद माता-पिता, अध्यापकों एवं बड़ों से मिलते हैं। विद्यार्थी अपने जीवन के आशीर्वाद लिखें।

आपकी बात (ख) – आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।

उत्तर (संकेत)जैसे – “खूब मन लगाकर पढ़ना”, “सदा सच बोलना”, “बड़ों का आदर करना”, “तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो”। विद्यार्थी अपनी ओर से छोटों को दी जाने वाली शुभकामनाएँ लिखें।

सपनों की बातें – आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक पर्ची पर लिखें… अध्यापक उन्हें पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए— किस तरह के प्रयत्न करने होंगे? किस तरह योजना बनानी होगी? किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है? लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?

उत्तर (संकेत)यह कक्षा-आधारित सामूहिक गतिविधि है। किसी सपने (जैसे ‘डॉक्टर बनना’) के लिए सुझाव हो सकते हैं – प्रयत्न: नियमित पढ़ाई एवं विज्ञान विषयों पर ध्यान; योजना: समय-सारणी बनाकर अध्ययन; सहयोग: शिक्षकों एवं माता-पिता से मार्गदर्शन; चुनौतियाँ: कठिन प्रतियोगिता, आर्थिक बाधा, असफलता के बाद हतोत्साह।

हमारे सपने / सबके सपने / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए

उत्तर (संकेत)हमारे सपने: अपने माता-पिता/दादा-दादी/भाई-बहन से उनके सपने पूछकर तालिका में लिखें।सबके सपने: शाक विक्रेता, सफाईकर्मी, रिक्शाचालक आदि में से किसी एक का साक्षात्कार लेकर उनके सपने जानें और प्रश्न-सूची बनाएँ (जैसे – आपका सबसे बड़ा सपना क्या है? उसे पूरा करने में क्या कठिनाई आती है?)।झरोखे से: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के उद्बोधन ‘सपनों की उड़ान’ का भाव – सपने वे हैं जो हमें सोने न दें; उन्हें पूरा करने के लिए जागते रहना (निरंतर प्रयासरत रहना) आवश्यक है।साझी समझ & खोजबीन: कविता एवं कलाम के उद्बोधन पर कक्षा में चर्चा करें तथा कला, विज्ञान, खेल आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यक्तियों के संघर्ष-यात्रा के बारे में पुस्तकालय/इंटरनेट से पढ़ें।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘एक आशीर्वाद’ कविता के रचयिता कौन हैं?

उत्तरइस कविता के रचयिता दुष्यंत कुमार हैं।

2. कवि नई पीढ़ी को क्या आशीर्वाद देते हैं?

उत्तरकवि नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने और आत्मनिर्भर (अपने पाँवों पर खड़े) होने का आशीर्वाद देते हैं।

3. कविता में कौन-सी पंक्ति आरंभ और अंत में दोहराई गई है?

उत्तर“जा, तेरे स्वप्न बड़े हों।”

4. कविता में चाँद-तारे किसके प्रतीक हैं?

उत्तरचाँद-तारे दूर एवं कठिनता से प्राप्य (अप्राप्य) बड़े लक्ष्यों के प्रतीक हैं।

5. दुष्यंत कुमार का सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल संग्रह कौन-सा है?

उत्तर‘साये में धूप’ दुष्यंत कुमार का सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल संग्रह है।

दीर्घ उत्तरीय

6. “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ, उँगली जलाएँ” पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तरयहाँ ‘दीये की रोशनी’ ज्ञान, अनुभव और अवसर का प्रतीक है। कवि कहते हैं कि नई पीढ़ी के मन में हर प्रकार के ज्ञान एवं अनुभव को पाने की तीव्र ललक होनी चाहिए।‘उँगली जलाएँ’ का अर्थ है कि लक्ष्य पाने के लिए चुनौतियों को स्वीकार करने तथा कष्ट सहने से नहीं घबराना चाहिए। तात्पर्य यह है कि बड़े लक्ष्य लगन, साहस और कठिनाई सहने की क्षमता से ही प्राप्त होते हैं।

7. ‘एक आशीर्वाद’ कविता का केंद्रीय भाव (मूल संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरकविता का केंद्रीय भाव यह है कि नई पीढ़ी को बड़े एवं ऊँचे सपने देखने चाहिए और उन्हें केवल कल्पना तक सीमित न रखकर यथार्थ की भूमि पर साकार करने का प्रयास करना चाहिए।कवि चाहते हैं कि नई पीढ़ी कठिन लक्ष्यों के लिए दृढ़ता से प्रयास करे, कष्ट एवं चुनौतियों से न घबराए, सदा प्रसन्न एवं उत्साही रहे और अंततः आत्मनिर्भर बने। यह कविता आशा, साहस, परिश्रम और स्वावलंबन की प्रेरणा देती है।

8. कविता में सपनों के ‘पृथ्वी पर चलना सीखने’ की बात क्यों कही गई है? समझाइए।

उत्तरकवि चाहते हैं कि सपने केवल मन की भावनाओं या हवाई कल्पना में ही न तैरते रहें, बल्कि शीघ्र ही धरातल पर उतरकर वास्तविक रूप लें।‘पृथ्वी पर चलना सीखना’ का अर्थ है सपनों को व्यावहारिक प्रयासों, योजनाओं और परिश्रम के माध्यम से साकार करना। कवि का संदेश है कि सपने तभी सार्थक होते हैं जब उनके लिए वास्तविक जीवन में ठोस कदम उठाए जाएँ।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘एक आशीर्वाद’ कविता के कवि कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) दुष्यंत कुमार

(ग) रामधारी सिंह दिनकर

(घ) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर(ख) दुष्यंत कुमार।

2. दुष्यंत कुमार का जन्म किस राज्य में हुआ था?

(क) मध्य प्रदेश

(ख) राजस्थान

(ग) उत्तर प्रदेश (बिजनौर)

(घ) बिहार

उत्तर(ग) उत्तर प्रदेश (बिजनौर)।

3. कविता में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है?

(क) नींद में देखे गए दृश्य

(ख) ऊँची आकांक्षाएँ एवं बड़े लक्ष्य

(ग) कोरी कल्पना

(घ) भय

उत्तर(ख) ऊँची आकांक्षाएँ एवं बड़े लक्ष्य।

4. “अपने पाँवों पर खड़े हों” का भाव है—

(क) ऊँचाई पर चढ़ना

(ख) आत्मनिर्भर/स्वावलंबी होना

(ग) दौड़ना

(घ) विश्राम करना

उत्तर(ख) आत्मनिर्भर/स्वावलंबी होना।

5. कविता में चाँद-तारे किसके प्रतीक हैं?

(क) सरल लक्ष्य

(ख) धन-संपत्ति

(ग) अप्राप्य (कठिन) लक्ष्य

(घ) मित्रता

उत्तर(ग) अप्राप्य (कठिन) लक्ष्य।

6. “उँगली जलाएँ” पंक्ति का भाव है—

(क) आग बुझाना

(ख) चुनौतियों को स्वीकार करना/कष्ट से न घबराना

(ग) खाना पकाना

(घ) डरकर भाग जाना

उत्तर(ख) चुनौतियों को स्वीकार करना/कष्ट से न घबराना।

7. दुष्यंत कुमार का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग़ज़ल संग्रह है—

(क) मुकुल

(ख) साये में धूप

(ग) कुरुक्षेत्र

(घ) कामायनी

उत्तर(ख) साये में धूप।

8. कविता में किस काव्य-विशेषता द्वारा सपने को हँसते-गाते दिखाया गया है?

(क) उपमा

(ख) मानवीकरण

(ग) अनुप्रास

(घ) यमक

उत्तर(ख) मानवीकरण।

9. ‘मचलना’ शब्द का अर्थ है—

(क) हठ करना/ज़िद करना

(ख) सो जाना

(ग) चुप रहना

(घ) डरना

उत्तर(क) हठ करना/ज़िद करना।

10. कविता का मूल संदेश क्या है?

(क) आलस्य करना

(ख) बड़े सपने देखना और आत्मनिर्भर बनना

(ग) दूसरों पर निर्भर रहना

(घ) धन कमाना

उत्तर(ख) बड़े सपने देखना और आत्मनिर्भर बनना।
उत्तर कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(क), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): कविता ‘एक आशीर्वाद’ नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती है।

कारण (R): कवि बार-बार “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” कहकर अपनी शुभकामना व्यक्त करते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ‘अपने पाँवों पर खड़े हों’ का अर्थ है केवल शारीरिक रूप से खड़ा होना।

कारण (R): यह एक मुहावरा है जिसका अर्थ आत्मनिर्भर बनना है।

उत्तर(घ) A गलत है (इसका भाव आत्मनिर्भरता है, न कि केवल खड़े होना), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): कवि चाहते हैं कि सपने केवल कल्पना तक सीमित रहें।

कारण (R): ‘जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें’ पंक्ति सपनों को यथार्थ में बदलने की बात करती है।

उत्तर(घ) A गलत है (कवि सपनों को यथार्थ में उतारना चाहते हैं), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): ‘उँगली जलाएँ’ कठिनाई एवं चुनौती सहने के साहस का प्रतीक है।

कारण (R): बड़े लक्ष्य बिना कष्ट सहे प्राप्त नहीं होते।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ है।

कारण (R): सपने को हँसते, मुसकराते, गाते, रूठते और मचलते हुए मनुष्य की तरह दिखाया गया है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर कुंजी: 1-(क), 2-(घ), 3-(घ), 4-(क), 5-(क)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘एक आशीर्वाद’ कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि हिंदी के लोकप्रिय रचनाकार दुष्यंत कुमार (1933–1975) हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ था।

‘एक आशीर्वाद’ कविता का मूल संदेश क्या है?

कविता का संदेश है कि नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने चाहिए, उन्हें यथार्थ में साकार करने के लिए परिश्रम एवं संघर्ष करना चाहिए और अंततः आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

“अपने पाँवों पर खड़े हों” का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनना – अर्थात् दूसरों पर निर्भर न रहकर अपने बल पर जीवन में आगे बढ़ना।

कविता में ‘उँगली जलाएँ’ का क्या भाव है?

इसका भाव है कि लक्ष्य पाने के लिए चुनौतियों को स्वीकार करने और कष्ट सहने से नहीं घबराना चाहिए।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधियाँ NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों ली गई हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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