कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 8 – नए मेहमान (एकांकी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 8 ‘नए मेहमान’ (लेखक – उदयशंकर भट्ट) का पूरा समाधान देता है। यह एक एकांकी है, जिसमें एक शहरी मध्यवर्गीय परिवार पर अचानक आ पड़े अपरिचित मेहमानों की रोचक कथा है। नीचे एकांकी का सार, शब्दार्थ, पुस्तक की सभी अभ्यास-गतिविधियों के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं FAQ दिए गए हैं।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (गद्य) अध्याय: 8 लेखक: उदयशंकर भट्ट विधा: एकांकी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – उदयशंकर भट्ट

इस एकांकी के लेखक उदयशंकर भट्ट (1898–1966) हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। परिवार में साहित्यिक वातावरण होने के कारण इनकी रुचि आरंभ से ही साहित्य में अधिक थी। इन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे तथा नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। यद्यपि इन्होंने कविता और उपन्यास भी लिखे, किंतु नाटक एवं एकांकी के क्षेत्र में इन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली। इनका लोक-परलोक उपन्यास तथा पर्दे के पीछे एकांकी-संग्रह बहुत चर्चित रहे। हिंदी एकांकी को लोकप्रिय बनाने वाले रचनाकारों में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नए मेहमान’ एकांकी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं और भारतीय आतिथ्य-भाव का जीवंत चित्रण किया है।

पाठ का सार

‘नए मेहमान’ एकांकी का दृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की एक रात आठ बजे का है। विश्वनाथ (गृहपति) किराये के एक छोटे, बंद और तपते मकान में अपनी पत्नी रेवती और बच्चों के साथ रहता है। भीषण गरमी से सब बेहाल हैं – पुराना पंखा हवा कम देता है, पानी से प्यास नहीं बुझती और छत इतनी छोटी है कि सब बच्चे समा नहीं पाते। निर्दयी पड़ोसी खाली छत पर भी खाट नहीं बिछाने देता। दोनों पति-पत्नी सोने की व्यवस्था को लेकर बहस ही कर रहे होते हैं कि रेवती कह उठती है – “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।”

तभी दरवाजा खटखटाता है और दो अपरिचित व्यक्ति – नन्हेमल और बाबूलाल – बिस्तर तथा संदूक लेकर घर में घुस आते हैं। वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर इतने अपनेपन से बातें करते हैं, मानो वर्षों से परिचित हों। वे ठंडा पानी, नहाने का प्रबंध और भोजन माँगते हैं और बार-बार कहते हैं कि वे ‘घर के ही’ हैं। विश्वनाथ संकोचवश उन्हें रोक नहीं पाता, यद्यपि वह उन्हें पहचानता ही नहीं।

विश्वनाथ और रेवती परेशान हो जाते हैं – सिर में दर्द, गरमी और ऊपर से अतिथियों का भोजन! पूछताछ करने पर मेहमान गोलमोल उत्तर देते हैं – कभी संपतराम, कभी जगदीशप्रसाद का नाम लेते हैं, पर न चिट्ठी है, न पता ठीक से याद। इसी बीच पड़ोसी फिर शिकायत लेकर आता है कि मेहमानों ने उसकी छत पर पानी फैला दिया। अंततः विश्वनाथ के बेटे प्रमोद की बात से पता चलता है कि वे वस्तुतः पिछली गली के ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए। भूल समझते ही दोनों ‘राम-राम’ कहकर चले जाते हैं।

तभी नीचे से आवाज आती है – यह रेवती का असली भाई (आगंतुक) है, जो झाँसी से तार भेजकर आया था, पर तार समय पर न मिलने के कारण घंटों मकान ढूँढ़ता रहा। थका हुआ भाई कहता है कि इस गरमी में खाना रहने दो, वह केवल पानी पीकर सो जाएगा। पर रेवती, जो थोड़ी देर पहले मेहमानों के लिए खाना बनाने से इनकार कर रही थी, अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है – “भैया भूखे नहीं सो सकते।” इस प्रकार यह एकांकी हास्य के साथ-साथ शहरी मध्यवर्ग की कठिनाइयों और भारतीय आतिथ्य-भाव की विशेषताओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
एकांकीएक ही अंक वाला छोटा नाटक
गृहपतिघर का स्वामी, घर का मुखिया
आगंतुकआने वाला व्यक्ति, अतिथि
ॠतुमौसम, समय-विशेष
भट्टीआग जलाने का चूल्हा; अत्यधिक गरम स्थान
जेलखानाकारागार, बंदीगृह (यहाँ – घुटन भरा घर)
सुकुमारकोमल, सुंदर एवं नाजुक
संपन्नधनवान, समृद्ध
ठगधोखा देकर लूटने वाला
निचोड़नादबाकर रस/पानी निकालना
बंडीबिना बाँह की छोटी जैकेट/कुरती
अंटीकमर में धोती की गाँठ जहाँ रुपये रखे जाते हैं
हबड़-तबड़हड़बड़ी, जल्दबाजी एवं अव्यवस्था
सकपकानाघबरा जाना, झेंप जाना
खीझनाझल्ला जाना, चिढ़ जाना
कदाचितशायद, संभवतः
नेपथ्यरंगमंच के पीछे का भाग; पर्दे के पीछे से आती आवाज
यवनिकारंगमंच का परदा (परदा गिरना – दृश्य की समाप्ति)
तारटेलीग्राफ द्वारा शीघ्र भेजा जाने वाला संदेश
धर्मशालायात्रियों के ठहरने का निःशुल्क/सस्ता स्थान
आतिथ्यअतिथि का सत्कार, मेहमाननवाजी
प्रकोपतीव्रता, उग्रता (गरमी का प्रकोप)

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?

• अतिथियों की सेवा करने के कारण

• किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण

• आज्ञाकारिता के भाव के कारण

• गरमी को चुपचाप सहने के कारण

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर ★ ‘अतिथियों की सेवा करने के कारण’ तथा ★ ‘किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण’ हैं।बच्चे चुपचाप पानी और बरफ लाते रहे, बिना यह पूछे कि ये मेहमान कौन हैं और क्यों आए हैं। उनकी इसी सरल, सेवाभावी और प्रश्न न करने वाली प्रवृत्ति को देखकर नन्हेमल ने उन्हें ‘सीधे लड़के’ कहा।

2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?

• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं

• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं

• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं

• अतिथियों का अपमान करते हैं

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं’ तथा ★ ‘पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं’ हैं।पड़ोसी खाली पड़ी छत पर भी बच्चों के लिए एक खाट नहीं बिछाने देते और दूसरों को मुसीबत में देखकर खुश होते हैं। इसी असहयोगी एवं स्वार्थी व्यवहार के कारण विश्वनाथ ने उन्हें निर्दयी कहा।

3. “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?

• मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण

• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण

• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण

• उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ पहले तीनों हैं – ‘ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण’, ‘स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण’ तथा ‘घर का कार्य बढ़ जाने के कारण’।छोटे, गरम मकान में जगह की कमी है, रेवती पंद्रह दिन से सिरदर्द से परेशान है और गरमी में मेहमान के लिए भोजन बनाना उसके लिए और कष्टकर है – इसीलिए वह ऐसी कामना करती है।

4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

• पानी की कमी होने की

• पड़ोसियों के चिल्लाने की

• मेहमानों के आने की

• गरमी के कारण बीमारी की

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘मेहमानों के आने की’ है।जैसे ही दरवाजा खटखटाता है, रेवती के मन में डर बैठ जाता है कि कहीं कोई मेहमान न आ गया हो, क्योंकि ऐसी गरमी और बीमारी की हालत में मेहमान का आना उसके लिए बड़ी मुसीबत होगी।

5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

• संवाद

• कथा

• वर्णन

• मंचन

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘संवाद’ तथा ★ ‘मंचन’ हैं।नाटक या एकांकी मुख्यतः पात्रों के संवादों से आगे बढ़ता है और मंच पर अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इसी एकांकी में भी पूरी कथा विश्वनाथ, रेवती, मेहमानों आदि के संवादों के माध्यम से ही खुलती है।

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (संकेत)यह कक्षा-गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी एकांकी के संवादों और घटनाओं से उदाहरण देते हुए अपने चुने उत्तर का कारण बताए।चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि एक ही प्रश्न के एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं और सबके तर्क सुनकर हमारी समझ और गहरी हो जाती है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियों का अर्थ नीचे दिया गया है।

1. “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

अर्थगरमी इतनी अधिक है कि बार-बार पानी पीने पर भी प्यास नहीं बुझती; पेट पानी से भर जाता है पर शरीर की तपन और प्यास ज्यों-की-त्यों बनी रहती है। यह पंक्ति गरमी की भीषणता को दर्शाती है।

2. “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

अर्थपूरे शहर में इतनी तेज गरमी और लू है, मानो आसमान से आग बरस रही हो। यह अतिशयोक्ति गरमी की तीव्रता को सजीव रूप से प्रकट करती है।

3. “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

अर्थगरीब लोग गरमी से बचने के लिए कहीं नहीं जा सकते और चने के समान भट्ठी (भाड़) में भुनते रहते हैं। इस पंक्ति में गरीबों की विवशता और भीषण गरमी की पीड़ा झलकती है।

4. “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

अर्थठंडा पानी पीते ही गरमी से व्याकुल व्यक्ति को राहत मिल जाती है, मानो उसमें फिर से जान आ गई हो। यह पंक्ति बताती है कि भीषण गरमी में पानी ही जीवनदायी है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के सही भाव से मिलाइए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भाव)
1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए।बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है।
2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।
3. माल-मसाला तो अंटी में है न?धनराशि सुरक्षित तो है न!
4. खाने में क्या देर-दार है।भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी।
5. पहले आत्मा फिर परमात्मा।पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम।
सही मिलान: 1 → समृद्ध व्यक्ति थे पर अब कुछ नहीं; 2 → कपड़ा पसीने से पुराने जैसा हो गया; 3 → धनराशि सुरक्षित तो है न!; 4 → भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी; 5 → पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम।

सोच-विचार के लिए

एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?

उत्तरनन्हेमल का आशय शहर के उन छोटे, तंग और बंद किराये के मकानों से है जिनमें आगे एक कमरा, पीछे छोटा आँगन और ऊपर एक छत होती है।इन मकानों में हवा कम आती है, जगह की कमी रहती है और गरमी असहनीय हो जाती है – ऐसे ही मकानों में शहर का अधिकांश मध्यवर्गीय परिवार रहता है।

(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तरपड़ोसी की शिकायत है कि विश्वनाथ के मेहमान उसकी छत पर गंदा पानी फैला देते हैं और पहले एक मेहमान उसकी खाट पर भी लेट गया था; उसे यह भी आपत्ति है कि इतने छोटे मकान में इतने मेहमान क्यों आते हैं।मेरे विचार से: उसकी कुछ चिंता (साफ-सफाई) उचित है, किंतु उसका व्यवहार मुख्यतः अनुचित है। वह अनजान आदमी से हुई छोटी-सी भूल पर भी बार-बार कठोरता दिखाता है और सहयोग के बजाय ताने मारता है। पड़ोसियों को आपसी समझ और सहनशीलता से काम लेना चाहिए। (विद्यार्थी अपना तर्क जोड़ें।)

(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?

उत्तरभारतीय संस्कृति में ‘अतिथि देवो भव’ की भावना है; घर आए व्यक्ति को लौटाना अशिष्टता माना जाता है।मेहमान विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ और ‘घर के ही’ कहकर इतने अपनेपन से बातें करते हैं कि वह संकोचवश साफ इनकार नहीं कर पाता।उसे यह भी आशंका रहती है कि कहीं ये सचमुच किसी परिचित के भेजे न हों, इसलिए वह उन्हें घर में आने और ठहरने देता है।

(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?

उत्तर(1) विश्वनाथ – “क्षमा कीजिएगा, आप कहाँ से पधारे हैं?” तथा “मैं संपतराम को नहीं जानता।”(2) रेवती – “ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।” विश्वनाथ – “न जाने कौन हैं।”(3) जिसके यहाँ जाना था उसका नाम, पता और काम मेहमानों को ठीक से याद नहीं – “नाम तो याद नहीं आता”, “कौन-सी गली में बताया था” आदि।(4) अंत में पता चलता है कि वे ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, विश्वनाथ के यहाँ नहीं। इन संवादों से स्पष्ट है कि वे विश्वनाथ के परिचित नहीं थे।

(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।

उत्तर(1) “ओफ, बड़ी गरमी है! … मकान है कि भट्टी!”(2) “पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी।”(3) “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”(4) “प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।” तथा “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”(5) “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।” – ये सभी वाक्य भीषण गरमी की ओर संकेत करते हैं।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने को कहता है तथा रेवती की अस्वस्थता देखकर भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?

उत्तरउस समय के सामाजिक परिवेश में रसोई और भोजन बनाने का कार्य प्रायः स्त्रियों का माना जाता था, इसलिए विश्वनाथ ने स्वयं खाना बनाने की बात नहीं सोची।यह उस युग की पारंपरिक सोच को दर्शाता है। आज का दृष्टिकोण बदल रहा है – घर के सभी सदस्य, चाहे स्त्री हो या पुरुष, मिलकर काम बाँट सकते हैं और बाँटना भी चाहिए। (विद्यार्थी अपने विचार जोड़ें।)

(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?

उत्तरप्रमोद घर का बड़ा बच्चा है, इसलिए माता-पिता उसे छोटे-मोटे उत्तरदायित्व सौंपते हैं ताकि वह जिम्मेदार बने।घर में नौकर नहीं टिकता और माता-पिता गरमी, बीमारी एवं मेहमानों में व्यस्त हैं, इसलिए बड़े बच्चे का सहयोग आवश्यक हो जाता है।ऐसे कार्यों से बच्चों में सेवा-भाव, अनुशासन और छोटे भाई-बहनों के प्रति स्नेह व जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

(ग) “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ।” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?

उत्तरआगंतुक रेवती का अपना भाई है, अतः उसके प्रति स्नेह और अपनापन स्वाभाविक है।वह अपने भाई को भूखा सोने नहीं देना चाहती – “भैया भूखे नहीं सो सकते” – यही ममता उसे थकान और सिरदर्द भुलाकर खाना बनाने को प्रेरित करती है।यह भारतीय परिवारों में अपने प्रियजनों के प्रति त्याग और आतिथ्य-भाव को दर्शाता है – जो अपनापन अपरिचित मेहमानों के लिए नहीं था, वह सगे भाई के लिए सहज ही उमड़ आता है।

(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं?

उत्तर (नमूना)
गरमी की भीषणतासर्दी की भीषणतावर्षा की भीषणता
1. यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में जम गया।यह वर्षा में भीग रहा है।
2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।पर रजाई भी कोई कहाँ तक ओढ़े।पर छाता भी कोई कहाँ तक थामे।
3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।सारे शहर में जैसे बर्फ़ जम रही हो।सारे शहर में जैसे आसमान फट पड़ा हो।
4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।ठिठुरन है कि मिटने का नाम नहीं लेती।बारिश है कि थमने का नाम नहीं लेती।
5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।चारों तरफ दीवारें ठंडी पड़ी हैं।चारों तरफ दीवारें सीली पड़ी हैं।

एकांकी की रचना

एकांकी एक प्रकार का नाटक है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है और किसी कहानी या घटना को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिए जाते हैं; कोष्ठक में दिए गए संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं और पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं।

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर (संकेत)(1) पूरी कथा एक ही स्थान (विश्वनाथ का घर) पर एक ही रात में घटित होती है।(2) कथा मुख्यतः संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।(3) आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिया गया है।(4) कोष्ठक में रंगमंच-निर्देश, अभिनय-संकेत और वेशभूषा संबंधी निर्देश हैं।(5) पात्रों की संख्या सीमित है तथा इसमें हास्य के साथ एक रोचक कहानी छिपी है।

(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ और जो सही नहीं लग रहे, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।

उत्तर
वाक्यहाँ/नहीं
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँ
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहीं
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँ
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहीं
5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहीं
6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँ
7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ

अभिनय की बारी

(क) यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?

उत्तर (संकेत)सबसे पहले पात्रों का चयन करूँगा – विश्वनाथ, रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल, प्रमोद, किरण, पड़ोसी और आगंतुक।मंच पर एक साधारण कमरा सजाऊँगा – मेज, दो कुर्सियाँ, एक पलंग/खाट और एक पंखा रखूँगा; पात्रों की वेशभूषा (कुरता-धोती, साड़ी, बंडी-पगड़ी आदि) तैयार करूँगा।रोचक बनाने के लिए गरमी का प्रभाव दिखाने हेतु पसीना पोंछना, पंखा झलना जैसे अभिनय और हल्का हास्य जोड़ूँगा; संवादों का अभ्यास कराऊँगा और प्रकाश-ध्वनि की व्यवस्था करूँगा। (विद्यार्थी अपने विचार जोड़ें।)

(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। कौन किस पात्र का अभिनय करेगा, यह तय कीजिए।

उत्तरयह व्यावहारिक समूह-गतिविधि है। विद्यार्थी आपस में पात्र बाँट लें, संवाद याद करें और शिक्षक द्वारा निर्धारित समय (जैसे 10–15 मिनट) में बारी-बारी से एकांकी का मंचन करें।स्थान की कमी हो तो अपने स्थान पर खड़े होकर भी संवाद बोले जा सकते हैं और चाहें तो अभिनय को रिकॉर्ड करके परिवार के साथ साझा किया जा सकता है।

भाषा की बात

शब्दों से विशेष प्रभाव

“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”, “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”, “चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।” – इन रेखांकित शब्दों जैसे और प्रयोग छाँटिए जो गरमी की प्रचंडता दर्शाते हैं।

उत्तर(1) “मकान है कि भट्टी!”(2) “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”(3) “इस जेलखाने में सड़ना होगा।”(4) “होंठ सूख रहे हैं” / “प्राण सूखे जा रहे हैं।” – ये सभी शब्द गरमी का तीव्र प्रभाव उत्पन्न करते हैं।

मुहावरे

“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”, “लाखों के आदमी खाक में मिल गए।” – एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके अर्थ लिखिए और अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।

उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
दिन-रात एक करनानिरंतर कठोर परिश्रम करनापरीक्षा में सफल होने के लिए मोहन ने दिन-रात एक कर दिया।
खाक में मिलनानष्ट हो जाना, बरबाद हो जानाआग लगने से व्यापारी का सारा माल खाक में मिल गया।
जान में जान आनाराहत/चैन मिलना, घबराहट दूर होनाबेटे का फोन आते ही माँ की जान में जान आई।
प्राण सूखनाबहुत भयभीत या व्याकुल हो जानाशेर को सामने देखकर सबके प्राण सूख गए।
आग बरसनाअत्यधिक गरमी पड़नाजेठ की दोपहर में मानो आसमान से आग बरस रही थी।

बात पर बल देना – ‘ही’ और ‘तो’ का प्रयोग

(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगें—

उत्तर1. विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे। (और किसी के अतिथि नहीं)2. विश्वनाथ के अतिथि यहीं रुकेंगे। (यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं)3. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही(यहाँ रुकना निश्चित है)

“तुम नहाने तो जाओ।” में ‘तो’ का स्थान बदलने पर अर्थ में परिवर्तन देखिए तथा ‘ही’/‘तो’ के और वाक्य बनाइए।

उत्तर“तुम तो नहाने जाओ” – इसमें ‘तुम’ पर बल है (तुम्हें तो जाना ही चाहिए)।“तुम नहाने जाओ तो” – इसमें शर्त/आग्रह का भाव है।और वाक्य: “मैं ही यह काम करूँगा।”, “पहले तुम पढ़ तो लो।” – इस प्रकार ‘ही’ निश्चय/सीमा पर बल देता है और ‘तो’ शर्त या विशेष भाव प्रकट करता है।

आपकी बात

(क) “रेवती – ये लोग कौन हैं? … विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।” इस संवाद से विश्वनाथ की दुविधा प्रकट होती है। क्या आपके सामने कभी ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है? अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर (संभावित)हाँ, एक बार मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि अपने मित्र की गलती मैं शिक्षक को बताऊँ या नहीं – बताने पर मित्रता बिगड़ने का डर था और न बताने पर सच छिपाने जैसा लगता था।अंत में मैंने मित्र को समझाकर स्वयं सच स्वीकार करने को कहा। ऐसी दुविधा में धैर्य से सोचना और बड़ों से सलाह लेना उचित रहता है। (विद्यार्थी अपना अनुभव लिखें।)

(ख) एकांकी से लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?

उत्तर (संभावित)मेरे अच्छे मित्र मेरे सहपाठी हैं, जो सुख-दुख में मेरा साथ देते हैं। वे मुझे इसलिए प्रिय हैं क्योंकि वे ईमानदार, सहयोगी और भरोसेमंद हैं तथा कठिनाई में मेरी मदद करते हैं। (विद्यार्थी अपने मित्रों के नाम व गुण लिखें।)

(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?

उत्तरजाने से पहले फोन/संदेश द्वारा उन्हें सूचित करता हूँ ताकि उन्हें असुविधा न हो; आवश्यक कपड़े और सामान व्यवस्थित कर लेता हूँ।यदि रुकना हो तो अपनी आवश्यक वस्तुएँ साथ ले जाता हूँ और छोटे बच्चों या बड़ों के लिए कुछ उपहार ले जाने का प्रयास करता हूँ, ताकि अनावश्यक रूप से मेजबान पर बोझ न पड़े।

(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?

उत्तरमैं अपने पड़ोसियों से मिल-जुलकर रहता हूँ; उनके बीमार या बाहर जाने पर उनके घर का ध्यान रखता हूँ।आवश्यकता पड़ने पर सामान, औज़ार या जानकारी साझा करता हूँ और किसी उत्सव या कठिनाई में उनकी मदद करता हूँ – इसी से पड़ोस में सद्भाव बना रहता है।

(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?

उत्तरअतिथियों को मेजबान के घर जाने से पहले सूचना देनी चाहिए और बिना बुलाए या गलत पते पर नहीं जाना चाहिए।उन्हें संयमित, विनम्र और संतोषी होना चाहिए – अनावश्यक माँगें न करें, मेजबान की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखें और कम-से-कम कष्ट दें। अतिथि का व्यवहार ऐसा हो कि उसका आना मेजबान को बोझ नहीं, प्रसन्नता लगे।

सावधानी और सुरक्षा

(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?

उत्तरमैं पहले द्वार पर ही उनसे उनका नाम, परिचय और आने का कारण विनम्रता से पूछता।यह जानने का प्रयास करता कि वे किसके भेजे हुए हैं और किसके यहाँ जाना चाहते हैं; संतुष्ट होने पर ही उन्हें भीतर आने देता। अनजान व्यक्ति को बिना जाँच-पड़ताल के घर में ठहराना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

उत्तरदरवाजा खोलने से पहले पहचान करूँगा और जंजीर/पीप-होल का उपयोग करूँगा।अपरिचित को घर के भीतर नहीं आने दूँगा; उसका नाम-काम पूछकर माता-पिता को फोन से सूचित करूँगा।किसी संदेह की स्थिति में पड़ोसी या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को बुला लूँगा और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को सूचना दूँगा। अपनी व घर की जानकारी अजनबी को नहीं दूँगा।

सृजन / पाठ से आगे

(सृजन) इस एकांकी में कही गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर (संकेत)गरमी की एक रात विश्वनाथ अपने छोटे, तपते घर में पत्नी रेवती और बच्चों के साथ सोने की तैयारी कर रहा था। तभी दो अनजान मेहमान, नन्हेमल और बाबूलाल, घर में आ धमके और स्वयं को परिचित बताकर पानी, नहाना और भोजन माँगने लगे।पूछताछ पर पता चला कि वे गलती से पड़ोस के कविराज वैद्य के बदले विश्वनाथ के घर चढ़ आए थे, और भूल समझकर चले गए। तभी रेवती का असली भाई आ पहुँचा, जिसके लिए वह थकान-सिरदर्द भूलकर खुशी-खुशी खाना बनाने को तैयार हो गई। (विद्यार्थी इसे विस्तार दें।)

(गरमी का प्रकोप) आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

उत्तरखूब पानी और तरल पदार्थ पिएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो; हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनें।दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें; सिर ढककर रखें और छाता/टोपी का उपयोग करें।घर को हवादार रखें, पेड़-पौधे लगाएँ और बासी या तला-भुना भोजन कम खाएँ। बीमार या बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

(तार से संदेश) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाइए कि यह एकांकी कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी? आजकल संदेश भेजने के कौन-से साधन सुलभ हैं?

उत्तरएकांकी में संदेश के लिए ‘तार’ (टेलीग्राफ) का प्रयोग हुआ है, जिसका अब प्रचलन समाप्त हो चुका है। इससे अनुमान लगता है कि यह एकांकी लगभग 70–80 वर्ष पहले (बीसवीं शताब्दी के मध्य में) लिखी गई होगी।आजकल संदेश भेजने के सुलभ साधन हैं – मोबाइल फोन, एस.एम.एस., ई-मेल, वीडियो कॉल तथा व्हाट्सऐप जैसे विभिन्न इंटरनेट-आधारित ऐप।

(नाप, तौल और मुद्राएँ) एक रुपये में कितने आने होते हैं? चार आने में कितने पैसे होते हैं? एक गज में कितनी फीट होती हैं?

उत्तरपुरानी मुद्रा में एक रुपये में 16 आने होते थे, और एक आने में 4 पैसे (पुराने) अर्थात् एक रुपये में 64 पुराने पैसे होते थे।चार आने = आधुनिक 25 पैसे (एक रुपये का चौथाई)।लंबाई में एक गज = 3 फीट (लगभग 0.9144 मीटर) होती है। ‘गज’ शब्द आज भी कपड़ा नापने के संदर्भ में प्रयोग होता है।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु / लघु उत्तरीय

1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?

उत्तरइसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं और इसकी विधा एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है।

2. एकांकी का दृश्य कहाँ और किस समय का है?

उत्तरदृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की रात लगभग आठ बजे का है, जो विश्वनाथ के छोटे किराये के मकान में घटित होता है।

3. विश्वनाथ के घर अनजाने में आए दोनों मेहमानों के क्या नाम हैं?

उत्तरदोनों मेहमानों के नाम नन्हेमल (बड़ा) और बाबूलाल (छोटा) हैं।

4. अंत में पता चलता है कि मेहमान वास्तव में किसके यहाँ जाना चाहते थे?

उत्तरवे वास्तव में पिछली गली में रहने वाले ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए थे।

5. रेवती अंत में अपने भाई के लिए खाना बनाने को तुरंत क्यों तैयार हो जाती है?

उत्तरआगंतुक उसका सगा भाई है; अपने भाई के प्रति स्नेह और इस भाव से कि “भैया भूखे नहीं सो सकते”, वह थकान और सिरदर्द भुलाकर खाना बनाने को तैयार हो जाती है।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘नए मेहमान’ एकांकी किस प्रकार शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरएकांकी में विश्वनाथ का परिवार किराये के छोटे, बंद और तपते मकान में रहता है, जहाँ हवा-पानी की कमी और भीषण गरमी से सब बेहाल हैं।मकान दो साल से ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलता, छत इतनी छोटी है कि बच्चे समा नहीं पाते और निर्दयी पड़ोसी जरा-सा सहयोग भी नहीं करता।नौकर नहीं टिकता, बीमारी का भय बना रहता है और ऊपर से अनचाहे मेहमान आ जाते हैं – जिनका सत्कार करना भी विवशता बन जाता है।इस प्रकार लेखक ने हास्य के साथ शहरी मध्यवर्गीय जीवन की आर्थिक तंगी, आवास-समस्या और सामाजिक दबावों को बड़े यथार्थपूर्ण ढंग से उजागर किया है।

7. इस एकांकी में भारतीय आतिथ्य-भाव किस रूप में प्रकट हुआ है? उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तरभारतीय संस्कृति में ‘अतिथि देवो भव’ की भावना है। विश्वनाथ अपरिचित मेहमानों को भी संकोचवश घर में आने और ठहरने देता है तथा उनके लिए पानी, बरफ और भोजन की व्यवस्था करने को कहता है।यद्यपि गरमी और बीमारी में यह कठिन है, फिर भी मेहमान को भूखा-प्यासा लौटाना उन्हें अशिष्ट लगता है।सबसे स्पष्ट उदाहरण अंत में मिलता है, जब रेवती सिरदर्द के बावजूद अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है। इस प्रकार एकांकी भारतीय परिवारों के सहज आतिथ्य और त्याग-भाव को दर्शाती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) उदयशंकर भट्ट

(ग) महादेवी वर्मा

(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

उत्तर(ख) उदयशंकर भट्ट।

2. विश्वनाथ की पत्नी का क्या नाम है?

(क) किरण

(ख) उषा

(ग) रेवती

(घ) महादेवी

उत्तर(ग) रेवती।

3. एकांकी में ‘यवनिका’ शब्द का क्या अर्थ है?

(क) रंगमंच का परदा

(ख) पात्र-परिचय

(ग) संवाद

(घ) पंखा

उत्तर(क) रंगमंच का परदा (परदा गिरने का अर्थ – दृश्य/एकांकी की समाप्ति)।

4. रेवती का भाई (आगंतुक) कहाँ से और किस माध्यम से सूचना भेजकर आया था?

(क) बिजनौर से, पत्र द्वारा

(ख) झाँसी से, तार द्वारा

(ग) मुरादाबाद से, फोन द्वारा

(घ) शिमला से, तार द्वारा

उत्तर(ख) झाँसी से, तार द्वारा (किंतु तार समय पर नहीं मिला)।

5. नन्हेमल और बाबूलाल कहाँ से आए थे?

(क) झाँसी

(ख) मुरादाबाद

(ग) बिजनौर

(घ) लखनऊ

उत्तर(ग) बिजनौर।

6. एकांकी की मुख्य पृष्ठभूमि (मौसम) क्या है?

(क) कड़ाके की सर्दी

(ख) मूसलाधार वर्षा

(ग) भीषण गरमी

(घ) सुहावना बसंत

उत्तर(ग) भीषण गरमी।

7. पड़ोसी की विश्वनाथ से मुख्य शिकायत क्या थी?

(क) तेज आवाज में रेडियो बजाना

(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर पानी फैलाना

(ग) किराया न देना

(घ) बच्चों का शोर मचाना

उत्तर(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर गंदा पानी फैलाना।

8. विश्वनाथ का बड़ा बेटा, जो मेहमानों के लिए पानी-बरफ लाता है, उसका नाम क्या है?

(क) प्रमोद

(ख) बाबूलाल

(ग) नन्हेमल

(घ) भैरों

उत्तर(क) प्रमोद।

9. किसी रचना को मुख्य रूप से नाटक/एकांकी का रूप कौन-सी बात देती है?

(क) वर्णन

(ख) संवाद एवं मंचन

(ग) लंबे अनुच्छेद

(घ) कविता

उत्तर(ख) संवाद एवं मंचन।

10. कोष्ठक में दिए गए अभिनय/स्थान-समय संबंधी संकेतों को क्या कहते हैं?

(क) संवाद

(ख) रंगमंच-निर्देश

(ग) पात्र-परिचय

(घ) सार

उत्तर(ख) रंगमंच-निर्देश।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(क), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ग), 7-(ख), 8-(क), 9-(ख), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): रेवती मन ही मन कामना करती है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए।

कारण (R): छोटे गरम मकान में जगह की कमी है और वह स्वयं भी बीमार एवं थकी हुई है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ के घनिष्ठ परिचित मित्र थे।

कारण (R): वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर बहुत अपनेपन से बातें करते थे।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है। वे केवल अपनेपन से बातें करते थे, परिचित बिलकुल नहीं थे – वस्तुतः वे गलत घर आ गए थे।

3. अभिकथन (A): रेवती अंत में अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है।

कारण (R): भाई के प्रति स्नेह के कारण वह थकान और सिरदर्द को भुला देती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): एकांकी की पूरी कथा एक ही स्थान और एक ही रात में घटित होती है।

कारण (R): एकांकी में केवल एक ही अंक होता है, जिसमें घटना संक्षेप में दिखाई जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): विश्वनाथ अपरिचित होने पर भी मेहमानों को घर से तुरंत नहीं निकालता।

कारण (R): भारतीय संस्कृति में अतिथि का सत्कार महत्त्वपूर्ण माना जाता है और संकोचवश वह इनकार नहीं कर पाता।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘नए मेहमान’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?

‘नए मेहमान’ एक एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है, जिसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं।

‘नए मेहमान’ एकांकी का मुख्य कथानक क्या है?

गरमी की एक रात विश्वनाथ के छोटे शहरी घर में दो अपरिचित मेहमान (नन्हेमल और बाबूलाल) गलती से चढ़ आते हैं। बाद में पता चलता है कि वे पड़ोस के कविराज वैद्य के यहाँ जाना चाहते थे। उनके जाते ही रेवती का असली भाई आ पहुँचता है।

इस एकांकी से क्या संदेश मिलता है?

यह एकांकी हास्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की आवास-समस्या एवं कठिनाइयों को उजागर करती है और भारतीय आतिथ्य-भाव (अतिथि देवो भव) तथा अपनों के प्रति स्नेह को दर्शाती है।

एकांकी में ‘रंगमंच-निर्देश’ और ‘संवाद’ क्या होते हैं?

कोष्ठक में दिए गए स्थान, समय एवं अभिनय संबंधी संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं, जबकि पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं। एकांकी की कथा मुख्यतः संवादों से ही आगे बढ़ती है।

प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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