कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 4 — हरिद्वार प्रश्न उत्तर और सार
हरिद्वार प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 4 में भारतेंदु हरिश्चंद्र के यात्रा-पत्र का सार, शब्दार्थ, अभ्यास, सही चयन-मिलान, पत्र की रचना, आदरार्थ बहुवचन और काल के उदाहरण पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 4 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 45–62, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
- लेखक परिचय – भारतेंदु हरिश्चंद्र
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से (पाठ से)
- मिलकर करें मिलान
- मिलकर करें चयन
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- लिखें संवाद
- ‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग / काल की पहचान
- भावों की पहचान
- पत्र की रचना
- लेखन के अनोखे तरीके
- आपकी बात
- पाठ से आगे (गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक परिचय – भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850–1885) हिंदी साहित्य के सुप्रसिद्ध रचनाकार थे, जिन्हें ‘आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक’ माना जाता है। उन्होंने कविता, नाटक, निबंध और यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में लेखन किया तथा कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन, हरिश्चंद्र चंद्रिका और स्त्रियों के लिए बालाबोधिनी जैसी पत्रिकाएँ प्रकाशित कीं। ‘निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’ का उद्घोष करने वाले भारतेंदु अपनी यात्राओं के लिए भी चर्चित रहे; वे मानते थे कि शिक्षा की पूर्ति केवल पुस्तकों से ही नहीं, यात्राओं से भी होती है। उनकी रचनाओं में समाज-सुधार, राष्ट्र-प्रेम, अंग्रेजी शासन का विरोध और स्वाधीनता की भावना के स्वर सुनाई देते हैं। सत्य हरिश्चन्द्र, भारत-दुर्दशा, अंधेर नगरी और सरयूपार की यात्रा उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।
पाठ का सार
‘हरिद्वार’ भारतेंदु हरिश्चंद्र का यात्रा-अनुभव प्रस्तुत करने वाला पत्र है, जो 14 अक्टूबर 1871 को ‘कविवचनसुधा’ में प्रकाशित हुआ। लेखक तीन ओर हरे पर्वत, लताओं, वृक्षों, पक्षियों और गंगा की धाराओं का चित्रात्मक वर्णन करते हैं। लताएँ शुभ मनोरथों जैसी और वृक्ष तपस्वी साधुओं जैसे दिखते हैं। वृक्षों की उदारता से परोपकार का भाव सामने आता है।
लेखक दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले में ठहरे; मित्र कल्लू जी भी साथ थे। ग्रहण के समय स्नान, दिन में भागवत-पारायण और गंगा-तट पर स्वयं पकाकर पत्थर पर भोजन करने से उन्हें विशेष आनंद मिला। सादे भोजन का सुख सोने की थाली से बढ़कर लगा। लौटने पर भी उनका मन उसी स्थान में रमा रहा। वे संपादक से पत्र को पत्रिका में स्थान देने का निवेदन करते हैं।
यह उन्नीसवीं शताब्दी का व्यक्तिगत और साहित्यिक वर्णन है। कुशा की सुगंध, पंडों का संतोष और तीर्थ की निर्मलता लेखक की अनुभूति/श्रद्धा के रूप में पढ़ें; इन्हें सभी वर्तमान निवासियों, नदीजल की पीने-योग्यता या आज की यात्रा-सुविधाओं के प्रमाण के रूप में न लें। भगीरथ-संबंधी प्रसंग धार्मिक परंपरा का संदर्भ है।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पुण्य भूमि | पवित्र एवं पावन धरती |
| वल्ली | लता, बेल |
| मनोरथ | मन की इच्छा, अभिलाषा |
| अर्थी | याचक, माँगने वाला, इच्छुक व्यक्ति |
| विमुख | निराश होकर लौटना, मुँह मोड़ना |
| बधिक | शिकारी, हिंसक व्यक्ति, बहेलिया |
| कल्लोल करना | क्रीड़ा करना, आनंद से चहकना/उछलना |
| त्रिभुवन-पावनी | तीनों लोकों को पवित्र करने वाली (गंगा) |
| कीर्ति | यश, प्रसिद्धि |
| मिष्ट | मीठा, मधुर |
| श्वेत | सफेद, उज्ज्वल |
| शिखर (शिषर) | पर्वत की चोटी |
| पाट | नदी की चौड़ाई, फैलाव |
| वेग | तेज प्रवाह, गति |
| धर्मशाला | यात्रियों के ठहरने का सार्वजनिक भवन |
| विलक्षण | अनोखा, विशेष, असाधारण |
| संतोषी | थोड़े में संतुष्ट रहने वाला |
| निदान | अंत में, फलस्वरूप |
| पारायण | किसी ग्रंथ का आद्योपांत (आरंभ से अंत तक) पाठ |
| वैराग्य | सांसारिक मोह से विरक्ति, अनासक्ति |
| कुशा | एक प्रकार की पवित्र घास, दर्भ |
| विरक्त | संसार से विमुख, वैरागी |
| मौनावलंबन | मौन धारण करना, चुप हो जाना |
| स्थानदान | (पत्रिका में) स्थान देना, छापना/सँजोना |
मेरी समझ से (पाठ से)
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?
• लेखक के अनुसार सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
• लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
• लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
• लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।
2. “वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
• शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
• आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
• मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
• सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम
3. “पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?
• संतुष्टि में सुख होता है।
• सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
• लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी।
• पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है।
4. “एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
• अंधविश्वास और लालच
• मानवता और देशप्रेम
• सादगी और आत्मनिर्भरता
• स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?
• राजनीतिक
• आध्यात्मिक
• सामाजिक
• प्राकृतिक
6. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?
• कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
• मुहावरों का अधिक प्रयोग
• सरलता और चित्रात्मकता
• जटिलता और संक्षिप्तता
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने होंं। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 50 के दाएँ स्तंभ के मूल क्रमांक के अनुसार सही मिलान:
| बाएँ शब्द | दाएँ क्रमांक | संदर्भ का सार |
|---|---|---|
| 1. हरिद्वार | 3 | उत्तराखंड का तीर्थ; गंगा के पर्वतीय क्षेत्र से मैदान की ओर आने का स्थान |
| 2. गंगा | 5 | भारत की प्रमुख नदी |
| 3. भगीरथ | 6 | धार्मिक कथा-परंपरा में गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले सूर्यवंशी राजा |
| 4. चण्डिका | 1 | मान्यताओं में दुर्गा का एक रूप |
| 5. भागवत | 2 | श्रीकृष्ण-संबंधी कथाओं वाला पुराण |
| 6. दालचीनी | 4 | पेड़ की सुगंधित छाल, जिसका मसाले में उपयोग होता है |
क्रम-कुंजी: 1→3, 2→5, 3→6, 4→1, 5→2, 6→4। संदर्भ में आए अलकनंदा और मंदाकिनी को गंगा के पूर्ण पर्याय न मानें; वे गंगा नदी-तंत्र की अलग नदियाँ हैं। यहाँ उद्देश्य मुद्रित संदर्भों का मिलान है। नदी-तंत्र का संदर्भ: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन — गंगा का प्रवाह।
मिलकर करें चयन
पृष्ठ 51 में हर पंक्ति के सामने दिए दो निष्कर्षों में उपयुक्त विकल्प का क्रम:
| पंक्ति क्रमांक | सही विकल्प | कारण |
|---|---|---|
| 1 | पहला | लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की सुंदरता से जोड़ा गया है। |
| 2 | दूसरा | वृक्षों के मौसम सहने की तुलना तपस्वी साधुओं से है; वृक्षों की वास्तविक तपस्या नहीं। |
| 3 | पहला | लेखक पक्षियों के निडर होकर आनंद करने का दृश्य वर्णित करते हैं। |
| 4 | पहला | जल की मिठास और शीतलता की अनुभूति उपमा द्वारा व्यक्त है; उसमें चीनी या बर्फ मिलाने का कथन नहीं। |
| 5 | दूसरा | गंगा के समीप भोजन से प्रकृति के साथ निकटता और सुख प्रकट है; महँगे बर्तन की अनिवार्यता नहीं। |
| 6 | दूसरा | ‘स्थानदान’ का संदर्भ संपादक से पत्रिका में पत्र प्रकाशित करने का निवेदन है। |
क्रम-कुंजी: 1, 2, 1, 1, 2, 2। सभी पहले विकल्प सही नहीं हैं। समूह में अपना चयन पाठ की पंक्ति से समझाएँ।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए कि आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया।
(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
(ख) “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
सोच-विचार के लिए
(क) चित्त से वहीं निवास
लौट आने के बाद भी लेखक के मन में हरिद्वार की सुखद स्मृतियाँ बसी हैं। नमूना व्यक्तिगत उत्तर: नानी के घर से लौटकर मैं वहाँ की बातचीत और खेल याद करता रहा। ऐसा अनुभव न हुआ हो तो वही लिखें।
(ख) संतोष का कथन आज
यह लेखक का अपने समय का अवलोकन है; उससे आज के पूरे समाज या किसी पेशे के लोगों का स्वभाव तय नहीं होता। विचार का नमूना: मेरी परिचित एक व्यक्ति उपयोगी चीजें खरीदकर बाकी धन बचाती हैं और उपलब्ध साधनों का आनंद लेती हैं। यह संतोष का उदाहरण हो सकता है। अपने वास्तविक उदाहरण और कारण लिखें; कम आय का अर्थ अपने-आप प्रसन्नता नहीं।
(ग) टिकने योग्य स्थान
पाठ में शांत, आनंददायक परिवेश और शीतल पवन का उल्लेख है। इनके कारण स्थान सुखद लगा होगा। आराम, दृश्य और सुविधाएँ अतिरिक्त अनुमान हो सकते हैं, पर बंगले की सभी आधुनिक सुविधाएँ या तीर्थों तक आसान पहुँच पाठ में बताई नहीं गई है।
(घ) वृक्षों का महत्व
लेखक फल, फूल, सुगंध, छाया और अन्य उपयोगों से वृक्षों की उदारता समझाते हैं। आज हम उनसे प्रकृति की रक्षा तथा दूसरों की सहायता की सीख ले सकते हैं। हर पेड़ के सभी अंग औषधि/खाद्य नहीं होते; बिना पहचान उनका सेवन न करें। परोपकार की उपमा पेड़ों को चोट पहुँचाने या जलाने की सलाह नहीं।
अनुमान और कल्पना से
ये कल्पनात्मक उत्तर हैं; अलग योजनाएँ भी उचित हैं।
(क) हरिद्वार में मेरी योजना
हरे पर्वत और नदी के दृश्य देखूँगा, शांत सुरक्षित स्थान पर बैठकर प्रकृति का चित्र बनाऊँगा और यात्रा-डायरी लिखूँगा। धार्मिक स्थलों पर जाना अपनी रुचि तथा परिवार की योजना पर निर्भर होगा।
(ख) जल के छींटों की कल्पना
शीतल फुहार और हवा से ताजगी महसूस होगी। लहरों की ध्वनि तथा हरियाली मन को सुख देंगी। यह साहित्यिक कल्पना है; नदी-किनारे की सुरक्षा आवश्यक है।
(ग) बोलते पेड़
पेड़ कहते—हम छाया और फल देते हैं; हमारी शाखाएँ मत तोड़ो, हमारी देखभाल करो। इस कल्पना से प्रकृति के प्रति संवेदना बढ़ सकती है।
(घ) ‘श्री’ और ‘जी’
लेखक गंगा के प्रति अपना आदर और धार्मिक श्रद्धा इन संबोधनों से व्यक्त करते हैं। यह उनके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ का संकेत है।
(ङ) सुलभ यात्रा
साथी से पूछूँगा कि किस प्रकार की सहायता और संचार वे पसंद करते हैं। दृष्टिबाधित साथी को सहमति से रास्ते और दृश्य का वर्णन करूँगा; हाथ पकड़ने या दिशा बदलने से पहले पूछूँगा। श्रवणबाधित साथी के लिए उनके अनुकूल लिखित जानकारी, दृश्य संकेत या संकेत-भाषा उपलब्ध करूँगा। सुरक्षित पहुँच, बैठने की जगह, भीड़ में तय मिलन-स्थान और नदी से सुरक्षित दूरी सभी के लिए उपयोगी हैं। किसी को जल छूने या धार्मिक कार्य के लिए बाध्य नहीं करूँगा।
लिखें संवाद
(क) “मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।” लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
(ख) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।” लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए— जैसे पर्वत बोल रहे होंं।
‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग / काल की पहचान
आदरार्थ बहुवचन — रिक्त स्थान
सम्मान के लिए एक व्यक्ति के साथ भी बहुवचन क्रिया/सर्वनाम आ सकते हैं। हर एकवचन संज्ञा अपने-आप आदरार्थ बहुवचन नहीं होती। मूल दस वाक्यों के भरे रूप:
- हमारे प्रधानाचार्य महोदय आज विद्यालय में उपस्थित हैं।
- माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, हमें उनका कहना मानना चाहिए।
- मेरी बहन बाजार जा रही है, वहाँ से किताबें ले आएगी।
- बाहर फेरीवाला आया है। उसे बुला लाओ।
- डाकिया जी आए हैं। उन्हें भी बुला लाओ।
- आप तो बहुत दिन बाद आए हैं, आपका स्वागत है।
- डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं, उनसे परामर्श लेना चाहिए।
- आपके माता-पिता कहाँ हैं? क्या मैं उनसे मिल सकता हूँ?
- ये हमारे हिंदी के अध्यापक हैं, हम इनसे बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
- बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर रहा है।
काल की पहचान
| क्रम | मुख्य क्रिया | काल |
|---|---|---|
| 1 | स्थानदान दीजिएगा | भविष्य; इसी वाक्य में ‘निश्चय है’ वर्तमान है। |
| 2 | घिरी है | वर्तमान |
| 3 | हैं / फल देते हैं | वर्तमान |
| 4 | उदय होता था | भूत |
| 5 | टिका था | भूत |
अन्य दो कालों में बदलना — नमूने
- भूत: मुझे निश्चय था कि आपने इस पत्र को स्थान दिया था। वर्तमान: मुझे निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थान देते हैं।
- भूत: यह भूमि तीन ओर हरे पर्वतों से घिरी थी। भविष्य: यह भूमि तीन ओर हरे पर्वतों से घिरी रहेगी।
- भूत: वृक्ष ऐसे थे कि पत्थर मारने से फल देते थे। भविष्य: वृक्ष ऐसे होंगे कि पत्थर मारने से फल देंगे।
- वर्तमान: चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है। भविष्य: चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होगा।
- वर्तमान: मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका हूँ। भविष्य: मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिकूँगा।
पहले वाक्य में निवेदन और निश्चय दोनों हैं। काल-परिवर्तन में उनका वाक्य-रूप भी बदलता है; भूतकाल का ऊपर दिया रूप कथन है, भविष्य का अनुरोध नहीं।
भावों की पहचान
दिए गए भावों (प्रेम, संतोष, भक्ति, श्रद्धा, वैराग्य, आश्चर्य, करुणा, हास्य, शांति, परोपकार, दया, दुख) में से प्रत्येक पंक्ति में प्रकट होने वाला भाव पहचानिए—
| क्रम | पंक्ति | भाव |
|---|---|---|
| 1. | उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था। | संतोष |
| 2. | चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था। | वैराग्य / भक्ति |
| 3. | पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। | संतोष |
| 4. | हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी। | शांति (दिए भावों की सूची से) |
| 5. | सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं। | परोपकार |
पत्र की रचना
पृष्ठ 56 के दाएँ उदाहरणों के क्रमांक से मिलान। एक उदाहरण एक से अधिक विशेषताओं से जुड़ सकता है:
| विशेषता | उपयुक्त उदाहरण क्रमांक | कारण |
|---|---|---|
| 1. व्यक्तिपरकता | 8; 1/4 भी स्वीकार्य | चित्त से वहीं रहने का कथन निजी भावना है। |
| 2. संवादात्मकता | 6; 2 भी | संपादक को सीधे संबोधित करके निवेदन है। |
| 3. स्वाभाविक शैली | 4 | समाचार लिखने के आनंद की सहज अभिव्यक्ति |
| 4. व्यक्तिगत अनुभव | 7; 1 भी | स्वयं रसोई/भोजन तथा स्नान का अनुभव |
| 5. अभिवादन/संबोधन | 2 | संपादक को आदरपूर्ण प्रारंभिक संबोधन |
| 6. हस्ताक्षर | 3 | ‘आपका मित्र — यात्री’ से प्रेषक का संकेत |
| 7. उपसंहार और निवेदन | 6 | अंत में पत्र को स्थान देने का अनुरोध |
| 8. मुख्य विषय-वस्तु | 5 | हरिद्वार का विस्तृत प्राकृतिक वर्णन |
अपनी यात्रा का पत्र — ढाँचा
स्थान और तारीख → परिचित का संबोधन → यात्रा कब/कहाँ हुई → दृश्य और अपना अनुभव → समापन तथा आगे मिलने/लिखने का निवेदन → अपना नाम। अपनी वास्तविक यात्रा लिखें; यात्रा न की हो तो शिक्षक की अनुमति से काल्पनिक पत्र को स्पष्ट रूप से ‘कल्पना’ कहें।
लेखन के अनोखे तरीके
(क) पाठ में लेखक ने कई स्थानों पर तुलनात्मक वाक्यों के माध्यम से दृश्यों का वर्णन किया है। पाठ में से उन विशिष्ट पंक्तियों को ढूँढ़िए—
| तुलना | पाठ की विशिष्ट पंक्ति |
|---|---|
| 1. वृक्षों की तुलना साधुओं से | “बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।” |
| 2. गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से | “मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।” |
| 3. हरियाली की तुलना गलीचे से | “सब ओर हरियाली ही दिखाई पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।” |
| 4. नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश (कीर्ति) से | “त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है।” |
(ख) निम्नलिखित प्राचीन-शैली की पंक्तियों को आज की हिंदी में लिखिए।
→ इन पेड़ों पर रंग-बिरंगे पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट शिकारियों से बिना डरे आनंद से उछल-कूद करते हैं। 2. “वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दिखाई पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।”
→ वर्षा के कारण हर ओर हरियाली फैली थी, मानो यात्रियों के विश्राम के लिए हरे रंग का गलीचा बिछा दिया गया हो। 3. “यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं।”
→ लेखक कहते हैं कि यह इतना निर्मल तीर्थ है कि इच्छा और क्रोध से भरे लोग वहाँ नहीं रहते। यह श्रद्धा से भरा आदर्शीकृत साहित्यिक कथन है, नगर के सभी लोगों के बारे में तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं। 4. “मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।”
→ वहाँ जाते ही मेरा मन इतना प्रसन्न और निर्मल हो गया कि उसका वर्णन करना संभव नहीं। 5. “यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया।”
→ यहाँ रात को ग्रहण लगा और हम सबने ग्रहण के समय बड़े आनंद से स्नान किया तथा दिन में श्री भागवत का पूरा पाठ भी किया। 6. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।”
→ उस समय पत्थर पर किए गए भोजन का सुख सोने की थाली के भोजन से कहीं अधिक था। 7. “निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।”
→ मुझे विश्वास है कि आप इस पत्र को (अपनी पत्रिका में) स्थान अवश्य देंगे।
आपकी बात
1. “मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके… भोजन किया।” क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
2. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।” आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए।
3. “हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।” आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो?
4. पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष “फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।” क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं? क्यों?
पाठ से आगे (गतिविधियाँ – संकेत सहित)
प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण
पोस्टर का नमूना: ‘तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!’ नीचे संदेश लिखें—कचरा कूड़ेदान में डालें; नदी में वस्तुएँ न फेंकें; पौधों की रक्षा करें। अपने समूह के सुझाव जोड़ें और नदी/हरियाली का चित्र बनाएँ।
स्वास्थ्य और योग
(क) पाँच मिनट आराम से मौन बैठकर श्वास और आसपास की ध्वनियाँ देखें। अपना वास्तविक अनुभव लिखें। नमूना: पहले ध्यान भटका; धीरे-धीरे पक्षियों की आवाज सुनाई दी और मन शांत लगा। सबको एक जैसा अनुभव होना जरूरी नहीं। (ख) सूचना का नमूना:
[अपने विद्यालय का नाम] — सूचना
तारीख: [जारी करने की तारीख]
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम
21 जून को [समय] पर [स्थान] में विद्यार्थियों के लिए योग-कार्यक्रम होगा। भाग लेने वाले सुविधाजनक वस्त्र पहनें। शिक्षक की देखरेख में अपनी सुविधा के अनुसार भाग लें।
[वास्तविक आयोजक का नाम/पद]
विद्यालय की वास्तविक अनुमति और समय भरें; यह घोषित वास्तविक कार्यक्रम नहीं।
सज्जन वृक्ष
(क) उपयुक्त स्थानीय पौधा वयस्क की सहायता से लगाएँ, उसे नाम दें और उसकी पानी/धूप की जरूरत समझें। (ख) डायरी में तारीख, पानी, पत्तों में परिवर्तन और अपनी देखभाल लिखें। अंकुर न बढ़े तो भी ईमानदार अवलोकन लिखें।
अपने शब्द — ‘शीतल’
| अर्थ | समानार्थी | विपरीतार्थी | वाक्य |
|---|---|---|---|
| ठंडा, सुखद ठंडक वाला | ठंडा; संदर्भ में सर्द | गरम / उष्ण | प्रातः शीतल हवा चल रही थी। |
समूह के हर सदस्य का शब्द अलग हो; उसका अर्थ, पर्याय, विलोम और अपना वाक्य लिखें।
यात्रा के व्यय की गणना
₹1000 में निकट के स्थान की काल्पनिक यात्रा का बजट; यह वर्तमान किराए का दावा नहीं:
| मद | राशि |
|---|---|
| आना-जाना | ₹400 |
| भोजन | ₹250 |
| पीने का सुरक्षित पानी | ₹50 |
| स्मृति-चिह्न | ₹100 |
| बची राशि | ₹200 |
| कुल | ₹1000 |
(ख) नमूना: स्थानीय चित्र वाला बुकमार्क लूँगा क्योंकि उपयोगी है। महँगी वस्तु अनिवार्य नहीं; आवश्यक खर्च के बाद ही खरीदूँगा। असली यात्रा में स्थानीय मूल्य और अनुमति जाँचें।
यात्रा सबके लिए
(क) प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत पूछकर सुलभ वाहन/रास्ता, विराम, शौचालय, भोजन और जानकारी की योजना बनाएँ। बच्चों के लिए जिम्मेदार वयस्क तथा तय मिलन-स्थान रखें। (ख) मौन संवाद में हावभाव/लिखित संदेश का प्रयोग करके चर्चा करें कि श्रवणबाधित साथी को कौन-सा माध्यम पसंद होगा। (ग) ऐतिहासिक भवनों पर न लिखें, वस्तुएँ न उखाड़ें और प्रवेश/फोटोग्राफी के स्थल-नियम मानें।
आज की पहेली — पृष्ठ 61
पृष्ठ 162 की पुस्तक-कुंजी के अनुरूप: 1. दालचीनी या जावित्री; 2. जनेऊ; 3. हरि की पैड़ी या घाट; 4. फल/फूल/पत्ते/छाल/बीज/लकड़ी/जड़ में कोई एक; 5. कनखल या हरिद्वार; 6. दुकान; 7. गंगा; 8. विल्वपर्वत; 9. श्रीभागवत।
झरोखे से — हरिद्वार के मार्ग में
पृष्ठ 61 के पत्रांश में लेखक मार्ग के वृक्ष-पक्षियों और बबूल में बया के लटकते घोंसलों का वर्णन करते हैं। कांटेदार वृक्ष में घर बनाने को वे पक्षी का चातुर्य कहते हैं। चर्चा करें: प्रकृति को ध्यान से देखने और तुलना द्वारा लिखने में यह अंश मुख्य पत्र से कैसे मिलता है? यह लेखक की साहित्यिक व्याख्या है, सभी पक्षियों का वैज्ञानिक नियम नहीं।
खोजबीन के लिए
पुस्तकालय या विश्वसनीय पाठ-स्रोत से भारतेंदु का ‘अंधेर नगरी’ पढ़ें। पात्र, शासन/न्याय पर व्यंग्य और अपनी समझ पर साथियों से चर्चा करें। पढ़े बिना कथानक या उद्धरण न गढ़ें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय (30–40 शब्द)
1. ‘हरिद्वार’ पाठ किस विधा में लिखा गया है और किसके नाम लिखा गया है?
2. हरिद्वार क्षेत्र के पाँच मुख्य तीर्थ कौन-कौन से हैं?
3. लेखक ने हरिद्वार के पंडों की किस विशेषता की प्रशंसा की है?
4. गंगा-तट पर पत्थर पर भोजन करते समय लेखक को कैसा अनुभव हुआ?
5. लेखक ने वृक्षों की तुलना सज्जनों से क्यों की है?
दीर्घ उत्तरीय (100–120 शब्द)
6. ‘हरिद्वार’ पत्र में लेखक ने हरिद्वार के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
7. इस पत्र के माध्यम से भारतेंदु हरिश्चंद्र हमें कौन-कौन से जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘हरिद्वार’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) भारतेंदु हरिश्चंद्र
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) रामधारी सिंह दिनकर
2. यह पत्र किस पत्रिका के संपादक के नाम लिखा गया था?
(क) हरिश्चंद्र मैगजीन
(ख) बालाबोधिनी
(ग) कविवचन सुधा
(घ) सरस्वती
3. हरिद्वार में स्नान का प्रसिद्ध पक्का घाट किस नाम से जाना जाता है?
(क) दशाश्वमेध घाट
(ख) हरि की पैड़ी
(ग) कुशावर्त्त
(घ) नीलधारा
4. लेखक के अनुसार हरिद्वार में स्थित मुख्य देवता कौन हैं?
(क) श्री गंगा जी
(ख) विल्वेश्वर महादेव
(ग) चण्डिका देवी
(घ) भगीरथ
5. हरिद्वार से गंगा किस रूप में आगे बढ़ती है?
(क) पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है
(ख) पहाड़ों में लौट जाती है
(ग) सूख जाती है
(घ) रेगिस्तान में गिरती है
6. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” – यहाँ ‘सज्जन’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) पंडों के लिए
(ख) यात्रियों के लिए
(ग) फलदार वृक्षों के लिए
(घ) नदियों के लिए
7. लेखक हरिद्वार में किसके बंगले पर ठहरे थे?
(क) दीवान कृपा राम
(ख) भारामल जैकृष्णदास खत्री
(ग) कल्लू जी
(घ) पंडा
8. लेखक के अनुसार हरिद्वार में किस वस्तु से दालचीनी जैसी सुगंध आती है?
(क) जल से
(ख) कुशा (घास) से
(ग) फूलों से
(घ) धूप से
9. लेखक ने पत्र के अंत में अपने नाम के साथ स्वयं को क्या कहा है?
(क) संपादक
(ख) यात्री
(ग) तीर्थयात्री
(घ) पंडित
10. भारतेंदु हरिश्चंद्र को किस रूप में जाना जाता है?
(क) छायावाद के प्रवर्तक
(ख) आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक
(ग) रीतिकाल के कवि
(घ) उपन्यास सम्राट
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक के अनुसार हरिद्वार में प्रवेश करते ही मन शुद्ध हो जाता है।
कारण (R): हरिद्वार एक पवित्र तीर्थस्थान है जो अपनी निर्मलता एवं आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
2. अभिकथन (A): लेखक ने पत्थर पर किए भोजन को सोने की थाल के भोजन से बढ़कर बताया।
कारण (R): लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी, इसलिए उन्होंने पत्थर पर भोजन किया।
3. अभिकथन (A): पाठ में ‘गंगा’ के साथ ‘हैं’ क्रिया का प्रयोग हुआ है, जबकि गंगा एकवचन है।
कारण (R): आदर-सम्मान प्रकट करने के लिए एकवचन संज्ञा का बहुवचन रूप में (आदरार्थ बहुवचन) प्रयोग किया जाता है।
4. अभिकथन (A): पत्र की भाषा आज की हिंदी से कुछ भिन्न प्रतीत होती है।
कारण (R): यह पत्र लगभग 150 वर्ष पुराना है और इसमें प्राचीन हिंदी की छवि दिखाई देती है।
5. अभिकथन (A): लेखक ने हरिद्वार के वृक्षों की तुलना साधुओं से की है।
कारण (R): वृक्ष एक स्थान पर खड़े रहकर घाम, ओस और वर्षा को साधुओं की भाँति सहन करते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
पत्र-विधा से जुड़े प्रश्नों में संबोधन, विषय-वस्तु और अंत में हस्ताक्षर की विशेषताएँ अवश्य लिखें। उपमा/मानवीकरण के उदाहरण (वृक्ष → साधु, हरियाली → गलीचा, गंगा → भगीरथ की कीर्ति) याद रखें। ‘आदरार्थ बहुवचन’ का नियम और प्राचीन वर्तनी (शिषर→शिखर, जात्रियों→यात्रियों) के उदाहरण समझकर अपने वाक्यों में प्रयोग करें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
• ‘हरिद्वार’ को कहानी/निबंध न लिखें – यह ‘पत्र’ विधा है।
• लेखक का नाम ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र’ है, ‘हरिश्चंद्र राजा’ नहीं।
• ‘कविवचन सुधा’ एक पत्रिका है, स्थान या ग्रंथ नहीं।
• पाँच तीर्थों के नाम में कुशावर्त्त और विल्वपर्वत को न छोड़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘हरिद्वार’ पाठ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा में है?
इस पाठ के लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं और यह ‘पत्र’ विधा में लिखा गया है, जिसे उन्होंने कविवचन सुधा पत्रिका के संपादक के नाम भेजा था।
हरिद्वार क्षेत्र के पाँच मुख्य तीर्थ कौन-से हैं?
हरिद्वार, कुशावर्त्त, नीलधारा, विल्वपर्वत और कनखल – ये पाँच मुख्य तीर्थ हैं।
लेखक ने गंगा के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ क्यों लगाया है?
गंगा को पूज्य माता एवं देवी मानने के कारण श्रद्धा और आदर प्रकट करने हेतु लेखक ने ‘श्री गंगा जी’ जैसे आदरसूचक शब्दों का प्रयोग किया है (आदरार्थ बहुवचन)।
इस पाठ से कौन-से जीवन-मूल्य मिलते हैं?
संतोष, सादगी, परोपकार, स्वच्छता, प्रकृति-प्रेम और संस्कृति के प्रति श्रद्धा – ये इस पत्र के प्रमुख जीवन-मूल्य हैं।
प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
